Azaan Masjid Church aur Snvidhan

अजान, मस्जिद, चर्च और संविधान

कुटरचित और परभक्षी भारतीय संविधान अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए, ईसाइयों व मुसलमानों सहित देश के नागरिकों को किसान के पशु से भी निकृष्ट दास बनाकर लूटने और जो दास न बने उसे कत्ल करने के लिए संकलित किया गया है| किसी के पास जीवित रहने अथवा सम्पत्ति रखने का अधिकार नहीं है| न किसी नारी की मर्यादा सुरक्षित है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) की शर्त है,

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार|

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने और बनाये रखने की, जजों ने शपथ ली है, से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है? देखें:-

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग). जिन्हें देश, वैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए-हमारी सहायता करें.

सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं| सहयोग दीजिए और हम सोनिया को बंदी बना लेंगे| आमेर का खजाना, राजीव फौंडेशन और इंदिरा गाँधी सांस्कृतिक निधि का धन देश में वापस आ जायेगा. अर्जी मेरी मर्जी आप की.

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते थे| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, तब इराक व अफगानिस्तान की भांति मुसलमान भी मिटा दिए जायेंगे|

चुनाव धोखा है| इंडिया में गणतंत्र नहीं जेसुइट सोनिया केलिए, सोनिया द्वारा चुनागया सोनियातंत्र है| ईसाईयों व सोनिया सहित इंडिया के नागरिक ईसा की भेंड़े हैं| इंडिया के ईसाई व मुसलमान सहित किसी नागरिक के पासजीने का अधिकार है और पूँजी सम्पत्ति रखने का| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग). सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रनब का मनोनयन सोनिया ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं| फिर चुनाव की नौटंकी किसलिए? यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त? सुपर प्रधानमंत्री एंटोनिया माइनो उर्फ सोनिया गांधी को ईसा ने इंडिया को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है। भारतीय संविधान ने भी अनुच्छेद २९(१) द्वारा सोनिया को इंडिया में ईसा का राज्य स्थापित करने का मौलिक अधिकार २६ नवम्बर, १९४९ से ही दिया हुआ है। बाइबल के अनुसार अपने द्वितीय आगमन पर ईसा जेरूसलम में विश्व का राजा बन कर बैठेगा| वैदिक सनातन धर्म सहित सभी धर्मों और उनके अनुयायियों को नष्ट कर देगा और केवल अपनी पूजा करवाएगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची| न केवल उसी की पूजा हो सकी, अब ईसा और ईसाइयत की बारी है| चुनाव द्वारा भी कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

लोकसेवक दया के पात्र हैं| उन्होंने अपने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ ३९(). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान :१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:). इसके बदले में सोनिया के ईसा ने उनको बेटी (बाइबल , कोरिन्थिंस :३६) से विवाह का व अल्लाह ने पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दिया है| जहां भारतीय संविधान ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ लोकसेवकों को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है|

लोकसेवक केपास कोई विकल्प भी नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकारकरें, अपनी नारियों का अपनी आखोंके सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) कीदासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| उनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनियाके देशपर आधिपत्यको स्वीकारकरते ही आपहीनहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २५ देश के नागरिकों को दास बनने के लिए विवश करता है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का संवैधानिक अधिकार व घोषित कार्यक्रम है| दोनों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| अनु० २५ हर मुसलमान व ईसाई को अपने मजहब के अनुसार देश के नागरिकों को ईसा व मुहम्मद का दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का अधिकार देता है| हम इस भारतीय संविधान के उन्मूलन के लिए आप का सहयोग चाहते हैं| मैं संविधान के अनुच्छेद २५ को निम्नलिखित सरकारी पोर्टल से नीचे उद्धृत कर रहा हूँ:-

 http://hindi.webdunia.com/samayik/samvidhan/part_3.htm

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार

25. अंतःकरण की और धर्म की अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता--(1) लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्नय तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा।

इसी अधिकार के बल पर ईसाई व मुसलमान नागरिकों के इष्ट देवताओं की ईशनिंदा करते, उपासना स्थल तोड़ते, घड़ी-घंटा बजाने वालों पर आक्रमण करते और धर्मान्तरण करते  हैं| जब कि नीचे उल्लिखित अनुच्छेद ऐसे घृणित कार्यों की अनुमति नहीं देता|

26. धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता--लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्नय के अधीन रहते हुए, प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को --

(क) धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण का,

(ख) अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंध करने का,

(ग) जंगम और स्थावर संपत्ति के अर्जन और स्वामित्व का, और

(घ) ऐसी संपत्ति का विधि के अनुसार प्रशासन करने का, अधिकार होगा।

जेहोवा अथवा अल्लाह अपने किसी अनुयायी को धर्मान्तरण के अपराध में कत्ल करते हैं| इसका पूरा विवरण (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) और (कुरान ४:८९) में मिल जायेगा| सरकार ने ऐसे मिशनरियों और मौलवियों को धर्मान्तरण का अधिकार दिया है| वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए धर्मान्तरण को सरकार लोक व्यवस्था और सदाचार का संविधान के अनुच्छेद २६ के अधीन उल्लंघन नहीं मानती| हम जेहोवा और अल्लाह को आदर्श मान कर धर्मान्तरण, जो वस्तुतः दास बनाना है, करने वालों को मृत्यु दंड देना चाहते हैं| हम आतताई ईसाइयत और इस्लाम संस्कृतियों को मिटाने में आप का सहयोग चाहते हैं|

ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुए, अजान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता है, कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है| मस्जिदों से काफ़िरों के नरसंहार की शिक्षा देता है| राष्ट्रपति या राज्यपाल ईमाम के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं करते| पुलिस व प्रशासन अजान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकती, क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति, राज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं।  लेकिन जो अजान व मस्जिद का विरोध करता है, उसे भारतीय दंड संहिता की इन्हीं धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत पुलिस द्वारा बंदी बनाया व जजों द्वारा जेल भेज दिया जाता है, वह भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल या राष्ट्रपति की संस्तुति पर| मैं स्वयं ४२ बार अजान का विरोध करने के कारण हवालात काट चुका हूँ| इसे वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए संघ सरकार लोक व्यवस्था और सदाचार का भारतीय संविधान के अनुच्छेद २६ के अधीन उल्लंघन नहीं मानती| राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। फिर भी जनता द्वारा चुने गए किसी भी सरकार को गिरा देते हैं| इसी कारण सभी राज्यपाल व मुख्यमंत्री सोनिया के अधीन हो गए हैं|

http://www|aryavrt|com/fatwa

धार्मिक सद्भाव

जकात-सदकारोजाईमाननमाज और हज इस्‍लाम के स्तम्भ हैं। इस्लाम के धार्मिक सद्भाव की हवा निकालनी मानवता के हित में आवश्यक है. शहादा’ इस्लाम की पहली शर्त है और यही अजान नमाज की शुरुआत भी. मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर चिल्लाई जाने वाली अजान में ईमाम क्या कहते हैंउनके ही शब्दों में नीचे पढ़ें और बताएं कि इनमे धार्मिक सद्भाव का शब्द कौन सा है?:-

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार)अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार)अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्यउपास्य नहीं।

●  अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार)अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूतप्रेषितसंदेष्टानबी, Prophet) हैं।

●  हय्या अ़लस्-सलात (दो बार)अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।

●  हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार)अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।

●  अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बारसिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में)अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार)अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार)अर्थात् कोई पूज्यउपास्य नहींसिवाय अल्लाह के।

उपरोक्त अजान में सर्वधर्मसमभाव और अनेकता में एकता कहाँ हैईमाम ईशनिंदा क्यों करते हैं१८६० में भारतीय दंड संहिता बनी थीआज तक इमामों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंडित क्यों नहीं किया गया?

मस्जिदों से दिए जाने वाले ईमामों के खुतबों को ध्यानपूर्वक सुनिए.

ईमामों को कुरान के आदेशों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की भी आवश्यकता नहीं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर आप के कर से प्राप्त १० अरब रुपयों में से वेतन लेकर ईमाम बदले में कुरान के सूरह अनफाल (८) की सभी मुसलमानों को सीधी शिक्षा देते हैं. (एआईआरएससी१९९३प० २०८६). अजान द्वारा ईमाम स्पष्ट रूप से गैर-मुसलमानों को चेतावनी देते हैं कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. अल्लाह के आदेश से ईमाम कहता है, "काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं." (कुरान ४:१०१). कुछ खुतबे कुरान के सूरह अनफाल (८) में स्पष्ट दिए गए हैं. अल्लाह निश्चय रूप से कहता है कि उसने मुसलमानों को जिहाद के लिए पैदा किया है, "युद्ध (जिहाद) में लूटा हुआ मालजिसमे नारियां भी शामिल हैंअल्लाह और मुहम्मद का है." (कुरान ८:१४१ व ६९). "जान लो जो भी माल लूट कर लाओउसका ८०% लूटने वाले का है. शेष २०% अल्लाहमुहम्मदईमामखलीफामौलवीराहगीरयतीमफकीरजरूरतमंद आदि का है." (कुरआन ८:४१). लूट ही अल्लाह यानी सत्य है. लूट में विश्वास करने वाले विश्वासी हैं. "काफिरों के गले काटोउनके हर जोड़ पर वार करो और उनको असहाय कर दो. क्यों कि वे अल्लाह के विरोधी हैं," (कुरआन ८:१२). "जो भी अल्लाह और मुहम्मद के आदेशों का उल्लंघन करता है,वह जान ले कि अल्लाह बदला लेने में अत्यंत कठोर है." (कुरआन ८:१३). "काफ़िर के लिए आग का दंड है." (कुरआन ८:१४). "जब काफिरों से लड़ो तो पीठ न दिखाओ|" (कुरआन ८:१५). "तुमने नहीं कत्ल कियाबल्कि अल्लाह ने कत्ल किया." (कुरआन ८:१७). "मुसलमानों को लड़ाई पर उभारो." (कुरआन ८:६५). तब तक बंधक न बनाओजब तक कि धरती पर खून खराबा न कर लो. (कुरआन ८:६७). जो भी लूट का माल तुमने (मुसलमानों ने) प्राप्त किया हैउसे परम पवित्र मान कर खाओ. (कुरआन ८:६९). सत्य स्पष्ट है. काफिरों को आतंकित करने व समाप्त करने के लिए मुसलमानों में जोश पैदा करते हुए अल्लाह कहता है, “जब तुम काफिरों से लड़ोतो उनको इस तरह परास्त करो कि आने वाले समय में उन्हें चेतावनी मिले. काफ़िर यह जान लें कि वे बच नहीं सकते. (कुरआन ८:६०). जो मुसलमान नहीं वह काफ़िर हैकत्ल से कुफ्र बुरा है (कुरान २:१९१). इस्लाम है तो काफ़िर कि मौत पक्की|

धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरोंहत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था. (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें. अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे हैसोचें|

153. बल्वा कराने के आशय से स्वैरिता से प्रकोपन देना--जो कोई अवैध बात के करने द्वारा किसी व्यक्ति को परिद्वेष से या स्वैरिता से प्रकोपित इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाएगा यदि बल्वा किया जाए--यदि ऐसे प्रकोपन के परिणामस्वरूप बल्वे का अपराध किया जाएतो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास सेजिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगीया जुर्माने सेया दोनों सेऔर यदि बल्वा न किया जाए--यदि बल्वे का अपराध न किया जाएतो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास सेजिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगीया जुर्माने सेया दोनों सेदंडित किया जाएगा ।

1[153क. धर्ममूलवंशभाषाजन्म-स्थाननिवास-स्थानइत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना--जो कोई--

(क) बोले गए या लिखे गए शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा विभिन्न धार्मिकमूलवंशीय या भाषायी या प्रादेशिक समूहोंजातियों या समुदायों के बीच असौहार्द्र अथवा शत्रुताघॄणा या वैमनस्य की भावनाएंधर्ममूलवंशजन्म-स्थाननिवास-स्थानभाषाजाति या समुदाय के आधारों पर या अन्य किसी भी आधार पर संप्रवर्तित करेगा या संप्रवर्तित करने का प्रयत्न करेगाअथवा

(ख) कोई ऐसा कार्य करेगाजो विभिन्न धार्मिकमूलवंशीयभाषायी या प्रादेशिक समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है और जो लोकप्रशान्ति में विघ्न डालता है या जिससे उसमें विघ्न पड़ना सम्भाव्य हो,  

2[अथवा] ...

295. किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना--जो कोई किसी उपासना स्थान को या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा पवित्र मानी गई किसी वस्तु को नष्टनुकसानग्रस्त या अपवित्र इस आशय से करेगा कि किसी वर्ग के धर्म का तद्द्वारा अपमान किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए करेगा कि व्यक्तियों का कोई वर्ग ऐसे नाशनुकसान या अपवित्र किए जाने को वह अपने धर्म के प्रति अपमान समझेगावह दोनों में से किसी भांति के कारावास सेजिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगीया जुर्माने सेया दोनों सेदण्डित किया जाएगा ।

5[295क. विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों--जो कोई [भारत के नागरिकों के] किसी वर्ग की धार्मिक भावनओं को आहत करने के विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से उस वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान [उच्चारित या लिखित शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपणों द्वारा या अन्यथा] करेगा या करने का प्रयत्न करेगावह दोनों में से किसी भांति के कारावास सेजिसकी अवधि [तीन वर्ष] तक की हो सकेगीया जुर्माने सेया दोनों से दण्डित किया जाएगा ।]

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) जाति हिंसकबलात्कारी व दासता पोषक है. मै नीचे भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को उधृत करता हूँ:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग कोजिसकी अपनी विशेष भाषालिपि या संस्कृति हैउसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार.

धारा १९६. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – (१) कोई न्यायालय, - भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय ६ के अधीन या धारा १५३(क)धारा २९५(क) या धारा ५०५ की उपधारा (१) के अधीन दंडनीय किसी अपराध काअथवा ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र काअथवा भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८(क) में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण कासंज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा,अन्यथा नहीं. ....

कुरान पवित्र कैसे?

कुरान इस्लाम के तथाकथित अल्लाह के आदेशों का संग्रह है.

 ‘मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्यउपास्य नहीं।’ अतएव ईमान उपासना की दासता है. अजान ईश निंदा है. आप के उपासना की आजादी छीनने का इस्लाम को अधिकार किसने दिया है?

धार्मिक सद्भाव कहाँ है?

उपासना की स्वतंत्रता मात्र वैदिक सनातन धर्म में है|

"यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रध्यार्चितुमिच्छतितस्य तस्याचलां श्रधां तामेव विदधाम्यहम||"

जो जो भक्त जिस जिस देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करना चाहता हैउस-उस देवता के प्रति मै उसकी श्रद्धा को दृढ़ कर  देता हूँ| (गीता ७:२१)

अमेरिकीसंयुक्त राष्ट्र और भारतीय संविधान ने आप को उपासना की आजादी दी है. ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं. इसमें पवित्र क्या है?उपासना की आजादी कहाँ हैलूट व यौनसुख के ललक में मुसलमान स्वयं अल्लाह के दास बने हैं. मानव मात्र को दास बनाने के लिए ललकारते हैं. अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान करते मुसलमान को लज्जा इसलिए नहीं आती कि खतना करके उनको वीर्यहीन कर दिया जाता है. वीर्यवान सांड को बांधा भी नहीं जा सकता. वीर्यहीन होते ही वह बैल बन कर किसान के लिए अन्न पैदा करता हैजिसे किसान स्वयं खा जाता है और बैल को भूसा खिलाता है. क्यों कि वीर्य स्वतंत्रताओजतेज और स्मृति का जनक है.

वीर्य के रक्षा की शिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थीजिसे मैकाले ने मिटा दिया. गुरुकुलों की शिक्षा निःशुल्क होती थी| क्या आप गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में हमारी सहायता करेंगेक्या किसी गैर-मुसलमान ने सोचा कि मुहम्मद से लेकर पाकपिता गाँधी तक यह कहते हुए क्यों नहीं आये कि अपने अनुयायियों को स्वयं दास बनाकर मुहम्मद का लक्ष्य मानवमात्र  को शासकों का दास बनाना हैगैर-मुसलमान के इष्ट देवों और आस्था का अपमान करने वाली व उपासना की आजादी छीनने वाली अजान व इस्लाम को,आप सहयोग दें तो हम प्रतिबंधित कर देंगे..

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८). समाजवाद की आड़ में संघ सरकार ने सबकी सम्पत्ति और उत्पादन के साधन लूट लिए| अब लूटी हुई सम्पत्तियां विदेशियों के हाथों बिक रही हैं| लेकिन अभी भी उद्योगपतियों और व्यापारियों के पास सम्पत्ति है| उसे सोनिया की रोम सरकार एफडीआई लाकर लूट लेगी और विदेशियों के हाथों बेच देगी|

भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) न किसी का जीवन सुरक्षित है। (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  (बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व ३९(ग). किसी का उपासना गृह सुरक्षित नहीं। (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) (अजान व कुरआन १७:८१). आजादी नहीं भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व {भारतीय संविधान, अनुच्छेद ६ (ब)(।।)} आस्था की आजादी नहीं। (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) व (कुरान ४:८९). यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबल, लूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार है। यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है।

ऐसे ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन सोनिया के लिए लूट, हत्या और बलात्कार के संरक्षण हेतु चाकरी करने वाले राष्ट्रपति, प्रदेशों के राज्यपाल और भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले भ्रष्ट जज वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं|

| सम्पादक|

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AyodhyaP Tripathi,
Nov 29, 2012, 1:57 AM
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