Allah17815-3

शेरजी को नमस्ते!

पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षण, पोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

इस अनुच्छेद के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है| जब सम्पत्ति और पूँजी पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी का अधिकार ही नहीं, तो कोई लूटे उपनिवेशवासी को तो ५% ही मिलेगा| शेष ९५% तो राहुल के अनुसार बिचौलिए खायेंगे|

आप के पास सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है| आप द्वारा अर्जित आय का ९५% हिस्सा एलिजाबेथ और उसके मातहतों का है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ से प्राप्त आप का सम्पत्ति का मौलिक अधिकार सांसदों और जजों ने मिलकर आप से लूट लिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने लोकसेवकों को आप को लूटने की पूरी छूट दी हुई है| जब आप लूट कर सम्पत्ति एकत्र कर लेंगे तो सीबीआई आप से आप की लूट कर एकत्र की हुई सम्पत्ति को लूटेगी|

मुलायम उपनिवेशवासियों की पूँजी व सम्पत्ति संविधानकेअनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लूटेंगे| उसमे से राहुल के अनुसार ५% हिस्सा गरीबों में बाँट देंगे|

अर्मागेद्दन

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गुरुकुलों में ब्रह्मज्ञानी निर्मित होते हैं. वहाँ आधुनिक नाम की कोई चीज नहीं है.

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकताईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं? धूर्त मूसा रचित बाइबल के महामूर्ख जेहोवा और धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

इनके विपरीत वेद का कथन है,

अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या|

तस्यां हिरण्ययः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः||

अथर्ववेद;१०.२.३१.

अर्थ - (अष्टचक्रा, नव द्वारा अयोध्या देवानां पूः) आठ चक्र और नौ द्वारों वाली अयोध्या देवों की पुरी है, (तस्यां हिरण्ययः कोशः) उसमें प्रकाश वाला कोष है , (स्वर्गः ज्योतिषा आवृतः) जो आनन्द और प्रकाश से युक्त है|

अब्रह्मी संस्कृतियों और शासकों की मानसिकता वर्चस्व स्थापित करने की है, जिसकी पूर्ति वे मानवमात्र को वीर्यहीन कर कर रही हैं| क्योंकि दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, वीर्यहीन करना|

ब्रह्मतेज से कपिल मुनि ने सगर की सारी सेना को भष्म कर दिया. परशुराम की कोई सेना नहीं थी| परशुराम ने २१ बार क्षत्रियों का संहार किया था| हनुमान ने अकेले परम प्रतापी रावण के लंका को जला दिया था| ब्रह्मचारी चाणक्य ने सिकन्दर के भारत पर आधिपत्य को समाप्त कर दिया था|

अतएव मानवजाति की रक्षा के लिए मैकाले के महंगे यौनशिक्षा केन्द्रों का बहिष्कार कीजिए और वीर्य रक्षा के केंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में आर्यावर्त सरकार को सहायता कीजिए|

क्या ईसाईयों व मुसलमानों ने कभी सोचा?

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विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ की दासता से मुक्ति के लिए भी कोई ट्रस्ट सहायता करती हो तो बताइएगा!

एलिजाबेथ के मनोनीत लुटेरे और खूनी राज्यपाल

http://www.aryavrt.com/muj16w19y-balipashu2-uprajypal

मैं ही नहीं, नमो --सहित एलिजाबेथ के ५३ देशों के उपनिवेशवासी दास हैं. उपनिवेश के अस्तित्व में रहते मानवजाति का अंत एक भयानक और कठोर सच्चाई है.

 

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भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ से बचने का भी उपाय बताइए!

http://www.aryavrt.com/muj16w19y-balipashu2-uprajypal

 

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WARNING

जरूरी सूचना,

 🏻 🏻 🏻 🏻 🏻

एक बार जरूर पढ़ें, तथा

परिवार व मित्रों को जरूर शेयर करें-

 

लोगों के मोबाइल पर नीचे लिखे हुए नंबरों से फोन आता है-

+375602605281,

+37127913091

+37178565072

+56322553736

+37052529259

+255901130460

अथवा नीचे लिखे हुए किसी भी नंबर से

+375,

+371

+381

 

एक रिंग बजकर मिसकाल हो जाता है, तो

यदि आप उन नंबरों पर वापस काल करेंगें तो आपके

15 - 30 डालर खर्च हो सकते हैं। और

वो आपकी पूरी की पूरी Contact List मात्र ३ सेकंड में कापी कर सकते हैं।

और

यदि आपके बैंक खाता या क्रेडिट कार्ड की जानकारी आपके फोन में हुई तो उसकी कापी की जा सकती है।

 

+375 बेलारूस का ISD कोड

+371 लाटिवा का ISD कोड

+381 सर्विया का कोड

+563 वालपारायेसो का कोड

+370 विलीनियस का कोड

+255 तंजानिया का कोड

ये सभी नंबर ISIS के भी हो सकते हैं,-

इन नंबरों से आने वाले फोन न उठायें, और नहीं इन पर आप सामने से फोन करें।

बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है अपनें परिवार व मित्रों के बीच जरूर शेयर करें---

 

साथ में,यह भी जरूर पढ़ें--

आपके मोबाइल पर भूलकर भी

#90

अथवा

#09

नंबर डायल नहीं करना है।

 

जो कोई भी यह नंबर डायल करने के लिये आपको कहे, तो आप यह बात याद रखना कि भूलकर भी आप यह नंबर डायल ना करें।

#09

अथवा

#90.

 

जब भी आपको कहा जाय तो कृपा करके भूलकर भी उपरोक्त नंबर डायल ना करें।

यह जानकारी सबको जरूर पहुंचायें।

यह मसहूर आतंकवादियों के द्वारा निर्दोष लोगों को फसाने और अनुचित कार्य हेतु बंधक बनाने का षडयंत्रकारी रचना है।

मित्रों, एक फ्राड कम्पनी है जो एक विषेश प्रकार के उपकरण का उपयोग करती है, जिसके द्वारा आप ठगे जा सकते हैं, जैसे कि -

#90

अथवा

#09 नम्बर दबाने से वे लोग आपके सिम कार्ड का उपयोग कर सकते हैं और आपके खर्च पर किसी भी जगह फोन कर सकते हैं।

- BHARAT SANCHAR NIGAM LIMITED

(A Government of India Enterprise).

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एलिजाबेथ का उपनिवेश

 

संस्कृत की लिपि देवनागरी

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पहले देवनागरी मे लिखना तो प्रारम्भ कीजिए. वेद उतने ही पुराने हैं, जितने मनुष्य की उत्पत्ति.

यही वेद जन्म के साथ ही सभी नारी पुरुष को परमेश्वर प्रदान करता है. इनके रक्षा और विकास के लिए ही हमारे ऋषियों ने गौ पालन और गुरुकुल की व्यवस्था की थी.

 

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ईमाम, जो काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा करते हैं और मस्जिदों से मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं, के विरुद्ध तो २६ जनवरी, १९५० से आज तक राज्यपाल लोग अभियोग न चला पाए, लेकिन काफिरों के ईष्टदेवों के ईशनिंदक और  भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन आत्मरक्षा में विरोध करने वाले रासुका में प्रताड़ित हो रहे हैं| अन्य कारणों के साथ इसलिए उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति चाहते हैं.

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अंग्रेजी में मात्र २६ अक्षर ही हैं. फिरभी मैं अंग्रेजी से चिपका हुआ हूँ. क्योंकि यह रोटी से जुड़ी भाषा है. लेकिन ब्राह्मी नहीं जानता. संस्कृत तो नहीं बची लेकिन देवनागरी इसलिए बच गई क्यों कि यह रोटी से जुड़ी हुई भाषा है. सारे कर्मकाण्ड यानी पंडितों के आय के साधन इसी लिपि में हैं. यह मैं नहीं कहता, मेरे गुरुजी का कहना है. विश्वास कीजिए, यदि गणक अगले १०० वर्ष तक प्रयोग होता रहा तो विश्व की सारी लिपियाँ समाप्त हो जाएँगी. मात्र देवनागरी ही जीवित बचेगी.

यदि कोई देवनागरी नहीं जानता, तो वह धरती पर बोझ है. स्वयं अपना ही शत्रु है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

देवनागरी के लिए आग्रह क्यों?

 

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इसलिए देवनागरी और ब्रह्मज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए गुरुकुलों को पुनर्स्थापित कीजिए| विश्वास करिये सब कुछ ठीक हो जायेगा|

इनसे बचने के लिए वीर्यवान बनिए| इसके लिए आप को गुरुकुलों को पुनर्जीवित करना पड़ेगा| यौनशिक्षा को त्यागना पड़ेगा| टीवी और सिनेमा का बहिष्कार करना पड़ेगा| गोरक्षा करनी पड़ेगी| बैल से खेती करनी पड़ेगी| गंगा को पवित्र रखना पड़ेगा| कहाँ कर पाएंगे आप?

यदि आप लोगों में से कोई भी वैदिक सनातन धर्म को पुनर्जीवित करना चाहता हो तो मुझसे अवश्य मिले|

मात्र गुरुकुल ही आप को वीर्यवान बना सकते हैं| जिन्हें शक्ति, परमानंद और स्वतंत्रता चाहिए गुरुकुल को पुनर्जीवित करने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें|

झा जी से मेरा अनुरोध है कि वे जड़ को पुनर्जीवित करें| वैदिक सनातन संस्कृति की जड़ मानवमात्र को वीर्यवान बनाने वाली गुरुकुल शिक्षा है|

गुरुकुलों को पुनर्जीवित कीजिए भारत को पुनः सोने की चिड़िया बनाइये|

प्रमाण और भी हैं लेकिन उसे विवादास्पद माना जायेगा| जैसे परशुराम की कोई सेना नहीं थी| परशुराम ने २१ बार क्षत्रियों का संहार किया था| हनुमान ने अकेले परम प्रतापी रावण के लंका को जला दिया था| ब्रह्मचारी चाणक्य ने सिकन्दर के भारत पर आधिपत्य को समाप्त कर दिया था| अतएव वीर्य रक्षा के केंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में हमारी सहायता कीजिए|

गीता में कृष्णय कहते हैं- सर्वधर्मानपरित्य ज्यि मामेकं शरणंब्रज- अनन्या भाव से मेरी अतएव वीर्य रक्षा के केंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित कीजिए|

दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग दें| और हाँ! गुरुकुलों की शिक्षा आज भी निःशुल्क है!!

 

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सर्वविदित है कि विश्व का पहला और एकमात्र ज्ञान-विज्ञान का कोष देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा का ऋग्वेद है| यह निर्विवाद रूप से स्थापित है कि संसार के अब तक के पुस्तकालयों में ऋग्वेद से प्राचीन कोई साहित्य नहीं है. पाणिनी के अष्टाध्यायी में आज तक एक अक्षर भी बदला न जा सका|

ठीक इसके विपरीत विश्व की शेष सभी भाषाओँ में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ ही त्रुटियाँ हैं और वे आज भी विकास के लिये तरस रही हैं. इनका व्याकरण रोज बदलता है. संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सबसे उपयुक्त भाषा है|

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/sanskrit

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 नासा के द्वारा बनाए जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super Computers संस्कृतभाषा पर आधारित

 संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा

 

किसी मंदिर या गुरुकुल के पास से गुजरते हुए आपने संस्कृत के श्लोक या मंत्र तो अवश्य ही सुने होंगे. इन मन्त्रों और श्लोकों से बचपन में ही हमारा रिश्ता टूट चुका है पर फिर भी आज ये श्लोक कभी-कभी सुनाई दे ही जाते हैं. संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है लेकिन वर्तमान में विलुप्त होने की कगार पर है..

2001 में संस्कृत बोलने वाले लोगो की संख्या सिर्फ14135 थी।

 

दुनिया जहाँ संस्कृत की महिमा समझकर संस्कृत सीखना चाह रही है स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटीज के पाठ्यक्रम में संस्कृत को जोड़ा जा रहा है वही भारत इस दिशा में कोई खास कदम नही उठा रहा है।

 

आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं, जो किसी भी भारतीय का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे

 

.1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है।

2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा है।

3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी।

4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है।

5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है।

6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक अद्भुत खजाना है। जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द है।

7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन पर नासा रिसर्च कर रहा है।

8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में संस्कृत को Computer Software के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था।

9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो जाता है।

10. संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है।

11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो जाएगा. संस्कृत में बात करने से मानव शरीरका तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश(PositiveCharges) के साथ सक्रिय हो जाता है।

12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार है यह एकाग्रता को बढ़ाती है।

13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते है।

14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था, जो 1970 में शुरू हुआ था। आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है।

15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो की मांग है। जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई जाती है।

16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे तो उनके वाक्य उलट हो जाते थे. इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल जाता था. उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया लेकिन हर बार यही समस्या आई. आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे हो जाने पर भी अपना अर्थ नही बदलते हैं।

 

जैसे

 

अहम् विद्यालयं गच्छति।

विद्यालयं गच्छति अहम्।

गच्छति अहम् विद्यालयं ।

उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

 

17. आपको जानकर हैरानी होगी कि Computer द्वारा गणित के सवालो को हल करने वाली विधि यानि Algorithms संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में।

18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super Computers संस्कृतभाषा पर आधारित होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए London और Ireland के कई स्कूलो में संस्कृत को Compulsory Subject बना दिया है।

20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा देशो की कम से कम एक University में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत पढ़ाई जाती है। nt from my Samsung Galaxy smartphone.

 

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बलिपशु इससे अधिक क्या कर सकते हैं?

http://www.aryavrt.com/muj16w19y-balipashu2-uprajypal

 

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उपनिवेश का भी कुछ बनाइए...

http://www.aryavrt.com/muj16w19y-balipashu2-uprajypal

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http://hindi.revoltpress.com/news/know-about-the-sudan-tribe-who-protect-cows/

 

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युद्ध भूमि में भारत कभी नहीं हारा| लेकिन अपने ही जयचंदों से हारा है| समझौतों से हारा है| अपनी मूर्खता से हारा है| उन्हीं समझौतों में सत्ता के हस्तांतरण का समझौता भी है|

अब्रह्मी संस्कृतियाँ मानवता को वश में करने के लिए नपुंसक बना देने वाले गढ़े गए मजहब हैं. अब्रह्मी संस्कृतियाँ को डायनासोर की भांति मानवजाति को दास बनाने अन्यथा मिटाने के लिए गढ़ा गया है. हम उस भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को क्यों स्वीकार करें, जिसने हमें मार डालने का मुसलमानों और ईसाइयों को निरंकुश असीमित मौलिक मजहबी अधिकार प्रदान किया है? यह इन मजहबों के खिलाफ जागने और लड़ने का समय है. अब्रह्मी संस्कृतियों मानव जाति के लिए खतरा हैं. मुसलमानों और ईसाइयों के साथ कोई सह - अस्तित्व नहीं हो सकता है. जब तक मुसलमान व ईसाई मुहम्मद और यीशु में विश्वास करते हैं, वे दूसरों के लिए और यहां तक कि खुद एक दूसरे के लिए खतरा हैं.

३१.    गांधी के कांग्रेस ने निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा प्रणाली का अपमान किया है, जिसकी शिक्षा अहम् ब्रह्मास्मि है| जिस का तात्पर्य यह निर्देशित करता है कि मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई अथवा कोई भी, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्तियों को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही है अहम् ब्रह्मास्मि का अन्यतम तात्पर्य।

३२.    गांधी के कांग्रेस ने हमारे दस हजार से अधिक अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधी परिवारों को दाने दाने के लिए मुंहताज कर रखा है| किसी के पास साहस नहीं जो हमारी सहायता कर सके| उसे एलिजाबेथ बर्बाद कर देगी| एलिजाबेथ के पास वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए ईश्वरीय आदेश भी है (बाइबल, लूका १९:२७) और संवैधानिक अधिकार भी| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१). जिन्हें भ्रष्टाचार से बचना हो एलिजाबेथ को बंदी बनाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें|

३३.    वोट द्वारा (बाइबल, लूका १९:२७), (कुरान २:१९१) व संविधान के अनु२९(१) द्वारा दिया गया हत्या का असीमित मौलिक अधिकार नहीं बदला जा सकता| (बाइबल, लूका १९:२७), (कुरान २:१९१) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) द्वारा दिया गया आप की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार|

३४.    हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी हैं| हमारा कथन है कि भारतीय संविधान मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है| यदि आप अपनी, अपने देश व अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा करना चाहते हैं तो समस्या की जड़ अब्रह्मी संस्कृतियों को, निजहित में, मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए|

३५.    ओबामा का बारम्बार यह कहना कि अमेरिका की लड़ाई इस्लाम के विरुद्ध नहीं है, इस मामले को अधिक संदिग्ध बना देता है| इस्लाम के बचाव का कारण आर्यावर्त सरकार को यह दिखाई दे रहा है कि अमेरिका इस्लाम का दोहन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए कर रहा है|

३६.    किसी भी हरे भरे वृक्ष को नष्ट करने के लिए एक गिद्ध का निवास ही पर्याप्त है| इसी प्रकार किसी भी संस्कृति को मिटाने के लिए एक मुसलमान या ईसाई का निवास पर्याप्त है| अकेला कोलम्बस अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अकेला मैकाले संस्कृत भाषा और गुरुकुलों को निगल गया| अकेला मुहम्मद अपने आश्रय दाता यहूदियों के तीन प्रजातियों बनू कैनुका, बनू नजीर और बनू कुरेज़ा को निगल गया|

 

 

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ईसाइयत और इस्लाम समर्थक भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) को निरस्त करो.

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गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा वैदिक सनातन संस्कृति की चार आधार शिलाएं हैं. क्या नमो निःशुल्क गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर रहे हैं?

देश में ३६०० से अधिक गौ काटने के कत्ल खाने हैं, क्या किसी को बंद कराया? उल्टे अनुदान बढ़ा दिया और आयात कम कर दिया. क्या गायत्री जप और गुरुकुल शिक्षा पर कोई अनुदान है?

http://www.aryavrt.com/muj16w09by-gaurksha-asmbhv

 

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http://www.aryavrt.com/muj16w16-pension-rules64n69

 

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मैं आप का ध्यान साधारण सभा संकल्प ५३/१४४ दिनांक ९ दिसंबर, १९९८ के ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ.

सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

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कमलेश तिवारी पर रासुका

अखलाक बनाम डा नारंग.

“India that is Bharat” (इंडिया) आज भी ब्रिटिश का स्वतंत्र? उपनिवेश है. दोनों शब्द एक दूसरे के विरोधी हैं. उपनिवेशवासी एलिजाबेथ का दास है, क्योंकि उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र नहीं हो सकता! इंडिया में लागू, आज भी, सभी कानून ब्रिटेन द्वारा ही बनाये गए हैं. शासन आज भी ब्रिटिश उच्चायुक्त के निर्देश पर ही, राष्ट्रपति और राज्यपाल के माध्यम से चलता है. सत्ता के शीर्ष पर मनोनीत राज्यपाल और न्यायाधीश उपनिवेशवासियों द्वारा चुने प्रतिनिधि नहीं होते. फिर भी उपनिवेशवासियों द्वारा चुनी हुई किसी सरकार को मिनटों में गिरा देते हैं.

उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र हो ही नहीं सकता. क्योंकि उपनिवेश से मुक्ति का प्रयत्न Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

२६ फरवरी, २००५ को आरोप मुक्त होने और अपील की समय सीमा बीत जाने के बाद आर्यावर्त सरकार ने अपने साप्ताहिक पत्रिका मुजहनाद्वारा संयुक्त राष्ट्र सहित, विश्व के सभी राष्ट्राध्यक्षों को इस्लाम से आगाह किया और किसी प्रकार के संदेह के निवारण के लिए मिलने के लिए समय देने का आग्रह भी किया. १० वर्ष से अधिक निकल चुके हैं इस्लाम का जिहाद दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है और यह तब तक बढ़ता ही रहेगा, जब तक अर्मागेद्दन द्वारा धरती पर मात्र ईशा की पूजा न हो ले. लेकिन सबने आसन्न संकट की अनदेखी की!

यही सर्वधर्म समभाव है. जिसे विश्व के ५३ उपनिवेश देशों की मल्लिका की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ लाना चाहती है.

 

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कमलेश तिवारी पर रासुका

अखलाक बनाम डा नारंग.

“India that is Bharat” (इंडिया) आज भी ब्रिटिश का स्वतंत्र? उपनिवेश है. दोनों शब्द एक दूसरे के विरोधी हैं. उपनिवेशवासी एलिजाबेथ का दास है, क्योंकि उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र नहीं हो सकता! इंडिया में लागू, आज भी, सभी कानून ब्रिटेन द्वारा ही बनाये गए हैं. शासन आज भी ब्रिटिश उच्चायुक्त के निर्देश पर ही, राष्ट्रपति और राज्यपाल के माध्यम से चलता है. सत्ता के शीर्ष पर मनोनीत राज्यपाल और न्यायाधीश उपनिवेशवासियों द्वारा चुने प्रतिनिधि नहीं होते. फिर भी उपनिवेशवासियों द्वारा चुनी हुई किसी सरकार को मिनटों में गिरा देते हैं.

उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र हो ही नहीं सकता. क्योंकि उपनिवेश से मुक्ति का प्रयत्न Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

२६ फरवरी, २००५ को आरोप मुक्त होने और अपील की समय सीमा बीत जाने के बाद आर्यावर्त सरकार ने अपने साप्ताहिक पत्रिका मुजहनाद्वारा संयुक्त राष्ट्र सहित, विश्व के सभी राष्ट्राध्यक्षों को इस्लाम से आगाह किया और किसी प्रकार के संदेह के निवारण के लिए मिलने के लिए समय देने का आग्रह भी किया. १० वर्ष से अधिक निकल चुके हैं इस्लाम का जिहाद दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है और यह तब तक बढ़ता ही रहेगा, जब तक अर्मागेद्दन द्वारा धरती पर मात्र ईशा की पूजा न हो ले. लेकिन सबने आसन्न संकट की अनदेखी की!

यही सर्वधर्म समभाव है. जिसे विश्व के ५३ उपनिवेश देशों की मल्लिका की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ लाना चाहती है.

“India that is Bharat” (इंडिया) आज भी ब्रिटिश का स्वतंत्र? उपनिवेश है. दोनों शब्द एक दूसरे के विरोधी हैं. उपनिवेशवासी एलिजाबेथ का दास है, क्योंकि उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र नहीं हो सकता! इंडिया में लागू, आज भी, सभी कानून ब्रिटेन द्वारा ही बनाये गए हैं. शासन आज भी ब्रिटिश उच्चायुक्त के निर्देश पर ही, राष्ट्रपति और राज्यपाल के माध्यम से चलता है. सत्ता के शीर्ष पर मनोनीत राज्यपाल और न्यायाधीश उपनिवेशवासियों द्वारा चुने प्रतिनिधि नहीं होते. फिर भी उपनिवेशवासियों द्वारा चुनी हुई किसी सरकार को मिनटों में गिरा देते हैं.

उपनिवेशवासी कभी स्वतंत्र हो ही नहीं सकता. क्योंकि उपनिवेश से मुक्ति का प्रयत्न Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

२६ फरवरी, २००५ को आरोप मुक्त होने और अपील की समय सीमा बीत जाने के बाद आर्यावर्त सरकार ने अपने साप्ताहिक पत्रिका मुजहनाद्वारा संयुक्त राष्ट्र सहित, विश्व के सभी राष्ट्राध्यक्षों को इस्लाम से आगाह किया और किसी प्रकार के संदेह के निवारण के लिए मिलने के लिए समय देने का आग्रह भी किया. १० वर्ष से अधिक निकल चुके हैं इस्लाम का जिहाद दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है और यह तब तक बढ़ता ही रहेगा, जब तक अर्मागेद्दन द्वारा धरती पर मात्र ईशा की पूजा न हो ले. लेकिन सबने आसन्न संकट की अनदेखी की!

यही सर्वधर्म समभाव है. जिसे विश्व के ५३ उपनिवेश देशों की मल्लिका की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ लाना चाहती है.

 

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मस्जिद और इस्लाम का विरोध करने के कारण मालेगांव बम कांड में मेरे ९ सहयोगी बंद हैं. धनंजय देसाई भी बंद हैं. अब कमलेश तिवारी भी रासुका में बंद हो गए.

गौहत्या का विरोध करने के कारण दादरी के १० लोगों पर रासुका लगी है.

मुहम्मद का विरोध करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका भी लगा है और मौत के फतवे भी जारी हुए हैं.

मस्जिदों से मुसलमान अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा १४०० वर्षों से अधिक से ईशनिंदा कर रहा है और मुसलमानों को महामहिम सहित काफिरों को कत्ल करने की दे रहा है. महामहिम नाइक अपनी पुलिस से मुसलमानों को संरक्षण देकर काफिरों को चेतावनी दिलवाते हैं कि काफ़िर कत्ल कर दिए जायेंगे. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

महामहिम नाइक पर अभियोग कब चलेगा?

इंडिया गो - नर भक्षी एलिजाबेथ का स्वतंत्र उपनिवेश है. जब उपनिवेश है तो स्वतंत्रता कहाँ?

उपनिवेश का विरोध करेंगे तो फांसी होगी. अज़ान और बपतिस्मा का विरोध करेंगे तो कत्ल कर दिए जायेंगे.

मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. अज़ान लगाने वालों पर रासुका कब लगेगा?

मस्जिदों में विष्फोट अपराध कैसे है?

मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. कानूनविद राज्यपाल केसरी के शासन में कमलेश तिवारी को फांसी देने की मांग को लेकर हुए उपद्रव और आगजनी में २.५ लाख से अधिक सहिष्णु और सर्व धर्म समभाव वादी मुसलमान मालदा में शामिल हुए. थाना फूंका गया. पुलिस की पिटाई हुई. ईमामों ने ४१ करोड़ रु० से अधिक राशि के फतवे जारी किये. किसी मुसलमान पर रासुका या मकोका क्यों नहीं लगा?

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गौ मांस खाना सबका मानवाधिकार है.

 

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महामहिम श्री राम नाइक ने गौ हत्या के विरोधियों को रासुका में बंद कर रखा है. गौ हत्यारे अखलाक को ४१ लाख रु० और सरकारी नौकरी दिया. 

मेरा महामहिम जी से अनुरोध है कि हमें एलिजाबेथ के भाड़े के आतताइयों से मुक्ति दिलाएं.

ईसाई व मुसलमान को धरती के हर नारी का बलात्कार करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), कुरान (कुरान २३:६ व ७०:३०) और बाइबल, याश्याह १३:१६ से प्राप्त है.

सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है| महामहिम श्री राम नाइक ने गौ हत्या के विरोधियों को रासुका में बंद कर रखा है. गौ हत्यारे अखलाक को ४१ लाख रु० और सरकारी नौकरी दिया. 

मेरा महामहिम जी से अनुरोध है कि हमें एलिजाबेथ के भाड़े के आतताइयों से मुक्ति दिलाएं.

ईसाई व मुसलमान को धरती के हर नारी का बलात्कार करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), कुरान (कुरान २३:६ व ७०:३०) और बाइबल, याश्याह १३:१६ से प्राप्त है.

महामहिम श्री नाइक ईशनिंदा और कत्ल करने के उपदेश स्थल मस्जिदों के लाउडस्पीकर नहीं उतरवाते. इसके विपरीत मंदिरों, जहां से घोषणा की जाती है, “धर्म की जय हो| अधर्म का नाश हो|| प्राणियों में सद्भावना हो... विश्व का कल्याण हो...|” के लाउडस्पीकर महामहिम श्री नाइक उतरवा देते है.

अभी तक तो उपनिवेशवासी मस्जिदों से अज़ान और खुत्बे ही सुनने के लिए विवश थे. अब मुज़फ्फरनगर लव जिहाद कांड के बाद लव जिहादियों को अपनी कन्याएं सौंपने के लिए विवश हुए. अब गौ मांस खाने वालों की आरती भी उतारने के लिए विवश हैं. वह भी राज्यपाल नाइक के सहयोग से. यह है एलिजाबेथ के उपनिवेश का कमाल.

लूट और बलात्कार संहिता कुरान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४)

महामहिम श्री राम नाइक ने गौ हत्या के विरोधियों को रासुका में बंद कर रखा है. गौ हत्यारे अखलाख के परिवार को ४१ लाख रु० और सरकारी नौकरी दिया. डॉ नारंग की २०- २५ सहिष्णु मुसलमानों ने हत्या कर दी. नारंग के परिवार को क्या मिला?

माली आवत देख के कलियाँ कहें पुकार.

फूले फूले तोड़ लो काल हमारी बार.

 

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मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. कानूनविद राज्यपाल केसरी के मालदा में उनको फांसी देने की मांग को लेकर हुए उपद्रव और आगजनी में २.५ लाख से अधिक सहिष्णु और सर्व धर्म समभाव वादी मुसलमान मालदा में शामिल हुए. थाना फूंका गया. पुलिस की पिटाई हुई. ईमामों ने कमलेश तिवारी का सर कलम कर लाने वाले को अब तक ४१ करोड़ रु० से अधिक राशि देने के के फतवे जारी किये. किसी मुसलमान पर रासुका या मकोका क्यों नहीं लगा?

कुरान जलाने वाले को कत्ल करने वाले मुसलमान सरकार के संरक्षण में अज़ान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? १८६० से आज तक ईमामों के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई? जब कि इस्लाम व मस्जिद का विरोध करने के कारण हम प्रताड़ित हो रहे हैं|

आम आदमी को भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) दास बनाता अथवा कत्ल कराता व ३९(ग) सम्पत्ति व पूँजी लूटता है|

http://www.aryavrt.com/bhartiya-snvidhan

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http://www.aryavrt.com/muj16w16-pension-rules64n69

 

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मैं जानना चाहता हूँ कि महामहिम गण सर्व श्री नजीब जंग, श्री राम नाइक और केके पाउल मुझे फांसी क्यों नहीं दिलाते?

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान पर किसका जोर है? तीनों ही किसी उपनिवेशवासी को जीने का [भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)] और सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने [भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] का अधिकार नहीं देते.

अभी तक तो हिंदू मस्जिदों से अज़ान और खुत्बे ही सुनने के लिए विवश थे. फिर मुज़फ्फरनगर लव जिहाद कांड के बाद लव जिहादियों को अपनी कन्याएं सौंपने के लिए विवश हुए. अब गौ मांस खाने वालों की आरती भी उतारने के लिए विवश हैं. वह भी राज्यपाल नाइक के सहयोग से. यह है एलिजाबेथ के उपनिवेश का कमाल.

लूट और बलात्कार संहिता कुरान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४)

नियम से प्रतिदिन ५ बार मस्जिदों से ईमाम अज़ान द्वारा प्रसारित करता है कि हम काफ़िर हैं| अपने ईश्वर की उपासना नहीं कर सकते| ईमाम मस्जिदों से मुसलमानों को शिक्षा देता है कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुश्मन हैं और काफिरों को कत्ल करने से मुसलमानों को जन्नत मिलेगी| इनको पुलिस संरक्षण दिया जाता है. मस्जिदों के लाउडस्पीकर नहीं उतारे जाते. 

इसके विपरीत मंदिरों से घोषणा की जाती है, “धर्म की जय हो| अधर्म का नाश हो|| प्राणियों में सद्भावना हो... विश्व का कल्याण हो...|” परन्तु मंदिरों के लाउडस्पीकर पुलिस उतरवा देती है.

मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. कानूनविद राज्यपाल केसरी के मालदा में उनको फांसी देने की मांग को लेकर हुए उपद्रव और आगजनी में २.५ लाख से अधिक सहिष्णु और सर्व धर्म समभाव वादी मुसलमान शामिल हुए. थाना फूंका गया. पुलिस की पिटाई हुई. ईमामों ने कमलेश तिवारी का सर कलम कर लाने वाले को अब तक ४१ करोड़ रु० से अधिक राशि देने के के फतवे जारी किये. किसी मुसलमान पर रासुका या मकोका क्यों नहीं लगा?

 

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भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों के गले पर रखी हुई तलवार है|   नमो जी को यह बात समझ नहीं आती कि मुसलमान व ईमाम उनके इष्ट देवताओं का अपमान करते हैं| सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार तो स्वयं मुख्यमंत्री अखिलेश के पास भी नहीं है|

आम आदमी को भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) दास बनाता अथवा कत्ल कराता व ३९(ग) सम्पत्ति व पूँजी लूटता है|

http://www.aryavrt.com/bhartiya-snvidhan

 

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गांधी के कांग्रेस ने इंडिया को ब्रिटिश उपनिवेश बनाया है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्ध को प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}.

१.     निर्णय आप स्वयं करें| आप १९४७ से बंद अपनी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ेंगे या एलिज़ाबेथ के उपनिवेश में अपने सम्पत्ति और जीवन के अधिकार से वंचित रहेंगे?

२.     भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ में संशोधन का बिल कब पेश होगा?

३.     संविधान के अनु ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने जमीनें, जमींदारी, सोना, बैंक, पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे| उपनिवेशवासी को दरिद्र. बना दिया.

४.     @narendramodi

५.     न जीऊंगा न जीने दूंगा. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१). एलिजाबेथ का दास हूँ और दास ही रहूँगा.

६.     मस्जिदों से ईमाम और मौलवी मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि काफिरों को कत्ल कर दो|

७.     अपने को छोड़िये, स्वयं ईसाई व मुसलमान एक दूसरे को जीवित नहीं छोड़ेंगे. इसीलिए साध्वी प्रज्ञा इस्लाम और ईसाइयत को धरती से समाप्त करने में आप का सहयोग चाहती हैं. साध्वी प्रज्ञा यह जानना चाहती हैं कि अज़ान का विरोध और मस्जिद में विष्फोट अपराध कैसे है. साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है|

८.     साध्वी प्रज्ञा पूछती हैं कि

९.     अन्य को छोड़िये, स्वयं ईसाई व मुसलमान एक दूसरे को जीवित नहीं छोड़ेंगे. इसीलिए साध्वी प्रज्ञा इस्लाम और ईसाइयत को धरती से समाप्त करने में आप का सहयोग चाहती हैं. साध्वी प्रज्ञा यह जानना चाहती हैं कि अज़ान का विरोध और मस्जिद में विष्फोट अपराध कैसे है. साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है|

१०.    बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान पर किसका जोर है?

११.    आप लोगों को एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने में १९४७ से लेकर आज तक लज्जा नहीं आई और न कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं, क्यों कि ऐसा करना Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. आप लोग आज तक मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध न कर सके.

१२.    वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों ने १९४७ से ही इस्लाम और ईसाइयत का विरोध नहीं किया| अज़ान और नमाज़ का विरोध नहीं किया| मस्जिद का विरोध नहीं किया| अपने संतानों को गुरुकुल में शिक्षा दिलाने के बारे में सोच भी नहीं सकते| मनुष्य के उर्जाचक्रों में अंकित एक मात्र देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा के उपयोग के बारे में सोच भी नहीं सकते| आज बैल से खेती करने वाला कोई नहीं|

१३.    १९५० से आज तक किसी ने मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान से प्रायोजित अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध तो किया नहीं, अब तो हमें सहयोग दें! इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्ध को प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

 

 

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ईसाई व मुसलमान को धर्मान्तरण करने वाले को कत्ल करने की आज्ञा है. २०१६ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे. (बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:६-११) न ही १४३७ वर्ष पूर्व मुसलमान थे| (कुरान ४:८९). अतएव आर्यावर्त सरकार इनका स्वधर्म त्याग अथवा मृत्युदंड का प्रावधान चाहती है. लेकिन सबसे पहले रेबेलो को.

माउंटबेटन की भांति हमारे शासक अपनी पत्नियों के वैश्यालय नहीं चलाते.

इस्लाम और ईसाइयत आज भी इंडिया पर शासन कर रहे हैं. वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों का इंडिया पर कोई अधिकार नहीं है और न हमारे न्याय व्यवस्था को मान्यता ही है. वैदिक सनातन धर्म आधारित राजतंत्र में तो महाराजा अश्वपति ने कहा था,

न मे स्तेनो जनपदे न कदर्यो न मद्यपः|

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

उपनिवेशवासी दास इंडियन यह कहने का साहस नहीं कर सकते कि उनके पतन के कारण पैगम्बर मूसा, ईसा और मोहम्मद और उनके ही अनुयायी हैं.

उपरोक्त कथन के अनुसार हमारे शासक माउंटबेटन की भांति अपने नारियों के वेश्यालय नहीं चलाते. नमो तो चला ही नहीं सकते.

वैदिक राजतंत्र के राम चरित मानस की पंक्तियाँ उद्धृत कर रहा हूँ,

अनुज बधू भगिनी सुत नारी| सुनु सठ कन्या सम ए चारी|

इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई| ताहि बधें कछु पाप न होई||”

राम चरित मानस, किष्किन्धाकाण्ड; ;

अर्थ: [श्री रामजी ने कहा] हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्रवधू और कन्या ए चारों समान हैं| इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता|

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

 

 

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भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं. उपनिवेशवासियों को कत्ल करने से मुसलमान को जन्नत मिलेगी और उपनिवेशवासियों की नारियों का बलात्कार करने से हूरें. मुसलमान अपने ही भाइयों का अल्लाह हो अकबर कह कर गला काट रहा है. अपने ही उम्मा की नारियां नीलाम कर रहा है. उसे हम देश में क्यों रहने दें?

 

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http://www.aryavrt.com/muj16w14-rashtrpti-shasan

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इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

एलिजाबेथ, जिसके उपनिवेशवासी बलिपशु हैं, को अर्मागेद्दन द्वारा सभी धर्मों को नष्ट कर केवल ईसा की पूजा करवानी है

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

http://www.aryavrt.com/muj16w13ey-nmo-16327

 

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http://blogs.navbharattimes.indiatimes.com/vishvagaurav/modi-ji-nation-won-but-you-lost/

नमो २६/११ हमले पर.

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दस्यु या दास अथवा शुद्र को आप लोग जैसे चाहें परिभाषित करें, लेकिन वाल्मीकि, विश्वामित्र, व्यास में से कोई जन्मना ब्राह्मण नहीं था.

 

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http://www.aryavrt.com/muj16w12a-upnivesh-uno

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सन १९४७ से आज तक किसी प्रधानमंत्री ने सत्ता के हस्तान्तरण के रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से इंकार नहीं किया है.

९.     माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई|

१०.    सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने उपनिवेशवासियों से वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा को नष्ट करा दिया है|

११.    इन्हें पुनर्जीवित कीजिए. विश्व आप की मुट्ठी में होगा.

१२.    नमो ने सत्ता के हस्तान्तरण के रजिस्टर पर हस्ताक्षर किये हैं और संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है. इसलिए नमो एलिजाबेथ के प्रधान दास हैं. एलिजाबेथ ने वैदिक सनातन संस्कृति की चारो आधारशिलाओं गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा को नष्ट कर दिया है. एलिजाबेथ को अमेरिकी लाल भारतीयों की भांति काले भारतीयों को नष्ट करना है.

१३.    पढ़ तो लिया. लेकिन अल्पज्ञ होने से समझने में थोड़ा समय लगेगा. क्षमा करेंगे!

१४.    अब कुछ समझ आ रहा है कि अतिक्रमण ज्योतिष में भी किया गया है.

१५.    इस समझौते के अधीन ईसाइयत और इस्लाम को नारी के बलात्कार का, मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) का, खुत्बों का, धर्मान्तरण का और पूजा स्थलों को नष्ट करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है.

१६.    माननीय प्रधानमंत्री नमो को शौचालय चाहिए| निःशुल्क चरित्रवान ब्रह्मचारी बनाने वाले गुरुकुल नहीं. आक्रांता अब्रह्मी संस्कृतियों ने वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा को नष्ट कर दिया है| भारत को इंडिया और वसुंधरा के प्रत्येक मनुष्य को अपना दास बना रखा है| वैदिक सनातन संस्कृति का विनाश एलिजाबेथ के उपनिवेश के स्थायित्व के लिए आवश्यक है| माननीय प्रधानमंत्री नमो एलिजाबेथ के दास हैं| एलिजाबेथ के दास माननीय प्रधानमंत्री नमो चरित्रवान और ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों को कैसे पुनर्जीवित कर सकते हैं?

१७.    भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाई व मुसलमान सहित किसी उपनिवेशवासी को जीने का अधिकार नहीं देता और न इंडिया पर किसी उपनिवेशवासी का अधिकार स्वीकार करता है. सन १९५० से आज तक तमाम न्यायविद पैदा हुए और मर गए, लेकिन किसी ने भी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ आदि का विरोध नहीं किया| बाकी लोग क्या करेंगे, जिन्हें कानून का पता ही नहीं?

१८.    इस समझौते के अधीन ईसाइयत और इस्लाम को नारी के बलात्कार का, मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) का, खुत्बों का, धर्मान्तरण का और पूजा स्थलों को नष्ट करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है.

१९.    यदि अँगरेज़ इतने ही विश्वसनीय होते तो अब तक सत्ता के हस्तान्तरण के अभिलेख १९९७ में ही सार्वजनिक हो चुके होते.

२०.    जब तक इंडिया उपनिवेश है, सभी सत्ता के हस्तान्तरण के गोपनीय समझौते से, जिसे सत्ता के लालची तमाम बैरिस्टरों ने माउंटबेटन से मिल कर किया, बंधे हैं.

२१.    जब तक इंडिया उपनिवेश है, सभी सत्ता के हस्तान्तरण के गोपनीय समझौते से, जिसे सत्ता के लालची तमाम बैरिस्टरों ने माउंटबेटन से मिल कर किया, बंधे हैं. हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस के अभियुक्त उपनिवेश का विरोध कर रहे हैं. क्या कोई जज भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ का विरोध कर सकता है?

२२.    नियमानुसार सत्ता के हस्तान्तरण के अभिलेख १५ अगस्त, १९९७ के बाद ही सार्वजनिक हो जाने थे, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री गुजराल द्वारा तिथि २०१९ तक बढा दी गई. मैं लिखता ही रह गया, लेकिन कुछ न कर पाया.

२३.    सत्ता के हस्तान्तरण के रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते ही माननीय प्रधानमंत्री नमो एलिजाबेथ के दास बन गए| दूसरे दास नवाज़ को नवाज़ा और अब प्लेट पर सजा कर सियाचिन भेंट करेंगे|

 

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http://www.aryavrt.com/muj16w13a-reply-kl16319

 

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सत्ता के हस्तांतरण के इस कुटिल समझौते से विवश आज एलिजाबेथ के लिए लोकसेवक मानवजाति को लूट रहे हैं. मूर्ख यहूदी, ईसाई (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व मुसलमान (कुरान २:३५) लुट रहे हैं. सभी आपस में एक दूसरे के जान के शत्रु बने हुए हैं. लेकिन किसी के अंदर एलिजाबेथ के उपनिवेश, सत्ता के हस्तांतरण, इस्लाम और ईसाइयत के विरोध का साहस नहीं है. गलती से अगर किसी ने विरोध कर दिया तो उसे मिटा दिया गया. मुझे व हमारे ९ सहयोगियों को मिटाया जा रहा है.

अतएव ईसाइयों और मुसलमानों को चाहिए कि वे पहले एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति लें| हम मुसलमानों को एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए सहयोग देना चाहते हैं| ईसाई जीते या मुसलमान यह अल्लाह और जेहोवा की ताकत पर निर्भर है. हम वैदिक सनातन संस्कृति के दास अनुयायी मुसलमानों से कंधा से कंधा मिला कर लड़ेंगे| हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों से सहयोग लेकर मुसलमान ईसाइयों से लड़ कर यह फैसला कर लें कि इंडिया पर अधिकार मुसलमानों का रहेगा या ईसाइयों का| हर हाल में, अंततः १९४७ से ही, हम विकल्पहीन वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी विजेता को, विवश होकर, अपनी बहन बेटियों को जयमाला देकर प्रतीक्षा कर रहे हैं और साथ में अपना सर्वस्व दहेज में देने के लिए विवश हैं| क्या मुसलमान हमारी सहायता लेंगे?

 

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खतना क्यों?

मूसा ने वीर्यक्ष्ररण को बाइबल में महिमामंडित किया, लूट और यौन सुख के लोभ में मनुष्य स्वयं अपराध में लिप्त है. बाइबल में वीर्यहीन बनना मजहब का आवश्यक कृत्य है. प्रमाण देखिये,

और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.” (बाइबल, उत्पत्ति १७:११).

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

बाइबल, रोमियों ५:८ के अनुसार, “अपने पुत्र की मृत्यु के द्वारा परमेश्वर ने अपने प्रेम को हमारे लिए प्रदर्शित किया।यीशु मसीह को हमारे लिए क्यों मरना पड़ा? क्योंकि वचन बताता है कि सभी मनुष्य पापी हैं। पाप करनेका अर्थ है निशान को खोना। बाइबिल बताती है, सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा (सम्पूर्ण पवित्रता) से रहित हैं रोमियों ३:२३। अन्य शब्दों में, हमारे पाप हमें परमेश्वर से दूर करते हैं जो कि सम्पूर्ण पवित्र है धर्मी और न्यायी, तथा इसीलिए परमेश्वर को पापी मनुष्य का न्याय करना उचित है।

 

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क्या आप उपनिवेश और भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं?

क्या आप अपने बेटे को निःशुल्क गुरुकुल में शिक्षा दिला सकते हैं?

क्या किसान बैल से खेती कर सकता है?

क्या आप गंगा में गंदे नालों को जोड़ने से रोक सकते हैं?

क्या आप वेदों की माता गायत्री का जप करते हैं?

मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. इसलिए Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php का अपराधी हूँ. विवरण के लिए नीचे धारा का उल्लेख है:- 

121. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना--जो कोई 1[भारत सरकार] के विरुद्ध युद्ध करेगा, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह मॄत्यु या 2[आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा 3[और जुर्माने से भी दंडनीय होगा]|

मैं स्वीकार करता हूँ कि हम ग्राहम स्टेन्स और उसके दो पुत्रों की हत्या के अभियुक्त हैं. हमारे दारा उर्फ रविन्द्रपाल सिंह १९९९ से जेल में बंद हैं. हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे धनंजय देसाई भी जेल में बंद हैं. साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर|

मैं एलिजाबेथ को चुनौती देता हूँ कि Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मुझे मृत्युदंड दे.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

 

 

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क्या आप उपनिवेश और भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं?

क्या आप अपने बेटे को निःशुल्क गुरुकुल में शिक्षा दिला सकते हैं?

क्या किसान बैल से खेती कर सकता है?

क्या आप गंगा में गंदे नालों को जोड़ने से रोक सकते हैं?

क्या आप वेदों की माता गायत्री का जप करते हैं?

मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. इसलिए Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php का अपराधी हूँ. विवरण के लिए नीचे धारा का उल्लेख है:- 

121. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना--जो कोई 1[भारत सरकार] के विरुद्ध युद्ध करेगा, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह मॄत्यु या 2[आजीवन कारावास] से दंडित किया जाएगा 3[और जुर्माने से भी दंडनीय होगा]|

मैं स्वीकार करता हूँ कि हम ग्राहम स्टेन्स और उसके दो पुत्रों की हत्या के अभियुक्त हैं. हमारे दारा उर्फ रविन्द्रपाल सिंह १९९९ से जेल में बंद हैं. हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| हमारे धनंजय देसाई भी जेल में बंद हैं. साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर|

मैं एलिजाबेथ को चुनौती देता हूँ कि Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मुझे मृत्युदंड दे.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

 

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http://smallbusiness.chron.com/syncing-android-tablet-pc-33180.html

Saturday, March 19, 2016

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http://www.aryavrt.com/muj16w11by-sadhvi-pragya

 

http://www.aryavrt.com/pension-2016-cmuk

 

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इन्हें पुनर्जीवित कीजिए. अन्य विकल्प नहीं है.

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भूल सुधार:

पतंजलि की अष्टाध्यायी पर आधारित थी । नहीं.

पाणिनी की अष्टाध्यायी पर आधारित थी ।

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http://www.aryavrt.com/muj16w10by-hutatma-godse

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http://www.aryavrt.com/muj16w10y-rakshit-azaan

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अरुण जी को नमस्ते!

जजों ने JNU मामले में कौन सा तीर मार दिया कि आप लोग उच्च न्यायालय के गुण गा रहे हैं?

अगर जज कन्हैया को जमानत न देते, तो नौकरी न कर पाते.

ठीक इसी तरह यदि कोई जज साध्वी प्रज्ञा को जमानत दे देगा, तो वह नौकरी न कर पायेगा.

जजों को उपनिवेश में चाकरी करते लज्जा नहीं आती. इनका मनोनयन न्याय करने के लिए नहीं अपितु हर उपनिवेशवासी के गले पर भारतीय संविधान नामक रखी तलवार को और जस के तस १९४७ से पूर्व लागू कानूनों को बनाये रखने के लिए किया जाता है. जजों ने स्वतंत्र? उपनिवेश का आज तक विरोध नहीं किया. निम्नलिखित अभिलेख के अधीन उपनिवेशवासी आज भी ब्रिटिश उपनिवेश की प्रजा हैं.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है और धरती के सभी मस्जिदों को ध्वस्त करवाना चाहता हूँ.

भारतीय दंड संहिता की धारा ९९ के अधीन मैं सरकारों से अपने प्राणरक्षा की सदैव मांग करता रहा हूँ. जिसके कारण मेरे विरुद्ध अबतक ५० अभियोग चले, ५ आज भी लम्बित हैं.

बपतिस्मा/अज़ान बाइबल/कुरान, उपनिवेशवाद और संविधान से स्वयं जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल भी पीड़ित हैं. फिरभी मैं १९९१ से आजतक न तो उपनिवेश से मुक्ति ले सका और न बपतिस्मा/अज़ान ही बंद करा पाया.

 

मैं एक उप राज्यपाल और दो राज्यपालों का अपराधी हूँ. मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है और एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध रत हूँ. इसलिए Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मुझे फांसी मिलनी चाहिए. राज्यपालों ने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है. (भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५९).

मैं जानना चाहता हूँ कि महामहिम गण सर्व श्री नजीब जंग, श्री राम नाइक और केके पाउल मुझे फांसी क्यों नहीं दिलाते?

इस्लाम, ईसाइयत अज़ान, मस्जिद और मदरसे तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), राष्ट्रपति और राज्यपाल से प्रायोजित हैं|

अज़ान और खुत्बे पुलिस संरक्षण में होते हैं. उपनिवेश के विरुद्ध कोई बोल न पाए इसीलिए उपरोक्त कानूनों के बल पर तत्कालीन शासकों के नेतृत्व में एलिजाबेथ ने जजों सहित आत्मघाती लुटेरे लोकसेवकों की एक सेना बना रखी है, जो दिए की लौ पर मरने वाले पतिंगों की भांति पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपना जीवन, सम्पत्ति, नारियां, वैदिक सनातन संस्कृति और धरती गवाने में लिप्त हैं. लोकसेवकों को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है.

एलिजाबेथ के पास उपरोक्त दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ नामक दो विशेषाधिकार हैं| इन कानूनों के बल पर एलिजाबेथ इंडिया के सभी लोकसेवकों का भयादोहन कर इंडिया के उपनिवेशवासियों को लुटवा कर हिस्सा भी खा रही है, उपनिवेशवासियों को कत्ल करवा रही है और नारियों का बलात्कार करा रही है| जजों, पुलिस और उपनिवेशवासियों के अधिकार शून्य हैं| उस पर तुर्रा यह कि यदि उपनिवेशवासी शिकायत करता है, तो उसे बताया जाता है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है| लेकिन जब बुखारियों को सुरक्षा देनी हो तो एनबीडब्लू देने वाले जज को ही त्यागपत्र देना पड़ता है|

आप को उपनिवेश का प्रधान दास बनने में लज्जा नहीं आती. अज़ान/ बपतिस्मा द्वारा आप के ईष्टदेवों की निंदा होती है, परन्तु आप लज्जित नहीं होते. मस्जिद से प्रसारित होने वाले खुत्बे और चर्चों के घात किये जाने के ईसा के आदेश आप को आतंकित नहीं करते.

जज व उपनिवेशवासी दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन एलिजाबेथ के मनोनीत आतंकवादी और भ्रष्ट राज्यपालों द्वारा शासित हैं|

आर्यावर्त सरकार अनुच्छेद २९(१), लुप्त अनुच्छेद ३१ (संपत्ति का मौलिक अधिकार} का पुनर्जीवन और भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) का उन्मूलन चाहती है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ का भी उन्मूलन चाहती है| जिस समाजवाद की आड़ में उपनिवेशवासी को लूटा गया था, वह चीन में भी दफन हो चुका है|

 

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राज्य के स्थापना का उद्देश्य प्रजा के जान-माल की रक्षा करना है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है|

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क्या मै जान सकता हूँ कि क्यों मधु कोड़ा, नरेंद्र नमो और येदियुरप्पा को एलिजाबेथ के सरकार ने अपराधी माना है लेकिन मुलायम और मायावती को अपराधी नहीं मान रही है? क्या आप को नहीं लगता कि स्वयं भारतीय संविधान ही निकृष्टतम भ्रष्टाचारी है? दंप्रसं की धारा १९७ एलिजाबेथ को एकाधिकार देती है कि वह जिसे चाहे उसे जेल में ठूस दे?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) खूनियों लुटेरों और बलात्कारियों का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करता है और सबकी सम्पत्ति और पूँजी लूटने वाला भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) निकृष्टतम भ्रष्टाचारी है? दंप्रसं की धारा १९७ एलिजाबेथ को एकाधिकार देती है कि वह जिसे चाहे उसे जेल में ठूस दे?

 

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ब्राह्मण कौन?

यस्क मुनि के अनुसार-

जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात्‌ भवेत द्विजः।

वेद पाठात्‌ भवेत्‌ विप्रःब्रह्म जानातीति ब्राह्मणः।।

अर्थात - व्यक्ति जन्मतः शूद्र है। संस्कार से वह द्विज बन सकता है। वेदों के पठन-पाठन से विप्र हो सकता है। किंतु जो ब्रह्म को जान ले, वही ब्राह्मण है।

ब्राह्मण न पीड़ित हो सकता है, न पराजित और न ही दास बनाया जा सकता है.

गर्ग और गौतम ऋषि की संतानें आजभी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं.

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योग सूत्र व भाष्य के रचनाकार पतंजलि के अनुसार

विद्या तपश्च योनिश्च एतद् ब्राह्मणकारकम्।

विद्यातपोभ्यां यो हीनो जातिब्राह्मण एव स:॥

अर्थात- ''विद्या, तप और ब्राह्मण-ब्राह्मणी से जन्म ये तीन बातें जिसमें पाई जायँ वही पक्का ब्राह्मण है, पर जो विद्या तथा तप से शून्य है वह जातिमात्र के लिए ब्राह्मण है, पूज्य नहीं हो सकता'' (पतंजलि भाष्य 51-115)।

महर्षि मनु के अनुसार

विधाता शासिता वक्ता मो ब्राह्मण उच्यते।

तस्मै नाकुशलं ब्रूयान्न शुष्कां गिरमीरयेत्॥

अर्थात- शास्त्रो का रचयिता तथा सत्कर्मों का अनुष्ठान करने वाला, शिष्यादि का  ताडनकर्ता, वेदादि का वक्ता और सर्व प्राणियों के हित की कामना करने वाला ब्राह्मण कहलाता है। अत: उसके लिए गाली-गलौज या डाँट-डपट के शब्दों का प्रयोग उचित नहीं'' (मनु; 11-35)।

महाभारत के कर्ता वेदव्यास और नारदमुनि के अनुसार

"जो जन्म से ब्राह्मण हे किन्तु कर्म से ब्राह्मण नहीं हे उसे शुद्र (मजदूरी) के काम में लगा दो" (सन्दर्भ ग्रन्थ - महाभारत)

महर्षि याज्ञवल्क्य व पराशर व वशिष्ठ के अनुसार "जो निष्कारण (कुछ भी मिले ऐसी आसक्ति का त्याग कर के) वेदों के अध्ययन में व्यस्त हे और वैदिक विचार संरक्षण और संवर्धन हेतु सक्रिय है, वही ब्राह्मण है." (सन्दर्भ ग्रन्थ - शतपथ ब्राह्मण, ऋग्वेद मंडल १०., पराशर स्मृति) -भगवद गीता में श्री कृष्ण के अनुसार "शम, दम, करुणा, प्रेम, शील(चारित्र्यवान), निस्पृही जेसे गुणों का स्वामी ही ब्राह्मण हे"

और

"चातुर्वर्ण्य मया सृष्टं गुण कर्म विभागशः" (भ.गी. ४-१३)

इसमे गुण कर्म ही क्यों कहा भगवान ने जन्म क्यों नहीं? -जगद्गुरु शंकराचार्य के अनुसार "ब्राह्मण वही है जो "पुंस्त्व" से युक्त है. जो "मुमुक्षु" है. जिसका मुख्य ध्येय वैदिक विचारों का संवर्धन है. जो सरल है. जो नीतिवान है, वेदों पर प्रेम रखता है, जो तेजस्वी है, ज्ञानी है, जिसका मुख्य व्यवसाय वेदोका अध्ययन और अध्यापन कार्य है, वेदों/उपनिषदों/दर्शन शास्त्रों? का संवर्धन करने वाला ही ब्राह्मण है" (सन्दर्भ ग्रन्थ - शंकराचार्य विरचित विवेक चूडामणि, सर्व वेदांत सिद्धांत सार संग्रह, आत्मा-अनात्मा विवेक) . किन्तु जितना सत्य यह है की केवल जन्म से? ब्राह्मण होना संभव नहीं है. कर्म से कोई भी ब्राह्मण बन शकता है यह भी उतना ही सत्य है. 🍂🍂🍂🍂

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http://www.aryavrt.com/muj16w09ay-islam-kyon

 

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The darkest places in hell are reserved for those who maintain their neutrality in times of moral crisis.     Danté

 

राज्य सभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, “मैं इस सदन को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि १९९० वाली स्थिति फिर से दोहराई नहीं जाएगी. हर इलाके के प्रत्येक व्यक्ति को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी.

हम यह जानना चाहते हैं कि १९९० में पलायन करने वालों की सम्पत्ति पर अधिकार करने वाले मुसलमानों पर आज तक सरकार ने क्या कार्यवाही की? पलायन तत्कालिक लाभ का सौदा है, वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के सौजन्य से!

एलिजाबेथ के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक उपनिवेशवासी ईसा की भेंड़ है| अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है|

लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ इंडिया के प्रत्येक उपनिवेशवासी को प्राइवेट प्रतिरक्षा का कानूनी अधिकार देती है और प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया गया कोई कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार अपराध नहीं है| फिर भी दंड का अधिकार राज्य के पास होता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना उपनिवेशवासी के जान-माल के रक्षा के लिए की गई है| एलिजाबेथ का रोम राज्य न तो उपनिवेशवासी को जीने का अधिकार देता है {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और न सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)}. यदि उपनिवेशवासी दासता की बेड़ियों से मुक्ति चाहें तो

ईसाइयत {(बाइबल, मत्ती १०:३४) व (बाइबल, लूका १२:४९)} और इस्लाम (कुरान २:२१६) निरंतर युद्धरत सम्प्रदाय हैं| दोनों ही लोकतंत्र की आड़ में विश्व में अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिये मानवजाति के स्वतंत्रता व चरित्र को मिटा रहे हैं| इस बर्बरता और सभ्यता और एक विश्व आपदा के बीच टकराव को टालने के लिए एक ही रास्ता है कि ईसाई और इस्लाम मजहब के भ्रम को बेनकाब किया जाय और उन्हें रहस्यमय नहीं रहने दिया जाय. गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ शांति से जीने के लिए यह आवश्यक है कि अब्रह्मी संस्कृतियों से प्रत्येक ईसाई व मुसलमान को विलग कर दिया जाये|

आप भलीभांति जानते हैं कि भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ प्रत्येक उपनिवेशवासी को आत्म रक्षा का कानूनी अधिकार देती है और आत्मरक्षा के लिए किया गया कोई प्रयत्न या कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अंतर्गत अपराध नहीं है|

आक्रांता अब्रह्मी संस्कृतियों ने भारत को इंडिया और वसुंधरा के प्रत्येक मनुष्य को अपना दास बना रखा है| भारत आज भी इंडिया है|

 

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लेकिन इस लिपि को इंडिया उपनिवेश के प्रथम दास राष्ट्रपति के सचिवालय का बड़े से बड़े अधिकारी से लेकर एक अदना चपरासी तक पढ़ नहीं सकता| न इस लिपि में लिखे गए आवेदन का उत्तर देने के लिए राष्ट्रपति सचिवालय बाध्य है|

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मानवता के शत्रु भारतीय संविधान का संकलन मानवजाति को लुप्त करने का षड्यंत्र है| इसके अनुच्छेद २९(१) ने मानवमात्र से जीने का अधिकार छीन लिया है. यह अनुच्छेद इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है.

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर हम पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. वह भी अत्यंत धूर्तता से. यह अनुच्छेद इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है. हमारा साम्राज्य पूरे विश्व में था, आज हमारा कोई देश नहीं है.

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर उपनिवेशवासियों पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. यह अनुच्छेद इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों (?) के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है.

यह सर्वदा याद रखिये कि इंडिया के ही नहीं अपितु विश्व के भी १% से कम लोग अंग्रेजी, जिसमे लिपि एवं उच्चारण की त्रुटियाँ हैं, जानते हैं. अतः मेरा आग्रह है कि देवनागरी का अधिकाधिक प्रयोग करें.

 

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मस्जिदों से ईमाम और मौलवी मुसलमानों को शिक्षा देते हैं कि काफिरों को कत्ल कर दो|

इतना ही नहीं, मस्जिद से ही इस्लामी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तानी मौलिक धर्मतंत्री सैयद अबुल आला मौदूदी ने घोषित किया है कि इस्लाम विश्व की पूरी धरती चाहता है उसका कोई भूभाग नहीं, बल्कि पूरा ग्रह इसलिए नहीं कि ग्रह पर इस्लाम की सार्वभौमिकता के लिए तमाम देशों को आक्रमण कर छीन लिया जाये बल्कि इसलिए कि मानव जाति को इस्लाम से, जो कि मानव मात्र के सुख-समृद्धि(?) का कार्यक्रम है, लाभ हो|

मौदूदी जोर दे कर कहता है कि यद्यपि काफ़िर झूठे मानव निर्मित मजहबों को मानने के लिए स्वतन्त्र हैं, तथापि उनके पास अल्लाह के धरती के किसी भाग पर अपनी मनुष्य निर्मित गलत धारणा की हुकूमत चलाने का कोई अधिकार नहीं| यदि वे (काफ़िर) ऐसा करते हैं, तो मुसलमानों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे काफिरों की राजनैतिक शक्ति छीन लें और उनको (काफिरों को) इस्लामी तौर तरीके से जीने के लिए विवश करें|

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अल्पसंख्यक शब्द ही धोखा है| ईसाई व मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं, बल्कि क्रमशः विश्व की प्रथम व द्वितीय आबादी हैं| अल्पसंख्यक तो हम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी हैं|

ईसाइयत/इस्लाम की जालसाज़ी मानव मात्र दास को बनाने अन्यथा कत्ल करने के लिए की गई है! अतः भारतीय दंड संहिता की धाराओं ९७, १०२ व १०५ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधीन आर्यावर्त सरकार को मानव जाति के प्राण रक्षा का अधिकार है| इन संस्कृतियों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं है.

मुसलमानों ने शासकों की दासता स्वीकार कर ली है-इसीलिए शासक इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन कर रहे हैं.

जिन ईसाईयों व मुसलमानों को पाकपिता गाँधी ने रोका है वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से मिले असीमित मौलिक मजहबी अधिकार और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार से प्रायोजित संरक्षण मे इंडिया को दार उल इस्लाम व ईसा का राज्य बना रहे हैं.

भारतीय संविधान के अधिकार से एलिजाबेथ मानवता को मिटा रही है|

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https://groups.yahoo.com/neo/groups/RajivMalhotraDiscussion/conversations/messages/8117

संस्कृत और श्रृंगेरी मठ

 

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शेरजी को नमस्ते!

आजादी?

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http://www.aryavrt.com/nl-legalaid-16225y

 

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क्या महामहिम जी बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान से मुक्ति नहीं लेना चाहेंगे?

भारतीय संविधान ने उनको भ्रष्ट और आत्मघाती बना दिया है| १५९अ जब संविधान ही लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) हो तो कोई भी क्या कर लेगा?

संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति व पूँजी का अधिकार ही नहीं देता|

इस अनुच्छेद को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता| जज व उपनिवेशवासी दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन राज्यपालों द्वारा शासित हैं|

दंड की कौन कहे, राज्यपाल लोकसेवकों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन संरक्षण देकर उपनिवेशवासियों को कत्ल करवा रहे और लुटवा रहे हैं| अपराध के केंद्र मस्जिदों से अज़ान देकर काफिरों के देवताओं के निंदक ईमामों पर किसी राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल ने सन १९५० से आज तक अभियोग चलाने की संस्तुति नहीं दी|

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क्या कोई चर्च, मस्जिद, अज़ान, नमाज़ और खुत्बों का विरोध कर सकता है?

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लोकसेवक ईसाई व मुसलमान ईशनिन्द्कों और खूनियों के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते. पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपने ही शत्रुओं का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करना उनकी विवशता है. लोकसेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे अपना सर्वनाश करें अथवा नौकरी गवाएं.

फिर भी उनके पास एक विकल्प है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करें. निर्णय लोकसेवकों के हाथ में है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करेंगे, अथवा एलिजाबेथ के उपनिवेश में रह कर अपनी धन, धरती, नारियां और धर्म गवाएंगे.

लोकसेवकों को तो यह भी पता नहीं होता कि उनको मिले निर्देशों का उद्गम स्थान कहाँ है?

आप लोगों को श्राप देने या दंड देने की मेरी सरकार को कोई आवश्यकता नहीं है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों को अपनी लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है. योगी पद, प्रभुता और पेट के लोभ में भारतीय संविधान के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की शपथ ले चुके हैं.

जज, लोकसेवक, राष्ट्रपति और राज्यपाल सबको इसी मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेनी ही पड़ेगी| शपथ लिए बिना कोई पद, प्रभुता और पेट का प्रबंध नहीं कर सकता| वोट देकर भी उपरोक्त संवैधानिक स्थितियों को कोई नहीं बदल सकता| लेकिन योगी को नहीं लगता कि वे मूर्ख बन रहे हैं और अपनी संस्कृति व संततियों के अस्तित्व को मिटाने के लिये विवश कर दिए गए हैं?

मानवजाति का अस्तित्व संकट में है| वह भी एलजी द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन निम्नलिखित शपथ ले कर:-

 “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|”

ईमाम, जो काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा करते हैं और मस्जिदों से मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं, के विरुद्ध तो २६ जनवरी, १९५० से आज तक राज्यपाल लोग अभियोग न चला पाए, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन आत्मरक्षा में विरोध करने वाले काफिर रासुका में प्रताड़ित हो रहे हैं| अन्य कारणों के साथ इसलिए उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति चाहते हैं.

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन पूर्व संस्तुति की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति और राज्यपाल के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं- गोह्त्यारों के विरुद्ध अभियोग ही नहीं चला सकता| राष्ट्रपति और राज्यपाल को गोह्त्यारों को संरक्षण, पोषण व संवर्धन की क्रमशः भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है|

बपतिस्मा/अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान काफिरों को कत्ल करने का उपदेश देता है| लेकिन कोई विरोध नहीं कर सकता.

उपनिवेशवासी ईशनिंदा (बपतिस्मा/अज़ान) और कत्ल किये जाने की धमकी सुनने के लिए विवश हैं.

जो भी उपनिवेश, ईशनिंदा, (बपतिस्मा/अज़ान), धर्मान्तरण, नारी बलात्कार, लूट, हत्या और जाति हिंसा का विरोध करे, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षण, पोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

वैदिक सनातन धर्म को समूल नष्ट करने के लिए जज और राज्यपाल का मनोनयन और उनके अधीनस्थ लोकसेवकों की नियुक्ति की गई है.

राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से जेल भेजवाने और ईसाई व मुसलमान उपनिवेशवासियों को कत्ल करने कराने के लिए विवश हैं.

राष्ट्रपति और राज्यपाल चारो ओर से एलिजाबेथ के गुप्तचरों से घिरे हैं. यह लड़ाई स्वयं नहीं लड़ सकते. यह लोग चाहें तो मेरी गुप्त सहायता ले सकते हैं.

मस्जिदों से काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा कि जाती है और कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| फिर मस्जिदों को क्यों रहने दिया जाये?

तत्कालीन शासक तो मोहरे है| देश पर शासन एलिजाबेथ का है| ६ से अधिक वर्षों से मैं साध्वी प्रज्ञा को जेल से मुक्त नहीं करा पा रहा हूँ| हमारा अपराध जानती हैं? हम अज़ान द्वारा की जाने वाली ईशनिंदा से मुक्ति और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा के स्थल मस्जिदों में धमाके कर रहे हैं| यानी कि आत्मरक्षा कर रहे हैं|

अब्रह्मी संस्कृतियों से मानवजाति को मुक्ति एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति लेने के बाद ही मिल सकती है.

लोकसेवकों की स्थिति बलि के बकरे की है, जिसे भलीभांति ज्ञात होता है कि उसे कत्ल होना है, लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता.

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माउंटबेटन ने ईसाइयत के लिए पत्नी एडविना का वैश्यालय खोल लिया. क्या आप वैदिक संस्कृति रक्षार्थ आर्यावर्त सरकार को गुप्त सहयोग सकते हैं?

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ईमाम, जो काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा करते हैं और मस्जिदों से मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं, के विरुद्ध तो २६ जनवरी, १९५० से आज तक राज्यपाल लोग अभियोग न चला पाए.

 लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन आत्मरक्षा में विरोध करने वाले रासुका में प्रताड़ित हो रहे हैं| अन्य कारणों से भी इसलिए उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति चाहते हैं.

इस प्रकार दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ और भारतीय संविधान के अनुच्छेदों२९(१), ३९(ग), ६० व १५९ के बल पर तत्कालीन शासकों के नेतृत्व में एलिजाबेथ ने जजों सहित आत्मघाती लुटेरे लोकसेवकों की एक सेना बना रखी है, जो दिए की लौ पर मरने वाले पतिंगों की भांति पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपना जीवन, सम्पत्ति, नारियां, वैदिक सनातन संस्कृति और धरती गवाने में लिप्त हैं. लोकसेवकों को किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है.

लोकसेवक ईसाई व मुसलमान ईशनिन्द्कों और खूनियों के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते. पद, प्रभुता और पेट के लोभ में अपने ही शत्रुओं का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करना उनकी विवशता है. लोकसेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे अपना सर्वनाश करें अथवा नौकरी गवाएं.

फिर भी उनके पास एक विकल्प है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करें. निर्णय लोकसेवकों के हाथ में है. आर्यावर्त सरकार की गुप्त सहायता करेंगे, अथवा एलिजाबेथ के उपनिवेश में रह कर अपनी धन, धरती, नारियां और धर्म गवाएंगे.

लोकसेवकों को तो यह भी पता नहीं होता कि उनको मिले निर्देशों का उद्गम स्थान कहाँ है?

जज, लोकसेवक, राष्ट्रपति और राज्यपाल सबको इसी मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेनी ही पड़ेगी| शपथ लिए बिना कोई पद, प्रभुता और पेट का प्रबंध नहीं कर सकता| वोट देकर भी उपरोक्त संवैधानिक स्थितियों को कोई नहीं बदल सकता| लेकिन उपरोक्त लोगों को नहीं लगता कि वे मूर्ख बन रहे हैं और अपनी संस्कृति व संततियों के अस्तित्व को मिटाने के लिये विवश कर दिए गए हैं?

आप लोगों को श्राप देने या दंड देने की मेरी सरकार को कोई आवश्यकता नहीं है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों को अपनी लूट, हत्या और बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है. आप पद, प्रभुता और पेट के लोभ में भारतीय संविधान के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की शपथ ले चुके हैं.

 

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आज हम इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि

हम जेहोवाः और अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| बपतिस्मा, अज़ान व नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं|

हम बपतिस्मा/अज़ान का विरोध कर रहे व चर्च/मस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट कर रहे हैं|

आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए|  (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०). हम जो भी कर रहे हैं, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा में कर रहे हैं| जो भी हमारे विरोधी हैं, मानवता के शत्रु हैं|

मस्जिद से अज़ान व खुत्बों द्वारा इमाम क्या कहते हैं, को जानने के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

साध्वी प्रज्ञा सहित आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटाने के लिए ही जेल में हैं| आज भी उनकी ललकार है, “एलिजाबेथ सत्ता में क्यों? काबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अज़ान ईशनिंदा है। अतएव साध्वी के सपनों को साकार कीजिये| चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाइए|

आर्यावर्त सरकार को आप लोगों की बुद्धि पर तरस आता है|

आर्यावर्त सरकार ईसा को बाइबल द्वारा जानती है| स्वयं बाइबल के निम्नलिखित नियमों को पढ़ें और भेंड़ ईसाइयों से पूछें कि क्या बाइबल में ऐसा नहीं लिखा है?

महामहिम जी!

मुझे आप पर तरस आता है.

आप एलिजाबेथ के उपनिवेश के बलिपशु हैं. आप उपनिवेश का विरोध भी नहीं कर सकते. क्यों कि ऐसा करना Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

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उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है।

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उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं जहाँ उस राज्य की जनता निवास करती है।

उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध क्यों है?

बपतिस्मा/अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान अविश्वासियों को कत्ल करने का उपदेश देता है| लेकिन कोई विरोध नहीं कर सकता.

बपतिस्मा/अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान अविश्वासियों को कत्ल करने का उपदेश देता है| लेकिन कोई विरोध नहीं कर सकता.

जो भी उपनिवेश, ईशनिंदा, (बपतिस्मा/अज़ान), धर्मान्तरण, नारी बलात्कार, लूट, हत्या और जाति हिंसा का विरोध करे, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपाल, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, ईसाई व मुसलमान को, भारतीय संविधान और कानूनों द्वारा संरक्षण, पोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

वैदिक सनातन धर्म को समूल नष्ट करने के लिए जज और राज्यपाल का मनोनयन और उनके अधीनस्थ लोकसेवकों की नियुक्ति की गई है.

राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से जेल भेजवाने और ईसाई व मुसलमान उपनिवेशवासियों को कत्ल करने कराने के लिए विवश हैं.

राष्ट्रपति और राज्यपाल चारो ओर से एलिजाबेथ के गुप्तचरों से घिरे हैं. यह लड़ाई स्वयं नहीं लड़ सकते. यह लोग चाहें तो मेरी गुप्त सहायता ले सकते हैं.

 

यह लोकसेवक भी जानते हैं और मैं भी. लोकसेवक चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते. लेकिन

साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. क्या १९४७ से आज तक आप ने उपनिवेश का विरोध किया?

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा काफिरों को कत्ल कर देना ही काफिरों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है|

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साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी के बाद;

http://www.aryavrt.com/press-release-08o24

Press Release news

http://www.aryavrt.com/toi-news-malegaon

 

२१/०२/१६

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इतना ही नहीं मुसलमानों को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए निम्नलिखित असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिए गए हैं:-

उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान २:१९१)].

उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान २:१९१)].

उपनिवेशवासी ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०)] एलिजाबेथ को सौंप दी है. नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा अथवा ईसाई| [(कुरान २३:६ व ७०:३०) (बाइबल, याशयाह १३:१६)].

उपनिवेशवासी ने अपने पूजा स्थल [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)] गवां दिए हैं| भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और उपासना की स्वतंत्रता (अज़ान, कुरान ३:१९) गवां दी है|

 

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Islam is not for me…

https://www.youtube.com/watch?v=aoI6I6lHvK4

Three things you (probably) don't know about islam

https://www.youtube.com/watch?v=fgsrnmzxEUY

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https://www.youtube.com/watch?v=r7OYRknGgEc

 

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एलिजाबेथ के उपनिवेश

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http://www.aryavrt.com/muj16w08-hindu-milisia

https://www.facebook.com/priyanshu.pc/videos/1049076948484028/

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मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे देने वाले देश द्रोही क्यों नहीं हैं?

http://www.aryavrt.com/fatwa

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३७.    इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश है| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ व अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान}. माउंटबेटन ने गांधी से संधि कर, इसे लूटने के लिए और वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए ९९ वर्ष के लिए, १५ अगस्त, १९४७ को, किराये पर काले अंग्रेजों को दे दिया है|

३८.    पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी ने वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए संकलित भारतीय संविधान के रक्षा की शपथ ली थी| दिखावे के लिए विरोध कर, अब वैदिक सनातन धर्म कैसे मिटता है-यही देखने के लिए जीवित हैं|

३९.    ओबामा का बारम्बार यह कहना कि अमेरिका की लड़ाई इस्लाम के विरुद्ध नहीं है, इस मामले को अधिक संदिग्ध बना देता है| इस्लाम के बचाव का कारण आर्यावर्त सरकार को यह दिखाई दे रहा है कि अमेरिका इस्लाम का दोहन वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए कर रहा है|

४०.    योगगुरू बाबा रामदेव भ्रष्टाचार के विरुद्ध नहीं लड़ सकते| एलिजाबेथ का विरोध करते ही जेल जायेंगे और पुलिस के इतने डंडे पड़ेंगे कि योग और स्वाभिमान भूल जायेंगे| वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए एलिजाबेथ आतताई इस्लाम को संरक्षण देने की अपराधी है|

४१.    भ्रष्टाचार मिटाने के लिए आवश्यकता है भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) को मिटाने की व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ को मिटाने की| लेकिन इसकी आवाज नहीं उठ रही है| उठ भी नहीं सकती, क्यों कि अल्लाह और जेहोवा ने मानव जाति का चरित्र भ्रष्ट कर दिया है|

४२.    वैदिक सनातन संस्कृति, जिसको मिटाने के लिए आप को मनोनीत किया गया है, आप और आप के उम्मा की कवच है, जिस दिन यह संस्कृति मिटी, इस्लाम मिट जायेगा.

४३.    भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म सहित मानव जाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है| सुरक्षा किसकी होगी?

४४.    एक प्रमुख अंतर यह भी है कि जहां अब्रह्मी संस्कृतियों को अन्य संस्कृतियों को मिटाने में लंबा समय लगा वहीँ वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए २६ नवम्बर, १९४९ को संविधान बना कर अब्रह्मी संस्कृतियों के हाथों में सौँप दिया गया है|

 

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मुस्लिम विरोध

एलिजाबेथ राज्य में उपनिवेशवासी के पास जीने, सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं है| लूट और नारी के बलात्कार की छूट है|

यह देश न उपनिवेशवासियों का था, न है और न रहेगा, तब तक जब तक उपनिवेशवासी उपनिवेश से मुक्ति न ले लें.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

न्यायमूर्ति खस्तगीर, कलकत्ता कुरान पेटिशन में कारण बताओ नोटिस देने के कारण मुख्य न्यायाधीश न बन सकीं.

एम एम जिले सिंह लोहाट को कुरान पर टिप्पणी करने के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी.

एम एम एम एस रोहिल्ला को बुखारी के विरुद्ध एनबीडब्लू जारी करने के कारण नौकरी गवानी पड़ी.

इसके अतिरिक्त विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://intellibriefs.blogspot.in/2005/02/imam-and-shankaracharya-not-rule-of.html

 

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http://www.aryavrt.com/jativadi-indians

http://www.aryavrt.com/antim-manav

 

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जिन्हें गौ से प्रेम है - उनमे से १% भी अंग्रेजी नहीं जानते. आप लोगों का संदेश किनके लिए है?

English में Indian का मतलब Oxford Dictionary के पृष्ठ नं० 789 पर लिखा है old-fashioned and criminal peoples अर्थात् पिछडे और घिसे-पिटे विचारों वाले अपराधी लोग।

अधिक विवरण के लिए निम्नलिखित लिंक पढ़ें:-

http://www.aryavrt.com/jesus-and-lawofmoses

 

 

 

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किसे जेल जाना है? अज़ान, मस्जिद और मदरसा का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

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वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है|

किसे जेल जाना है? अज़ान, मस्जिद और मदरसा का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का, यानी काफिरों को कत्ल करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| प्रधानमंत्री और उनकी केबिनेट इसी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची के प्रारूप).

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं|

ऐसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन एलिजाबेथ के लिए लूट, हत्या और बलात्कार के संरक्षण हेतु चाकरी करने वाली प्रणब दा, प्रदेशों के राज्यपाल और भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले भ्रष्ट जज वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं|

राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| इन्हीं धाराओं के अधीन मेरे विरुद्ध उपरोक्त धारा १९६ को लागू कर अब तक ५० अभियोग चले| ५ आज भी लम्बित हैं|

वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है|

किसे जेल जाना है? अज़ान, मस्जिद और मदरसा का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल की नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के शपथ लेने के बाद होती है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का, यानी अविश्वासियों को कत्ल करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| प्रधानमंत्री और उनकी केबिनेट इसी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची के प्रारूप).

राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| इन्हीं धाराओं के अधीन मेरे विरुद्ध उपरोक्त धारा १९६ को लागू कर अब तक ५० अभियोग चले| ५ आज भी लम्बित हैं|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का, यानी अविश्वासियों को कत्ल करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| प्रधानमंत्री और उनकी केबिनेट इसी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची के प्रारूप).

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं|

ऐसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन एलिजाबेथ के लिए लूट, हत्या और बलात्कार के संरक्षण हेतु चाकरी करने वाली प्रणब दा, प्रदेशों के राज्यपाल और भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले भ्रष्ट जज वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं|

किसे जेल जाना है? अज़ान, मस्जिद और मदरसा का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

किसे जेल जाना है? अज़ान, मस्जिद और मदरसा का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध है!

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है व राष्ट्रपति और राज्यपाल को भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन इनका संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने की शपथ लेनी पड़ती है| क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है|

मैं स्वयं इस्लाम और ईसाइयत का विरोध करने के कारण ४२ बार जेल गया हूँ मुझे जेल में जहर दिया गया है. ५० अभियोग चले, जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8 हम माननीय प्रधानमंत्री नमो से आग्रह करते हैं कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर हमारे मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के लिए लगे अभियोग वापस लें सबको जेल से मुक्त करें.

राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| इन्हीं धाराओं के अधीन मेरे विरुद्ध उपरोक्त धारा १९६ को लागू कर अब तक ५० अभियोग चले| ५ आज भी लम्बित हैं|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का, यानी अविश्वासियों को कत्ल करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| प्रधानमंत्री और उनकी केबिनेट इसी भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं| (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची के प्रारूप).

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है और अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों, क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं|

ऐसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन एलिजाबेथ के लिए लूट, हत्या और बलात्कार के संरक्षण हेतु चाकरी करने वाली प्रणब दा, प्रदेशों के राज्यपाल और भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले भ्रष्ट जज वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं|

 

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राज्यपाल बनवारी शपथ ले कर अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रहे हैं| मुसलमानों के पास अविश्वासियों की नारियों पर अधिकार करने और उनका बलात्कार करने का भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से और मुसलमानों के मुस्लिम निजी कानूनसे भी प्राप्त अधिकार है| भारतीय संविधान के आस्था और निष्ठा की शपथ मुख्यमंत्री अखिलेश ने भी ली है| मुख्यमंत्री मुसलमानों के अधिकारों में व्यवधान कैसे डाल सकते हैं? जो भी काफ़िर मुसलमानों के निजी कानून और संवैधानिक अधिकार में रूकावट पैदा करेगा, उसे दंडित करना न्यायालय का भी उत्तरदायित्व है| क्यों कि जजों ने भी भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है|

यदि एलिजाबेथ सत्ता में रहेगी तो वैदिक सनातन धर्म और मंदिर नहीं रहेंगे!

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सत्ता के हस्तांतरण की शर्तों के अंतर्गत कोई

कुरान को (भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेने के कारण) भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा महामहिम नाइक संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं.

इंडिया के संत और कथावाचक वीर्यहीन करने वाली इन संस्कृतियों को ईश्वर तक पहुंचने के अलग अलग मार्ग बताते हैं| पादरी और ईमाम अपने चर्च और मस्जिदों से ईश्वर की निंदा करते हैं और वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के हत्या की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं. जो विरोध करता है, उसे मिटा दिया जाता है.

अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं.

कोई जज कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

कोई जज कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

यानी कि उपनिवेशवासियों की मृत्यु पक्की.

मस्जिदों से मुसलमान अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा १४०० वर्षों से अधिक से ईशनिंदा कर रहा है और मुसलमानों को महामहिम सहित काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दे रहा है. महामहिम नाइक अपनी पुलिस से मुसलमानों को संरक्षण देकर काफिरों को चेतावनी दिलवाते हैं कि काफ़िर कत्ल कर दिए जायेंगे. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

 

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काफ़िर के पास शिकायत करने का भी अधिकार नहीं है| फिर ज्ञापन न लेकर पुलिस ने भारतीय संविधान और कानूनों की रक्षा के उत्तदायित्व का निर्वहन किया है|

 

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http://www.aryavrt.com/babri-affidavits

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उपनिवेश का विरोध

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हम माननीय प्रधानमंत्री नमो से आग्रह करते हैं कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर हमारे मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के लिए लगे अभियोग वापस लें सबको जेल से मुक्त करें.

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Divorce और तलाक हमारी वैदिक सनातन संस्कृति में नहीं है.

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सती अपराधिनी है (सती प्रथा निवारण कानून, १९८७) और वैश्या नारी का संरक्षण, पोषण व संवर्धन हो रहा है UDHR अनुच्छेद २५(२)

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इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश

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http://timesofindia.indiatimes.com/india/SC-refers-gay-sex-plea-to-5-judge-bench/articleshow/50820825.cms

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२२ जून १९४८ को भारत के दूसरे गवर्नर के रूप में चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने निम्न शपथ ली l “मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यथाविधि यह शपथ लेता हूँ कि मैं सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी के प्रति कानून के मुताबिक विश्वास के साथ वफादारी निभाऊंगा, एवं मैं चक्रवर्ती राजगोपालचारी यह शपथ लेता हूँ की मैं गवर्नर जनरल के पद पर होते हुए सम्राट जार्ज षष्ठ और उनके वंशधर और उत्तराधिकारी (यानी एलिजाबेथ) की यथावत सेवा करूँगा l ”

 

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http://www.aryavrt.com/muj16w05y-snvidhan-virodh

 

यह संस्कृतियों का युद्ध है| अब्रह्मी संस्कृतियों आतताई संस्कृतियाँ हैं|

यदि अब्रह्मी संस्कृतियों है तो मंदिर रह नहीं सकता| (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३, अज़ान व कुरान १७:८१). जिसने भारतीय संविधान की शपथ ली हो, उसे मंदिर के संरक्षण की मांग करने का अधिकार नहीं है.

जब तक भारतीय संविधान, बाइबल और कुरान है, भ्रष्टाचार सदाचार है और नारियों का बलात्कार अब्रह्मी संस्कृतियों का नैतिक और लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार|

भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों की सम्पत्ति को लूटने के लिए संकलित किया गया है|इन आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रोकने वाले, संरक्षण व समर्थन देने वाले स्वयम के व मानव जाति के शत्रु हैं| इन्हें दंडित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग दीजिए|

सबको दास बनाना और स्वयं दास बनना ईसाइयत (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और इस्लाम (कुरान २:३५) के मूर्ख अनुयायियों की फितरत है| एकेश्वरवाद के अनुसंधान का यही कारण है| मूसा एकेश्वरवाद का जनक है| मसीह ईसा और मुहम्मद तो नकलची हैं| जेहोवा और अल्लाह से क्रमशः मूसा और मुहम्मद ही मिल सकते हैं| इस प्रकार धूर्त पैगम्बरों ने मानव मात्र को दास बनाने की अनूठी विधि ढूंढ रखी है| यहूदी मूसा का दास है और मुसलमान मुहम्मद का| जो दास नहीं बनता उसे पैगम्बर लूट और नारी बलात्कार का लोभ देकर कत्ल कराते हैं| इस प्रकार अब्रह्मी संस्कृतियों मानव मात्र को दास बनाने का अमोघ अस्त्र है, पैगम्बर तो रहे नहीं-उत्तराधिकार शासकों (एलिजाबेथ को) और पुरोहितों को सौँप गए हैं|

 

गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा वैदिक सनातन संस्कृति के चार स्तंभ हैं.

क्या आप उपनिवेश, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं?

क्या आप अपने बेटे को निःशुल्क गुरुकुल में शिक्षा दिला सकते हैं?

क्या किसान बैल से खेती कर सकता है?

क्या आप गंगा में गंदे नालों को जोड़ने से रोक सकते हैं?

क्या आप वेदों की माता गायत्री का जप करते हैं?

उपरोक्त में से आप एक भी कार्य कर सकें, तो अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोध का साहस करें, अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहें.

 

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एक आवश्यक स्पष्टीकरण:

अचानक कल सायं से ही देश विदेश से मेरे पास तमाम फोन आ चुके हैं कि मैंने वैदिक पंथ की स्थापना कर ली है.

मैंने आर्यावर्त सरकार की स्थापना अवश्य की है, लेकिन मेरा कोई नया मत या सम्प्रदाय चलाने का विचार नहीं है. क्योंकि वैदिक सनातन संस्कृति से अच्छा कोई धर्म हो ही नहीं सकता. न वेद से उत्तम कोई ज्ञान हो सकता है.

अप्रति

 

संविधान के अनुच्छेद ३१ के संशोधन को मान्यता, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कन्याओं को पब में शराब पीने और नंगे नाचने का अधिकार, सगोत्रीय विवाह के कानून तो जजों ने ही पास किये हैं| बचना हो तो एलिजाबेथ को जेल भेजने में हमें सहयोग दीजिए|

जज ज्यादा उछल कूद करेंगे तो शमित मुख़र्जी व मेरी भांति तिहाड़ जेल चले जायेंगे| बचना हो तो एलिजाबेथ को जेल भेजने में हमें सहयोग दीजिए|

१०/०१/१६

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०८/०१/१६

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जातिसंहारकों का संरक्षण, पोषण व संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और का संकलन किया गया है| शासक और लोकसेवक तभी तक सत्ता और सेवा में रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित साधते यानी ईसा के राज्य का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करते रहेंगे| यानी अपना ही सर्वनाश सुनिश्चित करते रहेंगे|

उपरोक्त तथ्यों का उद्घाटन भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन एलिजाबेथ के रोमराज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है| मैं उपरोक्त तथ्य प्रकाशित करने के कारण ४२ बार बंदी बना हूँ| ईश्वर की कृपा से आज तक मुझे सजा नहीं दी गई|

मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जाति हिंसक शिक्षाओं को, जो भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है यदि मुसलमान व ईसाई करे तो राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानते| लेकिन आत्मरक्षा में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देने के लिए राष्ट्रपति (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६०) और राज्यपाल (भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९) दोनों ही, शपथ लेने के कारण, विवश हैं| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति, राज्यपाल और जिलाधीश के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं- मस्जिदों से अज़ान का प्रसारण करने वाले और अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम के विरुद्ध अभियोग नहीं चला या चलवा सकता|

राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं| ५ आज भी लम्बित हैं| अतएव अपनी खैर मनाइए-प्राकृतिक व मानवीय न्याय के लिए निज हित में मेरे उपरोक्त मात्र २ (दो) अभियोग वापस लीजिये, अज़ान बंद कराइए और मस्जिद पर प्रतिबंध लगाइए|

इस कठोर सच्चाई को जो प्रकाशित करेगा, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ अथवा २९५ के अधीन जेल भेज दिया जायेगा| आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध करने के कारण हमारे ९ अधिकारी जेलों में बंद हैं| मैं स्वयं ४२ बार जेल या हवालात जा चुका हूँ| पुलिस द्वारा पिटता रहा हूँ|

हम आर्यावर्त सरकार के भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ से पीड़ित न्यायपालिका के अभियुक्त हैं| साध्वी प्रज्ञा सहित ९ लोग अज़ान और मस्जिद का विरोध करने के कारण जेलों में बंद हैं| मेरे विरुद्ध सरकारों ने उपरोक्त धाराओं के अधीन अब तक ५० अभियोग चलाये हैं| जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं|

गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा

 

किसी काफ़िर को जीने का अधिकार न मुसलमान देता है और न किसी उस व्यक्ति को जीने का अधिकार ईसाई देता है, जो ईसा को अपना राजा नहीं मानता| फिर स्वतंत्रताकैसे मिली यह पूछते ही या तो आप ईश निंदा में कत्ल हो जायेंगे या भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ अथवा २९५ में जेल में होंगे| जज तो राज्यपाल का बंधुआ मजदूर है| अपराधी वह है, जिसे एलिजाबेथ का मातहत राज्यपाल अपराधी माने|

लेकिन १५ अगस्त १९४७ से आज तक किसी ने, यहाँ तक कि किसी मुसलमान मुजाहिद या मौलवी ने भी, भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७, चर्च, बपतिस्मा, आदि का विरोध नहीं किया| किसी मौलवी ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध फतवा नहीं दिया और न कोई तालिबानी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम १९४७ के विरुद्ध लड़ा. सब ने अपने आश्रय दाता वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के साथ विश्वासघात किया| आप भी पीछे नहीं हैं| पद, प्रभुता और पेट के लोभ में आप विरोध कर भी नहीं सकते|

मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी प्रसारित किया जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इन कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक, मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं की गईं|

जातिसंहारकों का संरक्षण, पोषण व संवर्धन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और का संकलन किया गया है| शासक और लोकसेवक तभी तक सत्ता और सेवा में रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित साधते यानी ईसा के राज्य का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करते रहेंगे| यानी अपना ही सर्वनाश सुनिश्चित करते रहेंगे|

मुसलमानों को अविश्वासियों के नारियों का लव जिहाद, बलात्कार करने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार इस्लाम (कुरान २३:६ व ७०:३०) और लोकतन्त्रीय भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह उसकी पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) से किया और ५२ वर्ष के आयु में ६ वर्ष की आयशा से उसका निकाह भी किया| इस असीमित मौलिक मजहबी अधिकार को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए एलिजाबेथ के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९). अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधियों को, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति देकर, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंडित कराने के लिये राष्ट्रपति और राज्यपाल विवश हैं!

मेरे विरुद्ध दिल्ली के उपराज्यपाल ने ४९ अभियोग चलाए. ४ आज भी लम्बित हैं. आप ईमामों पर अभियोग क्यों नहीं चलवाते?

एलिजाबेथ के दास राज्यपालों के पुलिस के संरक्षण में मस्जिदों से ईमाम दिन में पांच समय अज़ान द्वारा ईशनिंदा करते हैं और खुतबे देते हैं कि काफ़िर मुसलमानों के खुले दुष्मन हैं| काफिरों को कत्ल कर दो| अज़ान और मस्जिद से दिए जाने वाले खुतबों के विरुद्ध काफ़िर शिकायत नहीं कर सकते और न जज सुनवाई कर सकता है| पुलिस किसी ईमाम के विरुद्ध आज तक अभियोग न चला सकी| मुसलमानों को अविश्वासियों के नारियों का लव जिहाद, बलात्कार करने का अधिकार इस्लाम (कुरान २३:६ व ७०:३०) और लोकतन्त्रीय भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है| इस असीमित मौलिक मजहबी अधिकार को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए एलिजाबेथ के मनोनीत राष्ट्रपति व राज्यपाल, विवश हो कर, शपथ लेते हैं| [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९). अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधियों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति देकर भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चलवाने का राष्ट्रपति और राज्यपालों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत एकाधिकार प्राप्त है| लोकसेवक या जज भारतीय संविधान, और कुरान के आगे विवश हैं!

लेकिन मैं, काफ़िर व ईसाई मात्र अल्लाह की पूजा नही करते अथवा ईसा को अपना राजा नहीं मानते। अतः मुझको को ही नहीँ ईसाइयों व गैरमुसलमानों को भी कत्ल होना है। फिर भी धार्मिक कट्टर हिंदू हैं - मुसलमान व ईसाई नहीं! आप की आत्मघात व राष्ट्रघात की नीति अत्यंत सराहनीय है। बधाई! क्यों कि आप मुसलमानों की नमाज को पूजा मानते हैं और मस्जिदों को जहां यही हत्यारा, लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) और बलात्कारी अल्लाह महान कहा जाता है, पूजास्थल मानते हैं। सुनें! आप की सबेरे की नींद हराम करने वाली लाउडस्पीकर की आवाज, ‘‘अल्लाहु अक्बर’’ यानी अल्लाह सबसे महान है। अज़ान व नमाज का अंश भी जान लें, ‘मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है...इस नमाज को आप लोग सांप्रदायिक पूजा नहीँ मानते। अलबत्ता जो इसके विरुद्ध कुछ लिखे उसे आप दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन भादंसं की धारा १५३, २९५ या ५०६ का अभियुक्त बनवा देते हैं। क्यों कि इसी इस्लाम को आप भारतीय गंगा जमुनी संस्कृति का अभिन्न अंग मानते है। इसी संस्कृति को सुरक्षित रखने का प्रत्येक मुसलमान या ईसाई को भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) असीमित मौलिक अधिकार देता है। जिस पर किसी का जोर नहीं! आप की सरकार का धार्मिक कट्टरता से संघर्ष का संकल्प व प्रयोग अनूठा है।

 

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पठानकोट एयरबेस पर जिहादियों का आक्रमण.

प्रणब दा सरकार का फरमान. पाक जैश पर कार्यवाही करे.

प्रधान मंत्री नमो की इंडिया टीवी पर टिप्पणी:

 

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चरित्र के नए मानदंड

अब्रह्मी संस्कृतियों मानव मात्र को अपराधी व दास बनाने वाली संस्कृतियाँ हैं| चरित्र के लिए इनमे कोई स्थान नहीं है|

 

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बलि के बकरे की भांति ये क्या मैं - मैं लगा रखा है आप लोगों ने.

आप लोग मूर्खों के स्वर्ग से बाहर आईये.

 

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इंडिया एलिजाबेथ के उपनिवेश है और उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के दास हैं.

 

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इंडिया में लोकतंत्र नहीं एलिजाबेथ केलिए, एलिजाबेथ द्वारा चुनागया एलिजाबेथतंत्र है| सर्वविदित है कि प्रेसिडेंट प्रणब दा का मनोनयन एलिजाबेथ ने किया| प्रधानमंत्री, सभी राज्यपाल व सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत हैं| क्या आप ने सोचा कि जब उपनिवेशवासी को एलिजाबेथ के उपनिवेश में ही रहना था तो क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

भारतीय संविधान खूनी, लुटेरे और बलात्कारी जेहोवा और अल्लाह का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करता है| उपनिवेश के सारे कानून ब्रिटिश काल के ही लागू हैं. राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों का क्रमशः अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए विवश हैं| जजों ने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने की शपथ ली है| भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ व १०५ हमें हर मुसलमान और ईसाई को कत्ल करने का अधिकार देती है| आर्यावर्त सरकार ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान को मिटाना चाहती है| इंडिया के हर उपनिवेशवासी को आत्म रक्षा के लिए हथियार दिलाना सर्वोच्च न्यायालय की नैतिक उत्तरदायित्व है|

राज्यपाल उपनिवेशवासी के चुने प्रतिनिधि नहीं होते| राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के प्रारूप के अनुसार शपथ लेने के लिए विवश हैं|

कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमामों को तो सर्वोच्च न्यायालय वेतन दिलवा रही है (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त कानूनी अधिकार का प्रयोग करने वालों को जेल भेज रही है.

 

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खतना किसे कहते हैं?

खतना एक शल्यक्रिया है, जिसमे शिश्न की ऊपरी चमड़ी को काट कर निकाल दिया जाता है.

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बलात्कार और लूट का प्रलोभन अब्रह्मी संस्कृतियों के फलने फूलने का एक मात्र कारण है. येहोवा और अल्लाह मूसा और मुहम्मद की छलरचनायें हैं| इनका अस्तित्व नहीं है. येहोवा और अल्लाह कीं रचना मनुष्य को खतना अथवा यौनाचार की छूट द्वारा वीर्यहीन कर दास बनाने के लिए की गई है. जहाँ वैदिक सनातन संस्कृति के गुरुकुलों में निःशुल्क वीर्यरक्षा की शिक्षा दी जाती है, वहीं मैकाले के स्कूल महंगी यौनशिक्षा देते हैं और मकतब कत्ल करने और नारी बलात्कार की| जीवन, धन और सुख की मृग मरीचिका में मनुष्य विरोध नहीं करते. मनुष्य की मुक्ति का मार्ग, गुरुकुलों का पुनर्जीवन है|

गांधी अंग्रेजों का भयाक्रांत कठपुतली था. मानवजाति की समस्या गांधी नहीं अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं. अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी मूर्ख हैं.

मनुष्य को वीर्यहीन किये जाने का कारण

यह मेरा नहीं अपितु मुसलमानों का दायित्व है कि वे अज़ान बंद करें और मस्जिद नष्ट करें|

अब्रह्मी संस्कृतियों दास बनाने वाले मजहब हैं|

अब्रह्मी संस्कृतियों के रहते धरती का प्रत्येक व्यक्ति दास बन कर ही जीवित रह सकता है|

अब्रह्मी संस्कृतियाँ अपने अनुयायियों को भी उपासना की आज़ादी नहीं देतीं.

दास बनाने की अनूठी विधि मनुष्य को वीर्यहीन करना है|

मुसलमान वैदिक सनातन धर्म को सहन नहीं कर सकता, लेकिन काफ़िर को इस्लाम अपनाने के लिये विवश करता है|

इस्लाम का अविष्कार काफिरों की धरती, धन और धर्म छीनने के लिये किया गया है|

१९४५ में नाजीवाद और १९८९ में साम्यवाद मिटा| २०१४ में इस्लाम के मिटने की बारी है|

इस्लामीकरण की समाप्ति स्वतंत्रता की पहली सीढ़ी है|

ईसा के बाप का पता नहीं है| फिर भी ईसा जेहोवा का एकलौता पुत्र है! खुद को शूली पर चढने से बचा न पाया फिरभी सबका मुक्ति दाता है|

जेहोवा और अल्लाह मनुष्य को वीर्यहीन क्यों बनाते हैं?

क्यों कि वैदिक सनातन धर्म मनुष्य को वीर्यहीन कर दास नहीं बनाता| अतएव धर्म का प्रतीक मंदिर नहीं रह सकता|

गांधी अंग्रेजों का भयाक्रांत कठपुतली था. मानवजाति की समस्या गांधी नहीं अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं. अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी मूर्ख हैं.

 

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मूसा (बाइबल, उत्पत्ति १७:११) और मुहम्मद ने वीर्य हीनता को मानवजाति के सर्वनाश के स्तर तक महिमामंडित कर दिया है. अनैतिक पुत्र ईसा को जन्म देने वाली मरियम पूजनीय है और ईसा यहोवा का घोषित एकलौता पुत्र है| मानवमात्र को पापी घोषित कर रखा है. स्वयं शूली पर चढ़ने से न बचा सका फिर भी सबका मुक्तिदाता है|

जिसके आराध्यदेव ईसा के बाप का ही पता नहीं है, जिसके मजहब के घर-घर में कुमारी माताएं मिलती हैं और जो स्वयं जार्ज यानी जारज (जिसके बाप का पता नहीं होता, उसे जारज कहते है) है वह आप के संतों को रोज यौन शोषण में प्रताड़ित करा रही है|

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकताईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उन के उपासना की स्वतंत्रता छीनते हैं? धूर्त मूसा रचित बाइबल के महामूर्ख जेहोवा और धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

इनके विपरीत वेद का कथन है,

अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या|

तस्यां हिरण्ययः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः||

अथर्ववेद;१०.२.३१.

अर्थ - (अष्टचक्रा, नव द्वारा अयोध्या देवानां पूः) आठ चक्र और नौ द्वारों वाली अयोध्या देवों की पुरी है, (तस्यां हिरण्ययः कोशः) उसमें प्रकाश वाला कोष है , (स्वर्गः ज्योतिषा आवृतः) जो आनन्द और प्रकाश से युक्त है|

अब्रह्मी संस्कृतियों और शासकों की मानसिकता वर्चस्व स्थापित करने की है, जिसकी पूर्ति वे मानवमात्र को वीर्यहीन कर कर रही हैं| क्योंकि दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, वीर्यहीन करना|

       और ईश्वर ने, यहूदी, ईसाई, मुसलमान सहित मनुष्य को जन्म के साथ ही वीर्य के रुप में अपनी सारी शक्ति दी है। खतना वीर्यहीन करता है|

       जो भी अब्रह्मी संस्कृतियों का समर्थक है, मानव जाति का शत्रु है| वह जीवित नहीं बचेगा!

Your Request/Grievance Registration Number is : PRSEC/E/2013/17648

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016य.

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पहली जनवरी खतना दिवस है, नयावर्ष नहीं. नहीं मानते? तो नीचे की लिंक क्लिक कीजिए.

https://en.wikipedia.org/wiki/Circumcision_of_Jesus

 

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पढ़ो विद्वानों पढ़ो! हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी मोहम्मद का विरोध राष्ट्रद्रोह है.

http://www.aryavrt.com/fatwa

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रेड इंडियन के बाद ब्लैक इंडियन उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ के निशाने पर.

http://www.aryavrt.com/muj15w52-kmlesh-vs-muhammad

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स्थिति स्पष्ट कीजिए. इंडिया स्वतंत्र है या ब्रिटेन का उपनिवेश?

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

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Unable to Add This Friend

Sandeep Pandey

kanpur graamin adhyax vyapar mandal at जिला अध्यक्ष

 

 

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यति श्री नरसिम्हानन्द जी को प्रणाम!

मुझे कमलेश तिवारी पर देवबंद में पंजीकृत FIR की प्रति चाहिए.

मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है और धरती के सभी मस्जिदों को ध्वस्त करवाना चाहता हूँ.

भारतीय दंड संहिता की धारा ९९ के अधीन मैं सरकारों से अपने प्राणरक्षा की सदैव मांग करता रहा हूँ. जिसके कारण मेरे विरुद्ध अबतक ५० अभियोग चले, ३ आज भी लम्बित हैं.

कमलेश तिवारी के नेतृत्व में मैं भी काशी के ज्ञानवापी मस्जिद का विरोध करने के कारण जेल में बंद रहा हूँ.

सुना है, कि अभियोग भारतीय दंड संहिता की धारा २९५ के अधीन के अधीन पंजीकृत हुआ है, जो अब जमानती अभियोग है. रासुका किस आधार पर लगी है? यह भी पता लगाएं.

१८ वर्ष से कम आयु के बच्चों की एक सेना का गठन करें. अज़ान ईशनिंदा है. ईशनिंदा के अपराध में ही कमलेश तिवारी पर मौत के फतवे जारी हुए हैं. मस्जिद, जहां से काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा की जाती है, उन्हें नष्ट करने के लिए अफरोज का स्थान लेंगे.

 

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http://www.aryavrt.com/muj15w51by-sgbkm-15d23

 

एलिजाबेथ ने महामहिम नाइक जी का मनोनयन उपनिवेश विरोधी को Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड दिलाने के लिए कराया है. यानी उपनिवेशवासियों कि दासता पक्की.

कमलेश तिवारी के नेतृत्व में मैं भी कशी के ज्ञानवापी मस्जिद का विरोध करने के कारण जेल में बंद रहा हूँ.

%%%

 

पोषण व संवर्धन

 

यह हिंदुस्तान नहीं, यह इंडिया दैट इज भारत है. नहीं विश्वास करते, तो भारतीय संविधान को पढ़ लीजिए.

अज़ान को पंथनिरपेक्ष पूजा मानने की भूल कर रहे हैं.

काफ़िर मस्जिदों से अज़ान (ईशनिंदा) और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे क्यों होने दे रहे हैं?

 

कुरान काफ़िर को अपराधी मानता है और बाइबल गैर-ईसाई को| किसी को इस बात की लज्जा नहीं है कि उसका शासक व पैगम्बर खूनी, शांति का शत्रु, लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) व नारियों के लूट और बलात्कार का समर्थक (कुरान २३:६ व ७०:३०) है|

महामहिम प्रणब दा और जेसुइट एलिजाबेथ सत्ता के शिखर पर बैठे हैं| हद तो यहाँ तक आ पहुंची है कि किसी को भी कुरान व बाइबल के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का अधिकार न इस्लाम (कुरान ५:१०१-१०२) व ईसाइयत देते हैं, न लोकतंत्र (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६) और न न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान प्रायोजित व संरक्षित है|

मनुष्य निर्मित मजहबों को अपराधों के साथ घालमेल कर और स्वयं को शैतानों जेहोवा और अल्लाह का मध्यस्थ बताने वाले धूर्त पैगम्बरों को जजों व राज्यपालों (भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५९) ने पूज्य बना रखा है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). सदाबहार झूठे, देश हत्यारे गांधी को बाप बना रखा है| हजारों निरपराध उपनिवेशवासियों की प्रतिदिन हत्याएं, लूट व नारियों का बलात्कार ईमाम, पुरोहित व शासक से धन ऐंठ कर मीडिया के इस उद्घोषणा के साथ जारी है कि अब्रह्मी संस्कृतियां शांति और प्रेम के मजहब हैं|

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान के अस्तित्व में रहते मानवजाति बच नहीं सकती.

अप्रति

 

२३/१२/१५

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ईसाइयत और इस्लाम के, एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत राज्यपालों के द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेकर अनुच्छेद २९(१) से उत्प्रेरित, रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित, हठधर्मी सिद्धांत हैं.

उपनिवेशवासी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा घोषित अपराधी हैं ईसाइयों के यदि वे गैरईसाई हैं और मुसलमानों के भी यदि वे काफ़िर हैं। या तो वे मात्र अल्लाह की पूजा नहीँ करते हैं (कुरआन २१:९८ व नमाज) अथवा ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीँ करते हैं। (बाइबल, लूका १९:२७).

कौन है एलिजाबेथ, जिसकी चाकरी करने के लिए उपनिवेशवासी विवश हैं?

एलिजाबेथ की आस्था ईसा में है और उसकी एकमात्र पुस्तक बाइबल है, जिसके अनुसार, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७).

५३ ईसाई व मुसलमान उपनिवेशवासियों की मल्लिका जेसुइट एलिजाबेथ ने निम्नलिखित शपथ ली हुई है:-

 “… मै यह भी प्रतिज्ञा करती हूँ कि जब भी अवसर आएगा, मै खुले रूप में पंथद्रोहियों से, फिर वे प्रोटेस्टैंट हों या उदारवादी, पोप के आदेश के अनुसार, युद्ध करूंगी और विश्व से उनका सफाया करूंगी और इस मामले में मै न उनकी आयु का विचार करूंगी, न लिंग का, न परिस्थिति का| मै उन्हें फांसी पर लटकाऊंगी, उन्हें बर्बाद करूंगी, उबालूंगी, तलूंगी और (उनका) गला घोटूंगी| इन दुष्ट पंथ द्रोहियों को जिन्दा गाडून्गी| उनकी स्त्रियों के पेट और गर्भाशय चीर कर उनके बच्चों के सिर दीवार पर टकराऊँगी, जिससे इन अभिशप्त लोगों की जाति का समूलोच्छेद हो जाये| और जब खुले रूप से ऐसा करना सम्भव न हो तो मै गुप्त रूप से विष के प्याले, गला घोटने की रस्सी, कटार या सीसे की गोलियों का प्रयोग कर इन लोगों को नष्ट करूंगी| ऐसा करते समय मै सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के पद, प्रतिष्ठा, अधिकार या निजी या सार्वजनिक स्थिति का कोई विचार नहीं करूंगी| पोप, उसके एजेंट या जीसस में विश्वास करने वाली बिरादरी के किसी वरिष्ठ का जब भी, जैसा भी निर्देश होगा, उसका मै पालन करूंगी|”

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

उपनिवेशवासी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा घोषित अपराधी हैं ईसाइयों के यदि वे गैरईसाई हैं और मुसलमानों के भी यदि वे काफ़िर हैं। या तो वे मात्र अल्लाह की पूजा नहीँ करते हैं (कुरआन २१:९८ व नमाज) अथवा ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीँ करते हैं। (बाइबल, लूका १९:२७).

"परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (अविश्वासियों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे.

वोट देकर भी (बाइबल, लूका १९:२७), (कुरान २:१९१) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को दिया गया मानवमात्र की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार नहीं बदला जा सकता|

कौन है एलिजाबेथ, जिसकी चाकरी करने के लिए उपनिवेशवासी विवश हैं?

एलिजाबेथ की आस्था ईसा में है और उसकी एकमात्र पुस्तक बाइबल है, जिसके अनुसार, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७).

http://www.reformation.org/jesuit_oath_in_action.html

वोट देकर (बाइबल, लूका १९:२७), (कुरान २:१९१) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को दिया गया मानवमात्र की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार नहीं बदला जा सकता|

क्योंकि ईसा के आदेश से ईसाई अपनी बेटी से विवाह करते हैं| (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६)

जेहोवा ने किसी भी ईसाई को धरती के किसी नारी का उसके पुरुषों के आँखों के सामने, बलात्कार का अधिकार दिया है| (बाइबल, याशयाह १३:१६). (बाइबल, लूका २४:४४) के साथ पठित.

जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते, उसका घात करने का प्रत्येक ईसाई को अधिकार है. (बाइबल, लूका १९:२७). भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाई को अपनी इस संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

जो भी बपतिस्मा नहीं लेता, संसार को पापस्थल और सबको पापी स्वीकार नहीं करता, उसे नर्क में भेजने का ईसा का वचन है. जो लोग यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा नहीं लेते तो उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा और वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे और यह भी स्वीकार नहीं करते कि यदि वे बपतिस्मा ले लेंगे तो स्वर्ग जायेंगे और ईसा के साथ सदा रहेंगे| उनकी हत्या करना ईसाई के स्वर्ग प्राप्ति का सुगम मार्ग है.

 

 

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२२/१२/१५

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http://www.aryavrt.com/muj15w51-vishvke-upniveshvasiyonse

 

http://www.aryavrt.com/muj15w50-sgbkm-15d17

 

 

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आज सत्ता के शिखर पर वे ही लोग हैं, जिन्होंने देश के टुकड़े किये और कराए| वैदिक पंथियों के पूर्वजों का नरसंहार किया, नंगा कर माँ, बहन व बेटियों का जुलूस निकाला, उनको बाजारों में बेचा और बलात्कार किया; उन्हें इंडिया में मात्र रखा ही नहीं गया है, बल्कि उन्हें वे विशेष सुविधाएँ दी गई हैं, जो स्वयं वैदिक पंथियों को प्राप्त नहीं हैं|

मुसलमानों के तकिय्या, "हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं|"(?) के विभिन्नता में अज्ञानी वैदिक पंथी लोग भी सुर से सुर मिला कर कहते सुने जा सकते हैं, “सभी धर्म सृष्टि रचयिता ईश्वर तक पहुँचने के अलग अलग मार्ग हैं|” लेकिन यह सरासर झूठ है| अब्रह्मी संस्कृतियां पंथ हैं और दोनों अपने अनुयायियों को वीर्यहीन कर दास बनाने के घातक तन्त्र हैं| मैं इसकी विस्तृत चर्चा अन्यत्र करूँगा| देश की सत्ता के शिखर पर कैथोलिक ईसाई एलिजाबेथ भी है और मुसलमान हामिद भी! दोनों के भारतीय संविधान के

देश की सत्ता के शिखर पर कैथोलिक ईसाई एलिजाबेथ भी है और मुसलमान हामिद भी!

सृष्टि धर्म पर टिकी है और धर्म वेदों पर| वेदों को चरवाहों के गीत बताने वाली एलिजाबेथ आप को कत्ल करने (बाइबल, लूका १९:२७), आप का मांस खाने और लहू पीने के लिए (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से असीमित मौलिक अधिकार प्राप्त कर, सत्ता के शिखर पर बैठी, अपने द्वारा मनोनीत राष्ट्रपति प्रणब दा, प्रधान मंत्री मनमोहन, सभी राज्यपालों और जजों के माध्यम से आप के वैदिक सनातन धर्म को मिटा रही है|

 

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हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया| हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है| भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है| अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है|

मस्जिदों से काफिरों के नरसंहार की शिक्षा दी जा रही है| अब्रह्मी संस्कृतियों, चर्चों, बपतिस्मा, इमामों, मौलिवियों और मस्जिदों के विरुद्ध कोई नहीं बोल रहा है| इनके विरोध में कोई विडियो नहीं बनती है| मैं अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोधी हूँ|

मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईमाम प्रतिदिन ५ समय, नियमित रूप से, पूरे विश्व में, निर्विरोध अन्धाधुन्ध अविश्वासियों पर इस्लामी आक्रमण करते हैं और काफिरों के नरसंहार की शिक्षा देते हैं. .ओबामा में दम हो तो रोके| ईमाम क्या प्रचारित व प्रसारित करते हैं, को जानने के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है|

इंडिया में अब्रह्मी संस्कृतियों को ईसाई व मुस्लिम सहित सबको अपना दास बनाने अन्यथा कत्ल करने के लिए रखा गया है|

कसाब ने इस्लाम की हठधर्मी और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक अधिकार से नरसंहार किया है|

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने इंडिया में ईसाइयत और इस्लाम को मानवजाति को अधीन कर निर्दयतापूर्वक लूटने और नरसंहार के लिए रखा है. जब कि इन संस्कृतियों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं है|

इसलिए धरती पर अज़ान होना और मस्जिद रहना काफिरों के गले पर रखी हुई तलवार है| उपनिवेशवासियों को उपरोक्त सच्चाईयां बताने के कारण साध्वी प्रज्ञा अपने अन्य ८ सहयोगियों के साथ सन २००८ से बिना किसी आरोप के बंद हैं| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है| वे बारम्बार नार्को टेस्ट और जहरीली दवाएं खिलाये जाने के कारण अब कैंसर से भी पीड़ित हैं|

ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया के प्रथम दास उपनिवेशवासी प्रणब ने सीधे-सीधे स्वीकार कर लिया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) वैदिक सनातन धर्म के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता| प्रणब ने संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन संविधान और विधि के परिरक्षण, संरक्षण और की शपथ ली है, अतएव इंडिया के उपनिवेशवासी, विवश हो कर, अपनी नारियों को अब्रह्मी संस्कृतियों को सौंप चुके हैं| अपनी सम्पत्ति और पूँजी से अपना अधिकार गवां चुके हैं| एलिजाबेथ ने प्रणब दा का मनोनयन इंडिया के सारे उपनिवेशवासियों को एलिजाबेथ की भेंड़ बनाने के लिए किया है|

समस्या की जड़:

जज साहिब! आप ने राष्ट्रपति प्रणब दा के सामने भारतीय संविधान और कानूनों को बनाये रखने (uphold) की शपथ ली है| आप उपनिवेश इंडिया को स्वतंत्र इंडिया स्वीकार करने के लिए विवश हैं| अज़ान (ईशनिंदा) को पंथनिरपेक्ष पूजा की पुकार मानने के लिए विवश हैं| मस्जिद, जहां से काफिरों के नरसंहार की शिक्षा दी जाती है, को उपासना स्थल मानने के लिए विवश हैं| बिना प्रमाण आप कोई निर्णय नहीं करते - लेकिन आप यह स्वीकार कर चुके हैं कि विश्वास आधारित बाइबल और कुरान धर्मपुस्तक है और उस पर कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). आप ने उपनिवेशवासियों की सम्पत्ति के मौलिक अधिकार को लूट लिया है| आप ने अपने सम्पत्ति और पूँजी रखने के अधिकार को त्याग दिया है| अपनी नारियां और धरती अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों को सौंप रखी हैं| आप हज अनुदान और ईमामों को वेतन दिलवाते हैं|

मुसलमान या तो इस्लाम छोड़ें या इंडिया| वैसे भी मुसलमानों ने हिंदुओं के साथ न रह पाने के आधार पर पाकिस्तान लिया है|

काबा हमारा ज्योतिर्लिंग है| इसके अतिरिक्त पुरातत्व विभाग ने महरौली के क़ुतुब मीनार (विष्णु ध्वज) परिसर में एक बोर्ड लगाया है, जिसमे लिखा है कि परिसर में निर्मित मस्जिद का निर्माण २७ मंदिरों को तोड़ कर उनके मलबे से हुआ है| एलिजाबेथ सरकार और न्यायालय मस्जिदों को तोड़ कर हमारे २७ मंदिरों का निर्माण कराए| इसके अतिरिक्त सउदी सरकार से हमारे ज्योतिर्लिंग को परिसर में ३५९ मूर्तियों का निर्माण करा कर वापस कराए| इस विषय में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग में याचिका भी भेजी है|

पिक्थाल के कुरान में १७:८१ के टिपण्णी में स्पष्ट लिखा है कि काबा हमारा ज्योतिर्लिंग है| स्वर्गीय स्वामी वामदेव ने जामा मस्जिद को हमारा मंदिर बताया है| पुरातत्व विभाग जामा मस्जिद की खुदाई कराए| हमारे आचार्य मदन जी और पी० एन० ओक जी ने भी जामा मस्जिद पर बहुत कुछ लिखा है|

राष्ट्र को अस्थिर तो १९४७ को ही बना दिया गया| जब अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में छलपूर्वक पंथनिरपेक्ष घोषित कर रोक लिया गया था|

क्या एक काफ़िर किसी मुसलमान देश में अपना धर्म पालन कर सकता है?

मात्र यही लोग नहीं, आशाराम बापू, मुरारी बापू जैसे धर्मोपदेशक हिंदू मुस्लिम एकता की बात करते हैं। सर्वधर्म समभाव के सम्मेलन व यज्ञ करते हैं। इन्हें यह बात समझ नहीँ आती कि यदि आर्य जाति मिट गई तो इनके प्रवचन सुनने वाला कौन होगा? कौन कहने वाला मिलेगा, ‘सब धर्म समान हैं’; ‘हिंदू मुस्लिम भाई भाई हैं’; ‘भारत पंथनिरपेक्ष देश है’; ‘मजदूर का कोई मजहब नहीँ होता’ ‘हमें रोटी चाहिए मंदिर नहींऐसे बकवास पाकिस्तान और बंगलादेश में कोई नहीँ करता। इनके जैसे ही कतिपय गुरुओं और उपदेशकों, जिनमें ठाकुर बालक ब्रह्मचारी, का नाम उल्लेखनीय है, पर जब इस्लामी आक्रमण हुआ तो यह बाल बाल बचे और भाग कर भारत आ गए। इन्होंने अपने शिष्यों को बचाना तो दूर, यह उनकी सहायता भी न कर सके। अपमानित हो कर भी वे अपनी आदत से बाज न आए।

भारत आते ही उन्होंने ग्रामोफोन का रिकार्ड बनवा डाला जिसकी शुरुआत ही अल्लाहु अक्बरसे होती है। यह लोग गैर मुसलमानों को बताते हैं कि अल्लाह और ईश्वर एक हैं। राम ही रहीम हैं और कृष्ण ही करीम। अल्लाह और ईश्वर, राम और रहीम, कृष्ण और करीम का सहअस्तित्व पाकिस्तान, कश्मीर और बंगलादेश में सम्भव न हुआ। अल्लाह के ईश्वरीय आदेश से (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९) अल्लाह के अनुयायियों ने जिन्हें उनकी अपनी मातृभूमि से ठोकरें मार कर भगा दिया, उनकी आखों के सामने उनकी बहन बेटियों का बलात्कार किया, (कुरआन ४:२४ व २३:६) उनके दुधमुहें बच्चों को कत्ल किया और उनकी पुस्त दर पुस्त संचित संपत्ति को लूट लिया (कुरान ८:१, ४१ व ६९) वे ही लोग इन आतताइयों के गुणगान करते हैं। पाठक जी! आप ही बताएं इनसे बढ़कर आत्मघाती, राष्ट्रघाती और नीच व्यक्ति कौन हो सकते हैं?

काफ़िर समाज को इन शत्रुओं को अच्छी तरह परखना चाहिए। इनकी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। यह लोग इस्लाम परस्त हैं, जिसे मिटाया न गया तो काफ़िर जातियों का अस्तित्व मिट जाएगा। मात्र आर्य ही नहीँ स्वयं यह लोग यानी ईसाई व मुसलमान भी जीवित न बचेंगे। क्यों कि अभी यह निर्णय नहीँ हो सका है कि अल्लाह बड़ा है या जेहोवा? अभी यह लोग आर्य जाति और वैदिक संस्कृति को मिटाने के लिए एकजुट हुए हैं। जब आर्य मिट जायेंगे तब अब्रह्मी संस्कृतियों के बीच युद्ध होगा|

श्री कुलदीप नैयर शरणार्थी हैं। मेरे पत्रों के प्रतिवाद में कुछ भी लिखना आप लोग उचित नहीँ समझते। ऐसे पत्रों को आप गृहमंत्री और मुसलमानों के स्वसुर अडवाणी के पुलिस के पास भेजते रहे हैं। श्री कुलदीप नैयर ने लिखा है कि किसी भी बातचीत में विश्वास ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व होता है। लेकिन हमारे विश्वास को लोकतंत्र सदा से ठगता आया है। श्री कुलदीप नैयर का मूल निवास पाकिस्तान है। लेकिन यह व्यक्ति आज तक पाकिस्तान के गठन को विवादित नहीँ मानता। इस व्यक्ति को अपने मातृभूमि से तनिक भी लगाव नहीं। जो व्यक्ति अपने मातृभूमि का ही नहीँ वह हमारा क्या होगा? इसके विपरीत जो भी व्यक्ति पाकिस्तान को विवादित मानता है। उसे आप जेल भिजवाते हैं।

क्यों कि आप डाकुओं के अभयारण्य संसद में बैठते हैं। आप व यह व्यक्ति अज़ान और नमाज को अपराध नहीँ मानते। पाकिस्तान गांधी की लाश पर बन रहा था। आज वही व्यक्ति जिसने पाकिस्तान बनवाया और उसे ५५ करोड़ रूपए इनाम दिलवाया, आप का राष्ट्रपिता है! यह समझ में नहीँ आता कि आप लोगोँ को हमारी वल्दियत तय करने व हमारी माताओं को ब्यभिचारिणी घोषित करने का अधिकार कहां से मिल गया?

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अब्रह्मी संस्कृतियों और उनके अनुयायियों को धरती पर रहने का अधिकार नहीं है| क्यों कि ईसाइयों को अर्मगेद्दन द्वारा ईसा का साम्राज्य स्थापित करने के लिए गैर-ईसाइयों का नरसंहार करना है

https://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

क्या केजरीवाल इस्लाम, मस्जिद और अज़ान के विरुद्ध भी आवाज बुलंद करेंगे?

आज के वैदिक पंथियों की भांति यहूदी एक कमजोर कौम थी

वैदिक सनातन संस्कृति और यहूदी धर्म में वैसे तो कोइ समानता नहीं, लेकिन फिर भी आज दोनों धर्म समान धरातल पर खड़े दिखते हैं. यहूदी धर्म से जहां इस्लाम और इसाइयत दोनों का ही उद्भव हुआ, वहां वैदिक सनातन संस्कृति तो खुद ही बहुत सारे धर्मों का समागम है, और भी कई दूसरे धर्मों का जन्म उससे हुआ.

दोनों ही धर्म पुराने हैं लेकिन जहां यहूदी धर्म अब धरातल से लगभग मिट चुका है (इसके सिर्फ 1 करोड़ बीस लाख मानने वाले ही दुनिया में हैं) वहां वैदिक सनातन संस्कृति अब भी प्रबल रूप से जीवित है (लगभग एक अरब मानने वाले). दोनों ही धर्म अब मुख्य रूप से एक राष्ट्र में सिमट चुके हैं और दोनों पर ही अब्रामिक धर्म (इस्लाम और इसाइयत) की टेढ़ी नजर है|

दोनों ही धर्मों का जोर प्रसार और लोगों को अपने धर्म में शामिल करने पर नहीं है.

किसी जमाने में यहूदी बेहद कमजोर कौम हुआ करती थी. यह कौम पूरे युरोप में बिखरी हुई थी और अमेरिका में अपना प्रभाव बनाना शुरु ही किया था. संख्या में कम, लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न और पढ़े-लिखे लोगों की यह कौम बहुत से ईसाइयों की आंखों में खटकती थी. पूर्वाग्रह की हद क्या होगी - यह इससे ही समझ सकते हैं कि शेक्सपीयर तक ने अपने नाटक मर्चेन्ट आफ वेनिस में यहूदी व्यापारीयों को खुल कर कोसा था. याद है आपको शाइलॉक? ये भी याद करिये कि जोर उसके उस खास वर्ग के होने पर बहुत था.

असल में ईसाइयत का यहूदियों से पुराना बैर है, उनके नबी (जीसस) को भी आखिर यहूदियों के कहने पर ही शूली पर चढ़ाया गया था. बहुत दिनों तक ईसाई यहूदियों द्वारा दमित भी रहे, लेकिन रोमन राजा के ईसाई धर्म अपनाने के बाद ईसाइयत का जोर युरोप में जो हुआ वह अब तक चालू है. धीरे-धीरे यहूदी और युरोप के बाकी धर्म हाशिये पर चले गये. यहूदी भी इस नई व्यवस्था में मिल गये. अब वह न शासक रहे न शोषक, वर्ण व्यवस्था में भी उनका स्थान दोयम था, लेकिन अपनी मेहनत लगन और अक्ल से वह समाज में आगे रहे.

लेकिन उनके पास न सामरिक शक्ति थी, ना राजनैतिक, और यह बात उन्हें बहुत महंगी पड़ी. द्वितीय विश्वयुद्ध में ३० लाख यहूदियों को हिटलर और दूसरे यहूदी विरोधियों ने मार दिया और यहूदी कुछ नहीं कर पाये. यहूदी एक कमजोर कौम थी जिसपर जो चाहे, जैसा चाहे अत्याचार कर सकता था. हिटलर ने यहूदियों को शहर से दूर अलग इलाकों में रहने पर मजबूर किया, और हर यहूदी को अपनी पहचान के लिये खास मार्क पहनना होता था (स्टार) जिस तरह आज तालिबानी पाकिस्तानी में इस्लाम को न मानने वालों को पहनना होता है.

यहूदियों ने बुरे दिन पहले भी देखे थे, लेकिन हर बार वो आगे बढ़ गये और पुराने दुख भूलते गये. लोगों को यहूदियों की यह कमजोरी लगी व उन्होंने इसे कायरता समझा. ईसाई व मुसलमान समाज में यह बात प्रचलित थी कि यहूदी में हिम्मत नहीं होती. वह डरपोक होता है. जबर मुस्लिम और ईसाई दोनों ही इस कमजोर कौम को दबा-कुचल कर खुश थे.

क्यों कि यहूदियों ने एक भी युद्ध नहीं लड़ा?

क्यों कि उनकी कोई सेना नहीं थी?

सब के सब यहूदी गैर सैनिक निवासी थे जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध में पकड़-पकड़ कर मारा गया, उनके साथ कैम्पों में अमानवीय व्यवहार किया गया और गैस चैम्बरों में भर कर उन का नरसंहार किया गया.

बिना युद्ध लड़े एक कौम के ३० लाख लोगों की हत्या!

जो उस समय कुल यहूदी जनसंख्या की आधी थी!

मतलब एक कौम को आधा साफ कर दिया गया!

जिन कमजोर और बेबस यहूदियों को इतनी आसानी से मौत दी गई आज वह कहा हैं?

उनका प्रभुत्व अमेरिका की राजनीति पर है.

दुनिया का हर रैडिकल यहूदियों के नाम से कांप उठता है.

यहूदी लड़ाके दुनिया में सबसे ज्यादा खतरनाक हैं.

यहूदियों के अस्त्र-शस्त्र बहुत उन्नत हैं.

आज यहूदी ऐसी जगह रहते हैं जहां वो हर तरफ से दुश्मनों से घिरे हैं. फिर भी उनका वजूद प्रबल है. उनका हर दुश्मन उनसे घबराता है और उनके आगे पानी मांगता है.

क्यों?

क्योंकि ३० लाख लोगों को खोने के बाद यहूदियों ने फैसला किया

दोबारा कभी नहीं.

यही उनकी जीवनशैली है दोबारा कभी नहीं!

आज के यहूदियों में मुझे कल के हिन्दुओं का चेहरा दिखाई देता है.

क्योंकि दुनिया में यह भी इतने ही अकेले हैं - जितने कि यहूदी. रैडिकल इस्लाम और ईसाइयत का जितना दबाव हिन्दुओं पर बढ़ रहा है उसकी वजह से वैदिक सनातन संस्कृति ने जो राह पकड़ी है वह शायद उसी मोड़ पर रुकेगी जिस पर आज यहूदी हैं|

चूंकि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) और उसके संरक्षण, पोषण व संवर्धन की शपथ लेने वाले एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत बनवारी की काफ़िरों के नरसंहार

वस्तुतः मुज़फ्फरनगर दंगे के उत्तरदाई भारतीय संविधान, कुरान, एलिजाबेथ, राष्ट्रपति और राज्यपाल बनवारी हैं| मुसलमानों ने तो अपने अधिकारों का उपयोग किया है| जब तक ईसाइयत, इस्लाम, भारतीय संविधान और लोकतंत्र का अस्तित्व रहेगा, अविश्वासियों का नरसंहार नहीं रोका जा सकता|

भारतीय संविधान का संकलन अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों के नरसंहार व सबको अपना दास बनाने के लिए किया गया है|

जिन लोगों ने नरसंहार किया वे इंडिया में क्यों हैं? सवाल क्यों नहीं उठाते?

अज़ान क्यों होगी और मस्जिद क्यों रहेंगे? सवाल क्यों नहीं उठाते?

व्यास और बाल्मीकि कौन थे? हम उनको सम्मान देते हैं| अब्रह्मी संस्कृतियाँ तो मानवता का नरसंहार करती हैं!

अब्रह्मी संस्कृतियों से निकृष्ट सोच वाला कौन हो सकता है?

क्या मुसलमान को मालूम है कि

मुहम्मद ने अपना पैशाचिक इस्लाम तमाम गज़वों द्वारा फैलाया| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और कुरान के सहयोग से उनका जिहाद दिन दूना रात चौगुना फल फूल रहा है| अब्रह्मी संस्कृतियों ने हमारे पूर्वजों का नरसंहार किया| नारियों का बलात्कार किया| धर्मान्तरण किया और कर रहे हैं|

लेकिन एनआईए सहित मीडिया, न्यायपालिका और सरकार को भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत हमारा प्राइवेट प्रतिरक्षा का प्रयत्न भगवा आतंक दिखाई दे रहा है!

राजदीप काफ़िरों के नरसंहारक मुसलमानों के लूट, हत्या, बलात्कार और धर्मान्तरण के अधिकारों की रक्षा के लिए गोधरा कांड के बाद से ही माननीय प्रधानमंत्री नमो को अपमानित कर रहे हैं. राजदीप बताएं कि क्या मानवजाति मुसलमानों के हाथों अपना गला कटा ले?

पहले नाजी यहूदियों को कत्ल करने लगे, मैंने विरोध नहीं किया क्यों कि मैं यहूदी नहीं था. तब कैथोलिकों का कत्ल करने लगे, मैंने विरोध नहीं किया क्यों कि मैं कैथोलिक नहीं था... तब नाजी मुझे कत्ल करने आये लेकिन तब तक विरोध करने के लिए कोई नहीं बचा था.जर्मन पास्टर मार्टिन निएमोलर हिटलर नरसंहार के दौरान.

एलिजाबेथ को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने की ईसा की आज्ञा (बाइबल, लूका १९:२७) व संवैधानिक असीमित मौलिक अधिकार है, {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)}, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया| हमें इसी अपराध के लिए ई० सन १८५७ से ही दंडित किया जा रहा है| भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है| इस का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है| अब्रह्मी संस्कृतियों को हमारी हत्या का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने दिया है और जजों ने अपनी स्वीकृति दी है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव हमारे किसी समस्या का समाधान नहीं है. चुनाव द्वारा आप भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) को नहीं बदल सकते|

गांधी ने देश के उपनिवेशवासियों को बेंच कर ब्रिटेन के उपनिवेश का दास बना दिया है.

अब्रह्मी संस्कृतियों से मानवजाति के अस्तित्व को संकट है.

आप हमें किस बात की बधाई दे रहे हैं! इंडिया को हत्यारों के हाथों सौंपने की? देश के बंटवारे की? नरसंहार की? या नारियों के बलात्कार की? क्या आप परिणाम को जानते हैं?

देश के टुकड़े कराए| नारियों का बलात्कार कराया और अब्रह्मी संस्कृतियों को शरण, संरक्षण और धर्मान्तरण का अधिकार दिया|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृतियों को शरण, संरक्षण और धर्मान्तरण का अधिकार दिया है|

गांधी के कांग्रेस ने इंडिया में दो आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन संरक्षण देकर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का असीमित मौलिक अधिकार दिया है|

भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है| अनुच्छेद २९(१) का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है| जब तक एलिजाबेथ का रोम राज्य स्थापित नहीं हो जाता, सभी को मिटाया जायेगा| चाहे हिंदू मरे या मुसलमान अन्ततः ईसा का शत्रु मारा जायेगा|

उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

गांधी और माउंटबेटन मिलकर मानवजाति का नरसंहार और नारियों का बलात्कार कराते रहे.

अफजल हो या कसाब, सभी एलिजाबेथ के सहयोगी हैं| अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है| जब तक एलिजाबेथ का रोम राज्य स्थापित नहीं हो जाता, सभी को मिटाया जायेगा| चाहे हिंदू मरे या मुसलमान अन्ततः ईसा का शत्रु मारा जायेगा| यदि मीडिया देश और अपना (मीडिया का) भला चाहे तो भारतीय संविधान को मिटाने में आर्यावर्त सरकार की मदद करे|

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भारतीय संविधान, के अनुच्छेद २९(१) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ली है| राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं| उद्धरण नीचे है,

भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|”

भारतीय संविधान, के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ली है| राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं| उद्धरण नीचे है,

मरना कोई नहीं चाहता| अल्लाह आप को जीने का अधिकार नहीं देता| अगर आप को इस्लाम को मिटाना है तो लोगों को मात्र इतना सत्य बताइए कि अज़ान और मस्जिद रहे तो काफ़िर जीवित नहीं बच सकते|

पुलिस की भूमिका शून्य है| राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन संविधान के अनुच्छेद २९(१) के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की शपथ वेदिक सनातन संस्कृति को मिटाने

सोनिया जिसने भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है, मानव मात्र का शत्रु है, यहाँ तक कि ईसाई व मुसलमान को भी जीवन, सम्पति, मंदिर, उपासना और स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है| धरती की किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती| महामहिम राज्यपाल ने आप के इन्हीं हत्यारों, लुटेरों, आप की आस्था का अपमान करने वालों और नारियों के बलात्कारियों के अधिकारों के रक्षा की शपथ ली है| (भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५९). आप के पास प्राइवेट प्रतिरक्षा (भारतीय दंड संहिता की धाराएँ १०२ व १०५) का अधिकार भी राज्यपाल के अधीन है| राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अज़ान द्वारा आप को गाली दिलवाने के लिए विवश हैं| आप को अपने वैदिक सनातन धर्म की रक्षा का कोई अधिकार नहीं है|

क्या मस्जिद और अज़ान बंद नहीं होने चाहियें?

क्या मस्जिद, अज़ान, नमाज़ और खुत्बों के विरोधियों को मिटाने वाले उपरोक्त अनुच्छेद १५९ व ६० और धारा १९६ समाप्त नहीं होने चाहियें?

हमें कत्ल करने से मुसलमान को जन्नत मिलेगी और हमारी नारियों का बलात्कार करने से हूरें. मुसलमान अपने ही भाइयों का अल्लाह हो अकबर कह कर गला काट रहा है. नारियां नीलाम हो रही हैं. 

दोनों के एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत राज्यपाल के द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेकर

अनुच्छेद २९(१) से रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित

एलिजाबेथ के उपनिवेश इंडिया को पद, प्रभुता और पेट के लोभ में सभी आज भी धोखा देने के लिए विवश हैं|

बेचारे लोकसेवक पद, प्रभुता और पेट के लिये नसबंदी करवा कर दास बनते हैं और अपनी ही संस्कृति को मिटाने के लिये विवश हैं|

क्या मस्जिद, अज़ान, नमाज़ और खुत्बों के विरोधियों को उत्पीड़ित करने वाले उपरोक्त अनुच्छेद १५९ व ६० और धारा १९६ समाप्त नहीं होने चाहियें? कृपया बताएं, ईसाइयत और इस्लाम धरती पर क्यों हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन राष्ट्रपति और अनुच्छेद १५९ के अधीन प्रत्येक राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेता है, “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|”

एलिजाबेथ के दास महामहिम केशरीनाथ त्रिपाठी जी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन अब्रह्मी संस्कृतियों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की शपथ ली है. उपनिवेशवासियों की रक्षा नहीं कर सकते. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ली है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

मनुष्य निर्मित मजहबों को अपराधों के साथ घालमेल कर और स्वयं को शैतानों जेहोवा और अल्लाह का मध्यस्थ बताने वाले धूर्त पैगम्बरों को जजों {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८} व राज्यपालों (भारतीय संविधान का अनुच्छेद १५९) ने पूज्य बना रखा है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). सदाबहार झूठे, देश हत्यारे पाकपिता गाँधी को बाप बना रखा है| हजारों निरपराध उपनिवेशवासियों की प्रतिदिन हत्याएं, लूट व नारियों का बलात्कार ईमाम, पुरोहित व शासक से धन येंठ कर मीडिया के इस उद्घोषणा के साथ जारी है कि अब्रह्मी संस्कृतियों शांति और प्रेम के मजहब हैं|

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं.

ठीक उल्टे अपने पद, प्रभुता व पेट के लोभमें आप, राज्यपाल बनने के पूर्व, भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

महामहिम एलिजाबेथ के भाड़े के आतंकवादी हैं| महामहिम ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की शपथ ली है| एलिजाबेथ ने मानवजाति को मिटाने के लिए महामहिम को मौत के फंदे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देने के लिए विवश कर दिया है|

ठीक उल्टे अपने पद, प्रभुता व पेट के लोभमें आप, राज्यपाल बनने के पूर्व, भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

 

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मानव जाति को खतरा भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से है|

वे हठधर्मी सिद्धांत हैं,

"परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९).

स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा|

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

ईसाइयों और मुसलमानों को अल्पसंख्यक घोषित करके १९४७ से इंडिया में रोक लेना ही मानवजाति को मिटाने के लिए पर्याप्त है|

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मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का फतवा देने वाले मूर्ख मुसलमान (कुरान २:३५), वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर का, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन, राष्ट्रपति/राज्यपाल द्वारा दिए गए संरक्षण में, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध करते हुए, हमारे कर के वेतन से अज़ान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान करते हैं और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे देते हैं. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६)

http://intellibriefs.blogspot.in/2005/02/imam-and-shankaracharya-not-rule-of.html#

 

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मालेगांव और मक्का के लिए बेचैनी क्यों?

पाक में कट्‌टरपंथी व उदारपंथी में कोई खास भेद नहीं

"पाकिस्तान के शहर कराची में कठोर ईशनिंदा कानून को बनाए रखने के लिए इस रविवार को एक विशाल रैली हुई, जिसमें करीब ५० हजार से अधिक लोग शामिल हुए। ये सब नारे लगा रहे थे और हाथ में बैनर व तख्तियां लिए हुए थे,जिन पर लिखा था मुमताज कादरी हत्यारा नहीं हीरो है’, ‘हम उसके साहस को सलाम करते हैं’, आदि आदि। इस रैली में पाकिस्तान के सभी प्रमुख धार्मिक पार्टियों व संगठनों ने भाग लिया था, जिनमें उदारपंथी और कट्‌टरपंथी दोनों शामिल थे। दोनों एक स्वर में ईशनिंदा कानून को नरम बनाने के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इस कानून में संशोधन की मांग करने वाले पीपीपी के नेता व पंजाब प्रांत के राज्यपाल सलमान तासीर की हत्या के कुछ दिन बाद ही हुई इस तरह की रैली से पाकिस्तान सरकार घब़डा गयी है। प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने फौरन बयान जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार का ईशनिंदा कानून में संशोधन का कोई इरादा नहीं है।"

इसके साथ ही यह खबरें भी आ रही हैं कि पाकिस्तानी हिन्दुआें में धर्मपरिवर्तन कि क्रिया तेज हो गयी है। पाकिस्तान में सुरक्षापूर्वक जीवन जीने के लिए आवश्यक हो गया है कि लोग इस्लाम कबूल कर लें। अभी जिस ईसाई महिला आशिया बीबी को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा दी गयी है, उसके परिवार पर भी धर्म बदल लेने का भारी दबाव है। स्वयं आशिया बीबी की हत्या के लिए भारी इनाम दिये जाने की घोषणा की गयी है। आशिया बीबी का परिवार अपने गांव में अकेला ईसाई परिवार है,इसलिए उस पर और अधिक खतरा है।

इमामों के संगठन के एक नेता करीम मोहम्मद सलीम ने कहा है कि यदि ईशनिंदा (ब्लैसफीम लॉ) कानून के अंतर्गत किसी को पहले सजा दी जाती है और फिर यदि उसे माफ कर दिया जाता है, तो हम भी कानून हाथ में लेंगे, जो मन चाहे करेंगे। किसी कानून का अर्थ क्या यदि उसके तहत हुए फैसले को कोई सत्ता प्रमुख किसी दबाव में आकर बदल दे। अब इस तरह की देशव्यापी प्रतिक्रिया को देखते हुए आशिया बीबी के लिए माफी मिलना तो बहुत मुश्किल हो गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के निकटवर्ती सूत्रों के अनुसार पहले वह आशिया को माफी दे देने के पक्ष में थे, लेकिन अब वह शायद ही ऐसा साहस कर सकें। पाकिस्तान सरकार के धार्मिक मामलों के मंत्री ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार ईशनिंदा कानून के संदर्भ में किसी के साथ किसी तरह की नरमी बरतने के लिए तैयार नहीं है। अब इस स्थिति में सहज ही कल्पना की जा सकती है कि पाकिस्तान इस २१वीं शताब्दी के दूसरे दशक में किस दिशा में ब़ढ रहा है। आश्चर्य है कि अब वहां के नरमपंथी अपनी पहचान खो रहे हैं और कट्‌टरपंथियों के स्वर में अपना स्वर मिलाने लगे हैं

इस्लापमाबाद| पाकिस्ताथन ने अमेरिका में पवित्र कुरान जलाए जाने की घटना को घिनौना कृत्य’’ करार देते हुए इस मुद्दे को संयुक्ता राष्ट्रा में उठाया है। पाकिस्ता न ने अनुरोध किया है कि इस्लाकम को लेकर लोगों के बीच बढ़ते डर को देखते हुए धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए तत्काैल कदम उठाए जाएं। पाकिस्तािनी राजदूत अब्दु ल्लाक हुसैन हारून ने संयुक्तद राष्ट्र  महासचिव बान की मून को लिखे पत्र में कहा है कि इस घटना से मुसलमानों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। अमेरिका में फ्लोरिडा के एक चर्च के पादरी टेरी जोन्स ने अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमलों के विरोध में गत रविवार को कुरान की प्रति जलाई। ईरानियनवेबसाइट के मुताबिक इस पर एक संगठन ने फतवा जारी करते हुए जोन्सव के कत्ल  पर 22 लाख डॉलर का ईनाम भी रख दिया है। पाकिस्ता न के विदेश मंत्रालय ने इस्ला माबाद में जारी एक बयान में कुरान जलाने की घटना को घिनौना कृत्यिकरार दिया है। विदेश राज्यल मंत्री हिना रब्बा नी खार ने कहा, ‘ इस तरह के निंदनीय कृत्यक सिर्फ चरमपंथी ही कर सकते हैं। ऐसे कृत्य  से मुसलमानों और दुनिया भर के लोगों के बीच नफरत फैलेगी।

राष्ट्र्पति आसिफ अली जरदारी ने भी कुरान जलाए जाने की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जरदारी ने कहा, ‘पाकिस्ताटन की अवाम और यहां की सरकार की तरफ से मैं फ्लोरिडा में कुरान जलाए जाने की घटना की कड़े शब्दोंक में निंदा करता हूं।अमेरिका की ओर से अभी तक मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

हालांकि पिछली बार की तरह इस बार पादरी को मीडिया में ज्याओदा तूल नहीं दिया गया। पिछले साल सितंबर में इस पादरी ने जब पहली बार कुरान की प्रतियां जलाने की घोषणा की थी तो दुनिया भर में इसकी कड़ी निंदा हुई जिसके बाद इसने ऐसा करने की अपनी योजना टाल दी थी।

डव वर्ल्ड  आउटरीच सेंटर से जुड़े इस पादरी ने चर्च की वेबसाइट पर कुरान जलाने की तारीख का ऐलान किया। पिछले रविवार को गैंसविले चर्च में जोंस जब इस घटना को अंजाम दे रहा था तो पूरा चर्च परिसर अदालत में तब्दीकल हो गया था। इसमें बचाव पक्ष के वकील, अभियोजक, गवाह और खुद जज की भूमिका में जोंस था।

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी आतंकी संगठन जमात-उद-दावा [जेयूडी] ने मंगलवार को अमेरिकी पादरी टेरी जोंस की हत्या पर 10 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की। जोंस उन दो पादरियों में शामिल हैं, जिन्होंने रविवार को अमेरिका में कुरान को जलाया था।

मालेगांव और मक्का के लिए बेचैनी क्यों?

पाक में कट्‌टरपंथी व उदारपंथी में कोई खास भेद नहीं

"पाकिस्तान के शहर कराची में कठोर ईशनिंदा कानून को बनाए रखने के लिए इस रविवार को एक विशाल रैली हुई, जिसमें करीब ५० हजार से अधिक लोग शामिल हुए। ये सब नारे लगा रहे थे और हाथ में बैनर व तख्तियां लिए हुए थे,जिन पर लिखा था मुमताज कादरी हत्यारा नहीं हीरो है’, ‘हम उसके साहस को सलाम करते हैं’, आदि आदि। इस रैली में पाकिस्तान के सभी प्रमुख धार्मिक पार्टियों व संगठनों ने भाग लिया था, जिनमें उदारपंथी और कट्‌टरपंथी दोनों शामिल थे। दोनों एक स्वर में ईशनिंदा कानून को नरम बनाने के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इस कानून में संशोधन की मांग करने वाले पीपीपी के नेता व पंजाब प्रांत के राज्यपाल सलमान तासीर की हत्या के कुछ दिन बाद ही हुई इस तरह की रैली से पाकिस्तान सरकार घब़डा गयी है। प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने फौरन बयान जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार का ईशनिंदा कानून में संशोधन का कोई इरादा नहीं है।"

इसके साथ ही यह खबरें भी आ रही हैं कि पाकिस्तानी हिन्दुआें में धर्मपरिवर्तन कि क्रिया तेज हो गयी है। पाकिस्तान में सुरक्षापूर्वक जीवन जीने के लिए आवश्यक हो गया है कि लोग इस्लाम कबूल कर लें। अभी जिस ईसाई महिला आशिया बीबी को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा दी गयी है, उसके परिवार पर भी धर्म बदल लेने का भारी दबाव है। स्वयं आशिया बीबी की हत्या के लिए भारी इनाम दिये जाने की घोषणा की गयी है। आशिया बीबी का परिवार अपने गांव में अकेला ईसाई परिवार है,इसलिए उस पर और अधिक खतरा है।

इमामों के संगठन के एक नेता करीम मोहम्मद सलीम ने कहा है कि यदि ईशनिंदा (ब्लैसफीम लॉ) कानून के अंतर्गत किसी को पहले सजा दी जाती है और फिर यदि उसे माफ कर दिया जाता है, तो हम भी कानून हाथ में लेंगे, जो मन चाहे करेंगे। किसी कानून का अर्थ क्या यदि उसके तहत हुए फैसले को कोई सत्ता प्रमुख किसी दबाव में आकर बदल दे। अब इस तरह की देशव्यापी प्रतिक्रिया को देखते हुए आशिया बीबी के लिए माफी मिलना तो बहुत मुश्किल हो गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के निकटवर्ती सूत्रों के अनुसार पहले वह आशिया को माफी दे देने के पक्ष में थे, लेकिन अब वह शायद ही ऐसा साहस कर सकें। पाकिस्तान सरकार के धार्मिक मामलों के मंत्री ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार ईशनिंदा कानून के संदर्भ में किसी के साथ किसी तरह की नरमी बरतने के लिए तैयार नहीं है। अब इस स्थिति में सहज ही कल्पना की जा सकती है कि पाकिस्तान इस २१वीं शताब्दी के दूसरे दशक में किस दिशा में ब़ढ रहा है। आश्चर्य है कि अब वहां के नरमपंथी अपनी पहचान खो रहे हैं और कट्‌टरपंथियों के स्वर में अपना स्वर मिलाने लगे हैं

इस्लापमाबाद| पाकिस्ताथन ने अमेरिका में पवित्र कुरान जलाए जाने की घटना को घिनौना कृत्यंकरार देते हुए इस मुद्दे को संयुक्ता राष्ट्रा में उठाया है। पाकिस्ता न ने अनुरोध किया है कि इस्लाकम को लेकर लोगों के बीच बढ़ते डर को देखते हुए धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए तत्काैल कदम उठाए जाएं। पाकिस्तािनी राजदूत अब्दुलल्लाक हुसैन हारून ने संयुक्तद राष्ट्र  महासचिव बान की मून को लिखे पत्र में कहा है कि इस घटना से मुसलमानों की धार्मिक भावना को ठेस पहुंची है। अमेरिका में फ्लोरिडा के एक चर्च के पादरी टेरी जोन्स ने अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमलों के विरोध में गत रविवार को कुरान की प्रति जलाई। ईरानियनवेबसाइट के मुताबिक इस पर एक संगठन ने फतवा जारी करते हुए जोन्सि के कत्ल  पर 22 लाख डॉलर का ईनाम भी रख दिया है। पाकिस्ता न के विदेश मंत्रालय ने इस्ला माबाद में जारी एक बयान में कुरान जलाने की घटना को घिनौना कृत्यिकरार दिया है। विदेश राज्यल मंत्री हिना रब्बा नी खार ने कहा, ‘ इस तरह के निंदनीय कृत्यक सिर्फ चरमपंथी ही कर सकते हैं। ऐसे कृत्य  से मुसलमानों और दुनिया भर के लोगों के बीच नफरत फैलेगी।

राष्ट्र्पति आसिफ अली जरदारी ने भी कुरान जलाए जाने की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। जरदारी ने कहा, ‘पाकिस्ताटन की अवाम और यहां की सरकार की तरफ से मैं फ्लोरिडा में कुरान जलाए जाने की घटना की कड़े शब्दोंक में निंदा करता हूं।अमेरिका की ओर से अभी तक मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

हालांकि पिछली बार की तरह इस बार पादरी को मीडिया में ज्यारदा तूल नहीं दिया गया। पिछले साल सितंबर में इस पादरी ने जब पहली बार कुरान की प्रतियां जलाने की घोषणा की थी तो दुनिया भर में इसकी कड़ी निंदा हुई जिसके बाद इसने ऐसा करने की अपनी योजना टाल दी थी।

डव वर्ल्ड  आउटरीच सेंटर से जुड़े इस पादरी ने चर्च की वेबसाइट पर कुरान जलाने की तारीख का ऐलान किया। पिछले रविवार को गैंसविले चर्च में जोंस जब इस घटना को अंजाम दे रहा था तो पूरा चर्च परिसर अदालत में तब्दीकल हो गया था। इसमें बचाव पक्ष के वकील, अभियोजक, गवाह और खुद जज की भूमिका में जोंस था।

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी आतंकी संगठन जमात-उद-दावा [जेयूडी] ने मंगलवार को अमेरिकी पादरी टेरी जोंस की हत्या पर 10 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की। जोंस उन दो पादरियों में शामिल हैं, जिन्होंने रविवार को अमेरिका में कुरान को जलाया था।

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नमो की उपलब्धियां?

मुसलमान को अज़ान द्वारा ईशनिंदा व मन्दिर में धमाकों का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त है|

क्या एनआईए यह नहीं देख पा रहा है कि मस्जिदों से ईमाम अज़ान द्वारा काफ़िर उपनिवेशवासियों के इष्ट देवताओं की निंदा करता है| ईमाम मस्जिदों से अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देता है|

क्या एनआईए किसी ईसाई या मुसलमान के विरुद्ध ईशनिंदा और कत्ल करने के लिए शिक्षा देने के अपराध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलाने की मांग कर सकता है? क्या एनआईए अपने बुद्धि का प्रयोग करने के लिए स्वतन्त्र है? क्या एनआईए ने शिया और सुन्नी के बीच दंगों के बारे में सुना है? क्या एनआईए ने ईशनिंदा के अपराध में मुसलमान द्वारा मुसलमान के हत्या की खबर सुनी है?

आज भी साध्वी प्रज्ञा की ललकार है, “एलिजाबेथ सत्ता में क्यों? काबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अज़ान ईशनिंदा है। अतएव यादव जी! अपनी खैर मनाइए| प्राकृतिक व मानवीय न्याय के लिए निज हित में साध्वी के सपनों को साकार करने, अज़ान बंद कराने, मस्जिद पर प्रतिबंध लगाने, चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता कीजिए| ऐसा आप मात्र गुप्त रूप से ही कर सकते हैं| माउन्टबेटन ने अपनी पत्नी सौंप दी| क्या आप अपने वैदिक सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए मेरा बकाया भी नहीं दिलवा सकते?

जी हाँ हम मस्जिद और चर्च नहीं रहने देना चाहते क्यों कि यहाँ अविश्वासियों के इष्टदेवों की ईशनिंदा की जाती है और मानव मात्र को ईश्वर से अलग कर दिया जाता है| मनुष्य को कत्ल करने अथवा वीर्यहीन हो कर दास बनने के लिए विवश करने के लिए शिक्षित किया जाता है|

अपने उपरोक्त कानूनों का प्रयोग करते हुए हमने बाबरी ढांचा भी गिराया है और मस्जिदों में विस्फोट भी कराए हैं| ऐसा करना देश में उपनिवेशवासियों के हित में आवश्यक है| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://timesofindia.indiatimes.com/india/malegaon-accused-pandey-congratulated-pragya-singh/articleshow/4023514.cms

जी हाँ हम मस्जिद नहीं रहने देना चाहते क्यों कि यहाँ अविश्वासियों के इष्टदेवों की ईशनिंदा की जाती है और मानव मात्र को ईश्वर से अलग कर दास बना दिया जाता है| काफ़िर को कत्ल करने अथवा वीर्यहीन हो कर दास बनने के लिए विवश करने के लिए शिक्षित किया जाता है|

यदि आप वैदिक सनातन धर्म का निरादर करेंगे और रक्षा नहीं करेंगे तो आप मारे जायेंगे| आप का वैदिक सनातन धर्म पूरे विश्व में था| आज हम इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम जेहोवाः और अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान व नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| मस्जिद जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं|

यदि आप वैदिक सनातन धर्म का निरादर करेंगे और रक्षा नहीं करेंगे तो आप मारे जायेंगे| आप का वैदिक सनातन धर्म पूरे विश्व में था| आज हम इस लिए प्रताड़ित हो रहे हैं, कि हम जेहोवाः और अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान व नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| चर्च व मस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है, को नष्ट कर रहे हैं|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म मिटाने का प्रबंध १९४९ में ही हो चुका है| अज़ान ईशनिंदा है| मस्जिद सेना वास हैं| मस्जिदों से जजों के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा दी जाती है| काफ़िर को कत्ल करने से मुसलमान जन्नत पायेगा| (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). क्या न्यायपालिका विचार करेगी?

प्रजातंत्र संख्या के आधार पर सरकार बनाने पर आधारित व्यवस्था है| मुसलमानों को चार विवाह और तीन तलाक का अधिकार और लव जेहाद की छूट एलिजाबेथ सरकार ने वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए दिए हुए है| एलिजाबेथ सरकार मस्जिदों से इमामों से ईशनिंदा करवा रही है और अविश्वासियों को कत्ल करने और इंडिया को दार उल इस्लाम बनाने की शिक्षा दिलवा रही है|

अज़ान द्वारा मस्जिद से ईशनिंदा और कत्ल करने के खुत्बे (शिक्षाएं) अपराध नहीं माने जाते|

अज़ान ईशनिंदा का विरोधी कोई नहीं| लेकिन सिक्कों पर वैष्णो देवी की प्रतिमा के विरोध का विरोध होना चाहिए?

आप के पास सोचने का अधिकार नहीं है| क्यों कि १९४७ से नहीं सोचा कि उपनिवेश स्वतंत्रता कैसे हो गई? यह भी नहीं सोच सकते कि एलिज़ाबेथ के दास नमो पीएम बन कर क्या कर लेंगे? क्या वैदिक सनातन संस्कृति बचा पाएंगे? क्या काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले मस्जिद और ईशनिंदा अज़ान पर प्रतिबन्ध लगवा पाएंगे? क्या सम्पत्ति का मौलिक अधिकार वापस दिला देंगे?

मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा कराने, काफिरों को कत्ल करने का उपदेश दिलाने, हज अनुदान दिलाने, ईमामों को वेतन दिलाने, अडवाणी द्वारा भतीजी का मुसलमान से निकाह करने से और सुब्रमणियास्वामी द्वारा अपनी छोटी पुत्री सुहासिनी हैदर से निकाह करने से नमो संतुष्ट नहीं हैं| मुसलमानों का तो नारा ही है, अल्लाह हम शर्मिंदा हैं, काफ़िर अभी तक जिन्दा है| अब मुसलमानों से बीजेपी माफ़ी मांग रही है कि गलती हो गई नमो को प्रधानमंत्री बना दो लव जिहाद की छूट मिलेगी और कत्ल करने पर इनाम भी|

मस्जिदों से काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा कि जाती है और कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| फिर मुसलमानों को क्यों रहने दिया जाये?

 

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अज़ान देने वाले को 'मुअज्जिन' कहते हैं। मुअज्जिन नियमित रूप से दिन में पाँच बार अज़ान देता है और दिनचर्या में व्यस्त लोगों को भले काम के लिए बुलाता है। अज़ान देने वाला व्यक्ति वुजू करके पाक होकर अज़ान देता है ताकि सीना ठीक से फैल जाए और अज़ान के शब्द शुद्ध रूप से निकले। इन शब्दों का अर्थ इस प्रकार है- सर्वप्रथम मुअज्जिन चार बार 'अल्लाहो अकबर' यानी अल्लाह सबसे बड़ा है, कहता है।

इसके बाद वह दो बार कहता है, 'अशहदो अल ला इलाह इल्लल्लाह' अर्थात मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है। फिर दो बार कहता है 'अशहदु अन-ना मुहम्मदर्रसूलुल्लाह' जिसका अर्थ है- मैं गवाही देता हूँ कि हजरत मुहम्मद अल्लाह के रसूल (उपदेशक) हैं। फिर मुअज्जिन दाहिनी ओर मुँह करके दो बार कहता है 'हय-या अललसला' अर्थात आओ नमाज की ओर। फिर दाईं ओर मुँह करके दो बार कहता है, 'हय-या अलल फलाह' यानी आओ कामयाबी की ओर।

कुरान वर्णित उपरोक्त आदेशों से क्या आप को नहीं लगता कि इंडिया के बंटवारे व कश्मीर की मांग, हिंदू जाति संहार, नारियों के बलात्कार आदि के लिए इस्लाम उत्तरदायी है, मुसलमान नहीं?

हम सब साथ-साथ रहते हैं, एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं, व्यापार करते हैं और आपसी मसलों पर विचार करते हैं यानी किसी न किसी तरह से हम एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं। लेकिन यह सच है कि हम एक-दूसरे के धर्म के बारे में सही-सही ज्ञान नहीं रखते और सच जानने की कोशिश भी नहीं करते।

इस भय से कि कहीं आपसी संपर्क घृणा, द्वेष व मनमुटाव में न बदल जाए। मतलब यह कि धर्म हमारे ज्ञान, हमारे व्यवहार से कहीं अधिक हमारी भावना से जुड़ गया है। वास्तव में अज़ान अल्लाह के बंदों को अल्लाह की इबादत अर्थात नमाज के लिए बुलावा है। अज़ान 'अरबी' शब्द है जिसका अर्थ है- बुलाना, पुकारना, ऐलान करना। अज़ान को अल्लाह की पुकार भी कहा जाता है।

इसके बाद वह सामने (पश्चिम) की ओर मुँह करके कहता है 'अल्लाहो अकबर' अर्थात अल्लाह सबसे बड़ा है। अंत में एक बार 'ला इलाह इल्लल्लाह' अर्थात अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है। फजर यानी भोर की अज़ान में मुअज्जिन एक वाक्य अधिक कहता है 'अस्सलात खैरूम मिनननौम' अर्थात नमाज नींद से बेहतर है।

अज़ान के ये बोल 1400 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इंडिया में ही नहीं, पूरी दुनिया में नमाज़ियों को मस्जिद में बुलाने के लिए लगभग डेढ़ हज़ार साल से निरंतर यह आवाज़ लगाई जाती रही है। यह आवाज़ इस्लामी शरीअ़त के अनुसार, सिर्फ़ उसी वक़्त लगाई जा सकती है जब नमाज़ का निर्धारित समय आ गया हो। यह समय है:

सूर्योदय से घंटा-डेढ़ घंटा पहले। (फ़ज्र की नमाज़)

दूपहर, सूर्य ढलना शुरू होने के बाद। (जु़हर की नमाज़)

सूर्यास्त से लगभग डेढ़-दो घंटे पहले। (अस्र की नमाज़)

सूर्यास्त के तुरंत बाद। (मग़रिब की नमाज़)

सूर्यास्त के लगभग दो घंटे बाद। (इशा की नमाज़)

अज़ान यद्यपि सामूहिक नमाज़ के लिए बुलावाहै, फिर भी इसमें एक बड़ी हिकमत यह भी निहित है कि विशुद्ध एकेश्वरवादकी निरंतर याद दिहानी होती रहे, इसका सार्वजनिक एलान होता रहे। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के ईशदूतत्व के, लगातारदिन प्रतिदिनएलान के साथ यह संकल्प ताज़ा होता रहे कि कोई भी मुसलमान (और पूरा मुस्लिम समाज) मनमानी जीवनशैली अपनाने के लिए आज़ाद नहीं है बल्कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के आदर्श के अनुसार एक सत्यनिष्ठ, नेक, ईशपरायण जीवन बिताना उसके लिए अनिवार्य है।

~अज़ान~

पूरे अज़ान को नीचे पढ़ें और बताएं कि इनमे धार्मिक सद्भाव का शब्द कौन सा है?

यहां पूरी अज़ान के बोल उल्लिखित कर देना उचित महसूस होता है :

अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (दो बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

अश्हदुअल्ला इलाह इल्ल्अल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवाय कोई पूज्य, उपास्य नहीं।

अश्हदुअन्न मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह (दो बार), अर्थात् मैं गवाही देता हूं कि (हज़रत) मुहम्मद (सल्ल॰) अल्लाह के रसूल (दूत, प्रेषित, संदेष्टा, नबी, Prophet) हैं।

हय्या अ़लस्-सलात (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ नमाज़ के लिए।

हय्या अ़लल-फ़लाह (दो बार), अर्थात् ‘(लोगो) आओ भलाई और सुफलता के लिए।

अस्सलातु ख़ैरूम्-मिनन्नौम (दो बार, सिर्फ़ सूर्योदय से पहले वाली नमाज़ की अज़ान में), अर्थात् नमाज़ नींद से बेहतर है।

अल्लाहु अकबर-अल्लाहु अकबर (एक बार), अर्थात् अल्लाह सबसे बड़ा है।

ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह (एक बार), अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।

इन्हीं अब्रह्मी संस्कृतियों को बनाये रखने का भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) असीमित मौलिक अधिकार देता है| अल्लाह पुत्र वधू से निकाह कराता है (कुरान ३३:३७-३८) और ईसा बेटी से विवाह कराता है| (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). संवैधानिक अधिकार से {भारतीय संविधान अनुच्छेद २९(१)} नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा (बाइबल, याशयाह १३:१६) या मुसलमान| (कुरान, २३:६}|

 

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दासता को पुष्ट करने के लिए उपनिवेशवासी के सम्पत्ति को छीना जाना आवश्यक है| अतएव संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में वैदिक सनातन धर्म को मिटाने व सबको अपना दास बनाने के लिए, लूट, हत्या, बलात्कार और धर्मान्तरण की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देकर, रखा गया है|

इसके अतिरिक्त राज्यपालों और प्रेसिडेंट को भारतीय संविधान के संरक्षण, पोषण व संवर्धन का अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है|

लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है| जो भी लूट व अज़ान का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है| इसलिए धरती पर अज़ान होना और मस्जिद रहना काफ़िर के गले पर रखी हुई तलवार है|

मस्जिदों से ईमाम मुसलमानों को उपदेश देते हैं कि जो अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना करता है, वह काफ़िर है| काफ़िर या तो अपनी उपासना पद्धति त्याग दे और मुसलमानों की भांति खतना कराकर शासक (एलिजाबेथ) का दास बने अन्यथा मुसलमान उसे कत्ल कर दें| मस्जिदों से ऐसा कथन ई० सन० ६३२ से ही बलवे का कारण बन रहा है और अविश्वासियों के उपासना की स्वतंत्रता का भी अतिक्रमण है बलवे के लिये उत्प्रेरित करने वाले के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ही दे सकते हैं| लेकिन भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन आज तक कोई मुसलमान बंदी नहीं बना. ठीक इसके विपरीत भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन यदि कोई काफ़िर अज़ान, खुत्बे और मस्जिद के विरुद्ध बोल या लिख देता है, तो मुसलमान उसे ईशनिंदा के अपराध में कत्ल कर देता है और सरकार भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चलाती है. अपमान काफ़िर का होता है लेकिन काफ़िर शिकायत भी नहीं कर सकते|

राष्ट्रपति और राज्यपाल पुलिस संरक्षण देकर अविश्वासियों के इष्टदेवों की ईशनिंदा कराते हैं| अविश्वासियों के कर के पैसे से मस्जिदों और हज भवनों का निर्माण कराते हैं| जो भी काफ़िर हत्या और ईशनिंदा के केंद्र मस्जिदों या ईमामों का विरोध करे उसकी हत्या का निर्देश कुरान में (कुरआन ८:१७) है जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीडित कराया जा रहा है| यानी मानवजाति का संहार|

मस्जिद, अज़ान और खुत्बे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अपराध से मुक्त हैं| अपमान और ईशनिंदा सहन करना काफिरों की विवशता है.

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विश्व के धनिकों में से एक आप चेतावनी सुन रहे हैं, लेकिन आप ने आजतक न तो स्वयं विरोध किया और न विरोध करने वालों की सहायता ही कर सकते हैं. कितने विवश हैं आप? आप के वैभव की उपयोगिता क्या है? क्या आप ने कभी सोचा?

यानी स्वयं ईसाई व मुसलमान भी एक दूसरे को कत्ल करेंगे.

 

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लेकिन मैं, काफ़िर व ईसाई मात्र अल्लाह की पूजा नही करते अथवा ईसा को अपना राजा नहीं मानते। अतः मुझको को ही नहीँ ईसाइयों व गैरमुसलमानों को भी कत्ल होना है। फिर भी धार्मिक कट्टर हिंदू हैं-मुसलमान व ईसाई नहीं! आप की आत्मघात व राष्ट्रघात की नीति अत्यंत सराहनीय है। बधाई! क्यों कि आप मुसलमानों की नमाज को पूजा मानते हैं और मस्जिदों को जहां यही हत्यारा, लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) और बलात्कारी अल्लाह महान कहा जाता है, पूजास्थल मानते हैं। सुनें! आप की सबेरे की नींद हराम करने वाली लाउडस्पीकर की आवाज, ‘‘अल्लाहु अक्बर’’ यानी अल्लाह सबसे महान है। अज़ान व नमाज का अंश भी जान लें, ‘मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है...इस नमाज को आप लोग सांप्रदायिक पूजा नहीँ मानते। अलबत्ता जो इसके विरुद्ध कुछ लिखे उसे आप दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन भादंसं की धारा १५३, २९५ या ५०६ का अभियुक्त बनवा देते हैं। क्यों कि इसी इस्लाम को आप भारतीय गंगा जमुनी संस्कृति का अभिन्न अंग मानते है। इसी संस्कृति को सुरक्षित रखने का प्रत्येक मुसलमान या ईसाई को भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) असीमित मौलिक अधिकार देता है। जिस पर किसी का जोर नहीं! आप की सरकार का धार्मिक कट्टरता से संघर्ष का संकल्प व प्रयोग अनूठा है।

जो भी लूट व अज़ान का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है|

जो भी अज़ान व मस्जिद का विरोध करेगा मिटा दिया जायेगा|

http://www.aryavrt.com/muj13w44b-babrike-sevak

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), जिसमे नमो ने आस्था व निष्ठा की शपथ ली है और आगे भी लेने के लिए विवश हैं, मानवता का शत्रु है| (यह अनुच्छेद ईसाइयों व मुसलमानों को, जो स्वयं दास हैं और सबको दास बनाना जिनका मजहबी दायित्व है, पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है).

http://www.aryavrt.com/muj14w07-pm-nmo

 

चर्चों व मस्जिदों से ईसाई व मुसलमान को अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| उपनिवेशवासियों को भा०दं०सं०कीधारा १०२ से प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| हम उसी अधिकार से चर्च व मस्जिद नष्ट करते हैं| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का प्रयोग क्यों?

वोट की वैसाखी पर सत्ता लेकर क्या नमो चर्च, अज़ान और मस्जिद पर प्रतिबन्ध लगा देंगे?

इसलिए एलिजाबेथ ने मुख्यमंत्री अखिलेश को निर्देशित कर दिया है कि जो भी लोकसेवक अज़ान, नमाज़, मस्जिद, चर्च, मिशनरियों और ईमामों का विरोध करे, उसके विरुद्ध त्वरित कार्यवाही की जाये|

वैदिक सनातन धर्म से अब्रह्मी संस्कृतियों दोनों ही आतंकित हैं|

अब्रह्मी संस्कृतियों वैदिक पंथियों को मिटाना चाहते हैं|

रोकना चाहते हों तो आर्यावर्त सरकार को छिप कर सहयोग दें| क्योंकि हमें खुलकर मदद नहीं कर सकते|

जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा व अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है. कुरान व बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं. इस्लाम है तो काफ़िर नही. हम आप के लिए लड़ रहें हैं और प्रजातंत्र के चारो स्तम्भ अपने सर्वनाश की जड़ चर्चों, मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं.

आज जीविका, पद और प्रभुता के लोभ में जो अपराध और पाप लोकसेवक कर रहे हैं, वह उनका ही काल बन जायेगा| इसका प्रमाण बाबरी प्रकरण और मुज़फ्फरनगर में लव जिहाद प्रकरण में हस्तक्षेप करने के कारण लोकसेवकों के सामने आया है| यह युद्ध लोकसेवक नहीं लड़ सकते| वे गुप्त रूप से हमारी सहायता कर सकते हैं|

राष्ट्रपति, राज्यपाल, जज और लोकसेवक, अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोधियों को नष्ट करने के लिए विवश हैं.

क्या मीडिया ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करेगी?

इसी प्रकार पूजा स्थल भंजन कराने वाला, (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३), लूट व दूसरे के नारी के अपहरण की शिक्षा देने वाला (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), दुधमुहों की हत्या कराने वाला और नारियों का उनके पुरूषों के आँखों के सामने बलात्कार कराने वाला जेहोवा ईश्वर कैसे है? (बाइबल, याशयाह १३:१६)

नारियों की लूट व उनके बलात्कार को निंदनीय न मानने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान ४:२४; २३:६; ३३:५० व ७०:३०). मुहम्मद की अपनी ही पुत्रवधू जैनब के साथ मुहम्मद का निकाह कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, ३३:३७-३८). लुटेरा(कुरान ८:१, ४१ व ६९) व हत्यारा अल्लाह ईश्वर कैसे है? मूर्ति भंजन कराने वाला अल्लाह ईश्वर कैसे है? (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हत्या, लूट, बलात्कार, धर्मान्तरण और राष्ट्रांतरण की संहिता कुरान धर्मपुस्तक कैसे है?

उपनिवेश स्वतंत्रता कैसे है? इंडिया सहित ५३ देश एलिजाबेथ के उपनिवेश क्यों है? मुसलमानों को हमने नहीं एलिजाबेथ ने गुलाम बनाया हुआ है| हिम्मत हो तो मुसलमान उपनिवेश के विरुद्ध लड़ें हम उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर लडेंगे| विवादित कश्मीर ही नहीं - विश्व के ५३ देश स्वतंत्र होंगे| क्या मुसलमान मानवता के हित में हमारा साथ देंगे?

जिन मस्जिदों से हमारे इष्टदेवों की निंदा की जाती है और हमें कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं, उनमे विष्फोट अपराध कैसे है? अपराधी तो बाइबल, कुरान, भारतीय संविधान, राष्ट्रपति और राज्यपाल हैं, जो मानवजाति के हत्यारों का महिमामंडन, संरक्षण, पोषण व संवर्धन कर रहे हैं?

हम हर उपनिवेशवासी को निःशुल्क गुरुकुलों में शिक्षित कर सम्प्रभु बनाना चाहते हैं| हम नहीं चाहते कि उपनिवेशवासियों के घर लूटे जाएँ| उपनिवेशवासियों के दुधमुहें पटक कर मार डाले जाएँ| उपनिवेशवासियों की नारियों का उनकी की आँखों के सामने बलात्कार हो और अंत में उपनिवेशवासी कत्ल कर दिए जाएँ| (बाइबल, याशयाह १३:१६). वह भी जजों के समर्थन से! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

जो भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करेगा, अज़ान और नमाज़ का विरोध करेगा और भारतीय संविधान का विरोध करेगा, भगवा आतंकवादी माना जायेगा - जेल में सड़ेगा.

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

http://www.aryavrt.com/muj14w43y-chhl

राज्यपालों और प्रेसिडेंट को अब्रह्मी संस्कृतियों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन का क्रमशः अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है| लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है| जो भी लूट व अज़ान का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है|

अज़ान (ईशनिंदा) और कत्ल करने की शिक्षा देने का अधिकार मुसलमानों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से दिला दिया और राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन ईशनिन्दकों को संरक्षण देने का उत्तरदायित्व सौंपा गया. फिरभी उपनिवेश, भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल आदि के विरोध का किसी के पास साहस नहीं है.

मैं बातों में विश्वास नहीं करता, लड़ रहा हूँ. गांधी का कोई विरोध करे या उसे भगवान माने, था तो वह मानवता का शत्रु ही.

अब्रह्मी संस्कृतियों द्वारा अपमानित होकर भी आप सहित कोई विरोध न कर सके और उनके अनुयायियों को अविश्वासियों को कत्ल करने की और विश्व में सरीयत या ईसा का राज्य लागू करने यानी वैदिक सनातन संस्कृति और उसके अनुयायियों को निर्मूल करने की शिक्षा मिलती रहे यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया था| जो विरोध करे उसको तबाह करने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति का अधिकार दिया गया.

भारतीय संविधान को चोर कहना एलिजाबेथ के रोम राज्य के विरद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है और संसद व विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन भी| जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे एलिजाबेथ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी| मुसलमान ईश निंदा में कत्ल करेगा| मै ४२ बार हवालात और जेल गया हूँ| और हमारे ९ अधिकारी आज भी जेलों में बंद हैं||

अज्ञान वश काफ़िरों ने घातक धारणा बना रखी है कि उनके अपने धर्म की भांति इस्लाम भी एक धर्म है| मै अपने प्रतिवाद में चार सच्चाईयाँ उद्धृत कर रहा हूँ:-

| अविश्वासियों को धोखा देने के लिए मुसलमान तकिय्या (कुरान ३:२८ व १६:१०६) का प्रयोग कर यह विश्वास दिलाते हैं कि कुछ दिग्भ्रमित मुसलमानों ने उनके मजहब का अपहरण कर लिया है और इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं| लेकिन इस्लाम का अपहरण नहीं होता है| यद्यपि काफ़िर ऐसा ही मानते हैं क्यों कि उनकी गलत धारणा है कि सभी धर्म समान हैं| काफ़िरों की यह त्रुटिपूर्ण धारणा इसलिए है कि वे समझते हैं कि कोई धर्म शांतिप्रिय उपनिवेशवासियों की हत्या और लूटमार को बढ़ावा कैसे दे सकता है? अतः सचमुच ही कुछ सिरफिरे मुसलमानों ने इस्लाम का अपहरण कर रखा है| यदि एक बार अविश्वासियों को इस्लाम की असलियत समझ में आ जाये तो वे इस्लाम से बचने का सही मार्ग ढूँढना प्रारम्भ कर देंगे|

| इस्लाम की उन्नति के लिए अल्लाह मुसलमानों को धोखा देने की अनुमति देता है| इसे अल्लाह तकिय्या कहता है| लेकिन अविश्वासियों को तकिय्या के इस्लामी सिद्धांत का ज्ञान नहीं है| तकिय्या के सिद्धांत का ज्ञान अविश्वासियों को अल्लाह की धोखाधड़ी से बचायेगा| वे मौलवियों व ईमामों की हर बात पर विश्वास करना बंद कर देंगे|

| धरती पर शरिया कानून लगाने के लिए प्रयत्नशील रहना हर मुसलमान का मजहबी दायित्व है| इसे जिहाद कहा जाता है| हर व्यक्ति को मुसलमान बनाना और धरती को शरिया आधारित इस्लामी राज्य बना लेना ही जिहाद है| यदि काफ़िर इस सच्चाई को जान लें तो वे इस्लाम को धरती पर टिकने नहीं देंगे|

| चूंकि बलात्कारी मूर्ख ईसाइयों' (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और मुसलमानों (कुरान २:३५) ने स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| अतः शासक निज हित में इस्लाम को संरक्षा, सुरक्षा और बढ़ावा दे रहे हैं और सच्चाई को छिपाने के हर प्रयास कर रहे हैं|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) आमिर खान को वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के धर्मान्तरण अथवा हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| अतः राष्ट्रपति / राज्यपाल भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन आमिर खान पर अभियोग नहीं चला सकते| लेकिन वैदिक सनातन संस्कृति का जो भी अनुयायी आमिर खान का विरोध करेगा, उसे राष्ट्रपति / राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में संस्तुति देकर जेल भेज देंगे.

लेकिन अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंडनीय अपराध है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन इन धाराओं का नियंत्रण एलिजाबेथ के मनोनीत राज्यपालों के पास है|

अज़ान व नमाज़ द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ के अंतर्गत मुसलमानों को बल्बे के लिए उत्प्रेरित करते व २९५ के अंतर्गत काफिरों के इष्ट देवों का अपमान करते हैं|

मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इन धाराओं के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक, मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गया और न आज तक मस्जिदों के लाउडस्पीकर उतारे गए| ताकि मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत न हों.

जिस मूसा के मानसपुत्र जेहोवा ने अपने अनुयायियों को मूर्ख बनाया (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) और वीर्यहीन कर दिया, (बाइबल, उत्पत्ति १७:११), वह एलिजाबेथ का सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष भगवान है! जो जेहोवा को भगवान नहीं मानता, पद, प्रभुता और पेट के लोभ में उसे नष्ट करना लोकसेवक की विवशता है.

 ‘जो बपतिस्मा नहीं लेते, उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा, वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे|’ कहने वाले सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष कैसे है?

इस्लाम ने ईश्वर को अपूज्य घोषित कर दिया है| (अज़ान). मात्र अल्लाह पूज्य है’, (अज़ान, कुरान ३:१९), कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? क्योंकि कुरान के अनुसार दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| (कुरान ३:१९)और जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...” (कुरान ३:८५).

मस्जिदों से ई० सन ६३२ से ही होने वाली अज़ान यानी ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? अज़ान और खुत्बे साम्प्रदायिक सद्भाव कैसे लाते हैं?

मात्र अल्लाह पूज्य है और मात्र ईसा ही धरती का राजा हो सकता है, कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? हमें एलिजाबेथ की दासता के लिए विवश क्यों किया जा रहा है?

कृपया मुझे बताएं कि एलिजाबेथ की सरकार अज़ान लगाने वाले ईमामों के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत अभियोग चलाने की अनुमति कब देगी? काफिरों के आस्था का अपमान कब बंद होगा? काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे कब बंद होंगे?

आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता| उसका कोई रंग नहीं होता. ऐसा प्रचारित किया जाता है| सितम्बर २०१३ पाकिस्तान में चरमपंथियों ने चर्च पर हमला कर सैकड़ों लोगों को मार दिया, केन्या (नेरोबी) में अलजवाहर के इशारे पर (मुंबई हमले के तर्ज पर ) एक शापिंग मॉल में लोगों को मुस्लिम आतंकवादियों ने बंधक बनाया और उनका धर्म पूछ-पूछ कर हत्याएं कीं, कश्मीर घाटी से हिंदुओं का पलायन करा कर पहले ही खाली कराया जा चुका है| फिर भी हमारे सेकुलर नेता शुतुरमुर्ग की तरह सच्चाई से मुँह छुपा कर यह बयान कब तक देते रहेंगे कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता| क्या इस कथन में कोई सच्चाई है? क्या यही कारण नहीं है कि आतंकवाद से लड़ने के सभी प्रयास असफल रहे हैं? जब तक समस्या की जड़, उसकी मानसिकता और स्रोत पर प्रहार नहीं होगा - सफलता नहीं

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधिकार से जो भी ईसाईयों व मुसलमानों का विरोध करता है, उसे बाइबल, (बाइबल, लूका १९:२७) कुरान (कुरान २:१९१) और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) की आज्ञा और अधिकार से ईसाई व मुसलमान कत्ल कर रहे हैं और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन आप उसे जेल में सड़ाने के लिए आप विवश हैं. हमारे ९ अधिकारी मालेगांव बम कांड में २००८ से बंद हैं.

गांधी वध के बाद २६ जनवरी, १९५० को उपनिवेशवासियों पर एक भारतीय संविधान थोपा गया, जिसका अनुच्छेद २९(१) ईसाई व मुसलमान सहित किसी उपनिवेशवासी को जीने का अधिकार नहीं देता और न इंडिया पर किसी उपनिवेशवासी का अधिकार स्वीकार करता है. सन १९५० से आज तक तमाम न्यायविद पैदा हुए और मर गए, लेकिन किसी ने भी भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ आदि का विरोध नहीं किया| क्यों कि अब्रह्मी संस्कृतियों का कोई आलोचक जीवित नहीं छोड़ा जाता.

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

किसी भी हरे भरे वृक्ष को नष्ट करने के लिए एक गिद्ध का निवास ही पर्याप्त है| इसी प्रकार किसी भी संस्कृति को मिटाने के लिए एक मुसलमान या ईसाई का निवास पर्याप्त है| अकेला कोलम्बस अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अकेला मैकाले संस्कृत भाषा और गुरुकुलों को निगल गया| अकेला मुहम्मद अपने आश्रय दाता यहूदियों के तीन प्रजातियों बनू कैनुका, बनू नजीर और बनू कुरेज़ा को निगल गया|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

उपनिवेशवासी दासता से मुक्ति नहीं पा सकते. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन उपनिवेश का विरोध मृत्युदंड का अपराध है.

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधिकार से जो भी ईसाईयों व मुसलमानों का विरोध करता है, उसे बाइबल, (बाइबल, लूका १९:२७) कुरान (कुरान २:१९१) और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) की आज्ञा और अधिकार से ईसाई व मुसलमान कत्ल कर रहे हैं और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधिकार से भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल उसे जेल में सड़ाने के लिए विवश हैं. हमारे ९ अधिकारी मालेगांव बम कांड में २००८ से बंद हैं.

आर्य बड़े भोले हैं| दो हजार से अधिक वर्षों से वे ईसाइयत/इस्लाम को समझ नहीं पाए हैं| उन्हें चाहिए कि वे अपनी आस्था वैदिक सनातन धर्म में व्यक्त करें| ईश्वर का अपमान करने वालों को कठोर दंड देने के लिए आर्यावर्त सरकार को मात्र १७% कर दें| इंडियन उपनिवेश के सरकार को कोई कर न दें| मानव मात्र को ध्यान रखना चाहिए कि धोखाधड़ी से असावधान रहना सहिष्णुता नहीं है| असावधानी अपराधियों को बम धमाकों, लूट, हत्या व नारी बलात्कार को प्रोत्साहित ही करती है| अपराध सहन करना सहिष्णुता नहीं है| समझौतों से शांति नहीं स्थापित होने वाली| समझौतों ने विश्व का सामंन्जस्य चौपट कर रखा है| सभ्य राज्य अपराधियों से समझौते नहीं करते| मानव जाति टैक्स यानी कर अपराधियों को दंडित करने के लिए देती है| आज लगभग १-५ अरब लोग इस्लाम के दास हैं और दो अरब से अधिक प्रेत ईसा की विवेकहीन भेंड़े हैं, जिन्हें ईसा के नाम पर हत्या करने में तनिक भी हिचक नहीं| इस्लाम का मतलब शांति नहीं, बल्कि समर्पण है| अल्लाह का कुरान और ईसा का बाइबल मुसलमान और ईसाई से अन्य धर्मावलम्बियों की हत्या करने की आज्ञा मानने की अपेक्षा करते हैं| मुसलमान न अपना मजहब त्याग सकता है और न कुरान के विरुद्ध एक शब्द बोल ही सकता है| मुसलमान इस्लाम से पीड़ित हैं व ईसाई ईसा से| ईसाई प्रेत ईसा की विवेकहीन भेंड़े हैं| जहां इस्लाम मुसलमानों को असहिष्णुता की शिक्षा देता है, वहीं प्रेत जारज(जार्ज) ईसा हर उस व्यक्ति को कत्ल कराता है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| तथाकथित पैगम्बर मूसा, ईसा और मुहम्मद तो रहे नहीं, अपनी उत्तराधिकार सुल्तानों, राजाओं और शासकों को दे गए हैं, जो पुरोहितों, ईमामों व मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैं, जिसके कारण सत्य पर पर्दा पड़ा है| दूसरे की सम्पत्ति की चोरी और नारियों के यौन शोषण के लोभ ने हजारों वर्षों से मानव जाति को तबाह कर रखा है|

असहिष्णुता, लूट, बलात्कार और हत्या ही ईसाइयत और इस्लाम के स्तंभ हैं.

जहां इस्लाम अज़ान और नमाज़ की आड़ में अपने अनुयायी मुसलमानों को असहिष्णुता की शिक्षा देता है, वहीं प्रेत जारज(जार्ज) ईसा हर उस व्यक्ति को कत्ल कराता है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता| तथाकथित पैगम्बर मूसा, ईसा और मुहम्मद तो रहे नहीं, अपना उत्तराधिकार सुल्तानों, राजाओं और शासकों को दे गए हैं, जो पुरोहितों, ईमामों व मीडिया कर्मियों का शोषण कर रहे हैं, जिसके कारण सत्य पर पर्दा पड़ा है| दूसरे की सम्पत्ति की चोरी और नारियों के यौन शोषण के लोभ ने हजारों वर्षों से मानव जाति को तबाह कर रखा है|

डेनिअल पाइप्स के अनुसार बुद्धिजीवी और लोकसेवक यह मानने के लिए विवश हैं कि हिंसा में ईसाइयत और इस्लाम की कोई भूमिका नहीं!

मुसलमानों और ईसाइयों को अपने अब्रह्मी संस्कृतियों को त्यागना होगा, अपने नफरत की संस्कृति (मात्र अल्लाह पूज्य है की अज़ान द्वारा घोषणा और अकेले यीशु मोक्ष प्रदान कर सकते हैं की घोषणा का परित्याग करना पडेगा) गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों में साथी के रूप में शामिल होना होगा| अन्यथा गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को नैतिक अधिकार है कि वे मुसलमानों और ईसाइयों से स्वयं को अलग कर लें| अब्रह्मी संस्कृतियों को प्रतिबंधित करें| मुसलमानों और ईसाइयों के आव्रजन को प्रतिबंधित कर दें और उन्हें कत्ल कर दें, जो मानवजाति को दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का षड्यंत्र कर रहे हैं - सर्वधर्म समभाव के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के आचरण मानवता और नैतिकता के विरुद्ध हैं|

 

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शुक्रवार, 11 दिसम्बर 2015

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आप ने हमारे Ramdev ११११० का भी उत्तर नहीं दिया| अब इसके बाद मै आप को पत्र नहीं लिखूंगा|

तुलसीदास जी ने लिखा है, "विनय न मानत सिंधु जड़ ..."

आप ने भारत स्वाभिमान दल बनाया हुआ है| लेकिन ईमाम के अज़ान से आप के स्वाभिमान का हनन नहीं होता|

लोकतंत्र ने मुसलमानों, ईसाइयों और लोकसेवकों के विरुद्ध अपराध निर्धारण के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धाराएं १९६ व १९७ बनाई हैं| इनका नियंत्रण एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत राज्यपाल के पास है|

 

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तुलसीदास जी ने लिखा है, "विनय न मानत सिंधु जड़ ..."

 

बुधवार, 9 दिसम्बर 2015

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http://www.aryavrt.com/muj15w49a-sgbkm-15d08

 

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समान नागरिक संहिता?

ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९). चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]. बेटी से विवाह कीजिए. (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). पुत्र वधू से निकाह कीजिए. (कुरान ३३:३७-३८). बिना विवाह बच्चे पैदा कीजिए. [UDHR अनु०२५(२)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] और जिसे भी चाहें अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| ईसा बेटी से विवाह कराता है| (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). अल्लाह पुत्र वधू से निकाह कराता है (कुरान ३३:३७-३८) और संवैधानिक अधिकार से {भारतीय संविधान अनुच्छेद २९(१)} नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा (बाइबल, याशयाह १३:१६) या मुसलमान| (कुरान, २३:६}| अतएव आर्यावर्त सरकार को ईसाइयत और इस्लाम को नष्ट करने का भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन कानूनी अधिकार है|

ईसाईयों व मुसलमानों के लिए मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

ईसाइयत {(बाइबल, मत्ती १०:३४) व (बाइबल, लूका १२:४९)} और इस्लाम (कुरान २:२१६) निरंतर युद्धरत सम्प्रदाय हैं| दोनों ही लोकतंत्र की आड़ में विश्व में अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिये मानवजाति के स्वतंत्रता व चरित्र को मिटा रहे हैं| इस बर्बरता और सभ्यता और एक विश्व आपदा के बीच टकराव को टालने के लिए एक ही रास्ता है कि ईसाई और इस्लाम मजहब के भ्रम को बेनकाब किया जाय और उन्हें रहस्यमय नहीं रहने दिया जाय. गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ शांति से जीने के लिए यह आवश्यक है कि अब्रह्मी संस्कृतियों से प्रत्येक ईसाई व मुसलमान को विलग कर दिया जाये|

मुसलमानों और ईसाइयों को अपने अब्रह्मी संस्कृतियों को त्यागना होगा, अपने नफरत की संस्कृति (मात्र अल्लाह पूज्य है की अज़ान द्वारा घोषणा और अकेले यीशु मोक्ष प्रदान कर सकते हैं की चर्चों से घोषणा का परित्याग करना पडेगा) गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों में साथी के रूप में शामिल होना होगा| अन्यथा गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को नैतिक अधिकार है कि वे मुसलमानों और ईसाइयों से स्वयं को अलग कर लें| अब्रह्मी संस्कृतियों को प्रतिबंधित करें| मुसलमानों और ईसाइयों के आव्रजन को प्रतिबंधित कर दें और उन्हें कत्ल कर दें, जो मानवजाति को दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का षड्यंत्र कर रहे हैं - सर्वधर्म समभाव के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के आचरण मानवता और नैतिकता के विरुद्ध हैं|

 

मंगलवार, 8 दिसम्बर 2015

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मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. इसलिए Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php का अपराधी हूँ. मैं इंडिया को उपनिवेश, चर्च, बाइबल, मस्जिद, कुरान, अज़ान और खुत्बों से मुक्त कर भारत बनाना चाहता हूँ. मैकाले के दास बनानेवाली यौनशिक्षा को समाप्त कर ब्रह्मचारी बनानेवाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करना चाहता हूँ. अतएव मैं उपनिवेश की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ का Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन अपराधी हूँ. लेकिन इस धारा के अधीन मेरे अथवा मेरे सहयोगियों के विरुद्ध कभी कोई अभियोग नहीं चला. मेरे और मेरे सहयोगियों के विरुद्ध जो भी अभियोग चल रहे हैं उन धाराओं के अधीन अभियोग चलाने का एलिजाबेथ के उपनिवेश के पास कोई अधिकार ही नहीं है, क्यों कि हमने जो भी किया है, प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया है, जो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ९६ के अधीन अपराध ही नहीं है.

आप लोगों को एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने में १९४७ से लेकर आज तक लज्जा नहीं आई और न कुटरचित परभक्षी भारतीय संविधान का विरोध कर सकते हैं, क्यों कि ऐसा करना Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. आप लोग आज तक मस्जिद, अज़ान और खुत्बों का विरोध न कर सके.

उपनिवेश से मुक्ति की मांग Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन राजद्रोह है. उपनिवेश से मुक्ति की मांग करने के कारण साध्वी २००८ से जेल में बंद हैं. उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और उनको दवा के आड़ में जहर दिया जा रहा है, जिस कारण से वे अब कैंसर से पीड़ित हैं.

क्यों कि हम आर्यावर्त सरकार के लोग उपनिवेश विरोधी हैं. हमें Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड मिलना चाहिए था, लेकिन एलिजाबेथ में वह साहस ही नहीं है.

साध्वी प्रज्ञा उपनिवेश की विरोधी हैं. उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन फांसी का अपराध है. आप लोग एलिजाबेथ को धन्यवाद दीजिए, कि हम मालेगांव के अभियुक्त फांसी पर नहीं लटकाए गए.

लेकिन उपनिवेश और उपरोक्त ब्रिटिश नागरिकता अधिनियम १९४८ का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस कानून के संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने के लिए, पद, प्रभुता व पेट के लोभमें, राष्ट्रपति व राज्यपाल, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| यानी कि उपनिवेश का विरोध किया नहीं कि राष्ट्रपति और राज्यपाल विरोधी को फांसी दिलवाने के लिए विवश हैं.

इंडिया ब्रिटिश उपनिवेश (डोमिनियन) है| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php ने १५ अगस्त, १९४७ से स्वातन्त्रय युद्ध को मृत्युदंड का अपराध बना दिया है.

नियमानुसार मुझे फांसी ही मिल सकती है. (Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php). जिस दिन एलिजाबेथ राष्ट्रपति या राज्यपाल से अपेक्षा करेगी, मेरी फांसी हो जायेगी. क्योंकि मैंने आर्यावर्त सरकार की स्थापना की है और एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध रत हूँ. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

नियमानुसार मुझे फांसी ही मिल सकती है. (Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php). जिस दिन एलिजाबेथ राष्ट्रपति या राज्यपाल से अपेक्षा करेगी, मेरी फांसी हो जायेगी. क्योंकि मैंने आर्यावर्त सरकार की स्थापना की है और एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध युद्ध रत हूँ. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

इस पत्र की प्रति महामहिम प्रणब दा व एलिजाबेथ को भी भेज रहा हूँ, क्यों कि आप दोनों ही एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत मातहत हैं| अपने न्यायप्रियता हेतु मेरे विरुद्ध गलत अभियोगों को बंद कर मुझे Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड दें|

उपनिवेशवासी दासता से मुक्ति नहीं पा सकते. Chapter VI. भारतीय दंड