Bandhua Jj 14d15

IN THE COURT OF SH. SANDEEP GUPTA MM ROHINI DISTT. COURTS, DELHI

FIR No. 406/2003 u/s 153A PS NARELA DELHI.

FIR No. 166/2006 u/s 153A and 295A PS NARELA DELHI.

State Vs Ayodhya Prasad Tripathi and another

सुनवाई की तारीख़: जुलाई २८, २०१५.

मुख्य न्यायमूर्ति श्री दत्तू महोदय, सर्वोच्च न्यायालय. ११०००१

एलजी द्वारा दिए गए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति पर, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन विचाराधीन, उपरोक्त अभियोगों में पहले मेरे विरुद्ध NBW हुआ. फिर CrPC ८२ का आदेश और अब PO हूँ. आप एलिजाबेथ के उपयोगी बलिपशु हैं. प्रमाण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

1.    इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश (डोमिनियन) है| {{भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अ० ६(ब)(||)} व कामनवेल्थ मेम्बर} और आप एलिजाबेथ के दास. १५ अगस्त, १९४७ से स्वातन्त्रय युद्ध को अपराध बना दिया गया है. आप देश के विवश प्रधान न्यायाधीश हैं. क्योंकि आप उपनिवेश, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद और अज़ान का विरोध नहीं कर सकते. पाकपिता मोहनदास करमचन्द गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना, जवाहरलाल नेहरु खान, सरदार वल्लभ पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर में एक समानता थी| सभी बैरिस्टर थे| सभी को भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, का पूरा ज्ञान था| आक्रांता अंग्रेजों ने इस अधिनियम को हॉउस ऑफ कामन्स में सत्ता के हस्तांतरण के पूर्व १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत का दो उपनिवेशों (भारत तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को भारत बंट गया। तब से लेकर आज तक तमाम न्यायविद पैदा हुए और मर गए, लेकिन इस अधिनियम का किसी ने विरोध नहीं किया. अतः आप को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं! मुसलमान भी दार उल इस्लाम तो चाहता है लेकिन उपनिवेश से मुक्ति नहीं!

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

2.     मस्जिद से ईमाम/मुअज्ज़िन काफिरों के ईष्टदेवों की अज़ान द्वारा ईशनिंदा करता है. काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देता है. जज आप के हत्यारों को वेतन और हज अनुदान दिलाते हैं! दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ ने आप को अपमान सहने के लिए विवश कर रखा है. आप को तो नाबदान के पानी में डूब मरना चाहिए. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

3.    अंग्रेजों ने गुरुकुलों को नष्ट करने के बाद, २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी से मिलकर आप को एलिजाबेथ का दास बना दिया है| एलिजाबेथ ने आप को आपके अपने ही लोगों के जातिसंहार के लिए नियुक्त कराया है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन एलिजाबेथ के प्रतिनिधि व दास उप राज्यपाल के संस्तुति पर आप के उपरोक्त मातहत ने पद, प्रभुता और पेट के लोभ में स्वयं अपने ही सर्वनाश को सुनिश्चित करने के लिए हमको तबाह कर रखा है| हम ने बाबरी ढांचा गिराया है| हम ग्राहम स्टेन्स कांड, मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| हम मानवमात्र को इस्लाम और ईसाइयत व उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए धरती के प्रत्येक मनुष्य से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं| आप सहित हम इस्लाम और ईसाइयत से पीड़ित हैं| दोनों आतताई संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए सत्ता के दलालों ने ब्रिटिश राजा छठे जार्ज से साठ गांठ कर इंडिया में रोक रखा है| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी हमें कत्ल करेंगे| आत्म रक्षा हमारा भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत अधिकार है| हम अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों को हमारा उत्पीड़न करने का कोई अधिकार नहीं है| साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर

क्या आप को उपनिवेश से मुक्ति नहीं चाहिए? 

माउंटबेटन ने अपने देश और मजहब के लिए अपनी पत्नी एडविना को संयुक्त रूप से जवाहर और जिन्ना को सौंप दिया था. क्या आप स्वयं, देश, वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए ग्राहम स्टेन्स मामले के अभियुक्त दारा सिंह उर्फ रविंदर पाल सिंह, मेरे व मेरे मालेगांव के ९ सहयोगियों के अभियोग निरस्त नहीं करा सकते? मेरी प्रार्थना है कि आप विश्व के ५३ उपनिवेशों को एलिज़ाबेथ के चंगुल से मुक्त कराकर पुण्य अर्जित करें| आप की मुक्ति का मार्ग इस्लाम और ईसाइयत का समूल नाश है|

http://www.aryavrt.com/malegaon-ka-sach

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

http://www.aryavrt.com/babri-affidavits

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

4.    जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान व विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}| क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर मुसलमान और ईसाई को जजों सहित जनसेवकों व मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का अब्रह्मी संस्कृतियों को असीमित मौलिक अधिकार देता है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन जज, जनसेवक और जनता एलिजाबेथ के प्रतिनिधि राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं| जजों को डूब मरना चाहिए|

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

5.     मैं उपरोक्त कथन का परिणाम जानता हूँ. मुझे न तो मरने का भय है और न यातना का. क्यों कि मैं अमर हूँ. प्रमाण के लिए नीचे लिखा श्लोक पढ़ें:-

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-
न्यन्यानि संयाति नवानि देही ।।गीता २:२२।।

जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रोंको त्यागकर दूसरे नये वस्त्रोंको ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरोंको त्यागकर दूसरे नये शरीरोंको प्राप्त होता है ।।गीता २:२२।।

    जज साहब मेरी चिंता न करें – अपनी खैर मनाएं. वैदिक सनातन संस्कृति की चारो आधार शिलाएं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री नष्ट कर दी गई हैं. ईसाई के पास मुसलमान को कत्ल करने और मुसलमान के पास ईसाई को कत्ल करने का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. मानवजाति ही नष्ट होने के कगार पर है.

    6.     जज साहब! यह युद्ध मात्र मैं लड़ सकता हूँ. क्यों कि मुझे जीवन से मोह नहीं है, न प्रतारणा का भय है और न मेरे पास खोने के लिए कुछ बचा है.  यदि आप मानवजाति का व अपना भला चाहते हों तो मेरी सहायता कीजिए.

     (अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१)

    वर्तमान पता; मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड.

    CC to; BRITISH HIGH COMMISSIONER, President of India, PM NMO,

    Registration Number is : DARPG/E/2014/09542


    http://pgportal.gov.in

    यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

    सोमवार, 15 दिसम्बर 2014 य.

     

    ĉ
    AyodhyaP Tripathi,
    Dec 15, 2014, 5:55 AM
    Ċ
    AyodhyaP Tripathi,
    Dec 15, 2014, 5:53 AM
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