Aryavrt Sarkar Kyon

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हमारी घोषणा

यदि आप के पास आत्म रक्षा के लिए समय होतो इस लेख को एक साथ पढ़ें|

सिंघनाद को आर्यावर्त सरकार की ‘विजयी भव’ की शुभ कामनाएं.

हमारा परिचय: हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोग मस्जिदें नहीं रहने देंगे. हमने बाबरी ढांचा गिराया है. हमारे १२ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं. हम ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी हैं. क्यों कि यदि  ईसाइयत और इस्लाम धरती पर रहेंगे तो कोई मंदिर नहीं बच सकता. किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती. क्यों कि मस्जिदों से हमारे वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर का, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार द्वारा दिए गए संरक्षण में, अपमान होता है, मात्र मुहम्मद के कार्टून बना देने से, ईशनिंदा के अपराध में कत्ल करने वाले मुसलमानों द्वारा, ईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं.

धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया| उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं|

एक ओर प्रजातंत्र है, जो मानव जाति को निगल जाना चाहता है. दूसरी ओर वैदिक सनातन धर्म का राजतंत्र है, जो मानव मात्र को उपासना की स्वतंत्रता, सम्पत्ति का अधिकार, ब्रह्मचर्य आधारित गुरुकुल की शिक्षा ओर नारी को सम्मान देगा. अतएव यदि मानव जाति को बचाना हो तो जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ द्वारा चयनित महाराज दिनेश का राज्याभिषेक कराइए. हम गुरुकुल व योग की शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करेंगे. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) आप को सम्पत्ति का और अनुच्छेद २९(१) जीवित रहने व मंदिर रखने का अधिकार नहीं देता. मुक्ति, मंदिर और मर्यादा चाहिए, तो एलिजाबेथ को बंदी बनाने में हमे सहयोग दें.

मै अपने विरुद्ध लगे ५०वे अभियोग, अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के मालेगांव मामले, में वांछित हूँ. विवाद का मूलबिंदु है कि आतताई ईसाइयत और इस्लाम धरती पर क्यों रहेंगे?

चूंकि अब्रह्मी संस्कृतियों दोनों को ही वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो जजों द्वरा निरस्त कर दी गई| मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था| जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया| बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ| अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं| मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, ०६-०२-२०१३ को निरस्त हो गया| इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है| मैं अज़ान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ| ईश्वर उपासना की दासता नहीं थोपता| (गीता ७:२१) और न लूट के माल का स्वामी है| (मनुस्मृति ८:३०८). हम् भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को निरस्त करना चाहते हैं| हम मानव जाति को बचाना व विदेशी बैंकों में जमा देश का धन वापस लाना चाहते हैं और एलिजाबेथ राज्यपालों के माध्यम से आप को लूट रही व मिटा रही है| किसके साथ हैं आप?

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की  विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में  उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी वेब साईट http://www.aryavrt.com/azaan पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं. बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का ८ करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन क्यों हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और न कोई जाँच आयोग. क्या इस देश का वकील वर्ग पूछेगा१५ जनवरी२००१ को दिए गए लिबड़ा आयोग के शपथपत्र की पत्रकार वार्ता को हमने नीचे उद्धृत यू ट्यूब पर पोस्ट किया हुआ है. 

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

चूंकि ईसाइयत इस्लाम और  भारतीय संविधान कुटरचित अभिलेख हैं, जो मानव मात्र को दास बनाने अन्यथा हत्या करने के लिए निर्मित किये गए हैं; अतः भारतीय दंड संहिता की धाराओं ९७, १०२ व १०५ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधीन मुझे अपने व मानव जाति के प्राणों की रक्षा का अधिकार है| लेकिन दंड देने का अधिकार राज्य के पास होता है और एलिजाबेथ सरकार खूनी संस्कृतियों को दंडित नहीं कर रही है; अतएव हमने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है| ताकि इन संस्कृतियों को धरती से मिटा कर वैदिक सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया जा सके|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर ईसाइयत और इस्लाम को मानव मात्र को कत्ल करने का मजहब से प्रोत्साहित अधिकार दिया गया है, लेकिन ईसाइयों और मुसलमानों सहित किसी को भी जीवित रहने और भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं है|

मैं मानव मात्र से निवेदन करता हूँ कि ईसाइयों और मुसलमानों सहित जिसे भी सम्पत्ति व पूँजी का अधिकार, दासता से मुक्ति, अपनी नारियों का सम्मान, अपने पूर्वजों की संस्कृति आदि चाहिए, इस युद्ध मे आर्यावर्त सरकार का साथ दे|ईसाइयत और इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, उन्होंने वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए हुआ है. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ एलिजाबेथ काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है. जिन्हें देश, वैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए-हमारी सहायता करें

स्वामी जी ने जो कुछ लिखा है, वीर्य रक्षा के उद्देश्य से लिखा है| लेकिन जो लोग गाजे-बाजे के साथ खतना करा कर वीर्य हीन बनते हों, उन्हें स्वामी जी की बात कैसे समझ आ सकती है?

मनुष्य को छोडिये, वीर्यवान सांड को भी दास नहीं बनाया जा सकता| मुसलमान को अपने शत्रु इस्लाम को अच्छी तरह परखना चाहिए| मुहम्मद ने मुसलमानों को वीर्य हीन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी| नारी तो नारी, गिल्मों तक उतर आया|

प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात से एक जिज्ञासु ने पूछा - मनुष्य को स्त्री प्रसंग कितनी बार करनी चाहिए? जवाब में सुकरात ने कहा जीवन में एक बार। जिज्ञासु व्यक्ति ने असंतोष व्यक्त करते हुए पूछा कि इतने से संतोष हो तो? सुकरात ने कहा - वर्ष में एक बार। इससे भी उस व्यक्ति को सन्तुष्टि नहीं हुई तो कहा - माह में एक बार। इस पर भी असन्तोष जाहिर करने पर सुकरात ने कहा - ‘‘जाओ पहले सिर पर कफन बाँध लो और अपने लिए कब्र खुदवालो फिर चाहे जो भी करो।’’

मुसलमान इतिहासकार सगर्व लिखते हैं कि मुहम्मद ने कितने शांतिप्रिय नागरिकों को कत्ल किया| कितने मंदिर तोड़े| कितनी अबला नारियों के गहने लूटे, उनके सगे-सम्बन्धियों को कत्ल किया और उसी रात उनका बलात्कार किया| लेकिन जब सर्बो ने मुसलमान नारियों का बलात्कार किया और जब लेबनान के नागरिक ठिकानों पर इजराएल ने बमबारी की तो मुसलमानों को मानवाधिकार याद गया|

अफगानिस्तान और ईराक पर अमेरिकी आधिपत्य से मुसलमान आतंकित हैं| लेकिन मुसलमान भूल गए हैं कि जहाँ अल्लाह ने मुसलमानों को सृष्टि सौँप रखी है (कुरान :२५५) और वहीं ईसा ने ईसाइयों को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने का अधिकार दे रखा है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| (बाइबल, लूका १९:२७). मुसलमान विचार करें कि तब क्या होगा, जब ईसाई मुसलमानों को कत्ल कर विश्व के सभी इस्लामी राज्यों पर आधिपत्य जमा लेंगे? अकेले इजराएल से तो मुसलमान निपट नहीं पाए, सभी ईसाई राज्यों से मुसलमान कैसे निपटेंगे?

मात्र हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी ही ईसाइयत और इस्लाम को मिटा सकते हैं. एलिजाबेथ इसे जानती है, इसीलिए आतंकित है.

हमने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है. अतएव हमारे लिए मूर्खों के मदिरालय और वैश्यालय यानि स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है. [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) (कुरान २:३५)].

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) जाति हिंसकबलात्कारी व दासता पोषक है. देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग कोजिसकी अपनी विशेष भाषालिपि या संस्कृति हैउसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान भाग ३ मौलिक अधिकार.

ईसा अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाता. केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७) और अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के हत्यारों और धरती की नारियों का बलात्कार कराने वालों को संरक्षण देने के लिए संकलित किया गया है

हम से पाकपिता गाँधी ने राम राज्य का वादा किया था, भारतीय संविधान ने हमे उपासना की आजादी दी है. हम मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने (बाइबल, यूहन्ना :५३) वाली एलिजाबेथ को सत्ता में क्यों रहने दें?

हर मुसलमान व ईसाई खूनी है. एलिजाबेथ कैथोलिक ईसाई है. धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है. (व्यवस्था विवरण, १३:६-११). व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है. (कुरान ४:८९). २०११ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे. न १४३१ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे. अतएव धर्मत्यागी एलिजाबेथ व हामिद को उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार है. क्यों कि बाइबल, लूका १९:२७ के ईसा के आदेश से एलिजाबेथ हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८ के आदेश से हामिद अंसारी कत्ल करेगा. इनसे अपनी रक्षा का हमारे पास और कोई मार्ग नहीं है.

यद्यपि भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३१ बदला भी गया और लुप्त भी हुआ, लेकिन उपरोक्त धारा १०२ आज भी प्रभावी है. जिन मस्जिदों से हमारे ईश्वर को गाली दी जाती है और जिन पुस्तकों कुरान व बाइबल में हमें कत्ल करने की आज्ञा है, आप सहयोग दें, उन्हें हम नहीं रहने देंगे.

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत. (मनु स्मृति ८:१५)

लक्ष्मी के हैं चार सुत, धर्म, अग्नि, नृप, चोर.

जेठे का निरादर करो, शेष करें भंड़ फोड़.

सृष्टि धर्म पर टिकी है और धर्म वेदों पर. वेदों को  चरवाहों के गीत बताने वाली एलिजाबेथ आप को कत्ल करने (बाइबललूका १९:२७)आप का मांस खाने और लहू पीने के लिए (बाइबलयूहन्ना ६:५३)भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से असीमित मौलिक अधिकार प्राप्त करसत्ता के शिखर पर बैठीअपने द्वारा मनोनीत राष्ट्रपति प्रतिभाप्रधान मंत्री मनमोहनसभी राज्यपालों और जजों के माध्यम से आप के वैदिक सनातन धर्म को मिटा रही है. 

http://www.khapre.org/portal/url/sa/sahitya/upanishad/Z70916054515(%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%BD%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A4%A6%E0%A5%8D).aspx

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

संघ परिवार हमें अतिवादी और आतंकवादी मानता है. क्यों कि मीडिया को दासता प्रिय है और हमारे राम राज्य से परहेज़ है. अमेरिकीभारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ का सार्वभौमिक मानवाधिकार का घोषणापत्र हमे उपासना की आजादी का वचन देता है. पाक पिता गाँधी ने ही हमसे राम राज्य का वादा किया थाहम अल्लाह के उपासना की दासता  और एलिजाबेथ का उपनिवेश क्यों सहन करें? निर्णय करके बताइयेगा. पाठक की मुझ पर कृपा होगी.

जब संविधान ही लुटेरा हो तो प्रधानमंत्री क्या कर लेगासंविधान का अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं देता. इस अनुच्छेद को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता. जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन राज्यपालों द्वारा शासित हैं. सर्वधर्म समभाव, गंगा-जमुनी संस्कृति, ‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति', `अहिंसासांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (सूरह  अल अनफाल ८:३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. संघ सरकार व परिवार आप के शत्रु हैयदि आप को जीवित रहना हो तो हमसे जुड़ें,

हमारे पूर्वजों से भूल हुई है. हमारे पूर्वजों ने ईसाइयत और इस्लाम की हठधर्मी को ईसाइयों व मुसलमानों पर लागू कर उनको कत्ल नहीं किया. हम अपने पूर्वजों की गलती को सुधारना चाहते हैं. हमें आप के सहयोग की नितांत आवश्यकता है. आप से अनुरोध है कि बहुत हो चुका, असीमानंद के पीछे पड़ने के स्थान पर एलिजाबेथ से पूछिए, कि मात्र कश्मीर में १९९२ में तोड़े गए १०८ मंदिरों की जांच कौन करेगा?

सूचना के अधिकार के अधीन भारत सरकार ने मुझे बताया है कि हमें वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है.

इन आतताई ईसाइयत और इस्लाम को भारत में रोकने वाले, संरक्षण व समर्थन देने वाले स्वयम के व मानव जाति के शत्रु हैं. इन्हें दंडित 

करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए.

२६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथ छल हुआ था. संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे. क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ. संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम भारत के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने एलिजाबेथ के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम एलिजाबेथ द्वारा सताए जा रहे हैं. इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं.

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आप को कोई स्व(अपना)राज नहीं मिला. इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है. देखें, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(ii). आप ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)] सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) और भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और उपासना की आजादी (अजान, कुरान ३:१९) गवां दी है.  

क्यों कि यदि  ईसाइयत और इस्लाम धरती पर रहेंगे तो कोई मंदिर नहीं बच सकता. किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती. ईसा अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाता. केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७). 

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है.

http://www.aryavrt.com/no-right-to-life

भारतीय संविधानजिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षणसंवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने और बनाये रखने कीजजों ने शपथ ली हैसे निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता हैदेखें:-

 "३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग). 

जिन्हें देशवैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए-हमारी सहायता करें.

और ध्यान से पढ़ लीजिए. सरकार जान माल की रक्षा के लिए हैजान लेने और लूटने के लिए नहीं. गद्दाफी के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय पुलिस वारंट जारी कर चुकी है. थोमस त्यागपत्र दे चुके हैं. सहयोग दीजिए और हम एलिजाबेथ को बंदी बना लेंगे. आमेर का खजाना देश में वापस आ जायेगा. अर्जी मेरी मर्जी आप की.

मात्र मुहम्मद के कार्टून बना देने से, ईशनिंदा के अपराध में कत्ल करने वाले मुसलमानों द्वारा, ईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं. ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करेंहमसे उपासना की आजादी का वादा किया गया हैईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैंहम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें?

हमारे १२ अधिकारी मक्कामालेगांव मस्जिदों आदि के विष्फोट में बंद हैं. हमने विस्फोट कराए हैं और तब तक कराते रहेंगे, जब तक इस्लाम मिट नहीं जाता.

यह आश्चर्य की बात है कि २६ जनवरी ई० सन १९५० से आज तक इस मानवता के शत्रु भारतीय संविधान का किसी ने विरोध नहीं किया.

किसी गैर मुसलमान को जीने का अधिकार न मुसलमान देता है और न किसी उस व्यक्ति को जीने का अधिकार ईसा देता हैजो ईसा को अपना राजा नहीं मानता. फिर आजादी कैसे मिली यह पूछते ही या तो आप ईश निंदा में कत्ल हो जायेंगे या भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ अथवा २९५ के अधीन जेल में होंगे. जज तो राज्यपाल का बंधुआ मजदूर है. अपराधी वह हैजिसे एलिजाबेथ का मातहत राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन अपराधी माने.

प्रेसिडेंटप्रधानमंत्री और राज्यपाल एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत उसके मातहत व उपकरण है.

जजोंराज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करेंअपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँशासकों की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें.

जगतगुरु श्री अमृतानंद के आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. आप लोग यह युद्ध नहीं लड़ सकते. सरकार ने वर्तमान जामा मस्जिद ईमाम अहमद बुखारी का अभियोग वापस लिया है. अफजल को फांसी नहीं दे पा रही है. हमारे उपरोक्त अभियोग तुरंत वापस लीजिएअन्यथा ईश्वर आप को कभी क्षमा नहीं करेंगे. अल्लाह ने अमेरिका को भी नहीं छोड़ा, आप किस खेत की मूली हैं? या तो हमारे तोड़े गए कश्मीर के १०८ मंदिरों की जांच कीजिये. महरौली के क़ुतुब परिसर के तोड़े गए २७ मंदिरों का निर्माण करिए अथवा हमारे १२ अधिकारियों के अभियोग वापस लीजिए.

आज भी हम एक हारा हुआ युद्ध लड़ रहे हैं. कल्पना कीजिए कि विदेशो में जमा धन और भ्रष्टाचार का सारा धन राजकोष में जमा हो जाता है, तो भी आम आदमी को तो राहुल गाँधी के अनुसार सारे राजकोष का बीसवां हिस्सा मिलेगा. बाकी धन तो एलिजाबेथ और उसके उपकरणों और मातहतों के हिस्से में जायेगा. भ्रष्टाचार तो नहीं मिटेगा!

 भ्रष्टाचार मिटाने का अंतिम और एकमात्र उपाय है, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को हटाना और अनुच्छेद ३१ का पुनर्जीवन. क्या इसकी मांग मीडिया कर सकती है? जब मांग ही नहीं कर सकती तो भ्रष्टाचार के विरोध की बात करना ही बेमानी है.

 मै नीचे लिंक दे रहा हूँ, इससे आप को एलिजाबेथ की सरकार का चरित्र पता चलेगा:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/Home/bhrsht-sonia

डेनिअल वेबस्टर ने लिखा है,  हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (एलिजाबेथ द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

 जहां हम आर्य ब्रह्म की संततियां हैं, वहीं यह लोग अब्रहमिक संततियां हैं. जहां हम अपने ईश्वर से स्वतंत्रता और बुद्धि के प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं. (गायत्री मंत्र: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे). वहीं यह लोग दास बनने और बनाने के लिए गोलबंद हो कर मस्जिदों से चिल्लाते हैं. हमारा ईश्वर हमें उपासना की स्वतंत्रता देता है (गीता ७:२१). जब कि अल्लाह का हठधर्म यह है कि जो भी अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा करे, उसे कत्ल करो. स्वयम अल्लाह के दास बनो और औरों को दास बनाओ!

आप से आजादी और रामराज्य का वादा किया गया था. आप को एलिजाबेथ के रोम राज्य की चाकरी करते लज्जा क्यों नहीं आतीभारतीय संविधान ने आप को उपासना की आजादी दी है. ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं. स्वयं अल्लाह के दास हैं. आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं. अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती?

"पाकिस्तान के शहर कराची में कठोर ईशनिंदा कानून को बनाए रखने के लिए इस रविवार को एक विशाल रैली हुईजिसमें करीब ५० हजार से अधिक लोग शामिल हुए। ये सब नारे लगा रहे थे और हाथ में बैनर व तख्तियां लिए हुए थे,जिन पर लिखा था ‘मुमताज कादरी हत्यारा नहीं हीरो है’, ‘हम उसके साहस को सलाम करते हैं’, आदि आदि। इस रैली में पाकिस्तान के सभी प्रमुख धार्मिक पार्टियों व संगठनों ने भाग लिया थाजिनमें उदारपंथी और कट्‌टरपंथी दोनों शामिल थे। दोनों एक स्वर में ईशनिंदा कानून को नरम बनाने के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इस कानून में संशोधन की मांग करने वाले पीपीपी के नेता व पंजाब प्रांत के राज्यपाल सलमान तासीर की हत्या के कुछ दिन बाद ही हुई इस तरह की रैली से पाकिस्तान सरकार घब़डा गयी है। प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने फौरन बयान जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार का ईशनिंदा कानून में संशोधन का कोई इरादा नहीं है।" 

हम वैदिक पंथी यह घोषणा करते हैं कि हम अज़ान देने व शहादा द्वारा आरोपित गुलामी को सहन नहीं करेंगे. यह आश्चर्य की बात है कि मुसलमान अज़ान दे कर हमारे ईश्वर का अपमान करते हैं, साम्प्रदायिक शत्रुता फैलाते हैं और उनके अज़ान को तथाकथित हिंदू हितैषी संघ परिवार ईश निंदा ही नहीं मानता.

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है.

मैंने किसी का गला नहीं कटा और न् किसी को लूटा. किसी नारी का बलात्कार भी नहीं किया. मैं इसलिए लड़ रहा हूँ कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें. मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें. आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ. मै आप को दासता से मुक्त करना चाहता हूँ. मैं आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ. और न कुरान व बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करता हूँ. मै भारतीय संविधानकुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानता हूँ. जो ऐसा नहीं मानतावह दया का पात्र है.

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}.

क्या आप ने सोचा कि मूसा से लेकर पाकपिता गाँधी तक यह कहते हुए क्यों नहीं आये कि उनका लक्ष्य आप को दास बनाना है? आज ही सही! मौलवियों और पादरियों से कहिये कि वे "ला इलाहलिल्लाहू व ‘दया’ के बदले घोषित करें कि वे मानव मात्र को दास बनाना चाहते हैं.

हमारे वैदिक सनातन धर्म में कोई पाप क्षमा नहीं होता. दूसरे की धन-धरती लूटने, कत्ल करने और नारी बलात्कार की सुविधा नहीं है. हमारा ईश्वर आप को उपासना, सम्पत्ति और जीवन का अधिकार देता है. आप को दास नहीं बनाता. पशु-पक्षी तक को अपनी आजादी प्रिय है. हम आप को धूर्त पैगम्बरों द्वारा छीना गया यही ‘आजादी’ का अनमोल रत्न वापस देना चाहते हैं.

अब मै ८१ वर्ष का एलिजाबेथ द्वारा दिए गए जहर से पीड़ित असहाय व्यक्ति हूँ. जब तक लड़ सकता था, लड़ता रहा. हमारे १० हजार से अधिक सैनिक इस समय भूमिगत हैं, जिनका मुझे भी ज्ञान नहीं है. मानवता के शत्रुओं ईसाइयत और इस्लाम से अब आप नौजवानों को ही लड़ना है. मै तो मात्र इतना चाहता हूँ कि इस अधूरी लड़ाई को आगे निज हित में बढ़ाएँ.

भवदीय:अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

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