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अस्तित्व का संकट

     रोनाल्ड रीगन ने कहा था, “स्वतंत्रता के अस्तित्व को मिटने में एक पीढ़ी से अधिक का समय नहीं लगता| इसे हम अपने संतानों के रक्त में प्रवाहित नहीं करते| स्वतंत्रता के लिए लड़ना और इसे सुरक्षित कर भावी पीढ़ी को लड़ने के लिए देना पड़ता है|”            

इंडिया को तो कभी स्वतंत्रता मिली ही नहीं! आक्रांता अंग्रेजों ने भारत को अपनी सम्पत्ति मानकर दो उपनिवेश इंडिया और पाकिस्तान बनाये. जिनका अंग्रेजों को न अधिकार था और न है. लेकिन उपनिवेश का आजतक किसी ने विरोध नहीं किया! क्या आप अपनी स्वतंत्रता के लिए मेरी गुप्त सहायता करेंगे?

हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्रका जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

२०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्रका जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

फिरभी सन १९४७ के सत्ता हस्तान्तरण के बाद से ही उपनिवेशवासी १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने के लिए विवश हैं. उपनिवेशवासियों के स्वतंत्रता के युद्ध का ही एलिजाबेथ ने अपहरण कर लिया है. एलिजाबेथ धोखा देना छोड़े. १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस की नौटंकी के स्थान पर स्पष्ट घोषित करे कि उपनिवेशवासी उसके स्थायी बलिपशु हैं. उपनिवेशवासियों को कत्ल करना, उनका मांस खाना और लहू पीना उस का संवैधानिक असीमित मौलिक मजहबी अधिकार है. 

इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ देश आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं. उपनिवेशवासी डायन जेसुइट एलिजाबेथ के दास हैं. दास के पास अधिकार नहीं होते. २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द (गांधी) और माउंटबेटन के बीच समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान व ईसाई सहित सभी उपनिवेशवासियों का सब कुछ एलिजाबेथ का ही है. उपनिवेशवासियों की स्थिति किसान के पशु की भांति है, जिसका कुछ भी नहीं होता! यदि इंडिया आगे भी एलिजाबेथ का उपनिवेश बना रहा तो एलिजाबेथ उपनिवेशवासियों को कत्ल करेगी (बाइबल, लूका १९:२७) उनका मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). उपनिवेशवासियों के नारियों का उनके पुरुषों के आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६). वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से. उपनिवेशवासी कुछ न कर पायेंगे! विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

मनुष्य अपने असली शत्रु को पहचानें

ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो मूसा, मुहम्मद, शासक व पुरोहित हैं. एलिजाबेथ भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और (बाइबल, लूका १९:२७) के सहयोग से मानवजाति के विरुद्ध छद्म युद्ध लड़ रही है. उसने इंडिया सहित ५३ देशो को अपना उपनिवेश बना कर ईसा का राज्य स्थापित कर रखा है.  फिरभी संतुष्ट नहीं है, क्यों कि १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई, लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति के अवशेष अभी भी बाकी हैं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

क्या ईसाईयों व मुसलमानों ने कभी सोचा?

पैगम्बरों द्वारा मानवजाति अपने शक्ति के मूल स्रोत से ही काट दी गई है. 

परब्रह्म मानवमात्र को हिंदू, यहूदीईसाई और मुसलमान में नहीं बाँटता. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है

जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) सम्प्रभु मनुष्य को वीर्यहीन कर अधीन करने वाले इन संस्कृतियों को बनाये रखने का संवैधानिक असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ} और प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदान} करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं

प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वाराउसके जन्म के साथ ही दिया गया ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्यओज, तेज और स्मृति का जनकअष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमानसर्वज्ञसर्व-व्याप्तवीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, वह शक्ति है, जिससे सब कुछयहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता हैमनुष्य की छोड़ियेवीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता हैवीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों और शक्तिवान का दास ही बन सकता हैस्वतन्त्र नहीं रह सकतावीर्य का जितना अधिक संचय होगा  मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगाविवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 http://www.aryavrt.com/

 अब्रह्मी संस्कृतियों के तथाकथित धूर्त पैगम्बरों मूसा और मोहम्मद ने, जेहोवा और अल्लाह के आड़ में मनुष्य के शक्ति पुंज इसी वीर्य को एन केन प्रकारेण नष्ट करना, वह भी विश्वास के आधार पर, मजहब का अपरिहार्य कर्म बना करमनुष्य को किसान के बैल की भांति, दास बनाने का घृणित अपराध किया हैईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो जेहोवा व अल्लाह को गढ़ने वाले पैगम्बर और उनके उत्तराधिकारी शासक और पुरोहित हैं. 

सत्ता के हस्तानान्तरण की पहली शर्त ही इस्लाम का दोहन है. इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रहीइसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से ईसाई स्वयं नहीं लड़ सकतेइसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैंहिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है|

मुसलमान तभी तक जीवित हैं  जब तक वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिटी, तुर्की के खलीफा,  ईराक के सद्दाम और अफगानिस्तान के भांति इस्लाम मिट जायेगा और अल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा| लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होगी| तब मानवजाति को मिटाने के लिए कथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट आदि के बीच युद्ध होगा| हिम्मत हो तो वे उपनिवेश से मुक्ति हेतु आर्यावर्त सरकार का सहयोग करें|

वस्तुतः वैदिक सनातन संस्कृति को मिटा कर मुसलमान अपना ही अहित करेंगे| उनका हज अनुदान, मुअज्जिनों, इमामों व मौलवियों का वेतन बंद हो जायेगा| स्कूलों के उर्दू शिक्षकों का पद समाप्त हो जायेगा. मकतबों का अनुदान समाप्त हो जायेगा. उनका वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग और मुस्लिम निजी कानून भी बेमानी हो जायेगा| उनको फिरभी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति नहीं मिलेगी| जब मुसलमानों की कवच वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी  तब ईसाई व मुसलमान भी मिटा दिए जायेंगे. न अल्लाह मिलेगा और न विशाले सनम| बेचारे मुसलमान (कुरान २:३५).

येहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद की छलरचनायें हैं| इनका अस्तित्व नहीं है. येहोवा और अल्लाह कीं रचना मनुष्य को खतना अथवा यौनाचार की छूट द्वारा वीर्यहीन कर दास बनाने के लिए की गई है. जहाँ वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों में निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मैकाले के स्कूल महंगी यौनशिक्षा देते हैं और मकतब कत्ल करने और नारी बलात्कार की| जीवन, धन और सुख की मृग मरीचिका में मनुष्य विरोध नहीं करते. मनुष्य की मुक्ति का मार्ग, गुरुकुलों का पुनर्जीवन है|

मूसा (बाइबलउत्पत्ति १७:११) और मुहम्मद ने वीर्य हीनता को मानवजाति के सर्वनाश के स्तर तक महिमामंडित कर दिया है. अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूजनीय है और ईसा यहोवा का घोषित एकलौता पुत्र हैमानवमात्र को पापी घोषित कर रखा है. स्वयं शूली पर चढ़ने से न बचा सका फिर भी सबका मुक्तिदाता है|

जिसके आराध्यदेव ईसा के बाप का ही पता नहीं है, जिसके मजहब के घर-घर में कुमारी माताएं मिलती हैं और जो स्वयं जार्ज यानी जारज (जिसके बाप का पता नहीं होता, उसे जारज कहते है) है वह आप के संतों को रोज यौन शोषण में प्रताड़ित करा रही है| आइये आतताई मजहबों अब्रह्मी संस्कृतियों के संरक्षक भारतीय संविधान को मिटायें|

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकताईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं? धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या|

तस्यां हिरण्ययः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः||

अथर्ववेद;१०.२.३१.

अर्थ - (अष्टचक्रा, नव द्वारा अयोध्या देवानां पूः) आठ चक्र और नौ द्वारों वाली अयोध्या देवों की पुरी है, (तस्यां हिरण्ययः कोशः) उसमें प्रकाश वाला कोष है , (स्वर्गः ज्योतिषा आवृतः) जो आनन्द और प्रकाश से युक्त है|

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, पाकिस्तान जिसकी लाश पर बन सकता था, ने हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का अपहरण कर लिया. मात्र हम ही नहीं! ५३ देशों के उपनिवेशवासी आज भी ब्रिटिश उपनिवेश की प्रजा हैं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

  http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ के अंतर्गत हर उपनिवेशवासीचाहे मुसलमान या ईसाई ही क्यों न होनागरिकता विहीन बर्तानियों की प्रजा हैक्योंकि उपनिवेशवासी बिना पारपत्र एवं वीसा के ब्रिटेन में नहीं घुस सकता. 


उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है।

उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन फांसी का अपराध है. यानी कि आप की मृत्यु पक्की.

मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. इसलिए भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ का अपराधी हूँ. 

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news


विवरण के लिए नीचे धारा का उल्लेख है:- 

121. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना--जो कोई 1[भारत सरकारके विरुद्ध युद्ध करेगाया ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगावह मॄत्यु या 2[आजीवन कारावाससे दंडित किया जाएगा 3[और जुर्माने से भी दंडनीय होगा


पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल,  भारतीय संविधान और कानूनों को संरक्षणपोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

जिस मूसा के मानसपुत्र(छल रचना) जेहोवा ने अपने अनुयायियों को मूर्ख बनाया (बाइबलउत्पत्ति २:१७) और वीर्यहीन कर दिया, (बाइबलउत्पत्ति १७:११), वह एलिजाबेथ का सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष भगवान है! जो ऐसा नहीं मानता उसे लोकसेवक नष्ट करते हैं.

सन १९४७ के सत्ता के हस्तान्तरण के उपरांत ईसाई व मुसलमान सहित इंडिया का हर उपनिवेशवासी एलिजाबेथ का दास बलिपशु है. किसी के पास जीवित रहने व सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है| नमो के नेतृत्व में एलिजाबेथ ने लोकसेवकों की एक सेना बना रखी है, जो दिए की लौ पर मरने वाले पतिंगों की भांति पदप्रभुता और पेट के लोभ में अपना जीवन, सम्पत्ति, नारियां, वैदिक सनातन संस्कृति और धरती गवाने के लिए विवश हैं. इनको किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है. 

यह जानते हुए भी कि बलिपशु को कत्ल होना है, वह अपनी रक्षा नहीं कर सकता. बलि देने, दिलाने और देखने वालों को बलिपशु के प्रति सहानुभूति नहीं होती. किसी को भी पाप अथवा अपराध बोध नहीं होता. अपितु सभी को बलि देना एक अत्यंत पवित्र धार्मिक कृत्य प्रतीत होता है. 

दासता से मुक्ति हेतु युद्ध.

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर, किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| 

२६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर आप को अशक्त और पराजित कर रखा है| 

माउन्टबेटन ने मानवमात्र से उन की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया| मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७). माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुईउसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा करमानवमात्र को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए इंडिया के मानवमात्र की धरती और सम्पत्ति छीन कर, कुटिलता पूर्वक संयुक्त रूप से मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| लेकिन अंततोगत्वा उपनिवेशवासी के पास कुछ नहीं छोड़ा. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) उपनिवेशवासी को धन व उत्पादन के साधन रखने का अधिकार नहीं देता| "३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेंद्रण न हो;" ईशनिंदा और कत्ल करने की शिक्षा देने का अधिकार ईसाइयों/मुसलमानों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है और राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन ईशनिन्दकों को संरक्षण देने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है.

राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षणसंरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मनुष्य को वीर्यहीन करने वाले इन संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता हैवहीं ब्रिटिश उपनिवेशवासी इंडिया के प्रथम दास प्रणब और राज्यपालों का मनोनयन वैदिक सनातन धर्म को समूल नष्ट करने के लिए स्थापित ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोगमुस्लिम निजी कानून व वक्फऔर प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षामदरसोंउर्दू शिक्षकोंमस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदानकरने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैंअतएव अपनी नारियों को ईसाइयत और इस्लाम को सौंप चुके हैंअपनी सम्पत्ति और पूँजी से अपना अधिकार गवां चुके हैंएलिजाबेथ ने प्रणब दा का मनोनयन इंडिया के सारे नागरिकों को एलिजाबेथ की भेंड़ बनाने के लिए किया हैइंडिया के संत और कथावाचक वीर्यहीन करने वाली इन संस्कृतियों को ईश्वर तक पहुंचने के अलग अलग मार्ग बताते हैंपादरी और ईमाम अपने चर्च और मस्जिदों से ईश्वर की निंदा करते हैं और वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के हत्या की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैंउनके विरुद्ध राष्ट्रपति और राज्यपाल कोई कार्यवाही नहीं करतेलेकिन जो भी चर्चों और मस्जिदों का विरोध करता हैउसे पदप्रभुता और पेट के लिये हर लोकसेवक संरक्षण देने के लिये विवश हैचर्चबाइबलमस्जिद और कुरान का विरोध करने के कारण आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी २००८ से जेलों में बंद हैंमेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलेजिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं.


 
भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९() से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए ईसाई Inquisition और बपतिस्मा में लिप्त है और मुसलमान अज़ान और खुत्बों में. 
इनके विरोध को निष्फल करने के लिए भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन किया गया हैइन धाराओं का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत एलिजाबेथ के मातहतों राष्ट्रपति और राज्यपाल के एकाधिकार में हैराष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षणसंरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश हैंअतएव दोनों आततायी हैं| अतएव जब तक भारतीय संविधान हैआप की हत्या होती रहेगी|

इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश हैमाननीय प्रधानमंत्री नमो सहित प्रत्येक उपनिवेश वासी एलिजाबेथ का दास हैएलिजाबेथ का उपनिवेश न तो ईसाई व मुसलमान सहित किसी उपनिवेशवासी को जीने का अधिकार देता है {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और न सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)}. यदि उपनिवेशवासी दासता की बेड़ियों से मुक्ति चाहें तो भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७ व भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६ (ब)(।।) को निरस्त करने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें| अगर उपनिवेशवासी उपनिवेश से मुक्ति के इस युद्ध में आर्यावर्त सरकार का साथ नहीं देंगे तो डायनासोर की भांति लुप्त हो जायेंगे. याद रखें नमो यह कार्य नहीं कर सकते|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मानवजाति के अस्तित्व को मिटाने के लिए संकलित किया गया है. उपनिवेशवासियों की समस्या अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं. पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

कौन हैं वे, जिन्हें गांधी ने इंडिया में रोका? उनका लक्ष्य और उनकी उपलब्धियां क्या हैं? उनको पन्थनिरपेक्ष यानी सेकुलर, सर्वधर्मसमभाववादी व गंगा जमुनी संस्कृति का अंग मानने का आधार क्या है? विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

गांधी वध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर हम पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. वह भी अत्यंत धूर्तता से. यह अनुच्छेद इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है. हमारा साम्राज्य पूरे विश्व में था, आज हमारा कोई देश नहीं है. 

अनुच्छेद २९(१) इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले, जिन अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, वे विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार उनकी संस्कृति है. 

आप के प्राइवेट प्रतिरक्षा (भारतीय दंड संहिता की धाराएँ ९७, १०२ व १०५) के अधिकार को राष्ट्रपति और राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से आप से छीन लिया है| राष्ट्रपति व राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अजान द्वारा आप को गाली दिलवाने के लिए विवश हैं| आप को अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा का कोई अधिकार नहीं है|

१८६० से ही मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जातीलेकिन भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ इंडिया के प्रत्येक उपनिवेशवासी को प्राइवेट प्रतिरक्षा का कानूनी अधिकार देती है और प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया गया कोई कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार अपराध नहीं है| फिर भी दंड का अधिकार राज्य के पास होता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना उपनिवेशवासी के जान-माल के रक्षा के लिए की गई है| 

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त कानूनी अधिकार से मैं सन १९९१ आज तक चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध कर रहा हूँ.

 भारतीय संविधान का संकलन एक धोखा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ()(||)} और राष्ट्रकुल का एक सदस्य भी| स्वतंत्र कोई नहीं| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 http://www.aryavrt.com/muj14w33-smjhauta

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

क्या आप उपनिवेश और बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं?

गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री वैदिक सनातन संस्कृति के चार स्तंभ हैं.

क्या आप अपने बेटे को निःशुल्क गुरुकुल में शिक्षा दिला सकते हैं?

क्या किसान बैल से खेती कर सकता है?

क्या आप गंगा में गंदे नालों को जोड़ने से रोक सकते हैं?

क्या आप वेदों की माता गायत्री का जप करते हैं?

उपरोक्त में से आप एक भी कार्य कर सकें, तो अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोध का साहस करें, अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहें.

चरित्र के नए मानदंड

वस्तुतः हम वैदिक पंथियों ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५). हमारे लिए मूर्खों के स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो गया है|

वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। 

सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व अनुच्छेद ३९ग]. अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिए| दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९). किसी भी नारी का बलात्कार कीजिए| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कीजिए| अल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता है| किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. वह भी भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल और न्यायपालिका के संरक्षण में! कोई जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों की आर्थिक व धार्मिक स्वतंत्रता, धरती, देश, सम्पत्ति व नारियों उनसे चुरा कर संयुक्त रूप से ईसाइयों व मुसलमानों को सौँप दिया गया है| हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी पंक्ति बना कर अपनी नारियां और सम्पत्तियां विजेता को सौंपने के लिए विवश हैं| दास मुसलमान और ईसाई लोगों को लड़ कर यह निर्णय कर लेना चाहिए कि अभागे वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों की नारियां और सम्पत्तियां ईसाई ले जायेंगे अथवा मुसलमान

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(), ६० १५९ और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची), उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, अब्रह्मी संस्कृतियां आज तक विफल नहीं हुईं|

अब्रह्मी संस्कृतियाँ रहेंगी तो मानवजाति बचेगी नहीं| ईसाई मुसलमान को कत्ल करेगा व मुसलमान ईसाई को| अंततः एलिजाबेथ अपने ही प्रोटेस्टेंट व अन्य समुदाय को कत्ल करेगी| मानवजाति को बचाने के लिए अब्रह्मी संस्कृतियों का समूल नाश जरूरी है|

मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इनके अस्तित्व में आने के बाद से आज तक, मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं की गईं| षड्यंत्र स्पष्ट है| वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है| 

किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। (बाइबललूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) – जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकतामस्जिद, अज़ान और खुत्बे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अपराध से मुक्त हैंभारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है| – लेकिन मस्जिदअज़ान और खुत्बों का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ानधर्मान्तरणमस्जिद और चर्च लोक लूट तंत्र के चारो स्तम्भों द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|  (एआईआरकलकत्ता१९८५प१०४). 

संविधान के अनु० ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ व संविधान सभा के लोग न लूट पाए, उसे सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया (एआईआर, १९५१, एससी ४५८) व अब तो इस अनुच्छेद को २०-६-१९७९ से भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| अज़ान और खुत्बों द्वारा जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/).

बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिरभी आप खूनीलुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश कर दिए गए हैं? मूसा द्वारा गढे जेहोवा और मोहम्मद द्वारा गढे अल्लाह ने मानवमात्र को एक दूसरे का जानी शत्रु बना दिया है.जिस स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने ९० वर्षों तक संघर्ष किया, वह किसी व्यक्ति को कभी मिली ही नहीं और न ईसाइयत और इस्लाम के अस्तित्व में रहते कभी मिल ही सकती है| क्यों कि,

ईसाई सहित केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७) और अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

देश की  छाती पर सवार जेसुइट आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) मल्लिका एलिजाबेथ ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

“… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै न उनकी आयु का विचार करूंगी, न लिंग का, न परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव न हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|” विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ एलिजाबेथ काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है| एलिजाबेथ के सहयोग से अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| मुलायम के प्रिय इस्लाम सहित सभी मजहबों और संस्कृतियों को निषिद्ध कर देगा| केवल ईसा और उसके चित्र की पूजा हो सकेगी| बाइबल के अनुसार ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा और मात्र अपनी पूजा कराएगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा की बारी है| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://christianity.about.com/od/endtimestopicalstudy/a/antichrist.htm

मस्जिदों से ईमाम और मौलवी  मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि गैर-मुसलमानों को कत्ल कर दो| इतना ही नहींमस्जिद से इस्लामी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तानी मौलिक धर्मतंत्री सैयद अबुल आला मौदूदी घोषित करता है कि इस्लाम विश्व की पूरी धरती चाहता है उसका कोई भूभाग नहीं, बल्कि पूरा ग्रह इसलिए नहीं कि ग्रह पर इस्लाम की सार्वभौमिकता के लिए तमाम देशों को आक्रमण कर छीन लिया जाये बल्कि इसलिए कि मानव जाति को  इस्लाम  से, जो कि मानव मात्र के सुख-समृद्धि(?) का कार्यक्रम है, लाभ हो|

मौदूदी जोर दे कर कहता है कि यद्यपि गैर-मुसलमान झूठे मानव निर्मित मजहबों को मानने के लिए स्वतन्त्र हैं, तथापि उनके पास अल्लाह के  धरती के किसी भाग पर अपनी मनुष्य निर्मित गलत धारणा की हुकूमत चलाने का कोई अधिकार नहीं| यदि वे (काफ़िर) ऐसा करते हैं, तो मुसलमानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे काफिरों की राजनैतिक शक्ति छीन लें और उनको (काफिरों को) इस्लामी तौर तरीके से जीने के लिए विवश करें|

उपरोक्त संस्कृतियों को बनाये रखने का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर ईसाई व मुसलमान को असीमित मौलिक अधिकार देता है| यानी कि आप ईसाई या मुसलमान सहित जो भी हों, एलिजाबेथ या हामिद अंसारी आप को कत्ल करेंगे. 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन प्रत्येक राष्ट्रपति और अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|”

जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५,  प१०४) ने ही दिया है| यानी मानवता को मिटाने के लिए अजान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च प्रायोजित व संरक्षित है| आप को बचाने वाला कोई नहीं!

१४३६ वर्ष पूर्व मुसलमान नहीं थे. सभी मुसलमान स्वधर्म त्यागी हैं. इस्लामी हठधर्म स्वधर्मत्यागी को कत्ल करता है. (कुरान ४:८९). हमारे पूर्वजों से भूल हुई है. उन्होंने इस्लाम की हठधर्मी को मुसलमानों पर लागू नहीं किया. हर काफ़िर आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे. आर्यावर्त सरकार मुसलमानों की हठधर्मी मुसलमानों पर लागू करेगी. मुसलमान या तो इस्लाम छोड़ें या इंडिया. 

यानी एलिजाबेथ ने इन खूंखार आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम से मिल कर मानव जाति के अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया है|

अमेरिका आज भी है, लेकिन अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी संस्कृति मिट गई| इंडिया तो रहेगा लेकिन पाठक – उनकी वैदिक सनातन संस्कृति न रहेगी| इसका प्रबंध तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) बनाकर कर दिया गया है| ईसाइयत और इस्लाम को आप को मिटाने में अड़चन न आये - इसीलिए भारतीय  दंड संहिता की धाराएं १५३ व २९५ बना कर उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के नियंत्रण में रखा गया है|

तबके न्यायिक जांच और अल्लाह के (इल्हाम) संदेश ने आज ईशनिंदा और राज्य के विरुद्ध अपराध ने ले लिया है| ईसाई और मुसलमान ईशनिंदा के अपराध में आत्मरक्षा के लिए विरोध करने वालों को कत्ल कर रहे हैं और राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अपराध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने के लिये विवश हैं|

फिर भी आप लज्जित नहीं और न कुछ कर सकते हैं| फिर भी भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का १९४७ से आज तक एक भी विरोधी का किसी को ज्ञान नहीं है! जानते हैं क्यों? क्यों कि ईसाइयत और इस्लाम का एक भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता| गैलेलियो हों या आस्मा बिन्त मरवान| सबके विरोध को दबा दिया गयाविशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

यहाँ तक कि जब भारतीय संविधान के संकलनकर्ता अम्बेडकर ने सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा,इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा।“ (यह कथन राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है।) तो इस कथन से नेहरु कुपित हो गया| नारो के अध्यक्ष श्री डीके गुप्ता के अनुसार भरतपुर के महाराज से नेहरु ने राज्य सभा में ही उनको गोली मरवा दी - और इस कुकृत्य को सार्वजनिक भी नहीं होने दिया|

जिस प्रकार इस्लाम की विरोधी आसमा बिन्त मरवान को वीभत्स विधि से मुहम्मद के अनुयायियों ने उसके ५ अबोध बच्चो सहित कत्ल किया था, उसी प्रकार कैंसर से पीड़ित साध्वी प्रज्ञा को एलिजाबेथ के मातहतों ने जीवित ही मार डाला है| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ डाला गया है| हमारे जगतगुरु के मुहं में गोमांस ठूसा गया| शिकायत करने के बाद भी बंधुआ जज कुछ न कर पाए| हमारे ९ अन्य ईसाइयत और इस्लाम विरोधियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा ईसाइयत और इस्लाम से वैदिक सनातन संस्कृति को बचाने के प्रयत्न के कारण ही जेल में हैं

आज भी मेरी ललकार है, “इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश क्योंकाबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अज़ान ईशनिंदा है। अतएव पाठक अपनी खैर मनाए| प्राकृतिक व मानवीय न्याय के लिए निज हित में अज़ान बंद कराने, मस्जिद पर प्रतिबंध लगाने, चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता कीजिए| ऐसा आप मात्र गुप्त रूप से ही कर सकते हैं| माउन्टबेटन ने अपनी पत्नी एडविना नेहरु और जिन्ना को सौंप दी| क्या आप अपने वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए मेरा गुप्त सहयोग भी नहीं कर सकते?

राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं| २००१ में मुझे जेल में जहर दिया गया. मेरा जीवन समाप्त करने के लिये एलिजाबेथ के षड्यंत्र से मेरे अपने लडके ही तैयार बैठे हैंअतएव मैं लड़ तभी पाऊंगा – जब मानवजाति मेरा साथ देगीयदि आप अपनीअपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ ईसाइयत और इस्लाम के पोषक भारतीय संविधान कोनिजहित मेंमिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|अभी तक किसी जज ने मुझे दण्डित नहीं किया| 

मैं स्वीकार करता हूँ कि हम ग्राहम स्टेन्स और उसके दो पुत्रों की हत्या के अभियुक्त हैं. हमारे दारा उर्फ रविन्द्रपाल सिंह १९९९ से जेल में बंद हैं. अपने उपरोक्त कानूनों का प्रयोग करते हुए हमने बाबरी ढांचा गिराया हैमस्जिदों में विस्फोट भी कराए हैं| ऐसा करना देश में नागरिकों के हित में आवश्यक है| विभिन्न न्यायालयों में ६ शपथपत्र दिए हैं, जिनका किसी न्यायालय ने संज्ञान नहीं लिया| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे धनंजय देसाई भी जेल में बंद हैं. साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकरहमारी प्रेस को दी गई भेंटवार्ता की विडियो क्लिपिंग यूट्यूब पर नीचे की लिंक पर उपलब्ध है,

http://www|youtube|com/watch?v=yutaowqMtd8

मैं एलिजाबेथ को चुनौती देता हूँ कि भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मुझे मृत्युदंड दे.

मैं मालेगांव मस्जिद बम कांड का अभियुक्त हूँ| मेरा पासपोर्ट जब्त है| एलिजाबेथ सरकार ने मेरी सारी सम्पत्ति लूट ली है और किसी भी क्षण मेरी हत्या हो सकती है| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://timesofindia.indiatimes.com/india/malegaon-accused-pandey-congratulated-pragya-singh/articleshow/4023514.cms

किसान सांड़ को वीर्यहीन कर दास बना लेता है और (अ)ब्राह्मी संस्कृतियां खतना और इन्द्र की भांति मेनकाओं का प्रयोग कर दास बनाती हैं|

एक ओर ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति| ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति वीर्यरक्षा यानी मानव के ओज, तेज, स्मृति और परमानंद की प्राप्ति के लिये निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी और (अ)ब्रह्मिक संस्कृति महँगी शिक्षा व्यवस्था लाद कर खतना और यौनशिक्षा द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) मानवमात्र को दास बना रही हैं| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]

भारतीय संविधान मौत का फंदा है| किसी को जीने का अधिकार नहीं देता| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर मुसलमान और ईसाई को १९५० से ही आप की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे चुका है

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हत्यारी व लुटेरी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को अपनी - अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार दिया है|

जज न तो जनता के चुने प्रतिनिधि होते हैं और न ही जजों का चुनाव लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाना आवश्यक है. एलिजाबेथ अपने मातहतों राज्यपालों या राष्ट्रपति द्वारा जजों का मनोनयन करती है. जज न्याय करने की नहीं – संविधान और कानूनों को बनाये रखने के लिए शपथ लेते हैं. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९() तीसरी अनुसूची, प्रारूप }

राज्यपाल सहित कोई भी उपनिवेशवासी खूनी, लुटेरे और बलात्कारी अल्लाह के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकता| यहाँ तक कि जज, पुलिस और सांसद व विधायक भी शिकायत नहीं कर सकते| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन विवश राज्यपाल मस्जिदों से अज़ान और अल्लाह के कुरान के अनुसार मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमाम के विरुद्ध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत सन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं कर सके| जो भी मस्जिद, अज़ान, नमाज़ का विरोध करता है, उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल या राष्ट्रपति की संस्तुति पर प्रताड़ित और जजों द्वारा तबाह कर दिया जाता है| मस्जिद, अज़ान, कुरान और नमाज़ का विरोध करने के कारण मैं स्वयं ४२ बार हवालात काट चुका हूँ| इस्लाम की अधिक जानकारी के लिए नीचे की लिंक देखें,

http://www.aryavrt.com/fatwa

यहूदी या मुसलमान किसको पसंद करेंगे?

जेहोवा का कहना है कि धरती चपटी है और चार खम्भों पर टिकी है. विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://www.answering-christianity.com/earth_flat.htm

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, स्वामी बनाता है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो दास बनाते हैं, अल्लाह सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकताईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं? धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|
क्या कयामत आएगी?

अपने पद, प्रभुता और पेट के लिए जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान और कानूनों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेनी ही पड़ेगी| यानी राष्ट्रपति और राज्यपाल हर ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) व मुसलमान (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९) को अपनी ही हत्या का अधिकार देने व अपनी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए विवश हैं| ईमाम, जिन मस्जिदों से आप के हत्या की शिक्षा देते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, काफिरों के नरसंहार की और काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उनको सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) पर राष्ट्रपति और राज्यपाल, वेतन दिलाते हैं|  पुलिस संरक्षण देते हैं| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/ ). काफिरों के कर के पैसे से मस्जिदों और हज भवनों का निर्माण कराते हैं| जो भी काफ़िर हत्या और ईशनिंदा के केंद्र मस्जिदों या ईमामों का विरोध करे – उसकी हत्या का निर्देश कुरान में (कुरआन ८:१७) है – जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीडित कराया जा रहा है|

वीर्य महिमा के समर्थन में मुझे वर्तमान में एक ही प्रमाण देना है| शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी कामी होता है और शेर जीवन में एक बार सम्भोग करता है| अतः वीर्यवान|

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है|  ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं| एक गो नर भक्षी डायन एलिजाबेथ ने पूरे मानव जाति को वीर्यहीन कर सबके प्राणों को संकट में डाल कर अपने अधीन कर रखा है| किसी के पास एलिजाबेथ के विरोध का साहस नहीं! 

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| एलिजाबेथ के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक उपनिवेशवासी ईसा की भेंड़ है. अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. 

जी हाँ हम मस्जिद और चर्च नहीं रहने देना चाहते क्यों कि यहाँ काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा की जाती है और मानव मात्र को ईश्वर से अलग कर दिया जाता है| मनुष्य को कत्ल करने अथवा वीर्यहीन हो कर दास बनने के लिए विवश करने के लिए शिक्षित किया जाता है|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूचना सचिव)