Allah17815-4

 

२२/१०/१५

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर ईसाई व मुसलमान को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है|

अज़ान और खुत्बों द्वारा जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/ ).

अज़ान और खुत्बे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अपराध से मुक्त हैं|

नमो भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेने के लिए विवश हैं| जजों ने भी भारतीय संविधान व कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८).

ईमाम अज़ान और नमाज़ द्वारा काफिरों के आस्था और इष्टदेवों का अपमान करता है. मुसलमानों को काफिरों के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में भारतीय न्याय व्यवस्था का मुकुट सर्वोच्च न्यायालय  (भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर), मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) और ईमामों को आप के कर के पैसे से वेतन दिलवाने के लिए, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), विवश कर दिया गया है (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण भी दिया है| यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च प्रजातंत्र के चारो स्तम्भों द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|

ईमाम काफिरों के इष्टदेवों ईशनिंदा करता है. स्वयं दास है और आप की स्वतंत्रता छीनता है. ईमामों को दंडित करने के स्थान पर एलिजाबेथ ईमामों को वेतन दिलवा रही है. जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/)

आप लोगों से राम राज्य का वादा किया गया था, एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहते आप लोगों को लज्जा क्यों नहीं आती? ईमाम आप व आप के इष्टदेवों को गाली देता है. स्वयं दास है और आप की स्वतंत्रता छीनता है. ईमामों को दंडित करने के स्थान पर एलिजाबेथ ईमामों को वेतन दिलवा रही है. जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) ने ही दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च न्यायपालिका द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|

काफिरों से कर वसूल कर, काफिरों की हत्या कराने, दार उल इस्लाम स्थापित करने और मस्जिदों से लूट, हत्या व बलात्कार की शिक्षा देने के बदले में राज्यपाल (भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९) और न्यायालय, मुसलमानों को हज अनुदान ( http://indiankanoon.org/doc/709044/ ) व ईमामों को खजाने से वेतन दिलवाने के लिए, (संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), विवश हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६)

सन १९५० में भारतीय संविधान को थोपे जाने के बाद स्थिति और भयावह हो गई है| जिनके पास वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के जान-माल की रक्षा का दायित्व है, उनको पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए विवश कर दिया गया है|

 

मैं उपरोक्त तथ्य प्रकाशित करने का परिणाम जानता हूँ| उपरोक्त तथ्यों का उद्घाटन भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| इसके अतिरिक्त उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का भी अपराध है.

मेरे विरुद्ध आज तक मात्र भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ५० अभियोग चले हैं. जो भड़काऊ लेख के विरुद्ध थे या हैं. और अभियोग तो निपट गए, मात्र ५ आज भी लम्बित हैं. किसी भी मामले में सजा नहीं हो सकी है. यद्यपि मैंने अपने ऊपर लगे सभी आरोप स्वीकार किये हैं और प्रतिवाद किया है कि इंडिया में अज़ान, कुरान और मस्जिद क्यों अस्तित्व में हैं?

यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबल, लूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार है। तकिय्या व कितमान के अधीन यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। इसी प्रकार प्रत्येक ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुए, अज़ान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता है, कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है-फिर भी पुलिस व प्रशासन अज़ान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकती, क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति, राज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। क्यों कि राष्ट्रपति व उसके राज्यपालों ने भारतीय संविधान व कानूनों को बनाए रखने की शपथ ली है। राज्यपालों और जजों की एक विशेषता और है। यह लोग उपनिवेशवासी के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। आज कल यह लोग एलिजाबेथ के मातहतों द्वारा मनोनीत किए जा रहे हैं, जो जेसूइट है। जिसे ईसा ने भारत को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है।

उपरोक्त दोनों धाराएँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा इंडियन उपनिवेश {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}.की स्वामिनी एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति, राज्यपाल या जिलाधीश द्वारा नियंत्रित है| बिना दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल की संस्तुति के जज भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोगों की सुनवाई नहीं कर सकता|

अज़ान मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट अज़ान ईशनिंदा है ईशनिन्दक के लिए इस्लाम में मृत्यु दंड निर्धारित है इंडिया में ईशनिंदा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दण्डनीय अपराध है उपरोक्त दोनों धाराएँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, इंडियन उपनिवेश [भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता].की स्वामिनी एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति, राज्यपाल या जिलाधीश, द्वारा नियंत्रित है.

क्या उपनिवेश की सरकार यह बताएगी कि हमारे किस मंदिर का पुजारी ईमामों की भांति बांग लगाता है कि मात्र ईश्वर की पूजा हो सकती है? ईमाम की अज़ान का प्रसारण, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है...भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंडनीय अपराध है| दोनो धाराएँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत राज्यपाल के नियंत्रण में हैं| उपनिवेशवासी या जज असहाय हैं|

इंडियन उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ का षड्यंत्र स्पष्ट है. अमेरिकी माया संस्कृति की भांति वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है. क्यों कि जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ एलिजाबेथ के दास अज़ीज़ कुर्रेशी द्वारा ईशनिंदा के विरोधियों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ को लागू कर प्रताड़ित किया जा रहा है.

 

अज़ान और खुत्बों के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है| धरती की प्रत्येक नारी ईसाई या मुसलमान की है| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं ईसाई बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व मुसलमान पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने के लिये अधिकृत है| अल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता है|

 

उपनिवेशवासी के पास जीने और सम्पत्ति रखने का अधिकार नहीं है.

क्या एफबीआइ अल्लाह और जेहोवा की भी जांच करेगी? इनके रहते धरती की कोई नारी सुरक्षित नहीं!

दूसरी ओर ब्रिटिश उपनिवेश है, जिसमें कुमारी माँ मरियम वन्दनीय है और मरियम की अवैध सन्तान ईसा ईश्वर का एकमात्र पुत्र, जो स्वयं को शूली पर चढ़ने से न बचा सका, सबका मुक्तिदाता है|

इंडिया, जो भारत है, कभी स्वतंत्र नहीं हुआ. आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है. लेकिन १५ अगस्त १९४७ से आज तक किसी हिंदू या मुसलमान ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने आश्रय दाता वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया| किसी हिंदू या मुसलमान के पास एलिजाबेथ का विरोध करने का साहस नहीं है| क्योंकि उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस कानून के संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें, राष्ट्रपति व राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| यानी कि उपनिवेश का विरोध किया नहीं कि राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को फांसी दिलवाने के लिए विवश हैं.

मस्जिद और अज़ान का विरोध करने के कारण दिल्ली सरकार ने मुझ पर अब तक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति के बाद भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ४९ अभियोग चलाए| अन्य तो निपट गए, लेकिन ४ आज भी लम्बित हैं|

तकिय्या व कितमान और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का प्रयोग कर जहां ईसाइयों व मुसलमानों को भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ व २९५ के अधीन बचाया जा रहा है, वहीँ ईसाइयों व मुसलमानों द्वारा हमारी आस्था का अपमान कराया जा रहा है|

इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीड़ित कराया जा रहा है| लेकिन जेहोवा, उसका एकलौता पुत्र ईसा और अल्लाह यौन शोषक अपराधी नहीं हैं! मात्र संत आशाराम, जज गांगुली और जज स्वतंत्रकुमार अपराधी हैं!

नमो जिस भारतीय संविधान के तीसरी अनुसूची के प्रारूप के अनुसार भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेंगे, उसके अनुच्छेद २९(१) ने वैदिक सनातन संस्कृति की रीढ़ तोड़ दी है| वीर्यरक्षा के केंद्र निःशुल्क गुरुकुलों में शिक्षा देने के बारे में कोई सोच ही नहीं सकता| उपनिवेश से मुक्ति के बारे में चर्चा करते ही आप आतंकित हो जाते हैं| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) किसी मनुष्य को जीने का अधिकार नहीं देता|

यहाँ तक कि ईसाई मुसलमान की हत्या करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार रखता है और मुसलमान ईसाई की| चर्च, अज़ान और मस्जिद, जहां से ईशनिंदा की जाती है और मानवमात्र को कत्ल करने का उपदेश दिया जाता है, का विरोध अपराध है.

लेकिन आप की न्यायपालिका एलिजाबेथ के मनोनीत राज्यपालों द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संरक्षित है| यह का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंडनीय अपराध है| इसका नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन एलिजाबेथ के मनोनीत राज्यपालों के पास है|

इतना ही नहीं सन १८६० से लागू मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| लेकिन आत्मरक्षार्थ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है|

उपरोक्त तथ्यों का उद्घाटन भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन एलिजाबेथ के रोमराज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| मैं उपरोक्त तथ्य प्रकाशित करने के कारण ४२ बार बंदी बना हूँ| ईश्वर की कृपा से आज तक मुझे सजा नहीं दी गई|

मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जाति हिंसक शिक्षाओं को, जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है यदि मुसलमान व ईसाई करे तो राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानते| लेकिन आत्मरक्षा में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देने के लिए राष्ट्रपति (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६०) और राज्यपाल (भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९) दोनों ही, शपथ लेने के कारण, विवश हैं| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति, राज्यपाल और जिलाधीश के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं- मस्जिदों से अज़ान का प्रसारण करने वाले और अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम के विरुद्ध अभियोग नहीं चला या चलवा सकता|

राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं| ५ आज भी लम्बित हैं| अतएव अपनी खैर मनाइए-प्राकृतिक व मानवीय न्याय के लिए निज हित में मेरे उपरोक्त मात्र २ (दो) अभियोग वापस लीजिये, अज़ान बंद कराइए और मस्जिद पर प्रतिबंध लगाइए|

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

हमें तो मिटना ही मिटना है, क्यों कि पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. सवाल यह है कि ये खूनी धरती पर क्यों हैं?

अमेरिका आज भी है, लेकिन अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी संस्कृति मिट गई| इंडिया तो रहेगा लेकिन यादव उनकी वैदिक सनातन संस्कृति न रहेगी| इसका प्रबंध तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) बना कर कर दिया गया है| अब्रह्मी संस्कृतियों को आप को मिटाने में अड़चन न आये - इसीलिए भारतीय दंड संहिता की धाराएं १५३ व २९५ बना कर उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के नियंत्रण में रखा गया है|

 

बलवे के लिये उत्प्रेरित करने वाले के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ही दे सकते हैं|

इंडिया में ईशनिंदा भारतीय दंड संहिता की धारा २९५ के अधीन दण्डनीय अपराध है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने व सबको अपना दास बनाने के लिए रखा गया है| मस्जिदों से ईमाम मुसलमानों को उपदेश देते हैं कि जो अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना करता है, वह काफ़िर है| काफ़िर या तो अपनी उपासना पद्धति त्याग दे और मुसलमानों की भांति खतना कराकर शासक (एलिजाबेथ) का दास बने अन्यथा मुसलमान उसे कत्ल कर दें| मस्जिदों से ऐसा कथन ई० सन० ६३२ से ही बलवे का कारण बन रहा है और अविश्वासियों के उपासना की स्वतंत्रता का भी अतिक्रमण है.

यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च एलिजाबेथ सरकार द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है| भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ अविश्वासियों को प्राइवेट प्रतिरक्षा का कानूनी अधिकार देती है| अतः एलिजाबेथ सरकार बताए कि उपनिवेशवासियों के कानूनी अधिकार क्यों छीने गए हैं?

अब्रह्मी संस्कृतियों के विरुद्ध कोई नहीं बोल रहा है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर इनको इंडिया में रोका गया है| मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान से प्रायोजित अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल विवश कर दिए गए हैं| लेकिन भारतीय संविधान का विरोधी कोई नहीं है|

ईशनिंदा और कत्ल करने की शिक्षा को रोकने के स्थान पर एलिजाबेथ सरकार उनको पुलिस सुरक्षा देती है, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर हज अनुदान देती है और अविश्वासियों के कर के पैसे से वेतन भी देती है|

 (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४)

अब्रह्मी संस्कृतियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा उपरोक्त संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार क्यों दिया गया है? एलिजाबेथ सरकार कर यानी टैक्स उपनिवेशवासियों के जान-माल के रक्षा के लिये लेती है? अब्रह्मी संस्कृतियों से उपनिवेशवासियों के सम्पत्ति और जीवन की रक्षा का एलिजाबेथ के पास कौन सा कानून है?

साम्प्रदायिक सद्भाव का पता अज़ान व खुत्बों द्वारा प्रतिदिन ५ समय ईश्वर का अपमान करने व काफिरों को कत्ल करने के ऐलानों से चलता है

हमें ईसाइयत और इस्लाम से खतरा है. हम आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम को धरती पर क्यों रहने दें? हम अज़ान द्वारा प्रतिदिन ५ समय ईशनिंदा क्यों सहन करें? हम मस्जिदों से होने वाले काफिरों को कत्ल करने के खुत्बों को क्यों होने दें? हम उपनिवेश, मस्जिद और चर्च क्यों रहने दें?

इमाम अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा प्रतिदिन विश्व के सर्वशक्तिमान राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी काफिरों के ईष्टदेवों की ईशनिंदा, काफिरों के हत्या कीनारियों के बलात्कार की, लूट की और उपा-सना स्थलों के विध्वंस की, प्रतिदिन ५ समय, निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| फिरभी राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी शासकों ने भय वश नहीं, बल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गत, अपना जीवन, धन, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैं|

यह भी जान लीजिए, कि उपरोक्त सच्चाई लिखने की भी किसी में शक्ति नहीं है| क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का कोई भी आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता|

 

पंथनिरपेक्ष एलिजाबेथ वैदिक सनातन धर्म को मिटा रही है और आप की आर्यावर्त सरकार धर्म की स्थापना हेतु भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मिटाएगी| किसके साथ हैं आप?

इस्लाम और सेकुलर वादियों का सच -------------

इराक के आतंकी संगठन ISIS के ५०० यजिदियों को एक साथ मौत के घाट उतार दिया| देखने वाल बात यह है कि इस्लाम भाईचारा सिखाता है का बखान करने वाले धर्मगुरुओं की आवाज कहाँ गुम है और वह क्यों  चुप्पी साधे हुए हैं| गाजा पट्टी में फिलस्तीन के हमास चरमपंथियों पर इजरायल की कार्यवाही के विरुद्ध जलूस निकालने वाले सेकुलर दल- कम्युनिस्ट नेता और केजरी वाल कहाँ हैं, जिन्होंने भारत के पार्लियामेंट में इजरायल के खिलाफ निंदा प्रताव पारित करने की कोशिश की, अब उनकी बोलती क्यों बंद है| देश को इन दागी साम्प्रदायिक दलों को जो हर दुसरे को गलत कहते हैं, को समझना चाहिए और राजनीती से ख़ारिज कर देना चाहिए|

 

+++

http://www.aryavrt.com/muj15w42b-lg-15o20

[उपनिवेश किसे कहते हैं?

http://www.aryavrt.com/muj13w51a-yaun-shoshan

आशाराम बापू और नित्यानंद की फर्जी सीडी की भांति तथाकथित मनु, आभा, नायडू ... सूची लम्बी है आदि के साथ ब्रह्मचर्य के प्रयोग में २०वीं सदी का मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी भी जेल चला जाता. जेल जाने से बचने के लिए गांधी वही करता था, जो अँगरेज़ चाहते थे.

यह गांधी की रंगरेलियों के महिमामंडन का ही जादू था. जिसने एडविना को नेहरु और जिन्ना को मोहपाश में फंसा कर देश का बंटवारा कराया. ३५ लाख से अधिक हिंदुओं को कत्ल कराया. ४ करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए. जो भंडुआ माउंटबेटन १४ अगस्त को वाइसराय था. वही १५ अगस्त को गवर्नर जनरल बन गया. उपनिवेश आज़ादी हो गया!

+++

महामहिम जी! सुखस्य मूलं धर्म:। धर्मस्य मूलं अर्थ:। अर्थस्य मूलं राज्यः। राजस्य मूलं इन्द्रियजय:। अतएव चोर, डाकू, बलात्कारी और लुटेरे मानवजाति पर शासन न करें। यह सुनिश्चित करना आप का धर्म है.

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान पर किसका जोर है?

+++

आरबीआई गवर्नर ठग है. रूपये की कीमत क्या है? स्वयं नहीं जानता. फिर भी धारक को रुपया देने का वचन देता है.

+++

इस देश में जो दलित है उन्होंने गलत ही सही, मन में एक बात बैठा ली है कि इस संविधान को भीम राव अम्बेडकर ने बनाया है और जो लोग इसे नकार रहे हैं वे सब भीम राव अम्बेडकर को नापसन्द करते हैं। इसलिए इसे नकारते हैं। इस तथ्य को हम लोग और बारीकी से समझे।

भारतीय संविधान हमारा शत्रु है. संविधान सभा के ड्राफिटंग कमैटी के चेयरमैन अम्बेडकर ने यह दावा कभी नहीं किया कि उन्होंने यह भारतीय संविधान बनाया।

इसके विपरीत संकलनकर्ता अम्बेडकर ने २ सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा, "भारतीय संविधान मेरी इच्छा के विरुद्ध, मुझसे लिखवाया गया| ... अतएव इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। ... भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता|" अम्बेडकर का उपरोक्त वक्तव्य राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है; जिसे कोई भी पढ़ सकता है|

एक बात और समझने की है कि भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की ड्राफिटंग कमैटी के चेयरमैन थे और मेरे अध्ययनानुसार अन्य सदस्य भी थे। बाकी तेरह नाम और भी थे। वे सब बड़े-बड़े नाम थे। यदि हम उन सबका रोजनामचा देखें, जो संविधान सभा की कार्यवाही का हिस्सा भी है, तो मालूम होगा कि ये सब लोग अपने चुनाव क्षेत्र में घूम रहे थे। उन्होंने देख लिया था कि संविधान वगैरा तो बन ही जायेगा। हमें पहले चुनाव जीतने की चिन्ता करनी चाहिये जिसके बल पर अगली लोकसभा में आना है। उसी समय माउन्ट बैटन ने अपनी पत्नी लेडी माउन्ट बैटन की कैद में रखकर बी० एन० राव से जैसा चाहा वैसा संविधान बनवाया। संविधान सभा की जो प्रोसिडिंग है उसकी बिटविन दी लाइन्स आप पढ़ेंगे तो सब पता चल जायेगा। आज जो परिस्थिति है उसमें हमें नयी संविधान सभा की बात करनी चाहिये।

इस कथन से नेहरु कुपित हो गया| नारो के अध्यक्ष डीके गुप्ता के अनुसार नेहरु के सहयोग से भरतपुर नरेश श्री बच्चू सिंह ने श्री अम्बेडकर को राज्य सभा के भीतर, तमाम सांसदों की उपस्थिति में, गोली मार दिया और किसी को विरोध करने का साहस नहीं हुआ - न किसी को पता है! क्या उपनिवेश की भेंड उपनिवेशवासियों को इस भारतीय संविधान का सम्मान करना चाहिए?

जब संकलनकर्ता ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे, तो आप भारतीय संविधान पर क्यों विश्वास करते हैं?

न्यायमूर्ति जी!

एलिजाबेथ ने आप का मनोनयन आत्मघात हेतु कराया है. पद ग्रहण करने के पूर्व ही आप ने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है. (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८)

न्याय करना और कानून को बनाये रखना अलग अलग और एक दूसरे के विरुद्ध है. मैं इसे नीचे की पंक्तियों में स्पष्ट करने का प्रयत्न करूँगा.

ब्रिटिश काल के सारे कानून जस के तस आज भी लागू हैं. संविधान भी भारत सरकार अधिनियम १९३५ के कानूनों के आधार पर बना है.

 

 

+++

Monday, October 19, 2015

+++

http://www.aryavrt.com/muj15w42a-islam-protection

http://www.aryavrt.com/muj15w42-tushtikaran

http://www.aryavrt.com/muj15w41ay-nsa-gaumans

http://www.aryavrt.com/muj15w40by-govup

+++

इस प्रकार सबको अपने अधीन करने के लिए तथाकथित पैगम्बरों की मनुष्य के अतुलित ईश्वरीय बल और पराज्ञान में मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करने के कुटिल कृत्य पर पिछले ३००० से अधिक वर्षों से किसी ने ध्यान नहीं दिया. जिसने भी विरोध किया, उसे प्रताड़ित किया या कत्ल किया गया.

इस प्रकार सबको अपने अधीन करने के लिए तथाकथित पैगम्बरों की मनुष्य के अतुलित ईश्वरीय बल और पराज्ञान में मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करने के कुटिल कृत्य पर पिछले ३००० से अधिक वर्षों से किसी ने ध्यान नहीं दिया. जिसने भी विरोध किया, उसे प्रताड़ित किया या कत्ल किया गया.

 

+++

+++

कोलम्बस दिवस का जश्न मनाना आवश्यक है. क्यों कि इसी दिन लाल भारतीयों और उनके माया संस्कृति के समूल विनाश की नींव पड़ी थी.

खतरा एलिजाबेथ से...

 

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान पर प्रतिबन्ध.

 

+++

+++

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने एक वक्तव्य में यह साफ कर दिया है कि तथाकथित हिन्दू आतंकवाद का उनके संगठन से कोई संबंध नहीं है।

[अब पता चला है कि मजहब का पालन करते हुए न्यायिक जांच (Inquisition) और बपतिस्मा में लिप्त ईसाई और अज़ान और खुत्बों में लिप्त मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं! लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन ईशनिंदा और हत्या का विरोध करने वाले हिंदू आतंकवादी हैं!]

+++

मैं उपनिवेश, इस्लाम और ईसाइयत का विरोधी हूँ. मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है, मालेगांव मस्जिद बम कांड का अभियुक्त हूँ और कानपूर में गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा नाथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी| तब मेरी सहायता प्रधान मंत्री राव और मुख्यमंत्री कल्याण ने की थी| विरोध करने के कारण ४२ बार जेल गया हूँ| मुझे जेल में जहर दिया गया है| ५० अभियोग चले, जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं| मैं हूँ. मेरे ९ सहयोगी मालेगांव व अन्य मस्जिदों के विष्फोट के मामले में सन २००८ से बंद हैं.

+++

 

इस पत्र की प्रति महामहिम प्रणब दा व एलिजाबेथ को भी भेज रहा हूँ, क्यों कि आप व प्रणब दा दोनों ही एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत मातहत हैं| आप लोग आपस में बैठ कर हमारे अभियोगों के बारे में निर्णय कर लें|

 

+++

 

 

 

भवदीय:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूचना सचिव)

आर्यावर्त सरकार,

७७ खेड़ा खुर्द, दिल्लीः ११० ०८२.

चल दूरभाष: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

ईमेल : aryavrt39@gmail.com

ब्लाग: http://aaryavrt.blogspot.com

गणक जाल: http://www.aryavrt.com

पढ़ें: http://www.aryavrt.com/

 

On Thu, Oct 15, 2015 at 11:33 AM, D C Nath <dcnath.private@gmail.com> wrote:

                                                          October 15, 2015

Dear Friends,

 

Subject: SINCERE APOLOGY

 

This is in reference to the mail that sent on October14, 2015, on "Hindu Muslim Relationship As Revealed From Ancient Sanskrit Texts"

We have within less than 24 hours received howlers, chiding as also guidance from esteemed readers, both from within and outside the country. It is believed what the writer had told was likely to have been planted deliberately to misguide the Hindus. Many of the criticisms have been rather lengthy. Some are to the point and pithy. In any case, we have taken our lessons from this. A positive aspect was to know how alert are our learned readers. It was not the authenticity of the original source but the motivation behind the "facts" of the report, that was in question.

Lest we mislead our informed readers, we felt it necessary to issue this if one may call it a CORRECTION WITH A SINCERE APOLOGY at the earliest. Well, we have the moral courage to admit a mistake publicly and without any hesitation.

We hope to retain your patronage towards our efforts to serve the nation, the BHARATMATA, with courage and devotion.

We had written to Dr. Trishke, conveying the gist of the suspicion behind her mail, as below:

 

Quote (.)

 

Thank you, Dr. Trushke, for your response.

If you would not mind, we have to raise a QUESTION.

Some friends have raised a doubt whether what you have written was all your thought/product of research or at the behest some authority. We do not want to belittle your scholarship. But, we would be happy to hear back from you on this.

Best regds,

D C Nath

Unquote (.)

 

Here is her response:

 

Quote (.)

 

Dear Mr. Nath,

 

All my scholarship is the product of my own research. There is no sponsorship or hidden agenda.

 

All the best,

 

Audrey Truschke

Mellon Postdoctoral Fellow

Department of Religious Studies

Stanford University

www.stanford.edu/~truschke

 

Unquote (.)

We leave it at that.

And, with thanks and regards to you all.

 

       Vandemataram,

   Your sevak,

        D.C. Nath

    (Former Spl. Director, IB)

(President, Patriots’ Forum)

                                                              9811995693

 

(Note: In case, you are not interested in receiving mails from us, please let us know. It has come to our notice that some friends are receiving our mails without our sending such mails to them. That must then be through the system of bulk forwarding resorted to by many. Please check from whom you have received the mail initiated by us but not sent to you. You may also click the delete button in your system. Our mails will never ever thereafter reach you).

 

+++

लिखते हैं, ‘सत्यमेव जयतेऔर करते हैं सत्य का हनन. जब तक आप उपनिवेशवासी हैं, आप की आज़ादी कहाँ है?

दास के अधिकार कहाँ होते हैं? उपनिवेशवासी के पास अधिकार हैं भी कहाँ?

यह संस्कृतियों का युद्ध है. गुरूकुलों के नष्ट होने के पश्चात, वीर्यहीन होने के कारण, वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों ने आत्मसमर्पण कर रखा है. 

10/15/2015

PG0077582015

Ayodhya Prasad Tripathi

9152579041

Mangal Ashram, Muni Ki Reti, Tihari Garhwal 249137

मंगल आश्रम, मुनि की रेती, टिहरी गढ़वाल २४९१३७.

+++

बुधवार, 14 अक्तूबर 2015

+++

गौ के वीडियो

https://www.youtube.com/watch?v=733RlrQ42YU

https://www.youtube.com/watch?v=1MRuCLXxqjs

 

https://www.youtube.com/watch?v=xU9CauJP4Pg

https://www.youtube.com/watch?v=xjUz95vtlew

 

Attachments area

Preview YouTube video What happens after cows slaughtering in INDIA ?? Must Watch Exposed By Rajiv Dixit

 

मैं उपनिवेश के विरुद्ध युद्धरत हूँ.

किसके लिए?

यदि आप लोग ऋषियों के गोमांस खाने की बात करें, तो पहले पतंजलि कृत योग पतंजलि ऋषि के योग दर्शन पढ़ें.

आप लोगों के लेख किनके लिए लिखे जा रहे हैं? क्योकि जो पीड़ित हैं और कुछ कर सकते हैं, वे अंग्रेजी नहीं जानते. आप का देश कहाँ है? देश तो एलिजाबेथ का उपनिवेश है. जब आप के पास देश ही नहीं तो देश की बात करने का क्या मतलब?

 

+++

मैं, मूर्खाधिराज अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, आप लोगों से कुछ सवाल पूछता हूँ.

मान लीजिए कि परमाणु युद्ध हो जाता है. कोई सज्जन विकिरण रोधी भवनों में सुरक्षित रह जाते हैं और अपनी संतानों को बताते हैं कि मैं हवाईजहाज से १८ घंटे में अमेरिका से इंडिया पहुँच जाता था. टेलिविज़न देखता था, मोबाइल से बात करता था, तो उस की अपनी ही संतानें उसे पागल करार कर देंगी या नहीं? क्या स्पष्टीकरण देंगे सज्जन?

यद्यपि मैंने चारो वेदों को बांचा है, लेकिन मेरे पास वह शक्ति नहीं कि मैं उनको समझ सकूं. मैं दावे के साथ कह रहा हूँ कि वेद पराज्ञान है, ब्रह्मकमल में सब कुछ लिखा हुआ है. लेकिन, चूंकि मैंने वीर्य रक्षा नहीं की - इसीलिए वेद न मेरे समझ में आये और न अब आ ही सकते हैं. क्यों की

इतिहासकारों की समझ के लिए एक लोक कथा है,

एक गांव में चार अंधे रहते थे| उस गांव में एक हाथी आया| गावं के लोग हाथी देखने के लिए उमड पड़े| अंधे भी गए| लेकिन वे देख तो सकते नहीं थे| अतएव, सभी अंधों ने हाथी को छुआ| जिसके हाथ में हाथी का कान लगा, उसने बताया कि हाथी सूप है| जिसके हाथ पैर लगा उसने बताया कि हाथी खम्भा है| जिसके हाथ शरीर लगा उसने बताया कि हाथी पहाड़ है और जिसके हाथ पूँछ लगी उसने बताया कि हाथी रस्सी है|

वीर्य रक्षा के लौकिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ हैं. जो लोग ५३ देशों की

०९/१०/१५

+++

 

+++

५३ ईसाई व इस्लामी उपनिवेश देशों के मानवजाति को दास एलिजाबेथ ने बनाया है. अखिलेश ने नहीं!

www.aryavrt.com/fatwa

मुसलमान आप से मांगता नहीं है, उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ ने वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए मुसलमानों को दिया है. जब वैदिक सनातन धर्म मिट जायेगा इस्लाम मिटा दिया जायेगा.

+++

+++

http://www.aryavrt.com/muj15w40by-govup

+++

०६/१०/१५

+++

 

+++

मानवजाति के मुक्ति का मार्ग उपनिवेश और भारतीय संविधान का उन्मूलन है.

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी की कमजोरी औरत थी. आतंक की साया में जीता था. अंग्रेजों ने गांधी के इस कमजोरी का भरपूर दोहन किया. जैसा कि आज हो रहा है, सारे लोकसेवक, संत और जज यौन के अपराध में जेल जाने से आतंकित हैं. जब कि आप धरती की सभी नारियों के बलात्कारी जेहोवा (बाइबल, याशयाह १३:१६) और अल्लाह (कुरान २३:६ व ७०:३०) को यौन अपराधी कहते ही या तो कत्ल कर दिए जायेंगे अथवा जेल चले जायेंगे. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

आशाराम बापू और नित्यानंद की फर्जी सीडी की भांति तथाकथित मनु, आभा, नायडू ... सूची लम्बी है आदि के साथ ब्रह्मचर्य के प्रयोग में २०वीं सदी का मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी भी जेल चला जाता. जेल जाने से बचने के लिए गांधी वही करता था, जो अँगरेज़ चाहते थे.

यह गांधी की रंगरेलियों के महिमामंडन का ही जादू था. जिसने एडविना को नेहरु और जिन्ना को मोहपाश में फंसा कर देश का बंटवारा कराया. ३५ लाख से अधिक हिंदुओं को कत्ल कराया. ४ करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए. जो भंडुआ माउंटबेटन १४ अगस्त को वाइसराय था. वही १५ अगस्त को गवर्नर जनरल बन गया. उपनिवेश आज़ादी हो गया!

पहले आप लोग यह कहने का साहस जुटाइये कि माउंटबेटन भंडुआ था. अपनी पत्नी एडविना को नेहरु और जिन्ना को सौंप कर उसने धरती के ५३ देशों सहित इंडिया को ब्रिटेन का उपनिवेश और उपनिवेशवासियों को स्थाई दास बना रखा है. उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

 

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

 

०३/१०/१५

+++

आप लोगों के सात सबसे बड़ी समस्या यह है कि आप लोग अंग्रेजी में लिखते हैं, जो लोग विरोध कर सकते हैं, वे अंग्रेजी नहीं जानते,

 

+++

https://drive.google.com/file/d/1A4ukjQl-YlowXQzA_LzbgN66c4v7-_sFrz962fEuSDtoJEwPG5bgolha0VXq/view?pli=1

+++

इंडिया कब छोड़ेंगे मुसलमान?

नियमानुसार मुझे फांसी ही मिल सकती है. (Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php). जिस दिन एलिजाबेथ राष्ट्रपति या राज्यपाल से अपेक्षा करेगी, मेरी फांसी हो जायेगी. क्योंकि मैंने आर्यावर्त सरकार की स्थापना की है और एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध रत हूँ. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

और

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

 

+++

लोकसेवक ईसाई व मुसलमान ईशनिन्द्कों और खूनियों के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते. पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपने ही शत्रुओं का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करना उनकी विवशता है. लोकसेवकों के पास कोई विकल्प भी नहीं है. या तो वे अपना सर्वनाश करें अथवा पद न ग्रहण करें.

 

आप अपना साम्राज्य कैसे बचायेंगे?

मेरे बारे में विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/bio-data

मैं सदाबहार अभियुक्त हूँ. मात्र ४२ बार जेल जा चुका हूँ. मरने से नहीं डरता. जन को लूटने मे विफल रहा. इसलिए नौकरी न कर पाया. मैं ईसा के साम्राज्य/उपनिवेश का विरोधी हूँ. अतः मृत्युदंड का पात्र. (Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php) व (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)).

लोकसेवकों की नियुक्ति उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए की जाती है| जन को लूटना ही लोकसेवक के पदीय कर्तव्य का निर्वहन है| किसी के पास लोकसेवकों द्वारा किये गए अपने उत्पीडन व लूट के विरुद्ध शिकायत करने का अधिकार ही नहीं है| भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए संकलित किया गया है| देखें भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ इसलिए संकलित की गई है कि लोकसेवक उपनिवेशवासी को लूटे, लेकिन लूट का धन लोकसेवक अपने पास न रख पाए| लेकिन सबकी सम्पत्ति और पूँजी लूटने वाली एलिजाबेथ सरकार भ्रष्टाचारी नहीं है|

लोकसेवक की नियुक्ति ही इसलिए की जाती है कि वे पता लगाते रहें कि किसके पास धन, धरती और सुंदर लड़की है| फिर उसकी सूचना एलिजाबेथ को दी जाती है| दलाली तय होती है| फिर चाहे कत्ल करना पड़े या बुलडोजर लगवाना अथवा अभिलेखों में हेरा फेरी| उसे लूट लिया जाता है| आप प्रमाण देते रहिये, क्या मजाल कि संतों का स्टिंग आपरेशन करने वाली मीडिया एलिजाबेथ के विरुद्ध समाचार ही प्रकाशित कर दे|

 

+++

नाथ जी को नमस्ते!

आप नमो के जान के पीछे क्यों पड़े है?

यह पत्र नमो की सेवा में हैं| नमो को तो पढ़ने का समय मिलेगा नहीं, हो सके तो नमो को पढ़ कर कोई सुना दे| एलिजाबेथ के आँख की किरकिरी तो नमो उसी क्षण हो गए, जिस क्षण कांग्रेस की पराजय का समाचार आया| नमो को एलिजाबेथ नहीं कत्ल कराएगी, बल्कि नमो के अपने ही विश्वासपात्र कत्ल करायेंगे|

http://www.aryavrt.com/al-taqiyya

+++

योग तो योगा हो गया और मेडिटेशन तक सिमट गया.

लेकिन

३०/०९/१५

मेडिटेशन यानी ध्यान पतंजलि योग दर्शन के अनुसार ७ वाँ चरण है. क्या ६ चरणों को लांघ कर ध्यान प्राप्त किया जा सकता है?

वेद तो

अब देखना है कि भगवत गीता को एलिजाबेथ कितना भ्रष्ट करती है.

क्यों कि वेदों को चरवाहों के गीत तो विक्टोरिया ही घोषित करवा चुकी है.

मनुष्य को आजादी तो वीर्य रक्षा द्वारा ही मिल सकती है.

+++

eincmechiduplu-up@nic.in

psecyirriiduplu-up@nic.in

secy-irri-ua@nic.in

 

+++

http://www.aryavrt.com/lootne-hetu-loksevak

 

 

सेवा में,

मुख्य न्यायाधीश श्री धनंजय जी!

एलिजाबेथ जजों का मनोनयन उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए करती है.

http://www.aryavrt.com/kanooni-sahaayta-nhin

 

२८/०९/१५

नियमानुसार मुझे फांसी ही मिल सकती है. (Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php). जिस दिन एलिजाबेथ राष्ट्रपति या राज्यपाल से अपेक्षा करेगी, मेरी फांसी हो जायेगी. क्योंकि मैंने आर्यावर्त सरकार की स्थापना की है और एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध रत हूँ. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

और

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

लोकसेवकों की नियुक्ति एलिजाबेथ के लिए उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए की जाती है. मैं लूटने में विफल रहा, इसीलिए नौकरी नहीं कर सका.

विष्णुप्रयाग निर्माण खंड के अधिकारियों दो नियम विरुद्ध कार्य किये हैं. पहला मेरी सेवा पुस्तिका गायब की है और दूसरी मेरे बकायों का भुगतान नहीं किया है. अपराध उत्तराखंड शासन के सीमा में हुआ है. अतएव मुझे पेंशन उत्तराखंड से चाहिए,

कृपया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का अध्ययन करें. स्वयं राष्ट्रपति या राज्यपाल भी लोकसेवकों को दंडित नहीं कर सकते क्यों कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अंतर्गत उपनिवेशवासियों को लूटना लोकसेवकों का कर्तव्य है.

१० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई, लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति के अवशेष अभी भी बाकी हैं. अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन धर्म को समूल नष्ट करने के लिए रोका गया है.

२७/०९/१५

+++

https://www.youtube.com/watch?v=d7tJdLxo1EI

सनातन संस्था का बुलेटिन.

मिश्र जी को प्रणाम!

मुझे यह स्वीकार करने में तनिक भी संकोच नहीं है कि मैं मैकाले के शिक्षा पद्धति की उपज हूँ. इसीलिये परले दर्जे का मूर्ख भी हूँ. विद्या तो मात्र ब्रह्म विद्या है और ज्ञान भी मात्र ब्रह्म ज्ञान. हम अपनी जड़ों से तभी कट गए, जब हमने निःशुल्क गुरुकुलों का परित्याग कर दिया. मेरे एक जन्मांध सम्बन्धी भद्राचार्य जी हैं. चित्रकूट में एक विश्व विद्यालय चलाते हैं. मैं उनको ही नहीं समझ पाता. वेदों को क्या समझूँगा?

यद्यपि मैंने चारो वेदों को बांचा है, लेकिन मेरे पास वह शक्ति नहीं कि मैं उनको समझ सकूं. मैं दावे के साथ कह रहा हूँ कि

+++

 

उपनिवेशवासी तनिक भी चिंता न करें.

एलिजाबेथ के प्रधान दास नमो के नेतृत्व में हर उपनिवेशवासी सफाई कर्मचारी बन गया. एफडीआई की सीमा बढ़ गई. ‘MAKE IN INDIA’ की धुन पर अब हम विदेशी आकाओं की चाकरी करेंगे.

जब बेचारे लोकसेवक अपनी ही रक्षा नहीं कर सकते, तो उपनिवेशवासियों को क्या बचायेंगे? अब एलिजाबेथ हमारा मांस खायेगी और लहू पिएगी वह भी नमो को बलि का बकरा बना कर!

+++

पद, प्रभुता और पेट के लोभ में

२५/०९/१५

मिश्र जी को प्रणाम!

पहले मेरी विवशताओं को समझिए. मैं ८२+ वर्ष का अत्यंत मूर्ख व्यक्ति हूँ. क्योंकि मैंने गुरुकुल में गौ सेवा कर, योग्य गुरु के सानिध्य में, वीर्य की रक्षा कर, ब्रह्म विद्या नहीं सीखा. लेकिन इसके लिए मेरे अभिभावक दोषी हैं.

यह १९८३ की घटना है. मेरी आयु तब ५० वर्ष पूरी नहीं हुई थी. मैं जोशीमठ में सिचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता था. श्री राम दयाल जी मेरे कार्यालय में ही लिपिक थे. बड़े अच्छे साधक थे. उन्होंने मुझसे कहा वे मुझे परशुराम स्वामी से मिलाने के लिए अलकापुरी ले जाना चाहते हैं. यह स्थान बद्रीनाथ से लगभग ५० किलोमीटर पर है. बड़ा दुर्गम मार्ग है. मुझे पहुँचने में १४ दिन लगे थे. और इतना ही समय वापस आने में भी लगा. जिस गुफा में वे रहते हैं, उसके ठीक सामने स्वर्गारोहण दिखाई देता था. किंवदंती है कि इन्हीं सीढियों से चढ़ कर युधिष्ठिर स्वर्ग गए थे.

उनकी गुफा में न तो कोई बिस्तर था और न ही उनके पास मैंने उनकी एक लंगोट के अतिरिक्त कोई कपड़ा ही देखा. न बर्तन ही. वे हमारी प्रतीक्षा ही कर रहे थे. उन्होंने मुझसे कहा कि उन्होंने ही मुझे बुलवाया है. मैं नौकरी नहीं कर पाऊंगा और मुझे वैदिक सनातन धर्म की रक्षा के लिए भेजा गया है.आदेशात्मक भाव में यह भी कहा कि आगे विश्व में भयानक परिवर्तन होने वाले हैं. मुझे बहुत कठिनाई से गुजरना पड़ेगा. वे मेरी रक्षा करेंगे और जब भी मैं कठिनाई में पडूं, उनको याद करूं.

सच्चाई तो यह है कि मैं प्रभावित तो अत्यधिक हुआ, लेकिन न तब और न आज ही विश्वास करता कि मैं कुछ कर पाऊंगा. उनकी बातें सच हुईं. मैं नौकरी न कर पाया. सरकार ने मेरी २ अरब की सम्पत्ति लूट ली. मेरा परिवार ही मेरा शत्रु हो गया. विश्व में भयानक परिवर्तन भी हो रहे हैं. अब तो मैं उन तक पहुँच भी नहीं सकता हूँ. लेकिन मुझे जब उनकी विशेष आवश्यकता होती है मुझे उनकी छाया ब्रह्मबेला में दिखाई देती है और उनके सुझाव भी मिलते हैं.

बहुत सारे प्रश्न मेरे मन में आज भी उठते हैं. जैसे स्वामी जी ने मुझे ही क्यों बुलाया. पहुंचे हुए संत और साधक स्वयं राम दयाल जी को अपना कार्य क्यों नहीं सौंपा. किसी शक्तिशाली व्यक्ति को क्यों नहीं बुलाया? मैं पूछ भी न पाया और पूछ भी नहीं सकता.

+++

 

२३/०९/१५

 

जनसेवक की नियुक्ति उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए की गई है| लोकसेवक अब बारम्बार एलिजाबेथ के वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के कार्यक्रम में हस्तक्षेप करने लगे हैं| जब कि उनकी नियुक्ति वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए की गई है और इसके लिए लोकसेवकों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अंतर्गत पूरा संरक्षण भी दिया गया है|

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अनुसार लोकसेवक की नियुक्ति उपनिवेशवासियों की सम्पत्ति और पूँजी लूटने के लिए हुई है| अपराधी तो एलिजाबेथ, राज्यपाल टी वी राजेश्वर, बनवारी, मुलायम और मायावती हैं, लेकिन वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव एलिजाबेथ मुलायम और मायावती को तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ में संरक्षण दिलवा रही है और हिंदुओं का हिंदुओं से सफाया करा रही है|

शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पीड़ित के पास है, न पुलिस के पास है और न जज के पास| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति देने का अधिकार राज्यपाल अथवा राष्ट्रपति के पास है, दोनों एलिजाबेथ के अधीन है| मेरी भूमि की लूट के मामले में १९८९ से आज तक जालसाज लोक सेवकों के विरुद्ध, कोई जज, किसी लोकसेवक के विरुद्ध कोई अभियोग ही नहीं चला सका| लोकसेवक जब तक एलिजाबेथ को हिस्सा देगा, उसके विरुद्ध कोई अभियोग ही नहीं चल सकता| अभियोग तब चलता है, जब लोकसेवक या तो एलिजाबेथ को हिस्सा देता ही नहीं या कम देता है| इन आये दिन के घोटालों का शोर इसलिए है कि एलिजाबेथ की धन की प्यास नहीं बुझ रही है| इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान की अन्य शर्त है, जो वैदिक सनातन धर्म को मिटाएगी| एलिजाबेथ को पोप ने कह दिया है कि २१वीं सदी में पूरे एशिया को एलिजाबेथ को ईसाई बनाना है|

तो क्या भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को १५ अगस्त, २०११ के पूर्व भारतीय संविधान से निकल जायेगा? क्या लोकसेवक को लूटने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन दिया गया संरक्षण समाप्त हो जायेगा?

सम्पत्ति और पूँजी लूटने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हम भ्रष्टाचारी नहीं मानते| अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के मौलिक अधिकार छीनने वाले सांसदों व जजों को भी हम भ्रष्टाचारी नहीं मानते| १० रूपये भेंट लेने वाले जजों को और चौराहे पर ड्राईवर से ५० रूपये वसूलते ट्राफिक पुलिस को भी हम भ्रष्टाचारी नहीं मानते| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अस्तित्व में रहते हम किसी लोकसेवक का कुछ बिगाड़ भी नहीं सकते|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से लोकसेवकों की नियुक्ति उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| लोकसेवक लोक यानी उपनिवेशवासी को लूटता तो है, लेकिन कुत्ते की हड्डी की भांति उस लूट का उपभोग नहीं कर पाता| क्यों कि लूट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से नियंत्रित किया गया है| जो लोकसेवक एलिजाबेथ को हिस्सा नहीं देता, उसे जेल भेज किया जाता है|

किसी के पास लोकसेवकों द्वारा किये गए अपने उत्पीडन व लूट के विरुद्ध शिकायत करने का अधिकार ही नहीं है| भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए संकलित किया गया है| देखें भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग). लोकसेवक की नियुक्ति ही उपनिवेशवासी को लूटने के लिए की जाती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ इसलिए संकलित की गई है कि लोकसेवक उपनिवेशवासी को लूटे लेकिन लूट का धन लोकसेवक अपने पास न रख पाए|

जब तक भारतीय संविधान, बाइबल और कुरान है, भ्रष्टाचार सदाचार है और नारियों का बलात्कार अब्रह्मी संस्कृतियों का नैतिक और लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार| लोक लेखा समिति को भ्रष्टाचार नहीं मिटाना है| उसे लूट में अपना हिस्सा चाहिए| जिसे भी नैतिक समझ होगी वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने की मांग करेगा| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को समाप्त करने की मांग करेगा|

 

२०/०९/१५य

+++

डाक्टर त्रिवेदी जी को प्रणाम!

क्यों अपनी जगहंसाई कराते हैं? आप को पता होना चाहिए कि

+++

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने मुसलमान और ईसाई सहित मानव मात्र को अपराधी घोषित करने वाले अब्रह्मी संस्कृतियों संस्कृतियों को बनाये रखने का ईसाइयों व मुसलमानों को असीमित मौलिक अधिकार दे रखा है|

अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार की ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं देना चाहता हूँ| सभी पाठक हमें सूचित करें कि उन्हें हमारी शुभ कामनाएं स्वीकार हैं या नहीं|

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने और बनाये रखने की, जजों ने शपथ ली है, से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है? १९५० से आज तक इस मानव घाती भारतीय संविधान का किसने विरोध किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग भारतीय संविधान का उन्मूलन करेंगे|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग इसलिए लड़ रहे हैं कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें| मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें| आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ| मैं आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ| और न कुरान व बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करता हूँ| मै भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानता हूँ| जो ऐसा नहीं मानता, वह दया का पात्र है|

चर्चों व मस्जिदों से हर ईसाई व मुसलमान को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| अत: चर्च व मस्जिद नष्ट करना भा०दं०सं० के धारा १०२ के अधीन हमारा कानूनी अधिकार है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग चिल्ला चिल्ला के कह रहे हैं कि हमने ६ दिसम्बर, १९९२ को बाबरी ढांचा गिराया है| हम धरती पर एक भी मस्जिद या चर्च नहीं रहने देंगे|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| एलिजाबेथ के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक उपनिवेशवासी ईसा की भेंड़ है| अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है| हमें लोकपाल नहीं, भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का उन्मूलन चाहिए|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| एलिजाबेथ के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक उपनिवेशवासी ईसा की भेंड़ है| अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के सदस्य वेब साइटों के आपत्ति जनक सामग्रियों के प्रकाशन पर प्रतिबन्ध का स्वागत करते हैं और मांग करते हैं कि मस्जिद व अज़ान बंद की जाये| कुरान पर प्रतिबंध लगाया जाये|

मै अस्सी साल का बूढ़ा व्यक्ति हूँ| मुझे जेल में २००१ में ही डॉक्टरों ने जहर दिया| जज के आगे झुकने के पहले सोसल वेबसाइट के स्वामी मानव जाति के हित में इस्लाम को जड़ से मिटाने में अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार का सहयोग करें|

अर्मगेद्दन का मार्ग है टाटा, बिड़ला, अम्बानी आदि की सम्पत्तियां लूट लेना| इसके लिए एलिजाबेथ एफडीआई लाई है| एफडीआई का विरोध टाटा, बिड़ला, अम्बानी तो कर नहीं सकते| विरोध मात्र अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग कर सकते हैं, लेकिन उनको टाटा, बिड़ला, अम्बानी आदि सहयोग भी नहीं कर सकते| अतएव रजवाड़ों, खानों, कारखानों आदि को लूटने के बाद अब अम्बानियों, टाटा, बिरला आदि के लूट का नम्बर है| जागरण सहित मीडिया की लूट में थोड़ा विलम्ब होगा|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी हैं| यदि आप हमारी गुप्त सहायता नहीं करेंगे तो हम मान लेंगे कि आप एलिजाबेथ के एजेंट हैं| हर हाल में आप जेल में सड़ जायेंगे और पतंजली की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ की हो जाएगी| वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त एलिजाबेथ के असीमित मौलिक अधिकार से|

भारतीय संविधान मानव जाति का शत्रु है| आज कल भ्रष्टाचार मिटाने और विदेशों में जमा धन वापस लाने की अन्ना व योगगुरू की मुहिम जारी है| पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी भ्रष्टाचार करने वालों को नंगा कर रहे हैं| इन लोगों में एक समानता है| यह लोग भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का विरोध नहीं करते| न तो भ्रष्टाचार के संरक्षक दंप्रसं की धारा १९७ का विरोध करते हैं| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी भारतीय संविधान को रद्द करेंगे|

मै अपने विरुद्ध लगे ५०वे अभियोग, अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के मालेगांव मामले, में वांछित हूँ|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग मान लेते हैं कि जन लोकपाल की नियुक्ति हो जाती है| बाबा रामदेव के आंदोलन से विदेशों का सारा काला धन इंडिया आ जाता है| सारी भ्रष्टाचार की रकम भी सरकारी खजाने में पहुंच जाती है| तो भी उपनिवेशवासी को क्या मिलेगा? रोम राज्य के भावी महाराज राहुल के कथनानुसार सारी रकम का ५%| शेष ९५% तो शासक के मातहत और उपकरण खा जायेंगे| स्पष्ट है कि इनकी गिद्ध दृष्टि लूट पर एकाधिकार प्राप्त करने पर गड़ी है| मानव मात्र के अधिकारों से इनका कोई सरोकार नहीं|

यदि स्वयं बचना व मानव जाति को बचाना चाहें तो अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधी हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| हमारे विषय में अधिक जानने के लिए आप को नीचे लिखी लिंकें पढ़नी पड़ेगी:-

http://www.aryavrt.com/Home/chargesheet-download

यदि झा जी अपना व मानवजाति का अस्तित्व चाहते हों तो वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार की सहायता करें|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतंकवादी, आतताई और साम्राज्यवादी विस्तारवादी अब्रह्मी संस्कृतियों के विरुद्ध खुली लड़ाई लड़ रहे हैं| हम इनको धरती पर नहीं रहने देंगे| यह देश हमारा है, हमसे पाकपिता गाँधी ने रामराज्य का वादा किया है| गांधी ने ही इसे छल से उपनिवेश बनवाया है. अपनी स्वतंत्रता और अपना वैदिक सनातन धर्म हमें प्रिय है. ईमाम मस्जिदों से अज़ान देते हैं| जो हमारे साथ प्रतिदिन किया जाने वाला जघन्य अपराध है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

 

+++

किरण बाबू को नमस्ते!

 

+++

नमो शासन में बपतिस्मा, अज़ान और खुत्बे जारी रहेंगे.

२४.    बपतिस्मा व अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान अविश्वासियों को कत्ल करने का उपदेश देता है|

२५.    दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ ईशनिंदा, बपतिस्मा और नारी बलात्कार के अपराधों को संरक्षण देती है|

२६.    हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी बाइबल, कुरान, चर्च, मस्जिद, बपतिस्मा, अज़ान, नमाज़ और खुत्बे समाप्त करना चाहते हैं. हमें सहयोग दें.

२७.    गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाएं हैं| एक शिला का नाश मानवजाति को नष्ट कर देगा| आक्रांता अब्रह्मी संस्कृतियों ने भारत को इंडिया और वसुंधरा के प्रत्येक मनुष्य को अपना दास बना रखा है| भारत आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश इंडिया है|

२८.    क्या आप उपनिवेश और भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं?

२९.    क्या आप अपने बेटे को निःशुल्क गुरुकुल में शिक्षा दिला सकते हैं?

३०.    क्या किसान बैल से खेती कर सकता है?

३१.    क्या आप गंगा में गंदे नालों को जोड़ने से रोक सकते हैं?

३२.    क्या आप वेदों की माता गायत्री का जप करते हैं?

३३.    विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

३४.    http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

३५.    हमें भय एलिजाबेथ से कम है, एलिजाबेथ के उपनिवेश से अधिक है. अतएव टुकड़ों में लड़ना छोड़िये विचार करिये कि आतताई अब्रह्मी संस्कृतियाँ धरती पर क्यों रहें?

 

१९/०९/१५

पंथनिरपेक्ष कैसे?

पंथनिरपेक्ष कौन?

पंथनिरपेक्ष कैसे?

सबको दास बनाना और स्वयं दास बनना ईसाइयत (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और इस्लाम (कुरान २:३५) के मूर्ख अनुयायियों की फितरत है| एकेश्वरवाद के अनुसंधान का यही कारण है| मूसा एकेश्वरवाद का जनक है| ईसा और मुहम्मद तो नकलची थे| जेहोवा और अल्लाह से क्रमशः मूसा और मुहम्मद ही मिल सकते हैं| इस प्रकार धूर्त पैगम्बरों ने मानव मात्र को दास बनाने की अनूठी विधि ढूंढ रखी है| यहूदी मूसा का दास है और मुसलमान मुहम्मद का| जो दास नहीं बनता उसे पैगम्बर लूट और नारी बलात्कार का लोभ देकर कत्ल कराते रहे हैं| इस प्रकार अब्रह्मी संस्कृतियां मानव मात्र को दास बनाने के अमोघ अस्त्र है, पैगम्बर तो रहे नहीं-उत्तराधिकार शासकों (एलिजाबेथ को) और पुरोहितों को सौँप गए हैं|

+++

यदि सभी धर्म एक जैसे हैं तो फिर इतने धर्मों की जरूरत क्यों पड़ी?

+++

यूरोप में चर्च और राज्य के बीच टकराव में से सेकुलरवाद का उद्भव हुआ|राज्य ने चर्च द्वारा लौकिक या पार्थिव मामलों में दखल के विरूध्द आवाज़ उठाई|इसलिए सेकुलरवाद का अर्थ हुआ राज्य की धर्मनिरपेक्षता| इसके विपरीत इंडिया में धर्म को कर्तव्य या नीति के रूप में स्वीकार किया गया और इसे जीवन के सभी अंगों के लिए ग्राहय माना गया, यहां तक कि राज्य के लिए भी। इंडिया की सोच धर्मनिरपेक्ष राज्य की नहीं धर्माधारित राज्य की रही है। सेकुलरिज्म की एक अन्य व्याख्या धर्म के मामले में राज्य की तटस्थता के रूप में की जाती है। राज्य का कोई धर्म नहीं होना चाहिए, राज्य को धार्मिक मामलों से स्वयं को अलग रखना चाहिए, इत्यादि। सेकुलरिज्म की एक अन्य व्याख्या यह है कि राज्य सभी धर्मों से समान व्यवहार करे, राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हों और राज्य विभिन्न धार्मिक समुदायों में भेदभाव न करे।हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति स्वभाव से ही पंथनिरपेक्ष है। इसमें विविध धर्माचरणों, विश्वासों और उपासना पध्दतियों का स्वीकार है। एक ईश्वर को पाने के, उस तक पहुंचने के मार्ग भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, ईश्वर की उपासना के तरीके अलग-अलग हो सकत

अब बात आती है कि भारतीय संविधान पंथनिरपेक्ष है या नही| अनेक मतो को मानने वाले इंडिया के लोगो की एकता और उनमें बंधुता स्थापित करने के लिये संविधान में पंथनिरपेक्ष राज्य का आदर्श रखा गया है|इसका अर्थ है कि राज्य सभी मतो की समान रुप से रक्षा करेगा और स्वयं किसी भी मत को राज्य के धर्म के रुप मंो नही मानेगा| यह विधि द्वारा प्रतिपादित है|अगर इंडिया पंथनिरपेक्ष राज्य नही है तो कैसे एक मुस्लिम इंडिया का राष्ट्रपति बन गया, एक सिख प्रधानमंत्री है, आडवाणी जी कैसे अगले प्रधानमंत्री बनने का सोच रहे है| हमारे संविधान में किसी भी मत को "राजकीय चर्च' मानने की व्यवस्था नही है, इसलिए हम पंथनिरपेक्ष राज्य में रहते है और यही बात हमे याद रखनी चाहिये|

(क्रमशः) हो सकते हैं, ईश्वर की उपासना के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। एक ही तत्व को विद्वान् भिन्न-भिन्न नामों से पुकारते हैं— ‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति'। भारतीय संस्कृति के इस धार्मिक उदारवाद के स्वभाव का ही परिणाम है कि इंडिया पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है। यहां धार्मिक मामलों में न भेदभाव किया जाता रहा है और नहीं धार्मिक आधार पर किसी धार्मिक समुदाय का उत्पीड़न। किन्तु सेकुलरिज्म के राजनीतिक इस्तेमाल ने इसका रूप विकृत कर दिया है। सेकुलरिज्म के नाम पर वोट की राजनीति का चलन बढ़ता जा रहा है इसलिए इसका अर्थ जानना जरूरी है|सुप्रीम कॉर्ट और और विभिन्न कानूनविज्ञ के अनुसार सेक्युलर शब्द पंथ निरपेक्ष है|

क्या मैं जान सकता हूँ कि इस्लाम और ईसाइयत धरती पर है ही क्यों? यदि आप इस्लाम और ईसाइयत को पंथनिरपेक्ष धर्म स्वीकार करते हैं, तो हमारे हुतात्माओं को अपमानित न कीजिए.

+++

मात्र यही लोग नहीं, आशाराम बापू, मुरारी बापू जैसे धर्मोपदेशक हिंदू मुस्लिम एकता की बात करते हैं। सर्वधर्म समभाव के सम्मेलन व यज्ञ करते हैं। इन्हें यह बात समझ नहीँ आती कि यदि आर्य जाति मिट गई तो इनके प्रवचन सुनने वाला कौन होगा? कौन कहने वाला मिलेगा, ‘सब धर्म समान हैं’; ‘हिंदू मुस्लिम भाई भाई हैं’; ‘भारत पंथनिरपेक्ष देश है’; ‘मजदूर का कोई मजहब नहीँ होता’ ‘हमें रोटी चाहिए मंदिर नहींऐसे बकवास पाकिस्तान और बंगलादेश में कोई नहीँ करता। इनके जैसे ही कतिपय गुरुओं और उपदेशकों, जिनमें ठाकुर बालक ब्रह्मचारी, का नाम उल्लेखनीय है, पर जब इस्लामी आक्रमण हुआ तो यह बाल बाल बचे और भाग कर भारत आ गए। इन्होंने अपने शिष्यों को बचाना तो दूर, यह उनकी सहायता भी न कर सके। अपमानित हो कर भी वे अपनी आदत से बाज न आए।

भारत आते ही उन्होंने ग्रामोफोन का रिकार्ड बनवा डाला जिसकी शुरुआत ही अल्लाहु अक्बरसे होती है। यह लोग गैर मुसलमानों को बताते हैं कि अल्लाह और ईश्वर एक हैं। राम ही रहीम हैं और कृष्ण ही करीम। अल्लाह और ईश्वर, राम और रहीम, कृष्ण और करीम का सहअस्तित्व पाकिस्तान, कश्मीर और बंगलादेश में सम्भव न हुआ। अल्लाह के ईश्वरीय आदेश से (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९) अल्लाह के अनुयायियों ने जिन्हें उनकी अपनी मातृभूमि से ठोकरें मार कर भगा दिया, उनकी आखों के सामने उनकी बहन बेटियों का बलात्कार किया, (कुरआन ४:२४ व २३:६) उनके दुधमुहें बच्चों को कत्ल किया और उनकी पुस्त दर पुस्त संचित संपत्ति को लूट लिया (कुरान ८:१, ४१ व ६९) वे ही लोग इन आतताइयों के गुणगान करते हैं। पाठक जी! आप ही बताएं इनसे बढ़कर आत्मघाती, राष्ट्रघाती और नीच व्यक्ति कौन हो सकते हैं?

काफ़िर समाज को इन शत्रुओं को अच्छी तरह परखना चाहिए। इनकी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। यह लोग इस्लाम परस्त हैं, जिसे मिटाया न गया तो काफ़िर जातियों का अस्तित्व मिट जाएगा। मात्र आर्य ही नहीँ स्वयं यह लोग यानी ईसाई व मुसलमान भी जीवित न बचेंगे। क्यों कि अभी यह निर्णय नहीँ हो सका है कि अल्लाह बड़ा है या जेहोवा? अभी यह लोग आर्य जाति और वैदिक संस्कृति को मिटाने के लिए एकजुट हुए हैं। जब आर्य मिट जायेंगे तब अब्रह्मी संस्कृतियों के बीच युद्ध होगा|

श्री कुलदीप नैयर शरणार्थी हैं। मेरे पत्रों के प्रतिवाद में कुछ भी लिखना आप लोग उचित नहीँ समझते। ऐसे पत्रों को आप गृहमंत्री और मुसलमानों के स्वसुर अडवाणी के पुलिस के पास भेजते रहे हैं। श्री कुलदीप नैयर ने लिखा है कि किसी भी बातचीत में विश्वास ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व होता है। लेकिन हमारे विश्वास को लोकतंत्र सदा से ठगता आया है। श्री कुलदीप नैयर का मूल निवास पाकिस्तान है। लेकिन यह व्यक्ति आज तक पाकिस्तान के गठन को विवादित नहीँ मानता। इस व्यक्ति को अपने मातृभूमि से तनिक भी लगाव नहीं। जो व्यक्ति अपने मातृभूमि का ही नहीँ वह हमारा क्या होगा? इसके विपरीत जो भी व्यक्ति पाकिस्तान को विवादित मानता है। उसे आप जेल भिजवाते हैं।

क्यों कि आप डाकुओं के अभयारण्य संसद में बैठते हैं। आप व यह व्यक्ति अज़ान और नमाज को अपराध नहीँ मानते। पाकिस्तान गांधी की लाश पर बन रहा था। आज वही व्यक्ति जिसने पाकिस्तान बनवाया और उसे ५५ करोड़ रूपए इनाम दिलवाया, आप का राष्ट्रपिता है! यह समझ में नहीँ आता कि आप लोगोँ को हमारी वल्दियत तय करने व हमारी माताओं को ब्यभिचारिणी घोषित करने का अधिकार कहां से मिल गया?

+++

हम मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे क्यों होने दे रहे हैं?

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. हम अब्रह्मी संस्कृतियों को रहने दे रहे हैं?

दोनों बातें सही नहीं हो सकतीं| ईसा का पुजारी या अज़ान देने वाला और नमाज पढ़ने वाला पंथनिरपेक्ष नहीं हो सकता| कुरान और बाइबल के रहते शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, सर्वधर्म समभाव सम्भव नहीं है|

+++

मनुष्य के ईश्वरीय शक्ति के मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करना धूर्त पैगम्बरों ने मजहब का अपरिहार्य कर्म बना रखा है, वह भी विश्वास के आधार पर. बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिरभी आप खूनी, लुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश कर दिए गए हैं? बैरिस्टर २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता मोहनदास करमचन्द गांधी ने मजहब के आधार पर देश का बंटवारा भी किया और मुसलमानों को जिन्ना के सुझाव के बाद भी इंडिया से जाने नहीं दिया! तब हमने विरोध क्यों नहीं किया?

चौंकिये नहीं! दोनों घोषणायें पंथनिरपेक्ष है? अतः इंडिया के उपनिवेशवासियों को मानवजाति के, डायनासोर की भांति, लुप्त होने का इंतज़ार है.

लेकिन अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे इन्हीं कानूनों के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश कर दिए गए हैं.

 

१८/०९/१५य

ए-१ व ए-२ दूध पर बहस.

https://www.youtube.com/watch?v=kOgE4tBYm5E

 

+++

गीताप्रेस के पास दाताओं की कमी नहीं है. न ही समस्या वेतन बढ़ाने से हल होने वाली है. समस्या इंडिया का उपनिवेश होना और भारतीय संविधान है. जब तक बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का महिमामंडन होता रहेगा वैदिक सनातन संस्कृति यूं ही मिटती रहेगी.

वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट कराने का षड्यंत्र

जिस भाषा मे आप लिख रहे हैं, उसे देश के कितने लोग जानते हैं?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मानवजाति के अस्तित्व को मिटाने के लिए संकलित किया गया है. उपनिवेशवासियों की समस्या अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं. पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

 

१५/०९/१५

+++

http://www.aryavrt.com/muj15w37y-aapaatkaal-ke_jj

http://www.aryavrt.com/muj15w37by-appeal-khariz

http://www.aryavrt.com/muj15w37ay-azaan-baptisma

http://www.aryavrt.com/Muj15W36by-VIVSH-NMO

http://www.aryavrt.com/muj15w35y-atmghati-lg

http://www.aryavrt.com/muj15w36y-aatankvadi-rajypal

http://www.aryavrt.com/muj15w36ay-vivsh-nmo

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

http://www.aryavrt.com/muj15w33-upnivesh-divas

http://www.aryavrt.com/muj15w34-orop-kahaanse

http://www.aryavrt.com/muj15w32by-moorkh-isis

+++

भ्रष्ट भारतीय संविधान!

राज्य के स्थापना का उद्देश्य प्रजा के जान-माल की रक्षा करना है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८) और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०/०६/१९७९ से मिटा दिया गया है|

कमाल सांसदों और जजों का!

इस अनुच्छेद के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है| जब सम्पत्ति और पूँजी पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी का अधिकार ही नहीं, तो कोई लूटे उपनिवेशवासी को तो ५% ही मिलेगा| शेष ९५% तो राहुल के अनुसार एलिजाबेथ के बिचौलिए खायेंगे| जिसके आप आज भी दास हैं| एलिजाबेथ के संविधान में आस्था और निष्ठा की नमो ने शपथ ली है और २६ मई, २०१४ को भी लेंगे|

इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मान सकता! (एआईआर, १९५१, एससी ४५८). जब १९९१ से ही बाजारी व्यवस्था लागू हो गई, तो अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने में और ३१ को पुनर्जीवित करने में क्या कठिनाई है? आर्यावर्त सरकार यह जानना चाहती है|

कमाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का!

१४/०९/१५य

+++

 

 

+++

ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ के अंतर्गत नमो सहित हर उपनिवेशवासी, चाहे मुसलमान या ईसाई ही क्यों न हो, नागरिकता विहीन एलिजाबेथ की प्रजा है| क्योंकि उपनिवेशवासी बिना पारपत्र एवं वीसा के ब्रिटेन में नहीं घुस सकता. एलिजाबेथ कौन है? जानने के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

+++

 

पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षण, पोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

१३/०९/१५

+++

एलिजाबेथ (शासक) को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हमे कत्ल कराने का और भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने हमारी सम्पत्ति और पूँजी लूटने का अधिकार दिया है| नमो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म कैसे बदलेंगे?

 

+++

एक अफीमची की अठन्नी खो गई| वह अठन्नी को लैम्प पोस्ट के उजाले में ढूंढ रहा था| एक राही ने पूछा, अठन्नी कहाँ गिरी थी, उसने अँधेरे में काफी दूर पर जगह बताई| राही ने झुंझला कर पूछा, फिर यहाँ क्यों ढूंढ रहे हो| अफीमची ने उत्तर दिया कि अँधेरे में कैसे ढूँढू?

 

 ११/०९/१५

+++

इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश (डोमिनियन) है| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php ने १५ अगस्त, १९४७ से स्वातन्त्रय युद्ध को मृत्युदंड का अपराध बना दिया है.

 

ब्रिटिश उपनिवेश

+++

न्यायमूर्ति जस्टिस राजिंदर सच्च७र जी और उनके वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की साजिश तो भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ बना कर १८ जुलाई, १९४७ को ही कर दी गई. इस कानून की प्रस्तावना को ही पढ़ लीजिए. न्यायमूर्ति जी कानूनविद हैं. उनको भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, का पूरा ज्ञान है| लेकिन न्यायमूर्ति जी ने उपनिवेश, बाइबल और भारतीय संविधान का विरोध कभी नहीं किया.

न्यायमूर्ति जी में साहस हो तो देश को एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें. सभी समस्याएं एक साथ हल हो जाएँगी.

 

 

+++

मनुष्य के स्वयं महिमामंडित मौत के फंदे...

खतना

बपतिस्मा

स्वर्ग

छुआछूत

http://www.aryavrt.com/untouch-ability

ब्रह्मचर्य के प्रयोग.

http://www.aryavrt.com/Home/yauna-aparadha

सती का महिमामंडन अपराध.

 

वैश्यावृत्ति को कानूनी संरक्षण.

अज़ान और खुत्बों का महिमामंडन

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का महिमामंडन

+++

9/10/2015y sun shine to sun shine. 24 hours.

+++

https://www.youtube.com/watch?v=3bSvXOY1E_s

 

Indian Independence Act, 1947 UTube

 

9/9/2015

 

+++

हमारे असीमानंद जी ने स्वीकार किया है कि हम इस्लाम और मस्जिद नहीं रहने देंगे| क्यों कि मस्जिदें मजहब के आधार पर शत्रुता प्रसारण के केंद्र हैं|

जिन मजहबों, चर्च और मस्जिदों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं, उनकी रक्षा के लिए नमो ने हमारे असीमानंद जी को बंदी बना रखा है|

नमो जी को यह बात समझ नहीं आती कि मुसलमान उनके इष्ट देवताओं का अपमान करते हैं|

असीमानंद जैसे लोगों से संघ का किनारा!

वाह आरएसएस वाह!

 

ईसाइयत और इस्लाम उनका कहना है कि उन्होंने बहुत पहले यह कह दिया है कि संघ में अतिवादी विचार वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर प्रहार करते हुए कहा कि चारों तरफ से भ्रष्टाचारों के आरोपों से घिरी कांग्रेस लोगों का ध्यान बंटाने के लिए हिन्दू आतंकवाद का शोर मचा रही है और उसे संघ के साथ ज़ोडने का प्रयास कर रही है। यह रोचक है कि एक तरफ कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि भाजपा के लोग आतंकवादी घटनाआें के साथ संघ परिवार की संलिप्तता से लोगों का ध्यान हटाने के लिए भ्रष्टाचार के मिथ्या आरोपों को अनावश्यक तूल दे रहे हैं, तो संघ के प्रमुख कांग्रेस के नेताआें पर आरोप लगा रहे हैं कि वे भ्रष्टाचार के आरोपों से ध्यान हटाने के लिए आतंकवाद के गलत आरोपों का सहारा ले रहे हैं। भागवत तथा संघ परिवार के नेताआें का यह भी आरोप है कि सबरीमलय वनवासी आश्रम के संचालक असीमानंद को गिरफ्तार करके उनसे जबर्दस्ती इस तरह का बयान दिलवाया जा रहा है और उसे ब़ढाच़ढाकर प्रसारित कराया जा रहा है कि समझौता एक्सप्रेस व मालेगांव तथा हैदराबाद के मक्का मस्जिद विस्फोटों में उनका तथा संघ से ज़ुडे लोगों का हाथ था।

इन आरोपोंप्रत्यारोपों में कितना क्या सच है, यह बहुत कुछ इस देश के प्रबुद्ध लोगों को मालूम है। लेकिन यहां अहम सवाल यह है कि क्या असीमानंद वास्तव में हिन्दू आतंकवाद के प्रतीक हैं और संघ से उनका ज़ुडाव क्या संघ को भी आतंकवादी बना देता है ? इसमें दो राय नहीं कि हिन्दू महासभा और उसके बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का गठन इस देश में मुस्लिम लीग के गठन के बाद इस्लामी कट्‌टरपन और उसकी हिंसा से बचाव के लिए हिन्दुआें को संगठित करने के लिए हुआ, लेकिन इन संगठनों ने सैद्धांतिक तौर पर कभी भी हिंसा या प्रतिहिंसा को अपना हथियार नहीं बनाया, इनका चरित्र प्रतिरक्षात्मक ही बना रहा। फिर भी इनमें यदि हिंसा का जवाब हिंसा से देने का विचार रखने वाले कुछ लोग आ गये, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं, यह अस्वाभाविक भी नहीं। देश के स्वतंत्र होने के बाद ऐसी चुनौतियां क्रमश: कम होती गयी थीं, लेकिन इधर के एक दो दशकों में अंतर्राष्ट्रीय जिहादी आतंकवाद ने फिर देश के सामने एक हिंसक चुनौती ला ख़डी की, जिसका मुकाबला करने में इस देश की राजसत्ता भी नाकाम सिद्ध हो रही है। ऐसे में इन संगठनों में शामिल कुछ लोगों ने यदि हिंसा का जवाब हिंसा से देने की ठान ली हो, तो इसे भी अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता। लेकिन इस देश में अफसोस की बात यह है कि जो ऐसा करते हैं या सोचते हैं, वे सार्वजनिक तौर पर उसे स्वीकार करने का साहस नहीं रखते।

आश्चर्य है कि मोहन भागवत में भी यह कहने का साहस नहीं है कि यदि हिन्दुआें के खिलाफ आतंकवादी हमले ब़ढेंगे, तो उसकी प्रतिक्रिया में हिन्दुआें के बीच भी उग्रवाद पैदा हो सकता है। असीमानंद जैसे लोग ऐसी प्रतिक्रिया की ही देन हैं। वे सिद्धांतत: हिंसा के अनुयायी नहीं हैं, लेकिन प्रतिक्रिया के क्षोभ में हिंसा का अस्त्र अपना लेना किसी साधु संत के लिए भी अस्वाभाविक नहीं। सिख तो शांतिप्रिय भक्तों का संगठन था, लेकिन धर्म व जाति रक्षा के लिए वह शस्त्रबद्ध संगठन बन गया। उत्तर इंडिया के तमाम तपस्वी साधुआें ने अपने चिमटे को ही हथियार बना लिया था और तपस्या छ़ोडकर अपने शिष्यों को ल़डनेभ़िडने का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया था। अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गयी, तमाम लोगों ने हर्ष मनाया, लेकिन कोई यह कहने के लिए सामने नहीं आया कि हमने इसे गिराया या हमने इसे क्यों गिराया।

असीमानंद आदि पर जो आरोप लग रहे हैं या जिस कृत्य को वे स्वयं स्वीकार कर रहे हैं, वह निश्चय ही गलत और निंदनीय है, यदि जिहादी आतंकवाद के विरुद्ध उनके मन में वास्तविक गुस्सा है, तो उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए और सीधी ल़डाई ल़डनी चाहिए। चोरी छिपे बम रखकर तो वे भी वही कायराना हरकत कर रहे हैं, जो जिहादी आतंकवादी करते आ रहे हैं। संघ को भी इन मामलाेें में सत्य और साहस का परिचय देना चाहिए। प्रतिरक्षात्मक बयानों से उसकी रक्षा नहीं हो सकेगी।

असीमानंद जैसे लोगों से संघ का किनारा !

जीते वो हैं जो मरना जानते हैं| जिन्होंने असीमानंद जैसे योद्धा से किनारा कर लिया हो, उन्हें मिटाने में एलिजाबेथ को कितने मिनट लगेंगे?

जो कुछ असीमानंद जी आज कह रहे हैं, उसे हमने साध्वी प्रज्ञा जी के बंदी बनते ही प्रेस विज्ञप्ति के द्वारा स्वीकार कर लिया था| देखें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

असीमानंद जैसे लोगों से संघ का किनारा !

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने एक वक्तव्य में यह साफ कर दिया है कि तथाकथित हिन्दू आतंकवाद का उनके संगठन से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने बहुत पहले यह कह दिया है कि संघ में अतिवादी विचार वालों के लिए कोई स्थान नहीं है।

भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को नोटिस कौन देगा?

क्या आप ब्रिटिश की दासता से मुक्ति, उपासना की स्वतंत्रता, और सम्पत्ति व उत्पादन के साधन प्राप्त करने के इस युद्ध में हमे तन, मन और धन से सहयोग देंगे?

संघ परिवार हमारे आर्यावर्त सरकार को अतिवादी और आतंकवादी मानता है और मुस्लिम परस्त है| संघ परिवार ने हमारे असीमानंद का खून पीकर, उनको एलिजाबेथ के जल्लादों के हाथों सौँप दिया है| अतएव मानव जाति का शत्रु है| एलिजाबेथ को ईसा का राज्य स्थापित करना है|

हमसे पाकपिता गाँधी ने स्व(अपना)तन्त्रता और रामराज्य का वादा किया है| अमेरिकी, भारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ के सार्वभौमिक मानवाधिकार के घोषणापत्र हमे उपासना की स्वतंत्रता का वचन देते है|

हमें आतंक के बल पर अल्लाह के उपासना की दासता/अधीनता और ईसा का रोम राज्य स्वीकार करने के लिए विवश किया जा रहा है| लेकिन हमें ईसा के रोम राज्य में रहने और अल्लाह की उपासना करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता|

मस्जिद गिराना काफ़िर का कानूनी अधिकार है| जो भी अब्रह्मी संस्कृतियों का संरक्षक है, मानव जाति का शत्रु है|

१४३६ वर्ष पूर्व मुसलमान नहीं थे| सभी मुसलमान स्वधर्म त्यागी हैं| इस्लामी हठधर्म स्वधर्मत्यागी को कत्ल करता है| (कुरान ४:८९). हमारे पूर्वजों से भूल हुई है| हमारे पूर्वजों ने अब्रह्मी संस्कृतियों की हठधर्मी को ईसाइयों व मुसलमानों पर लागू कर उनको कत्ल नहीं किया| हम अपने पूर्वजों की गलती को सुधारना चाहते हैं| हर काफ़िर आर्यावर्त सरकार को सहयोग दे| आर्यावर्त सरकार मुसलमानों की हठधर्मी मुसलमानों पर लागू करेगी| आर्यावर्त सरकार धरती पर इस्लाम नहीं रहने देगी| हमें आप के सहयोग की नितांत आवश्यकता है| आप से अनुरोध है कि बहुत हो चुका, असीमानंद के पीछे पड़ने के स्थान पर एलिजाबेथ से पूछिए, कि मात्र कश्मीर में १९९२ तोड़े गए १०८ मंदिरों की जांच कौन करेगा?

जो कुछ असीमानंद जी आज कह रहे हैं, उसे हमने साध्वी प्रज्ञा जी के बंदी बनते ही प्रेस विज्ञप्ति के द्वारा स्वीकार कर लिया था| जिन्हें विश्वास न हो वे हमारे स्वामी असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा और जगतगुरु अमृतानंद का हाल देख लें| हमारे विरुद्ध कोई प्रमाण नहीं है, फिर भी हम एलिजाबेथ द्वारा प्रताड़ित हो रहे हैं| नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें|

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

मानव द्रोही भारतीय संविधान को संरक्षण स्वयं मीडिया दे रही है| हम चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम धरती पर एक भी मस्जिद नहीं रहने देंगे| असीमानंद जी के इकबालिया बयान पर मीडिया के लोग शक करके क्या संदेश देना चाहते हैं? यही न कि आप को अपने ईश्वर व नारियों के अपमान की, अपने सम्मान की, अपने वैदिक संस्कृति के रक्षा की, अपने जीवन आदि की तनिक भी परवाह नहीं है| आप को ईसा की भेंड़ बनने में लज्जा नहीं|

जिन मस्जिदों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं, उनकी रक्षा के लिए नमो ने हमारे असीमानंद जी को बंदी बना रखा है|

 

       समाजवादी, ईसाई व मुसलमान समझें कि वे अज्ञान के स्वर्ग मेँ जी रहे हैँ. विश्वास की दुनियाँ मेँ चाहे जो भी खूबियाँ हों, वे ईश्वर प्रदत्त अपने ज्ञान का प्रयोग नहीँ कर सकते। तर्क का उपयोग व ज्ञान का फल खाना ईसाइयत व इस्लाम मेँ निषिद्ध है। (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरआन ५:१०१-१०२). तर्क व विश्वास एक दूसरे के विरोधी हैँ। जहाँ आप ने तार्किक विचार करना प्रारम्भ कर दिया, ईसाइयत व इस्लाम की बालू की दीवाल ढह जाएगी।

       मानव को प्रकृति से प्राप्त संदेह ईश्वर प्रदत्त अनमोल निधि है। जिनके पास यह अनमोल निधि है, वे ही स्वतंत्र चिंतन करते हैँ। संदेह मानव को अन्वेषण की ओर आकर्षित करती है। स्वतंत्र चिंतन इसकी मौलिक आवश्यकता है। इसी के बल पर तमाम वैज्ञानिक आविष्कार हुए हैँ। इसके विरुद्ध विश्वास मानव को अज्ञानी बनाए रखता है। लेकिन ईसाइयत व इस्लाम मेँ तर्क व संदेह के लिए कोई स्थान नहीँ। संदेह व तर्क मात्र वैदिक संस्कृति मेँ स्वीकार्य है।

       वर्तमान सभ्यता, ज्ञान व विज्ञान उन लोगोँ की देन है जिन्होंने संदेह किया, न कि उन लोगोँ की, जिन्होंने विश्वास किया। विश्वासी तो पैदा हुए और दासता मेँ जीवन बिता कर नर्क मेँ गए। संसार के विकास मेँ उनका कोई योगदान नहीँ। जब कि मानवता के विनाश के लिए विश्वास ही उत्तरदायी है।

       क्या एक ईसाई व मुसलमान, जो ईसाई व मुसलमान नहीं रहना चाहता, अपना मजहब त्याग सकता है? ऐसा करने वाला ईसाई व मुसलमान क्या जीवित बचेगा? मुसलमान को (कुरान ५:१०१ और १०२) और ईसाई को (बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:६-११) पढ़ना चाहिए| क्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद २५ से प्राप्त उपनिवेशवासी की यही उपासना की स्वतंत्रता है?

       +++

यदि मात्र ईसा राजा हो सकता है, तो मनुष्य के पास स्वराज्य का अधिकार कहाँ है? २६ जनवरी को आप कौन सा गणतन्त्र मनाते हैं? क्या मानवमात्र से उपासना की स्वतंत्रता और स्वराज्य का अधिकार छीनने वाले जारज और प्रेत ईसा को धरती पर रहने का अधिकार है?

यानी धरती पर मानवजाति या तो वीर्यहीन और दास बनेगी अथवा बचेगी ही नहीं| यानी मानसिकता वर्चस्व स्थापित करने की है, अब्रह्मी संस्कृतियां जिसकी पूर्ति मानवमात्र को वीर्यहीन कर करती हैं| क्योंकि दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, वीर्यहीन करना|

पाक पिता गांधी ने वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए मुसलमानों को इंडिया में रखा है.

 

+++

 

०२/०९/१५

पटेल जी को नमस्ते!

इंडिया कोई राष्ट्र नहीं है मात्र एलिजाबेथ का उपनिवेश है.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

 

नमो का इस्लाम और सूफियों का शांति संदेश?

आप स्वयं को धोखा देने के लिए विवश हैं| क्यों कि आप ने भारतीय संविधान में आस्था निष्ठा की और पद एवं गोपनीयता शपथ ली है. सत्ता के हस्तांतरण की पुस्तिका पर हस्ताक्षर किये हैं. सत्ता एलिजाबेथ की है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

सूफियों की परम्परा कुरान आधारित है, जिसने मुसलमानों पर युद्ध अनिवार्य कर दिया है. इस्लाम में शांति निषिद्ध है| (कुरान २:२१६) अल्लाह ने मुसलमान को अंतिम काफ़िर को कत्ल करने की आज्ञा दी है| (कुरान ८:३९).

क्यों बना भारतीय संविधान?

उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने, अन्यथा कत्ल करने के लिए|

http://mostbackwardsoppressedclass.blogspot.in/2012/11/maker-of-constitution-of-india-dr.html

९० वर्ष के स्वतंत्रता के संग्राम के परिणाम स्वरूप इंडिया आज भी स्वतंत्र ब्रिटिश उपनिवेश है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

हर मुसलमान व ईसाई खूनी है| एलिजाबेथ कैथोलिक ईसाई है| धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है| (व्यवस्था विवरण, १३:६-११). व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है| (कुरान ४:८९). लेकिन ईसाईयों व मुसलमानों को गैर ईसाईयों और काफिरों के धर्मांतरण का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २५ मौलिक अधिकार देता है.

राष्ट्रपति और राज्यपाल पद ग्रहण करने के पूर्व उपरोक्त संविधान व कानूनों को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं. आर्यावर्त सरकार मानवमात्र को उपनिवेशवाद से मुक्ति दिलाना चाहती है.

 

०१/०९/१५य

+++

देवनागरी में ही लिखने के लिए आग्रह क्यों?

क्यों बना भारतीय संविधान

 

 

३१/०८/१५

+++

आवश्यक***

३०/०८/१५

+++

+++

जिन्हें परेशानी नहीं है

       लव जिहाद से|

       जेहोवा और अल्लाह के नारी बलात्कार की पूरी छूट से| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०).

       ईसा द्वारा बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह करने की अनुमति से|

       अल्लाह द्वारा पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने से|

जारज और प्रेत ईसा के यहोवा का पुत्र होने से.

क्या आप को आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ के शासन में रहने में लज्जा नहीं आती? क्या आप मौत के फंदे और लुटेरे भारतीय संविधान का विरोध करेंगे?

++++++++यदि नहीं, तो क्या आप जीवित हैं?

लूट और नारी बलात्कार के प्रलोभन पर ही तो ईसाइयत और इस्लाम का अस्तित्व है|

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

क्या मीडिया के पास उपरोक्त तथ्यों को प्रकाशित करने का साहस है? मेरे लिखने पर विश्वास न कीजिए| ऊपर दिए संदर्भों को बाइबल, कुरान और संविधान में देखिये|

राधे माँ के मामले को तो राहुल महाजन ने खूब प्रचारित किया. राहुल की माँ ने दूध पिलाया हो तो बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसा, पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह, नारी के बलात्कारी को स्वर्ग देने वाले (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) जेहोवा और अल्लाह को प्रचारित करके दिखाएँ|

जेहोवा और अल्लाह नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) देने से| (दोनों ईश्वर हैं और आशा राम बापू और राधे माँ?)

ईसा द्वारा बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह करने की अनुमति से|

अल्लाह द्वारा मुहम्मद की पुत्रवधू जैनब का (कुरान, ३३:३७-३८) और ५२ वर्षीय मुहम्मद का ६ वर्ष की आयशा से निकाह करने से|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित धरती के प्रत्येक नारी के बलात्कार की छूट से|

संयुक्त राष्ट्र संघ के कानून से, जो आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. [UDHR अनु०२५(२)].

उन्हें राधे माँ के नाचने या दुर्गा बनने से दर्द क्यों हो रहा है?

 

+++

महामहिम श्री राम नाइक जी!

 

एलिजाबेथ ने आप

ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो मूसा, मुहम्मद, शासक व पुरोहित हैं. एलिजाबेथ भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और (बाइबल, लूका १९:२७) के सहयोग से मानवजाति के विरुद्ध छद्म युद्ध लड़ रही है. उसने इंडिया सहित ५३ देशो को अपना उपनिवेश बना कर ईसा का राज्य स्थापित कर रखा है.  फिरभी संतुष्ट नहीं है, क्यों कि १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई, लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति के अवशेष अभी भी बाकी हैं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान 

+++

यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबल, लूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार प्राप्त है। तकिय्या व कितमान के अधीन यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। इसी प्रकार प्रत्येक ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुए, अज़ान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता है, कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है-फिर भी पुलिस व प्रशासन अज़ान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकते, क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति, राज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। क्यों कि राष्ट्रपति व उसके राज्यपालों ने भारतीय संविधान व कानूनों के रक्षा की शपथ ली है। राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग उपनिवेशवासी के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। आज कल यह लोग नमो द्वारा मनोनीत हो रहे है। जिसे एलिजाबेथ के ईसा ने भारत को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है।

एलिजाबेथ को यह जान कर प्रसन्नता होगी कि इस देश के उपनिवेशवासी उस भारतीय संविधान का अब भी महिमामंडन करते हैं, जिसके अनुच्छेद २९(१) ने नारी को बलात्कार की वस्तु घोषित कर रखा है| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०). मानव मात्र को कत्ल किये जाने योग्य अपराधी घोषित कर रखा है| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). भारतीय संविधान ने उपासना स्थल तोड़ना हर ईसाई व मुसलमान का संवैधानिक असीमित मौलिक अधिकार घोषित कर रखा है| (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हर उपनिवेशवासी से सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार छीन रखा है|

 

लेकिन ऐसा लिखने या कहने वाला जीवित नहीं छोड़ा जाता..

 

ब्रिटिश भारतीय संविधान,

२८/०८/१५

 

+++

आप या तो मात्र अल्लाह की उपासना नहीं करते अथवा ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते अतएव आप को जीवित रहने का अधिकार तक नहीं है| अतः आप मुसलमान (बाइबल, लूका १९:२७) हैं तो ईसाई आप की हत्या करेगा और यदि ईसाई हैं (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९) तो मुसलमान|

इसके अतिरिक्त मुसलमानों की इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन उत्तरदायित्व भी सौंपा गया है|

वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए एलिजाबेथ आतताई इस्लाम को संरक्षण देने की अपराधिन है|

इस्लाम को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| राज्यपाल बनवारी के पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईमाम दिन में पांच समय अज़ान द्वारा स्पष्ट घोषणा करते हैं कि मात्र अल्लाह पूज्य है (यह ईशनिंदा है और इसके लिए इस्लाम में मृत्युदंड निर्धारित है) और मस्जिदों से ईमाम जुम्मे यानी शुक्रवार को मुसलमानों को शिक्षा/खुतबे देते हैं कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुष्मन हैं| (कुरान ४:१०१). अविश्वासियों को कत्ल कर दो| अज़ान और मस्जिद से दिए जाने वाले खुतबों के विरुद्ध काफ़िर शिकायत नहीं कर सकते और न जज सुनवाई कर सकता है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). पुलिस किसी ईमाम के विरुद्ध आज तक अभियोग न चला सकी| मुसलमानों को काफिर नारियों का बलात्कार करने का अधिकार इस्लाम (कुरान २३:६ व ७०:३०) और लोकतन्त्रीय भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| इस असीमित मौलिक मजहबी अधिकार को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए एलिजाबेथ के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९). लव जिहाद को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने का, राष्ट्रपति और राज्यपालों को, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत, उत्तरदायित्व दिया गया है| लोकसेवक या जज भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और कुरान के आगे विवश हैं!

“Isa 13:16 उनके (गैर ईसाइयों के) बाल-बच्चे उनके साम्हने पटक दिए जाएंगे और उनके घर लूटे जाएंगे, और उनकी स्त्रियां भ्रष्ट की जाएंगी।“ (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१४) भी देखें|

यानी हर ईसाई व मुसलमान के पास धरती के किसी नारी का बलात्कार करने का संवैधानिक अधिकार है| लेकिन ईसाइयों' व मुसलमानों का विरोधी तो कोई नहीं! लेकिन जिसका अपराध अभी सिद्ध नहीं है, उस आशाराम बापू के पीछे लोकसेवक, एनजीओ, जज, मीडिया और यहाँ तक कि सारा हिंदू समाज हाथ धो कर पड़ा है|

प्रेसिडेंट व राज्यपाल अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं| लोकसेवक अब्रह्मी संस्कृतियों का पोषण करने के लिए विवश हैं और न्यायपालिका अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने के लिए विवश हैं! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) और (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). ऐसा है आत्मघाती भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१),

लेकिन क्यों?

१९९० से आज तक राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन न हो सका| ताकि एलिजाबेथ मानवमात्र को न्यायपालिका के स्वतंत्रता की आड़ में लूटती रहे| क्यों कि यह कहना सरासर झूठ है कि न्यायपालिका स्वतंत्र है| दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि न्यायपालिका राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधीन है और राष्ट्रपति और राज्यपाल एलिजाबेथ के अधीन| क्यों कि राष्ट्रपति और राज्यपाल अनुच्छेदों ६० और १५९ के अधीन कुटरचित, परभक्षी और मौत के फंदे भारतीय संविधान का संरक्षण, पोषण और संवर्धन करने के लिए विवश कर दिए गए हैं|

हम प्रातः से लेकर सोने तक अपने ईश्वर की निंदा सुनने के लिए विवश हैं| हम काफ़िर हैं| मस्जिदों से हमें कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| हमारा अपमान करने वाले, हमको कत्ल करने की घोषणा करने वाले और लव जिहाद करने वाले मुसलमान नहीं बंद होते और न उन पर अभियोग ही चलता है| लेकिन हमारे ९ अधिकारी इसलिए बंद हैं कि हम विरोध कर रहे हैं| यानी कि हमको और हमारी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का पक्का प्रबंध १९४७ में ही कर लिया गया है| बाकी कमी भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर पूरी कर ली गई है|

+++

उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की उपनिवेशवासी निवास करती है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मुसलमानों और ईसाइयों को इस नारी बलात्कार और कौटुम्बिक व्यभिचार का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| धरती की किसी भी नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा अथवा मुसलमान| लव जिहाद को संरक्षण देने के लिए विवश उपनिवेशवासी अपनी नारियां कैसे बचायेंगे?

अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी स्वेच्छा से खतना करा कर और / या यौनसुख के लोभ, (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०), में दास बनते हैं. नबियों ने अपने अनुयायियों को अधीन करने के लिए इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं|.

ईशनिन्दकों और खूनियों को संरक्षण, वेतन व हज अनुदान और प्राइवेट प्रतिरक्षा करने वाले को जेल आज भी जारी है.

उपनिवेशवासी क्या राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुलिस और जज भी असहाय हैं|

+++

मनुष्य अपना शत्रु स्वयं है.

अपने असली शत्रु को जानिए.

मनुष्य को बिना किसी दबाव के दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को संरक्षण देना है| अब्रह्मी संस्कृतियों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है| वीर्यहीन कर मूसा से लेकर एलिजाबेथ तक सभी मानवमात्र को दास बना रहे हैं| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा|[UDHR अनु०२५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. [UDHR अनु०२५(२)].

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करता है. इनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

अपने असली शत्रु को जानिए.

सरकारों के पुलिस के संरक्षण में मस्जिद से प्रसारण किया जाता है कि काफिरों के ईष्टदेव झूठे हैं और काफिरों को कत्ल कर दिया जाना चाहिए. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करता है. इनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

जिन लोगों को इंडिया में भारतीय संविधान द्वारा संरक्षण, पोषण व संवर्धन देकर रखा गया है, वे मानवमात्र को जीने का अधिकार नहीं देते. ईसाई मुसलमान की हत्या करने का अधिकार रखता है और मुसलमान ईसाई की. धरती की नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा अथवा मुसलमान.

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

२६ जनवरी, १९५० से भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण दे रहा है और गैर मुसलमानों के आस्था का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण देकर उपराज्यपाल ईमामों से अपमान करवा रहे हैं, वह भी सर्वोच्च न्यायलय के आदेश से, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन करके, वर्ष में १० हजार करोड़ रूपये से अधिक वेतन दिलवा कर| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६)

मुसलमानों व ईसाईयों को किसी भी नारी के बलात्कार की सुविधा है भारतीय संविधान के ओर से भी, {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)}, एलिजाबेथ के जेहोवा के ओर से भी (बाइबल, याशयाह १३:१६) और अल्लाह के ओर से भी| (कुरान २३:६ व ७०:३०).

मुसलमान आतंक नहीं मचा रहे बल्कि जिहाद कर रहे हैं| जिहाद का संवैधानिक, {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} कानूनी (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६) और न्यायिक (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) अधिकार, समर्थन व संरक्षण मुसलमानों को सरकार दे रही है| इतना ही नहीं ईमाम मस्जिदों से अविश्वासियों को, सरकार के संरक्षण में, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर, वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) अविश्वासियों के कर से प्राप्त धन में से वेतन ले कर, प्रतिदिन १५ बार चेतावनी देता है कि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है| कुरान के हवाले से ईमाम मुसलमानों को मस्जिदों में शिक्षा देता है कि अविश्वासियों को कत्ल कर दो| अतएव यदि एलिजाबेथ के एजेंट इंडियन मुजाहिद्दीन बम विष्फोट कर रहे हैं तो इसके अपराधी भारतीय संविधान, कानून, न्यायपालिका और एलिजाबेथ है - मुसलमान नहीं|

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्य अज़ान व खुतबों को अपराध नहीं मानता| लेकिन अज़ान का विरोध करना भारतीय दंड संहिता की धारा २९५अ के अंतर्गत दंडनीय अपराध है| मेरे विरुद्ध उपरोक्त अभियोग मस्जिद, चर्च, अब्रह्मी संस्कृतियों, अज़ान, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण चल रहे हैं| उप राज्यपाल महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना की सरकार, वैदिक सनातन धर्म और आर्य जाति का, अपने संरक्षण में, भारतीय दंड संहिता की धारा २९५अ के अंतर्गत खूनी अल्लाह व उसके इस्लाम द्वारा किये गए अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण देकर, विनाश करा रही है|

हमारे वैदिक सनातन धर्म में कोई पाप क्षमा नहीं होता| दूसरे की धन-धरती लूटने, कत्ल करने और नारी बलात्कार की सुविधा नहीं है| हमारा ईश्वर आप को उपासना, सम्पत्ति और जीवन का अधिकार देता है| आप को दास नहीं बनाता| पशु-पक्षी तक को अपनी स्वतंत्रताप्रिय है| हम आप को धूर्त पैगम्बरों द्वारा छीना गया यही ‘‘स्वतंत्रता’’ का अनमोल रत्न वापस देना चाहते हैं|

पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षण, पोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

 

+++

उपनिवेशवासी क्या राष्ट्रपति, राज्यपाल, पुलिस और जज भी असहाय हैं|

जो नौनिहाल दूरदर्शन पर यौन प्रदर्शन और हिंसा देखेंगे उनसे आप ब्रह्मचारी और चरित्रवान बनने की आशा कैसे कर सकते हैं? कमाल की बात तो यह है कि किसी को पता भी नहीं लगता कि हमारी संस्कृति पर कैसे हमला हो रहा है? अतः अब हम किसी कोण से वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी नहीं रह गए| फिर भी किसी के अंदर साहस नहीं कि एलिजाबेथ के उपनिवेश का विरोध कर सके! अज़ान और मस्जिद का विरोध कर सके| मैकाले के यौनशिक्षा केन्द्रों का विरोध कर सके| भारतीय संविधान का विरोध कर सके और न्यायपालिका और विधायिका का विरोध कर सके!

क्या आप को नहीं लगता कि बढ़ते यौन हिंसाओं के लिए स्वयं भारतीय संविधान और संघ सरकार उत्तरदायी है? यदि नहीं तो अपना अंत निश्चित समझिए|

इसके अतिरिक्त मुसलमानों की इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन उत्तरदायित्व भी सौंपा गया है|

 

+++

राष्ट्रपति और राज्यपालों को वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेने के लिये विवश कर दिया|

http://www.aryavrt.com/aazaadi

जो सरकार अपने संरक्षण में (अज़ान) ईशनिंदा कराती हो, मंदिर तोड़वाती हो, आप के इष्ट देवताओं का अपमान कराती हो, लव जिहाद कराती हो, आप की नारियों का बलात्कार कराती हो, धर्मान्तरण कराती हो और आप को आप की मातृभूमि से उजड़वाती हो, उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है| जो सरकार अपने जिलाधीश, पुलिस और सैनिक को नहीं बचा पा रही, आप को क्या बचायेगी? एलिजाबेथ के उपनिवेश को मिटाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें|

ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया के प्रथम दास उपनिवेशवासी प्रणब को सीधे-सीधे स्वीकार कर लिया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) वैदिक सनातन धर्म के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता| प्रणब ने संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और की शपथ ली है, अतएव इंडिया के उपनिवेशवासी, विवश हो कर, अपनी नारियों को अब्रह्मी संस्कृतियों को सौंप चुके हैं| अपनी सम्पत्ति और पूँजी से अपना अधिकार गवां चुके हैं| एलिजाबेथ ने प्रणब दा का मनोनयन इंडिया के सारे उपनिवेशवासियों को एलिजाबेथ की भेंड़ बनाने के लिए किया है|

जो सरकार अपने संरक्षण में ईशनिंदा कराती हो, मंदिर तोड़वाती हो, आप के इष्ट देवताओं का अपमान कराती हो, लव जिहाद कराती हो, आप की नारियों का बलात्कार कराती हो, धर्मान्तरण कराती हो और आप को आप की मातृभूमि से उजड़वाती हो, उसे सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है| जो सरकार अपने जिलाधीश, पुलिस और सैनिक को नहीं बचा पा रही, आप को क्या बचायेगी?

आर्यावर्त सरकार ने उपनिवेश से मुक्ति हेतु एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन बनाया है, आर्यावर्त सरकार के सूचना सचिव का आग्रह है कि एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति के लिए औपनिवेशिक देश हमारा सहयोग करें|

ईमामों को दंडित करने के स्थान पर एलिजाबेथ ईमामों को वेतन दिलवा रही है.

महामहिम जी!

यह संस्कृतियों का युद्ध है| अब्रह्मी संस्कृतियां आतताई हैं, जो वैदिक सनातन संस्कृति को मिटा रही हैं. मात्र वैदिक सनातन धर्म धोखे से हमले का विरोधी है| आत्मघाती मजहबों को मिटाना आप का वैदिक सनातन धर्म है| आर्यावर्त सरकार को अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटाने में सहयोग दें|

उपरोक्त याचिका में आदेश दिनांक २८-७-१९८९ के अनुसार राजस्व अभिलेख में जालसाजी सिद्ध हो चुकी है. फिर भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से मिले संरक्षण के रहते कोई जज कुछ नहीं कर सकता.

लेकिन अंततोगत्वा उपनिवेशवासी के पास कुछ नहीं छोड़ा.

हम आर्यावर्त सरकार के लोग इस युद्ध को लड़ रहे हैं. हमारी सहायता के लिए कौन तैयार है?

 

+++

ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो मूसा, मुहम्मद, शासक व पुरोहित हैं. एलिजाबेथ भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और (बाइबल, लूका १९:२७) के सहयोग से मानवजाति के विरुद्ध छद्म युद्ध लड़ रही है. उसने इंडिया सहित ५३ देशो को अपना उपनिवेश बना कर ईसा का राज्य स्थापित कर रखा है.  फिरभी संतुष्ट नहीं है, क्यों कि १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई, लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति के अवशेष अभी भी बाकी हैं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

नमो जी को यह बात समझ नहीं आती कि मुसलमान उनके इष्ट देवताओं का अपमान करते हैं|

इन आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रोकने वाले, संरक्षण व समर्थन देने वाले स्वयम के व मानव जाति के शत्रु हैं| इन्हें दंडित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए|

भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और विधि की पूरी योग्यता से परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने के लिए विवश प्रेसिडेंट और राज्यपाल

आज भी हम एक हारा हुआ युद्ध लड़ रहे हैं| कल्पना कीजिए कि विदेशो में जमा धन और भ्रष्टाचार का सारा धन राजकोष में जमा हो जाता है, तो भी आम आदमी को तो राहुल गाँधी के अनुसार सारे राजकोष का बीसवां हिस्सा मिलेगा| बाकी धन तो एलिजाबेथ और उसके उपकरणों और मातहतों के हिस्से में जायेगा|

जन लोकपाल को लूट में अपना हिस्सा चाहिए| एलिजाबेथ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अंतर्गत लुटेरे लोकसेवकों को संरक्षण दे रही है, बदले में लूट में स्वयं भी हिस्सा ले रही है| लेकिन बेहाल तो उपनिवेशवासी हो रही है|

यह कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ की ही महिमा है कि लूटती एलिजाबेथ है और जेल राजा और कलमाडी जाते हैं|

उपनिवेशवासी निर्णय करे कि वह किसके साथ है?

राज्यपाल की विशेषता यह है कि वह उपनिवेशवासी का चुना प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि एलिजाबेथ का मनोनीत प्रदेश का शासक होता है, जिसे एलिजाबेथ जब चाहे उसके पद से हटा सकती है| यद्यपि राज्यपाल उपनिवेशवासी का प्रतिनिधि नहीं होता, फिर भी उपनिवेशवासी द्वारा चुनी हुई किसी भी सरकार को हटा कर राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| यह नौटंकी नहीं तो क्या है?

Muj13W01 Dharayen 153v295

२९/०८/१५य

+++

जो भी इसे दासता कहे, उसे तबाह करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल का मनोनयन किया गया है.

जिसे एलिजाबेथ की सरकार आज़ादीबताती है वह सत्ता का हस्तांतरण है. इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है स्वराज्य की मांग राज द्रोह है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

अंग्रेजो की कोंग्रेस ने हमारा इंडिया चुराकर ईसाइयत व इस्लाम को सौंप दिया है| एलिजाबेथ ने राज्यपालों का मनोनयन राज्यपालों सहित उपनिवेशवासियों को भेंड़ बनाने के लिए किया है| राज्यपाल आप को उन ईसाइयत व इस्लाम मजहबों का सम्मान करने के लिए विवश कर रहे हैं, जिनके अनुयायी स्वयं पुरोहितों व शासकों के दास हैं, जो आप को काफ़िर व सैतान मानते हैं और आप को दास बनाने व आप की हत्या के लिए स्थापित किये गए हैं|

राज्यपाल व एलिजाबेथ ने न्यायपालिका को प्रभावित कर गोरखपुर उ०प्र० स्थित हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल की ३|३ एकड़ और मेरी १|८८ एकड़ भूमि लूटी हुई है| क्या मैं जान सकता हूँ कि मायावती और मुलायम को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण दिलाने वाली एलिजाबेथ और संरक्षण देने वाले राज्यपाल बनवारी के विरुद्ध कब कार्यवाही होगी? इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य जज रफात, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम, मायावती, और एलिजाबेथ के विरुद्ध क्यों कार्यवाही नहीं हो रही है और आइएएस प्रदीप शुक्ल के विरुद्ध क्यों कार्यवाही हो रही है? विवरण के लिए नीचे का लिंक देंखें,

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

ईसाई बपतिस्मा को अस्तित्व के लिए आवश्यक बताता है और मुसलमान काफ़िर को कत्ल करने से जन्नत पाता है.

इंडिया में गणतंत्र नहीं जेसुइट एलिजाबेथ केलिए, एलिजाबेथ द्वारा चुनागया एलिजाबेथतंत्र है| ईसाईयों सहित सभी उपनिवेशवासी एलिजाबेथ की भेंड़े हैं| न उपनिवेशवासी के पास जीने का अधिकार है और न पूँजी व सम्पत्ति रखने का| सर्वविदित है कि राज्यपाल एलिजाबेथ के मातहतों द्वारा मनोनीत हैंचुनाव तो नौटंकी है. हमारे पूर्वजों के बहाए रक्त अकारथ गए.

एलिजाबेथ कौन है?

अंग्रेजो की कोंग्रेस ने हमारा इंडिया चुराकर ईसाइयत व इस्लाम को सौंप दिया है| एलिजाबेथ ने राज्यपालों का मनोनयन स्वयं राज्यपालों व उपनिवेशवासियों को भेंड़ बनाने के लिए किया है| राज्यपाल आप को उन ईसाइयत व इस्लाम मजहबों का सम्मान करने के लिए विवश कर रहे हैं, जिनके अनुयायी स्वयं पुरोहितों व शासकों के दास हैं, जो आप को काफ़िर व सैतान मानते हैं और आप को दास बनाने व आप की हत्या के लिए स्थापित किये गए हैं|

उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के दास हैं. एलिजाबेथ ने आप का मनोनयन जातिसंहार के लिए किया है| जब हम सनातनियों का संहार हो जायेगा, तब मुसलमानों और गैर कैथोलिक ईसाइयों का जातिसंहार होगा|

महामहिम का एलिजाबेथ या उसके मातहत/उपकरण ने मनोनयन इस भ्रम में न रहें कि वे हमें प्रताड़ित कर अब्रह्मी संस्कृतियों से मुक्ति पा जायेंगे| जिस पद, प्रभुता और पेट के लिए महामहिम वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहते हैं, वह बचेगा नहीं|

एनआईए इस भ्रम में न रहे कि वह साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ित कर अब्रह्मी संस्कृतियों से मुक्ति पा जायेगा| जिस पद, प्रभुता और पेट के लिए एनआईए निरीह लोगों को प्रताड़ित कर रहा है, वह बचेगी नहीं|

 

+++

 

+++

प्रजातंत्र नहीं एलिजाबेथतंत्र

 

+++

7 नवम्बर 1966 को गोपाष्टमी के दिन गौरक्षा से सम्बन्धित संस्थाओं ने संयुक्त रूप से संसद भवन के सामने एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया जिसमें तत्कालीन सरकार से गौहत्या बन्दी का कानून बनाने की मांग की गई| इस प्रदर्शन में भारत के प्रत्येक राज्य से करीब 10 - 12 लाख गौभक्त नर - नारी , साधु - संत और छोटे - छोटे बालक - बालिकाएं भी गौमाता की हत्या बन्द कराने इस धर्मयुद्ध में आये थे।

उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री पद पर थी और गुलजारिलाल नन्दा गृहमंत्री थे| श्री नन्दा जी ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को परामर्श दिया कि इतनी बडी संख्या में देशभर के सर्व विचारों के उपनिवेशवासी की मांग गौहत्या बन्दी का कानून स्वीकार करें| तब इंदिरा गांधी ने कठोरता से कहा " गौहत्या बन्दी का कानून बनाने से मुसलमान और ईसाई समाज कांग्रेस से नाराज हो जायेंगे| गौहत्या बन्दी का कानून नहीं बन सकता| " इंदिरा के न मानने पर गुलजारिलाल नन्दा ने अपने गृहमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया और गौभक्त भारतीयों के इतिहास में अमर हो गये।

उधर इंदिरा गांधी ने प्रदर्शन खत्म कराने के लिए निहत्थे अहिंसक गौभक्तों प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवा दी जिसमें अनेकों साधुओं व गौभक्तों की हत्याएँ हुई| इंदिरा गांधी ने यह नृशंश हत्याकाण्ड गौपाष्टमी के पर्व पर कराया था अतः विधि का विधान देखिये कि - इंदिरा गांधी की हत्या भी गौपाष्टमी को हुई थी , संजय गांधी की दुर्घटना में मृत्यु भी अष्टमी को हुई , राजीव गांधी की हत्या भी अष्टमी को हुई , गौहत्या के महापाप से गांधी - नेहरू परिवार का नाश हो गया।

स्वतन्त्रता प्राप्ति के इतने दिन बाद भी राष्ट्रीय स्तर पर गौहत्या बन्दी का कानून न बन पाना भारतीयों के लिए बडे ही दुःख और अपमान की बात हैं| हे परमात्मा , नेहरू के वंशजों और गांधी के अनुयायी इन राजनेताओं को सद्बुद्धि दो| भारत की प्राणाधार गौमाता की हत्या बन्दी का कानून सम्प्रदायवाद की भावना से उठकर शीघ्र बने यही प्रार्थना है|

- विश्वजीतसिंह

 

२७/०८/१५

+++

सम्पादक महोदय, हिंदू वायस,

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| इसके अतिरिक्त,

ये कलियुग है इसलिए वैदिक सनातन संस्कृति विरोधी आतंकवादियों व उनके समर्थकों के प्रति किसी भी सात्विक प्रतिक्रिया के लिए कोई जगह नहीं है। वैदिक सनातन धर्म में ब्रह्मचर्य अनिवार्य है| मानवजाति के मुक्ति का ब्रह्मचर्य ही एकमात्र मार्ग है| जिसपर हमें आज के हालात में अमल करना चाहिए। ये हमारे लिए सच्चाई का सामना करने का समय है। एक सभ्यता के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो हमें गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर के हिंसक व अत्याचारी अब्रह्मी संस्कृतियों के आतंकवादी आक्रमण का मुकाबला करना पड़ेगा अन्यथा परसियन, वेवीलोनियन और मिश्र की सभ्यता की तरह नष्ट होने के लिए तैयार होना होगा। नपुंसक होने के कारण ये सभ्यतायें अत्याचारी अब्रह्मी संस्कृतियों का मुकावला करने में असमर्थ रहीं और इसलिए इनका सर्वनाश हो गया। हमें साम, दाम, दण्ड, भेद नियम का पालन करते हुए हर हाल में अत्याचारी अब्रह्मी संस्कृतियों का सर्वनाश सुनिश्चित करना चाहिए वरना ये राक्षस हमें समाप्त कर देंगे। पहले हमें इनके संरक्षक  उपनिवेश से मुक्ति लेनी पड़ेगी|

भारतीय संविधान और नमो सहित जो लोग भी अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रखने के पक्षधर हैं, मानवजाति के शत्रु हैं|

सर्वपंथ समभाव से प्रतिबद्ध विचारपत्र?

ईसाई के पास न्यायिक जांच (Inquisition) है, तो मुसलमान के पास जिहाद.

ईसाई बपतिस्मा को अस्तित्व के लिए आवश्यक बताता है और मुसलमान काफ़िर को कत्ल करने से जन्नत पाता है.

दूसरे पंथों से घृणा ही जिनके अस्तित्व और विस्तार का आधार है, उनके विरुद्ध कौन सा कानून है, अथवा भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद है? क्या बताएंगे?

हमारे मंदिरों की तो घोषणा ही है, “... प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो.

और ईसाइयत और इस्लाम का?

 

२६/०८/१५

+++

http://www.aryavrt.com/nl-cj_ahc-15824

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७

२४/०८/१५

+++

GNCTD/E/2015/04993 की याचिका को पता नहीं कब GOVUC/E/2015/00166

का नम्बर देकर उत्तराखंड भेज दिया.

 

+++

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

http://www.aryavrt.com/muj14w33-smjhauta

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

http://www.aryavrt.com/muj14w33c-samiksha

http://www.aryavrt.com/muj15w24ay-yogaa-divas

http://www.aryavrt.com/muj15w25ay-blatkari-asaram

http://www.aryavrt.com/muj15w33-upnivesh-divas

http://www.aryavrt.com/muj15w34-orop-kahaanse

 

 

+++

एलिजाबेथ ने देश को लूट के खोखला कर दिया. OROP के लिए उधार कौन देगा?

 

+++

samvadvimarsh@gmail.com

drmahendra02@gmail.com

विश्रांत जी को प्रणाम!

आगे से मुझे डाक भेजने के स्थान पर अपनी पत्रिका मेरे ईमेल पर भेजें. मैं आप का आभारी रहूँगा.

मेरे विचार सही लगें तो नीचे का लेख आप अपने नाम से भी प्रकाशित कर सकते हैं. क्या आप में साहस है?

 

एलिजाबेथ को वैदिक सनातन धर्म मिटाना है| बिना चरित्र बिगाड़े ऐसा सम्भव नहीं|

जिन्हें जीवन, स्वतंत्रता, अपनी संस्कृति, अपनी नारियों का सम्मान और अपने सम्पत्ति की सुरक्षा चाहिए, आर्यावर्त सरकार की शरण में आयें|

+++

एक ओर आप के वैदिक सनातन संस्कृति की वीर्यवान ब्रह्मचारी बना कर आप के आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति, परमानंद और आरोग्य प्रदान करने वाली संस्कृति है और दूसरी ओर आप को अपराधी और दास बनाने वाली संस्कृति; आप किसे पसंद करेंगे?

खतना और यौनाचार द्वारा मानवमात्र को वीर्यहीन कर दास बनाने वाले पैगम्बर, पुरोहित और शासक अपराधी नहीं माने जाते|

श्री ठाकुर जी! मुझे ईश्वर ने ज्ञान दिया है| (गायत्री मंत्र). जब कि ज्ञान का फल खा लेने के कारण जेहोवा (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व अल्लाह (कुरान २:३५) दोनों ने आदम को स्वर्ग से भगा दिया| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हमें अपराधी क्यों घोषित कर रखा है?

 

उपनिवेश का विरोध

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के आगे नौटंकी बाज सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार शून्य हैं| उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए| लोकसेवक को उपनिवेशवासी की सम्पत्ति को छीनने के लिए ही नियुक्त किया जाता है| लोकसेवक के नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोकसेवक को उपनिवेशवासी को लूटना पड़ेगा| सम्पत्ति का संकेंद्रण तो होगा लेकिन एलिजाबेथ के पास| इसके गणित को समझिए| इस अनुच्छेद के अधीन उपनिवेशवासी की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ की है| खूंटे से बंधे किसान के पशु की भांति टाटा व अम्बानी के पास भी अकूत सम्पदा एलिजाबेथ की दया पर उनके पास है| जब लोकसेवक भ्रष्टाचार करता है तो उसे अपराधी नहीं माना जाता, माना यह जाता है कि लोकसेवक ने ऐसा सरकारी सेवा के अधीन किया है और उसे दंडित नहीं किया जा सकता|

 

२२/०८/१५

+++

 

१२/०८/१५

+++

 

       आशाराम बापू बनाम मुक्तिदाता जेहोवा और अल्लाह

       संत आशाराम द्वारा शाहजहाँपुर की अवयस्क बालिका के यौन शोषण से मीडियाकर्मी, एलिजाबेथ और लोकसेवक अत्यंत पीड़ित हैं| क्यों कि बेचारे संत बालिका का कौमार्य भंग नहीं कर सके| राजस्थान के ईसाई मुख्यंमत्री गहलोत सबसे अधिक व्यथित हैं| बेचारी न्यायपालिका गहलोत से बारम्बार पूछ रही है कि आशाराम को कारागृह से मुक्त किया जाये या नहीं? अब नमो के गुजरात की दो पीड़ित बहनें भी सामने आ गई हैं| लगता है कि इन बेचारियों का कौमार्य भी संत भंग न कर सके होंगे|

       इस्लाम को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| राज्यपाल बनवारी के पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईमाम दिन में पांच समय अज़ान द्वारा स्पष्ट घोषणा करते हैं कि मात्र अल्लाह पूज्य है (यह ईशनिंदा है और इसके लिए इस्लाम में मृत्युदंड निर्धारित है) और मस्जिदों से ईमाम जुम्मे यानी शुक्रवार को मुसलमानों को शिक्षा/खुतबे देते हैं कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुष्मन हैं| (कुरान ४:१०१). काफिरों को कत्ल कर दो| अज़ान और मस्जिद से दिए जाने वाले खुतबों के विरुद्ध काफ़िर शिकायत नहीं कर सकते और न जज सुनवाई कर सकता है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). पुलिस किसी ईमाम के विरुद्ध आज तक अभियोग न चला सकी| मुसलमानों को काफिर नारियों का बलात्कार करने का अधिकार इस्लाम (कुरान २३:६ व ७०:३०) और लोकतन्त्रीय भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| इस असीमित मौलिक मजहबी अधिकार को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए एलिजाबेथ के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९). लव जिहाद को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने का, राष्ट्रपति और राज्यपालों को, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत, उत्तरदायित्व दिया गया है| लोकसेवक या जज भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और कुरान के आगे विवश हैं!

       “Isa 13:16 उनके (गैर ईसाइयों के) बाल-बच्चे उनके साम्हने पटक दिए जाएंगे और उनके घर लूटे जाएंगे, और उनकी स्त्रियां भ्रष्ट की जाएंगी।“ (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१४) भी देखें|

       यानी हर ईसाई व मुसलमान के पास धरती के किसी नारी का बलात्कार करने का संवैधानिक अधिकार है| लेकिन ईसाइयों' व मुसलमानों का विरोधी तो कोई नहीं! लेकिन जिसका अपराध अभी सिद्ध नहीं है, उस आशाराम बापू के पीछे लोकसेवक, एनजीओ, जज, मीडिया और यहाँ तक कि सारा हिंदू समाज हाथ धो कर पड़ा है|

       प्रेसिडेंट व राज्यपाल अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं| लोकसेवक अब्रह्मी संस्कृतियों का पोषण करने के लिए विवश हैं और न्यायपालिका अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने के लिए विवश हैं! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) और (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). ऐसा है आत्मघाती भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१),

 

+++

http://www.aryavrt.com/muj15w32a-15aug-kaladivas

http://www.aryavrt.com/muj15w32y-lg-ncr_delhi

 

जज

जज न तो उपनिवेशवासी के चुने प्रतिनिधि होते हैं और न ही जजों का चुनाव लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाना आवश्यक है. एलिजाबेथ अपने मातहतों राज्यपालों या राष्ट्रपति द्वारा जजों का मनोनयन करती है. जज न्याय करने की नहीं संविधान और कानूनों को बनाये रखने के लिए शपथ लेते हैं. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}.

अब्रह्मी संस्कृतियों' के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, २९(१), ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं|

जजों ने भी भारतीय संविधान व कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८). यानी राष्ट्रपति और राज्यपाल हर ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) व मुसलमान (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९) को अपनी ही हत्या का अधिकार देने व अपनी वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए विवश हैं|

जजों ने भी भारतीय संविधान के अनुसूची ३ के प्रारूप ४ व ८ के अधीन ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी इन लुटेरी, बलात्कारी और खूनी संस्कृतियों को बनाये रखने के असीमित मौलिक अधिकार देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को बनाये रखने की शपथ ली है|

जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान व विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}| क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)

 

+++

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है|

यह लोग दया के पात्र हैं| इनके पास कोई विकल्प भी नहीं है|

या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें अथवा जेल जाएँ| अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके (लोकसेवकों के) अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| एलिजाबेथ के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ही नहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं||

दया के पात्र राज्यपालों ने संविधान के अ० १५९ के अधीन उपनिवेशवासियों से सम्पत्ति व पूँजी छीनने की शपथ ली है व न्यायपालिका ने संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है| लोकसेवकों को राज्य उपनिवेशवासियों की सम्पत्ति व पूँजी लूटने के लिए नियुक्त करते हैं| लोकसेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| इंडिया में लोकतंत्र नहीं एलिजाबेथतंत्र है|

भारतीय संविधान का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६० व १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन

ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो मूसा, मुहम्मद, शासक व पुरोहित हैं. एलिजाबेथ भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और (बाइबल, लूका १९:२७) के सहयोग से मानवजाति के विरुद्ध छद्म युद्ध लड़ रही है. उसने इंडिया सहित ५३ देशो को अपना उपनिवेश बना कर ईसा का राज्य स्थापित कर रखा है.  फिरभी संतुष्ट नहीं है, क्यों कि १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई, लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति के अवशेष अभी भी बाकी हैं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 

+++

8/9/2015

http://www.aryavrt.com/muj15w32y-lg-ncr_delhi

 

+++

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=794267897337498&set=gm.1192866287405843&type=1

 

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 

+++

आप लोगों को तो यह भी नहीं मालूम कि शेर दूसरे शेर को रहने ही नहीं देता| फिर भी जंगल का कोई जानवर शेर का मुकाबला नहीं कर सकता| शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी वीर्यहीन व कामी होता है और शेर वर्ष में एक बार सम्भोग करता है - अतः वीर्यवान|

 

 

०८/०८/१५

+++

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६

षड्यंत्र यहीं समाप्त नहीं हुआ.

+++

गुरुवार, 6 अगस्त 2015

+++

मेरा मानना है कि हम आज भी भटक रहे हैं.

+++

http://www.aryavrt.com/kl15801-lane-encroachment

 

Darpg ; Dy. Sec Mrs. Sumita Dasgupta

+++

 

प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है|

कुटरचित परभक्षी संविधान का अनुच्छेद २९(१) किसी को जीने का अधिकार नहीं देता

कुटरचित परभक्षी संविधान का अ० ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का अधिकार ही नहीं देता|

भारतीय संविधान को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता|

 

+++

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए किया है|

कांग्रेस ने जिन अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रोका है, उन्होंने

अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में

 

+++

 

+++

अज़ान

मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट

भवदीय, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१ दि०; रविवार, 1५ जून 201४य

http://www.aryavrt.com/jwab-aaya-hai

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

 

+++

 

विवरण के लिए नीचे धारा का उल्लेख है:- 

121. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना--जो कोई 1[भारत सरकार] के विरुद्ध युद्ध करेगा, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह मॄत्यु या 2[आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा 3[और जुर्माने से भी दंडनीय होगा]|

मुझे Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड मिलना चाहिए था. एलिजाबेथ मुझे फांसी क्यों नहीं दिला रही है?

विवरण के लिए नीचे अनुच्छेदों का उल्लेख है:- 

प्रत्येक राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करने से पहले देश के मुख्य न्यायमूर्ति या उनकी अनुपस्थिति में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा :

 

+++

http://www.aryavrt.com/bhartiya-snvidhan

http://www.aryavrt.com/muj14w11-upniveshke-viruddhyuddh

 

+++

मनुष्य अपने असली शत्रु को पहचानें

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों और शक्तिवान का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| वीर्य का जितना अधिक संचय होगा मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा| मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/

+++

रविवार, 26 जुलाई 2015 य

+++

09412992136

secy-pubgiv-ua@nic.in

mail rejected. Copy enclosed

No reply from Mobile Phone.

DARPG to GOVUC/E/2015/00119

+++

माउंटबेटन ने क्या किया?

http://www.aryavrt.com/muj15w30y-dyake-patr

 

 

http://www.aryavrt.com/muj15w30y-dyake-patr

 

 

 

+++

नमो क्या कर लेंगे?

 

+++

मिशनरी और किसान दोनों खेती करते हैं| किसान सांड़ को दास बनाते हैं और मिशनरी मनुष्य को|

मनुष्य सच्चितानंद परमपिता परमात्मा का अंश है| परमात्मा प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक और देवस्वरूप है| इसके विपरीत जेहोवा और अल्लाह मनुष्य को विवेकहीन, अपराधी और पापी बनाते हैं| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७), (कुरान २:३५). इस्लाम के रहते वैदिक सनातन धर्म बच ही नहीं सकता| (कुरान ८:३९). {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) इनकी संरक्षक एवं पोषक है|

+++

सोमवार, 20 जुलाई 2015

+++

सम्पत्ति रखने का अधिकार नहीं| [(भारतीय संविधान ३९(ग), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा। जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०/०६/१९७९ से लुप्त) व अनुच्छेद ३९ग].

(एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीड़ित कराया जा रहा है| लेकिन जेहोवा, उसका एकलौता पुत्र ईसा और अल्लाह यौन शोषक अपराधी नहीं हैं!

किसी का भी उपासना स्थल सुरक्षित नहीं| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. ईसाई व मुसलमान जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटें| [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)]. किसी का जीवन सुरक्षित है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)} वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण में|

 

+++

कटारिया जी को नमस्ते!

एक नजर इधर भी...

 

+++

श्रीमती सुमित्रा दासगुप्ता जी!

मुझे अपनी शिकायत DARPG/E/2015/07853 का उत्तर मिल गया है.

बधाई!

समय मिले तो नीचे की लिंक पढियेगा.

http://www.aryavrt.com/Home/status-of-women-hindi

 

गरीब के नाम पर लूटा और गरीब सहित सबको कर्जदार बना दिया!

मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१४ तक; ६० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे|

महामहिम खन्ना इस भ्रम में न रहे कि वह साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ित कर अब्रह्मी संस्कृतियों से मुक्ति पा जायेगा| जिस पद, प्रभुता और पेट के लिए महामहिम खन्ना निरीह लोगों को प्रताड़ित कर रहा है, वह बचेगा नहीं|

महामहिम का एलिजाबेथ या उसके मातहत/उपकरण ने मनोनयन इस भ्रम में न रहें कि वे हमें प्रताड़ित कर अब्रह्मी संस्कृतियों से मुक्ति पा जायेंगे| जिस पद, प्रभुता और पेट के लिए महामहिम वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहते हैं, वह बचेगा नहीं|

एनआईए इस भ्रम में न रहे कि वह साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ित कर अब्रह्मी संस्कृतियों से मुक्ति पा जायेगा| जिस पद, प्रभुता और पेट के लिए एनआईए निरीह लोगों को प्रताड़ित कर रहा है, वह बचेगी नहीं|

उपनिवेशवासी लोकसेवक और जज दोनों ही अल्लाह या ईसा के अपराधी हैं| ईसाई या मुसलमान दोनों को मजहबी जूनून में कत्ल करेंगे| ईसाई व मुसलमान दोनों को इंडिया में वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रोका गया है| लोकसेवक ईसाइयों व मुसलमानों को पद, प्रभुता और पेट के विवशता में बचा रहे हैं| दोनों यह लड़ाई नहीं लड़ सकते| यदि वे जीवित रहना चाहते हों तो हम उनके लिये यह युद्ध लड़ सकते हैं|

बेचारे उपनिवेशवासी लोकसेवक पद, प्रभुता और पेट के लिये नसबंदी करवा कर दास बनते हैं और अपनी ही संस्कृति को मिटाने के लिये विवश हैं|

वाईफाई तो एक बहाना है. एलिजाबेथ को इंडिया को लूटना है.

लोकसेवक आप भी हैं और मैं भी कभी लोकसेवक था. आप दया की पात्र हैं. पद, प्रभुता और पेट के लोभ में आप अपना व मानवजाति का सर्वनाश कर रही हैं इसीलिए नौकरी कर पा रही हैं, अन्यथा आप जेल में होतीं अथवा मेरी भांति नौकरी के बाहर.

नपुंसक बनने का लाभ यह हुआ कि तब से लेकर आज तक किसी ने समझौते का विरोध नहीं किया| सबने पद, प्रभुता और पेट के लोभ में मानवजाति को धोखा दिया है|

कौन हैं, जो इन्हें अल्पसंख्यक कहते हैं और पद, प्रभुता और पेट के लोभ में आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का संरक्षण, पोषण व संवर्धन कर रहे हैं?

 

+++

 

१६/०७/१५ य

१५/०७/१५

काबा

काबा जो बैलुल्लाह यानी अल्लाह का घर माना जाता है, मक्का का काबा मंदिर वास्तव में काव्य शुक्र का मंदिर है | काबा काव्य का ही अपभ्रंश है | शुक्र का अर्थ जुम्मा अर्थात् बड़ा होता है और गुरु शुक्राचार्य बड़े ही माने जाते हैं |

यज्ञ करने वाला अपनी सांसारिक इच्छाओ और वासनाओ को छोड देता है और यज्ञ में पाक एवं बिना सिले सफेद वस्त्र पहनने की परम्परा वैदिक काल में रही है और यही सब हज के दौरान भी होता है, हाजी एहराम पहनते हैं यानी दो बिना सिले सफेद कपडे के टुकडे होते हैं |

यज्ञ हिंसा से रहित होता है और हज भी हिंसा से रहित होती है| मक्का का पाक क्षेत्र पूरी तरह सम्मानित है, ये लोग वेदो को तो भूल गए, लेकिन यहां पर फिर भी अल्लाह की सबसे पहली किताब वेदो के ही कानून का पूरी तरह पालन किया जाता है, वेद में किसी भी प्रकार की हिंसा या बलि का विधान नहीं और मक्का में यही वेदो का कानून आज भी चलता है, इस पाक क्षेत्र में कोई भी हाजी किसी भी जानवर, यहां तक की मक्खी और इससे भी आगे बढकर किसी प्रकृति यानी किसी पौधे को तनिक भी हानि नहीं पहुंचा जा सकते | हज यात्री का पूरा अस्तित्व अल्लाह को समर्पित हो जाता है | यदि अल्लाह को कुर्बानी पंसद होती तो काबा जो बैलुल्लाह यानी अल्लाह का घर माना जाता है, फिर यहां पर सबसे अधिक बकरे काटने के लिए हाजी साथ लेकर जाते ? लेकिन यह क्षेत्र तो हिंसा से रहित है, क्योंकि यहां वेदो का कानून चलता है | पांच वक्त की नमाज का बहुत महत्व है | नमाज खुद संस्कृत का शब्द है यानी पंच और यज्ञ | और पांच का महत्व वेदो में ही है, जैसे पंचाग्नि, पंचपात्र, पंचगव्य, पंचांग आदि |

पांच दिन के हज के दौरान पूरी दुनिया के हाजी मक्का में एकत्र होते हैं और एक साथ इबादत करते हैं और एक साथ लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं | हज शब्द ही संस्कृत के व्रज का अपभंश है, वज्र का अर्थ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना है |

सफेद वस्त्रधारी हाजी काबा की सात परिक्रमाएं करते हैं, सात परिक्रमा का विधान पूरी तरह वेदो का है | सप्तपदी मंदिरो में होती है, सप्तपदी विवाह संस्कार में होती है यज्ञ के सामने | John Lewis Burckhardt लिखते हैं कि मुसलमानों में हज की यात्रा इस्लाम पूर्व की है। उसी प्रकार Suzafa और Merana भी इस्लाम पूर्व के पाक क्षेत्र हं और क्योंकि यहा Motem और Nabyk नाम के देवताओ के बुत होते थे | अराफात की यात्रा कर लेने पर यात्री प्रकार Motem और Nabyk की यात्रा करते हैं | N. J. Dawood ने कुरान के अंग्रेजी संस्करण की भूमिका में लिखा है कि कुरान का प्रत्येक शब्द स्वर्ग में लिखे हुए शिलालेख से अल्लाह ने देवूदत ग्रेबियल द्वारा मोहम्मद को जैसा सुनाया, वैसा लिखा गया। बाइबिल कहती है और स्वर्ग में ईश्वर का मंदिर खोला और उसके नियम का संदूक उसके मंदिर में दिखाई दिया | ईश्वर का ज्ञान चार संदूको में है | अब सच यह है कि सृष्टि के आरम्भ में ही अल्लाह ने चार मौलाओ यानी ऋषियों को अपना ज्ञान दिया, इसलिए अल्लाह का कानून वेद हैं | वेदो में ज्ञान और विज्ञान है, लेकिन कुरान में ज्ञान-विज्ञान की बाते कम और इतिहास अधिक है

+++

जानते हैं क्यों? क्यों कि साध्वी जी और उनके सहयोगी असली साम्प्रदायिक हैं| क्योंकि साध्वी जी और उनके सहयोगी अपनी बेटी से विवाह नहीं करते| गैर ईसाई नारी का बलात्कार नहीं करते| जब कि हर ईसाई को एलिजाबेथ के ईसा ने अपनी बेटियों से विवाह का अधिकार दिया है| (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और जेहोवा ने गैर ईसाई (बाइबल, याशयाह १३:१६) नारी का, उसके पुरुषों के आँखों के सामने, बलात्कार का अधिकार दिया है| साध्वी जी और उनके सहयोगी ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| (बाइबल, लूका १९:२७).

हमें एलिजाबेथ की दासता के लिए विवश क्यों किया जा रहा है?

+++

मैकाले के यौन शिक्षा केन्द्रों में पढ़े मिश्र जी से उपनिवेशवासी युद्ध की आशा कैसे कर सकते हैं?

समानता लाने के लिए ही बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान उपलब्ध है. जिनका विरोध दंडनीय अपराध है. संविधान मौत का फंदा है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) किसी उपनिवेशवासी को जीने का अधिकार और ३९(ग) सम्पत्ति और उत्पादन रखने का अधिकार नहीं देता.

 

 

 

४५.    कलीसिया {kalisiya} = ECCLESIA, CHURCH

४६.    DEFINITION OF कलीसिया

४७.    पुं० [यू० इकलीसिया] मसीही लोगों की धर्ममंडली या धार्मिक समुदाय

४८.    ३:१९ दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| ...”

४९.    ३:८५ जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...”

५०.    यदि सभी धर्म एक जैसे हैं तो फिर इतने धर्मों की जरूरत क्यों पड़ी?

५१.    यदि मन्दिर चाहिए तो अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटायें| भारतीय संविधान का संकलन मानव मात्र के मौत का फंदा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| आप को कोई स्व(अपना)राज नहीं मिला| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| देखें, भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(ii). आप ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०)], जीने का अधिकार [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९)] और अपने पूजा स्थल [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)] गवां दिए हैं| भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और उपासना की स्वतंत्रता (अज़ान, कुरान ३:१९) गवां दी है|

५२.    उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान ३:१९)]. मूल लेख पढ़ें|

५३.    मनुष्य सच्चितानंद परमपिता परमात्मा का अंश है| परमात्मा प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक और देवस्वरूप है| इसके विपरीत जेहोवा और अल्लाह मनुष्य को विवेकहीन, अपराधी और पापी बनाते हैं| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७), (कुरान २:३५). इस्लाम के रहते वैदिक सनातन धर्म बच ही नहीं सकता| (कुरान ८:३९). {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) इनकी संरक्षक एवं पोषक है|

 

१४/०७/१५

+++

 

१३/०७/१५

+++

धमकियों से डर कर घर न छोड़ो

मेरे पास बराबर इस बात की शिकायतें आ रही हैं कि यूनियन के मुसलमानों को अपने बाप दादों के मकान छोड़ने और पाकिस्तान जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है. यह कहा जाता है कि उनको तरह-तरह की तरकीबों से अपने घर छुड़वा कर कैम्पों में रहने पर मजबूर जा रहा है, जहां से उन्हें रेल द्वारा अथवा पैदल भेज दिया जाय. मुझे विश्वास है कि मन्त्रिमन्डल की यह नीति नहीं है. ... इस जगह हम खास तौर पर यह जांच रहे हैं कि केन्द्रीय सरकार की हालत क्या है? उसे किसी हालत में भी कमजोर नहीं बनना चाहिए. इसलिए अगर इसमें कुछ भी सच्चाई है कि कर्मचारी पूरी तरह सरकारी हुक्म (या गांधी के षड्यंत्र) का पालन नहीं करते, तो ऐसे कर्मचारियों को तुरंत निकल जाना चाहिए या मिलिटरी या सम्बन्धित मंत्री को त्यागपत्र देकर ऐसी ताकत को जगह देनी चाहिए जो कामयाबी के साथ कर्मचारियों की नाफर्मबरदारी को दूर कर सके. (ताकि हत्यारे अल्लाह के अनुयायी मुसलमान इंडिया में ही रहें और आर्यों को समूल नष्ट करने में कामयाबी हासिल की जा सके.) जब कि मैं उन शिकायतों को, जो मेरे पास आती रहती हैं, संकोच के साथ आप को सुनाता हूँ. ...गांधी की दिल्ली डायरी भाग ३, २७ अक्टूबर, १९४७.

१२/०७/१५

+++

निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा छोड़कर आप लोग मैकाले के यौन शिक्षा ग्रहण करने वाले बहिष्कार अंधे हैं?

आप का समय निकल गया| वीर्य का फल ब्रह्मज्ञान आप को बाजार में नहीं मिलेगा| अपनी भावी पीढ़ी को निःशुल्क गुरुकुल में ब्रह्मचारी बनाने के लिए पढ़ाइये| मैकाले के यौनशिक्षा स्कूलों का बहिष्कार करिये| अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा|

यदि यहूदियों को गैस चैंबरों में जलाए जाने के लिए मिमयाते हुए जाने वाले मेमनों से ज्वलंत शेर में मात्र ५ वर्ष में बदला जा सकता है, तो आर्यों के लिए तो, गुरुकुलों द्वारा, उनसे कहीं बेहतर हालात (आज भी धरती का हर ६ठा व्यक्ति आर्य है) आज भी हैं| ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति का कार्य सिर्फ पांच वर्ष में करना किसी भी तरह से कठिन नहीं है।

एक गांव में चार अंधे रहते थे| उस गांव में एक हाथी आया| गावं के लोग हाथी देखने के लिए उमड पड़े| अंधे भी गए| लेकिन वे देख तो सकते नहीं थे| अतएव, सभी अंधों ने हाथी को छुआ| जिसके हाथ में हाथी का कान लगा, उसने बताया कि हाथी सूप है| जिसके हाथ पैर लगा उसने बताया कि हाथी खम्भा है| जिसके हाथ शरीर लगा उसने बताया कि हाथी पहाड़ है और जिसके हाथ पूँछ लगी उसने बताया कि हाथी रस्सी है|

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj15w26ay-yogaa-kya_hai

 

+++

दिखने वाले हाथी के दांत, खाने वाले दांतों से बहुत बड़े होते हैं| मेरा दृढ़ विश्वास है कि ओसामा के छिपने के स्थान की जानकारी अमेरिका को भी थी और पाकिस्तान को भी| जब ओबामा को जरूरत हुई, उसे ठिकाने लगा दिया| विश्व यह न भूले कि ओसामा नामक भष्मासुर को पैदा करने वाला अमेरिका ही है|

आप को तो यह भी नहीं मालूम कि शेर दूसरे शेर को रहने ही नहीं देता| फिर भी जंगल का कोई जानवर शेर का मुकाबला नहीं कर सकता| शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी वीर्यहीन व कामी होता है और शेर वर्ष में एक बार सम्भोग करता है - अतः वीर्यवान|

वीर्य महिमा के समर्थन में मुझे वर्तमान में एक ही प्रमाण देना है| शेर दूसरे शेर को रहने ही नहीं देता| फिर भी जंगल का कोई जानवर शेर का मुकाबला नहीं कर सकता| शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी वीर्यहीन व कामी होता है और शेर वर्ष में एक बार सम्भोग करता है - अतः वीर्यवान|

 

११/०७/१५

+++

इंडिया आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ का उपनिवेश है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों के पास किसी भी नारी के बलात्कार का भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त है| [(कुरान २३:६ व ७०:३०) (बाइबल, याशयाह १३:१६)].

लेकिन उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस कानून के संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें, राष्ट्रपति व राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| यानी कि उपनिवेश का विरोध किया नहीं कि राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को फांसी दिलवाने के लिए विवश हैं.

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

संवैधानिक स्थिति यह है कि किसी भी नारी के बलात्कार का उपनिवेशवासी के पास संवैधानिक अधिकार है, जब कि गुप्तांग काटने वाले व्यक्ति ने कानून अपने हाथ में लिया है. अतएव कानून अपना काम करेगा.

अपना व अपनी नारियों का सम्मान इस स्थिति से बचना चाहें तो उपनिवेश और भारतीय संविधान का विरोध करने में आर्यावर्त सरकार का सहयोग करें.

 

+++

कलीसिया {kalisiya} = ECCLESIA, CHURCH

DEFINITION OF कलीसिया

पुं० [यू० इकलीसिया] मसीही लोगों की धर्ममंडली या धार्मिक समुदाय

 

५४.    कलीसिया {kalisiya} = ECCLESIA, CHURCH

५५.    DEFINITION OF कलीसिया

५६.    पुं० [यू० इकलीसिया] मसीही लोगों की धर्ममंडली या धार्मिक समुदाय

५७.   

५८.   

५९.    ३:१९ दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| ...”

६०.    ३:८५ जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...”

६१.    यदि सभी धर्म एक जैसे हैं तो फिर इतने धर्मों की जरूरत क्यों पड़ी?

६२.    यदि मन्दिर चाहिए तो अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटायें| भारतीय संविधान का संकलन मानव मात्र के मौत का फंदा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| आप को कोई स्व(अपना)राज नहीं मिला| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| देखें, भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(ii). आप ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०)], जीने का अधिकार [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९)] और अपने पूजा स्थल [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)] गवां दिए हैं| भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और उपासना की स्वतंत्रता (अज़ान, कुरान ३:१९) गवां दी है|

 

०८/०७/१५

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

१.     उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान ३:१९)]. मूल लेख पढ़ें|

२.     आप मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे क्यों होने दे रहे हैं?

 

+++

जिसने भी भारतीय संविधान में निष्ठा की शपथ ली है, वह वैदिक पंथियों के मानवाधिकारों की अवहेलना का दंडनीय अपराध कर रहा है और मानवता का शत्रु है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने उपनिवेशवासियों से सम्पत्ति रखने का अधिकार २६ जनवरी, १९५० से ही छीन लिया है| वोट द्वारा भी उपनिवेशवासी इस अधिकार को नहीं बदल सकते| स्वयं लोकसभा व सर्वोच्च न्यायलय भी कुछ नहीं कर सकती|

 

+++

अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिए| दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९).

किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. वह भी भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल और न्यायपालिका के संरक्षण में!

 

+++

यदि मन्दिर चाहिए तो अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटायें| भारतीय संविधान का संकलन मानव मात्र के मौत का फंदा है| इसका संकलन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| आप को कोई स्व(अपना)राज नहीं मिला| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| देखें, भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(ii).

आप मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे क्यों होने दे रहे हैं?

 

+++

माया कोंड्नानी और बाबू बजरंगी की भांति सारा अपराध हिन्दू कर रहे हैं| वे अपनी संस्कृति को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और ईसा का राज्य स्थापित नहीं होने दे रहे हैं| भारतीय संविधान इसकी अनुमति नहीं देता| यही एलिजाबेथ के ईसा की और हामिद के अल्लाह की सच्ची सेवा होगी| क्यों कि नमो ने भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है|

कौन है इस देश की सुपर प्रधानमंत्री एलिजाबेथ गाँधी और उप राष्ट्रपति हामिद?

एक ईसाई और दूसरा मुसलमान.

इंडिया के उपराष्ट्रपति हामिद का अल्लाह कहता है, "और तुम उनसे (अविश्वासियों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८).

अज्ञान को मुसलमान और ईसाई स्वर्ग प्राप्ति का मार्ग मानते हैं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) (कुरान २:३५)].

४ मस्जिदों में धमाके के कारण हम भगवा आतंकवादी हैं| और मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़ने वालो की संरक्षक एलिजाबेथ सरकार आतंकवादी नहीं - दूध की धुली है!

हम अज़ान और ईसा के विरोधी हैं| क्योंकि अल्लाह व ईसा ने एलिजाबेथ को हमे कत्ल करने की आज्ञा दे रखी है| (बाइबल, लूका १९:२७).

जज काटजू न मुसलमान हैं (कुरान ८:३९) व न ईसा को अपना राजा मानते हैं| (बाइबल, लूका १९:२७). अपना जीवन बचाने के लिए क्या करेंगे?

कांग्रेस द्वारा भारतीय संविधान का संकलन करने के बाद अब एलिजाबेथ के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ईसा की भेंड़ हैं| भेंड़ सम्पत्ति नहीं रखते| आप के पास क्यों रहे?

और जिहाद द्वारा मानवमात्र को दास बनाकर धरती पर इस्लामी शरियत का राज्य स्थापित करना है| यदि ईसाइयत रहेगी तो सबको ईसा की बुद्धिहीन भेंड़ बन कर ईसा की दासता स्वीकार करनी पड़ेगी (बाइबल, लूका १९:२७) और इस्लाम धरती पर रहेगा तो सबका खतना होगा| (कुरान ८:३९). अब्रह्मी संस्कृतियों रहेगा तो कोई मंदिर नहीं बच सकता| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)].

भारतीय संविधान मानव जाति की हत्या कराने के लिए संकलित किया गया है| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान २:१९१) के साथ पठित भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१).

हर ईसाई व मुसलमान दास है| विश्व के प्रत्येक व्यक्ति को दास बनाना उसका धर्म है| दास न बनने वाले को कत्ल करना उनका मजहबी दायित्व है| म० क० गाँधी ने हमसे रामराज्य और स्वतंत्रता का वादा किया था| भारत के किसी कानून के अधीन हमें एलिजाबेथ की भेंड़ बनने और अपनी स्वतंत्रता गवांने के लिए विवश नहीं किया जा सकता| न कत्ल किया जा सकता है| अतएव ईसाई व मुसलमान अब्रह्मी संस्कृतियों छोड़ें या भारत|

३.     आर्यावर्त सरकार अब्रह्मी संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रही है.

४.     http://www.aryavrt.com/hmara-kathan-11404

 

+++

कहा जाता है कि कुरान अल्लाह [ईश्वरीय] का कलाम है, इसमे बतलाया गया की अल्लाह ने सात आसमान बनाए है। देखे कुरान 67/3.

 

+++

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

+++

शेर जी को नमस्ते!

एक दूसरे पर कीचड़ उछालने से अधिक अच्छा होता कि आप उपनिवेश और भारतीय संविधान का विरोध करते.

इंडिया आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ का उपनिवेश है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

०३/०७/१५

+++

जिस प्रकार मनुष्य निर्मित (कम्प्युटर computer) गणक के अंदर ही उसके प्रयोग की सारी विधि होती है, उसी प्रकार परमात्मा ने मनुष्य को शरीर के उपयोग और प्रकृति पर नियंत्रण की सारी विधि अष्टचक्रों में जन्म दे साथ दे रखी है. वीर्यरक्षा योग्य गुरु के संरक्षण में, गौ दुग्ध सेवन करने और ब्रह्मचर्य के पालन से ही हो सकती है. वीर्यरक्षा ही एकमात्र अष्टचक्रों तक पहुंचने का मार्ग है.

इन दैवी शक्तियों का दुरूपयोग न हो पाए, इसीलिए परमात्मा ने इसका नियंत्रण माया के आवरण में कर दिया है. समय समय पर दैवी शक्ति का जिसने भी दुरूपयोग किया, वह नष्ट हो गया, चाहे वह सहस्रबाहु, या हिरण्यकश्यप या रावण अथवा कंस ही क्यों न रहा हो.

कम्प्युटर(गणक) विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि संस्कृत गणक के लिए सबसे उपयुक्त भाषा है| संस्कृत और गुरुकुलों की उपेक्षा हम अल्पसंख्यक वैदिक पंथियों के मानवाधिकारों का हनन है| संयुक्त राष्ट्र संघ दुर्लभ पशु पक्षियों तक की रक्षा के लिए प्रयत्नशील है और एलिजाबेथ हमारे वैदिक सनातन धर्म को मैकाले के स्कूलों और मदरसों को प्रोत्साहन व अनुदान दे कर मिटा रही है|

 

+++

जेहोवा का कहना है कि धरती चपटी है और चार खम्भों पर टिकी है.

http://www.answering-christianity.com/earth_flat.htm

वस्तुतः जेहोवा या अल्लाह का अस्तित्व नहीं है| मूसा या मुहम्मद की बात करें, जिसने यहूदियों (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमानों (कुरान २:३५) को मूर्ख बनाया| मूसा और मुहम्मद तो नर्क में गए और अपना उत्तराधिकार शासकों और पुरोहितों को सौंप गए| मूसा / मुहम्मद ने यहूदियों/मुसलमानों से उनके आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति, आदि को उनका खतना कर उनसे छीन लिया और परजीवी और मानव जाति का शत्रु बना दिया| मुसलमान मुटठी भर यहूदियों का ही कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे| ईसाई उनका शोषण कर रहे हैं| मुसलमान इसलिए जीवित हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, उनका हाल ओसामा और सद्दाम जैसा होगा|

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकताईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं? धूर्त मूसा रचित बाइबल के महामूर्ख जेहोवा और धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

+++

धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

जिस अल्लाह को यह भी नहीं मालूम कि सूर्य कभी डूबता नहीं, (कुरान १८:८६) वह सर्वज्ञ कैसे है?

जो जेहोवा धरती को चार खम्भों पर टिकी बताता है, उसने धरती ६ दिनों में बना डाली.

मूसा और जेहोवा, (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद और अल्लाह (कुरान २३:६ व ७०:३०) नारियों के बलात्कारी हैं.

धरती पर अब्रह्मी संस्कृतियों के रहने से मात्र वैदिक सनातन धर्म को ही नहीं, अपितु मानवजाति के अस्तित्व को खतरा है| क्यों कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का एक फंदा (बूबी ट्रैप Booby trap) है| आर्यावर्त सरकार के पास भारतीय दंड संहिता की धारा ९७, १०२ व १०५ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| आप सहयोग दें तो आर्यावर्त सरकार ईसाइयत व इस्लाम और ईसाई व मुसलमान धरती पर नहीं रहने देगी|

यद्यपि बाइबल में खतना करने की स्पष्ट आज्ञा है, तथापि इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह (रिवाज) है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त भी नहीं है. फिर भी मुसलमान गाजे बाजे के साथ स्वेच्छा से खतना कराते हैं.

यह मुसलमानों के हित में है कि वे खतना का बहिष्कार करें. अपनी संतानों को गुरुकुलों में पढ़ा कर वीर्यवान ब्रह्म बनाएँ. अन्यथा मुसलमानों का अंत निश्चित है.

इन दैवी शक्तियों का दुरूपयोग न हो पाए, इसीलिए परमात्मा ने इसका नियंत्रण माया के आवरण में कर दिया है. समय समय पर दैवी शक्ति का जिसने भी दुरूपयोग किया, वह नष्ट हो गया, चाहे वह सहस्रबाहु, या हिरण्यकश्यप या रावण अथवा कंस ही क्यों न रहा हो.

धरती पर अब्रह्मी संस्कृतियों के रहने से मात्र वैदिक सनातन धर्म को ही नहीं, अपितु महामहिम सहित मानवजाति के अस्तित्व को खतरा है| क्यों कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का एक फंदा (बूबी ट्रैप Booby trap) है| आर्यावर्त सरकार के पास भारतीय दंड संहिता की धारा ९७, १०२ व १०५ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| आप सहयोग दें तो आर्यावर्त सरकार ईसाइयत व इस्लाम और ईसाई व मुसलमान धरती पर नहीं रहने देगी|

मानवमात्र को एलिजाबेथ के ईसा ने अपनी बेटियों से विवाह का अधिकार दिया है| (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और अल्लाह ने पुत्रवधू से निकाह का अधिकार| (कुरान, ३३:३७-३८).

पैगम्बर मूसा, ईसा और मुहम्मद तो रहे नहीं, अपना उत्तराधिकार सुल्तानों, राजाओं और शासकों को दे गए हैं, जो पुरोहितों, ईमामों व मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैं, जिसके कारण सत्य पर पर्दा पड़ा है|

 

०१/०७/१५

+++

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के आगे नौटंकी बाज सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार शून्य हैं| उपरोक्त अनुच्छेद के संकलन का फलितार्थ समझिए| लोकसेवक को उपनिवेशवासी की सम्पत्ति को छीनने के लिए ही नियुक्त किया जाता है| लोकसेवक के नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोकसेवक को उपनिवेशवासी को लूटना पड़ेगा| सम्पत्ति का संकेंद्रण तो होगा लेकिन एलिजाबेथ के पास| इसके गणित को समझिए| इस अनुच्छेद के अधीन उपनिवेशवासी की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ की है| खूंटे से बंधे किसान के पशु की भांति टाटा व अम्बानी के पास भी अकूत सम्पदा एलिजाबेथ की दया पर उनके पास है| जब लोकसेवक भ्रष्टाचार करता है तो उसे अपराधी नहीं माना जाता, माना यह जाता है कि लोकसेवक ने ऐसा सरकारी सेवा के अधीन किया है और उसे दंडित नहीं किया जा सकता|

(गांधी) और माउंटबेटन के बीच समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान व ईसाई सहित सभी उपनिवेशवासियों का सब कुछ एलिजाबेथ का ही है. हमारी स्थिति किसान के पशु की भांति है, जिसका कुछ भी नहीं होता!

देश के उपनिवेशवासियों के शत्रु तो अब्रह्मी संस्कृतियों का संरक्षण, संवर्धन और पोषण करने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व अनुच्छेद ३९(ग) हैं| चुनाव द्वारा इन अनुच्छेदों को कोई नहीं बदल सकता| भारतीय संविधान की शपथ लेने के बाद ही केजरीवाल चुनाव लड़ेंगे| ईसाई आतंकवादियों और अन्ना की चंडाल चौकड़ी एलिजाबेथ द्वारा सबको किसान के पशु की भांति दास बनाने और लूटने के लिए खड़ी की गई है|

अतएव आप के पास न जीवित रहने का अधिकार है और न सम्पत्ति रखने का अधिकार| किसान के पशु की भांति आप एलिजाबेथ की भेंड़ हैं|

खूंटे से बंधे किसान के पशु की भांति टाटा व अम्बानी के पास भी अकूत सम्पदा एलिजाबेथ की दया पर उनके पास है|

 

+++

इन आये दिन के घोटालों का शोर इसलिए है कि एलिजाबेथ की धन की प्यास नहीं बुझ रही है| भारतीय संविधान का संकलन उपनिवेशवासियों को किसान के पशु की भांति दास बनाकर लूटने व वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है|

भारत आज भी इंडिया और

हमारी स्थिति किसान के पशु की भांति है, जिसका कुछ भी नहीं होता! यदि इंडिया आगे भी एलिजाबेथ का उपनिवेश बना रहा तो एलिजाबेथ हमारा मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). हमारी नारियों का हमारे आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६) और हम लोग कुछ न कर पायेंगे! हम उपनिवेश से मुक्ति के लिए लड़ रहे हैं.

 

+++

भारत आज भी इंडिया और एलिजाबेथ का उपनिवेश है. २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द (गांधी) और माउंटबेटन के बीच समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान व ईसाई सहित सभी उपनिवेशवासियों का सब कुछ एलिजाबेथ का ही है.

क्या मीडिया ने अपने सहित देश के उपनिवेशवासियों की दासता का विरोध किया?

पाकपिता गाँधी ने हमसे राम राज्य का वादा किया था, भारतीय संविधान ने हमे उपासना की स्वतंत्रतादी है| हम एलिजाबेथ का रोम राज्य क्यों स्वीकार करें? भारतीय संविधान हमें उपासना की स्वतंत्रताऔर गणतन्त्र का वचन देता है, हम ईसा का रोम राज्य क्यों स्वीकार करें? हम मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) वाली एलिजाबेथ को सत्ता में क्यों रहने दें?

उपनिवेश का दास बनाकर देश को दरिद्र बना दिया. अब एलिजाबेथ मनुष्य का मांस खायेगी और लहू पिएगी. (बाइबल, यूहन्ना ६:५३)

इंडिया आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ का उपनिवेश है. जब तक इंडिया उपनिवेश रहेगा, गो हत्या कैसे बंद हो सकती है? क्या आप को एलिजाबेथ के शासन में रहने में लज्जा नहीं आती? क्या आप मौत के फंदे और लुटेरे भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं? यदि नहीं, तो आप गोहत्या कैसे रोकेंगे?

इंडिया आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ का उपनिवेश है. जब तक इंडिया उपनिवेश रहेगा, गो हत्या कैसे बंद हो सकती है? क्या आप को एलिजाबेथ के शासन में रहने में लज्जा नहीं आती? क्या आप मौत के फंदे और लुटेरे भारतीय संविधान का विरोध करेंगे? यदि नहीं, तो आप गोहत्या कैसे रोकेंगे?

इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश है और आप मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने वाली एलिजाबेथ (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) की दासी हैं. आजतक विरोध न कर सकीं.

साम्प्रदायिक सद्भाव, सर्वधर्म समभाव और गंगा जमुनी तहजीब

मीडिया कर्मियों! एलिजाबेथ आप लोगों का मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). आप के नारियों का आप की आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६) और आप लोग कुछ न कर पाओगे! आप लोगों के पास एलिजाबेथ को मार डालने का कानूनी अधिकार है| (भारतीय दंड संहिता की धाराएँ १०२ व १०५). लेकिन हिंसा का एकाधिकार राज्य के पास होता है| इसीलिए आर्यावर्त सरकार की स्थापना की गई है| क्या आप लोग मानव जाति की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

अब राजा जेल गए| प्रणब दा जेल कब जाएँगी? राजा ईसाई नहीं हैं और न आर्थिक ठगिनी प्रणब दा| आर्थिक ठगिनी प्रणब दा का क्या होगा? क्यों कि प्रणब दा को इस बात के लिए लज्जा नहीं है कि प्रणब दा एक ऐसी चोरनी और मनुष्य के पुत्र का मांस खाने वाली और लहू पीने वाली एलिजाबेथ की चाकरी कर रही हैं, (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), प्रणब दा को मिटाना जिसका धर्म है|

जय हो सबलाओं की और जय हो मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने वाली एलिजाबेथ की. (बाइबल, यूहन्ना ६:५३).

संविधान ने हमे उपासना की स्वतंत्रता दी है| हम मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) वाली एलिजाबेथ को सत्ता में क्यों रहने दें?

अमेरिका आज भी है, लेकिन लाल भारतीय और उनकी माया संस्कृति मिट गई| बेबीलोन, अफ्रीका और आष्ट्रेलिया आदि आज भी हैं लेकिन वहाँ के आदिवासी और उनकी संस्कृति मिट गई| इंडिया उपनिवेश है और इंडिया का हर उपनिवेशवासी एलिजाबेथ की प्रजा! एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति मिटाएगी, जजों और लोकसेवकों सहित आप लोगों का मांस खाएगी और लहू पियेगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). इंडिया तो रहेगा| लेकिन द्रविणों सहित वैदिक सनातन संस्कृति और भारत के मूल निवासी न रहेंगे| यदि रहेंगे भी तो दास बन कर|

मीडिया कर्मियों!

एलिजाबेथ आप लोगों का मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). आप के नारियों का आप की आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६) और आप लोग कुछ न कर पाओगे! आप लोगों के पास एलिजाबेथ को मार डालने का कानूनी अधिकार है| (भारतीय दंड संहिता की धाराएँ १०२ व १०५). लेकिन हिंसा का एकाधिकार राज्य के पास होता है| इसीलिए आर्यावर्त सरकार की स्थापना की गई है| आप लोग मानव जाति की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार की सहायता करें अथवा मिट जाएँ|

क्या आप को ऐसी आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) औरत के शासन में रहने में लज्जा नहीं आती? क्या आप मौत के फंदे और लुटेरे भारतीय संविधान का विरोध करेंगे? यदि नहीं, तो क्या आप जीवित हैं?

 

+++

कटारिया जी को नमस्ते!

क्या ईसाई व मुसलमान जानते हैं कि एलिजाबेथ उनका का दोहन कर रही है? वे

 

+++

(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८).

++++++++++++++++++++++++++++

३०/०६/१५

+++

 

२९/०६/१५

+++

http://www.aryavrt.com/muj15w26ay-yogaa-kya_hai

+++

स्वामी श्यामेंद्र जी को ओम् नमोनारायण!

उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के दास हैं.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

British Nationality Act, 1948.

1.-(i) Every person who under this Act is a citizen of the British United Kingdom and Colonies or who under any enactment for nationality being in force in any country mentioned in subsection (3) of this section is a citizen of that country shall by virtue of that citizenship have the status of a British subject.

उपरोक्त

लेकिन उपनिवेश और उपरोक्त ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस कानून के संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें, राष्ट्रपति व राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| यानी कि उपनिवेश का विरोध किया नहीं कि राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को फांसी दिलवाने के लिए विवश हैं.

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

सुकन्या एलिजाबेथ की दासी है| सुकन्या या धरती की किसी कन्या का बलात्कार कराने का अधिकार एलिजाबेथ को (बाइबल, याशयाह १३:१६) और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है. एलिजाबेथ तो आराम से बकिंघम महल में उपनिवेशवासियों के मौत का जश्न मनाएगी और भारतीय संविधान के संकलनकर्ताओं को धन्यवाद देगी, जिसने गौ और मानव भक्षी एलिजाबेथ को इंडियन उपनिवेश की मल्लिका स्वीकार किया है|

 

२८/०६/१५

+++

मानव जाति के हत्यारों ईसाइयत और इस्लाम को छल पूर्वक भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा संरक्षण दे कर एलिजाबेथ आप को मिटाना चाहती है और हम आप को बचाना चाहते हैं| क्या आप हमारी सहायता करेंगे?

विचार करें! ईसाइयत और इस्लाम ईश्वर तक पहुँचने के मार्ग हैं, अथवा मानवमात्र को ईश्वर से दूर करने के?

अब्रह्मी संस्कृतियों में शांति के लिए कोई स्थान नहीं है. शांति चाहें तो ईसाइयत और इस्लाम मिटायें.

इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| इंडिया के किसी उपनिवेशवासी के पास जीवित रहने व सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है| आर्यावर्त सरकार ने स्वतंत्रता के उस युद्ध को प्रारम्भ कर दिया है, जिसका १५ अगस्त, १९४७ से गांधी ने माउंटबेटन से समझौता कर अपहरण कर लिया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. मानवजाति को बिना ईसाइयत और इस्लाम को मिटाए मुक्ति नहीं मिल सकती| क्या आप ब्रिटिश की दासता से मुक्ति, उपासना की स्वतंत्रता, और सम्पत्ति व उत्पादन के साधन प्राप्त करने के इस युद्ध में हमे तन, मन और धन से सहयोग देंगे?

ईसाइयत और इस्लाम किसी को उपासना स्थल रखने का अधिकार नहीं देते. [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]

आज जीविका, पद और प्रभुता के लोभ में जो अपराध और पाप लोकसेवक कर रहे हैं, वह उनका ही काल बन जायेगा|

क्या माननीय प्रधानमंत्री नमो देश को उपनिवेश से मुक्ति दिला सकते हैं?

+++

बीती को भूल जाइये. आगे की सोचिये. नमो सबका विकास चाहते हैं, मोटे तौर पर इस पर किसी को आपत्ति नहीं होगी, लेकिन देश के उपनिवेश रहते हुए विकास एलिजाबेथ का होगा. हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को तो पद, प्रभुता और पेट के लोभ में लोकसेवक भी मार रहे हैं और अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी भी.

 

महामहिम जी! दिए की लौ पर मरने वाले पतिंगों की भांति पद, प्रभुता और पेट के लोभ में आप अपना जीवन, सम्पत्ति, नारियां, संस्कृति और धरती गवाने में लिप्त हैं. आप को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है.

माननीय प्रधानमंत्री नमो जी! आप मुंह चुराए क्यों फिर रहे हैं?

जिसने भी भारतीय संविधान में निष्ठा की शपथ ली है, मानवता का शत्रु है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने उपनिवेशवासियों से जीवन और अनुच्छेद ३९(ग) ने सम्पत्ति रखने का अधिकार २६ जनवरी, १९५० से ही छीन लिया है| वोट द्वारा भी उपनिवेशवासी इस अधिकार को नहीं बदल सकते| स्वयं लोकसभा व सर्वोच्च न्यायलय भी कुछ नहीं कर सकती| स्वयं लोकसभा अध्यक्ष इस कानून के आगे लाचार हैं| सर्वोच्च न्यायलय भी कुछ नहीं कर सकती|

भारतीय संविधान द्वारा सबकी सम्पत्ति की लूट को भ्रष्टाचार नहीं माना जाता| लोक सेवकों की नियुक्ति ही उपनिवेशवासियों को लूटने के लिए की जाती है| एलिजाबेथ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण दे कर लोकसेवकों को उपनिवेशवासी को लूटने के लिए नियुक्त किया है| धारा १९७ के अधीन लोक सेवकों की लूट को तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता, जब तक एलिजाबेथ को लूट में हिस्सा मिलता रहे| उपनिवेशवासी को लूटने के लिए ही जजों को नियुक्त किया गया है| एलिजाबेथ अपने द्वारा मनोनीत राज्यपालों से लोकसेवकों को संरक्षण दिलवाती है| हिस्सा न मिले तो एलिजाबेथ संरक्षण वापस करवा लेती है|

 

+++

इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ ईसाई व मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

माननीय प्रधानमंत्री नमो ने सत्ता के हस्तानान्तरण के रजिस्टर पर हस्ताक्षर किये हैं और मौत के फंदे परभक्षी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है| इतना ही नहीं पद और गोपनीयता की भी शपथ ली है.

+++

 

२७/०६/१५

+++

भारतीय संविधान मानव मात्र को दास बनाने अथवा कत्ल करने की संहिता है| भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, अस्तित्व को खतरा है| दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करिये|

मनुष्य के ईश्वरीय शक्ति के मूल स्रोत वीर्य को नष्ट करना धूर्त पैगम्बरों ने मजहब का अपरिहार्य कर्म बना रखा है, वह भी विश्वास के आधार पर. बिना प्रमाण तो जज व क़ाज़ी भी निर्णय नहीं करता! फिरभी आप खूनी, लुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह को बिना प्रमाण ईश्वर मानने के लिए विवश कर दिए गए हैं? बैरिस्टर २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता मोहनदास करमचन्द गांधी ने मजहब के आधार पर देश का बंटवारा भी किया और मुसलमानों को जिन्ना के सुझाव के बाद भी इंडिया से जाने नहीं दिया! तब हमने विरोध क्यों नहीं किया?

दासता से मुक्ति, चरित्र, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहें तो निःशुल्क ब्रह्मचारी बनाने वाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करें| क्यों कि गुरुकुल वीर्यवान ब्रह्मचारी बनाते हैं. आप का एक ब्रह्मचारी इस्लाम से निपटने के लिए काफी है.

अब्रह्मी संस्कृतियों की वीर्यहीनता का मजहब मानवमात्र को दास बनाने वाला अभिशाप है| मानवमात्र को वीर्यहीन बनाने वाली आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को हम धरतीपर क्यों रहने दे रहे हैं?

अब्रह्मी संस्कृतियाँ स्वयं अपने अनुयायियों की ही शत्रु हैं। इस्लाम का लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) अल्लाह अपने अनुयायी मुसलमानों से वादे जन्नत की करता है, लेकिन १४०० से अधिक वर्षो से मुसलमानों को कब्र में सड़ा रहा है और आगे कयामत तक सड़ाएगा।

ईश्वर जन्म मरण से मुक्ति (मोक्ष) देता है अथवा तुरन्त पुनर्जन्म और ईसा अनन्त जीवन (कब्र में)! ईसा मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने देता उसे पापी भेंड़ में परिवर्तित कर देता है। ईसा का बाप जेहोवा और अल्लाह विवेक के परम शत्रु हैं। {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}, निज हित में ईसाइयों व मुसलमानों को चाहिए कि वे स्वयं मानवता के प्रति अपराध न करें। मुसलमानों को यह याद रखना चाहिए कि उनका आखिरी पैगम्बर अभी तक मुसलमानों को विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी ही बना सका है। ओसामा बिन लादेन ने ११ सितम्बर, २००१ से ही उनके जीवन व साम्राज्य को खतरे में डाल दिया है।

यदि प्रकृति का यह शास्वत सत्य नियम है कि सबसे बलवान और धर्म परायण ही बचेगा और यदि वैदिक सनातन धर्म का मूल मंत्र सत्यमेव जयतेहै यानी असत्य पराजित होगा, तो यह गाँठ बाँध लीजिए कि संसार से या तो मानवता नष्ट होगी अथवा आसुरी अब्रह्मी संस्कृतियां| क्यों कि ईसाई व मुसलमान स्वयं एक दूसरे को कत्ल करेंगे.

+++

गो और मानव भक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ को भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने सबकी सम्पत्ति और पूँजी लूटने का अधिकार दिया है और अनुच्छेद २९(१) ने जो भी ईसा को राजा स्वीकार न करे-उसे कत्ल करने का, उसका मांस खाने का और लहू पीने का (बाइबल, लूका १९:२७) अधिकार| है, हमारी हत्या करने वाली गो व नर भक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है| एलिजाबेथ सत्ता में इसलिए है कि हर ईसाई भेंड़ व मूर्ख (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) है और हर मुसलमान मूर्ख (कुरान २:३५) और मुजाहिद|

 

+++

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

रेबेल्लो सहित हर उपनिवेशवासी एलिजाबेथ का दास है.

+++

इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. जब तक इंडिया उपनिवेश रहेगा, गो हत्या कैसे बंद हो सकती है? क्या आप को एलिजाबेथ के शासन में रहने में लज्जा नहीं आती? क्या आप मौत के फंदे और लुटेरे भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं? यदि नहीं, तो आप गोहत्या कैसे रोकेंगे?

इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. नमो ने जिस भारतीय संविधान पर आस्था और निष्ठा की शपथ ली है, वह न किसी को जीने का अधिकार देता है और न सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का.

माननीय प्रधानमंत्री नमो सहित प्रत्येक उपनिवेश वासी एलिजाबेथ का दास है|

इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है| नमो तो मुखौटा है| फैसले एलिजाबेथ ही लेती है| आपरेशन ब्लू स्टार याद करें|

 

+++

लेकिन मैं चाहता हूँ कि मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो. मैं कौन हूँ, जानने के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj15w26-aatankvaadi-rajyapal

यह सार्वजानिक अभिलेख है. माननीय प्रधानमंत्री नमो की सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://pgportal.gov.in

 

Registration Number is : DARPG/E/2015/07853

 

कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त पंजीकृत न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

+++

    Surely the vilest of animals in God's sight are the non-Muslims.

(Compare with Surah 8:55)

 

How perverse are the non-Muslims!

(Compare with Surah 9:30)

 

Those with Muhammad are ruthless against the disbelievers

(Compare with Surah 48:29)

२५/०६/१५

+++

शेरजी को नमस्ते और लेख अग्रसारित करने के लिए धन्यवाद!

अब आया है ऊंट पहाड़ के नीचे.

चीन को हम मालेगांव के अभियुक्तों की ओर से शुभकामनाएँ.

 

+++

Frankly, I concur with China's firm action in this regard,serves them well.

Whoa. China Won't Let Muslims Fast for Ramadan!

Posted on   June 20, 2015 by  Onan Coca —  126 Comments

China is giving the Islamic world a taste of its own medicine by refusing to allow the Muslim minority to practice their religion as they see fit.

I will never, ever advocate that freedom of religion should be infringed upon… but in this instance I admit to feeling a bit of a pleasure to see some in the Muslim community being forced to suffer the same sleights that Islamic governments commit against Christians and other religious minorities in the Islamic world.

As Ramadan begins, China’s atheist government is taking extreme measures to stop its 20 to 30 million Muslim citizens from keeping the religiously mandated daytime fast.

Chinese attempts to suppress Islam have focused on Xinjiang, a majority-Muslim province in the country’s far west. Xinjiang’s locals, the Uyghurs, have their own language and culture. Some Uyghurs prefer calling Xinjiang “East Turkestan” and favor independence from China.   (RELATED: China Forces Muslim Shopkeepers To Sell Liquor)

According to  Reuters, Chinese authorities are making Muslim officials in Xinjiang swear oaths, “guaranteeing they have no faith” and that they will not fast during the holy month. The requirement also extends to teachers and students in government-run schools.

County governments in Xinjiang have  published advisories to “not engage in fasting, vigils or other religious activities,” and instructing students: “do not fast, do not enter mosques … and do not attend religious activities.” One county government cited a 90-year-old man who said that “to consciously resist religious and superstitious ideas,” he would avoid fasting and visiting mosques.

Likewise, restaurants will be required to stay open during the day, and those who do not comply face the threat of increased food-safety inspections.

China claims its restrictive policies toward religious expression are meant to curb “religious extremism.” Public terrorist attacks by Uyghur separatists have increased in recent years, and officials have responded in various parts of Xinjiang by increasing security and restricting various forms of Muslim cultural expression.

The country also severely restricts and controls free expression of Christianity, Buddhism and various new religious movements.

Egypt’s Al-Azhar University, the thousand-year-old chief scholarly institution of Sunni Islam,  issued a statement Friday condemning “the Chinese authorities’ ban on Muslims from fasting and practicing their religious rituals during Ramadan.”

Ramadan lasts from mid-June to mid-July this year. The observance commemorates the month during which Muslims say Muhammad received his first revelation of the Quran.

Fasting and sexual abstinence during daylight in Ramadan is obligatory for all capable adult Muslims. It is one of Islam’s “five pillars,” or core mandates, together with belief in God and Muhammad, daily prayer, charitable giving and pilgrimage to Mecca.

Muslim customs during Ramadan in many places include nightly feasts, public celebrations, exchanging gifts and giving to charity. The month ends with Eid al-Fitr, one of Islam’s most significant holidays.

 

 Source Freedom Post.

 

 

forwarded as received

Ln. P.K. Agrawal

 

+++

वेदों में नारी की स्थिति

 

In contrast, there is Vedic Sanskriti. It grants freedom of worship of god of one's choice. (Gita 7:21). Supports right to property. (Manusmriti 8:308). Vedic culture Provides supreme authority and goddess status to women.

Vedic culture has goddess of wealth named Lakshmi, Goddess of Defence Durga, goddess of knowledge named Saraswati (to whom Muslims hate) etc. Has Islam any woman goddess?

No religion supports virgin mothers. In fact, sexual intercourse without marriage is sin and crime both even in Christianity and Islam. However, the founder of Christianity is Ghost Jesus who is son of a virgin mother named Marium. Virgin mothers are found in Christianity alone.

No Muslim visits his worship place named mosque at the time of marriage, although even their Christian cousins visit Church at the time of their marriage. It is wrong to suggest that women & men have equal status in Islam.

Ishwar has given them far more responsibilities than men have. Men had always exploited women. Women are victims of gender bias. Women alone can defuse this bias and their exploitation. Women must note that they are breeding their own enemies. The home which they build for years, give birth to children i.e. the enemies of human race, who either shout Azan & recite Namaz if male, or breed female, who again breed their own enemies, are being thrown out of their very home with the pronouncement of 'TALAK' thrice in this very Bharat. They have no forum to get even maintenance! They live under protracted fear of Talak.

Muslims abuse the faiths and insult gods of non-Muslims through their Azan and Namaz. To accept Azan call for prayer and Namaz prayer amount to support death and destruction of human race. Why Muslims be permitted to continue Azan & Namaz, which are cognizable offences u/s 153 & 295 of the Indian Penal Code?

As per prevailing constraint, a citizen cannot register FIR against Muslims. There is bar u/s 196 of the Criminal Procedure Code. This bar, like provision of Article 29(1), appears to be intentional. This is because Democrats find Vedic culture their first enemy and wish to liquidate the same.

In fact, while insulting Vedic culture and Ishwar has legal and Constitutional support, writing in protest against abuses and insults by Muslims, attract prosecutions. One is being beaten by police & consigned in judicial custody by judiciary. Muslim clergies promulgate FATWA. Nay! Any fanatic may slay such writer.

In fact, unconcerned with the dangers noted above, the press secretary of Aryavrt had been demanding for abolition of Azan and Namaz and return of Qaba robbed from Aryans by Muslims. An FIR was registered against the press secretary in Narela Industrial Area Police Station, N/W Delhi. The case has been dismissed and the secretary has been discharged on 26-2-2005. Copy of complete case is being attached with this mail. The case may be read on our Web-site.

Since 26-5-05 I am demanding for the ban on Azan & Namaz. Like revered Shri Subhash Chandra Bose, I am not demanding the bloods of citizens. I am asking for the support of non-Muslims for their own survival.

The situation is alarming. On the first sight of this issue, Dy. Home Secretary, Press, would get irritated. He would immediately sanction my prosecution. Police would immediately arrest me. POLICE would beat me till I am conscious. Thereafter, she would produce me before that Raj Rani Mitra MM, who has been torturing me so far, because I am fighting to protect her honour. She would be pleased to remand me in judicial custody.  It would insure her personal rape by Muslims. Nay! After reading this magazine, Sanjay Gupta of Dainik Jagran would swing in action. Treading on the foot steps of his hell consigned father Narendra Mohan, he would immediately file a criminal complaint against me. So that his secular Muslims may rape his women, rob him and eradicate his Vedic culture.

However, Unlike Article 31 of the Indian Constitution, the laws of Indian Penal Code have not been amended yet and are in full force. Exercising her right provided in Section 96, 99, 102 and 105, of the Indian Penal Code Aryavrt Government is repeatedly demanding for abolition of Azan, Namaz, Islam and Christianity. If UOI cannot protect humanity, she has no right to rule. UOI must peacefully transfer the power to rule to Aryavrt Government. One may note the extract from Indian Penal Code.

96. Nothing is an offence which is done in the exercise of the right of private defense.”

Islam is fraud imposed upon human race! Muslims are first victim of Islam. Muslims are living in ignorance. Satan Allah promises heaven i.e. Jannat and puts Muslims in grave hell since inception of Islam. They would remain there until Qayamat i.e. Day of Judgment. Once these women, who are born free by the nature, decide to stop sexual relations with those having faith of criminal Islam and Christianity, these religions would die in absence of regeneration. Where are the Human Rights activists? What the women Commission, under the chairperson ship of Girija Vyas, is doing?

If you are serious for the survival of human race, fight against criminal religions named Christianity and Islam.

Saptapadi is the most important ritual in Vedic Brahma Vivah (marriage). The bride becomes real owner of what ever the groom earns and possesses. Marriage is not contract like Islamic Nikah.

It is hard truth. On the strength of the supremacy of men dominated media; women are deliberately kept ignorant of the true situation.

No one has courage to oppose Christianity and Islam. What have I written above is in fact blasphemy attracting death penalty. Muslims have slain Swami Shraddhanand and Rajpal. They may slay me as well. In that case, I would not be available to protect women's cause. However, so long as I am in this world, I am determined to support women's cause.

 

२३/०६/१५

+++

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

 

उपनिवेश

https://treenetram.wordpress.com/2015/06/20/%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8/

 

+++

शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के नये मानदंड.

एलिजाबेथ ने सत्ता में आते ही जगतगुरु जयेंद्र को दीपावली की रात में बंदी बनाया|

सभी अभियुक्तों के साथ वे निर्दोष छूट गए हैं|

+++

 

 

+++

http://www.aryavrt.com/muj15w25ay-blatkari-asaram

+++

धरती के सभी नारियों के बलात्कारी जेहोवा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व अल्लाह (कुरान २३:६ व ७०:३०) अपराधी नहीं!

http://www.aryavrt.com/muj14w04-gangulikebad-swatantr

 

२१/०६/१५

+++

मात्र गांगुली और स्वतंत्रकुमार अपराधी हैं!

वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए एलिजाबेथ आतताई इस्लाम को संरक्षण देने की अपराधी है| जिन्हें विश्वास न हो वे हमारे स्वामी असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा और जगतगुरु अमृतानंद का हाल देख लें| हमारे विरुद्ध कोई प्रमाण नहीं है, फिर भी हम एलिजाबेथ द्वारा प्रताड़ित हो रहे हैं| नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें|

योगगुरू बाबा रामदेव भ्रष्टाचार के विरुद्ध नहीं लड़ सकते| एलिजाबेथ का विरोध करते ही जेल जायेंगे और पुलिस के इतने डंडे पड़ेंगे कि योग और स्वाभिमान भूल जायेंगे|

उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार जिसके पास भी सम्पत्ति या पूँजी है, वह अपराधी है| टाटा व अम्बानी के पास सम्पत्ति व पूँजी इसलिए है कि वे उपनिवेशवासी को लूट कर एलिजाबेथ तक हिस्सा पहुंचाते हैं| लोकपाल बिल के स्थान पर भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का उन्मूलन करो या सत्ता छोडो|

क्या आप ऐसे अनुच्छेद को पसंद करेंगे जिसने आप को पशु से भी निकृष्ट बनाया है?

उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार जिसके पास भी सम्पत्ति या पूँजी है, वह अपराधी है| टाटा व अम्बानी के पास सम्पत्ति व पूँजी इसलिए है कि वे उपनिवेशवासी को लूट कर एलिजाबेथ तक हिस्सा पहुंचाते हैं| लोकपाल बिल के स्थान पर भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का उन्मूलन करो या सत्ता छोडो|

+++

यह कमाल है दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ का| अपराधी वह है, जिसे एलिजाबेथ अपराधी माने|

हमने बाबरी ढांचा गिराया है| क्यों कि विवाद का मूल बिंदु है कि अपराध स्थल मस्जिद धरती पर क्यों रहें? मस्जिद बचाने वाले अपराधी हैं|

क्या आर्यावर्त सरकार जान सकती है कि क्यों हेराफेरी करने वाला अपराधी है और क्यों सबकी सम्पत्ति और पूँजी लूटने वाला भारतीय संविधान अपराधी नहीं है?

मेरा आरोप है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध या लोकपाल की नियुक्ति के लिए अथवा विदेश में जमा धन वापस लाने के लिए लड़ने वाले योगगुरू, अन्ना, पूर्व केंद्रीयमंत्री डा० सुब्रमण्यम स्वामी, पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण और श्री श्री रविशंकर सभी एलिजाबेथ द्वारा पोषित अथवा भयादोहित अपराधी हैं| जिन्हें लोकसेवकों के भ्रष्टाचार तो दिखाई देते हैं, लेकिन संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) व दंप्रसंकीधारा१९७ के भ्रष्टाचार दिखाई ही नहीं देते!

सबकी सम्पत्ति लूटने वाला भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) और सबको कत्ल करने वालों का संरक्षक भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अपराधी नहीं है, मात्र वी के सिंह अपराधी हैं| क्यों कि किसी को अपराधी मानने और न मानने का अधिकार एलिजाबेथ के पास दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अंतर्गत सुरक्षित है|

अब्रह्मी संस्कृतियों अपराधी संस्कृतियाँ हैं| इनसे अपनी रक्षा करने में हमे सहयोग दें|

अब्रह्मी संस्कृतियों अपराधी मजहब हैं और उपनिवेशवासी अपराधियों के अधिकार नहीं होते|

श्री ठाकुर जी! मुझे ईश्वर ने ज्ञान दिया है| (गायत्री मंत्र). जब कि ज्ञान का फल खा लेने के कारण जेहोवा (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व अल्लाह (कुरान २:३५) दोनों ने आदम को स्वर्ग से भगा दिया| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हमें अपराधी क्यों घोषित कर रखा है?

 

२०/०६/१५

+++

शेरजी को नमस्ते!

आप ने मेरा सम्बोधन गलत किया है. आचार्य गुरुकुलों में होते हैं. मैंने गुरुकुल का मुंह भी नहीं देखा.

अब आता हूँ, पत्र के उत्तर पर;

 

+++

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. इस प्रकार अब्रह्मी संस्कृतियाँ प्रत्येक मनुष्य को बलिपशु बनाती हैं.

इस प्रकार ईसाई व मुसलमान सहित ब्रिटिश उपनिवेश का प्रत्येक निवासी बलिपशु बन कर रह गया है. यह जानते हुए भी कि उसे कत्ल होना है, वह अपनी रक्षा नहीं कर सकता. बलि देने, दिलाने और देखने वालों को बलिपशु के प्रति सहानुभूति नहीं होती. किसी को भी पाप अथवा अपराध बोध नहीं होता. अपितु सभी को बलि देना एक अत्यंत पवित्र धार्मिक कृत्य प्रतीत होता है.

 

 

+++

एलिजाबेथ को उपनिवेशवासी की हत्या अ० २९(१) व लूट ३९(ग) का अधिकार संविधान से प्राप्त है|

Current Status:Closed (NO ACTION REQUIRED)

Reason:Others

Date of Action:01 Jun 2015

Details:not a grievance.

जज के अर्दली द्वारा तारीख पर १० रूपये की भेंट (लूट), इलाहाबाद उच्च न्यायलय के रजिस्ट्रार द्वारा तारीख देने के लिए ५०० रूपये की लूट, चौराहे पर ट्राफिक पुलिस की लूट, रेल में टी टी की लूट, राजस्व कर्मियों की अभिलेखों में जालसाजी द्वारा लूट आदि को तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता, जब तक एलिजाबेथ को हिस्सा मिलता रहे| भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार तब होता है, जब एलिजाबेथ को हिस्सा न मिले|

उपनिवेशवासी को लूटने में संरक्षण देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है और वैदिक सनातन धर्म मिटाने वालों का विरोध कुचलने के लिए १९६| इनका नियंत्रण प्रेसिडेंट, राज्यपाल या जिलाधीश के पास रहता है| इस कानून के अधीन लोक सेवकों की लूट को तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता, जब तक एलिजाबेथ को लूट में हिस्सा मिलता रहे|

अतएव भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहें तो संविधान के उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) को संविधान से हटाने, अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने और धारा १९७ को भी हटाने के लिए आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करें|

जहां भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) एलिजाबेथ को उपनिवेशवासी को लूटने का असीमित अधिकार देता है, वहीँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन लोकसेवक के लूट को अपराध तब तक नहीं माना जाता, जब तक लोकसेवक लूट कर एलिजाबेथ या उसके मातहत को हिस्सा देता है|

संविधानकाअनुच्छेद ३९(ग) लूट को लोकसेवक का कर्तव्य बनाता है और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ लुटेरों को तब तक संरक्षण देती है, जब तक एलिजाबेथ को लूट में हिस्सा मिलता रहे|

जब तक मंदिर टूटता है, नारियों का बलात्कार होता है, उपनिवेशवासियों को उनकी मातृभूमि से उजाड़ा जाता है| धर्मान्तरण होता है, जाति हिंसा होती है और उपनिवेशवासी की सम्पत्ति पर बलपूर्वक अधिकार कर, एलिजाबेथ द्वारा, सम्पत्ति का दुरूपयोग किया जाता है, उसे तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता - जब तक एलिजाबेथ के हित सधें. वही कार्य तब भ्रष्टाचार हो जाता है, जब एलिजाबेथ के हितों पर आंच आती है. राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन अनुमति प्रदान करता है और लोकसेवक जेल चला जाता है|

एलिजाबेथ के रोम राज्य में मंदिर तोड़ना अपराध नहीं माना जाता!

+++

लोकसेवक इन ईशनिन्द्कों और खूनियों के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते. इस प्रकार

कुरान जलाने वाले को कत्ल करने वाले मुसलमान सरकार के संरक्षण में अज़ान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? १८६० से आज तक ईमामों के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई? जब कि इस्लाम व मस्जिद का विरोध करने के कारण हम प्रताड़ित हो रहे हैं|

काफ़िर ईशनिंदा और कत्ल होने की धमकियां सुनने के लिए विवश हैं. गौ मांस खाना सबका मानवाधिकार है. भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार से मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध करने के कारण मैं ४२ बार जेल गया हूँ. ५० अभियोग चले हैं. ३ आज भी लम्बित हैं. मुझ पर अभियोग चलाने की आवश्यकता रही लेकिन बपतिस्मा/अज़ान के विरुद्ध अभियोग चलाने की आवश्यकता क्यों नहीं होती?

मैं २ अरब रु० की सम्पत्ति का स्वामी हूँ. मेरे पक्ष में सन १९८९ से ही निर्णय भी है. लेकिन मेरी सारी सम्पत्ति सरकार ने लूट ली है. क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) किसी उपनिवेशवासी को सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का अधिकार नहीं देता. जिन लोकसेवकों ने मेरी सम्पत्ति लूटी है, उनके विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के संरक्षण के कारण मैं शिकायत न कर सका और न जज अपराधी लोकसेवकों का कुछ बिगाड़ सके. मैं लोकसेवक भी हूँ. पक्ष में निर्णय रखने के बाद भी मुझे पेंशन नहीं मिलती.

माली आवत देख के कलियाँ कहें पुकार.

फूले फूले तोड़ लो काल हमारी बार.

एलिजाबेथ ने राष्ट्रपति और राज्यपालों को, वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिये विवश कर दिया है|

अज़ान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इसके विपरीत जो भी अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध कर रहा है, दंप्रसंकीधारा१९६ के अंतर्गत जेल में ठूस दिया जा रहा है|

१९/०६/१५

+++

यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि

http://www.aryavrt.com/muj15w24ay-yogaa-divas

http://www.aryavrt.com/upniveshse-muktihetu-aagrah

http://www.aryavrt.com/muj15w24y-apradh-kb

http://www.aryavrt.com/muj15w25-rajyapal-naik

http://www.aryavrt.com/temple-status

http://www.aryavrt.com/muj13w51a-yaun-shoshan

http://www.aryavrt.com/dharmantarana-dhokha-hai

 

+++

 

१८/०६/१५

+++

सीधा सा मतलब है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने स्वयं काफ़िर नमो के लिए प्राण रक्षा अपराध बना दिया है और मोमिन के पास नमो का प्राण लेने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार है|

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

 

+++

क्या आप लोग मैकाले के शिक्षा पद्धति का बहिष्कार कर सकते हैं?

क्यों नहीं निर्णय लेते कि आज से ही आप किसी सन्तान को मैकाले के स्कूलों में यौनशिक्षा नहीं दिलाएंगे| निःशुल्क गुरुकुल चलाएंगे और अपनी संतानों को गुरुकुलों में ही पढायेंगे|

पहले अवैतनिक आचार्यों को सम्मान दीजिए और निःशुल्क गुरुकुलों में अपनी संतानों को संस्कारित कीजिए,

आप का समय निकल गया| वीर्य का फल ब्रह्मज्ञान आप को बाजार में नहीं मिलेगा| अपनी भावी पीढ़ी को निःशुल्क गुरुकुल में ब्रह्मचारी बनाने के लिए पढ़ाइये| मैकाले के यौनशिक्षा स्कूलों का बहिष्कार करिये| अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा|

निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा अपनाकर सिर्फ बीस बर्षो में आप अपनी वैदिक सनातन संस्कृति को बचा सकते हैं| देश को सोने की चिड़िया बना सकते हैं| यदि यहूदियों को गैस चैंबरों में जलाए जाने के लिए मिमयाते हुए जाने वाले मेमनों से ज्वलंत शेर में मात्र 10 वर्ष में बदला जा सकता है, तो आर्यों के लिए तो, गुरुकुलों द्वारा, उनसे कहीं बेहतर हालात (आज भी धरती का हर ६ठा व्यक्ति आर्य है) आज भी हैं| ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति का कार्य सिर्फ पांच वर्ष में करना किसी भी तरह से कठिन नहीं है।

 

+++

एक ओर पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है और दूसरी ओर वैदिक सनातन धर्म जो किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो मात्र वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]

यदि आप स्वयं का एवं मानव जाति का भला करना चाहते हों तो वैदिक पंथ अपनाइए| आर्यावर्त सरकार गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करेगी| प्रजा को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देगी| हम वैदिक सनातन धर्म की आधार शिलाओं गायत्री, गीता, गंगा और गो की रक्षा करेंगे| बैल आधारित खेती और गो वंश की वृद्धि को प्रोत्साहित करेंगे|

विद्या मात्र ब्रह्मविद्या है और ज्ञान मात्र ब्रह्मज्ञान| वीर्यरक्षा के बिना ब्रह्मज्ञान सम्भव नहीं| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, मानवजाति का भयानक शत्रु है| गुरुकुलों में वीर्यरक्षा की शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए मैकाले ने मिटा दिया|

विकल्प मात्र उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्ध है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता वैदिक सनातन संस्कृति के बचने के हर मार्ग अवरुद्ध कर दिये गए हैं| आप को वीर्यवान बनाने के शिक्षा केन्द्र गुरुकुलों को नष्ट कर दिया गया| आप आत्मरक्षा के लिये शस्त्र भी नहीं रख सकते| यदि आप स्वयं का एवं मानव जाति का भला करना चाहते हों तो निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने, प्रजा को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देने और वैदिक सनातन धर्म की आधार शिलाओं गायत्री, गीता, गंगा और गो की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिये| हम बैल आधारित खेती और गो वंश की वृद्धि को प्रोत्साहित करेंगे| हम पुनः इंडिया को सोने की चिड़िया भारत बना देंगे|

हम ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों का प्रसन्नतापूर्वक बहिष्कार करने के लिए विवश हैं. अपने बच्चोंको मैकाले के महंगे स्कूलों में यौनशिक्षा दिलाने के लिए हम सब कुछ दांव पर लगाने के लिए विवश हैं|

हम यौनशोषण देने वाले मंहगें स्कूलों को बंद कर आप की संतानों को निःशुल्क गुरुकुलों में ब्रह्मचर्य और योग की शिक्षा देना चाहते हैं.

 

+++

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

मानवजाति की समस्या ईसाई व मुसलमान नहीं अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं| अतएव अब्रह्मी संस्कृतियों को समाप्त करना ही मानवजाति के अस्तित्व को बचाने का एक मात्र मार्ग है| अब्रह्मी संस्कृतियों को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है, जब कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को अपनी लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है|

Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php

+++

१५ अगस्त १९४७ को भारत के आजाद होने पर देश के कोने - कोने से लाखों पत्र और तार प्रायः सभी जागरूक व्यक्तियों तथा सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा भारतीय संविधान परिषद के अध्यक्ष डॉ| राजेन्द्र प्रसाद के माध्यम से गांधी जी को भेजे गये जिसमें उन्होंने मांग की थी कि अब देश स्वतन्त्र हो गया हैं अतः गौहत्या को बन्द करा दो| तब गांधी जी ने कहा कि - " राजेन्द्र बाबू ने मुझको बताया कि उनके यहाँ करीब 50 हजार पोस्ट कार्ड , 25 - ३० हजार पत्र और कई हजार तार आ गये हैं| हिन्दुस्तान में गौ - हत्या रोकने का कोई कानून बन ही नहीं सकता| इसका मतलब तो जो हिन्दू नहीं हैं , उनके साथ जबरदस्ती करना होगा|| जो आदमी अपने आप गौकुशी नहीं रोकना चाहते , उनके साथ मैं कैसे जबरदस्ती करूँ कि वह ऐसा करें| इसलिए मैं तो यह कहूँगा कि तार और पत्र भेजने का सिलसिला बन्द होना चाहिये इतना पैसा इन पर फैंक देना मुनासिब नहीं हैं| मैं तो अपनी मार्फत सारे हिन्दुस्तान को यह सुनाना चाहता हूँ कि वे सब तार और पत्र भेजना बन्द कर दें| भारतीय यूनियन कांग्रेस में मुसलमान , ईसाई आदि सभी लोग रहते हैं| अतः मैं तो यही सलाह दूँगा कि विधान - परिषद् पर इसके लिये जोर न डाला जाये| " ( पुस्तक - ' धर्मपालन ' भाग - दो , प्रकाशक - सस्ता साहित्य मंडल , नई दिल्ली , पृष्ठ - 135 ) गौहत्या पर कानूनी प्रतिबन्ध को अनुचित बताते हुए इसी आशय के विचार गांधी जी ने प्रार्थना सभा में दिये -

" हिन्दुस्तान में गौ-हत्या रोकने का कोई कानून बन ही नहीं सकता| इसका मतलब तो जो हिन्दू नहीं हैं उनके साथ जबरदस्ती करना होगा| " - ' प्रार्थना सभा ' ( 25 जुलाई १९४७ )

१५ अगस्त खुशी का नहीं - शर्म का दिन है| पाकिस्तान बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी की लाश पर बन रहा था| गांधी के अतिरिक्त मोहम्मद अली जिन्ना, जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ पटेल, वीर सावरकर और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर में एक समानता थी| सभी बैरिस्टर थे| सभी को भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ का पूरा ज्ञान था| आक्रांता अंग्रेजों ने इस अधिनियम को हॉउस ऑफ कामन्स में सत्ता के हस्तांतरण के पूर्व १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित इंडिया को स्वतंत्रता नहीं दी गई, अपितु इंडिया का दो स्वतंत्र उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया। १९४७ में हमें राष्ट्रहंता-पाकपिता धूर्त गांधी ने हमारी ही भूमि ९९ वर्ष के लिए किराए पर दिलवा दिया| जो राज्य अंग्रेजों के अधीन नहीं थे वे भी इसके अंतर्गत अब अंग्रेजों के अधीन हो गए| खूनियों को रोका| इंडिया का संविधान अभी भी ब्रिटेन के अधीन है| ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ के अंतर्गत हर इंडियन, चाहे मुसलमान या ईसाई ही क्यों न हो, बर्तानियों की प्रजा है| भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ३६६,३७१,३७२ व ३९५ मे परिवर्तन की क्षमता संसद में नहीं है| गोपनीय समझौते, जिसका खुलासा आज तक नहीं किया जाता, के तहत वार्षिक १० अरब रूपये पेंशन व ३० हजार टन गौ मांस ब्रिटेन को दिया जाएगा| [यही गोपनीयता है, जिसकी नमो ने भी शपथ ली है] अनुच्छेद ३४८ के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय व संसद की कार्यवाही आंग्ल में होगी| गांधी ने पाकिस्तान भी बनवाया| पाकिस्तान को कश्मीर पर आक्रमण के बदले में ५५ करोड़ रु० दिलाये| माउंटबेटन से मिलकर गांधी मुसलमानों और हिंदुओं को उजड़वाता, लुट्वाता, कत्ल कराता और नारियों का बलात्कार क