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शेरजी को नमस्ते!

न तो आप हिंदू हैं और न ही इंडियन. यह आप स्वयं जानते हैं.

आप जन्म लेने के साथ ईश्वर के अंश ब्रह्म से युक्त थे. अपने माँ बाप के अज्ञान के कारण आप ब्रह्मचर्य निर्माण केन्द्र गुरुकुल को त्याग कर मैकाले के यौनशिक्षा केन्द्र में प्रवेश लेकर वीर्यहीन हो गए.

परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. बाइबल के वचन के विरूद्ध मनुष्य जन्मना पापी नहीं है. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वारा, उसके जन्म के साथ ही दिया गया, ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं।  वीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता है| मनुष्य की छोड़िये, वीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता है|

सिंह का कोई संगठन नहीं होता और न ही सिंह किसी दूसरे सिंह को रहने देता है, तथापि, वीर्यवान होने के कारण, पूरे जंगल पर राज्य करता है. बीती को भूलिए. आगे की सोचिये.

निर्णय आप स्वयं करें| आप १९४७ से अपहृत अपने स्वतंत्रता का युद्ध लड़ेंगे या एलिज़ाबेथ के उपनिवेश में अपने जीवन और सम्पत्ति के अधिकार से वंचित रहेंगे? ( भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग))

अहम् ब्रह्मास्मि का सरल हिन्दी अनुवाद है कि मैं ब्रह्म हूँ| साधारण व्यक्ति दिग्भ्रमित हैं। इसका कारण यह है कि लोग - जड़ बुद्धि व्याख्याकारों के कहे को अपनाते है। किसी भी अभिकथन के अभिप्राय को जानने के लिए आवश्यक है कि उसके पूर्वपक्ष को समझा जाय। हम वैदिक पंथी उपनिषदों के एक मात्र प्रमाणिक भाष्यकार आदिशंकराचार्य के कथन को प्रमाण मानते हैं, जो किसी व्यक्ति के मन में किसी भी तरह का अंध-विश्वास अथवा विभ्रम नहीं उत्पन्न करना चाहते थे।

इस अभिकथन के दो स्पष्ट पूर्व-पक्ष हैं-

वह विश्वास पर आधारित धारणा, जो व्यक्ति को अधीन करने के लिए, धर्म का आश्रित (दास) बनाती है। अब्रह्मी संस्कृतियांयही कर रही हैं| जैसे, एक मनुष्य क्या कर सकता है, करने वाला तो कोई और ही है। मीमांसा दर्शन का कर्मकांड-वादी समझ या अन्धविश्वास, जिसके अनुसार फल देवता देते हैं, कर्मकांड की प्राविधि ही सब कुछ है। वह दर्शन या अन्धविश्वास, व्यक्ति सत्ता को तुच्छ और गौण करता है- देवता, मन्त्र और धर्म को श्रेष्ठ बताता है। एक व्यक्ति के पास पराश्रित और हताश होने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचता। धर्म में पैगंबर/पौरोहित्य के वर्चस्व तथा कर्मकांड की 'अर्थ-हीन' दुरुहता को (अहम् ब्रह्मास्मि) का अभिकथन चुनौती देता है। हमारे निःशुल्क गुरुकुल बचपन में स्वावलम्बी बनाने के लिए अहम् ब्रह्मास्मि पर बल देते हैं|

सांख्य-दर्शन की धारणा है कि व्यक्ति (जीव) स्वयं कुछ भी नहीं करता, जो कुछ भी करती है - प्रकृति करती है। बंधन में भी पुरूष को प्रकृति डालती है तो मुक्त भी पुरूष को प्रकृति करती है। यानी पुरूष सिर्फ़ प्रकृति के इशारे पर नाचता है। इस विचारधारा के अनुसार तो व्यक्ति में कोई व्यक्तित्व है ही नहीं। अतः स्वीकार्य नहीं|

इन दो मानव-सत्ता विरोधी धारणाओं का खंडन और निषेध करते हुए शंकराचार्य मानव-व्यक्तित्व की गरिमा की स्थापना करते हैं। आइये, समझे कि अहम् ब्रह्मास्मि का वास्तविक तात्पर्य क्या है?

अहम् यानी मैं स्वयं ब्रह्मअस्मि यानी हूँ और यही सच है और यह उतना ही सच है जितना कि दो और दो का चार होना|

अहम् ब्रह्मास्मि का तात्पर्य यह निर्देशित करता है कि मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों!

आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्ति को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही है अहम् ब्रह्मास्मि का अन्यतम तात्पर्य। मेरा यही सुझाव मानवमात्र के लिए है|

मनुष्य को बिना किसी दबाव के दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, कौटुम्बिक व्यभिचार, यौनशिक्षा, सहजीवन, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को संरक्षण देना है| अब्रह्मी संस्कृतियों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है| वीर्यहीन कर मूसा से लेकर एलिजाबेथ तक सभी मानवमात्र को दास बना रहे हैं| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. [UDHR अनु०२५(२)].

हमें एकता की आवश्यकता ही नहीं है. आवश्यकता है गुरुकुलों की. कपिल मुनि ने तिनका भी नहीं उठाया और महाराज सगर की सारी सेना भष्म कर दी. परशुराम की कोई सेना नहीं थी, अकेले २१ बार आतताई क्षत्रियों का विनाश किया. हनुमान निहत्थे लंका में घुसे और लंका में आग लगा दिया. चाणक्य ने मगध के राजा घनानंद का विनाश कर पूरे भारत पर साम्राज्य स्थापित किया. आदि शंकराचार्य ने अकेले बौद्ध धर्म का अंत कर ४ पीठ बनाये और सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया.

क्या आप आतताई  ईसाइयत और इस्लाम से मुक्ति लेने में मेरी सहायता कर सकते हैं?

 

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दलित, पिछड़े, मुसलमान व ईसाई किसको पसंद करेंगे?

राष्ट्रपति और राज्यपाल सहित इंडियन उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के बलिपशु हैं. एलिजाबेथ कौन है? जानने के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

वीर्यहीन व्यक्ति अपनी इन्द्रियों और शक्तिवान का दास ही बन सकता है, स्वतन्त्र नहीं रह सकता| वीर्यहीन व्यक्ति का मानवाधिकार नहीं होता| वीर्यहीन मनुष्य रोगग्रसित चलता फिरता मुर्दा और दास है|

गुरुकुलों में वीर्यरक्षा की शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए मैकाले ने मिटा दिया|

लेकिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त लव जिहाद का विरोध करने के कारण ही मुज़फ्फरनगर दंगा भड़का| जिसमे मात्र हिंदुओं के विरुद्ध कार्यवाही हुई|

ईश्वरने मनुष्यको वीर्यकेरुपमें अपनी सारीशक्ति दीहै। वीर्य अष्टसिद्धियों और नौनिधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। वीर्य हीन व्यक्ति स्वतन्त्र नहीं रह सकता.

ईसाई व मुसलमान दया के पात्र हैं. दंड के पात्र तो मूसा, मुहम्मद, शासक व पुरोहित हैं.

अब्रह्मी संस्कृतियों की मौलिक कमजोरी उनके चारित्रिक दोष में है| अब्रह्मी संस्कृतियाँ व्यक्ति के व्यक्तिगत विवेक का उन्मूलन कर उसे बिना सोचे समझे हठी मजहबी सिद्धांतों की अधीनता को स्वीकार करने के लिए विवश करती हैं| मूसा व मुहम्मद ने मानव की पीढ़ियों से संचित व हृदय से सेवित सच्चरित्रता, सम्पत्ति व उपासना की स्वतंत्रता और नारियों की गरिमा व कौमार्य को लूट व यौनाचार के लोभ में इनके अनुयायियों से छीन लिया है| कुरान व बाइबल हर विवेक, तर्क या प्राकृतिक सिद्धांतों के ऊपर हैं| वह बात भी और वह निंदनीय कार्य भी सही है, जिसे स्वाभाविक नैतिकता की कसौटी पर स्वयं इन पैगम्बरों के गढे ईश्वर भी सही नहीं मानते, क्यों कि पैगम्बरों ने ऐसा कहा व किया था| उदाहरण के लिए चोरी, लूट व नारी बलात्कार अब्रह्मी संस्कृतियों में निषिद्ध है| लेकिन अविश्वासी धर्मावलंबियों की लूट (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व नारी बलात्कार विश्वासियों के स्वर्ग प्राप्ति का एकमात्र उपाय है| अब्रह्मी संस्कृतियों के ईश्वरों ने विवेक व सहज अंतरात्मा के उद्गार को निषिद्ध कर दिया है| (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५) अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों के बाइबल व कुरान के आज्ञाओं व मुहम्मद व ईसा के कार्यकलापों पर कोई प्रश्न नहीं कर सकता| (कुरान ५:१०१ व १०२). (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). मानव अपनी तर्क-बुद्धि से कुछ भी कह या कर नहीं सकता| स्वाध्याय व आत्मचिंतन के लिए अब्रह्मी संस्कृतियों में कोई स्थान नहीं| अशांति, हत्या, लूट व बलात्कार के विरुद्ध भी, जिनका अब्रह्मी संस्कृतियाँ समर्थन करती हैं, अनंत काल से प्रतिपादित वेदों व स्मृतियों का प्रयोग सर्वथा वर्जित है|

उपनिवेश का जो भी निवासी बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान से सतर्क नहीं है और उनसे मुक्ति का मार्ग नहीं ढूँढता उसे नष्ट होना ही पड़ेगा.

मैं इंडिया को उपनिवेश, चर्च, बाइबल, मस्जिद, कुरान, अज़ान और खुत्बों से मुक्त कर भारत बनाना चाहता हूँ. मैकाले के दास बनानेवाली यौनशिक्षा को समाप्त कर ब्रह्मचारी बनानेवाले गुरुकुलों को पुनर्जीवित करना चाहता हूँ. अतएव मैं उपनिवेश की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ का Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन अपराधी हूँ. लेकिन इस धारा के अधीन मेरे अथवा मेरे सहयोगियों के विरुद्ध कभी कोई अभियोग नहीं चला. मेरे और मेरे सहयोगियों के विरुद्ध जो भी अभियोग चल रहे हैं उन धाराओं के अधीन अभियोग चलाने का एलिजाबेथ के उपनिवेश के पास कोई अधिकार ही नहीं है, क्यों कि हमने जो भी किया है, प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया है, जो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ९६ के अधीन अपराध ही नहीं है.

ईसाई व मुसलमान सहित ब्रिटिश उपनिवेश का प्रत्येक निवासी बलिपशु है. यह जानते हुए भी कि उसे कत्ल होना है, वह अपनी रक्षा नहीं कर सकता. बलि देने, दिलाने और देखने वालों को बलिपशु के प्रति सहानुभूति नहीं होती. किसी को भी पाप अथवा अपराध बोध नहीं होता. अपितु सभी को बलि देना एक अत्यंत पवित्र धार्मिक कृत्य प्रतीत होता है. कोई न्यायालय बलिपशु की हत्या के लिए बधिक को मृत्युदंड नहीं दे सकता!

ब्रह्म बनाम पापी या काफ़िर.

परब्रह्म यहूदी, ईसाई और मुसलमान में भेद नहीं करता. बाइबल के वचन के विरूद्ध मनुष्य जन्मना पापी नहीं है. वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| प्रत्येक व्यक्ति को परब्रह्म द्वारा, उसके जन्म के साथ ही दिया गया, ईश्वरीय उर्जा का अनंत स्रोत, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं।  वीर्यवान को पराजित या अधीन नहीं किया जा सकता है| मनुष्य की छोड़िये, वीर्यवान सांड़ को भी अधीन नहीं किया जा सकता और न बांधा ही जा सकता है|

सिंह का कोई संगठन नहीं होता और न ही सिंह किसी दूसरे सिंह को रहने देता है, तथापि, वीर्यवान होने के कारण, पूरे जंगल पर राज्य करता है.

यदि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है, तो मुसलमान पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? मुसलमान साम्प्रदायिक और ईशनिंदक क्यों नहीं हैं? साम्प्रदायिक लोगों और ईशनिन्दकों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ही दे सकते हैं|

यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबल, लूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार प्राप्त है। तकिय्या व कितमान के अधीन यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। इसी प्रकार प्रत्येक ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुए, अज़ान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता है, कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है-फिर भी पुलिस व प्रशासन अज़ान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकते, क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति, राज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। क्यों कि राष्ट्रपति व उसके राज्यपालों ने भारतीय संविधान व कानूनों के रक्षा की शपथ ली है। राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग उपनिवेशवासी के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। आज कल यह लोग नमो द्वारा मनोनीत हो रहे है। जिसे एलिजाबेथ के ईसा ने भारत को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है।

१८६० से आज तक राज्यपाल सहित कोई भी उपनिवेशवासी खूनी, लुटेरे और बलात्कारी अल्लाह के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकता| यहाँ तक कि जज, पुलिस, सांसद और विधायक भी शिकायत नहीं कर सकते| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन विवश राज्यपाल मस्जिदों से अज़ान और अल्लाह के कुरान के अनुसार मुसलमानों को अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमाम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत सन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं कर सके| लेकिन जो भी चर्च, मस्जिद, अज़ान, नमाज़ का विरोध करता है, उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल या राष्ट्रपति की संस्तुति पर प्रताड़ित और जजों द्वारा तबाह कर दिया जाता है| मस्जिद, अज़ान, कुरान और नमाज़ का विरोध करने के कारण मैं स्वयं ४२ बार हवालात काट चुका हूँ| इस्लाम की अधिक जानकारी के लिए नीचे की लिंक देखें,

http://www.aryavrt.com/fatwa

अज़ान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| न मस्जिद से साम्प्रदायिक विद्वेष और वैमनस्य की शिक्षा देना ही उपरोक्त धाराओं के अधीन अपराध माना जाता है|

उपरोक्त सच्चाइयों को जो भी बताता या लिखता है वह भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का अपराधी बन जाता है| यही विधायक सोम के साथ हुआ है| यही मेरे साथ ५० बार हुआ| मेरे विरुद्ध ३ अभियोग आज भी चल रहे हैं|

सत्ता के हस्तांतरण की शर्तों के अंतर्गत कोई जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

ईशनिन्दक के लिए ईसाइयत और इस्लाम में मृत्यु दंड निर्धारित है. मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी प्रसारित किया जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इन कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक मस्जिदों या ईमामों पर क्यों लागू नहीं किया गया?

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन १९९९ से बंद दारा सिंह ने, २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.

 

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२२.    सोनिया आप को वीर्यहीन कर दास बनाने व वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की दौड़ में सबसे आगे है| मात्र ३ वर्षों की अवधि में सोनिया ने, उपनिवेशवासियों को वीर्यहीन करने के लिये, वैदिक सनातन संस्कृति की जड़ें ही नष्ट कर दी हैं|

२३.    जो नौनिहाल दूरदर्शन पर यौन प्रदर्शन और हिंसा देखेंगे उनसे आप ब्रह्मचारी और चरित्रवान बनने की आशा कैसे कर सकते हैं? कमाल की बात तो यह है कि किसी को पता भी नहीं लगता कि हमारी संस्कृति पर कैसे हमला हो रहा है? अतः अब हम किसी कोण से वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी नहीं रह गए| फिर भी किसी के अंदर साहस नहीं कि एलिजाबेथ के उपनिवेश का विरोध कर सके! अज़ान और मस्जिद का विरोध कर सके| मैकाले के यौनशिक्षा केन्द्रों का विरोध कर सके| भारतीय संविधान का विरोध कर सके और न्यायपालिका और विधायिका का विरोध कर सके!

२४.    बारमें दारू पीने वाली बालाओं का सम्मान हो रहा है! विवाह सम्बन्ध अब बेमानी हो चुके हैं|

२५.    पिछले पांच वर्षों में यौनशिक्षा, समलैंगिक विवाह, सहजीवन, सगोत्रीय विवाह, वेश्यावृत्ति, नौकर से कन्या के सम्बन्ध आदि को कानूनी संरक्षण और मान्यता और आप की कन्याओं को मदिरालय में नाचने के लिए संरक्षण और कानूनी मान्यता दे दी गई है| जजों ने सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| एलिजाबेथ के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौनशिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडिया के विद्यालयों में गर्भनिरोधक गोलियां बांटी जाएँगी|

दुबलिश जी! आप चिंता न करें, शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडियन स्कूलों में गर्भनिरोधक गोलियां बांटी जाएँगी| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं|

२६.    http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

 

२७.    २.     गोवा में यौनशिक्षा लागू हो गई है और देश के प्रधानमन्त्री बनने पर नमो पूरे इंडिया में लागू करेंगे| स्कूलों में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलिया बाँटेंगे|

२८.    क्या आप को नहीं लगता कि बढ़ते यौन हिंसाओं के लिए स्वयं भारतीय संविधान और संघ सरकार उत्तरदायी है? यदि नहीं तो अपना अंत निश्चित समझिए|

२९.    ऐसा खिलवाड़ हमेशा आसाराम बापू, जैसे हिन्दू संतो पर ही क्यों होता है? क्यों कि भारत में प्राचीन काल से धर्म का मुख्य आधार ही संत रहे हैं. जबकि इमाम बुखारी, जिसके विरुद्ध ६७ गैर जमानती वारंट हैं, १२ वर्षों से आजाद है. उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? इसलिये नहीं किया गया कि वह मुसलमान है, ईशनिंदा करता है और मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देता है। अगर उसे जेल भिजवा देंगे तो वैदिक सनातन संस्कृति का समूल नाश कैसे होगा? ये विदेशी अच्छी तरह से जानते हैं कि हिन्दू संतो पर आघात करो तो वैदिक सनातन संस्कृति का स्वतः अंत हो जायेगा। जागें! इस षड्यंत्र का खुल के विरोध करें.

३०.    लोग एस तरीके से बोल रहे है की जयसे वे मोकाए वारदाद पे मौजूद थे \ जरा ये भी सोचिये ....सब आशाराम आशाराम करते रह जाओगे और पता भी नहीं चलेगा कि कब 500 टन सोना अमेरिका चला गया"..... आशाराम बापू के चलते कितने मुद्दे दबाये मीडिया ने फ़ूड सिक्यूरिटी बिल, भूमि अधिग्रहण बिल, भटकल, टुंडा की सर्जरी, रूपये का अवमूल्यन, बलात्कार के आरोपी को सिर्फ 3 साल की सजा, तेल की कीमतों का बढ़ना, मंदिरों के सोने को गिरवी रखने का प्लान, ये सब बहस लायक मुद्दे नही थे जरुरी था तो आशाराम बापू की गिरफ्तारी। वास्तव में आसाराम कांड की साजिश रची ही इसलिए गयी है।

 

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Thomas Jee

Namaste

It is really about aggression of Christianity.

Here is the crazy nonsense but the core of Christianity.

John 14:6 Jesus is the only way.

Acts 4:12 There is no salvation in any other religions.

John 3:16-18 Whoever believes in Jesus will not perish. But others are condemned already.

There is no place for this kind of nonsensically bigotry in a society which prides in multitude of beliefs and spiritual ways. By the way, do you agree that all your non-Christian ancestors are gone to Hell?

Thanks, Tilak

 

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शेरजी को नमस्ते!

देवनागरी में विचार रखने के लिए मुझे क्षमा करें. इसके अतिरिक्त विलम्ब से उत्तर देने के लिए भी. कारण? वृद्धावस्था के रोग.

उपनिवेशवासी का कोई देश नहीं होता. इंडिया उपनिवेश है इसका प्रमाण स्वयं नीचे की लिंक में पढ़ लें.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

“An Act to make provision for the setting up in India of two independent Dominions, to substitute other provisions for certain provisions of the Government of India Act 1935, which apply outside those Dominions, and to provide for other matters consequential on or connected with the setting up of those Dominions

“[18th July 1947]”

शब्दों independent Dominions ने हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वतंत्रता के संघर्ष पर पानी फेर दिया. तब से आज तक स्वतंत्रता की मांग ही Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. (http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php ) के अधीन अपराध बन चुका है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj16w33y-swatantrta-divas

बलि के बकरे की भांति ईसाई व मुसलमान सहित उपनिवेशवासी मैं मैं कर रहे हैं. लेकिन जीवित नहीं बच सकते.

शेरजी! मैं आप की आर्थिक क्षमता का ज्ञान नहीं रखता. वृद्ध होने के कारण तमाम रोगों से ग्रस्त हूँ. मेरी २ अरब की सारी सम्पत्ति एलिजाबेथ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लूट ली है.

७७ खेड़ा खुर्द, दिल्ली ११००८२ में मेरे पास १५०० वर्गगज पर भी एलिजाबेथ के उपकरण उप राज्यपाल नजीब जंग हमला कर चुके हैं. हाई वे से लेकर गलियों तक पर अतिक्रमण करवा चुके हैं, ताकि कोई आर्यावर्त सरकार के कार्यालय तक पहुंच ही न सके.

फिर भी आप लायन क्लब से जुड़े हैं. लगभग ५० लाख रु० कार्यालय निर्माण और २ लाख रु० प्रतिमाह वेतन एवं रखरखाव की आवश्यकता है. मैं चाहता हूँ कि आर्यावर्त सरकार का कार्यभार आप सम्हालें.

कृपया इस पत्र को गुप्त रखें.

 

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पाकिस्तान और इंडिया को उपनिवेश बनाये रखने वाली, मनुष्य के पुत्र का मांस खाने, लहू पीने वाली और जो ईसा को राजा न माने, उसे कत्ल करने वाली डायन एलिजाबेथ है. एलिजाबेथ का लक्ष्य क्या है? विवरण जानने के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

उपनिवेशवासी को आजादी कभी नहीं दी गई. इंडिया और पाकिस्तान एलिजाबेथ के स्वतंत्र? उपनिवेश हैं.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस धारा का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है.

कोई अंतर नहीं पड़ता यदि पाकिस्तान इंडिया के पास आ जाये या पाकिस्तान के पास चला जाये उपनिवेशवासी रहेंगे एलिजाबेथ के बलिपशु ही! युद्ध तब भी समाप्त नहीं होगा. क्योंकि वैदिक सनातन संस्कृति और इस्लाम मिटने के बाद युद्ध ईसाई तबकों में होगा. कैथोलिक, प्रोटेस्टेन्ट, आर्थोडोक्स आदि के बीच. परिणाम? डायनासोर की भांति मानवजाति का अंत.

क्या उपनिवेशवासी दास बनाने वाले मैकाले के महंगे यौन व इस्लामी बलात्कार के शिक्षाकेंद्र मकतब व मस्जिद को समाप्त कर अपनी भावी पीढ़ी को ब्रह्मज्ञान और वीर्यरक्षा की निःशुल्क शिक्षा दिलाकर, वीर्यवान, ओजस्वी, तेजस्वी और सम्प्रभु ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को, पुनर्स्थापित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग देंगे?

 

११/१०/१६

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मैं मालेगांव बम कांड में साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त हूँ. साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने प्राथमिक यानी एटीएस की जांच पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यंहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

मैं सभी आरोपों को स्वीकार करता हूँ. मैं एलिजाबेथ का दास क्यों रहूँ? बपतिस्मा/अज़ान द्वारा ईशनिंदा क्यों सुनूं? स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है. मैं स्वयं इस्लाम और ईसाइयत का विरोध करने के कारण ४२ बार जेल गया हूँ. मैं साध्वी प्रज्ञा का सह अभियुक्त भी हूँ और जानना चाहता हूँ कि उपनिवेश, चर्च, मस्जिद, बपतिस्मा, अज़ान, बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध अपराध कैसे है? ब्रिटेन के पास इंडिया को २ भागों इंडिया व पाकिस्तान में बाँटने का अधिकार कैसे था? मैं ब्रिटिश कानूनों को क्यों मानूं?

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ६० व १५९ और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन व दया के पात्र जजों, सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है उसके अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है.

राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं| इन्हीं धाराओं के अधीन मेरे विरुद्ध धारा १९६ के अधीन संस्तुति देकर राज्यपालों ने अब तक ५० अभियोग चलवाये| ३ आज भी लम्बित हैं| मुझे जेल में जहर दिया गया है.  मेरी २ अरब की सम्पत्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से एलिजाबेथ ने लूट ली है.

हम जानना चाहते हैं कि मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ उपनिवेशवासी को प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार देती है. भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार प्राइवेट प्रतिरक्षा के लिए किया गया कोई कार्य अपराध नहीं है. ईसाइयत और इस्लाम अपने अपने हठधर्मिता के अनुसार मानवमात्र को जीने का अधिकार नहीं देते. इन्हीं दोनों धाराओं के अधीन प्रत्येक काफ़िर, मुझे, साध्वी प्रज्ञा व उनके अन्य सह अभियुक्तों को मस्जिद और उसमे एकत्र जिहादियों को नष्ट करने का कानूनी अधिकार है. दोनों धाराएँ इंडियन उपनिवेश में सन १८६० से आज तक लागू हैं. इन धाराओं में, मस्जिद में विष्फोट की तिथि तक, कोई परिवर्तन हुआ हो, तो एलिजाबेथ और उसके जज बताएं. जब परिवर्तन नहीं हुआ तो फिर अपराध कहाँ हुआ? जमानत किसलिए? क्यों बंद किया है हमारे अधिकारियों को? सीधे क्यों नहीं कहते कि एलिजाबेथ को वैदिक सनातन संस्कृति और उसके अनुयायियों को मिटाना है.

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है

http://www.aryavrt.com/babri-affidavits

 

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इस प्रकार साध्वी प्रज्ञा पर आरोप है कि वे मालेगांव मस्जिद कांड में शामिल थीं. दारा, जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ, कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा, धनंजय देसाई, कमलेश तिवारी आदि का गैर कानूनी न्यायिक उत्पीड़न आज तक जारी है.

मस्जिदों से काफिरों के नरसंहार की शिक्षा दी जाती है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाई व मुसलमान सहित किसी उपनिवेशवासी को जीवित रहने का अधिकार नहीं देता. धरती की कोई नारी सुरक्षित नहीं है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) किसी उपनिवेशवासी को सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का अधिकार देता है.

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हमारे जगत गुरु स्वामी अमृतानंद के मुंह में गोमांस ठूसा गया है| हमारी आधुनिक दुर्गा साध्वी प्रज्ञा के रीढ़ की हड्डी तोड़ डाली गई है और हमारे सेनापति प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का पैर तोड़ दिया गया है|

योगगुरु रामदेव यह न भूलें कि वे भेंड़ और एलिजाबेथ के दास हैं| दास के उपनिवेशवासी अधिकार नहीं होते| पांडवों के सामने उनकी पत्नी द्रोपदी नंगी होती रही और वे कुछ न कर सके| अब्रह्मी संस्कृतियों के विरोध के कारण बिना अपराध हमारे जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ और साध्वी प्रज्ञा अक्टूबर २००८ से बंद हैं| योगगुरु रामदेव के गुरु स्वामी शंकरदेव का १४ जुलाई, २००७ से पता नहीं है| इसी आधार पर योगगुरु रामदेव जिंदगी भर जेल में सड़ जायेंगे|

http://www.aryavrt.com/Home/1-wary-of-yogguru-2

बछड़ा जो मस्त और बलवान साँड़ बनने वाला है, उसका अंडकोष चूड़ कर उसे बैल क्यों बना दिया जाता है? क्योंकि सांड़ के कंधे पर बैलगाड़ी का जुआ नहीं रखा जा सकता, सांड़ उसको लेकर कहीं भाग जायेगा, दुर्घटना करा देगा. लेकिन वीर्य विहीन बैल बेचारे को जो भी लाद दीजिये, वह ढोयेगा. अब्रह्मी संस्कृतियों ने अपने अनुयायियों को करीब-करीब ऐसा ही बैल बना दिया है.

यदि शांति चाहिए तो भारतीय संविधान को निरस्त करें| अन्यथा मिट जायेंगे| क्यों कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का एक फंदा (बूबी ट्रैप Booby trap) है|

हमने बाबरी ढांचा गिराया है| काबा हमारी है| अज़ान गाली है| कुरान सारी दुनियां में फुंक रही है| हम अज़ान नहीं होने देंगे| इंडिया में एक भी मस्जिद नहीं रहने देंगे| क्यों कि मस्जिदों से ईमाम मुसलमानों को अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं| हमारी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन, आत्म रक्षा के अधिकार के प्रयोग के लिए दंडित किया जा रहा है|

नमो तो मोहरा है| देश पर शासन एलिजाबेथ का है| ६ से अधिक वर्षों से मैं साध्वी प्रज्ञा को जेल से मुक्त नहीं करा पा रहा हूँ| हमारा अपराध जानती हैं? हम अज़ान द्वारा की जाने वाली ईशनिंदा से मुक्ति और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा के स्थल मस्जिदों में धमाके कर रहे हैं| यानी कि आत्मरक्षा कर रहे हैं|

साध्वी प्रज्ञा का जो चित्र समाचार में दिखाया गया है, वह झूठा है| प्रज्ञा जी खड़ी ही नहीं हो सकतीं| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है| इसी प्रकार जो मोटरसाइकिल मालेगांव में घटना स्थल पर पाई गई है, उसका इंजन और चैसिस नम्बर मिटा हुआ है|

साध्वीजी के गिरफ्तारी के तत्काल बाद हमारे जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ ने समाचारपत्रों को एक प्रेस विज्ञप्ति भेजा था, जिसे किसी ने प्रकाशित नहीं किया| जो मीडिया में आया उसे नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

अज़ान हमारे ईश्वर की निंदा है और मस्जिदों से एलिजाबेथ और जजों सहित सभी काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है| अतएव अज़ान को बंद कराना और मस्जिदों को नष्ट करना भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन हमारा कानूनी अधिकार है| जिन्हें स्वतंत्रता, सम्मान और अपनी वैदिक सनातन संस्कृति से मोह हो, हमारी सहायता करें|

जब गुरुकुल और योग्य आचार्य नहीं रहेंगे, तो आप का काल्पनिक ऐतिहासिक पुरुष कैसे उदित होगा? मैं सपने में नहीं जीना चाहता. यदि आत्मरक्षा अपराध है, तो वह अपराध मैं १९९१ से ही कर रहा हूँ. हम काफ़िर लोग संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी हमें कत्ल करेंगे| आत्म रक्षा हमारा मानवाधिकार है| हम अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों को हमारा उत्पीड़न करने का कोई अधिकार नहीं है| हम मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए धरती के प्रत्येक मनुष्य से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

अतएव नमो से कहिये, कि भारतीय संविधान की शपथ लेने के कारण वे अब्रह्मी संस्कृतियों के विरुद्ध नहीं लड़ सकते, लेकिन प्रधानमंत्री राव की भांति हमारी सहायता कर सकते हैं|

हम काफ़िर लोग संस्कृतियों के विरुद्ध युद्ध लड़ रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी हमें कत्ल करेंगे| आत्म रक्षा हमारा मानवाधिकार है| हम अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं| एलिजाबेथ के उपनिवेश के दासों को हमारा उत्पीड़न करने का कोई अधिकार नहीं है| हम मानवमात्र को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए धरती के प्रत्येक मनुष्य से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| हम मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस बम विष्फोट के अभियुक्त हैं| साध्वी प्रज्ञा व अन्य आर्यावर्त सरकार के अधिकारियों को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को बचाने के लिए सताया जा रहा है| ताकि मानवजाति सम्मानपूर्वक न जी सके जिए तो शासकों का दास बनकर|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है.

उपनिवेश से मुक्ति के लिए लड़ रहे हैं. क्या मीडिया ने अपने सहित देश के उपनिवेशवासियों की दासता का विरोध किया?

२३ अक्टूबर, २००८ से साध्वी प्रज्ञा सहित हमारे ९ अधिकारी जेलों में बंद हैं| हमको जेल में बंद करने और हमारे साथ पाशविक व्यवहार करने एलिजाबेथ नहीं आई?

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार से विरोध करने के कारण मेरे विरुद्ध ५० अभियोग चले और अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी मस्जिद और अज़ान का २००८ से जेलों में बंद हैं. संदेश अत्यंत स्पष्ट है| वैदिक सनातन धर्म के किसी अनुयायी को न एलिजाबेथ जीवित छोड़ेगी और हामिद अंसारी|

लेकिन अज़ान, कुरान और मस्जिद का विरोध घोर अपराध है| अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के ९ अधिकारी मस्जिदों में विष्फोट के अपराध में जेलों में हैं|

जिन मस्जिदों से हमारे इष्टदेवों की निंदा की जाती है और हमें कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं, उनमे विष्फोट अपराध कैसे है? अपराधी तो बाइबल, कुरान, भारतीय संविधान, राष्ट्रपति और राज्यपाल हैं, जो मानवजाति के हत्यारों का महिमामंडन, संरक्षण, पोषण व संवर्धन कर रहे हैं? नमो के पास साहस हो तो साध्वी प्रज्ञा को मुक्त कराने, इस्लाम और ईसाइयत को मिटाने और गुरुकुलों की स्थापना में हमें सहयोग दें| खुल कर नहीं तो छिप कर ही. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/astitv-ka-snkt

जिन मस्जिदों से हमारे इष्टदेवों की निंदा की जाती है और हमें कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं, उनमे विष्फोट अपराध कैसे है? अपराधी तो बाइबल, कुरान, भारतीय संविधान, राष्ट्रपति और राज्यपाल हैं, जो मानवजाति के हत्यारों का महिमामंडन, संरक्षण, पोषण व संवर्धन कर रहे हैं? नमो के पास साहस हो तो साध्वी प्रज्ञा को मुक्त कराने, इस्लाम और ईसाइयत को मिटाने और गुरुकुलों की स्थापना में हमें सहयोग दें|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए ईसाई न्यायिक जांच (Inquisition) और बपतिस्मा में लिप्त है और मुसलमान अज़ान और खुत्बों में.

जब कि इन संस्कृतियों को धरती पर रहने का अधिकार ही नहीं है| इमाम अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा प्रतिदिन आप व विश्व के सर्वशक्तिमान ओबामा सहित सभी अविश्वासियों के हत्या की, नारियों के बलात्कार की, लूट की और उपासना स्थलों के विध्वंस की निर्विरोध चेतावनी देते रहते हैं| राष्ट्रपति ओबामा सहित सभी लोगों ने भय वश नहीं, बल्कि मानवमात्र को दास बनाने के रणनीति के अंतर्गत, अपना जीवन, धन, नारियां और सम्मान इस्लाम के चरणों में डाल रखा है और दया की भीख मांगने को विवश हैं|

 ई०स० ६३२ से आज तक इस्लाम और मस्जिद का एक भी विरोधी सुरक्षित अथवा जीवित नहीं है| चाहे वह आसमा बिन्त मरवान हों, या अम्बेडकर या शल्मान रुश्दी हों, या तसलीमा नसरीन या जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ या साध्वी प्रज्ञा हों अथवा मैं| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

राजदीप सर देसाई मूल समस्या के एक मामूली हिस्से हैं.

http://society-politics.blurtit.com/23976/how-did-galileo-die-

http://www.aryavrt.com/asma-bint-marwan

http://www.aryavrt.com/asama-binta-maravana

जिस प्रकार इस्लाम की विरोधी आसमा बिन्त मरवान को वीभत्स विधि से मुहम्मद के अनुयायियों ने उसके ५ अबोध बच्चो सहित कत्ल किया था, उसी प्रकार कैंसर से पीड़ित साध्वी प्रज्ञा को एलिजाबेथ के मातहतों ने जीवित ही मार डाला है| उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है और कर्नल पुरोहित का पैर तोड़ डाला गया है| हमारे जगतगुरु के मुहं में गोमांस ठूसा गया| शिकायत करने के बाद भी बंधुआ जज कुछ न कर पाए| हमारे ९ अन्य अब्रह्मी संस्कृति विरोधियों को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि हम वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों से बचाना चाहते हैं| साध्वी प्रज्ञा अब्रह्मी संस्कृतियों से वैदिक सनातन संस्कृति को बचाने के प्रयत्न के कारण ही जेल में हैं| राज्यपालों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अनुमति देकर भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन मेरे विरुद्ध अब तक ५० अभियोग चलवाए हैं|

हम माननीय प्रधानमंत्री नमो से आग्रह करते हैं कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर हमारे मालेगांव व अन्य मस्जिदों में विष्फोट के लिए लगे अभियोग वापस लें सबको जेल से मुक्त करें.

मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. उपनिवेश से मुक्ति के लिए युद्धरत हूँ. इसलिए Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php का अपराधी हूँ. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

http://www.aryavrt.com/malegaon-notice-crpc160

साध्वी प्रज्ञा पर आरोप है कि वे मालेगांव मस्जिद कांड में शामिल थीं. यदि शामिल थीं, तो अपराध क्या किया? मस्जिदों से काफिरों के नरसंहार की शिक्षा दी जाती है. भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ साध्वी प्रज्ञा को प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार देती है. भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार प्राइवेट प्रतिरक्षा के लिए किया गया कोई कार्य अपराध नहीं है. ईसाइयत और इस्लाम अपने अपने हठधर्मिता के अनुसार मानवमात्र को जीने का अधिकार नहीं देते. इन्हीं दोनों धाराओं के अधीन प्रत्येक काफ़िर, मुझे, साध्वी प्रज्ञा व उनके अन्य सह अभियुक्तों को मस्जिद और उसमे एकत्र जिहादियों को नष्ट करने का कानूनी अधिकार है. दोनों धाराएँ इंडियन उपनिवेश में सन १८६० से आज तक लागू हैं. इन धाराओं में, मस्जिद में विष्फोट की तिथि तक, कोई परिवर्तन हुआ हो, तो एलिजाबेथ और उसके जज बताएं. जब परिवर्तन नहीं हुआ तो फिर अपराध कहाँ हुआ? जमानत किसलिए? जेल में क्यों बंद कर रखा है? साध्वी जी की रीढ़ की हड्डी क्यों तोड़ी? दवा की आड़ में जहर क्यों दिया?

 

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भूली-बिसरी यादे जिनको भुला दिया सबने।

 

१. यूपी के लोग भिखारी होते हैं- (राहुल गाँधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष)

 

२. पंजाब के 70% लोग नशेड़ी होते हैं–(राहुल गाँधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष)

 

३. 90% बलात्कार तो लड़की की मर्जी से होते हैंधरम वीर गोयत (हरयाणा कांग्रेस, कांग्रेस प्रवक्ता)

 

४. बीवी पुरानी हों जाये तो मजा नहीं आता–(श्रीप्रकाश जैसवाल, कोयला मंत्री कांग्रेस)

 

५. महंगाई अच्छी है, ये तो ऐसे ही बढ़ेगी–(पी चिदंबरम कांग्रेस)

 

६. बलात्कार तो हर जगह होता है–(रेणुका चौधरी, कांग्रेस )

 

७. सोनिया जी कहेंगी तो झाड़ू भी लगाउँग- (भक्त चरणदास, कांग्रेस)

 

८. पाकिस्तान के हिंदुओं को अपने ऊपर हों रहे अत्याचार के सबूत देने होंगे– (सुशील शिंदे, कांग्रेस)

 

९. मैं सोनिया जी के लिए जान तक दे दूँगा–(सलमान खुर्शीद, कांग्रेस)

 

१०. बोफोर्स की ही तरह कोयला घोटाला भी जनता भूल जायेगी– (सुशील शिंदे, कांग्रेस)

 

११. हमारे सैनिकों को पाकिस्तान की सेना ने नहीं बल्कि उनकी वर्दियों में आतंकवादियों ने मारा है- (एके एंटनी, कांग्रेस)

 

१२. पुलिस और सेना के लोग मरने के लिए ही होते हैं–(भीम सिंह कांग्रेस)

 

१३. पीने के लिए पानी नहीं है तो क्या बांधों में पेशाब कर के ला दूं- (अजीत पवार, कांग्रेस)

 

१४. महंगाई ज्यादा सोना खरीदने की वजह से बढ़ रही है–(पी चिदंबरम, कांग्रेस)

 

१५. पुलिस अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को बेवजह परेशान ना करे-(सुशिल शिंदे, कांग्रेस)

 

१६. पैसे पेड़ पर नहीं लगते–(मनमोहन सिंह, कांग्रेस)

 

१७. हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, जिससे महंगाई पर काबू किया जाये–(मनमोहन सिंह, कांग्रेस)

 

१८. गरीबी सिर्फ दिमाग का वहम है–(राहुल गाँधी, कांग्रेस)

 

१९. इस देश को हिन्दुओ से ज्यादा खतरा है–(राहुल गाँधी)

 

२०- बटाला हाउस में आतंकवादियों के मरने पर सोनिया जी बहुत रोयीं थीं- (सलमान खुर्शीद, कांग्रेस)

 

२१- सत्ता ज़हर है और माँ मेरे कमरे में आके रात में रोयीं थी- (राहुल गाँधी, कांग्रेस)

 

२२- देश के संसाधनों पे पहला हक़ मुसलमानों का है- (मनमोहन सिंह, कांग्रेस)

 

२३- भारत को RSS से ज़्यादा खतरा है न कि इस्लामिक आतंकवाद से- (दिग्विजय सिंह, कांग्रेस)

 

२४- केवल मुस्लिम लड़की ही हमारी बेटीयां हैं- (अखिलेष यादव, सपा)

 

२५- इसरत जहाँ मेरी बेटी है- (नितीश कुमार)

 

२६- ओसामा जी- (दिग्विजय सिंह, कांग्रेस)

 

२७- श्री सईद साहब- (सुशिल शिंदे, कांग्रेस)

 

२८- राम एक कल्पना है (कांग्रेस)

 

२९- भगवा और तिलक को देख कर गुस्सा आता है- (मणी शंकर अय्यर, कांग्रेस)

 

३०- मैं हिन्दू नही हूँ- (मनीष तिवारी, कांग्रेस)

 

31. क्या टंच माल है।।।(दिग्विजय सिंह, कांग्रेस)

 

32. पाँच रुपये में गरीवों को भरपेट भोजन मिल जाता है महँगाई कहाँ है- (राज बबर, कांग्रेस)

 

33. गरीबी एक सोच है मानसिक बीमारी है- (राहुल ग़ांधी, कांग्रेस)

 

34. रामायण एक कहानी है राम कभी पैदा नहीं लिए और राम सेतु राम ने नहीं बनाया (कांग्रेस)

 

35. राम एक पियक्कड़ थे-(करुणा निधि, कांग्रेस)

 

36. जो लोग मंदिर जाते है लड़की छेड़ते है- (राहुल ग़ांधी, कांग्रेस)

 

 

 

 

 तीन कांग्रेसियों की कहानी

1. मुफ्ती मोहम्मद सैयद केंद्र में गृह मंत्री ||

December 8 1989 मुफ्ती की बेटी रूबिया सैयद का अफहरण|| नतीजा 13 आतंकियों की रिहाई ||

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2 . सेैफुदीन सौज .. पार्टी के वरिष्ट नेता ..

August 1991 को सौजी की बेटी नाहीदा सौज का अपरहण ||

नतिजा जेल में बंद 7 आतंकियों की रिहाई ||

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3 गुलाम नबी आजाद ...तब कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार .. अब राज्यसभा में विपक्ष के नेता ||

September 22,1991 आजाद के साले तासादुक्क का अपहरण ||

नतीजा 21 आतंकियों की रिहाई ||

 

आओ आज इन सबके महान कार्यों को याद करें ||

और हां पोस्ट शेयर करने में हिचकिचाहट हो तो धर्म परिवर्तन करने में ही भलाई है ||

 

पिछले छ: दशको के पाप को आज १७ जवानो के आहुति के रुप मे देना पड़ा है⁠⁠⁠⁠

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शेरजी को नमस्ते!

देवनागरी में विचार रखने के लिए मुझे क्षमा करें;

उपनिवेशवासी का कोई देश नहीं होता.

टाटा के दरियादिली के लिए धन्यवाद. लेकिन क्या इस दरियादिली से उपनिवेशवासियों को एलिजाबेथ के दासता से मुक्ति मिल जायेगी?

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

सेना देश के सीमाओं की रक्षक है| इंडिया में सेना का मनोबल तोड़ने के लिए, १९४७ से ही षड्यंत्र जारी है| क्योकि एलिजाबेथ को वैदिक सनातन संस्कृति मिटाना है. १९४७ में इंडियन सेना पाकिस्तानियों को पराजित कर रही थी| सेना वापस बुला ली गई|

सैनिक हथियार और परेड के स्थान पर जूते बनाने लगे| परिणाम १९६२ में चीन के हाथों पराजय के रूप में आया|

१९६५ में जीती हुई धरती के साथ हम प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को गवां बैठे|

१९७१ में पाकिस्तान के ९३ हजार युद्ध बंदी छोड़ दिए गए लेकिन इंडिया के लगभग ५० सैनिक वापस नहीं लिये गए|

एलिजाबेथ के लिए इतना कुछ करने के बाद इंदिरा और राजीव दोनों मारे गए|

कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को वापस जाने दिया गया| अटल विरोध करते तो वे भी मारे जाते|

नमो अगर सैनिकों का संहार होने से रोकेंगे, तो एलिजाबेथ द्वारा मिटा दिए जायेंगे. मैं आप लोगों से बारम्बार आग्रह कर रहा हूँ कि लोगों को उपनिवेश का विरोध करने के लिए जागृत कीजिए.

नमो या तो एलिजाबेथ की दासता करते रहेंगे और वैदिक सनातन संस्कृति मिटायेंगे अथवा एलिजाबेथ नमो को कत्ल करवा देगी| आप लोग नमो को कत्ल क्यों करवाना चाहते हैं?

हालात इतने भयानक हैं कि भयंकर बेरोज़गारी के बाद भी कोई नेवी में जाना नहीं चाहता है. मेरे मोबाईल पर प्रतिदिन नेवी में नौकरी करने के लिए विज्ञापन आ रहे हैं. मैं आप लोगों से बारम्बार आग्रह कर रहा हूँ कि लोगों को उपनिवेश का विरोध करने के लिए जागृत कीजिए.

सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही आक्रांता अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ को ब्रिटिश संसद में १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार इंडिया को स्वतंत्रता नहीं दी गई, अपितु इंडिया का दो स्वतंत्र? उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया।

भारतीय संविधान की व्याख्या अनुच्छेद १४७ के अनुसार गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट १९३५ तथा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ (indian independence act 1947) १९४७ के अधीन ही की जा सकती है दोनों एक्ट ब्रिटिश सरकार ने बनाये व लागू कियेl

ध्यान दें! यह अधिनियम ब्रिटिश संसद में बना है और इसमें परिवर्तन का अधिकार भी ब्रिटिश संसद को ही है. यानी कि इंडिया व पाकिस्तान के उपनिवेशवासी आज भी ब्रिटेन के स्थायी दास (बलिपशु) हैं.

मानवजाति को ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान से खतरा है. आप लोग जरा उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान. खुत्बों, ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान का विरोध करके दिखाएँ.

भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, का जिसने भी विरोध किया वह अम्बेडकर सहित जीवित नहीं बचा. चुनाव धोखा है| चुनाव द्वारा मतदाता (Voter) भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म नहीं बदल सकते.

सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को उपनिवेशवासियों को कत्ल करने का, नारियों के बलात्कार का और इंडिया को दार उल इस्लाम बनाने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) किसी उपनिवेशवासी को सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता|

हम आज भी ईसाई व मुसलमान को इंडिया में रखे जाने पर, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान, खुत्बों, हज अनुदान, ईशनिंदा के बदले में ईमामों के वेतन देने आदि पर आपत्ति नहीं कर सकते.

बपतिस्मा व अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान अविश्वासियों को कत्ल करने का उपदेश देता है| राज्यपाल का मनोनयन ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी को नष्ट करने के लिए किया गया है.

बाइबल, बपतिस्मा और चर्च के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४)

ईसाई बपतिस्मा को अस्तित्व के लिए आवश्यक बताता है और मुसलमान काफ़िर को कत्ल करने से जन्नत पाता है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से, मजहब का पालन करते हुए न्यायिक जांच (Inquisition) और बपतिस्मा में लिप्त ईसाई और अज़ान और खुत्बों में लिप्त मुसलमान असहिष्णु नहीं हैं! लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन ईशनिंदा और हत्या का विरोध करने वाले हिंदू असहिष्णु हैं!

जो बपतिस्मा नहीं लेते, उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा, वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे|’ कहने वाले सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष कैसे है?

इस्लाम ने ईश्वर को अपूज्य घोषित कर दिया है| (अज़ान). मात्र अल्लाह पूज्य है’, (अज़ान, कुरान ३:१९), कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? क्योंकि कुरान के अनुसार दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| (कुरान ३:१९)और जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...” (कुरान ३:८५).

 

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लेकिन सत्ता ले कर भी आप करेंगे क्या? आप के पास नपुंसकों की सेना है, क्यों कि आप के यहाँ निःशुल्क गुरुकुलों में अपने बच्चों को भेजने वाला कोई नहीं. बैल से खेती करने वाला कोई नहीं. चरित्र किसी के पास नहीं.

हम एलिजाबेथ के दास तो अपने धर्म पुस्तकों को स्कूलों में पढ़ा भी नहीं सकते, लेकिन आप के आदर्श अमेरिका में आज भी प्रेसिडेंट बाइबल की ही शपथ लेता है|

क्या आप इंकार कर सकते हैं कि पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| और यही आप के आदर्श अमेरिका ने किया भी है, लेकिन आप कह भी नहीं सकते|

वैदिक सनातन धर्म किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो मात्र वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है|

इन खूनियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन अपनी संस्कृति को बनाये रखने का यानी मानवमात्र की हत्या का अधिकार क्यों दिया गया है? विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और नमो सहित ५३ उपनिवेशों के शासक या उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के पशु से भी गए बीते शोषित जीव. वे तभी तक जीवित रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ का हित सधेगा| एलिजाबेथ के हितों पर आंच आई तो नमो भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी के तरह कत्ल कर दिए जायेंगे|

मुसलमान तभी तक जीवित हैं जब तक वैदिक सनातन संस्कृति जीवित है| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिटी, तुर्की के खलीफाईराक के सद्दाम और अफगानिस्तान के भांति इस्लाम मिट जायेगा और अल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा| लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होगी| तब मानवजाति को मिटाने के लिए कथोलिक और प्रोटेस्टेन्ट आदि के बीच युद्ध होगा| हिम्मत हो तो वे उपनिवेश से मुक्ति हेतु आर्यावर्त सरकार का सहयोग करें|

एक ओर पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा काफिरों को कत्ल कर देना ही काफिरों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है|

दूसरी ओर वैदिक सनातन धर्म जो किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो मात्र वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

मुसलमान शासकों के अंदर साहस हो तो मुझसे मिलें और मिल कर उपनिवेश वाद को समाप्त करने के लिए युद्ध लड़ें| माननीय प्रधानमंत्री नमो के विरुद्ध लड़ने से उनको कुछ भी नहीं मिलने वाला|

पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा काफिरों को कत्ल कर देना ही काफिरों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है. अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रोक लेना ही मानवजाति को डायनासोर की भांति लुप्त करने के लिए पर्याप्त है.

फिर भी इनको उपनिवेशवासी स्वतंत्रतामानते हैं|. ईराक के सद्दाम रहे हों या ओसामा अथवा उनका इस्लाम, ईसा उनका दोहन कर रहा है|

दोनों भष्मासुर ईसाइयों ने ही तैयार किये| काम लेकर ठिकाने लगा दिया| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो जैसे इस्लाम के खलीफा मिटे, वैसे ही ईसाई इस्लाम को भी मिटा देंगे| मुसलमान और उनका इस्लाम इस लिए जीवित हैं कि वैदिक सनातन संस्कृति मिटी नहीं है|

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान ने मानवमात्र को दास बनाया हुआ है| क्या ईसाईयों व मुसलमानों को पता है कि इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं? इराक में मुसलमान ही मुसलमान को क्यों कत्ल कर रहे हैं?

इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ ईसाई व मुसलमान देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं| {भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता}. इंडिया को समाप्त करने के बाद भी ईसाई व मुसलमान एलिजाबेथ के दास ही रहेंगे|

इंडिया के भूभाग पाकिस्तान और बंगलादेश पर मुसलमानों ने इस्लामी राज्य तो बना लिए, लेकिन दोनों भूभागों पर शासन एलिजाबेथ का है. क्या मुसलमान एलिजाबेथ के उपनिवेश के विरुद्ध जिहाद करेंगे? उन्हें जीवित बचना हो तो उपनिवेश से मुक्ति हेतु आर्यावर्त सरकार से मिलें.

उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान ३:१९)]. नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा अथवा ईसाई| [(कुरान २३:६ व ७०:३०) (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. सम्पत्ति रखने का अधिकार नहीं| [(भारतीय संविधान ३९(ग), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. इसे आप स्वतंत्रतामानते हैं|

एलिजाबेथ को अर्मागेद्दन लाना है| ईसा ने दस करोड से अधिक अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया और अब विश्व के सभी धर्मों को नष्ट कर मात्र अपनी पूजा कराएगा!

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन, आत्म रक्षा के लिए विरोध करने वाले को, उपरोक्त कानूनों के बल पर राज्यपाल उत्पीड़ित करते हैं.

मुअज्ज़िन/ईमाम द्वारा

मस्जिदों से प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर लाउडस्पीकर पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू".

इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|”

यह पंथनिरपेक्ष कथन है, जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता! (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर इनको इंडिया में रोका गया है| मौत के फंदे और परभक्षी भारतीय संविधान से प्रायोजित अब्रह्मी संस्कृतियों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल विवश कर दिए गए हैं| लेकिन भारतीय संविधान का विरोधी कोई नहीं है|

काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” अज़ान से साम्प्रदायिक सौहार्द कैसे बनता है? क्या मैं जान सकता हूँ कि ईशनिंदा और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे देने वाले मस्जिदों को उपनिवेशवासी क्यों रहने दें रहे हैं?

 

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महामहिम श्री पॉउल जी!

राज्यपाल, उख सरकार, राजभवन, देहरादून, २८१००१.

विषय: आप का उख के उपनिवेशवासियों को संदेश.

संदर्भ: पेंशन.

आप को महामहिम कहना महामहिम शब्द का अपमान है.

आप उपनिवेशवासियों के चुने प्रतिनिधि नहीं हैं. एलिजाबेथ ने आप का मनोनयन उपनिवेश को स्थायी बलिपशु बनाये रखने के लिए और वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए कराया है. आप ने भारतीय संविधान और कानूनों के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की शपथ ली है. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php उपनिवेश विरोधी को फांसी देने के लिए संकलित की गई है और मस्जिद, अज़ान और खुत्बे के विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन 

 

10/1/2016

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http://www.pmindia.gov.in/en/interact-with-honble-pm/

 

http://www.aryavrt.com/muj16w39y-vivsh-mhamhim

 

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शेरजी को नमस्ते!

किसान को सांड़ को वीर्यहीन कर दास (बैल) बनाने के लिए उसका बन्ध्याकरण करना पड़ता है| अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी स्वेच्छा से गाजे बाजे के साथ खतना करा कर दास बनते हैं. 

गलत रास्ते पर तो हमें, Indian Education Act, 1858 लागू कर, डाल दिया गया. इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. एलिजाबेथ का लक्ष्य क्या है? विवरण जानने के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

उपनिवेशवासी को आजादी कभी नहीं दी गई. इंडिया और पाकिस्तान एलिजाबेथ के स्वतंत्र? उपनिवेश हैं.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. इस धारा का नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है.

 

१९/०९/१६

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भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) क्यों रहे?

 

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पांडे जी को प्रणाम!

वादे के अनुसार पहले इलुमिनाती का लिंक भेजता हूँ,

https://www.youtube.com/watch?v=PvCtpHaqQCA

इसके अतिरिक्त निम्नलिखित लिंकें देखें,

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

http://www.aryavrt.com/muj15w33-upnivesh-divas

http://www.aryavrt.com/muj15w37y-aapaatkaal-ke_jj

http://www.aryavrt.com/muj15w37by-appeal-khariz

http://www.aryavrt.com/muj15w37ay-azaan-baptisma

http://www.aryavrt.com/Muj15W36by-VIVSH-NMO

http://www.aryavrt.com/muj15w35y-atmghati-lg

http://www.aryavrt.com/muj15w36y-aatankvadi-rajypal

http://www.aryavrt.com/muj15w36ay-vivsh-nmo

http://www.aryavrt.com/muj15w33-upnivesh-divas

http://www.aryavrt.com/muj15w34-orop-kahaanse

http://www.aryavrt.com/muj15w32by-moorkh-isis

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http://www.aryavrt.com/muj14w33-smjhauta

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

http://www.aryavrt.com/muj14w33c-samiksha

 www.aryavrt.com/muj15w25ay-blatkari-asaram

 

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शेरजी को नमस्ते!

जब तक देश एलिजाबेथ का उपनिवेश है, नमो सहित उपनिवेशवासी कुछ नहीं कर सकता.

कुरान के अनुसार मात्र काफ़िर होना या दार उल हर्ब रहना ही जघन्य अपराध है. पंथनिरपेक्ष, सहिष्णु और साम्प्रदायिक सद्भाववादी इस्लाम के कुरान ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९). काफ़िर को कत्ल करना (कुरआन ८:१७) व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का जिहाद (भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से दिया गया काफिरों की हत्या करने का असीमित संवैधानिक मौलिक मजहबी अधिकार) है|

२०वीं सदी का  मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी इनको इंडिया में रखने का जघन्य अपराधी है. नहीं मानते? विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/gandhi-bola     पृष्ठ २५ व २६.

ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षण, पोषण व संवर्धन करने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१), ३९(ग), ६०, १५९ और दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ आदि को मानवजाति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है. यानी मानवमात्र के गले पर रखी तलवार है.

आर्यावर्त सरकार को इस बात का उत्तर चाहिए कि इंडिया को दो भागों में बाँटने का अधिकार जारज षष्टम क्या अधिकार था? अपना ब्रिटिश कानून लागू रखने का एलिजाबेथ को क्या अधिकार है? देश को उपनिवेश बनाने का क्या अधिकार है?

जब तक आप उपरोक्त सवालों का जवाब नहीं लेते, आप सिंधु जल पर ऊँगली नहीं उठा सकते.

 

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शेरजी को नमस्ते!

नमो सहित उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के दास हैं. नमो चाहे जितनी उपलब्धि प्राप्त कर लें, उपनिवेशवासी की स्थिति किसान के पशु की ही रहेगी.

सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

हमारी विनाश की जड़ उपनिवेश, प्रजातंत्र, ईसाइयत और इस्लाम है. जब तक Indian Independence Act, 1947, British Nationality Act, 1948, Indian Constitution अस्तित्व में रहेगा, हम तिल तिल कर मिटते रहेंगे.

 

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कमलेश तिवारी पर रासुका.

Muj16W37DY GRUPNSA 16912

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१२/०९/१६

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०८/०९/१६

मैं बाइबल, कुरान, भारतीय संविधान और उपनिवेश से मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा हूँ. असहिष्णु, अपराधी, आदिम एवं असभ्य इंडियन हूँ.

http://biblemitr.com/bible.php?BookType=NEW&BookID=47&Chapter=5

17) ''यह न समझो कि मैं संहिता अथवा नबियों के लेखों को रद्द करने आया हूँ। उन्हें रद्द करने नहीं, बल्कि पूरा करने आया हूँ।

18) मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ- आकाश और पृथ्वी भले ही टल जाये, किन्तु संहिता की एक मात्रा अथवा एक बिन्दु भी पूरा हुए बिना नहीं टलेगा।

 

 

०७/०९/१६

 

ब्राह्मण और छुआछूत

 

 

http://www.aryavrt.com/indian-educationact-1858hd

 

 

http://www.aryavrt.com/muj16w36y-gruk-pension-16903

 

http://www.aryavrt.com/kl-rtireply-13830

 

०२/०९/१६

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विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-  http://www.aryavrt.com/al-taqiyya

 

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वह शब्दकोश यानी ‘DICTIONARY’ उर्दू मे है और सुई वालां, दिल्ली ११०००६ से प्रकाशित हुई थी. उसमे हिंदू का अर्थ दिया हुआ था, शब्दकोश का नाम है, ‘फिरोज-उल-लुगातजिसमें हिंदू का अर्थ हिंदुस्तान का रहने वाला, चोर, लुटेरा, गुलाम, कालाछपा है| १९९३ मे मैंने सर्वोत्तम न्यायालय मे एक जनहित याचिका लगाई थी. जिसमे शब्दकोश की प्रति संलग्न की थी. अब विवाद के कारण उसका प्रकाशन संभवतः बंद है.

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शेरजी को नमस्ते!

देश को VT पर न उलझाइए.

उपनिवेशवासी को आजादी कभी नहीं दी गई. इंडिया और पाकिस्तान एलिजाबेथ के स्वतंत्र? उपनिवेश हैं.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

यदि १८ जुलाई, १९४७ के बाद आजतक उपरोक्त अधिनियम मे कोई संशोधन हुआ हो तो मुझे बताइये.

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गांधी ने ही मुसलमानों को इंडिया में रोका. पृष्ठ ४ से ६ तक.

http://www.aryavrt.com/gandhi-bola

https://dochub.com/ayodhyaprasadtripathi/lPoLxv/gandhi-bola?pg=25

https://dochub.com/ayodhyaprasadtripathi/lPoLxv/gandhi-bola?pg=26

 

+++

~ अभिजीत

[8/26, 17:03] +91 99351 11725: ● अमेरिका कश्मीर पर कब्जा करना चाहता

था ???

.

कुछ साल पहले (जुलाई 2009) अमेरिका कि

विदेश मंत्री हेलेरी कलिंटन भारत आई ! और

हमारे यहाँ एक tv चैनल जिसका नाम आजतक है !

आजतक के प्रभु चावला ने उसका interview

लिया ! और interview मे एक ऐसा सवाल पूछा !

जिसका जवाब गलती से हेलेरी कलिंटन ने सच बता

दिया !! (कई बार ऐसा हो जाता मुह से कोई

छुपाने वाली बात सच निकाल जाती है !!) प्रभु

चावला ने पूछा कि अमेरिका ने पिछले 50 साल

से united nation मे कश्मीर मुद्दे पर भारत का

हमेशा विरोध किया है ! पाकिस्तान का

साथ दिया है क्यूँ ??? ।। (आप जानते है 1952 -53

से जम्मू कश्मीर का मुद्दा नेहरू कि मूर्खता के

कारण united nation मे है ! वरना युद्ध मे तो

भारतीय सेनिकों ने पाकिस्तान को बुरी रोंद दिया था! और दो दिन अगर और मिलते तो लाहोर भी भारत मे आ जाता ! तब नेहरू को

internationalism याद आ गया ! और बिना मतलब

के मुद्दा united nation मे ले गया ! और तब से

अमेरिका उसको दबा कर बैठा है ! और हमेशा

भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देता

गया !)). तो प्रभु चावला ने पूछा ! एक तरफ आप

कहते है भारत से रिश्ते अच्छे बनाने है और ! आपने

हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है ! आखिर

आप चाहते क्या है ?? तो हेलेरी कलिंटन ने गलती

से बोल दिया कि हमारी अमेरिका की संसद मे

प्रस्ताव पारित हुआ है ! कि जम्मू कश्मीर पर हमे

सेनिक अड्डा बनाना है ! तो उससे पूछा प्रस्ताव

कब पारित हुआ था ?? तो उसने कहा 1989 मे !!!

तो उससे पूछा प्रस्ताव नमबर ??! तब एक दम हलेरी

कलिंटन को लगा कुछ गलत बोल दिया है ! तो

उसने बात को घूमा दिया ! और कहा मुझे

ज्यादा नहीं मालूम ! बस ऐसा है वैसा है !!

. _

श्री राजीव दीक्षित जी वो interview सुन

रहे थे ! तो उन्होने बिना देरी किए हुये

अमेरिका मे अपने कुछ दोस्तो को फोन लगाया

और कहा ! पता करो 1989 मे अमेरिका कि संसद

मे ऐसा कौन सा प्रस्ताव पारित हुआ ?? जिसने

कहा गया अमेरिका को जम्मू कश्मीर चाहीये

वहाँ सेनिक अड्डा बनाने के लिए ?? तो पता

चला प्रस्ताव का नंबर है 657 और 1989 को

अमरीकी संसद मे पास हुआ !! और उसमे कहा गया

है कि एक न दिन तो अमेरिका को जम्मू कश्मीर

पर कब्जा कर सैनिक अड्डा बनाना ही है ! क्यूँ ??

कारण एक ही है ! जम्मू कश्मीर ही एक ऐसा area

है ! जहां अमेरिका सैनिक अड्डा बनाकर चीन

,भारत और पाकिस्तान तीनों पर नजर रख

सकता है ! और भविष्य मे कभी चीन या भारत पर

हमला करना पड़े ! तो उससे बढ़िया को स्थान

नहीं ! तो जम्मू कश्मीर की लड़ाई पाकिस्तान

नहीं लड़ रहा है बल्कि अमेरिका लड़ रहा है, और

जम्मू कश्मीर को भारत से अलग कर दोये बोलने

वाले कश्मीरी नेताओं को अमेरिका का धन और

सुरक्षा दोनों मिल रहा है । यासीन मलिक

को जुकाम हो जाए तो ये वाशिंगटन पोस्ट की

हेडलाइन बनती है, जिस यासीन मलिक को

हमारे देश में कोई पत्रकार पूछता नहीं उस

यासीन मलिक का आधे-आधे पन्ने का इंटरव्यू

अमेरिका के अख़बारों में आता है । चुकी

यासीन मलिक को अमेरिका की शह है इसलिए

यासीन मलिक पर कभी आतंकवादी हमला नहीं

होता । और मुझे दुःख है ये कहते हुए कि जो

कश्मीरी नेता जम्मू कश्मीर को अलग करने की

बात करता है उसको भी सबसे ज्यादा सुरक्षा

भारत सरकार उपलब्ध कराती है.

+++

शोभा डे और मांस:

शोभा डे नाम की एक प्रख्यात लेखिका की टिप्पणी -

"मांस तो मांस ही होता है,

 चाहे गाय का हो,

या बकरे का,

या किसी अन्य जानवर का......।

 

फिर,

 हिन्दू लोग जानवरों के प्रति अलग-अलग व्यवहार कर के

क्यों ढोंग करते है कि बकरा काटो,

पर, गाय मत काटो ।

ये उनकी मूर्खता है कि नहीं......?"

अंकुर जी!

आप के लिए बाप बेटी, भाई बहन का यौनाचार निंदनीय हो सकता है, लेकिन अब्रह्मी संस्कृतियों के फलने फूलने के लिए यह सर्वमान्य है.

 

 

जवाब -1.

             बिल्कुल ठीक कहा शोभा जी आप ने ।

 मर्द तो मर्द ही होता है,

        चाहे वो भाई हो,

या

पति,

या

बाप,

या

बेटा ।

फिर, तीनो के साथ आप अलग-अलग व्यवहार क्यों करती हैं ?

 

क्या सन्तान पैदा करने,

या यौन-सुख पाने के लिए पति जरुरी है ?

भाई, बेटा, या बाप के साथ भी वही व्यवहार किया जा सकता है,

 

 जो आप अपने पति के साथ करती हैं ।

 

ये आप की मूर्खता और आप का ढोंग है कि नहीं.....?

 

जवाब-2.

            घर में आप अपने बच्चों और अपने पति को खाने-नाश्ते में दूध तो देती ही होंगी, या चाय-कॉफी तो बनाती ही होंगी...!

जाहिर है, वो दूध गाय, या भैंस का ही होगा ।

          तो, क्या आप कुतिया का भी दूध उनको पिला सकती हैं, या कुतिया के दूध की भी चाय-कॉफी बना सकती हैं..?

             तो, दूध तो दूध, चाहे वो किसी का भी हो....!!

       ये आप की मूर्खता और आप का ढोंग है कि नहीं......?

प्रश्न मांस का नहीं, आस्था और भावना का है ।

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प्रणाम राखित जी!

उपनिवेशवासियों पर शासन करना श्वेतों का उत्तरदायित्व है. एलिजाबेथ अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन कर रही है. उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

http://biblemitr.com/bible.php?BookType=NEW&BookID=49&Chapter=24

44) ईसा ने उन से कहा, ''मैंने तुम्हारे साथ रहते समय तुम लोगों से कहा था कि जो कुछ मूसा की संहिता में और नबियों में तथा भजनों में मेरे विषय में लिखा है, सब का पूरा हो जाना आवश्यक है''

 

मैं उपनिवेश से मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा हूँ. उपरोक्त लेखन का परिणाम भलीभांति जानता हूँ. अपराधी, आदिम एवं असभ्य इंडियन हूँ.

http://biblemitr.com/bible.php?BookType=NEW&BookID=47&Chapter=5

17) ''यह न समझो कि मैं संहिता अथवा नबियों के लेखों को रद्द करने आया हूँ। उन्हें रद्द करने नहीं, बल्कि पूरा करने आया हूँ।

 

18) मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ- आकाश और पृथ्वी भले ही टल जाये, किन्तु संहिता की एक मात्रा अथवा एक बिन्दु भी पूरा हुए बिना नहीं टलेगा।

दास बनाने का क्रमिक इतिहास|

मानव जाति को वीर्यहीन कर पराजित व दास बनाने का षड्यंत्र तो मूसा ने खतना द्वारा लगभग ३२०० वर्षों पूर्व ही प्रारम्भ कर दिया था| मैकाले ने गुरुकुलों को मिटा कर उसे आगे बढ़ाया| यह संस्कृतियों का युद्ध है और इसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देकर नहीं लड़ा जा सकता| या तो अब्रह्मी संस्कृतियों रहेगा अथवा वैदिक सनातन संस्कृति|

क्या नमो हमें भारत दिला देंगे?

मूसा पहला व्यक्ति था जिसने लूट, बलात्कार और हत्या को मन-गढ़न्त जेहोवा द्वारा घोषित हठधर्म बताया| मूसा ने मिस्र के मूल निवासियों और उनकी संस्कृति का विनाश कर दिया| आज उसी मिस्र से यहूदी लुप्त हो गए| नाजी मिटे, समाजवादी मिटे| दैत्य और रक्ष संस्कृतियाँ भी मिट गई| अब अब्रह्मी संस्कृतियों की बारी है| आर्यावर्त सरकार को सहयोग तो दें|

क्या नमो खतना बंद करा देंगे?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों की आर्थिक व धार्मिक स्वतंत्रता, धरती, देश, सम्पत्ति व नारियां उनसे चुरा कर संयुक्त रूप से ईसाइयों व मुसलमानों को सौँप दिया गया है|

क्या कोई किसी ईसाई या मुसलमान के विरुद्ध ईशनिंदा और कत्ल करने के लिए शिक्षा देने के अपराध में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चलाने की मांग कर सकता है?

हमने ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों का प्रसन्नतापूर्वक बहिष्कार कर रखा है| मैकाले के महंगे स्कूल में यौनशिक्षा दिलाने के लिए हम सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं|

अतः आप जैसे विद्वतजनों से आग्रह करता हूँ कि आप लोग महामहिम बान की मून को विरोध पत्र भेज कर मुझे तुरंत मृत्युदंड दिलाएं.

संविधान के अनुच्छेद ३१ के संशोधन को मान्यता, कुरान व बाइबल को संरक्षण (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कन्याओं को पब में शराब पीने और नंगे नाचने का अधिकार, सगोत्रीय विवाह के कानून तो जजों ने ही पास किये हैं| बचना हो तो एलिजाबेथ को जेल भेजने में हमें सहयोग दीजिए|

रुडयार्ड किपलिंग जैसे लोगों ने वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी आदिमों पर शासन करने हेतु "श्वेतों का उत्तरदायित्व" के रूप में एक पुराणरूढ़ दर्शन (मिथ्) ही प्रस्तुत कर लिया है. इंडियन उपनिवेश के तो राष्ट्रगान के अनुसार ही एलिजाबेथ आज भी हम उपनिवेशवासियों की अधिनायक और भाग्य विधाता है.

इसी आधार पर "श्वेत पुरुषों के दायित्व" का सिद्धांत विकसित हुआ है। शासितों में आत्मविश्वास का लोप सामान्य बात है। फलत: सर्वमान्य विश्वास की बात ही नहीं उठ सकती। सारा शासन अप्रत्यक्ष रूप से होता रहा है। शासन की भाषा बाहर से आने पर राष्ट्रीय भाषा संस्कृतका विकास अवरुद्ध हो गया है। सरकारी पदों पर अल्पसंख्यकों की नियुक्ति का अनुपात असंतुलित किया गया है। शासन की क्रमबद्धता नष्ट होने से जनस्वीकृति, जनमत, हितरक्षा आदि असंभव हैं। विकासहीनता में शासन यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और रूढ़िवादिता एवं अनुदार परंपराओं का वह अभिभावक बन गया है।

मुझे मित्रता के योग्य माना, इसके लिए बारम्बार धन्यवाद.

सैनिकों पर पत्थर बरसने वाले भटके हुए नौजवान हैं और, मैं, भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार से, मस्जिद और अज़ान का विरोधी, अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, मकोका और रासुका का ५० अभियोग झेलने वाला, ४२ बार जेल जाने वाला जघन्य, अपराधी हूँ. नमो इन भटके हुए नौजवानों को लैपटॉप देंगे. सरकारी नौकरी देंगे और पैलेट गन चलाने वाले सैनिकों का कोर्ट मार्शल होगा. न्यायपालिका का आदेश भी आ चुका है.

राज्यपालों और जजों का मनोनयन किस लिए?

मैं उपनिवेशवासियों का ध्यान अंग्रेजों द्वारा बनाये गए कानूनों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ. इन्हीं कानूनों की आड़ में राज्यपालों और जजों का भयादोहन कर एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति और उसके अनुयायियों को मिटा रही है. धरती के सारे उपनिवेशवासी वीर्यहीन होकर बलिपशु बन गए हैं.

वैदिक सनातन धर्म से दोनों अब्रह्मी संस्कृतियाँ आतंकित हैं| अगर अपना व अपनी भावी पीढ़ी का हित चाहें तो उपनिवेश से मुक्ति लें,

नीचे दिए गए URL से स्पष्ट हो जायेगा कि २०वीं सदी का मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ईसाईयों और मुसलमानों को इंडिया में रखने का अपराधी है.--

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

http://www.aryavrt.com/indian-educationact-1858hd

क्या ईसाई (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) अपने बुद्धि का प्रयोग करने के लिए स्वतन्त्र है?

आर्थिक शोषण में सारे लाभ शासक (एलिजाबेथ) प्राप्त करते रहे हैं। आर्थिक नीति मूलत: कच्चे माल के निर्यात की और पक्के माल के आयात की रही है।

इसी से मुक्त व्यापार आदि का सैद्धांतिक विश्लेषण हुआ है। शासकों के द्वारा उद्योगीकरण होने से उपनिवेश सदा शासक राष्ट्र के पूरक बने रहते हैं, उनका स्वयं आर्थिक व्यक्तित्व ही नहीं रहता। शासक शासित में भावी शत्रुता एवं हिंसा की राजनीति का बीजारोपण इसी व्यवस्था का फल है। फलत: उग्रता, ध्वंस, संघर्ष का मनोभाव बना है। उपनिवेश दरिद्रता, अशिक्षा, रोग, मानसिक हीनता आदि के प्रतीक बन गए हैं।

राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! योगीजी अपना पूजास्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या योगीजी को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे|

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आरुषि नूपुर और राजेश तलवार.

हमें अपनी कन्याओं को नौकरों को सौंप देनी चाहिए.

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सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

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उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

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मोहम्मद पर टिप्पणी करने वाले पर रासुका और ईशनिंदा करने वाले को सरकारी खजाने से वेतन.

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दास बनाने का क्रमिक इतिहास|

मानव जाति को वीर्यहीन कर पराजित व दास बनाने का षड्यंत्र तो मूसा ने खतना द्वारा लगभग ३२०० वर्षों पूर्व ही प्रारम्भ कर दिया था| मैकाले ने गुरुकुलों को मिटा कर उसे आगे बढ़ाया| यह संस्कृतियों का युद्ध है और इसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देकर नहीं लड़ा जा सकता| या तो अब्रह्मी संस्कृतियों रहेगा अथवा वैदिक सनातन संस्कृति|

क्या नमो हमें भारत दिला देंगे?

मूसा पहला व्यक्ति था जिसने लूट, बलात्कार और हत्या को मन-गढ़न्त जेहोवा द्वारा घोषित हठधर्म बताया| मूसा ने मिस्र के मूल निवासियों और उनकी संस्कृति का विनाश कर दिया| आज उसी मिस्र से यहूदी लुप्त हो गए| नाजी मिटे, समाजवादी मिटे| दैत्य और रक्ष संस्कृतियाँ भी मिट गई| अब अब्रह्मी संस्कृतियों की बारी है| आर्यावर्त सरकार को सहयोग तो दें|

क्या नमो खतना बंद करा देंगे?

कमलेश तिवारी पर रासुका.

मूल लड़ाई लड़ें. राष्ट्रपति और राज्यपाल एलिजाबेथ के मातहत और उपकरण हैं. देश स्वतंत्र नहीं स्वतंत्र उपनिवेश है.

स्पष्टतः अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा संकलित भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की असाधारण कूटनीतिक योजना ने वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश में अभूतपूर्व बड़ी सफलता प्राप्त की है| जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम के सभी मिशन और जिहाद को और वैदिक सनातन संस्कृति के विरुद्ध आक्रमण को, संरक्षण, पोषण व संवर्धन देता है,

मुसलमान मस्जिदों से प्रतिदिन अज़ान, नमाज़ और खुत्बों में काफिरों के ईष्टदेवों की ईशनिंदा करते रहते हैं तब रासुका क्यों नहीं लगती?

आजतक फतवा जारी करने वाला कोई मुसलमान रासुका में क्यों बंद नहीं किया गया?

उपनिवेशवासी अज़ान, नमाज, ईमाम या कुरान को ईशनिंदा का दोषी नहीं ठहरा सकते| लेकिन यदि उपनिवेशवासी बाइबल, कुरान, बपतिस्मा, अज़ान का विरोध करेंगे तो कमलेश तिवारी की भांति रासुका में बंद हो जायेंगे.

उल्टे मुसलमान काफिरों के कर के धन से अज़ान द्वारा काफिरों के ईश्वर का अपमान करने और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे देने के बदले वेतन पाते हैं. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). कोई जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई ही नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

कानूनविद महामहिम श्री केशरी नाथ त्रिपाठी जी, जहां के राज्यपाल हैं, उस मालदा में हिंसा, आगजनी, पुलिस पिटाई हुई और थाना फूंका गया. किसी पर रासुका क्यों नहीं लगा?

कमलेश तिवारी के नेतृत्व में मैं भी काशी के ज्ञानवापी मस्जिद का विरोध करने के कारण चौकाघाट जेल में बंद रहा हूँ.

मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है और धरती के सभी मस्जिदों को ध्वस्त करवाना चाहता हूँ.

भारतीय दंड संहिता की धारा ९९ के अधीन मैं सरकारों से अपने प्राणरक्षा की सदैव मांग करता रहा हूँ. जिसके कारण मेरे विरुद्ध अबतक ५० अभियोग चले, ३ आज भी लम्बित हैं.

मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. कानूनविद राज्यपाल केसरी के मालदा में उनको फांसी देने की मांग को लेकर हुए उपद्रव और आगजनी में २.५ लाख से अधिक सहिष्णु और सर्व धर्म समभाव वादी मुसलमान शामिल हुए. थाना फूंका गया. पुलिस की पिटाई हुई. ईमामों ने कमलेश तिवारी का सर कलम कर लाने वाले को अब तक ४१ करोड़ रु० से अधिक राशि देने के के फतवे जारी किये. किसी मुसलमान पर रासुका या मकोका क्यों नहीं लगा?

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन १९९९ से बंद दारा सिंह ने, २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.

मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. अज़ान लगाने वालों पर रासुका कब लगेगा?

मस्जिदों में विष्फोट अपराध कैसे है?

मोहम्मद पर टिप्पणी करने के कारण कमलेश तिवारी पर रासुका लगा है. कानूनविद राज्यपाल केसरी के शासन में कमलेश तिवारी को फांसी देने की मांग को लेकर हुए उपद्रव और आगजनी में २.५ लाख से अधिक सहिष्णु और सर्व धर्म समभाव वादी मुसलमान मालदा में शामिल हुए. थाना फूंका गया. पुलिस की पिटाई हुई. ईमामों ने ४१ करोड़ रु० से अधिक राशि के फतवे जारी किये. किसी मुसलमान पर रासुका या मकोका क्यों नहीं लगा?

कमलेश तिवारी पर रासुका.

मूल लड़ाई लड़ें. राष्ट्रपति और राज्यपाल एलिजाबेथ के मातहत और उपकरण हैं. देश स्वतंत्र नहीं स्वतंत्र उपनिवेश है.

इंडिया गो - नर भक्षी एलिजाबेथ का स्वतंत्र उपनिवेश है. जब उपनिवेश है तो स्वतंत्रता कहाँ?

उपनिवेश का विरोध करेंगे तो फांसी होगी. अज़ान और बपतिस्मा का विरोध करेंगे तो कत्ल कर दिए जायेंगे.

मस्जिदों से मुसलमान अज़ान, नमाज़ और खुत्बों द्वारा १४०० वर्षों से अधिक से ईशनिंदा कर रहा है और मुसलमानों को महामहिम सहित काफिरों को कत्ल करने की दे रहा है. महामहिम नाइक अपनी पुलिस से मुसलमानों को संरक्षण देकर काफिरों को चेतावनी दिलवाते हैं कि काफ़िर कत्ल कर दिए जायेंगे. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

यदि मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है, तो मुसलमान पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? मुसलमान साम्प्रदायिक और ईशनिंदक क्यों नहीं हैं? साम्प्रदायिक लोगों और ईशनिन्दकों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ही दे सकते हैं|

यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबल, निर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबल, लूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई को, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन, असीमित मौलिक अधिकार प्राप्त है। तकिय्या व कितमान के अधीन यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। इसी प्रकार प्रत्येक ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुए, अज़ान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता है, कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है-फिर भी पुलिस व प्रशासन अज़ान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकते, क्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति, राज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। क्यों कि राष्ट्रपति व उसके राज्यपालों ने भारतीय संविधान व कानूनों के रक्षा की शपथ ली है। राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग उपनिवेशवासी के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। आज कल यह लोग नमो द्वारा मनोनीत हो रहे है। जिसे एलिजाबेथ के ईसा ने भारत को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है।

सन १८६० से आज तक जज व राज्यपाल सहित कोई भी उपनिवेशवासी खूनी, लुटेरे और बलात्कारी अल्लाह के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सका| यहाँ तक कि जज, पुलिस, सांसद और विधायक भी शिकायत नहीं कर सकते| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन विवश राज्यपाल मस्जिदों से अज़ान और अल्लाह के कुरान के अनुसार मुसलमानों को अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले ईमाम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत, सन १८६० से आज तक, कार्यवाही नहीं कर सके| लेकिन जो भी चर्च, मस्जिद, अज़ान, नमाज़ का विरोध करता है, उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राज्यपाल या राष्ट्रपति की संस्तुति पर प्रताड़ित और जजों द्वारा तबाह कर दिया जा रहा है| मस्जिद, अज़ान, कुरान और नमाज़ का विरोध करने के कारण मैं स्वयं ४२ बार हवालात काट चुका हूँ| इस्लाम की अधिक जानकारी के लिए नीचे की लिंक देखें,

 

अज़ान को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अपराध नहीं माना जाता| न मस्जिद से साम्प्रदायिक विद्वेष और वैमनस्य की शिक्षा देना ही उपरोक्त धाराओं के अधीन अपराध माना जाता है|

उपरोक्त सच्चाइयों को जो भी बताता या लिखता है वह भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का अपराधी बन जाता है| यही विधायक सोम के साथ हुआ है| यही मेरे साथ ५० बार हुआ| मेरे विरुद्ध ५ अभियोग आज भी चल रहे हैं|

सत्ता के हस्तांतरण की शर्तों के अंतर्गत कोई जज बाइबल और कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

ईशनिन्दक के लिए ईसाइयत और इस्लाम में मृत्यु दंड निर्धारित है. मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी प्रसारित किया जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इन कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक मस्जिदों या ईमामों पर क्यों लागू नहीं किया गया?

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन १९९९ से बंद दारा सिंह ने, २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.

कमलेश तिवारी पर रासुका.

मूल लड़ाई लड़ें. राष्ट्रपति और राज्यपाल एलिजाबेथ के मातहत और उपकरण हैं. देश स्वतंत्र नहीं स्वतंत्र उपनिवेश है.

स्पष्टतः अंग्रेजों की कांग्रेस द्वारा संकलित भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की असाधारण कूटनीतिक योजना ने वैदिक सनातन संस्कृति के समूल नाश में अभूतपूर्व बड़ी सफलता प्राप्त की है| जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम के सभी मिशन और जिहाद को और वैदिक सनातन संस्कृति के विरुद्ध आक्रमण को, संरक्षण, पोषण व संवर्धन देता है,

इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिए| दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९). किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. वह भी भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल और न्यायपालिका के संरक्षण में!

ईसाइयत [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३), {(बाइबल, मत्ती १०:३४) व (बाइबल, लूका १२:४९)} और इस्लाम (कुरान २:२१६) निरंतर युद्धरत सम्प्रदाय हैं| दोनों ही लोकतंत्र की आड़ में विश्व में अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिये मानवजाति के स्वतंत्रता व चरित्र को मिटा रहे हैं| इस बर्बरता और सभ्यता और एक विश्व आपदा के बीच टकराव को टालने के लिए एक ही रास्ता है कि ईसाई और इस्लाम मजहब के भ्रम को बेनकाब किया जाय और उन्हें रहस्यमय नहीं रहने दिया जाय. गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ शांति से जीने के लिए यह आवश्यक है कि अब्रह्मी संस्कृतियों से प्रत्येक ईसाई व मुसलमान को विलग कर दिया जाये|

इसीलिए मुसलमानों और ईसाइयों को अपने अब्रह्मी संस्कृतियों को त्यागना होगा, अपने नफरत की संस्कृति (मात्र अल्लाह पूज्य है की अज़ान द्वारा घोषणा और अकेले यीशु मोक्ष प्रदान कर सकते हैं की चर्च से घोषणा का परित्याग करना पडेगा) गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों में साथी के रूप में शामिल होना होगा| अन्यथा गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को नैतिक अधिकार है कि वे मुसलमानों और ईसाइयों से स्वयं को अलग कर लें| अब्रह्मी संस्कृतियों को प्रतिबंधित करें| मुसलमानों और ईसाइयों के आव्रजन को प्रतिबंधित कर दें और उन्हें कत्ल कर दें, जो मानवजाति को दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का षड्यंत्र कर रहे हैं - सर्वधर्म समभाव के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के आचरण मानवता और नैतिकता के विरुद्ध हैं|

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end

सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है|

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बिना विवाह बच्चे पैदा करने वाली नारी के महिमामंडन, संरक्षण, पोषण व संवर्धन का कानून संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”

जारज(जार्ज) हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार, इंडिया जिनका उपनिवेश है और इंडिया का मानवमात्र जिनका दास, सम्मानित जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत है|

जारज(जार्ज) हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार, ईसा जिनका आराध्य है, इंडिया जिनका उपनिवेश है और इंडिया का मानवमात्र जिनका दास, सम्मानित जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत है|

इतना ही नहीं ईसाइयों का मुक्तिदाता ईसा ही जारज (जिसके बाप का पता नहीं होता, उसे जारज कहते है) (जार्ज) व पवित्र? प्रेत है और उसने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना कर (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) छिन्न भिन्न कर दिया है

 

ईसा अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाता| मात्र उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७)

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान, जिसने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है, का संकलन कर जिन अनुच्छेदों २९(१), ६० व १५९ और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को उनकी हत्या, लूट और बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दे कर इंडिया में रोका है और विकल्पहीन व दया के पात्र जजों (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), सांसदों, विधायकों और लोक सेवकों (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ३) ने जिस भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है उसके अनुच्छेद २९(१) ने अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है.

ईसाइयों और मुसलमानों को अल्पसंख्यक घोषित करके १९४७ से इंडिया में रोक लेना ही मानवजाति को मिटाने के लिए पर्याप्त है|

इन्हीं अब्रह्मी संस्कृतियों को गांधी ने वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए इंडिया में रखा है.

जिसने भी भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ ली है-मानव जाति का शत्रु है|

षड्यंत्र स्पष्ट है, उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के दास बन कर ही जीवित रह सकते हैं.

सत्ता के हस्तानान्तरण की पहली शर्त ही इस्लाम का दोहन है. एलिजाबेथ को धरती पर केवल ईसा का राज्य चाहिए|

अब्रह्मी संस्कृतियों ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति और निवासियों को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| लोकसेवक यह न भूलें कि एलिजाबेथ मानवजाति को मिटाने में लिप्त है|

उपनिवेश के विरुद्ध कोई बोल न पाए, इसीलिए एलिजाबेथ ने अपने दासों राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधीन, भारतीय संविधान, दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ का संरक्षण दिला कर लोकसेवकों, ईसाईयों और मुसलमानों की सेना बना रखी है. मैं उपरोक्त सच्चाई लिखने का परिणाम जानता हूँ. फल भुगत रहा हूँ. ५० अभियोग चले हैं. ३ आज भी लम्बित हैं. चर्च, बाइबल, मस्जिद, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण ४२ बार जेल जा चुका हूँ. लोकसेवक हूँ, लेकिन पेंशन नहीं पाता. २ अरब रु० की सम्पत्ति का स्वामी हूँ. फिर भी भीख मांगता हूँ. एलिजाबेथ ने राज्यपाल और जजों का भयादोहन कर मेरी सम्पत्तियां लूटी हैं.

लेकिन मैं १९९१ से आज तक अज़ान और खुत्बे बंद नहीं करा सका. इतना ही नहीं! हमारे सम्मान और जान-माल की रक्षा के स्थान पर हमारे १३ अधिकारी मस्जिदों और समझौता एक्सप्रेस में विष्फोट के आरोपों में बंद हैं. षड्यंत्र स्पष्ट है. एलिजाबेथ का लक्ष्य वैदिक सनातन संस्कृति का समूल नाश है वह भी अपने ही शत्रु मुसलमानों को संरक्षण देकर.

मैं हुतात्मा शाहजहांपुर निवासी रामप्रसाद बिस्मिल और उन्नाव में जन्मे चंद्रशेखर आजाद के वंशज का हूँ. मेरे पितामह से मिलने रामप्रसाद बिस्मिल आते ही रहतें थे. बिस्मिल की फांसी गोरखपुर में ही हुई थी और अंग्रेजों द्वारा सत्ता हस्तांतरण के बाद उप्र सरकार ने उनको स्मारक के लिए ३.३ एकड़ भूमि दी थी. उनका एक पार्क, उनकी प्रतिमा और एक पुस्तकालय आज भी है. मैं उस स्मारक से जुड़ा हुआ भी था. २००४ में सोनिया के सत्ता में आते ही राजस्व अभिलेखों से बिस्मिल का नाम गायब हो गया. डॉ ओम् प्रकाश जिलाधीश ने स्मारक की सारी भूमि मात्र ३३ करोड़ रु० में बेंच दी. मैं राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, राज्यपाल विष्णुकान्त शात्री, लखनऊ व इलाहाबाद हाइकोर्ट तक गया. लेकिन भूमि आज तक वापस नहीं मिली है.

कौन हैं वे जिन्हें गांधी ने इंडिया में रोका? उनका लक्ष्य और उनकी उपलब्धियां क्या हैं? उनको पंथनिरपेक्ष यानी सेकुलर, सर्वधर्मसमभाववादी व गंगा जमुनी संस्कृति का अंग मानने का आधार क्या है? ये सवाल करना रासुका में जेल में बंद होने का सुगम मार्ग है.

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

अब्रह्मी संस्कृतियाँ आतंक और मौत के फंदे परभक्षी {भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) व अनुच्छेद २९(१)} से प्रायोजित हैं. खूनी, लुटेरी और बलात्कारी अब्रह्मी संस्कृतियाँ अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपातीं|

दंगा मौत के फंदे परभक्षी {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)} भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित है|

क्या आप ने सोचा कि मूसा से लेकर पाकपिता गाँधी तक यह कहते हुए क्यों नहीं आये कि उनका लक्ष्य आप को दास बनाना है? आज ही सही! मौलवियों और पादरियों से कहिये कि वे "ला इलाहलिल्लाहूदयाके बदले घोषित करें कि वे स्वयं दास हैं और मानव मात्र को दास बनाना चाहते हैं.

कट्टरपंथी मुसलमान हिन्दूबहुल भारत को इस्लामी विजय का एक अधूरा अध्यायमानते हैं। हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि दुनिया के वाकी सभी वो देश, जिन पर इस्लाम ने विजय प्राप्त की , इस्लामी आक्रमण के दो दशकों के भीतर 100% इस्लाम में परिवर्तित हो गए। भारत एक अपबाद है| 800 वर्षों के अत्याचारी बरबर मुसलिम शासन के बाद भी अविभाजित भारत में 75% हिन्दू अबादी थी। कट्टरपंथी मुसलमानों को यही बात आज तक सता रही है कि मुसलमानों द्वारा किए गए वेहिसाब जुल्मों के बाबजूद वो मुसलिम आतंकवादी हिन्दूओं का मनोबल तोड़ने में क्यों सफल न हो पाए।

काफ़िर ईशनिंदा और कत्ल होने की धमकियां सुनने के लिए विवश हैं. गौ मांस खाना सबका मानवाधिकार है.

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान ने मानवमात्र को दास बनाया हुआ है| क्या ईसाईयों व मुसलमानों को पता है कि इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ देश एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं? इराक में मुसलमान ही मुसलमान को क्यों कत्ल कर रहे हैं?

मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं और प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” हर शुक्रवार सरकारी पुलिस के संरक्षण में मुसलमानों को ईमाम काफिरों को कत्ल करने के उपदेश (खुत्बे) देते हैं. यानी कि सरकार स्वयं काफिरों यानी कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रही है. हमारे पास भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है, हम मस्जिद और मुसलमानों को क्यों रहने दें?

कुरान जलाने वाले को कत्ल करने वाले मुसलमान सरकार के संरक्षण में अज़ान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? १८६० से आज तक ईमामों के विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई? जब कि इस्लाम व मस्जिद का विरोध करने के कारण हम प्रताड़ित हो रहे हैं|

उपनिवेशवासी को भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) दास बनाता अथवा कत्ल कराता व ३९(ग) सम्पत्ति व पूँजी लूटता है|

मस्जिदों से मुअज्ज़िन/ईमाम काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं और हर शुक्रवार को काफिरों को कत्ल करने की मुसलमानों को शिक्षा देते हैं. क्या मस्जिद और अज़ान बंद नहीं होने चाहियें?

कानूनविद राज्यपाल केसरी के मालदा में

उनका सर कलम कर लाने वाले को अब तक

ईमामों ने ४१ करोड़ रु० से अधिक राशि के फतवे जारी किये. किसी मुसलमान पर रासुका या मकोका क्यों नहीं लगा?

अभी तक तो हिंदू मस्जिदों से अज़ान और खुत्बे ही सुनने के लिए विवश थे. फिर मुज़फ्फरनगर लव जिहाद कांड के बाद लव जिहादियों को अपनी कन्याएं सौंपने के लिए विवश हुए. अब गौ मांस खाने वालों की आरती भी उतारने के लिए विवश हैं. वह भी राज्यपाल नाइक, कृष्ण गोपाल के वंशजों के शासन और सिसोदिया जैसे हिंदू भाइयों के सहयोग से. यह है एलिजाबेथ के उपनिवेश का कमाल. बाकी हिंदुओं की तो औकात ही क्या है?

भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों के गले पर रखी हुई तलवार हैनमो जी को यह बात समझ नहीं आती कि मुसलमान व ईमाम उनके इष्ट देवताओं का अपमान करते हैं| सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार तो स्वयं प्रधानमंत्री के पास भी नहीं है|

http://www.aryavrt.com/bhartiya-snvidhan

जिहाद द्वारा धरती पर इस्लामी शरियत का राज्य स्थापित करना है| यदि ईसाइयत रहेगी तो सबको ईसा की बुद्धिहीन भेंड़ बन कर ईसा की दासता स्वीकार करनी पड़ेगी (बाइबल, लूका १९:२७) और इस्लाम धरती पर रहेगा तो सबका खतना होगा| (कुरान ८:३९). अब्रह्मी संस्कृति रहेगी तो कोई मंदिर नहीं बच सकता| किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती है| इस्लाम सदा सदा के लिए अविश्वासियों के गले पर रखी हुई तलवार है| अज़ान काफ़िर मानव जाति के आराध्य देवों का अपमान और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर-जमानती अपराध है-जिसके बदले दण्डित करने के स्थान पर ईमामों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर १० अरब रुपयों वार्षिक से अधिक वेतन दिया जा रहा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६).

लोकसेवक, जज, राज्यपाल व मुख्यमंत्री सहित मीडियाकर्मी जान लें कि उपनिवेश की मल्लिका एलिजाबेथ संस्कृतियों का युद्ध लड़ रही है. एलिजाबेथ का लक्ष्य वैदिक सनातन संस्कृति सहित सभी संस्कृतियों को मिटा कर अर्मगेद्दन (armageddon) द्वारा ईसा के द्वितीय आगमन पर संसार को दास बना कर ईसा का राज्य स्थापित करना और ईसा की पूजा करवाना है.

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

इस्लाम अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाता|

पुलिस संरक्षण में ईशनिंदा हो रही है|

मुसलिम आतंकवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? इसके वारे में 2012 के बाद किसी के मन में कोई शंका नहीं रहेगी। 2012 में तालिवान पाकिस्तान पर कब्जा कर लेंगे व अमेरिका अफगानिस्तान छोड़ कर भाग जाएगा। उसके बाद इस्लाम अपने अधूरे काम को पूरा करने के लिए हिन्दूत्व से सीधी लड़ाई लड़ेगा। अलकायदा का नया सरगना, जो कि ओसामाविन लादेन का उताधिकारी है पहले ही घोषणा कर चुका है कि मुसलिम आतंकवादियों का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत है न कि अमेरिका।

आप के सम्मानित दैनिक के माध्यम से मै पाठकों का ध्यान एलिजाबेथ के रोम राज्य के वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश के लक्ष्य की ओर आकर्षित करता हूँ|

इनका लक्ष्य वैदिक सनातन धर्म मिटाना है| जिस दिन वैदिक सनातन धर्म मिटा, इस्लाम मिट जायेगा| यह समझ मुसलमान को कब आएगी?

यदि अब्रह्मी संस्कृतियों रहेगा तो वैदिक सनातन धर्म मिट जायेगा|

उप राज्यपाल अभियोग वापस लेते हैं उन मुसलमानों के जो भारतीय संविधान जलाते हैं| अज़ान व नमाज़ द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ के अंतर्गत मुसलमानों को बल्बे के लिए उत्प्रेरित करते व २९५ के अंतर्गत काफिरों के इष्ट देवों का अपमान करते हैं| साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाते हैं| उप राज्यपाल आज तक अफजल के फांसी पर निर्णय नहीं ले सके| उप राज्यपाल को प्रतीक्षा है एक नए विमान अपहरण की, जिसके बहाने संसद के हमलावर को पुरष्कृत किया जा सके और वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का मार्ग निष्कंटक हो|

आप के सम्मानित दैनिक के माध्यम से मै पाठकों का ध्यान एलिजाबेथ के रोम राज्य के वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश के लक्ष्य की ओर आकर्षित करता हूँ|

गणतंत्र (पिलपिला) कहा जाता है। पड़ोसी देश हमें शंका की दृष्टि से देखते हैं। हम स्पष्ट राष्ट्र हितों के संवर्धन व विश्वशांति के संरक्षण वाले दृष्टिकोण के पक्षधर हैं। हम राष्ट्रवादी, स्वदेशी व भारत की अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका के बढ़ाये जाने के पक्षधर है किन्तु अन्तरराष्ट्रीयवाद के विरोधी नहीं हैं। हाँ, राष्ट्र की कीमत पर विदेशी हितों की पूर्ति हमें स्वीकार्य नहीं। हम चाहते है कि भारत आर्थिक, सामाजिक, राजनीति, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक रूप से विश्व के अन्य देशों के सामने एक मापदण्ड बने व आपसी सौहाद्र्र की एक मिसाल भी।

सभी संवैधानिक संस्थाओं में विभिन्न पदों पर निष्पक्ष एवं प्रभावी व्यक्ति का चयन एंव उनकी स्वायत्तता बनाये रखना वर्तमान में चुनौती है।

लगता है कि जापान हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु आक्रमण को भूल गया है| एलिजाबेथ को वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करना है| एलिजाबेथ के लक्ष्य की पूर्ती में किसी प्रकार की अड़चन जापान के लिए घातक होगा|

खूनी अब्रह्मी संस्कृतियों अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाते|

दोनों के भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित

पाक का पक्ष अमेरिका की विवशता है| अमेरिका को भय वैदिक सनातन धर्म से है| मुसलमान उसकी मुट्ठी में हैं| दोनों के अनुच्छेद २९(१) से रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित

वीर्यहीन और चरित्रहीन बनाने वाली अब्रह्मी संस्कृतियाँ

भारतीय संविधान से पोषित अब्रह्मी संस्कृतियां, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देती हैं। इन्होंने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है।

सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा। जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०/०६/१९७९ से लुप्त) व अनुच्छेद ३९ग].

वैदिक सनातन धर्म मिटाना एलिजाबेथ का एकसूत्रीय लक्ष्य है| पोप ने एलिजाबेथ को इंडिया की धरती पर आकर आदेश दिया है कि २१ सदी में पूरे एशिया को ईसा की भेंड़ बनाना है| बाइबल में भी एलिजाबेथ को यही आदेश है और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भी एलिजाबेथ का समर्थन करता है| १९५० से आज तक किसी ने भारतीय संविधान का विरोध भी नहीं किया है|

क्या मैं जान सकता हूँ कि क्यों आशाराम बापू जेल में हैं और जेहोवा और अल्लाह का मीडिया क्यों विरोध नहीं करती? क्या अधिकार है इन खूनियों और बलात्कारियों को हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के विरुद्ध ऊँगली उठाने का?

लगता है कि जापान हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु आक्रमण को भूल गया है| एलिजाबेथ को वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करना है| एलिजाबेथ के लक्ष्य की पूर्ती में किसी प्रकार की अड़चन जापान के लिए घातक होगा|

एलिजाबेथ को विकास नहीं वैदिक सनातन संस्कृति का विनाश चाहिए| (बाइबल, लूका १९:२७)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग), अनुच्छेद ६० और अनुच्छेद १५९ तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ और धारा १९७, के विरुद्ध जांच क्यों नहीं हो रही है?

मुसलमान कलिमा पढते हैं, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” इस अज़ान से साम्प्रदायिक सौहार्द कैसे बनता है?

मुसलिम आतंकवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? इसके वारे में 2012 के बाद किसी के मन में कोई शंका नहीं रहेगी। 2012 में तालिवान पाकिस्तान पर कब्जा कर लेंगे व अमेरिका अफगानिस्तान छोड़ कर भाग जाएगा। उसके बाद इस्लाम अपने अधूरे काम को पूरा करने के लिए हिन्दूत्व से सीधी लड़ाई लड़ेगा। अलकायदा का नया सरगना, जो कि ओसामाविन लादेन का उताधिकारी है पहले ही घोषणा कर चुका है कि मुसलिम आतंकवादियों का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत है न कि अमेरिका।

आप के सम्मानित दैनिक के माध्यम से मै पाठकों का ध्यान एलिजाबेथ के रोम राज्य के वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश के लक्ष्य की ओर आकर्षित करता हूँ|

यदि अब्रह्मी संस्कृतियों रहेगा तो वैदिक सनातन धर्म मिट जायेगा|

आप के सम्मानित दैनिक के माध्यम से मै पाठकों का ध्यान एलिजाबेथ के रोम राज्य के वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश के लक्ष्य की ओर आकर्षित करता हूँ|

हमारी विदेशी नीति व लक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं।

हमारी समस्या तीस्ता नहीं, अब्रह्मी संस्कृतियाँ हैं. हमें अपने लक्ष्य से नहीं भटकना चाहिए. मेरा आग्रह आप को बुरा लगे तो क्षमा करियेगा.

मुसलमान या तो इस्लाम छोड़ें या भारत| वैसे भी मुसलमानों ने हिंदुओं के साथ न रह पाने के आधार पर पाकिस्तान लिया है|

खूनी अब्रह्मी संस्कृतियों अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाते|

क्यों कि भारतीय संविधान किसी को जीने का अधिकार नहीं देता|

पाक का पक्ष अमेरिका की विवशता है| अमेरिका को भय वैदिक सनातन धर्म से है| मुसलमान उसकी मुट्ठी में हैं| दोनों के अनुच्छेद २९(१) से रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित हैं.

क्या मैं जान सकता हूँ कि क्यों आशाराम बापू जेल में हैं और जेहोवा और अल्लाह का मीडिया क्यों विरोध नहीं करती? क्या अधिकार है इन खूनियों और बलात्कारियों को हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों के विरुद्ध ऊँगली उठाने का?

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टिप्पणी: एक धोबन का सेठ के मारने के कारण गर्भ गिर गया| धोबी ने मुकदमा किया| जज ने निर्णय दिया कि सेठ धोबन को गर्भवती कर के धोबी को वापस करे|

लगता है कि जापान हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु आक्रमण को भूल गया है| एलिजाबेथ को वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करना है| एलिजाबेथ के लक्ष्य की पूर्ती में किसी प्रकार की अड़चन जापान के लिए घातक होगा|

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"परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) प्रजातंत्र और स्वतंत्रता कैसे है?

भारतीय संविधान कुटरचित, परभक्षी और आतताई अभिलेख है| {भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग)}| भारतीय संविधान हत्यारे, आतताई, स्वार्थी, कामी, धनलोलुप मुस्लिम और ईसाई आतंकवादियों को संवैधानिक व कानूनी कवच दे कर, हत्या और हिंसाके माध्यम से मानवजाति को समाप्त करने के लिए संकलित किया गया है|

उपनिवेशवासी एलिजाबेथ के दास हैं. एलिजाबेथ ने आप का मनोनयन जातिसंहार के लिए किया है| जब हम सनातनियों का संहार हो जायेगा, तब मुसलमानों और गैर कैथोलिक ईसाइयों का जातिसंहार होगा|

आप एलिजाबेथ के दास हैं. एलिजाबेथ ने आप को अल्पसंख्यक अपने ही लोगों के जातिसंहार के लिए बनाया है| जब हम सनातनियों का संहार हो जायेगा, तब मुसलमानों और गैर कैथोलिक ईसाइयों का जातिसंहार होगा|

एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत राज्यपालों के द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेकर अनुच्छेद २९(१) से उत्प्रेरित, रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित हठधर्मी सिद्धांत हैं.

एलिजाबेथ को यह जान कर प्रसन्नता होगी कि इस देश के उपनिवेशवासी उस भारतीय संविधान का अब भी महिमामंडन करते हैं, जिसके अनुच्छेद २९(१) ने नारी को बलात्कार की वस्तु घोषित कर रखा है| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०). मानव मात्र को कत्ल किये जाने योग्य अपराधी घोषित कर रखा है| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). भारतीय संविधान ने उपासना स्थल तोड़ना हर ईसाई व मुसलमान का संवैधानिक असीमित मौलिक अधिकार घोषित कर रखा है| (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). हर उपनिवेशवासी से सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार छीन रखा है|

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर उपनिवेशवासियों पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. यह अनुच्छेद इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों (?) के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है.

माननीय प्रधानमंत्री नमो सहित इंडिया के उपनिवेशवासी अधिकार विहीन एलिजाबेथ के दास बलिपशु हैं. उपनिवेशवासियों के पास जीवित रहने, (भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)) सम्पत्ति और उत्पादन के साधन [भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] रखने का अधिकार नहीं है.

दोनों के एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत राज्यपालों के द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ लेकर अनुच्छेद २९(१) से उत्प्रेरित, रक्षित, पोषित और प्रोत्साहित हठधर्मी सिद्धांत हैं.

वैदिक सनातन संस्कृति की मान्यता है कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| यदि आप का स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया| लेकिन यदि आप का चरित्र गया तो सब कुछ चला गया| इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं।

इंडिया में तो ईसाइयों के यहाँ भी कुमारी माएं नहीं मिलतीं| इससे वैदिक सनातन धर्म की बू आती है| एलिजाबेथ को इस बू को मिटाना है|

मस्जिदों से मुअज्ज़िन/ईमाम काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं और हर शुक्रवार को काफिरों को कत्ल करने की मुसलमानों को शिक्षा देते हैं.

मानवजाति के जीवित बचने के सारे मार्ग समाप्त हो गए हैं.

एलिजाबेथ को वैदिक सनातन धर्म मिटाना है| बिना चरित्र बिगाड़े ऐसा सम्भव नहीं|

महामहिम जी! एलिजाबेथ आप का भयादोहन कर रही है. आप चारो ओर से एलिजाबेथ के गुप्तचरों से घिरे हैं. स्वतंत्रता से जीना हो तो हमारा गुप्त सहयोग करिये.

उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान २:१९१)].

उपनिवेशवासी ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०)] एलिजाबेथ को सौंप दी है. नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा अथवा ईसाई| [(कुरान २३:६ व ७०:३०) (बाइबल, याशयाह १३:१६)].

आप एलिजाबेथ के मनोनीत मातहत और उपकरण है| वैदिक सनातन धर्म को मिटाना एलिजाबेथ का मजहबी अधिकार, घोषित कार्यक्रम और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त संवैधानिक अधिकार है|

इंडिया में तो ईसाइयों के यहाँ भी कुमारी माएं नहीं मिलतीं| इससे वैदिक सनातन धर्म की बू आती है| एलिजाबेथ को इस बू को मिटाना है|

मस्जिदों से मुअज्ज़िन/ईमाम काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं और हर शुक्रवार को काफिरों को कत्ल करने की मुसलमानों को शिक्षा देते हैं.

मानवजाति के जीवित बचने के सारे मार्ग समाप्त हो गए हैं.

एलिजाबेथ को वैदिक सनातन धर्म मिटाना है| बिना चरित्र बिगाड़े ऐसा सम्भव नहीं|

महामहिम जी! एलिजाबेथ आप का भयादोहन कर रही है. आप चारो ओर से एलिजाबेथ के गुप्तचरों से घिरे हैं. स्वतंत्रता से जीना हो तो हमारा गुप्त सहयोग करिये.

उपनिवेशवासी को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं| [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान २:१९१)].

उपनिवेशवासी ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०)] एलिजाबेथ को सौंप दी है. नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा अथवा ईसाई| [(कुरान २३:६ व ७०:३०) (बाइबल, याशयाह १३:१६)].

उपनिवेशवासी ने अपने पूजा स्थल [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)] गवां दिए हैं| भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और उपासना की स्वतंत्रता (अज़ान, कुरान ३:१९) गवां दी है|

आप एलिजाबेथ के मनोनीत मातहत और उपकरण है| वैदिक सनातन धर्म को मिटाना एलिजाबेथ का मजहबी अधिकार, घोषित कार्यक्रम और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त संवैधानिक अधिकार है|

 

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AA AB LAUT CHALEN TUJHKO PUKARE SAMAAJ TERA,

नम्रतापूर्वक मैं आप को एक लिंक देता हूँ, समय मिले तो पढ़ लें. अच्छा लगे तो औरों को भेजें. कोई कापीराइट नहीं है...

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२३/०८/१६

नमो की बहुत तारीफ़ हो रही है. क्योंकि बलूचों की आजादी के समर्थन में आ गए हैं.

कश्मीर चाहे इंडिया के पास रहे या पाकिस्तान के पास, अंततोगत्वा रहेगा एलिजाबेथ का उपनिवेश ही!

बलूचिस्तान चाहे पाकिस्तान के पास रहे या बंगलादेश की भांति स्वतंत्र हो जाये, रहेगा एलिजाबेथ का उपनिवेश ही!

क्या नमो, नवीन, नवाज़ या नजमा अपने स्वतंत्रता की लड़ाई नहीं लड़ सकते? आर्यावर्त सरकार ५३ उपनिवेश देशों को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने के लिए लड़ रही है. आप लोग आर्यावर्त सरकार के हाथ मजबूत करें.

  

Brij Nandan Sharma

August 18 at 12:57pm

 

आइये भारत को इस्लाममुक्त बनाएं ?

 

इस छोटे से लेख के माध्यम से हम सभी पाठकों से विनम्र निवेदन कि वह इस लेख को ध्यान से पढ़ें ,खासकर जिनको हिन्दू धर्म की चिंता है,

 

यह एक निर्विवाद सत्य है कि आतंकवाद और इस्लाम पर्यायवाची बन गए हैं , पूरा विश्व इस संकट से मुक्ति चाहता है , लेकिन भारत में ऐसे भी लोग हैं जो इस विषय की गम्भीरता से उदासीन हैं , यह लोग मान बैठे हैं कि आतंक का केंद्र इराक है जो हमसे काफी दूर है .इसलए डरने की जरूरत नहीं है , कुछ लोग मानते हैं आतंकवाद पाकिस्तान फैला रहा है और हमारी सेना और पुलिस उसे रोक सकती है ,

मेरे विचार से ऐसे लोग वास्तविकता से अनभिज्ञ हैं , क्यों की इस्लामी आतंकवाद एक ऐसा विष वृक्ष है , जो जितना ऊपर दिखता है ,उस से अधिक गहरी उसकी जड़ें है ,

 

हम जब भी इस वृक्ष की कोई शाखा काट देते हैं , कुछ समय बाद बगल में दूसरी शाखा उग जाती है , हम बरसों से यही करते आए हैं , लेकिन इस्लामी आतंक कम होने की जगह रूप बदल कर और बढ़ रहा है ,

 

हमने बरसों इस्लामी किताबों का अध्यन करके और मुस्लिम मौलवियों से मिल कर पता किया है कि इस्लामी आतंक की असली जड़ इस्लामी किताबें है , जिनकी शिक्षा देकर मुल्ले मौलवी मुस्लिम बच्चों के दिमागों में जहर भर देते हैं , लोग इसे " ब्रेन वाशिंग -Brain Washing " कहते हैं ,लेकिन हम इसे " ब्रेन पॉयजनिंग -Brain Poisning " कहते है , यही कारण है कि मुस्लिम युवा बिना सोचे ही आत्मघाती बम बनने को तैयार हो जाते हैं , और जो व्यक्ति खुद मरने को तैयार हो तो आप उसका क्या बिगाड़ लोगे ? उन लोगों पता नहीं होगा जो भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते है , मुसलमान भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की योजनाएं बना चुके है , हमने एक मौलवी का तर्क सुना कि अंग्रजों से पहले भारत पर मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की हुकूमत थी , और अंगरेजों को चाहए था की जाते समय भारत की हुकूमत मुस्लिमों को सौंप देते , और जब तक मुसलमानों को यह अधिकार नहीं मिलेगा जिहाद होती रहेगी ,

इसका एक मात्र उपाय है , की हमें आतंकवाद की शाखाएं और पत्ते काटने की जगह इस विष वृक्ष की जड़ें उखाड़ना होंगी , अर्थात इस्लाम की बुनियादों पर कुल्हाड़ी चलाना होगी ,

इसलिए वास्तव में धर्म और देश को इस्लामी आतंक से मुक्त करना हो तो निजी स्वार्थ त्याग कर एकजुट होकर काम करने की जरूरत हैं ,

हम पिछले आठ सालों से अकेले लगातार जिहादी विचारों की जड़ें खोदने में लगे हुए है , लेकिन इतने धनाढ्य हिन्दू होने पर भी दुरभाग्य से किसी संस्था ने हमारी सहायता नहीं की , उल्टे बार बार झूठे आश्वासन देकर हमारी निष्ठा को आहत किया ,

अगर हिन्दुओं की नयी पीढ़ी को इस्लामी आंतक की असलियत बताकर सचेत करना कोई पाप है , तो मुझे इस पर गर्व है . हमें तो उन लोगों से शिकायत है जो हिन्दू समाज के कर्णधार हैं , और हमारा साथ नहीं देते , नहीं तो हम जिहादी विचारों की जड़ें उखाड़ देते . हम पाठकों से क्षमाप्रार्थी है , यह हमारे ह्रदय से निकले उद्गार हैं ,

 

मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हम इस काम में ऐसे उलझ जाएंगे , लोग रोज नए नए सवाल करते गए और हम उनके दिए टॉपिक पर लिखते गए , हमारी भी आर्थिक हालत ऐसी नहीं कि नेट और फोन के बिल भर सकें , आज तक जो भी आगे बढ़ता गया वह कुछ पाठकों के सहयोग से ही चलता रहा , लेकिन किसी हिन्दू संगठन या संस्था ने मदद नहीं की , जबकि उनके करोड़ों के बजट है , इन लोगों में कुछ ऐसे भी थे जिन्होने पहले तो वादे किए फिर वादे से मुकर गए , यह कोई कंगाल नहीं बल्कि करोड़ पति लोग थे , ऐसे हिन्दुओं से मुसलमान लाख दर्जे बेहतर हैं ,

एक एक लेख में कई दिन लग जाते है न नेट का बिल भारी पड़ जाता है , हमसे तो सन22/05 2016 को ही कुछ मुस्लिम पाठकों ने कह दिया था कि ,

 

"आप फिजूल में इस्लाम की बुराई करते हो , हिन्दू आपका कभी साथ नहीं देंगे , आप अभी भी तौबा कर लो ,

अतः हमारा उन सभी पाठकों से निवेदन है कि उन जिहादी मानसिकता वाले मुस्लिम टिपण्णी करने वालों को झूठा साबित करने के लिए उदारता पूर्वक हमारी आर्थिक सहायता करें , ताकि भारत को इस्लाम मुक्त बना सकें , याद रखिये कलम की ताकत तलवार से अधिक होती है ( Pen is mighter then sword ),विश्वास रखिये आपके द्वारा दी गयी आर्थिक मदद व्यर्थ नहीं होगी .यह जिहादी विचारों के विरुद्ध वैचारिक धर्मयुद्ध है .यदि आप कुछ आर्थिक सहायता देने की कृपा करेंगे तो मेरा लेखन कार्य सुचारू रूप से चलता रहेगा ,

 

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कमलेश तिवारी आइये तुलना करते हैं, कमलेश तिवारी के प्रेसनोट की, वर्तमान में जारी विरोध प्रदर्शनों से,

ईशनिंदा के अपराध में कमलेश तिवारी पर रासुका भी लगी है और अब तक उनका सर कलम कर लाने वाले को ४१ करोड़ रु० देने का फतवा जारी हो चुका है. क्योंकि कमलेश तिवारी ने नबी के विरोध में प्रेसनोट जारी किया है. धर्म विशेष के विरुद्ध आपत्ति की है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

कमलेश तिवारी पर रासुका

महामहिम नाइक पर अभियोग कब चलेगा?

मस्जिद और इस्लाम का विरोध करने के कारण मालेगांव बम कांड में मेरे ९ सहयोगी बंद हैं. धनंजय देसाई भी बंद हैं. अब कमलेश तिवारी भी रासुका में बंद हो गए.

२६ फरवरी, २००५ को आरोप मुक्त होने और अपील की समय सीमा बीत जाने के बाद आर्यावर्त सरकार ने अपने साप्ताहिक पत्रिका मुजहनाद्वारा संयुक्त राष्ट्र सहित, विश्व के सभी राष्ट्राध्यक्षों को इस्लाम से आगाह किया और किसी प्रकार के संदेह के निवारण के लिए मिलने के लिए समय देने का आग्रह भी किया. १० वर्ष से अधिक निकल चुके हैं इस्लाम का जिहाद दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है और यह तब तक बढ़ता ही रहेगा, जब तक अर्मागेद्दन द्वारा धरती पर मात्र ईशा की पूजा न हो ले. लेकिन सबने आसन्न संकट की अनदेखी की!

यही सर्वधर्म समभाव है. जिसे विश्व के ५३ उपनिवेश देशों की मल्लिका की वर्तमान मल्लिका गौ-नर भक्षी जेसुइट एलिजाबेथ लाना चाहती है.

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, जेल में सन १९९९ से बंद दारा सिंह ने, २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों और अब कमलेश तिवारी ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये. यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल अथवा जिलाधीश ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय, जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है.

ईसाइयत {(बाइबल, मत्ती १०:३४) व (बाइबल, लूका १२:४९)} और इस्लाम (कुरान २:२१६) निरंतर युद्धरत सम्प्रदाय हैं| दोनों ही लोकतंत्र की आड़ में विश्व में अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिये मानवजाति के स्वतंत्रता व चरित्र को मिटा रहे हैं| इस बर्बरता और सभ्यता और एक विश्व आपदा के बीच टकराव को टालने के लिए एक ही रास्ता है कि ईसाई और इस्लाम मजहब के भ्रम को बेनकाब किया जाय और उन्हें रहस्यमय नहीं रहने दिया जाय. गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ शांति से जीने के लिए यह आवश्यक है कि अब्रह्मी संस्कृतियों से प्रत्येक ईसाई व मुसलमान को विलग कर दिया जाये|

यह पत्र मैं आप व विश्व के समस्त राष्ट्राध्यक्षों को इसलिए लिख रहा हूँ कि मानवजाति को उपनिवेशवाद से मुक्ति दिलाने और मानवजाति को लुप्त करने के षडयंत्र में एलिजाबेथ को तुरंत फांसी दिलाने में आर्यावर्त सरकार को आप लोगों का सहयोग प्राप्त हो सके.

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मस्जिद से कलिमापढ़ना और अज़ान का प्रसारण काफिरों के आराध्य देवों का अपमान (ईशनिंदा) और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती दंडनीय अपराध है| लेकिन मानवता को मिटाने के लिए सन १८६० से आजतक किसी मुसलमान पर लागू नहीं हुआ. अज़ान को पंथनिरपेक्ष पूजा और मस्जिदों को पूजा स्थल मानने का आधार क्या है? मुस्लिम निजी कानून व इस्लाम सदा सदा के लिए काफिरों के गले पर रखी हुई तलवार है| किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित, मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जातिहिंसक शिक्षायें, सन १८६० से लागू भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन, राज्य के विरुद्ध अपराध नहीं मानी जाती| आज तक किसी राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, किसी ईमाम पर अभियोग चलाने के लिए संस्तुति नहीं दिया. कोई मुसलमान बंदी नहीं बना.

ईशनिंदा करने और कत्ल करने की शिक्षा देने वाले मुअज्ज़िन, ईमाम और मौलवी, जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, अपनी गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर, सर्वोच्च न्यायलय के आदेश से, सरकारी खजाने से वेतन पाते हैं| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और हज अनुदान भी| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/ ). न्यायपालिका ने यह भी निर्णय दे दिया कि बाइबल और कुरान के विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). इस प्रकार अज़ान और खुत्बे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अपराध से मुक्त हैं| ताकि मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत न हों.

ठीक इसके विपरीत आत्मरक्षार्थ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध, इन्हीं भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध हैं| मुसलमान उसे ईशनिंदा के अपराध में कत्ल करने के फतवे देता है और सरकार अभियोग चलाती है.

इन्हीं धाराओं के अधीन, साध्वी प्रज्ञा सहित, हमारे ९ अधिकारी मालेगांव मामले में २००८ से बंद हैं. मैं स्वयं ४२ बार जेल गया हूँ. अब कमलेश तिवारी रासुका में बंद हैं. इसलिए हमने बाबरी ढांचा गिराया है|

राष्ट्रपति और राज्यपाल जिस भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के रक्षा की शपथ लेते हैं, वह अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

राज्यपाल का मनोनयन मनुष्य के पुत्र का मांस खाने व लहू पीने वाली डायन (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ के मातहत और उपकरण करते हैं. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का संकलन हर उस व्यक्ति को कत्ल कराने, उसका मांस खाने और लहू पीने का डायन एलिजाबेथ को सुगम मार्ग प्रशस्त करता है, जो ईसा को राजा नहीं स्वीकार करता. (बाइबल, लूका १९:२७).

तकिय्या व कितमान और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ का प्रयोग कर जहां ईसाइयों व मुसलमानों को भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ व २९५ के अधीन बचाया जा रहा है, वहीँ ईसाइयों व मुसलमानों द्वारा उपनिवेशवासियों के आस्था का अपमान कराया जा रहा है|

उपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है, तो उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है|

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भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीन कलिमा पढ़ना, अज़ान और खुत्बों का प्रसारण, ईसाइयत, बाइबल, इस्लाम और कुरान का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध घोषित किया गया है और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा संरक्षण दिया गया है. इनके विरुद्ध कोई जज भी सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

मस्जिद, अज़ान और खुत्बे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५, जिनका नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास है, के अपराध से मुक्त हैं| जबकि इनका विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर जमानती अपराध है यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान, धर्मान्तरण, मस्जिद और चर्च एलिजाबेथ के उपनिवेश द्वारा प्रायोजित व संरक्षित है|

अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से मिला है. राष्ट्रपति और राज्यपाल ने इनके बलात्कार के संस्कृति के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० और १५९ के अंतर्गत शपथ ली है|

क्या आप को नहीं लगता कि वैदिक सनातन संस्कृति के बचने के सारे मार्ग बंद कर दिए गए हैं? क्या भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१), जो इन आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी लूट, मार और नारी बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, नहीं निरस्त होना चाहिए? क्या अज़ान, नमाज़ और खुत्बों को संरक्षण देने वाली भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए?

नारी का बलात्कार यहूदी, ईसाई (बाइबल, याशयाह १३:१६) या मुसलमान (कुरान २३:६ व ७०:३०) करेगा.

 

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सोनिया गांधी हिन्दुओ के साथ वो करना चाहती थी जो बर्बर औरंगजेब ने भी नहीं किया था

 

 20:28

औरंगजेब और अन्य मुगलो, तथा मुस्लिम हमलावरों ने भारत में हिन्दुओ का कत्लेआम किया

हिन्दू महिलाओं का बलात्कार किया, मंदिर तोड़े, धर्म का नाश किया ये सब हम इतिहास पढ़कर जानते है

परन्तु जो काम औरंगजेब ने भी हिन्दुओ के साथ नहीं किया वो काम सोनिया गांधी की कांग्रेस हिन्दुओ के साथ करना चाहती थी, यानि हिन्दुओ का पूरा सफाया

 

इसके लिए सोनिया गांधी और कांग्रेस ने ये 2 मुख्य षड्यंत्र रचे थे 1 - पहला षड्यंत्र था हिन्दुओ को आतंकवादी घोषित करना इसके तहत सरकार ने जिसके गृहमंत्री सुशिल कुमार शिंदे थे उन्होंने "हिन्दू आतंकवाद" शब्द का प्रयोग किया याद रखें आजतक भारत में सरकार ने कभी "मुस्लिम आतंकवाद" शब्द का प्रयोग नहीं किया षड्यंत्र 2004 में इनकी सरकार के बाद ही शुरू हो गया था जिसके तहत 2006 मालेगाव ब्लास्ट, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, हैदराबाद की मस्जिद में ब्लास्ट

इन सबको करवाकर हिन्दू नेताओं को पकड़ना, देश तथा दुनिया में हिन्दू आतंकवादी है ऐसा दिखाना

इस षड्यंत्र में सुशिल कुमार शिंदे से पहले चिदंबरम मुख्य रूप से शामिल थे

 

ब्लास्टों के बाद हिन्दू नेताओं की धरपकड़ हुई जिनपर आजतक एक भी सबूत नहीं मिले

इसके बाद कांग्रेस ने "हिन्दू आतंकवाद" शब्द का प्रयोग किया जिस से हिन्दुओ के प्रति दुनिया में एक सन्देश जाये आपको ध्यान रखना चाहिए की कांग्रेस के राहुल गांधी ने भी, हिन्दू आतंकवाद से देश को खतरा है ऐसा बयान दिया था

 

2 - दूसरा षड्यंत्र था हिन्दुओ के खिलाफ ऐसा कानून की वो अपने ही देश में गुलाम होकर रह जाये

 वो कानून था "साम्प्रदायिकता विरोधी कानून"

 

इस कानून के तहत किसी भी इलाके में कोई भी दंगा हो, वो किसी ने भी शुरू किया हो पर उसके लिए हिन्दू को जिम्मेदार माना जायेगा

चुकी हिन्दू देश में बहुसंख्यक है, अगर कश्मीर में भी कोई दंगा हो जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक हैं फिर भी दोषी हिन्दू को ही माना जायेगा तथा जिस इलाके में दंगा हुआ उस इलाके के हिन्दुओ पर केस चलाया जायेगा

 

इस कानून में ये भी नियम था की अगर दंगा हुआ और हिन्दू महिला का बलात्कार हुआ तो उस बलात्कार को नहीं माना जायेगा

उदाहरण के तौर पर बंगाल के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में भी दंगा हुआ और वहां हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हुआ तो बलात्कार का केस ही नहीं चलेगा

इस कानून के हिसाब से , दंगो के समय हिन्दू महिला का बलात्कार, कोई जुर्म ही नहीं होगा

मसलन दंगे में खूब करो हिन्दू महिला का बलात्कार

 

 

सोनिया गांधी और कांग्रेस ने षड्यंत्र रचा था की दुनिया में हिन्दुओ को आतंकवादी की तरह दिखा दो, दुनिया को लगे की भारत को तो हिन्दू आतंकवाद से ही खतरा है ताकि दुनिंया हिन्दू समाज के प्रति नफरत का भाव रख ले

वहीँ भारत में ऐसा कानून बनाओ की हिन्दुओ का जीना नर्क सामान हो जाये और

हिन्दू महिलाओं को बलात्कार की भेंट चढ़ाओ

 

और जब ऐसी ख़बरें आएं की हिन्दू महिलाओं का बलात्कार हो रहा है, या हिन्दुओ पर भारत में जुल्म हो रहा है

तो दुनिया उसे सच ही ना माने और हिन्दुओ को आतंकवादी समझ नफरत करती रहे और यहाँ भारत में कांग्रेस हिन्दुओ को साफ़ कर दे

 

इस तरह सोनिया गांधी और कांग्रेस ने भारत में पहले हिन्दुओ को गुलाम बनाने फिर समाप्त कर देना का षड्यंत्र रचा था⁠⁠⁠⁠

 

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[00:35, 8/14/2016] Ag Kailas Dave Indore: 💥💥ताजा खबर💥💥

💥अभी तक की सब से बडी खबर💥

 

पीएम नमो ने किया फैसला

कश्मीर से हटेगी धारा 370

 

नई दिल्ली । बीते कई दिनों से चल रही कश्मीर हिंसा धमने का नाम नहीं ले रही है। इसी बीच आखिर पीएम नमो ने कश्मीर मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। नमो ने कहा था कि अब भारत का ही नहीं पाकिस्तान का कश्मीर भी हम लेंगे। इससे यह साफ हो गया है कि नमो सरकार कश्मीतर को लेकर पाकिस्ता न के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करेगी। जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नमो जल्दक ही धारा 370 पर बड़ा एक्शरन लेने की तैयारी में हैं।

 

धारा 370 खत्म कर सकते हैं पीएम मोदी

सूत्रों के मुताबिक धारा 370 खत्मद करने को लेकर प्रधानमंत्री नमो ने अपने बयान से स्थिति साफ कर दी है। बता दें कि पीएम नमो ने बीते दिन सभी दलों के साथ कश्मीरर के हालात को लेकर एक बैठक की थी। इसी बैठक के बाद पीएम नमो ने बयान दिया था कि वह कश्मी र पर पाकिस्ताबन के साथ किसी भी तरह की कोई बात नहीं करेंगे।

उन्होंतने यह भी कहा कि अगर पाकिस्ताोन को कोई बात करनी है तो वह पाक अधिकृत कश्मींर पर होगी। प्रधानमंत्री नमो ने कहा था कि पाक अधिकृत कश्मीअर भारत का अभिन्ने हिस्सात है इसलिए अगर कोई बात करनी है तो इस मामले पर ही की जाएगी। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद से ही संभावना जताई जा रही है कि कश्मीमर से जल्द  ही धारा 370 को खत्मि कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को हुई बैठक में सभी दलों ने इसपर पीएम नमो का समर्थन करने की बात भी कही है..........विसु

[00:51, 8/14/2016] Ag Kailas Dave Indore: || गलती उनकी नही, यह हुक्मे खुदा है ||

पाकिस्थान का पूर्व क्रिकेटर इमरान खान डोरेमोन सीरियल को पाकिस्तान में दिखाने का विरोध किया,और कहा हिंदी में होनेके कारण यह काफिराना भाषा है, और उर्दू जो सिर्फ इस्लामी भाषा है ।  बच्चों को उस से दूर किया जा रहा है | उसी उर्दू को भारत में दूसरी भाषा का दर्जा राजनेताओं ने दिया है | उर्दू की पुस्तक में ईश्वर लिखा नही मिलेगा सब जगह अल्लाह ही लिखा होगा इस्लाम वाले अगर यह मान लेते की, यह दोनों नाम एक ही है, तो ईश्वर लिखने में क्या दोष ? इस्लाम वाले बखूबी जानते हैं यह दोनों नाम एक नही है, पर हिन्दू दोनों नाम को एक मानता हैं ।

 

 और ,रघुपति मान कर ईश्वर अल्लाह तेरो नाम का रट लगाता हैं, जिसे आज तक मुसलमानों ने नहीं लगाया ।

अगर हिन्दू मुस्लिम एकता की बात थी, तो कुरान का पाठ मन्दिर में किया गांधी ने, फिर गीत का पाठ मस्जिद में क्यों नही कर पाए ?

हिन्दू आज तक जानना नही चाहता, यह हिन्दू उसी मज़ार में मांगने,चादर चढाने, जाता है जहाँ हिन्दू के बाप का कातिल सोया है ।

उसी मज़ार के सामने बच्चा गोद में लिए खड़ा हैं उन्हीं से बच्चों पर थूकवाता है । हिन्दू देख कर भी नहीं सीखता । गांधी ने टोपी हिन्दू को पहनाई मुसलमानों ने उसे आज तक नहीँ पहनी, और गांधी ने भी नहीं  पहनी, हिन्दू देख कर भी नही सीखा ।

 

कुरान वालों ने भली प्रकार इसे जाना समझा, और उसी पर अमल करते आये, और करते रहेंगे | इस्लाम वाले कुरान को अल्लाह का फरमान मानते है, अल्लाह का हुक्म, आदेश मानते हैं | और कुरान में अल्लाह ने मुसलमानों को हुक्म दिया है कुरानी भाषा में, सुनें अल्लाह ने मुसलमानों को हुक्म क्या दिया है ? सूरा न० 3 =आयत =न० 28 को देखें मैं एक ही प्रमाण देता हूँ और भी अनेक है |

لَا يَتَّخِذِ الْمُؤْمِنُوْنَ الْكٰفِرِيْنَ اَوْلِيَاۗءَ مِنْ دُوْنِ الْمُؤْمِنِيْنَ  ۚ وَمَنْ يَّفْعَلْ ذٰلِكَ فَلَيْسَ مِنَ اللّٰهِ فِيْ شَيْءٍ اِلَّآ اَنْ تَتَّقُوْا مِنْھُمْ تُقٰىةً  ۭ وَيُحَذِّرُكُمُ اللّٰهُ نَفْسَهٗ  ۭ وَاِلَى اللّٰهِ الْمَصِيْرُ 28 ؀

مسلمان مسلمانوں کو چھوڑ کر کافروں کو دوست نہ بنائںذ اور جو کوئی یہ کام کریں اسے اللہ سے کوئی تعلق نہں2 مگر اس صورت مںِ کہ تم ان سے بچاؤ کرنا چاہو اور اللہ تمہںت اپنے سے ڈراتا ہے اور اللہ ہی کی طرف لوٹ کر جانا ہے |

The believers must not take the disbelievers as friends instead of the believers. And whoever does that has no relation with Allah whatsoever, unless you (do so) as a protective measure (in order to) save yourself from them. Allah warns you of Himself, for unto Allah is the return.|

 

 अर्थ:- मुसलमान मुसलमानों को छोड़ कर काफिरों को दोस्त ना बनाओ,और जो कोई यह काम करे उसे अल्लाह से कोई तयाल्लुक नही मगर उस सूरत में की तुम उनसे बचाव करना चाहो और अल्लाह तुम्हें अपने से डराता है,और अल्लाह हिकी तरफ लौट कर जाना है |

 

यह हुक्म है कुरान में अल्लाह का, इसे नहीं जानकर गाँधी ने हिन्दू मुसलिम एकता की बातें की, जो आज तक इस्लाम वालों ने स्वीकार नही किया | इसका जीता जागता प्रमाण है की नमो जी ने,पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए कपड़े के अदान प्रदान से लेकर शादी विवाह तक मीठाइयों की डिब्बी तक चली | पर नवाज ने कहा कुछ भी हो कुरानी हुक्म ही हमें मानना पड़ेगा | मैं उन कुरान के मानने वालों के साथ खड़ा हूँ, और कुरान के मुताबिक हमें रहना ही पड़ेगा | हमें उन अल्लाह वालों के साथ ही रहना होगा क्यों की हम भी कुरान को उतना ही मानते हैं, जितना की हाफिज सयीद,सलाउद्दीन,बगदादी, और उन सभी इस्लाम वाले मानते हैं कुरान को |

 

भले ही आप अपनी वैदिक मन्त्रों को रटें ={मित्रस्य चक्षुषा सर्वानी भूतानि समीक्षा महे} | आप अपने नज़र से सभी प्राणी को अपने समान मानते हों | किन्तु अल्लाह ने आप से हमें दोस्ती भी रखने को मना किया | भले ही बुरहान को आप आतंक वादी कह कर मार दिया  हो,पर अल्लाह ने उसे शहीद कहा है जो कभी करता ही नही वह मरकर भी जिन्दा हैं जो कुरान में अल्लाह ने हमें यही बताया है देखें कुरान | सूरा बकर=2 =आयत =154 =

           وَلَا تَـقُوْلُوْا لِمَنْ يُّقْتَلُ فِيْ سَبِيْلِ اللّٰهِ اَمْوَاتٌ ۭ بَلْ اَحْيَاۗءٌ وَّلٰكِنْ لَّا تَشْعُرُوْنَ   ١٥٤؁

اور جو اللہ کی راہ مں  مارے جائںَ انہںن مرا ہوا نہ کہا کرو بلکہ وہ تو زندہ ہںٌ لکنَ تم نہںٌ سمجھتے

Do not say of those who are slain in the way of Allah that they are dead. Instead, they are alive, but you do not perceive |

 

अर्थ:- और जो अल्लाह की राह में मारे जाएँ उन्हें मरा हुवा ना कहा करो, बल्कि वह तो जिन्दः हैं लेकिन तुम नही समझते |

 

अब अल्लाह का राह वही  है जो इस्लाम को बुलन्द करने वाला काम हो और उसमें काफिरों के हाथो मारे जाये वही शहीद है |

नवाज ने इसे ही चरितार्थ किया और कहा भले ही आप भारत वाले किसी को आतंकवादी कहें पर अल्लाह ने उसे जिहादी कहा जो इस्लाम के लिए ही लड रहा हैं |

इसी प्रकार इस्लाम वाले अल्लाहु अकबर कहकर काफिरों को मारता है, कुरान सुनाने पर उसे छोड़ दी जाती है | भारत तेरे टुकड़े होंगे- इंशाअल्लाह - इंशाअल्लाह, इसे सुनकर देख कर कोई अनसुनी करे तो वह अपने आप ही जिम्मेदार हैं | इस्लाम क्या है इस्लाम का फरमान क्या है अल्लाह ने इस्लाम वालों को हुक्म क्या दिया है ? मैं निरन्तर आप लोगों को 33 वर्षों से सुना रहा हूँ आप लोग भी कुरान को पढ़ कर देखें | धन्यवाद =महेन्द्रपाल आर्य =13/8/16=⁠⁠⁠⁠

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[01:54, 8/14/2016] Ag Kailas Dave Indore: सदियों पुरानी रणनीती का नया रूप ।

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तब वे मूर्तियाँ तोडते थे, आज पुलिस स्टेशन जलाते हैं ।

तब हिंदू मूर्ती में अपना संरक्षक देखता था

इसलिये मूर्ती तोडी जाती थी कि देखो, हम ने आपके रक्षणकर्ता का क्या हाल बना दिया,

वो आपको हम से बचा नहीं सकता, हम से डरो ।

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आज इसी लॉजिक के तहत पुलिस स्टेशन तोडे-जलाए जा रहे हैं ।

हमें यह दिखाने की कोशिश हैं कि ये रहे तुम्हारे बचानेवाले, हम से बच के भाग निकल रहे हैं ।

यह नहीं बताते कि हिन्दू विरोधी राजनेता जो राज्य की सरकार चला रहे हैं,

भीड़ जमा होने की जानकारी होते हुए भी वहाँ पर्याप्त पुलिस बल या RAF को नहीं भेज रहे हैं

और उग्र भीड़ पर फ़ाइरिंग का हुक्म नहीं दे रहे हैं ।

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अफजल खाँ ने तुलजाभवानी की मूर्ती तोडी, शिवाजी महाराज उस वक्त खून का घूँट पी कर रह गये ।

 लेकिन वक्त आनेपर उन्होने उसी अफजल खाँ का सर काट कर तुलजभवानी के चरणोंमे रख दिया।

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महापुरुषों से हमें सीख लेनी चाहिए । मुसलमान उनके रसूल का अनुकरण करते हैं।

 

"Quranic Concepts Of War या उसका हिन्दी अनुवाद - कुरान में युद्ध की अवधारणाएँ" अवश्य पढ़िये, बात समझ में आ जाएगी।

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इस युद्ध के लिए हमारी क्या तैयारी है? हथियार हैं घर में?

 जैसे बुलंदशहर में हुआ

 

 जब मुसलमान आप की 13 वर्ष की बेटी का बलात्कार आप के सामने करेंगें,

तो आप उन्हें रोकने में सक्षम हैं क्या?

घर में हथियार एकत्रित करें। वैध / अवैध से ऊपर उठें। हथियार का अभ्यास करें। युद्ध हमारे सर पर है।

हम सब को वीर शिवाजी बनना पड़ेगा।

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 छत्रपति शिवाजी महाराज की जय जय हिन्दुराष्ट्र

[01:56, 8/14/2016] Ag Kailas Dave Indore: तृतीय विश्व-युद्ध

 

 हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जिसमें हम पुनः पुनः प्रलयकारी दुर्घटनाओं का सामना कर रहे हैं ।जिस प्रकार से कुछ भयानक घटनाओं का नियमित रूप से प्रकटीकरण हो रहा है, उससे लोग विश्व-युद्ध का अनुमान लगा रहे हैं । तृतीय विश्व-युद्धये शब्द लोगों द्वारा अब गूगल पर खोजा जा रहा है और इसके कम होने के कोई संकेत नहीं दिखते । यह दिखाता है कि दुनिया भर के लोगों ने तृतीय विश्व-युद्ध की संभावना को इस प्रकार से देखना आरंभ कर दिया है जैसे कि अवश्य ही कुछ होने को है । फिर भी आश्चर्यजनक है कि तृतीय विश्व-युद्ध अथवा परमाणुवीय दुष्परिणामों से बचने संबंधित शब्दों के लिए अधिक नहीं खोजा जा रहा है ।आध्यात्मिक शोध के माध्यम से, इस अवधि के दुष्परिणामों के विषय में कुछ तथ्यों का पता चला है जो उस आपदा के विस्तार को दिखाएंगे जिसका हमें सामना करना होगा । निम्नलिखित पंक्तियां विश्व की स्थिति का वह चित्र है जिसका कि हम सभी को शीघ्र ही सामना करना पडेगा ।

 

सबसे पहले, जब वर्ष २०१८ में वास्तव में पतन होना आरंभ होगा । यह बहुत शीघ्रता से होगा ।

एक अनुमान के अनुसार विश्व की एक-तिहाई जनसंख्या (अर्थात, २ अरब से अधिक लोग) सामूहिक विनाश के परमाणु हथियार के कारण नष्ट हो जाएगी । लाखों अन्य लोगों की रेडियोधर्मी प्रदूषण एवं अन्य विविध, मुख्यतः परमाणुवीय अपशिष्ट से उत्पन्न, कारणों से मृत्यु हो जाएगी । कुल में से, दुनिया की लगभग आधी आबादी सीधे युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अथवा उसके पश्चात के दुष्प्रभावों के कारण नष्ट हो जाएगी ।

आपातकालीन सेवाएं और सरकारी सहायता अनुपलब्ध रहेगी अथवा आपदा एवं विनाश की विस्तृत सीमा का सामना करने में लगभग असमर्थ हो जाएंगी ।

विश्व के आधारभूत ढांचे का ७० प्रतिशत नष्ट हो जाएगा । दुनिया भर के अधिकांश नगर पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे ।

चिकित्सा आपूर्ति की भारी कमी होगी और चिकित्सकों एवं चिकित्सालयों की उपलब्धता न्यूनतम होगी ।

१० वर्ष *की अवधि के लिए भोजन की कमी रहेगी ।

१० वर्षों* के लिए पेट्रोल की गंभीर कमी हो जाएगी; इस प्रकार यह मोटर चालित परिवहन के सभी रूपों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा ।

१० वर्षों* के लिए बिजली की गंभीर कमी रहेगी ।

लोग अवसाद, चिंता और दु: ख जैसी विभिन्न मानसिक बीमारियों से ग्रस्त होंगे ।

* यह अवधि अपेक्षाकृत कम है क्योंकि उस समय, विश्व की वर्तमान जनसंख्या की केवल आधी जनसंख्या ही भोजन तथा विभिन्न सुविधाओं के उपभोग हेतु बचेगी ।

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http://bastarkiabhivyakti.blogspot.in/2011/04/blog-post.html

" किसी अच्छे यूरोपीय पुस्तकालय की एक टांड़  ( LoFT  ) ही भारत और अरब देशों के समग्र देशी साहित्य के बराबर मूल्यवान है. .......मुझे लगता है कि पूर्व के लेखक साहित्य के जिस क्षेत्र में सर्वोच्च हैं, वह क्षेत्र काव्य का है. पर मुझे अभी तक ऐसा एक भी पूर्वी विद्वान नहीं मिला है जो यह कह सके कि महान यूरोपीय राष्ट्रों की कविता के साथ अरबी और संस्कृत काव्य की तुलना की जा सकती है. ............मेरा तो यह मानना है कि संस्कृत में लिखे गए समग्र साहित्य में संकलित ज्ञान का ब्रिटेन की प्राथमिक शालाओं में प्रयुक्त छोटे से लेखों से भी कम मूल्य है. "

मैकाले

"........यदि सरकार भारत की वर्त्तमान शिक्षा पद्यतियों को ज्यों का त्यों बनाए रखने के पक्ष में है तो मुझे समिति के अध्यक्ष पद से निवृत्त होने की अनुमति दें. मुझे लगता है कि भारतीय शिक्षा पद्यति भ्रामक है, इसलिए हमें अपनी ही मान्यताओं पर दृढ रहना चाहिए .  ..........वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में हमें सार्वजनिक शिक्षा मंडल जैसा प्रतिष्ठापूर्ण नाम धारण करने का कोई अधिकार नहीं है ."

मैकाले  

 

[11:02 AM, 8/11/2016] Ank 15406: हिंदुओं में एकता की कमी होने का कारण

 

डॉ विवेक आर्य

 

1200 वर्ष का इतिहास उठाकर देखिये। हिन्दू समाज विदेशी आक्रमणकरियों के सामने अपनी एकता की कमी के चलते गुलाम बने। इस सामाजिक एकता की कमी का क्या कारण था? इस लेख के माध्यम से हम हिंदुओं में एकता की कमी के कारणों का विश्लेषण करेगे।

 

1. हिन्दू समाज में ईश्वर को एक मानने वाले (एकेश्वरवादी), अनेक मानने वाले ( अनेकेश्वरवादी) एवं ईश्वर के अस्तित्व से इंकार करने वाले (नास्तिक) सभी अपनी परस्पर विरोधी मान्यताओं को पोषित करने में लगे रहते हैं। जबकि वेदों में केवल एक ईश्वर होने का विधान बताया गया है। अनेक मत होने के कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

2. हिन्दू समाज अनेक सम्प्रदाय, मत-मतान्तर में विभाजित हैं। हर मत-सम्प्रदाय को मानने वाला केवल अपने मत को श्रेष्ठ, केवल अपने मत को चलाने वाले अथवा मठाधीश को सत्य, केवल अपने मत की मान्यताओं को सही बताता हैं। बहुदा इन मान्यताओं में परस्पर विरोध होता हैं। इस कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

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बहाना एकता का.

विरोधी मान्यताओं के होते हुए भी हिंदू जैनियों, बौद्धों, सिक्खों, शिवालयों, वैष्णवियों के पूजा स्थलों में जाता रहता है. लेकिन क्या कैथोलिक चर्च में प्रोटेस्टेंट या आर्थोडोक्स जा सकता है? क्या शिया या अहमदिया किसी सुन्नी के मस्जिद में घुस सकता है?

हमें एकता की आवश्यकता ही नहीं है. आवश्यकता है गुरुकुलों की. कपिल मुनि ने तिनका भी नहीं उठाया और महाराज सगर की सारी सेना भष्म कर दी. परशुराम की कोई सेना नहीं थी, अकेले २१ बार आतताई क्षत्रियों का विनाश किया. हनुमान निहत्थे लंका में घुसे और लंका में आग लगा दिया. चाणक्य ने मगध के राजा घनानंद का विनाश कर पूरे भारत पर साम्राज्य स्थापित किया. आदि शंकराचार्य ने अकेले बौद्ध धर्म का अंत कर ४ पीठ बनाये और सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया.

जानना चाहेंगे कैसे?

सबने गुरुकुल में, गौ का दूध पीकर ब्रह्मचर्य की शिक्षा ली और सहस्रसार तक पहुंचने में सफलता पाई. अतः गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करें.

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3. हिन्दू समाज में कुछ लोग नारी को श्रेष्ठ समझते है जबकि कुछ निकृष्ठ समझते हैं, कुछ जातिवाद और छुआछूत को नहीं मानते, कुछ घोर जातिवादी है। इस कारण से अनेक हिन्दू समाज के सदस्य धर्म परिवर्तन कर विधर्मी भी बन जाते हैं। इस कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

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4. हिन्दू समाज एक जैन भी हिन्दू कहलाता है जिसके अनुसार सर की जूं को मारना घोर पाप है जबकि एक सिख भी हिन्दू है जो झटका तरीके से मुर्गा-बकरा खाना अपना धर्म समझता है। परस्पर विरोधी मान्यताओं के कारण दोनों का आपस में तालमेल नहीं है। इस कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

 

5. हिन्दू समाज में कोई निराकार ईश्वर का उपासक है।  कोई साकार ईश्वर का उपासक है। कोई अपने गुरु अथवा मठाधीश को ही ईश्वर समझता है। कोई पर्वत, पेड़, पत्थर सभी को ईश्वर समझ कर ईश्वर की पूजा करता है। कोई सब कुछ स्वपन बताता है। कोई माया का प्रभाव बताता है। अनेक मान्यताओं, अनेक पूजा-विधियों आदि होने के कारण हिन्दू समाज भ्रमित है। इस कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

 

6. एक मुसलमान के लिए क़ुरान अंतिम एवं सर्वमान्य धर्म पुस्तक है। एक ईसाई के लिए बाइबिल अंतिम एवं सर्वमान्य धर्म पुस्तक है। एक हिन्दू के लिए वेद, पुराण, गीता, मत विशेष की पुस्तक तक अनेक विकल्प होने के कारण हिंदुओं में एकमत नहीं हैं। सभी अपनी अपनी पुस्तक को श्रेष्ठ और अन्य को गलत बताते है। इस कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

 

7. हिन्दू समाज में पूजा का स्वरुप निरंतर बदल रहा है।  एक मुसलमान वैसे ही नमाज पढ़ता है, जैसे उसके पूर्वज करते थे। एक ईसाई वैसे ही बाइबिल की प्रार्थना करता है , जैसे उसके पूर्वज करते थे।  एक हिन्दू निरंतर नवीन नवीन प्रयोग ही करने में लगा हुआ है। पहले वह वेद विदित निराकार ईश्वर की उपासना करता था। बाद में ईश्वर को साकार मानकर श्री राम और कृष्ण कि मूर्तियां बना ली। उससे पूर्ति न हुई तो विभिन्न अवतार कल्पित कर लिए। प्रयोग यहाँ तक नहीं रुका। आज 33 करोड़ देवी देवता कम पड़ गए। इसलिए साईं बाबा उर्फ़ चाँद मियां और अजमेर वाले ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की कब्रों पर सर पटकते फिरते है।  आगे संभवत सुन्नत करवाने और कलमा पढ़ने की तैयारी है। जहाँ ऐसी अंधेरगर्दी होगी वहां पर एक मत होना असंभव है। इस कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

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8. एक ईसाई अगर ईसाई मत छोड़ता है तो पूरे ईसाई मत में खलबली मच जाती है।  एक मुसलमान अगर इस्लाम छोड़ता है तो पूरे इस्लाम जगत में फतवे से लेकर जान से मारने की कवायद शुरू हो जाति है।  मगर जब कोई हिन्दू धर्म परिवर्तन करता है तो कोई हो-हल्ला नहीं होता।  एक सामान्य हिन्दू यह सोचता है कि उसका लोक-परलोक न बिगड़े दूसरे से क्या लेना हैं। यह दूसरे के दुःख-सुख में भाग न लेने की आदत के कारण हिंदुओं में एक मत नहीं है। इस कारण से हिंदुओं में एकता स्थापित नहीं हो पाती।

 

स्वामी श्रद्धानंद इन्हीं कारणों से हिन्दू धर्म को चूं-चूं का मुरब्बा कहते थे। स्वामी दयानंद के अनुसार जब तक एक धर्म पुस्तक वेद, एक पूजा विधि, एक भाषा प्रचलित नहीं होगी तब तक हिन्दू समाज संगठित नहीं हो सकता।

🙏

 

११/०८/१६

गुमराह नमो हैं. मुसलमान जिहादी हैं. मारेंगे तो गाजी बनेंगे और मरेंगे तो ७२ हूरें मिलेंगी. युवक सैनिकों को मार रहे हैं. लेकिन वे अपराधी नहीं, गुमराह युवक हैं. अब नमो जिहादी युवकों को मुख्य धारा में लायेंगे. उनको नौकरियां देंगे. पुरष्कार देंगे. सैनिक आत्मरक्षा करेंगे तो कोर्ट मार्शल होगा. जनता विरोध करेगी तो रासुका में बंद होगी. इस समस्या का नमो के पास क्या समाधान है? नमो तो एलिजाबेथ के जमूरे बन कर रह गए हैं. कानूनविदों की फौज है. मुझे यह तो कोई बताए कि स्वतंत्र उपनिवेश आजादी कैसे है? १८ जुलाई, १९४७ के लन्दन में पारित अधिनियम के अनुसार, १५ अगस्त, १९४७ को तो इंडिया और पाकिस्तान नामक दो उपनिवेश बने थे. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

पिछले ७० सालों में उपरोक्त अधिनियम में संशोधन कब हुआ? मैंने आर्यावर्त सरकार का गठन किया है. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php का गहन अध्ययन करा लीजिए. इस धारा में परिवर्तन हुआ है और आजीवन कारावास का प्रावधान जोड़ा गया है. मैं युद्ध अपराधी हूँ. हिम्मत हो तो मुझे फांसी दीजिए.

 

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नमो एलिजाबेथ, जिसे मानवता का संहार कर ईसा का राज्य स्थापित करना है, के बलिपशु हैं. उपनिवेश के हित में बलिदान होंगे. खुद तो कत्ल होंगे, वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को भी कत्ल करायेंगे.

भटके हुए? किसने कहा??

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को ईसाई स्वयं नहीं मिटा सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है|

गांधीवध के बाद भारतीय संविधान का संकलन कर उपनिवेशवासियों पर थोपा गया. जिसका अनुच्छेद २९(१) मानवजाति को लुप्त करने के लिए संकलित किया गया है. वह भी अत्यंत धूर्तता से. यह अनुच्छेद इस कठोर सच्चाई को सीधे नहीं कहता. अपितु इंडिया में रहने वाले अल्पसंख्यक वर्गों के संस्कृति भाषा व लिपि को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है. वे अल्पसंख्यक ईसाई व मुसलमान हैं, जो विश्व में प्रथम एंड द्वितीय जनसंख्या वाले लोग हैं. मानवमात्र की लूट, हत्या, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार जिनकी संस्कृति है. हमारा साम्राज्य पूरे विश्व में था, आज हमारा कोई देश नहीं है.

हर उपनिवेशवासी ने अपना पूजा स्थल [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)] और उपासना की स्वतंत्रता (अज़ान, कुरान ३:१९) भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित, गवां दिया है|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २५ मुसलमानों को काफिरों का धर्मांतरण करने का अधिकार देता है. जबकि कुरान ४:८९ अनुसार जो भी इस्लाम त्यागे उसे कत्ल करना मुसलमान का दायित्व है.

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन पूर्व संस्तुति की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति और राज्यपाल के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं- भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ईसाईयों व मुसलमानों के विरुद्ध अभियोग ही नहीं चला सकता| राष्ट्रपति और राज्यपाल को गोह्त्यारों को संरक्षण, पोषण व संवर्धन की क्रमशः भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है|

भारतीय संविधान उपनिवेशवासियों के गले पर रखी हुई तलवार है|

 

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अंग्रेजों ने पाक पिता गांधी द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए मुसलमानों और ईसाईयों को इंडिया में रखवाया है

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ¬¬सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है| ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित व दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं| एक जेसुइट एलिजाबेथ ने, निर्विरोध, पूरे मानव जाति को वीर्यहीन कर, सबके प्राणों को संकट में डाल कर, अपने अधीन कर रखा है| किसी के पास एलिजाबेथ के विरोध का साहस नहीं!

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

ईसाईयों व मुसलमानों के शत्रु स्वयं कैथोलिक ईसाई हैं|

ईसाईयों ने उनके खलीफा, सद्दाम और ओसामा को समाप्त कर दिया| एलिजाबेथ ने इंडिया व पाकिस्तान सहित ५३ ईसाई व इस्लामी राष्ट्रों को अपना उपनिवेश बना रखा है| खिलाफत को मिटाने के लिए ईसाईयों ने उनके ही भाई तुर्की बिन फैसल अल सऊद का उपयोग किया| अब वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए ईसाई मूर्ख मुसलमानों (कुरान २:३५) का उपयोग कर रहे हैं| जिस दिन वैदिक सनातन संस्कृति मिटी, कैथोलिक ईसाईयों द्वारा मानवजाति को मिटा दिया जायेगा और मुसलमानों का अल्लाह कुछ नहीं कर पायेगा|

हम वैदिकपंथी ईसाईयों व मुसलमानों का अहित नहीं करेंगे| अतः मुसलमान कौम के हित हमसे मिलने से अधिक सुरक्षित हैं|

इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. उसने वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए काले शासकों को पट्टे पर दिया है. अभी डाकू आतंकवादी महामहिम राम नाइक राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कराकर और जजों को धमका कर मेरी २ अरब की सम्पत्ति लूटे हुए है. जब अमेरिकी लाल भारतीय लोगों और उनकी माया संस्कृति की भांति उपनिवेशवासियों और उनकी वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, तब लोकसेवकों, ईसाईयों व मुसलमानों का नम्बर आएगा.

आक्रांता अंग्रेजों ने इस अधिनियम को हॉउस ऑफ कामन्स में सत्ता के हस्तांतरण के पूर्व १८ जुलाई, १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार ब्रिटेन शासित भारत का दो उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को भारत बंट गया। इस समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान हों या ईसाई, उपनिवेशवासियों का सभी कुछ एलिजाबेथ का ही है. आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रखा गया है.

वस्तुतः वैदिक सनातन संस्कृति को मिटा कर मुसलमान अपना ही अहित करेंगे| उनका हज अनुदान, मुअज्जिनों, इमामों व मौलवियों का वेतन बंद हो जायेगा| स्कूलों के उर्दू शिक्षकों का पद समाप्त हो जायेगा.

मकतबों का अनुदान समाप्त हो जायेगा. उनका वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग और मुस्लिम निजी कानून भी बेमानी हो जायेगा| उनको फिरभी एलिजाबेथ के उपनिवेश से मुक्ति नहीं मिलेगी| जब मुसलमानों की कवच वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी तब ईसाई व मुसलमान भी मिटा दिए जायेंगे. न अल्लाह मिलेगा और न विशाले सनम| बेचारे मुसलमान (कुरान २:३५).

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२०वीं सदी के मीरजाफर (गांधी) और माउंटबेटन के बीच समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान व ईसाई सहित सभी उपनिवेशवासियों का सब कुछ एलिजाबेथ का ही है. आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रखा गया है. (पहले स्वतंत्रता तो लीजिये|) माउन्टबेटन को उपनिवेश बनाकर भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर, मानवमात्र को कत्ल होने के लिए, सदा सदा के लिए उपनिवेशवासियों की धरती को छीन कर संयुक्त रूप से हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी दास मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया|

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

चुनाव हमारे किसी समस्या का समाधान नहीं है. पिछले दिल्ली चुनाव में मुख्यमंत्री के दो प्रमुख दावेदार केजरीवाल और किरण बेदी थे और दोनों को ही राकफेलर का रमन मेगासेसे पुरष्कार प्राप्त हुआ है. यानी दोनों ही राकफेलर के हितों को साधने के लिए विवश हैं. इसके अतिरिक्त वोट से मानवजाति को उपनिवेश से मुक्ति नहीं मिल सकती. दोनों ही वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए विवश हैं. दोनों ही मस्जिद और अज़ान का विरोध नहीं कर सकते. दोनों ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१), जो किसी को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९(ग), जो किसी को सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का अधिकार नहीं देता, को नहीं बदल सकते.

इतना ही नहीं - जो ईमाम मस्जिदों से काफ़िर उपनिवेशवासियों के गरिमा का हनन करते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, अविश्वासियों के नरसंहार की और अविश्वासियों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). न्यायपालिका ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) भी दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान और बपतिस्मा भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित है.

आप, उपनिवेशवासी, जज, राष्ट्रपति और राज्यपाल मस्जिदों से प्रसारित की जाने वाली अज़ान और खुत्बों को सुन कर लज्जित नहीं होते. इतना ही नहीं - जो ईमाम मस्जिदों से काफ़िर उपनिवेशवासियों के गरिमा का हनन करते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, काफिरों  के नरसंहार की और काफिरों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). न्यायपालिका ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) भी दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/).

अंग्रेजों द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रोक लेना ही वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए पर्याप्त है|

पाक पिता गांधी द्वारा इंडिया में ईसाई और मुसलमान वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रोके गए हैं|

भारतीय संविधान वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए संकलित किया गया है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाई व मुसलमान सहित किसी उपनिवेशवासी को जीने का अधिकार नहीं देता| भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) किसी उपनिवेशवासी को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता| आज सारा संसार नपुंसकों का एक झुण्ड बन चुका है| किसी के पास भी चरित्र नहीं है| हमारी मान्यता है| कि यदि आप का धन गया तो कुछ नहीं गया| स्वास्थ्य गया तो आधा चला गया और यदि चरित्र गया तो सब कुछ चला गया|

जीवित मुसलमान और ईसाई भी न बचेंगे. अभी एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए उनका उपयोग कर रही है, प्रसन्नता पूर्वक मुसलमान और ईसाई अपने ही आश्रयदाताओं को नष्ट कर रहे हैं. जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जायेगी, तो एलिजाबेथ ईसाईयों व मुसलमानों को भी खा जायेगी.

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

इतना ही नहीं - जो ईमाम मस्जिदों से काफ़िर उपनिवेशवासियों के गरिमा का हनन करते हैं, वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने की, अविश्वासियों के नरसंहार की और अविश्वासियों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं, उन ईमामों के गरिमा और जीविका की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का न्यायपालिका ने आदेश पारित किया है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). न्यायपालिका ने भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल को संरक्षण (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) भी दिया है| हज अनुदान को भी सर्वोच्च न्यायलय कानूनी मान्यता दे चुकी है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/) यानी मानवता को मिटाने के लिए अज़ान और बपतिस्मा भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) से प्रायोजित है.

धरती का प्रत्येक मनुष्य अल्लाह और ईसा का अपराधी है| ईसाई व मुसलमान दोनों कत्ल करेंगे| ईसाई व मुसलमान दोनों को इंडिया में वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए रोका गया है| जहाँ तक मैं समझता हूँ, आप मुसलमानों को किसी दबाव में बचा रहे हैं| यह लड़ाई आप नहीं लड़ सकते| आप को चक्रवर्ती सम्राट बनाने के लिए हमारे जगतगुरु स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ, जो मस्जिदों में विस्फोट के तमाम अभियोगों में बंद हैं, लड़ना चाहते हैं| शर्त है कि यदि आप भामाशाह और चन्द्रगुप्त दोनों बन सकें| लेकिन यह बात आप के पिता श्री को भी नहीं मालूम होनी चाहिए|

शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के नये मानदंड.

उपनिवेशवासी को लूटना और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना राष्ट्रपति और राज्यपाल की बाध्यता है.

हम मान लेते हैं कि मुसलमान या ईसाई वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने में सफल हो जाते हैं, तब भी एलिजाबेथ के कश्मीर व पाकिस्तान सहित ५३ उपनिवेशों के ईसाई व मुसलमान एलिजाबेथ के दास थे, हैं और रहेंगे| क्या ईसाई व मुसलमान लोगों को अपना अस्तित्व और स्वतंत्रता चाहिए? यदि हाँ! तो ईसाई व मुसलमान पहले एलिजाबेथ की दासता से मुक्ति लें.

ईसाई व मुसलमान मूर्ख हैं| वैदिक सनातन संस्कृति मुसलमानों और ईसाईयों की कवच है| ईसाईयों व मुसलमानों को खतरा वैदिक सनातन संस्कृति से नहीं है. वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों ने सर्वदा, बिना भेद भाव के, मानवता को शरण दिया है. दोनों के हित वैदिक सनातन संस्कृति के अस्तित्व में रहने से ही सुरक्षित हैं.

यदि वैदिक सनातन संस्कृति न बची तो मानवजाति डायनासोर की भांति लुप्त हो जायेगी.

 

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इस्लाम को वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी द्वारा रखा गया है.

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

मानवताको मिटाने के लिए माउंटबेटन ने २०वीं सदी के मीरजाफर (गांधी) से १९४७ में गुप्त समझौता किया. संसार के इतिहास में कहीं भी और कभी भी बिना युद्ध ३५ लाख से अधिक लोग नहीं कत्ल किये गए, जितने कि मानवताको मिटाने के लिए माउंटबेटन ने २०वीं सदी के मीरजाफर (गांधी) से गुप्त समझौता कर बंटवारे के समय १९४७ में कत्ल कराए. आज जब कुछ ईसाई बच्चों सहित कत्ल हो रहे हैं, नारियां नीलाम की जा रही हैं, तो मीडिया को छाती पीटने का अधिकार कहाँ है?

काफ़िर जड़ पर वार नहीं कर रहे हैं| हमारी समस्या यह है कि संविधान बना कर हमसे हमारा देश, सम्पत्ति, जीवन का अधिकार और हमारी शिक्षा पद्धति सभी कुछ छीन लिया गया है| मानवजाति की समस्या ईसाई व मुसलमान नहीं ईसाइयत और इस्लाम है| अतएव ईसाइयत और इस्लाम मिटाइए|

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

क्या मैं जान सकता हूँ कि इन हत्यारी, बलात्कारी और लुटेरी संस्कृतियों को २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने इंडिया में गोहत्या का अधिकार देकर क्यों रखा? विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

इस्लाम सदा सदा के लिए अविश्वासियों के गले पर रखी हुई तलवार है| हम वैदिक पंथी इस्लाम को नहीं रहने देंगे| राष्ट्रीय एकता और सर्वधर्म समभाव अज़ान के साथ ही समाप्त हो जाते है|

जिस समाज के विद्वतजन भ्रष्ट हो जाते हैं, वह समाज नष्ट हो जाता है, क्यों कि शिक्षा और आचरण द्वारा भावी पीढ़ी की मनोवृत्ति बनाने वाले वह ही हैं| जिस जाति को प्रातः स्मरणीय हुतात्मा पंडित नथूराम गोडसे हत्यारे लगें और राष्ट्र व लाखों काफिरों की हत्या, करोड़ों काफिरों का निर्वासन कराने वाला मोहनदास करमचंद गाँधी महात्मा और राष्ट्रपिता लगे और नित्यप्रति अपने लोगों की घटती जनसंख्या की चिंता न हो वह कितने दिन तक जीवित रह सकती है?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन पूर्व संस्तुति की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति और राज्यपाल के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं- इन बलात्कारियों के विरुद्ध अभियोग ही नहीं चला सकता| राष्ट्रपति और राज्यपाल को इन कुकर्मियों के बलात्कार के संरक्षण, पोषण व संवर्धन की क्रमशः भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन शपथ लेनी पड़ती है|

कितने अभागे हैं वीर्यहीन बनवारी और अखिलेश? जो गौ नर भक्षी एलिजाबेथ के आगे भयादोहित हो कर अपनी संपत्ति, पूँजी, नारियां और जीवन मिटाने के लिये विवश हैं| किसी के पास साहस नहीं कि एलिजाबेथ का विरोध कर सके!

http://www.aryavrt.com/muj14w32a-15agst_upnivesh_divas

नीचे दिए गए URL से स्पष्ट हो जायेगा कि २०वीं सदी का मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ईसाईयों और मुसलमानों को इंडिया में रखने का अपराधी है.

पद, प्रभुता व पेट के लोभमें राष्ट्रपति व राज्यपालभारतीय संविधान और कानूनों को संरक्षण, पोषण व संवर्धन देनेकेलिए, संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अंतर्गत, शपथ द्वारा विवश कर दिए गए हैं|

उपनिवेशवासी डायन जेसुइट एलिजाबेथ के दास हैं. दास के पास अधिकार नहीं होते. २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द (गांधी) और माउंटबेटन के बीच समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान व ईसाई सहित सभी उपनिवेशवासियों का सब कुछ एलिजाबेथ का ही है. हमारी स्थिति किसान के पशु की भांति है, जिसका कुछ भी नहीं होता! यदि इंडिया आगे भी एलिजाबेथ का उपनिवेश बना रहा तो एलिजाबेथ उपनिवेशवासियों को कत्ल करेगी (बाइबल, लूका १९:२७) उनका मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). उपनिवेशवासियों के नारियों का उनके पुरुषों के आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६). वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से. उपनिवेशवासी कुछ न कर पायेंगे!

हम मालेगांव के अभियुक्त उपनिवेश से मुक्ति के लिए लड़ रहे हैं. जिनको जीवित रहना हो, हमे सहायता दें.

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने ईसाई व मुसलमान को गौ-नर हत्या का अधिकार देकर इंडिया को सौंप दिया. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

हम मालेगांव के अभियुक्त उपनिवेश से मुक्ति के लिए लड़ रहे हैं. जिनको जीवित रहना हो, हमे सहायता दें

वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों का तो कोई देश ही. इंडिया और पाकिस्तान सहित ५३ देश आतताई और गो-नरभक्षी (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) एलिजाबेथ के उपनिवेश हैं. उपनिवेशवासी डायन जेसुइट एलिजाबेथ के दास हैं. दास के पास अधिकार नहीं होते. २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द (गांधी) और माउंटबेटन के बीच समझौते के अधीन इंडिया के मुसलमान व ईसाई सहित सभी उपनिवेशवासियों का सब कुछ एलिजाबेथ का ही है. उपनिवेशवासियों की स्थिति किसान के पशु की भांति है, जिसका कुछ भी नहीं होता! यदि इंडिया आगे भी एलिजाबेथ का उपनिवेश बना रहा तो एलिजाबेथ उपनिवेशवासियों को कत्ल करेगी (बाइबल, लूका १९:२७) उनका मांस खायेगी और रक्त पिएगी| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३). उपनिवेशवासियों के नारियों का उनके पुरुषों के आँखों के सामने बलात्कार कराएगी (बाइबल, याशयाह १३:१६). वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से. उपनिवेशवासी कुछ न कर पायेंगे! विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

गौ हत्या के लिए २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने देश के उपनिवेशवासियों को बेंच कर ब्रिटेन के उपनिवेश का दास बना दिया है. भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, का जिसने भी विरोध किया वह अम्बेडकर सहित जीवित नहीं बचा. चुनाव धोखा है| चुनाव द्वारा मतदाता (Voter) भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म नहीं बदल सकते. निम्न URL पढ़ें;

हम मात्र २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी के ही नहीं, तथाकथित पैगम्बरों मूसा और मुहम्मद और उनके चलाए मजहबों यहूदी और इस्लाम के महिमामंडन के भी अपराधी हैं. क्या आप स्वीकार करते हैं कि आतंकवादी का धर्म नहीं होता? हमारी कमजोरी यहाँ है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

कौन हैं जिनको गौमांस खाने और इंडिया में रहने का २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने अधिकार दिया है?

नेताजी आज़ादी का युद्ध लड़ रहे थे. उनको २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने अपना शत्रु घोषित कर दिया. सत्ता हस्तांतरण के समझौते के अधीन आज भी नेताजी युद्ध अपराधी हैं. ५३ उपनिवेश देशों सहित इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश है. उन्हें जीवित या मृत आज भी ब्रिटेन को सौंपना है. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन भी, जो भी उपनिवेश विरोधी है, उसे फांसी मिलनी ही मिलनी है. कौन सा न्याय दिलाएंगे? इस्लाम व उपनिवेश विरोध के कारण साध्वी प्रज्ञा और जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ सहित मेरे ९ सहयोगी मालेगांव कांड में बंद हैं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

और

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी इन आतताईयों को इंडिया में रोकने का अपराधी है.

भारतीय संविधान, एलिजाबेथ का उपनिवेश और मैकाले के यौनशिक्षा के स्कूल खतरे में| सेकुलर कुत्ते भौंक रहे हैं|

नेताजी आज़ादी का युद्ध लड़ रहे थे. उनको २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने अपना शत्रु घोषित कर दिया. सत्ता हस्तांतरण के समझौते के अधीन आज भी नेताजी युद्ध अपराधी हैं. ५३ उपनिवेश देशों सहित इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश है. उन्हें जीवित या मृत आज भी ब्रिटेन को सौंपना है. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन भी, जो भी उपनिवेश विरोधी है, उसे फांसी मिलनी ही मिलनी है. कौन सा न्याय दिलाएंगे? इस्लाम व उपनिवेश विरोध के कारण साध्वी प्रज्ञा और जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ सहित मेरे ९ सहयोगी मालेगांव कांड में बंद हैं. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी ईसाईयों व मुसलमानों को इंडिया में रोक लिया. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

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२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी ईसाईयों व मुसलमानों को इंडिया में रोक लिया. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

यदि कोई काफ़िर २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी का विरोध कर दे तो उसका सर्वनाश करने के लिए प्रजातंत्र के चारो स्तम्भ तत्पर हैं. अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं. काफ़िर को कत्ल करना (कुरआन ८:१७) व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है| जो काफ़िर इस कठोर सच्चाई का विरोध करेगा, उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी जायेगी. उसका नार्को टेस्ट किया जायेगा. उसे जेल में जहर दिया जायेगा, ताकि वह घुट घुट कर मरे. हमारी साध्वी प्रज्ञा के साथ यही किया गया है. उसके मुंह में गोमांस ठूसा जायेगा. हमारे जगतगुरु एवं कुलपति स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ के साथ यही किया गया. सभी जज जानते हैं. किसी जज के पास न्याय करने का साहस ही नहीं है?

सबसे बड़े गौ हत्यारे, २०वीं सदी के मीरजाफर, पाकपिता, राष्ट्रहंता, बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने अपने अन्य सहयोगी बैरिस्टरों के साथ मिल कर माउंटबेटन से सत्ता के हस्तांतरण का समझौता कर, मानवमात्र के नरसंहारक अब्रह्मी संस्कृतियों को बसाने का अपराध किया है. भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७

 

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने लुटेरी, बलात्कारी और खूनी अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रोक लिया. गो हत्या को संरक्षण दिया. आज भी हमें उसके बताए मार्ग पर चलना पड़ेगा, यानी हंसते हुए मुसलमानों के हाथों अपना गला कटाना पड़ेगा. नियमित रूप से प्रतिदिन ५ बार मस्जिदों से ईशनिंदा और कत्ल होने की चेतावनी सुननी पड़ेगी.

हम एलिजाबेथ के उपनिवेश को चुनौती देते हैं| हम जानना चाहते हैं कि मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

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काबा हमारा ज्योतिर्लिंग है| अज़ान ईशनिंदा है| मस्जिद सेनावास हैं और कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है| आर्यावर्त सरकार इस्लाम नहीं रहने देगी|

साध्वी प्रज्ञा को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों से बचाना चाहती हैं| साध्वी प्रज्ञा अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटाने के लिए ही जेल में हैं| आज भी उनकी ललकार है, “एलिजाबेथ सत्ता में क्यों? काबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अज़ान ईशनिंदा है। अतएव साध्वी के सपनों को साकार कीजिये| चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाइए|

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने लुटेरी, बलात्कारी और खूनी अब्रह्मी संस्कृतियों को इंडिया में रोक लिया. गो हत्या को संरक्षण दिया. आज भी हमें उसके बताए मार्ग पर चलना पड़ेगा, यानी हंसते हुए मुसलमानों के हाथों अपना गला कटाना पड़ेगा. नियमित रूप से प्रतिदिन ५ बार मस्जिदों से ईशनिंदा और कत्ल होने की चेतावनी सुननी पड़ेगी.

हम एलिजाबेथ के उपनिवेश को चुनौती देते हैं| हम जानना चाहते हैं कि मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

काबा हमारा ज्योतिर्लिंग है| अज़ान ईशनिंदा है| मस्जिद सेनावास हैं और कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है| आर्यावर्त सरकार इस्लाम नहीं रहने देगी|

साध्वी प्रज्ञा को इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है कि वे वैदिक सनातन संस्कृति को आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों से बचाना चाहती हैं| साध्वी प्रज्ञा अब्रह्मी संस्कृतियों को मिटाने के लिए ही जेल में हैं| आज भी उनकी ललकार है, “एलिजाबेथ सत्ता में क्यों? काबा मूर्तिपूजकों की है। कुरआन लूट संहिता है। अज़ान ईशनिंदा है। अतएव साध्वी के सपनों को साकार कीजिये| चर्च, मस्जिद, अज़ान और संविधान मिटाइए|

आतंकवादी नहीं जिहादी| मस्जिदों से ईशनिंदा और नरसंहार की शिक्षा दी जाती है| हम मस्जिदें तोड़ने वाले हैं| सहयोग दें|

हमारे अतिरिक्त इश्वी सन ६३२ से आज तक विरोध किसने किया?

मुसलमान अविश्वासियों की हत्या करने से स्वर्ग पाएंगे| हमारे पास भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार है| इस्लाम का अनुयायी काफ़िर की हत्या करने के लिए विवश है| अतः आइये प्रण करें कि हम धरती पर इस्लाम को नहीं रहने देंगे|

मस्जिदों से ईमाम का ईशनिंदा अज़ान व अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा धार्मिक उन्माद क्यों नहीं?

आपसी सौहार्द के सबसे बड़े प्रमाण है, मस्जिदों से चिल्लाये जाने वाली ईमामों की अज़ान, “ला-इलाह-इल्ल्अल्लाह, अर्थात् कोई पूज्य, उपास्य नहीं, सिवाय अल्लाह के।और अविश्वासियों को कत्ल करने के खुतबे हैं|

कुरान जलाने पर मौत का फतवा देने वाले सरकारी संरक्षण में अज़ान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें? हमसे उपासना की स्वतंत्रताका वादा किया गया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें?

ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें? हमसे उपासना की स्वतंत्रता का वादा किया गया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें?

'मात्र अल्लाह पूज्य है' उपासना की स्वतंत्रता कैसे है?

मस्जिदों से प्रतिदिन ५ बार नियमित रूप से और नियमित समय पर लाउडस्पीकर पर अज़ान यानी ईशनिंदा का प्रसारण किया जाता है और काफिरों को कत्ल करने के खुत्बे दिए जाते हैं| काफिरों को अज़ान और कलिमाद्वारा चेतावनी दी जाती है, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “मात्र अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं. कोई जज कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें?

पाकपिता गाँधी और भारतीय संविधान ने हमसे उपासना की स्वतंत्रताका वादा किया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें? ईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का क्या अधिकार? |

'मात्र अल्लाह पूज्य है' उपासना की स्वतंत्रता कैसे है?

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधिकार से ईशनिंदा का विरोध करनेवाले को कुचलने के लिए राज्यपाल को एलिजाबेथ ने मनोनीत कराया है.

ओबामा मुसलमान भी हैं और ईसाई भी|

 

मुसलमान और ईसाई शासकों के अंदर साहस हो तो मुझसे मिलें और मिल कर उपनिवेश वाद को समाप्त करने के लिए युद्ध लड़ें| अन्यथा ईसाईयों और मुसलमानों दोनों का ही अस्तित्व नहीं रहेगा|

१०/०८/१६

 

०८/०८/१६

वीर्यहीन करने के लिए इंद्र ने एक मेनका को वीर्यवान विश्वामित्र को सौंप दिया. विश्वामित्र को मेनका ने वीर्यहीन कर दिया. सभी दिव्यास्त्रों एवं ब्रह्मास्त्र का ज्ञान रखते हुए भी विश्वामित्र उनका उपयोग नहीं कर पाए. हार कर उनको राम लक्षमण का सहारा लेना पड़ा.

मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६ व ७०:३०) ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| बाइबल और कुरान मूसा व मुहम्मद के तथाकथित ईश्वरीय आदेश हैं, जिनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४)

बलि को ब्रह्मचारी बामन ने परास्त किया. सहस्रबाहु को ब्रह्मचारी परशुराम ने. यहाँ तक कि ब्रह्मचारी चाणक्य ने घनानंद को परास्त किया. बिना गुरुकुल के ब्रह्मचारी के अब्रह्मी संस्कृतियों को कोई नहीं मिटा सकता.

 

०७/०८/१६

उपनिवेशवासी अज़ान, नमाज, ईमाम या कुरान को ईशनिंदा का दोषी नहीं ठहरा सकते| लेकिन यदि उपनिवेशवासी बाइबल, कुरान, बपतिस्मा, अज़ान का विरोध करेंगे तो ईश-निंदक हैं| कमलेश तिवारी की भांति रासुका में बंद हो जायेंगे. इस्लाम ईशनिंदा के बदले मृत्युदंड देता है.

सारी विषमताओं के होते हुए भी कुरान व बाइबल पर उंगली नहीं उठाई जा सकती| ऐसा करना ईश-निंदा है| जिसके लिए अब्रह्मी संस्कृतियों में मृत्युदंड है और भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन संज्ञेय गैर-जमानती अपराध है.

आइये तुलना करते हैं, कमलेश तिवारी के प्रेसनोट की, वर्तमान में जारी विरोध प्रदर्शनों से,

ईशनिंदा के अपराध में कमलेश तिवारी पर रासुका भी लगी है और अब तक उनका सर कलम कर लाने वाले को ४१ करोड़ रु० देने का फतवा जारी हो चुका है. क्योंकि कमलेश तिवारी ने नबी के विरोध में प्रेसनोट जारी किया है. धर्म विशेष के विरुद्ध आपत्ति की है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/fatwa

मुसलमान मस्जिदों से प्रतिदिन अज़ान, नमाज़ और खुत्बों में काफिरों के ईष्टदेवों की ईशनिंदा करते रहते हैं तब रासुका क्यों नहीं लगती?

आजतक फतवा जारी करने वाला कोई मुसलमान रासुका में क्यों बंद नहीं किया गया?

 

 

एक बंदर आंधी, पानी और ठंड से परेशान था. चिड़ियों ने उसे सलाह दिया कि एक घर बनवा ले. बंदर ने घर तो नहीं बनवाया, अलबत्ता चिड़ियों के घोंसले उजाड़ दिया.

लोकसेवक मेरे साथ सन १९९२ से ऐसा ही कर रहे हैं.

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बिना राज्यपाल के संस्तुति के जज सुनवाई नहीं कर सकता| आम उपनिवेशवासी शिकायत नहीं कर सकता| चूंकि इस कानून के बनने के बाद से आज तक किसी राज्यपाल ने किसी मस्जिद या ईमाम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा २९५अ के अंतर्गत कोई अभियोग नहीं चलाया, अतएव एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत उप राज्यपाल महामहिम श्री तेजेन्द्र खन्ना का राज्य ईमामों व मस्जिदों को संरक्षण देने का अपराधी है और सर्वोच्च न्यायालय ईमामों को वेतन दिलवाने का अपराधी| (एआईआर, एस सी १९९३, २०८६). एलिजाबेथ काफ़िर की हत्या कराने पर तुली हुई है| भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत आत्मरक्षा उपनिवेशवासी का अधिकार है|

 

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०४/०८/१६

 

Brij Nandan Sharma

August 3 at 9:39pm

 

 

क्या अब भी आप धर्मनिरपेक्ष बने रहेंगे ?

 

क्या आप धर्मनिरपेक्ष हैं ? जरा फ़िर सोचिये और स्वयं के लिये इन प्रश्नों के उत्तर खोजिये.....

1-. विश्व में लगभग 52 मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो ?

2-. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?

3-. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ 85% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, 15% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?

4-. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ?

5- किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?

6-. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?

7-. 1947 में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ?

8-. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर 14.2% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ?

9- यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि "अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है" ?

10-. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ?

11- कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?

12- हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?

13- मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती ?

14- गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत और पलायन पर क्यों नहीं होता ?

15- क्या आप मानते हैं - संस्कृत सांप्रदायिक और उर्दू धर्मनिरपेक्ष, मन्दिर साम्प्रदायिक और मस्जिद धर्मनिरपेक्ष, तोगडिया राष्ट्रविरोधी और ईमाम देशभक्त, भाजपा सांप्रदायिक और मुस्लिम लीग धर्मनिरपेक्ष, हिन्दुस्तान कहना सांप्रदायिकता और इटली कहना धर्मनिरपेक्ष ?

16-. अब्दुल रहमान अन्तुले को सिद्धिविनायक मन्दिर का ट्रस्टी बनाया गया था, क्या मुलायम सिंह को हजरत बल दरगाह का ट्रस्टी बनाया जा सकता है ?

17- एक मुस्लिम राष्ट्रपति, एक सिख प्रधानमन्त्री और एक ईसाई रक्षामन्त्री, क्या किसी और देश में यह सम्भव है, यह सिर्फ़ सम्भव है हिन्दुस्तान में क्योंकि हम हिन्दू हैं और हमें इस बात पर गर्व है, दिक्कत सिर्फ़ तभी होती है जब हिन्दू और हिन्दुत्व को साम्प्रदायिक कहा जाता है ।

स्वामी विवेकानन्द ने कहा था - "हिन्दुत्व कोई धर्म नहीं है, यह एक उत्तम जीवन पद्धति है" । गाँधी के खिलाफ़त आन्दोलन के समर्थन और धारा 370 पर भी काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है और ज्यादा लिखने की जरूरत नहीं है, इसलिये नहीं लिखा, फ़िर भी.....उपरिलिखित विचार किसी राजनैतिक उद्देश्य के लिये नहीं हैं, ये सिर्फ़ ध्यान से चारों तरफ़ देखने पर स्वमेव ही दिमाग में आते हैं और एक सच्चे देशभक्त नागरिक होने के नाते इन पर प्रकाश डालना मेरा कर्तव्य है ।

 

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नहीं मानते तो विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/gau-hatyara-gandhi

 

 

क्या आप जानते हैं कि

जेहोवा और अल्लाह नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) देते हैं? (दोनों ईश्वर हैं और आशा राम बापू और राधे माँ?)

 

०३/०८/१६

वीर्यहीन करने के लिए इंद्र ने एक मेनका को विश्वामित्र को सौंप दिया. वीर्यवान विश्वामित्र को मेनका ने वीर्यहीन कर दिया. सभी दिव्यास्त्रों एवं ब्रह्मास्त्र का ज्ञान रखते हुए भी विश्वामित्र उनका उपयोग नहीं कर पाए. हार कर उनको राम लक्षमण का सहारा लेना पड़ा.

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३१/०७/१६

विवश राष्ट्रपति और राज्यपालों को समर्पित अंक...

Muj16W31 BETI DIVAS

 

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३०/०७/१६

मनुष्य का पौरुष तो गुरुकुलों का बहिष्कार करने अथवा खतना कराने मात्र से समाप्त हो जाता है.

 

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२८/०७/१६

जिसने भी भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की अथवा परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण की शपथ ली है, उसे किसी शत्रु की आवश्यकता नहीं है और न ही किसी को श्राप देने की आवश्यकता है|

यह संस्कृतियों का युद्ध है, जिसे हम १९९१ से लड़ रहे हैं|

अब्रह्मी संस्कृतियाँ अविश्वासियों को मिटाने का कोई अवसर नहीं गवाने वाली.

मानवजाति को बचाने के लिए अब्रह्मी संस्कृतियों का समूल नाश जरूरी है|

हमें उपनिवेश से मुक्ति लेनी ही पड़ेगी. हम अब्रह्मी संस्कृतियों से विकट परिस्थितियों में आप लोगों के लिए लड़ रहे हैं. जब आप ही लोग इन मूर्खों का समर्थन करेंगे, तो यह जान लीजिए कि आप का ही नहीं मानवजाति का समूल नाश आसन्न है.

एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है." हमारी मुक्ति का मार्ग अब्रह्मी संस्कृतियों का समूल नाश है|

 क्या आप माननीय प्रधानमंत्री नमो से आग्रह करेंगे कि वे हमारी गुप्त सहायता करें?

आत्मरक्षा का उपाय है, ईसाइयत और इस्लाम का समूल नाश. जिसके समझ में आये आर्यावर्त सरकार से मिले.

इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से संरक्षण, पोषण व संवर्धन प्राप्त ईसाइयत और इस्लाम किसी को उपासना स्थल रखने का अधिकार नहीं देते. [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)] अब्रह्मी संस्कृतियाँ रहेंगी तो रामलला मंदिर बना भी तो नष्ट कर दिया जायेगा.

अब्रह्मी संस्कृतियाँ रहेंगी तो मानवजाति बचेगी नहीं| ईसाई मुसलमान को कत्ल करेगा व मुसलमान ईसाई को| अंततः एलिजाबेथ अपने ही प्रोटेस्टेंट व अन्य समुदाय को कत्ल करेगी|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान को, मानव जाति की रक्षा के लिए, नष्ट करना चाहते हैं जबकि

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है| वर्तमान परिस्थितियों में एलिजाबेथ द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोकसेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ के दासों) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए अब्रह्मी संस्कृतियाँ. उपनिवेश व भारतीय संविधान उत्तरदायी है| भारतीय संविधान ने प्रजातंत्र के चारो स्तंभ के लोगों के पद, प्रभुता और पेट को आत्मघात व वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है|

भारतीय संविधान अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायियों को जजों सहित जनसेवकों व मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन जज, जनसेवक और उपनिवेशवासी राष्ट्रपति और राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं| जजों को नाबदान के चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए|

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर मुसलमान और ईसाई को जजों सहित जनसेवकों व मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का असीमित मौलिक अधिकार देता है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन जज, जनसेवक और उपनिवेशवासी राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं| जजों को डूब मरना चाहिए|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के बागी बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान को, मानव जाति की रक्षा के लिए, नष्ट करना चाहते हैं जबकि

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है| वर्तमान परिस्थितियों में एलिजाबेथ द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोकसेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ के दासों) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए अब्रह्मी संस्कृतियाँ. उपनिवेश व भारतीय संविधान उत्तरदायी है|

भारतीय संविधान ने प्रजातंत्र के चारो स्तंभ के लोगों के पद, प्रभुता और पेट को आत्मघात व वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है|

उनसे लड़िए, जिन्होंने आप के गुरुकुलों को नष्ट किया| उनसे लड़िए जो आप के देश को उपनिवेश बनाये बैठे हैं| उनसे लड़िए जो आप को नियमित रूप से अजान व नमाज़ द्वारा प्रतिदिन ५ बार अपमानित करते हैं, आप के ईश्वर की निंदा करते हैं| उनसे लड़िए, आप की हत्या और आप के वैदिक सनातन संस्कृति का समूल नाश, जिनके मुक्ति का मार्ग है|

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है| भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और

मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा अविश्वासियों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध ही है, जो सन १८६० ई० में इनके अस्तित्व में आने के बाद से आज तक, मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं की गईं. षड्यंत्र स्पष्ट है वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करना है.

जहां अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा ईशनिंदा का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दिया गया है, वहीँ ईशनिंदा के विरोधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि एलिजाबेथ को अविश्वासियों को धरती से समाप्त करना है

भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी उपनिवेशवासी का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ और जेल में सन २००८ से बंद मेरे ९ मालेगांव बम कांड के सहयोगियों ने किया है, त्यों ही उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को सहजता से समाप्त कर दिया जाये.

यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति या राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है एलिजाबेथ को हम वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को कत्ल करना है क्यों कि हमारे पूर्वजों ने ईशा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया (बाइबल, लूका १९:२७ के साथ पठनीय) भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१). राष्ट्रपति और राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेदों १५९ व ६० के अंतर्गत अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायियों द्वारा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन किये जाने वाले अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संरक्षण, पोषण व संवर्धन देने के लिए विवश हैं हमारा अपराध यह है कि हम एलिजाबेथ के उपनिवेश को चुनौती देते हैं हम जानना चाहते हैं कि मस्जिद, जहां से काफिरों के आराध्य देवों की ईशनिंदा की जाती है और जहां से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

 मैं स्वयं इस्लाम और ईसाइयत का विरोध करने के कारण ४२ बार जेल गया हूँ मुझे जेल में जहर दिया गया है. ५० अभियोग चले, जिनमे से ५ आज भी लम्बित हैं मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है

अज़ान ईशनिंदा है ईशनिन्दक के लिए इस्लाम में मृत्यु दंड निर्धारित है इंडिया में ईशनिंदा भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दण्डनीय अपराध है उपरोक्त दोनों धाराएँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, इंडियन उपनिवेश [भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता].की स्वामिनी एलिजाबेथ के दासों राष्ट्रपति, राज्यपाल या जिलाधीश, द्वारा नियंत्रित है. बिना दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल की संस्तुति के जज भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोगों की सुनवाई नहीं कर सकता.

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महामहिम प्रणब दा,

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

http://www.aryavrt.com/remrnaaik16728y

 

२७/०७/१६

 

 

२६/०७/१६

 

२३/०७/१६

उपनिवेश का विरोध करके.

आप एनआरआई हों या विदेशी ही क्यों न हों, आप बताएं कि किसी को उपनिवेश को स्वतंत्र कहने का नैतिक अधिकार कैसे है

चुनाव द्वारा मतदाता (Voter) भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म नहीं बदल सकते. आर्यावर्त सरकार जानना चाहती है कि ब्रिटेन के पास इंडिया को २ भागों इंडिया व पाकिस्तान में बाँटने का अधिकार कैसे था? आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों, ईसाइयत और इस्लाम, को इंडिया में रहने का अधिकार कैसे है?

प्रत्यक्ष रूप से आप मात्र इतना ही कर सकते हैं. अप्रत्यक्ष आप कैसे मदद करेंगे, यह आप के साहस पर निर्भर करता है.

२२/०७/१६

नेता? नेता कैसे?

भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ लेने वाला एलिजाबेथ का बलिपशु है.

 

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२१/०७/१६

नागदा जी को नमस्ते!

विषय प्रारम्भ हुआ था, राम मंदिर और धारा ३७० से आप ने पूर्णाहुति की वैज्ञानिकों की हत्या से.

बरगद का वृक्ष कभी सूखता नहीं, तनों से जड़ें निकलती हैं. लेकिन उसका बीज अत्यंत छोटा होता है.

अतः पहले राम मंदिर और धारा ३७० पर;

राम मंदिर ...

इसका सीधा सम्बन्ध भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से है. जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मंदिर बन भी जाये तो भी नहीं रह सकता| उपासना स्थल तोड़ना अब्रह्मी संस्कृतियों का परम धर्म है| (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३, अज़ान व कुरान १७:८१).

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) एलिजाबेथ को अपनी ईसाई संस्कृति और हामिद अंसारी को इस्लामी संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| लेकिन हम वैदिक पंथियों को, जो विश्व के अल्पसंख्यकों में अल्पसंख्यक हैं, को अपनी संस्कृति को बनाये रखने का अधिकार न देना प्रेसिडेंट प्रणब दा और राज्यपालों द्वारा लिए गए शपथ व भारतीय संविधान की अवहेलना है| यह अवहेलना तब तक जारी रहेगी, जब तक भारतीय संविधान प्रभावी रहेगा. धारा ३७० हट भी जाये तो भी इस्लाम का संरक्षण, पोषण व संवर्धन जारी रहेगा, यानी कि हिंदुओं के धन, धरती और नारियों पर अब्रह्मी संस्कृतियों का अधिकार बना रहेगा.

नमो ने सत्ता के हस्तान्तरण के पुस्तिका पर हस्ताक्षर किये हैं और भारतीय संविधान में आस्था और निष्ठा की शपथ ली है. भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने का एक फंदा (बूबी ट्रैप Booby trap) है|

बलात्कार का मुद्दा उठाने से पूर्व खतने और कौटुम्बिक व्यभिचार पर एक लिंक देता हूँ, इस पर गौर करिये.

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) और ३९(ग) में संशोधन की क्षमता किसी उपनिवेशवासी के पास नहीं है. भारतीय संविधान की व्याख्या अनुच्छेद १४७ के अनुसार गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट १९३५ तथा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ (indian independence act 1947) १९४७ के अधीन ही की जा सकती है दोनों एक्ट ब्रिटिश सरकार ने बनाये व लागू किये हैं.

मेल के प्रारम्भ में ही परमाणु वैज्ञानिकों के हत्याओं पर असंतोष प्रगट किया गया है.

भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७, का जिसने भी विरोध किया वह अम्बेडकर सहित जीवित नहीं बचा. चुनाव धोखा है| चुनाव द्वारा मतदाता (Voter) भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म नहीं बदल सकते. आर्यावर्त सरकार जानना चाहती है कि ब्रिटेन के पास इंडिया को २ भागों इंडिया व पाकिस्तान में बाँटने का अधिकार कैसे था? आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों, ईसाइयत और इस्लाम, को इंडिया में रहने का अधिकार कैसे है?

बलात्कार पर लम्बे चौड़े लेख लिखने का क्या लाभ?

http://www.aryavrt.com/kautumbik-vyabhichar

अतः पहले उपनिवेश की दासता से मुक्ति लीजिए.

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सोमवार, 18 जुलाई 2016

 

ये ब्राहमण प्रत्यष्ठीवन् ये वास्मिन्छुल्क मिषिरे | अस्नस्ते मध्ये कुल्यायाः केशान् खादन्त आस्ते |

 जो ब्राह्मण पर थूकते हैं अर्थात्  अपमान करते हैं, जो ब्राह्मण पर कर लगाते हैं, वे लोग रक्त की नदी में बालों को खाते हुए दिन व्यतीत करते हैं | अथर्व वेद 5- 19-3.

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http://www.aryavrt.com/muj16w29-jmant-kisliye

http://www.indiatvnews.com/news/india-10-things-said-by-special-nia-court-while-rejecting-sadhvi-pragya-s-bail-plea-336983

साध्वी प्रज्ञा पर १० आरोप

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जब देश ही नहीं तो देश भक्त कहाँ से पैदा हो गई?

http://www.aryavrt.com/muj16w28b-jmant-kisliye

 

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मुसलमानों सहित मानवजाति का सुनहरा दिन होगा कुरान पर प्रतिबंध.

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Jakir naik

https://www.youtube.com/watch?v=bUZ6WgbxjeE

https://www.youtube.com/watch?v=xduXxoz0PfA

 

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सोमवार, 11 जुलाई 2016

शेरजी को नमस्ते!

यह न भूलें कि इंडिया व पाकिस्तान सहित ५३ देश आज भी एलिजाबेथ के दास ही हैं. बंटवारा तो आप को घेर कर मारने के लिए किया गया है.

माउंटबेटन ने वैश्यालय राष्ट्रपति भवन में वैश्या पत्नी एडविना को उपनिवेशवासियों को दास बनाने के लिए रखा. एडविना प्रातः जिन्ना के साथ हमबिस्तर होती थी और सायं नेहरु के साथ. एक औरत के लिए जिन्ना और नेहरु दोनों ने उपनिवेशवासियों को स्थाई दास बना दिया.

हमारे यहाँ एक कहावत है, “रात भर सोहर भईल (पुत्र जन्म के उत्सव में गाए जाने वाले गीत) बिहाने (प्रातःकाल) देखलीं (देखा) त बाबू (शिशु) के छुन्निये (penis) नाहींइंडिया और पाकिस्तान आज भी एलिजाबेथ के स्वतंत्र? उपनिवेश है और एलिज़ाबेथ तंत्र लागू है. इतना ही नहीं, इंडिया में आज भी सभी कानून ब्रिटिश के बनाये हुए ही चल रहे हैं.

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

हालत इतने गंभीर हैं कि हमारी साध्वी प्रज्ञा जान माल की रक्षा के लिए गुहार लगाने के कारण जेल में २००८ से बंद हैं, क्योंकि कानूनन विरोधी Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राज्यपाल की संस्तुति पर फांसी लटका दिया जायेगा. लेकिन गौ नर भक्षी एलिजाबेथ के पास इतना भी साहस नहीं है कि कह सके कि उसने उपनिवेशवासियों को दास बनाया है. विरोधियों पर कभी रासुका लगा रही है और कभी मकोका!

फिरभी किसी उपनिवेशवासी के पास साहस नहीं कि पूछ सके कि चर्च और मस्जिद, जहां से ईशनिंदा की जाती है और नरसंहार की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट करना अपराध कैसे है?

उस पर तुर्रा यह है कि मुसलमान कश्मीर की आज़ादी के लिए लड़ रहे हैं. अभी पाकिस्तान और बंगलादेश ही उपनिवेश हैं. कश्मीर कहाँ से आज़ाद होगा?

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और वैदिक सनातन संस्कृति ब्रह्मचारी यानी अहम् ब्रह्मास्मियानी संप्रभु मनुष्य।

आतताई अब्रह्मी संस्कृतियां खतना, वैश्यावृति का सम्मान, कामुक सुख, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कौटुम्बिक व्यभिचार, कुमारी माओं और वैश्यावृति के महिमामंडन आदि द्वारा संप्रभु मनुष्य के इसी वीर्य को नष्ट कर उसे दास व रुग्ण बना कर दास बना चुकी हैं| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है| संयुक्त राष्ट्रसंघ भी पीछे नहीं है| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”].

मुसलमान व यहूदी सहित हर व्यक्ति यह याद रखे कि उसको दास बनाया गया है| मूसा और मुहम्मद ने उसको लूट और हत्या करने वाला दैत्य बना दिया| वस्तुतः उसके मूसा और मुहम्मद नामक पैगम्बरों ने लूट और वासना का लोभ देकर उसको दास बनाने के लिए उसका खतना करा कर उसके ब्रह्म को उससे छीनने का घृणित और अक्षम्य अपराध किया है| वे तो मर गए लेकिन अपनी उत्तराधिकार शासकों और पुरोहितों को सौंप गए हैं| अगर उन्होंने अब भी पैगम्बरों द्वारा गढे गए जेहोवा और अल्लाह का परित्याग नहीं किया तो मानव जाति बचेगी नहीं|

खतना और वेश्यावृत्ति द्वारा वीर्य का क्षरण कराने वाले जेहोवा, ईसा और अल्लाह को हम ईश्वर क्यों मानें? क्या आप को नहीं लगता कि चर्च और मस्जिद अपराध के शिक्षा केन्द्र हैं?

उनके सारे अपराध क्षमा कर दिए जायेंगे, चाहे उन्होंने कितने भी कत्ल, बलात्कार और लूट-मार किये हों! आर्य विवेक में विश्वास करते हैं, जिसे ईसाइयों से

अब्रह्मी संस्कृतियों ने खतना को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है| मनुष्य को मनुष्य का शत्रु बनाने, (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान ८:३९) वीर्यहीन (बाइबल, उत्पत्ति १७:११) और विवेकशून्य (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५) करने में अब्रह्मी संस्कृतियाँ अत्यंत निपुण हैं|

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकता? ईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास व अपराधी बनाते हैं? ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो मानवमात्र के उपासना की स्वतंत्रता छीनते और दास बनाते हैं?

यहूदी या मुसलमान

महामूर्ख यहूदी (बाइबल, उत्पत्ति २:१७) या मुसलमान (कुरान २:३५) किसको पसंद करेंगे? ईश्वर को, जो उस के रग रग में सदा उस के साथ है, या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो सातवें आसमान पर बैठा है और अपने अनुयायियों से मिल ही नहीं सकता? ईश्वर को, जो उस को आरोग्य, ओज, तेज, ८ सिद्धि, ९ निधि और स्मृति का स्वामी बनाता है

या जेहोवा अथवा अल्लाह को, जो उनका खतना करा कर दास व अपराधी बनाते हैं?

ईशा को, जो कौटुम्बिक व्यभिचार का संरक्षक है (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) या

ईश्वर को, जो उन को किसी भी देवता के उपासना की स्वतंत्रता देता है अथवा जेहोवा अथवा अल्लाह को,