Bantwara

बंटवारा

अजान का मौलिक अधिकार क्यों?

लल्लनटाप बताए कि देश के बंटवारे का आधार क्या है? अजान का अर्थ क्या है? 

~लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं। वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" से लगातार तीन दिन तक तथाकथित शांतिदूत मुसलमान यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है।

कश्मीरी पंडित कश्मीर से अल्पसंख्यक हैं या नहीं बाद में. अनुच्छेद २९(१) किसी भी वर्ग को लूट, बलात्कार, धर्मांतरक और हत्यारी संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया है कि जज मौलिक अधिकार मामले में सुनवाई नहीं कर सकते.

भासं का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयों और मुसलमानों को सनातनियों के हत्या का मौलिक अधिकार देता है. क्योंकि सनातनी जारज (जिसके बाप का पता न हो) ईसा को राजा स्वीकार नहीं करते और लुटेरे, बलात्कारी, धर्मांतरक और हत्यारे अल्लाह की पूजा नहीं करते. संविधान के अनुच्छेद २९(१) को ध्यान से पढ़िए. ईसाइयत और इस्लाम क्रमशः विश्व की सबसे बड़ी और दूसरी बड़ी संख्या हैं. फिर अल्पसंख्यक कैसे? इंडिया के ८ राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गया. सरकार ने घोषणा क्यों नहीं की?

मुसलमानों ने मजहबी आधार पर पाकिस्तान लिया और उसे इस्लामी देश बनाया है. गांधी ने आजादी दी है. जिंहें शरिया कानून चाहिए, इंडिया खाली कर दें. संविधान का अनुच्छेद २९(१) उंहें अपनी लूट, बलात्कार व हत्या की संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. मैं उपनिवेश मे क्यों रहूँ?  

मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

इंडिया में ५०० से अधिक भूभाग स्वतंत्र देश की मांग कर रहे हैं. कोई उपनिवेश से मुक्ति की मांग नहीं करता.

मुसलमान अजान क्यों देते हैं? 

अजान द्वारा काफिरों के लिए आज भी उपरोक्त संजय बहादुर की चेतावनी जारी है. अजान के विरोधी जेल जा रहे हैं. अजान देने वाले सरकार से वेतन और पुलिस से संरक्षण पा रहे हैं.

मुसलमानों ने कहा था कि वे अलग कौम हैं, हिंदुओं के साथ नहीं रह सकते. यह था बंटवारे का आधार. फिर मुसलमान इंडिया में क्यों हैं? मुसलमानों को इंडिया में रखना किसकी शाजिस है?

लल्लनटाप मेरे उत्तर से सहमत है या नहीं? मुझे इसके अलावा कुछ अन्य प्रश्नों के उत्तर चाहिए.

लल्लनटाप भासंविधान के अनुच्छेद पढ़े. 

इंडिया ब्रिटिश स्वतंत्र उपनिवेश है. निवासी ब्रिटिश कानूनों से शासित ब्रिटिश प्रजा हैं. संविधान के अनुच्छेद २५-३० व संविधान के अनुच्छेद २९(१) को ध्यान से पढ़ें. 

जिसने भी संविधान में आस्था व निष्ठा की या बनाए रखने की अथवा परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ ली है, उसे किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है. उसने उन मानव जाति के शत्रुओं को सनातन धर्म के समूल नाश का असीमित मजहबी, संवैधानिक, मौलिक अधिकार दे दिया है, जिन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| 

३९ग राज्यपाल सहित किसी को संपत्ति और उत्पादन के साधन रखने का अधिकार नहीं देते.

बंटवारा हुआ तो हमें क्या मिला?

२६ जनवरी, १९५० के थोपे गए भासंविधान की यह झलकी है. सनातनियों का हिस्सा कहां गया? सनातनियों की धरती पर केवल अल्लाह की पूजा क्यों होगी? जो अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा करेगा, क्यों कत्ल किया जाएगा? यह कैसा सर्वधर्म समभाव है?

जड़ को देखिए. बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ. मुसलमानों ने पाकिस्तान लिया और उसे इस्लामी राज्य बनाया. इंडिया में मुसलमानों को भासंविधान का अनुच्छेद २९(१) अपनी काफिर मिटाओ की संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार क्यों देता है?

सनातनियों को मूर्ख न बनाएं. भासं के अनुच्छेद ३००ए से मौलिक अधिकार होने के कारण अनुच्छेद २९ अधिक प्रभावी है. अनुच्छेद २९(१) तथाकथित अल्पसंख्यकों को अपनी लूट, बलात्कार, मंदिर तोड़ने, धर्मांतरण और हत्या की संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. सभी असहाय हैं.

इस्लाम के कुरान ८:३९ ने मानव जाति व धरती को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर व दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. अनुच्छेद २९(१). भासं का अनुच्छेद मुसलमानों को अपनी लूट, बलात्कार और हत्या की संस्कृति को बनाए रखने का मौलिक अधिकार देता है. हम सनातनी को नष्ट करने के लिए सभी संगठित हो चुके हैं. सन १८६० से कोई ईशनिंदक मुसलमान अभियुक्त नहीं बना. जब कि मुहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी रासुका मे जेल गए और उन पर करोड़ों ₹ का मौत का फतवा जारी है. अतः अजान (ईशनिंदक) को वेतन देने के साथ सरकार मुझे फांसी दे क्योंकि दिल्ली सरकार ने अजान का विरोध करने के कारण मुझ पर ५० अभियोग चलवाए हैं. 

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

मैं उपनिवेश मे क्यों रहूँ?  

मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है? 

चुनाव आसन्न हैं. तमाम लाभकारी घोषणाएं हुई हैं. लेकिन यह काफिरों के काम तभी आएंगी, जब काफिर जीवित बचेंगे. 

सरकार मुसलमानों को राजकोष से वेतन, तमाम अनुदान और पुलिस संरक्षण देकर सनातनियों की हत्या करा रही है.

मैं उपनिवेश और अजान मुक्त इंडिया के लिए युद्ध रत हूँ. जो काफिर अपना अस्तित्व चाहें, आर्यावर्त सरकार का सहयोग करें.

Comments