asim cartoon


एक सवाल!

अजान और मस्जिद का विरोध क्यों अपराध है? अगर महाराष्ट्र सरकार कार्टूनिस्ट श्री असीम त्रिवेदी को छोड़ेगी; तो मालेगांव कांड में जेल में बंद आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारियों को क्यों नहीं छोड़ेगी?

कार्टूनिस्ट श्री असीम त्रिवेदी की जय हो|

कानपूर एक बार फिर चर्चा में|

१८५७ से आज तक कानपूर क्रांति का केंद्र रहा है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ (पाक अधिकृत शारदापीठाधीश्वर जाफराबाद, जम्मू-कश्मीर) के मार्गदर्शन में मानव जाति के हत्यारे ईसाइयत और इस्लाम को समूल नष्ट करना चाहते हैं| आज से लगभग ४ वर्ष पूर्व १२ नवम्बर, २००८ को रावतपुर, कानपूर से ही जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ की गिरफ्तारी हुई थी|

आर्यावर्त सरकार ईसाई व मुसलमान सहित मानव मात्र को चेतावनी देती है कि निज हित में ईसाइयत और इस्लाम को मिटाने के लिए जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ को, उनके साथियों सहित, कारागार से मुक्त कराने के लिए भारतीय संविधान को निरस्त कराने में तन, मन, धन से सहयोग करें, अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहें|

मेरा आरोप है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध या लोकपाल की नियुक्ति के लिए लड़ने वाले योगगुरू, अन्ना, पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी, पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण और श्री श्री रविशंकर सभी सोनिया द्वारा पोषित अथवा भयादोहित अपराधी हैं| जिन्हें लोकसेवकों के भ्रष्टाचार तो दिखाई देते हैं, लेकिन संविधानकेअनुच्छेद ३९() दंप्रसंकीधारा१९७ के भ्रष्टाचार दिखाई ही नहीं देते! इन लोगों की भरपूर कोशिश है कि जनता समस्या की जड़ भारतीय संविधान पर ऊँगली उठा पाए, अन्यथा सोनिया का सारा खेल खटाई में पड़ जायेगा|

खानें और कारखाने इंदिरा गाँधी द्वारा १९७१ में संविधान को समाजवादी घोषित कर उनके स्वामियों से भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन लूटी गई थीं| सरकार का समाजवाद असफल हो गया| अतएव नैतिकता के प्रमाण स्वरूप सरकार खानें व कारखाने उनके स्वामियों को वापस करे| वह भी हर्जाने के साथ| कौन होती है सरकार नागरिकों की सम्पत्तियां लूट कर बेचने वाली?

संविधानकेअनुच्छेद ३९() के अनुसार नागरिक की स्थिति किसान के बैल से भी बुरी रह गई है| एफडीआई तो देश के हित में है, लेकिन नागरिक के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देश हित में नहीं! दंप्रसं की धारा १९७ के अनुसार नागरिक की सम्पत्ति और पूँजी लूटना तब तक अपराध नहीं है, जब तक सोनिया को उसका हिस्सा मिले| अपराध वह तभी माना जा रहा है, जब सोनिया चाहती है| यह कैसा लोकतंत्र है? नागरिकों को आजादी कौन सी मिली है, क्या मीडिया सोनिया से पूछेगी?

जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन, विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को अल्पसंख्यक स्वीकार कर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| चढ़ावों को लूट रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

इस्लाम के अल्लाह ने मुसलमानों पर युद्ध अनिवार्य कर दिया है. (कुरान :२१६) और ईसा तलवार चलवाने (बाइबल, मत्ती १०:३४) और आग लगवाने आया है. (बाइबल, लूका १२:४९). अल्लाह और ईसा का विरोध ईशनिंदा है, जिसके लिए मृत्यु दंड है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हामिद के अल्लाह और सोनिया के ईसा को अपनी लूट, कत्ल और नारी बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) सोनिया और हामिद को आप की सम्पत्ति और पूँजी को लूटने का अधिकार देता है| न्यायपालिका ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने के लिए विवश है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन राष्ट्रपति और अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|” वैदिक सनातन धर्म कैसे बचेगा?

मानव उन्मूलन की कीमत पर आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है| मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणास्रोत को नष्ट न कर दें. उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणास्रोत कुरान (कुरान ८:३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) हैक्या अपने बचाव हेतु नवयुवक आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैं. सच छुपा नहीं है, न ही इसे जानना मुश्किल है. मानव उन्मूलन की कीमत पर आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है.

एक प्रमुख अंतर यह भी है कि जहां ईसाइयत और इस्लाम को अन्य संस्कृतियों को मिटाने में लंबा समय लगा वहीँ वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए २६ नवम्बर, १९४९ को संविधान बना कर ईसाइयत और इस्लाम के हाथों में सौँप दिया गया है| अजान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| प्रेसिडेंट व हर राज्यपाल ने अजान व मस्जिद को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), पुलिस के संरक्षण और दंप्रसंकीधारा१९६ के कवच में रखा है| अजान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इसके विपरीत जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध कर रहा है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत जेल में ठूस दिया जा रहा है| जब तक भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल है, मानव जाति पर संकट बना रहेगा|

देश में कोई आतंक नहीं हो रहा है. सारी घटनाएँ ईसाइयत और इस्लाम के मिशन और जेहाद हैं. जो सोनिया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा प्रायोजित हैं| नागरिक पहले उपरोक्त सच्चाइयों को कहने का साहस जुटाएं. मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट है. जो सरकार अफजल को फांसी नहीं दे सकती, वह भारतीय संविधान प्रायोजित जिहाद कैसे मिटा सकती है? 


Comments