Article 39-c Corruption

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जनता की अदालत में:-

विषय: भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

हम अपने पूर्वजों की गलतियों का परिणाम भुगत रहे हैं. मैंने किसी की जेब नहीं काटी. किसी की लड़की नहीं भगाई. 

किसी को कत्ल नहीं किया. मैं इसलिए लड़ रहा हूँ कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें. मुसलमान और 

ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें. आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल 

न कर दिए जाएँ. मैं आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ. और न कुरान व बाइबल को 

धर्म पुस्तक स्वीकार करता हूँ. मै भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानता हूँ. जो ऐसा नहीं 

मानता, वह दया का पात्र है.

आप लोग यह युद्ध नहीं लड़ सकते. धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी 

ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. एक ओर प्रजातंत्र है, जो मानव जाति को निगल जाना चाहता है. दूसरी ओर वैदिक 

सनातन धर्म का राजतंत्र है, जो मानव मात्र को उपासना की स्वतंत्रता, सम्पत्ति का अधिकार, ब्रह्मचर्य आधारित गुरुकुल की शिक्षा ओर नारी को सम्मान देगा. अतएव यदि मानव जाति को 

बचाना हो तो जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ द्वारा चयनित महाराज दिनेश का राज्याभिषेक कराइए.

जिसे भी भ्रष्टाचार मिटाना हो, हमसे जुड़े़!

http://www.khapre.org/portal/url/sa/sahitya/upanishad/Z70916054515(%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%BD%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A4%A6%E0%A5%8D).aspx

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और 

न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे. स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है. लेकिन भारत का संविधान ही चोर है. भारतीय संविधान को चोर कहना सोनिया के रोम राज्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है और संसद व विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन भी. जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे सोनिया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी. मुसलमान ईश निंदा के आरोप में उसे कत्ल करेगा. मै ४२ बार इसीलिए हवालात और जेल गया हूँ| मुझे जेल में जहर दिया गया है.

~अजान~

पूरे अजान को नीचे पढ़ें और बताएं कि इनमे धार्मिक सद्भाव का शब्द कौन सा है?

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।

●  अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत, प्रेषित, संदेष्टा, नबी, Prophet) हैं।

●  हय्या अ़लस्-सलात (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।

●  हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।

●  अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बार, सिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में), अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

●  अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

●  ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार), अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।'

अज़ान यद्यपि सामूहिक नमाज़ के लिए बुलावाहै, फिर भी इसमें एक बड़ी हिकमत यह भी निहित है कि विशुद्ध एकेश्वरवादकी निरंतर याद दिहानी होती रहे, इसका सार्वजनिक एलान होता रहे। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के ईशदूतत्व के, लगातारदिन प्रतिदिनएलान के साथ यह संकल्प ताज़ा होता रहे कि कोई भी मुसलमान (और पूरा मुस्लिम समाज) मनमानी जीवनशैली अपनाने के लिए आज़ाद नहीं है बल्कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के आदर्श के अनुसार एक सत्यनिष्ठ, नेक, ईशपरायण जीवन बिताना उसके लिए अनिवार्य है।

हम आर्यावर्त सरकार और अभिनव भारत के लोग आमने सामने की लड़ाई लड़ रहे हैं. हमारे १२ अधिकारी मक्कामालेगांव आदि के विष्फोट में विभिन्न जेलों में बंद हैं. हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है. जब तक सोनिया का रोम राज्य स्थापित नहीं हो जाता, सभी को मिटाया जायेगा. चाहे हिंदू मरे या मुसलमान अन्ततः ईसा का शत्रु मारा जायेगा.

यह मीडिया की ही महिमा है कि ४ मस्जिदों में विष्फोट करके हम भगवा आतंकवादी हैं और मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड्ने वालों की संरक्षक सोनिया आतंकवादी नहीं. 

हमारे असीमानंद जी ने स्वीकार किया है कि हम इस्लाम और मस्जिद नहीं रहने देंगे. क्यों कि मस्जिदें धर्म के आधार पर शत्रुता प्रसारण के केंद्र हैं. हमारे पूर्वजों से भूल हुई है. हमारे पूर्वजों ने ईसाइयत और इस्लाम की हठधर्मी को ईसाइयों मुसलमानों पर लागू कर उनको कत्ल नहीं किया. हम अपने पूर्वजों की गलती को सुधारना चाहते हैं. हमें आप के सहयोग की नितांत आवश्यकता है. आप से अनुरोध है कि बहुत हो चुका, असीमानंद के पीछे पड़ने के स्थान पर सोनिया से पूछिए, कि मात्र कश्मीर में १९९२ में तोड़े गए १०८ मंदिरों की जांच कौन करेगा?

हमारे जगत गुरु स्वामी अमृतानंद के मुंह में गोमांस ठूसा गया है. हमारी आधुनिक दुर्गा साध्वी प्रज्ञा के रीढ़ की हड्डी तोड़ डाली गई है और हमारे सेनापति प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का पैर तोड़ दिया गया है. गोमांस ठूसने वालों, हेमंत करकरे व अन्य १७ को, योगगुरू रामदेव ने शहीद घोषित किया और ९० लाख रूपये इनाम भी दिए. अब कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७  को बचाने के लिए ४ जून २०११ से आमरण अनशन पर बैठेंगे. ताकि सोनिया लूटे और कलमाडी जेल जाएँ.

 भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८)

भारतीय संविधान का अनुच्छेद(ग) भ्रष्टाचार पोषक है. जो भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहे वह अनुच्छेद ३(ग) हटाने में अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार का सहयोग करे.

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति 

निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

ऐसे भ्रष्ट भारतीय संविधान का १९५० से आज तक किसी ने विरोध नहीं किया. भारत के नागरिकों के स्व (अपने) तन्त्र की सीमायें हैं. भारत के नागरिक इन सीमाओं से बाहर नहीं जा सकते. 

जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं,

नागरिक के पास सम्पत्ति नहीं रहने दी जायेगी. [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और लुप्त अनुच्छेद ३१]. सम्पत्ति समाज की ही रहेगी. लूट का माल अल्लाह (कुरान ८:१; ४१ व ६९) और ईसाई (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१४) का बना रहेगा. इसे भ्रष्टाचार भी नहीं माना जायेगा. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन जनता के सम्पत्ति के लुटेरे लोकसेवकों का नियंत्रण राज्यपालों के हाथ में बना रहेगा. जब तक सोनिया को हिस्सा मिलेगा, लोकसेवकों की नौकरी पक्की. लूट शिष्टाचार बना रहेगा. जब सोनिया को हिस्सा नहीं मिलेगा, तब लूट भ्रष्टाचार बन जायेगा. बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से विवाह कीजिए. गांड मारिये और मराइए और सोनिया के जजों के गुण गाइए.

आप ईसा को राजा स्वीकार नहीं करते. (बाइबल, लूका १९:२७) अतएव सोनिया के पास आप को कत्ल करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा. आप अल्लाह के 

अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा करते हैं. अतएव उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के पास सोनिया सहित आप की हत्या का अधिकार सुरक्षित रहेगा. 

(एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं. आरती उतारिये लोकतंत्र और धूर्त चुनाव आयोग की.

भ्रष्टाचार के लिए भारतीय संविधान उत्तर दायी है, लोकसेवक नहीं. उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए. सम्पत्ति का संकेन्द्रण तो हो लेकिन सोनिया के 

पास. इसके गणित को समझिए. इस अनुच्छेद के अधीन नागरिक की सारी सम्पत्ति सोनिया की है. यदि घोटाले की रकम मिल भी जाये तो भी राहुल के अनुसार रकम 

का ९५% सोनिया व उसके मातहत और उपकरण खा जायेंगे. लेकिन जनता को फिर भी कुछ नहीं मिलने वाला. लोक सेवक को नागरिक की सम्पत्ति को लूट कर सोनिया तक 

पहुचाने के लिए ही नियुक्त किया जाता है. नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोक सेवक को नागरिक को लूटना पड़ेगा. पीड़ित नागरिक को शिकायत करने 

का और शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पुलिस के पास है और न जज के पास. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन अभियोग चलाने 

की अनुमति देने का अधिकार भूमाफिया, आतंकवादी और महाभ्रष्ट प्रेसिडेंट या राज्यपाल के पास है. इन सबका नियंत्रण सोनिया के पास है. लोकसेवक जब 

तक सोनिया को हिस्सा देगा, उसके विरुद्ध कोई अभियोग ही नहीं चल सकता. अभियोग तब चलता है, जब लोक सेवक या तो सोनिया को हिस्सा देता ही 

नहीं या कम देता है. इन आये दिन के घोटालों का शोर इसलिए है कि सोनिया की धन की प्यास नहीं बुझ रही है. भारतीय संविधान का संकलन नागरिकों 

को किसान के पशु की भांति दास बनाकर लूटने व वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है.

अन्ना उपरोक्त अनुच्छेद में संशोधन की मांग नहीं कर रहे हैं. फिर भी देश ने उनको महान नेता बना दिया है. क्यों कि जनता को तो कुछ मिलना नहीं, उलटे देश के नागरिकों को 

जजों और सीबीआई के समानांतर एक नया लूट में हिस्सा खाने वाला लोकपाल मिलेगा. कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान को बचाने की इस चाल के पीछे सोनिया है. यह लूट में 

हिस्सा खाने का अधिकार अन्ना एंड कम्पनी को भी मिलने वाला है.

जिसने कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली हो, वह भ्रष्टाचार कैसे मिटाएगा? शांतिभूषण भी उनमे ही हैं. भ्रष्टाचार का 

समाधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का अंत है, लोकपाल बिल नहीं.देखें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

शांतिभूषण, योगगुरू रामदेव और अग्निवेश, जो सोनिया के एजेंट हैं, अन्ना जी व देश को मूर्ख बना रहे हैं. आप सहयोग दें तो हम अभिनव भारत और 

आर्यावर्त सरकार के लोग आतंकवादी, आतताई और साम्राज्य विस्तारवादी ईसाइयत और इस्लाम को धरती पर नहीं रहने देंगे. यह देश हमारा है, 

हमसे पाकपिता गाँधी ने रामराज्य का वादा किया है. आजादी और वैदिक सनातन धर्म हमें प्रिय है,

सृष्टि धर्म पर टिकी है, धर्म वेदों पर. धर्म न बचा तो कुछ न बचेगा. क्यों कि,

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत. (मनु स्मृति ८:१५)

लक्ष्मी के हैं चार सुत, धर्म, अग्नि, नृप, चोर.

जेठे का निरादर करो, शेष करें भंड़ फोड़.

कल दंड गहि काहु न मारा. हरइ धर्म, बल, बुद्धि, विचारा’

निकट काल जेहि आवत साईं. तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं. राम चरित मानस, लंका कांड, ३६:७-८

प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है. लुटेरे संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं देता. इसे कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता. जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन, सोनिया के मनोनीत, राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (सूरह  अल अनफाल ८:३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

मुझे सोनिया लूट रही है. आप के १२ अधिकारी मस्जिद विष्फोट के अभियोगों में बंद हैं. उन्हें मुक्त कराने के लिए हमें भामाशाहों की आवश्यकता है. 

उद्योगपति और व्यापारी सोनिया के लिए चोरी करना छोड़ें. धर्म की रक्षा में हमारा सहयोग करें. अन्यथा उनका सब कुछ सोनिया उनसे छीन लेगी.

http://www.aryavrt.com/nl-petition-transfered

सम्पादक.


Ċ
ap tripathi,
Apr 18, 2011, 4:54 AM
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