आसमा बिन्त मरवान

आसमा बिन्त मरवान की हत्या|

कवियित्री आसमा बिन्त मरवान, जिसने मुहम्मद के आतंक, लूटमार और हत्याओं की निंदा की| तारीख मार्च-अप्रैल, ६२३ ईश्वी, स्थान मदीना|

मदीना की कवियित्री आसमा बिन्त मरवान, जिस ने मुहम्मद के आतंक और लूटमार के निंदा करने का साहस किया, उसे मुहम्मद के गिरोह ने उसके बच्चों सहित बीभत्स तरीके से कत्ल कर दिया|

बदर के युद्ध के बाद मदीने के लोग आतंकित हो कर कहने लगे कि उन्होंने कैसे अपराधियों को शरण दिया है| काफी लोगों ने ऐसे आतंकवादी और अपराधी लोगों के शहर में मौजूदगी का विरोध करना शुरू कर दिया| अरबिया के इस्लाम के पूर्व के स्वतन्त्र समाज में कवि समाज की चेतना को जगाने, जांच करने और आलोचना करने के लिए स्वतन्त्र थे| सम्मानीय और प्रतिष्ठित तरुणी आसमा बिन्त मरवान के अतिरिक्त अबू अफाक, जो अत्यंत वृद्ध व्यक्ति थे, को अच्छी कवितायेँ बनाने का वरदान प्राप्त था|

मुहम्मद अपनी आलोचनाओं से कुपित हो गया| जब मुहम्मद ने आसमा बिन्त मरवान की बनाई गई कविताओं को सुना तो अत्यंत कुपित हो कर चिल्ला उठा, “क्या मरवान की बेटी से मुझे छुटकारा दिलाने वाला कोई नहीं?” उसी रात को मुसलमानों का एक गिरोह आसमा बिन्त मरवान को कत्ल करने के लिए निकल पड़ा| वे कवियित्री के घर में घुस गए| कवियित्री अपने बिस्तर पर सोकर अपने नवजात बच्चे को अपने छाती से दूध पिला रही थी, जब कि अन्य चार बच्चे उसके बगल में सो रहे थे| दूध पीते बच्चे को मुसलमानों ने उसके छाती से खींच लिया और कवियित्री की आँखों के सामने बच्चे के टुकड़े कर डाले| गिरोह ने एक एक कर कवियित्री के प्रत्येक बच्चे को उसकी आँखों के सामने कत्ल कर दिया| फिर कवियित्री का बलात्कार किया और अंत में कवियित्री को भी छुरे से गोद गोद कर मार डाला| कत्ल करने के बाद जब गिरोह मुहम्मद को सूचित करने गया तो मुहम्मद ने कहा, “तुम लोगों ने अल्लाह और रसूल की सेवा की है, उनकी जिंदगी दो बकरों के बराबर भी नहीं थी|”

इससे पता लगता है कि मुहम्मद कितना बच्चों का प्रेमी, सहनशील और शांति प्रिय था|

 मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईमाम प्रतिदिन ५ समय, नियमित रूप से, पूरे विश्व में, निर्विरोध अन्धाधुन्ध काफिरों पर इस्लामी आक्रमण करते हैं। ईमाम क्या प्रचारित व प्रसारित करते हैं, को जानने के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

उपरोक्त लिंक के अध्ययन से आप को स्पष्ट हो जायेगा कि इमाम प्रतिदिन आप व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी काफिरों के हत्या की, नारियों के बलात्कार की, लूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश नहीं, बल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गत, अपना जीवन, माल, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैंई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, या अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ का प्रयोग करते जब से मैने बाबरी ढांचा गिराया है और मस्जिदों में विस्फोट भी कराए हैं, मैं तभी से प्रताड़ित हो रहा हूँ| मुझे २००१ में जेल में जहर भी दिया गया| लेकिन मैं मरा नहीं| मैं मालेगांव बम कांड का अभियुक्त भी हूँ| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

लेकिन सोनिया ने मुझे जानबूझ कर जेल नहीं भेजा है| ६ मार्च से ११ मार्च, २०१३ के बीच, गोरखपुर में, मेरे बेटों ने मुझे अगवा कर - मेरे उसी घर में बंद कर रखा था, जिसे मैंने अपने हाथों से बनवाया था| मैं लगभग २ अरब रुपयों की सम्पत्ति का स्वामी हूँ, लेकिन ऋषिकेश में भिक्षा के अन्न पर जीवित हूँ| अब मैं दिल्ली हो या गोरखपुर कहीं भी नहीं जा सकता|

राष्ट्रपति और राज्यपालों को, वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिये विवश कर दिया| इतना ही नहीं मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

हम इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम जेहोवाः और अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| हम अज़ान का विरोध कर रहेमस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). हम जो भी कर रहे हैं, भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा में कर रहे हैं| 


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