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जज बंधुआ कैसे?

किसी गैर-मुसलमान को जीने का अधिकार मुसलमान देता है और किसी उस व्यक्ति को जीने का अधिकार ईसाई  देता हैजो ईसा को अपना राजा नहीं मानता| फिर ‘स्वतंत्रता’ कैसे मिली यह पूछते ही या तो आप ईश निंदा में कत्ल हो जायेंगे या भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ अथवा २९५ में जेल में होंगे| जज तो राज्यपाल का बंधुआ मजदूर है| अपराधी वह हैजिसे सोनिया का मातहत राज्यपाल अपराधी माने|

आपराधिक केंद्र मस्जिद|

 पूरे अज़ान को नीचे पढ़ें और बताएं कि इनमे धार्मिक सद्भाव का शब्द कौन सा है? अज़ान मात्र मस्जिदों से ही लगाई जा सकती है|

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।

●  अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत, प्रेषित, संदेष्टा, नबी, Prophet) हैं।

●  हय्या अ़लस्-सलात (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।

●  हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।

●  अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बार, सिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में), अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार), अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।

अज़ान यद्यपि सामूहिक नमाज़ के लिए बुलावाहै, फिर भी इसमें एक बड़ी हिकमत यह भी निहित है कि विशुद्ध एकेश्वरवादकी निरंतर याद दिहानी होती रहे, इसका सार्वजनिक एलान होता रहे। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के ईशदूतत्व के, लगातारदिन प्रतिदिनएलान के साथ यह संकल्प ताज़ा होता रहे कि कोई भी मुसलमान (और पूरा मुस्लिम समाज) मनमानी जीवनशैली अपनाने के लिए आज़ाद नहीं है बल्कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के आदर्श के अनुसार एक सत्यनिष्ठ, नेक, ईशपरायण जीवन बिताना उसके लिए अनिवार्य है।

उपरोक्त अज़ान और नमाज़ में भारतीय संविधान प्रदत्त उपासना की आजादी नहीं है|

अज़ान के ये बोल 1400 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इंडिया में ही नहीं, पूरी दुनिया में नमाज़ियों को मस्जिद में बुलाने के लिए लगभग डेढ़ हज़ार साल से निरंतर यह आवाज़ लगाई जाती रही है। यह आवाज़ इस्लामी शरीअ़त के अनुसार, सिर्फ़ उसी वक़्त लगाई जा सकती है जब नमाज़ का निर्धारित समय गया हो। यह समय है:

सूर्योदय से घंटा-डेढ़ घंटा पहले।  (फ़ज्र की नमाज़)

दूपहर, सूरज ढलना शुरू होने के बाद। (जु़हर की नमाज़)

सूर्यास्त से लगभग डेढ़-दो घंटे पहले। (अस्र की नमाज़)

सूर्यास्त के तुरंत बाद।   (मग़रिब की नमाज़)

सूर्यास्त के लगभग दो घंटे बाद।  (इशा की नमाज़)

हमने बाबरी ढांचा पूर्व प्रधानमंत्री पूज्य श्री नरसिंहराव और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याणसिंह के आशीर्वाद से गिरवाया था| हम अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को धरती पर नहीं रहने देंगे| इस आशय के हमने सर्वोच्च न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, सीबीआई न्यायालय लखनऊ व रायबरेली और लिब्रहान आयोग को ६ शपथपत्र दिए थे, जो किसी भी न्यायालय के पत्रावली पर उपलब्ध नहीं हैं| फिर भी हमारी प्रेस को दी गई भेंटवार्ता की विडियो क्लिपिंग यूट्यूब पर नीचे की लिंक पर उपलब्ध है,

http://www|youtube|com/watch?v=yutaowqMtd8

बाबरी के लिए व्यथित लोग दया के पात्र हैं| यदि ईसाइयत और इस्लाम है, तो धरती पर मानव जाति  ही नहीं बचेगी! क्यों कि मुसलमान गैर-मुसलमान को कत्ल करेगा (कुरान :३९) और ईसाई जो ईसा को राजा माने, (बाइबल, लूका १९:२७), उसे कत्ल करेगा| इस प्रकार जो भी ईसाइयत और इस्लाम, बाइबल और कुरान और भारतीय संविधान का समर्थक है, मानवता का शत्रु है|

काबा हमारा ज्योतिर्लिंग है| (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८) अज़ान ईशनिंदा है| http://www.aryavrt.com/fatwa  मस्जिद सेनावास हैं और कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है| जिसकी काबा का नामांकन ही कामेश्वर महादेव मंदिर परिसर की ३५९ मूर्तियों को तोड़ने के बाद किया गया है, उन्हें बाबरी पर शोर मचाने का अधिकार भारतीय संविधान ने दिया है| वोट द्वारा भी इंडिया के नागरिक, सम्पत्ति पूँजी का अधिकार नहीं पा सकते| हम इस मानव मानवघाती भारतीय संविधान को निरस्त करना चाहते हैं|

मस्जिदों से ईमामों के खुत्बों को ध्यानपूर्वक सुनिए|

ईमामों को कुरान के आदेशों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की भी आवश्यकता नहीं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर आप के कर से प्राप्त १० अरब रुपयों में से वेतन लेकर ईमाम बदले में कुरान के सूरह अनफाल (८) की सभी मुसलमानों को सीधी शिक्षा देते हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). अज़ान द्वारा ईमाम स्पष्ट रूप से गैर-मुसलमानों को चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है| अल्लाह के आदेश से ईमाम कहता है, "काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं|" (कुरान ४:१०१). कुछ खुत्बे कुरान के सूरह अनफाल (८) में स्पष्ट दिए गए हैं| अल्लाह निश्चय रूप से कहता है कि उसने मुसलमानों को जिहाद के लिए पैदा किया है, "युद्ध (जिहाद) में लूटा हुआ माल, जिसमे नारियां भी शामिल हैं, अल्लाह और मुहम्मद का है|" (कुरान ८:१, ४१ व ६९). "जान लो जो भी माल लूट कर लाओ, उसका ८०% लूटने वाले का है| शेष २०% अल्लाह, मुहम्मद, ईमाम, खलीफा, मौलवी, राहगीर, यतीम, फकीर, जरूरतमंद आदि का है|" (कुरआन ८:४१). लूट ही अल्लाह यानी सत्य है| लूट में विश्वास करने वाले विश्वासी हैं| "गैर-मुसलमानों के गले काटो, उनके हर जोड़ पर वार करो और उनको असहाय कर दो| क्यों कि वे अल्लाह के विरोधी हैं," (कुरआन ८:१२). "जो भी अल्लाह और मुहम्मद के आदेशों का उल्लंघन करता है, वह जान ले कि अल्लाह बदला लेने में अत्यंत कठोर है|" (कुरआन ८:१३). "काफ़िर के लिए आग का दंड है|" (कुरआन ८:१४). "जब काफिरों से लड़ो तो पीठ न दिखाओ|" (कुरआन ८:१५). "तुमने नहीं कत्ल किया, बल्कि अल्लाह ने कत्ल किया|" (कुरआन ८:१७). "मुसलमानों को लड़ाई पर उभारो|" (कुरआन ८:६५). तब तक बंधक न बनाओ, जब तक कि धरती पर खून खराबा न कर लो| (कुरआन ८:६७). जो भी लूट का माल तुमने (मुसलमानों ने) प्राप्त किया है, उसे परम पवित्र मान कर खाओ| (कुरआन ८:६९). सत्य स्पष्ट है| काफिरों को आतंकित करने व समाप्त करने के लिए मुसलमानों में जोश पैदा करते हुए अल्लाह कहता है, “जब तुम काफिरों से लड़ो, तो उनको इस तरह परास्त करो कि आने वाले समय में उन्हें चेतावनी मिले| काफ़िर यह जान लें कि वे बच नहीं सकते| (कुरआन ८:६०). जो मुसलमान नहीं वह काफ़िर है| कत्ल से कुफ्र बुरा है (कुरान २:१९१). इस्लाम है तो काफ़िर कि मौत पक्की|

धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

उपरोक्त दोनों कथन संज्ञेय और दंडनीय अपराध हैं| कानूनों को नीचे उद्धृत करता हूँ:-

अध्याय 8

लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों के विषय में

153. बल्वा कराने के आशय से स्वैरिता से प्रकोपन देना--जो कोई अवैध बात के करने द्वारा किसी व्यक्ति को परिद्वेष से या स्वैरिता से प्रकोपित इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाएगा ; यदि बल्वा किया जाए--यदि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से,जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से,या दोनों से, और यदि बल्वा न किया जाए--यदि बल्वे का अपराध न किया जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से,जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

1[153. धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना--जो कोई--

()बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय या भाषायी या प्रादेशिक समूहों, जातियों या समुदायों के बीच असौहार्द्र अथवा शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं,धर्म, मूलवंश, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, भाषा, जाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगा, अथवा

() कोई ऐसा कार्य करेगा,जो विभिन्न धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और जो लोकप्रशान्ति में विघ्न डालता है या जिससे उसमें विघ्न पड़ना सम्भाव्य हो, 2[अथवा]

2[() कोई ऐसा अभ्यास, आन्दोलन, कवायद या अन्य वैसा ही क्रियाकलाप इस आशय से संचालित करेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे या यह सम्भाव्य जानते हुए संचालित करेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे अथवा ऐसे

1 1969 के अधिनियम सं0 35 की धारा 2 द्वारा पूर्ववर्ती धारा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

2 1972 के अधिनियम सं0 31 की धारा 2द्वारा अंतःस्थापित । भारतीय दंड संहिता, 1860 29

क्रियाकलाप में इस आशय से भाग लेगा कि किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए भाग लेगा कि ऐसे क्रियाकलाप में भाग लेने वाले व्यक्ति किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के विरुद्ध आपराधिक बल या हिंसा का प्रयोग करेंगे या प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे और ऐसे क्रियाकलाप से ऐसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्यों के बीच, चाहे किसी भी कारण से,भय या संत्रास या असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है या उत्पन्न होनी सम्भाव्य है,]

वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से,या दोनों से दंडित किया जाएगा ।

(2) पूजा के स्थान आदि में किया गया अपराध--जो कोई उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अपराध किसी पूजा के स्थान में या किसी जमाव में, जो धार्मिक पूजा या धार्मिक कर्म करने में लगा हुआ हो, करेगा, वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।]

1[153. राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान--(1) जो कोई बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा,--

() ऐसा कोई लांछन लगाएगा या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्ति इस कारण से कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा नहीं रख सकते या भारत की प्रभुता और अखंडता की मर्यादा नहीं बनाए रख सकते, अथवा

() यह प्राख्यान करेगा, परामर्श देगा, सलाह देगा, प्रचार करेगा या प्रकाशित करेगा कि किसी वर्ग के व्यक्तियों को इस कारण कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, भारत के नागरिक के रूप में उनके अधिकार न दिए जाएं या उन्हें उनसे वंचित किया जाए, अथवा

() किसी वर्ग के व्यक्तियों की,बाध्यता के संबंध में इस कारण कि वे किसी धार्मिक, मूलवंशीय, भाषायी या प्रादेशिक समूह या जाति या समुदाय के सदस्य हैं, कोई प्राख्यान करेगा, परामर्श देगा, अभिवाक्् करेगा या अपील करेगा अथवा प्रकाशित करेगा,और ऐसे प्राख्यान, परामर्श, अभिवाक्् या अपील से ऐसे सदस्यों तथा अन्य व्यक्तियों के बीच असामंजस्य,अथवा शत्रुता या घॄणा या वैमनस्य की भावनाएं उत्पन्न होती हैं या उत्पन्न होनी संभाव्य हैं,

वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से,अथवा दोनों से, दंडित किया जाएगा।

(2) जो कोई उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई अपराध किसी उपासना स्थल में या धार्मिक उपासना अथवा धार्मिक कर्म करने में लगे हुए किसी जमाव में करेगा वह कारावास से, जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।]

दंड प्रक्रिया संहिता

धारा १९६| राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – () कोई न्यायालय, - 

(क)  भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय के अधीन या धारा १५३(), धारा २९५() या धारा ५०५ की उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

(ख)  ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा

(ग)  भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८() में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं|

अथवा

(-) कोई न्यायालय, -

(क)         भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १५३() या धारा ५०५ की उपधारा () या उपधारा () के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

(ख)         ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति से ही करेगा, अन्यथा नहीं|

(ग)         उपरोक्त कानून अफजलों, कसाबों, बुखारियों आदि को कवच प्रदान करता है|

(घ)              यानी उपरोक्त धारा नागरिक, पुलिस और यहाँ तक कि जजों को भी मस्जिद से काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे और अज़ान देकर ईशनिंदा करने वाले ईमामों के अपराधों के विरुद्ध शिकायत करने के अधिकार से भी वंचित करती है! सोनिया द्वारा मनोनीत राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन अपराधी ईमामों का संरक्षण, संवर्धन और पोषण करने के लिए विवश है| सर्वोच्च न्यायालय खजाने से ईमामों को वेतन दिलवा चुकी है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). हज सहायता दिलवा रही है| Prafull Goradia vs UOI WP1 2011. न्यायपालिका ने कुरान व बाइबल को अभयदान दे रखा है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

राज्यपाल अज़ान देने वाले ईमाम के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं करते, लेकिन उपरोक्त तथ्यों का जो विरोध करता है, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत पुलिस द्वारा जेल भेज दिया जाता है, वह भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल या राष्ट्रपति की संस्तुति पर और जजों द्वारा तबाह कर दिया जाता है| मैं स्वयं ४२ बार अज़ान का विरोध करने के कारण हवालात काट चुका हूँ|

जज नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ १९७ के अधीन सोनिया के मनोनीत आतंकवादी और भ्रष्ट राज्यपालों द्वारा शासित हैं|

अपनी खैर मनाओ महामहिम उपराज्यपाल जी|

आप लोगों से राम राज्य का वादा किया गया था, सोनिया के रोम राज्य में रहते आप लोगों को लज्जा क्यों नहीं आती? ईमाम आप को गाली देता है| स्वयं दास है और आप की स्वतंत्रता छीनता है| क्या आप को नहीं मालूम कि संविधान ने आप को स्वतंत्रता का वचन दिया है? ईमामों को दंडित करने के स्थान पर सोनिया ईमामों को वेतन दिलवा रही है| वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! (एआईआर, एस सी १९९३, २०८६). जज शीघ्र ही कुमारी माताओं को इनाम देने का आदेश पारित करेंगे| संयुक्त राष्ट्र संघ इसका कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]

जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है| कुरान बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं| इस्लाम है तो काफ़िर नही| हम आप के लिए लड़ रहें हैं और आप लोग अपने सर्वनाश की जड़ चर्चों, मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं| ईश्वर से डरिये|

क्या आप ने सोचा कि मूसा से लेकर पाकपिता गाँधी तक यह कहते हुए क्यों नहीं आये कि उनका लक्ष्य आप को दास बनाना है? आज ही सही! मौलवियों और पादरियों से कहिये कि वे "ला इलाहलिल्लाहू दयाके बदले घोषित करें कि वे मानव मात्र को दास बनाना चाहते हैं|

हमारे वैदिक सनातन धर्म में कोई पाप क्षमा नहीं होता| दूसरे की धन-धरती लूटने, कत्ल करने और नारी बलात्कार की सुविधा नहीं है| हमारा ईश्वर आप को उपासना, सम्पत्ति और जीवन का अधिकार देता है| आप को दास नहीं बनाता| पशु-पक्षी तक को अपनी स्वतंत्रता प्रिय है| हम आप को धूर्त पैगम्बरों द्वारा छीना गयास्वतंत्रताका अनमोल रत्न वापस देना चाहते हैं|

पन्थनिरपेक्ष सोनिया वैदिक सनातन धर्म को मिटा रही है और आप की आर्यावर्त सरकार धर्म की स्थापना हेतु भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() मिटाएगी| किसके साथ हैं आप?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्य अज़ान खुत्बों को अपराध नहीं मानता| लेकिन अज़ान का विरोध करना भारतीय दंड संहिता की धारा २९५अ के अंतर्गत दंडनीय अपराध है| मेरे विरुद्ध उपरोक्त अभियोग मस्जिद, चर्च, ईसाइयत और इस्लाम, अज़ान, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण चल रहे हैं| उप राज्यपाल महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना की सरकार, वैदिक सनातन धर्म और आर्य जाति का, अपने संरक्षण में, भारतीय दंड संहिता की धारा २९५अ के अंतर्गत खूनी अल्लाह उसके इस्लाम द्वारा किये गए अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण देकर, विनाश करा रही है|

बिना राज्यपाल के संस्तुति के जज सुनवाई नहीं कर सकता| आम नागरिक शिकायत नहीं कर सकता| चूंकि इस कानून के बनने के बाद से आज तक किसी राज्य ने किसी मस्जिद या ईमाम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की  धारा २९५अ के अंतर्गत कोई अभियोग नहीं चलाया, अतएव सोनिया द्वारा मनोनीत उप राज्यपाल महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना का राज्य ईमामों मस्जिदों को संरक्षण देने का अपराधी है और सर्वोच्च न्यायालय ईमामों को वेतन दिलवाने का अपराधी| (एआईआर, एस सी १९९३, २०८६). सोनिया गैर-मुसलमान की हत्या कराने पर तुली हुई है| भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत आत्मरक्षा आप का अधिकार है|

टिप्पणी: एक धोबन का सेठ के मारने के कारण गर्भ गिर गया| धोबी ने मुकदमा किया| जज ने निर्णय दिया कि सेठ धोबन को गर्भवती कर के धोबी को वापस करे|

सोनिया को संविधान से अपनी संस्कृति को बनाये रखने का अधिकार है| उसे बनाये रखने की जजों ने शपथ ली है| सोनिया जजों का मांस खायेगी और लहू पिएगी| जज साहिब खुश हैं?

जो सरकार अपने संरक्षण में मंदिर तोड़वाती हो, आप के इष्ट देवताओं का अपमान कराती हो, आप की नारियों का बलात्कार कराती हो, धर्मान्तरण कराती हो और आप को आप की मातृभूमि से उजड़वाती हो, उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है| जो सरकार अपने जिलाधीश, पुलिस और सैनिक को नहीं बचा पा रही, आप को क्या बचायेगी? सोनिया के रोम राज्य को मिटाने में मदद दें|

१८३५ ई० तक मैकाले को पूरे इंडिया में एक भी भिखारी या चोर नहीं मिला क्यों कि तब वैदिक सनातन धर्म आधारित राजतंत्र था| पढ़ें मेरी पुस्तक ‘अज़ान’| हमारे ९ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं| मनुष्य के पुत्र का मांस खाने वाली और लहू पीने वाली सोनिया (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) द्वारा हम इसलिए सताए जा रहे हैं कि हम जानना चाहते हैं कि नारियों की लूट व उनके बलात्कार को निंदनीय न मानने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान ४:२४; २३:६; ३३:५० व ७०:३०). मुहम्मद की अपनी ही पुत्रवधू जैनब के साथ मुहम्मद का निकाह कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, ३३:३७-३८). लुटेरा व हत्यारा अल्लाह ईश्वर कैसे है? मूर्ति भंजन कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हत्या, लूट, बलात्कार, धर्मान्तरण और राष्ट्रांतरण की संहिता कुरान धर्मपुस्तक कैसे है?

अज़ान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| न मस्जिद से साम्प्रदायिक विद्वेष और वैमनस्य की शिक्षा देना ही उपरोक्त धाराओं के अधीन अपराध माना जाता है| लेकिन अज़ान, कुरान और मस्जिद का विरोध घोर अपराध है| अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी मस्जिदों में विष्फोट के अपराध में जेलों में हैं| प्रेसिडेंट व हर राज्यपाल ने अज़ान व मस्जिद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), पुलिस के संरक्षण और दंप्रसंकीधारा१९६ के कवच में रखा है| अज़ान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इसके विपरीत जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध कर रहा है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत जेल में ठूस दिया जा रहा है|

इंडिया के प्रत्येक नागरिक के पास ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने का भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ १०५ के अधीन कानूनी अधिकार है| लेकिन राज्य ही राज्य से लड़ सकता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना वैदिक सनातन धर्म के रक्षा के लिए की गई है| निर्णय इंडिया के नागरिकों के हाथ में है| क्या आप हम लोगों की सहायता करेंगे, ताकि सोनिया आप की सम्पत्ति व पूँजी आप से छीन ले, आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर लूट ले, आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार करा पाए और आप कत्ल हों? (बाइबल, याशयाह १३:१६). आर्यावर्त सरकार, यदि आप सहयोग करें तो, इन खूनी संस्कृतियों को धरती पर नहीं रहने देगी|

कुरान जलाने वाले को कत्ल करने वाले मुसलमान सरकार के संरक्षण में अज़ान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? १८६० से आज तक ईमामों के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई? जब कि इस्लाम व मस्जिद का विरोध करने के कारण हम प्रताड़ित हो रहे हैं| हमारे पूर्वजों से भूल हुई है| उन्होंने इस्लाम की हठधर्मी को मुसलमानों पर लागू नहीं किया| हर काफ़िर आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे| आर्यावर्त सरकार मुसलमानों की हठधर्मी मुसलमानों पर लागू करेगी| मुसलमान या तो इस्लाम छोड़ें या भारत| वैसे भी मुसलमानों ने हिंदुओं के साथ न रह पाने के आधार पर पाकिस्तान लिया है|

ईसाइयत और इस्लाम वैदिक सनातन धर्म और वैदिक राजतंत्र को स्वीकार नहीं कर सकते| अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं|

अहिंसासांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() के संरक्षण मेंईसाइयत इस्लाम - मिशन  जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो  जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| यदि आप पलटवार में आर्यावर्त सरकार को सहयोग नहीं देंगे तो मानव जाति ही मिट जायेगी| 

वस्तुतः हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार से जुड़े बागियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है| {(बाइबलउत्पत्ति :१७) (कुरान :३५)}| हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म सहित मानव जाति को मिटाने मानव मात्र को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है| इंडिया में मुसलमानों और ईसाइयों को इसलिए रोका गया है कि दोनों ने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| वैदिक सनातन संस्कृति मिटाना दोनों के लिए ईश्वरीय आदेश है| यदि आप अपनी, अपने देश अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान कोनिजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|

कोर्ट सोनिया से पूछे कि मस्जिदों के भडकाऊ अज़ान और खुत्बों पर ई० सन १८६० से आज तक कार्यवाही क्यों नहीं होती?

प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत उपकरण है| भारतीय संविधान ने उनको भ्रष्ट और आत्मघाती बना दिया है| जब संविधान ही लुटेरा हो तो कोई भी क्या कर लेगा? संविधान का अनुच्छेद ३९() व्यक्ति को सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं देता| इस अनुच्छेद को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता| जज नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ १९७ के अधीन राज्यपालों द्वारा शासित हैं|

मात्र ईसा मुक्तिदाता है और मात्र अल्लाह पूज्य| इनमें साम्प्रदायिक सद्भाव कहाँ है? (अज़ान व कुरान १७:८१). यदि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है, तो भारतीय संविधान की उद्देशिका में वर्णित उपासना की आजादी कहाँ है? यदि जो ईसा को राजा न माने उसे कत्ल कर दिया जाये (बाइबल, लूका १९:२७) तो भारत में लोकतंत्र कहाँ है? ईसा और अल्लाह दोनों ही भारतीय संविधान द्वारा संरक्षित और पोषित हैं|

भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है|

जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| मन्दिरों के चढ़ावों को लूट रहे हैं|

एक प्रमुख अंतर यह भी है कि जहां ईसाइयत और इस्लाम को अन्य संस्कृतियों को मिटाने में लंबा समय लगा वहीँ वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए २६ नवम्बर, १९४९ को संविधान बना कर ईसाइयत और इस्लाम के हाथों में सौँप दिया गया है|

 

 

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