Azaan aur Snvidhan

अजान और संविधान

मेरे ईमेल दिनांक २७-०७-२०१२ का जवाब आया है|

संदर्भ: पत्र संख्या ११०३४/२३/२०१२-एनएलआई भारत सरकार, गृह मंत्रालय (यचआर विभाग, एनएलआई खंड)

अ विंग, चौथा तल, एनडीडीसी भवन, {एस-२}, जय सिंह मार्ग, नई दिल्ली – ११०००१, दिनांक ५ नवम्बर,२०१२

महामहिम प्रणब दा!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २५, जिसकी आप की सरकार ने, अपने उत्तर में, देश के नागरिकों से, पवित्रता बनाये रखने की अपेक्षा की है, सबको दास बनने के लिए विवश करता है| हर हाल में हमें मुसलमानों द्वारा दी जाने वाली ईशनिंदा को स्वीकार करना और कत्ल हो जाना है. आप की सरकार के पत्र की स्कैन प्रति नीचे की लिंक पर देखें:-

http://www.aryavrt.com/azaan-uoi

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से अधिकार प्राप्त कर ईसाइयत इस्लाम मिशन जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल :३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का संवैधानिक अधिकार व घोषित कार्यक्रम है| दोनों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| 

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

चर्च से घोषणा की जाती है, “केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार हैजो ईसा का दास बने| (बाइबललूका १९:२७). स्वर्ग उन्हें ही मिलेगा, जो बपतिस्मा ले| क्या मानवमात्र से स्वराज्य का अधिकार छीनने वाले जारज और प्रेत ईसा को धरती पर रहने का अधिकार है?

उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है।

ईशु ने कहा, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७)

कौन है एलिजाबेथ?

उपनिवेशों की मल्लिका जेसुइट एलिजाबेथ ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै उनकी आयु का विचार करूंगी, लिंग का, परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

अमेरिका आज भी हैलेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गईइंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है| एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगीआप का मांस खाएगी और लहू पीयेगी| (बाइबलयूहन्ना ६:५३). इंडिया तो रहेगालेकिन वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगेयदि रहेंगे भी तो ईसाई दास बन कर| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहींबचना हो तो अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजियेयह युद्ध मात्र हम लड़ सकते हैंचर्चों व मस्जिदों से ईसाई व मुसलमान को वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती हैअतएव चर्च व मस्जिद नष्ट करना भारतीय दंड संहिता के धारा १०२ के अधीन सबका कानूनी अधिकार हैहमने बाबरी ढांचा गिराया हैहम मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के अभियुक्त हैंहमारे ९ अधिकारी २००८ से जेलों में बंद हैंजिन लोगों को अपना जीवनअपनी स्वतंत्रता और अपनी नारियों का और अपना सम्मान चाहिएवे हमे सहयोग दें तो हम अब्रह्मी संस्कृतियों को नहीं रहने देंगे|

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

"नेटिव" (आदिम) शब्द का प्रयोग "नियम रहित निम्नस्तर जाति" जिनका भाग्य ही श्वेतों द्वारा शासित होता हैके अपमानजनक अर्थ में होने लगा है और आज भी जारी है। शासित देश (उपनिवेश) में लोकसेवकों के माध्यम से शासन होता रहा है।

रुडयार्ड किपलिंग जैसे लोगों ने वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी आदिमों पर शासन करने हेतु "श्वेतों का उत्तरदायित्व" के रूप में एक पुराणरूढ़ दर्शन (मिथ्) ही प्रस्तुत कर लिया है. इंडियन उपनिवेश के तो राष्ट्रगान के अनुसार ही एलिजाबेथ आज भी हम उपनिवेशवासियों की अधिनायक और भाग्य विधाता है.

हम तथाकथित आदिम वैदिक पंथियों के अंदर बहुत सारी कमियां हैं. हमारे शासक माउंटबेटन की भांति अपने नारियों के वेश्यालय नहीं चलाते. हम सहजीवन से घृणा करते हैं|

सभ्य ईसाइयों के यहाँ कुमारी माएं प्रायः घर घर मिलती हैं| बेटी व पुत्रवधू से विवाह, सहजीवन व समलैंगिक मैथुन और सगोत्रीय विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है| बारमें दारू पीने वाली बालाओं का सम्मान हो रहा है! विवाह सम्बन्ध अब बेमानी हो चुके हैं| जजों ने लव जेहाद, सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| एलिजाबेथ के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौनशिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही सभ्य? अमेरिका की भांति इंडिया के विद्यालयों में गर्भनिरोधक गोलियां बांटी जाएँगी| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| उज्ज्वला - नारायण दत्त तिवारी और आरुषि - हेमराज में जजों के फैसलों ने आने वाले समाज की दिशा निर्धारित कर दी है| हालात इतने गम्भीर हैं कि आप अपनी पत्नी, बहन या बेटी को व्यभिचार करने से रोक नहीं सकते| आप अपनी संतानों को ब्रह्मचारी बनाने की बात सोच नहीं सकते|

हमारे आदिम इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| जबकि ब्रिटेन और अमेरिका में कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भनिरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| इससे वीर्यहीनता के प्रसार और भेंड़ बनाने में एलिजाबेथ को कठिनाई हो रही है

हम आदिम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह नहीं करते और न पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करते हैं| हमारा ईश्वर धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग नहीं देता| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०). सभ्य मूसा और मुहम्मद की छलरचनाओं जेहोवा और अल्लाह ने अपने सभ्य अनुयायियों को ऐसे ही अधिकार दिये हैं

हमारे पूर्वज इंजीलवादी ईसाई व लुटेरे मुसलमान द्वारा कत्ल किये गए और नारियों का बलात्कार किया गया| अब आप अपने अपमान कर्ता उन्हीं असभ्य विश्वासी मजहबों के बचाव का अपराध कर रहे हैं| हम वैदिक पंथी अपने पूर्वजों के हत्यारे मजहबों के प्रति निष्ठावान या आभारी नहीं हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) की शर्त और संरक्षण में वे हमारी हत्या व धर्मांतरण की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं| 

कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद और असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार है|

आप, उपनिवेशवासी, जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल मस्जिदों से प्रसारित की जाने वाली अज़ान और खुत्बों को सुन कर लज्जित नहीं होते. इतना ही नहीं - जो ईमाम मस्जिदों से काफ़िर उपनिवेशवासियों के गरिमा का हनन करते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, काफिरों के नरसंहार की और काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). न्यायपालिका ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) भी दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/ ).

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj16w33y-swatantrta-divas

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

मस्जिदों से ईमाम और मौलवी मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि काफिरों को कत्ल कर दो| 

इतना ही नहींमस्जिद से ही इस्लामी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तानी मौलिक धर्मतंत्री सैयद अबुल आला मौदूदी ने घोषित किया है कि इस्लाम विश्व की पूरी धरती चाहता है  उसका कोई भूभाग नहीं, बल्कि पूरा ग्रह  इसलिए नहीं कि ग्रह पर इस्लाम की सार्वभौमिकता के लिए तमाम देशों को आक्रमण कर छीन लिया जाये बल्कि इसलिए कि मानव जाति को इस्लाम से, जो कि मानव मात्र के सुख-समृद्धि(?) का कार्यक्रम है, लाभ हो|

मौदूदी जोर दे कर कहता है कि यद्यपि काफ़िर झूठे मानव निर्मित मजहबों को मानने के लिए स्वतन्त्र हैं, तथापि उनके पास अल्लाह के धरती के किसी भाग पर अपनी मनुष्य निर्मित गलत धारणा की हुकूमत चलाने का कोई अधिकार नहीं| यदि वे (काफ़िर) ऐसा करते हैं, तो मुसलमानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे काफिरों की राजनैतिक शक्ति छीन लें और उनको (काफिरों को) इस्लामी तौर तरीके से जीने के लिए विवश करें|

दोनों को अपनी आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वह कानून बता दीजिए, जो हमें वैदिक सनातन संस्कृति को बनाये रखने का अधिकार देता हो?

स्वयं बताइए कि हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी जीवित कैसे बचेंगे?

अनु० २५ हर मुसलमान व ईसाई को अपने मजहब के अनुसार देश के नागरिकों को ईसा व मुहम्मद का दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का अधिकार देता है| आप ने इसी संविधान और विधि के परिरक्षणसंरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ ली है और नागरिकों से अपेक्षा करते हैं कि वे इसी भारतीय संविधान की पवित्रता बनाये रखें| मैं संविधान के अनुच्छेद २५ को निम्नलिखित सरकारी पोर्टल से नीचे उद्धृत कर रहा हूँ:-

http://hindi.webdunia.com/samayik/samvidhan/part_3.htm

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार

25. अंतःकरण की और धर्म की अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता--(1) लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्नय तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा।

26. धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता--लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्नय के अधीन रहते हुए, प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को --

(क) धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण का,

(ख) अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंध करने का,

(ग) जंगम और स्थावर संपत्ति के अर्जन और स्वामित्व का, और

(घ) ऐसी संपत्ति का विधि के अनुसार प्रशासन करने का, अधिकार होगा।

आप एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत दया के पात्र मातहत हैं| आप ने इंडिया के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के समक्ष वचन दिया है, 'मैं प्रणब मुखर्जी, ईश्वर की शपथ लेता/ सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ कि मैं श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों का निर्वहन सत्यनिष्ठा से करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षणसंरक्षण और प्रतिरक्षण करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा।'

बाइबल के अनुसार अपने द्वितीय आगमन पर ईसा जेरूसलम में विश्व का राजा बन कर बैठेगा| वैदिक सनातन धर्म सहित सभी धर्मों और उनके अनुयायियों को नष्ट कर देगा और केवल अपनी पूजा करवाएगा| क्या बताएंगे कि नागरिकों के उपासना की आजादी का क्या हुआ? हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची| न केवल उसी की पूजा हो सकी, अब ईसा और ईसाइयत की बारी है| चुनाव द्वारा भी कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

http://www.aryavrt.com/bible-armageddon-verses

जेहोवा अथवा अल्लाह अपने किसी अनुयायी को धर्मान्तरण के अपराध में कत्ल करते हैं| इसका पूरा विवरण (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) और (कुरान ४:८९) में मिल जायेगा| मुझे आप बताएं कि एलिजाबेथ ने मिशनरियों और मौलवियों को धर्मान्तरण का अधिकार क्यों दिया है? इसे सरकार लोक व्यवस्था और सदाचार का संविधान के अनुच्छेद २६ के अधीन उल्लंघन क्यों नहीं मानती?

राज्यपाल मस्जिदों से अजान व कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमाम के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं करते, लेकिन जो अजान व मस्जिद का विरोध करता है, उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत पुलिस द्वारा जेल भेज दिया जाता है, वह भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल या राष्ट्रपति की संस्तुति पर. अज़ान और मस्जिद का विरोधी जजों द्वारा तबाह कर दिया जाता है| क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति, राज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। संरक्षण देने के लिए आप और राज्यपाल क्रमशः अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेने के कारण विवश हैं| मैं स्वयं ४२ बार अजान का विरोध करने के कारण हवालात काट चुका हूँ| इसे संघ सरकार लोक व्यवस्था और सदाचार का भारतीय संविधान के अनुच्छेद २६ के अधीन उल्लंघन क्यों नहीं मान रही है?


मस्जिदों से प्रसारित की जाने वाली अज़ान ईशनिंदा है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

अज़ान में साम्प्रदायिक सद्भाव कहाँ है? (अज़ान व कुरान १७:८१). यदि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती हैतो भारतीय संविधान की उद्देशिका में वर्णित उपासना की स्वतंत्रता कहाँ है?

भारतीय संविधान सबको दास बनाकर लूटने और जो दास न बने उसे कत्ल करने के लिए संकलित किया गया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद(१) की शर्त है,

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९()- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) भाग मौलिक अधिकार|

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकते थे| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! ( आई आर १९५१ एस सी ४५८). समाजवाद की आड़ में संघ सरकार ने सबकी सम्पत्ति और उत्पादन के साधन लूट लिए| अब लूटी हुई सम्पत्तियां विदेशियों के हाथों बिक रही हैं| लेकिन अभी भी उद्योगपतियों और व्यापारियों के पास सम्पत्ति है| उसे एलिजाबेथ के उपनिवेश की सरकार एफडीआई लाकर लूट लेगी और विदेशियों के हाथों बेच देगी|

भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) न किसी का जीवन सुरक्षित है। (बाइबललूका १९:२७) व (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  (बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व ३९(ग). किसी का उपासना गृह सुरक्षित नहीं। (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३) (अजान व कुरआन १७:८१). आजादी नहीं भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व {भारतीय संविधान, अनुच्छेद ६ (ब)(।।)} आस्था की आजादी नहीं। (व्यवस्था विवरण, १३:६-११) व (कुरान ४:८९). यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबललूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार है। यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। यह लोग एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत किए जा रहे हैं|

आप विकल्पहीन व दया के पात्र हैं| या तो स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| आप के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| आप संविधान के दास हैं| कुछ नहीं कर सकते| आप सहयोग दें तो ऐसे भारतीय संविधान को आर्यावर्त सरकार रद्द करेगी| सम्पादक|
 
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AyodhyaP Tripathi,
Jun 26, 2013, 7:39 PM
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