Allah17815-1

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी

http://www.aryavrt.com/muj17w27-upnivesh-ajadikaise

 

+++

३० जून, २०१७ तक भारतीय संविधान में १२२ संशोधन हो चुके हैं. पहले संशोधन द्वारा उपनिवेशवासियों के सम्पत्ति का मौलिक अधिकार छीना गया.

http://www.aryavrt.com/muj17w26y-gau-gandhi

+++

15th August was not a complete Independence, but the elected members of the parliaments and their Governments had full power. A formal approval of the British Crown was necessary for us (India and Paksitan). This was required till we frame our constitution and put the same in force. After 1950 we had complete independence when we enforced constitution. We became republic of India.

सचमुच???

+++

भाषा का महत्व 🌷💎

Pramod Agrawal <pka_ur@yahoo.com>:

2017-06-15

इतिहास के प्रकांड पंडित डॉ. रघुबीर प्राय: फ्रांस जाया करते थे। वे सदा फ्रांस के राजवंश के एक परिवार के यहाँ ठहरा करते थे।

उस परिवार में एक ग्यारह साल की सुंदर लड़की भी थी। वह भी डॉ. रघुबीर की खूब सेवा करती थी। अंकल-अंकल बोला करती थी।

एक बार डॉ. रघुबीर को भारत से एक लिफाफा प्राप्त हुआ। बच्ची को उत्सुकता हुई। देखें तो भारत की भाषा की लिपि कैसी है। उसने कहा अंकल लिफाफा खोलकर पत्र दिखाएँ। डॉ. रघुबीर ने टालना चाहा। पर बच्ची जिद पर अड़ गई।

डॉ. रघुबीर को पत्र दिखाना पड़ा। पत्र देखते ही बच्ची का मुँह लटक गया अरे यह तो अँगरेजी में लिखा हुआ है।

आपके देश की कोई भाषा नहीं है?

डॉ. रघुबीर से कुछ कहते नहीं बना। बच्ची उदास होकर चली गई। माँ को सारी बात बताई। दोपहर में हमेशा की तरह सबने साथ साथ खाना तो खाया, पर पहले दिनों की तरह उत्साह चहक महक नहीं थी।

गृहस्वामिनी बोली डॉ. रघुबीर, आगे से आप किसी और जगह रहा करें। जिसकी कोई अपनी भाषा नहीं होती, उसे हम फ्रेंच, बर्बर कहते हैं। ऐसे लोगों से कोई संबंध नहीं रखते।

गृहस्वामिनी ने उन्हें आगे बताया "मेरी माता लोरेन प्रदेश के ड्यूक की कन्या थी। प्रथम विश्व युद्ध के पूर्व वह फ्रेंच भाषी प्रदेश जर्मनी के अधीन था। जर्मन सम्राट ने वहाँ फ्रेंच के माध्यम से शिक्षण बंद करके जर्मन भाषा थोप दी थी।

फलत: प्रदेश का सारा कामकाज एकमात्र जर्मन भाषा में होता था, फ्रेंच के लिए वहाँ कोई स्थान न था।

स्वभावत: विद्यालय में भी शिक्षा का माध्यम जर्मन भाषा ही थी। मेरी माँ उस समय ग्यारह वर्ष की थी और सर्वश्रेष्ठ कान्वेंट विद्यालय में पढ़ती थी।

एक बार जर्मन साम्राज्ञी कैथराइन लोरेन का दौरा करती हुई उस विद्यालय का निरीक्षण करने आ पहुँची। मेरी माता अपूर्व सुंदरी होने के साथ साथ अत्यंत कुशाग्र बुद्धि भी थीं। सब ‍बच्चियाँ नए कपड़ों में सजधज कर आई थीं। उन्हें पंक्तिबद्ध खड़ा किया गया था। बच्चियों के व्यायाम, खेल आदि प्रदर्शन के बाद साम्राज्ञी ने पूछा कि क्या कोई बच्ची जर्मन राष्ट्रगान सुना सकती है?

मेरी माँ को छोड़ वह किसी को याद न था। मेरी माँ ने उसे ऐसे शुद्ध जर्मन उच्चारण के साथ इतने सुंदर ढंग से सुना पाते।

साम्राज्ञी ने बच्ची से कुछ इनाम माँगने को कहा। बच्ची चुप रही। बार बार आग्रह करने पर वह बोली 'महारानी जी, क्या जो कुछ में माँगू वह आप देंगी?'

साम्राज्ञी ने उत्तेजित होकर कहा 'बच्ची! मैं साम्राज्ञी हूँ। मेरा वचन कभी झूठा नहीं होता। तुम जो चाहो माँगो। इस पर मेरी माता ने कहा 'महारानी जी, यदि आप सचमुच वचन पर दृढ़ हैं तो मेरी केवल एक ही प्रार्थना है कि अब आगे से इस प्रदेश में सारा काम एकमात्र फ्रेंच में हो, जर्मन में नहीं।'

            इस सर्वथा अप्रत्याशित माँग को सुनकर साम्राज्ञी पहले तो आश्चर्यकित रह गई, किंतु फिर क्रोध से लाल हो उठीं। वे बोलीं 'लड़की' नेपोलियन की सेनाओं ने भी जर्मनी पर कभी ऐसा कठोर प्रहार नहीं किया था, जैसा आज तूने शक्तिशाली जर्मनी साम्राज्य पर किया है।

          साम्राज्ञी होने के कारण मेरा वचन झूठा नहीं हो सकता, पर तुम जैसी छोटी सी लड़की ने इतनी बड़ी महारानी को आज पराजय दी है, वह मैं कभी नहीं भूल सकती।

जर्मनी ने जो अपने बाहुबल से जीता था, उसे तूने अपनी वाणी मात्र से लौटा लिया।

मैं भलीभाँति जानती हूँ कि अब आगे लारेन प्रदेश अधिक दिनों तक जर्मनों के अधीन न रह सकेगा।

        यह कहकर महारानी अतीव उदास होकर वहाँ से चली गई। गृहस्वामिनी ने कहा 'डॉ. रघुबीर, इस घटना से आप समझ सकते हैं कि मैं किस माँ की बेटी हूँ।

हम फ्रेंच लोग संसार में सबसे अधिक गौरव अपनी भाषा को देते हैं। क्योंकि हमारे लिए राष्ट्र प्रेम और भाषा प्रेम में कोई अंतर नहीं...।'

हमें अपनी भाषा मिल गई। तो आगे चलकर हमें जर्मनों से स्वतंत्रता भी प्राप्त हो गई। आप समझ रहे हैं ना!

---------------------------------------------------------------------------------------------------+

 

इतिहास गवाह रहेगा कि राजनैतिक स्वार्थ ने भारत को जोड़ने वाली, उसकी एकता की वाहक, जन-जन के ह्रदय... Read more »

http://www.pravakta.com/rajnitik-swarth-ki-shikar-humari-bhashayen/

राजनीतिक स्वार्थ की शिकार हमारी भाषाएँ

https://i1.wp.com/www.pravakta.com/wp-content/uploads/2017/01/hindi-1.jpg?w=225

Posted on January 21, 2017 by &filed under विविधा.      

हिंदी पर स्वार्थ का हथोड़ा…..!

               दुनिया में एकमात्र स्वाधीन भारत राष्ट्र-राज्य हैजहाँ पर सत्तर साल बीत जाने पर भी  राजनीति का इतना अधिक पराभव हुआ है कि इसकी अपनी राष्ट्रभाषा तक घोषित  नहीं हो सकी है। इतिहास गवाह रहेगा कि राजनैतिक स्वार्थ ने भारत को जोड़ने वाली, उसकी एकता की वाहक, जन-जन के ह्रदय सूत्र के तारों को सशक्त करने वाली भाषा हिंदी को उसका लोकतांत्रिक अधिकार  मिल नहीं सका है। जिस भाषा को महात्मा गांधी ने  स्वाधीनता का वाहक बनाया था। पूरे देश में उन्होंने हिंदी सिखने का आग्रह किया। यही नहीं २९ मार्च १९१८ को इंदौर में मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के भवन का सिलान्यास किया और अप्रैल १९३५ में भवन का उद्घाटन किया। इंदौर में उन्होंने आव्हान किया था कि दक्षिण भारत में समिति हिंदी का प्रचार-प्रसार करें। इसके लिए उन्होंने अपने बेटे देवदास गांधी को कार्यकर्ताओं के साथ हिंदी का प्रचार-प्रसार करने के लिए तमिलनाडु भेजते हुए कहा था एक राष्ट्र, एक भाषा के सूत्र को मान लेना चाहिए। प्रांतीय भाषाओं केबिना स्वराज्य अधूरा है।

             २६ जनवरी १९५० को भारत राष्ट्र राज्य सम्प्रभू संवैधानिक गणराज्य घोषित हुआ था। किंतु संविधान सभा के निर्णय अनुसार हिंदी को देश की राष्ट्र भाषा का दर्जा प्रदान नहीं किया गया। प्रावधान कर दिया गया कि पन्द्रह साल की अवधि में सरकार हिंदी को राजभाषा के रूप में सक्षम कर देगी। परंतु सरकार ने संविधान सभा की भावना सम्मान नहीं किया और पन्दह  साल की अपेक्षा सत्रह साल बाद सन १९६७ में बहाना बना लिया गया कि हिंदी अभी भी  राजभाषा का स्थान ग्रहण  करने के योग्य नहीं है। राजनीति के क्षुद्र स्वार्थ दुष्परिणाम यह सामने आया कि विदेशी भाषा अंग्रेज़ी सरकार के कामकाज की भाषा अनिश्चितकालतक तक बनी रहेगी।  साथ ही निर्ल्लजता पूर्वक यह प्रावधान कर दिया गया  कि देश के सभी राज्यों में से यदि एक भी राज्य हिंदी के विरोध में रहेगा तो हिंदी राजभाषा का स्थान ग्रहण नहीं कर सकेगी। परिणाम स्वरूप अब सत्तर साल हो गये हैं और अंग्रेज़ी में ही सरकार का कामकाज चल रहा है।

                 विडम्बना यह हुई है कि देश के उच्चत्तम और उच्च न्यायालयों  में हिंदी और राज्यों की भाषाओं में कोई भी वाद चलाया नहीं जा सकता है।  देश में देश की भाषाओं का न्याय के दरवाज़े में प्रवेश निषिद्ध है। हिंदी और राज्यों की भाषाओं के लिए अब एकमात्र रास्ता  संविधान में संशोधन कर दिया जाय। अन्यथा सवा सौ करोड़ नागरिकों की भाषाएं  सरकार के कामकाज, न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में वंचित ही रहेगी। अत्यंत विचारणीय प्रश्न यह है कि स्वतंत्रता मिलने के बाद भारतीय ज्ञान उपेक्षित हो गया। भारतीय मानस की भारतीयता खोती गयी। यह बौद्धिक उपनिवेशीकरण का प्रभाव रहा। उच्च शिक्षा का ज्ञान और शोध की धारा पश्चिम से आयातित होती आई है। मानसिक दरिद्रता का यह ज्वलंत दृष्टांत है। साक्षात परिणाम राष्ट्र को यह भुगतना पड़ा कि हमारा देश नोबल पुरस्कार, ओलम्पिक खेल और गुणवत्ता की शिक्षा के क्षेत्र में विश्व में पिछली क़तार में हैं।

              शिक्षा, चिकित्सा, ज्ञान-विज्ञान का क्षेत्र सरकार के बजट में अब तक सतत् उपेक्षित रखा गया है। भारत दुनिया में राष्ट्रभाषा से विहीन एकमात्र राष्ट्र है। जहाँ के जन प्रतिनिधि चुनाव तो मतदाताओं की भाषा में बोल कर जीतता है। जीतने के बाद संसद में ग़ुलाम मानसिकता की विदेशी भाषा में बोलते हुए शर्म महसूस नहीं करता है। यही मानसिकता देश के विकास और राज्यों तथा देश की सर्व व्यापक भाषा हिंदी के मार्ग की बाधा बनी हुई है। राजनीति के अंध स्वार्थ की हद अब यहाँ तक पहुंच चुकी है कि कि राज्यों की बोली जाने वाली बोलियों को ही संविधान की अष्टम अनुचूची में शामिल करने की धृष्टता की हद पार करने में ज़रा भी संकोच नहीं किया जा रहा है।  परिणाम यह सामने आने वाला है कि हिंदी की अपेक्षा लोग जनगणना में अपनी बोली को निश्चित ही लिखावेंगे। हिंदी की स्थिति किसी बोली के समान हो जायगी। दु:खांत हालत यह है कि हिंदी, मराठी, गुजरातीकन्नड़, तेलुगु, मलयालमतमिल,उड़िया, बांग्ला, पंजाबी, असमिया, कश्मीरी आदि भाषाएँ भी राजनीति का अब तक शिकार रही है और भी ज़्यादा उपेक्षित हो जाने वाली है। हिंदी को सँयुक्त राष्ट्रसंघ की भाषा में शामिल करना तो दूर की कोड़ी की बात रह जाएगी। हिंदी जब संकुचित हो जाएगी तब दुनिया के लोग इसे सीखने में क्यों रुचि लेंगे।

             अगर हिंदी की हालत दयनीय हो गई तो इसके लिए हिंदी के साहित्यकार हिंदी की संस्थाएँ, हिंदी के शिक्षक, हिंदी के पत्रकार, हिंदी भाषी, हिंदी भाषी छात्र, हिंदी सेवी और हिंदी से जुड़ा मीडिया पूरी तरह से ज़िम्मेदार रहेंगा इतिहास में दर्ज होगा कि जब हिंदी को क्षति पहुँचाई जा रही थी तब ये सभी हिंदी वाले निष्क्रिय थे। जागते हुए गहरी निंद में सोने का बहाना बना रहे थे। अपने-अपने क्षणिक स्वार्थों में डूबे हुए थे। इतिहास में यह भी लिखा जाएगा कि हिंदी की सच्ची सेवा, प्रचार-प्रसार ग़ैर हिंदी भाषियों ने ही किया।

हिंदी और इसकी बोलियों के झमेले की जड़ साहित्य अकादमी के पुरस्कार हैं। यदि सरकार द्वारा साहित्य अकादमी के पुरस्कार और अष्टम अनुसूची बोलियों का रिश्ता समाप्त कर दिया जाए और ये पुरस्तार विशुद्ध रूप से साहित्य के स्तर के आधार पर दिए जाएँ, भले ही भाषा या बोली अष्टम अनुसूची में हो या नहीं । अष्टम अनुसूची  की सभी भाषाओं को साहित्य अकादमी के पुरस्कार / मान-सम्मान की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया तो बोलियों की आठवीं अनुसूचि में शामिल करने की माँग की सम्पूर्ण हवा निकल जाएगी। तब राजनैतिक दल भी बोलियों को आठवीं अनुसूचि में शामिल करने से अपने निश्चित ही खींच लेंगे। ऐसा प्रस्ताव/सुझाव/संशोधन  संसद में प्रस्तुत करना राष्ट्रहित में होगा।

          इसके अतिरिक्त  सबसे उत्तम रास्ता यह है कि हिंदी को अष्टम अनुसूची से अलग कर के राष्ट्रभाषा घोषित कर  कानूनी प्रयोजनों के संप्रेषण हेतु राष्ट्रीय संपर्क भाषा बनाया जाय। तब हिंदी राष्ट्रीय दायित्व का निर्वाह करने को स्वतंत्र, सक्षम और समर्थ हो जाएगी।

निर्मलकुमार पाटोदी

लेखक परिचय - निर्मल कुमार पाटोदी - स्वतंत्र टिप्पणीकार सम्पर्क: ७८६९९-१७०७०

-----------------------------------------------------------------

अंग्रेजी की पढ़ाईः बच्चों की तबाही

Posted: 02 Jun 2017

डॉ. वेदप्रताप वैदिक अंग्रेजी की अनिवार्य पढ़ाई हमारे बच्चों को कैसे तबाह कर रही है, उसके दो उदाहरण अभी-अभी हमारे सामने आए हैं। पहला तो हमने अभी एक फिल्म देखी, ‘हिंदी मीडियमऔर दूसरा इंडियन एक्सप्रेस में आज दिव्या गोयल का एक लेख पढ़ा, जिसका शीर्षक था, ‘इंगलिश विंगलिश’ ! ‘हिंदी मीडियमनामक इस फिल्म... Read more »

http://www.pravakta.com/english-ki-padhai-kids-ki-tabahi/

अंग्रेजी की पढ़ाईः बच्चों की तबाही

Posted on June 3, 2017 by &filed under प्रवक्ता न्यूज़.

https://i1.wp.com/www.pravakta.com/wp-content/uploads/2017/05/english.jpg?w=266

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

अंग्रेजी की अनिवार्य पढ़ाई हमारे बच्चों को कैसे तबाह कर रही है, उसके दो उदाहरण अभी-अभी हमारे सामने आए हैं। पहला तो हमने अभी एक फिल्म देखी, ‘हिंदी मीडियमऔर दूसरा इंडियन एक्सप्रेस में आज दिव्या गोयल का एक लेख पढ़ा, जिसका शीर्षक था, ‘इंगलिश विंगलिश’! ‘हिंदी मीडियमनामक इस फिल्म में एक ऐसा बुनियादी विषय उठाया गया है, जिस पर हमारे फिल्मवालों का ध्यान ही नहीं जाता। इस फिल्म में चांदनी चौक, दिल्ली का एक सेठ अपनी बेटी को अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में भर्ती करवाने के लिए तरह-तरह की तिकड़में करके हार जाता है। तब वह गरीबों वाले आरक्षण में सेंधमारी करना चाहता है। उस स्कूल में अपनी बेटी को भर्ती करवाने के लिए अपना पता एक ऐसे मोहल्ले का लिखवाता है, जहां मजदूर, घरेलू नौकर, ड्राइवर वगैरह रहते हैं। चेक करनेवाले उसे पकड़ न लें, इसलिए वह उसी गंदी बस्ती के घर में कुछ दिन अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता है। उसकी बेटी को उस दिल्ली ग्रामर स्कूलमें प्रवेश मिल जाता है लेकिन उसके पड़ौस में रहनेवाले एक बेहद गरीब आदमी के बच्चे को सिर्फ इसलिए प्रवेश नहीं मिल पाता है कि उसका हक इस मालदार आदमी ने मार लिया है। यह मालदार आदमी खुद हिंदीप्रेमी है लेकिन अपनी पत्नी के दबाव में आकर उसने जो कुछ किया, उसे करने के बाद एक दिन अचानक उसे बोध होता है और वह कहता है- हम हरामी हैं। हमने गरीब का हक मार लिया। इस बीच वह उस सरकारी स्कूल की जमकर मदद करता है जिसमें उसके उस गरीब पड़ौसी का वही बच्चा पढ़ता है। एक दिन इस हिंदी मीडियमवाले सरकारी स्कूल और उस अंग्रेजी मीडियवाले स्कूल में प्रतिस्पर्धा होती है। सरकारी स्कूल के बच्चे अंग्रेजी मीडियमवाले स्कूल से कहीं बेहतर निकल जाते हैं। इस तरह यह फिल्म अंग्रेजी मीडियम का खोखलापन उजागर करती है। इस फिल्म में कई मार्मिक प्रसंग हैं, उत्तम अभिनय है और इसका संदेश स्पष्ट है।

इंडियन एक्सप्रेसके इस खोजी लेख में यह बताया गया है कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा बच्चे अंग्रेजी में फेल होते हैं। हर विषय में 60-65 प्रतिशत नंबर लानेवाले बच्चे अंग्रेजी में 15-20 नंबर भी नहीं ला पाते। अंग्रेजी का रट्टा लगाने में अन्य विषयों की पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पाती। अंग्रेजी ट्यूशन पर गरीब मजदूरों, नौकरों, ड्राइवरों, रेहड़ीवालों को 500-500 रु. महिना अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। कई प्रतिभाशाली छात्रों ने कहा कि अंग्रेजी में उनके इतने कम नंबर आए कि उन्हें आत्महत्या करने की इच्छा होती है। अंग्रेजी की एक कुशल अध्यापिका इतनी हताश हुई कि शर्म के मारे वह मर जाना चाहती है। उसने बताया कि बच्चे future का उच्चारण फुटेरे, should का शाउल्ड, game का गामे और enough का एनाउघ करते हैं। हम क्या करें? कितना रट्टा लगवाएं? माता-पिता और शिक्षकों को पता है कि अनिवार्य अंग्रेजी की पढ़ाई ने कितनी तबाही मचा रखी है। लेकिन वे क्या करें? हमारे मूर्ख नेताओं ने नौकरियों, ऊंची अदालतों और कानून-निर्माण में अंग्रेजी को अनिवार्य बना रखा है।

+++

PEACEFUL EXODUS OF THE BRITISH

 

(Why civil war broke out and why the Muslims stayed back in Partitioned India!) 

 

“DON’T TALK OF THE PAST!” protest many who find it disturbing, or troublesome, to look at the past. They see nothing but shock and horror and continuous massacres & destruction that bring painful memories. We only talk of happy events that give us joy and make us happy. 

 

Sadly, it is impossible to ignore the past. The past provides the INGREDIENTS for the dish that is to be cooked for consumption in the future! 

 

Look at the USA and the UK. How obsessed they are with 1945 (victories) while we shun 1947 (defeat, surrenders and massacres!)

 

There is ONE sentence in the past that has given us maximum pain. And that is, “Nehru gave away one third of India without condition or referendum, and called it “Independence”!

 

It is well known that the Hindus are the MOST IGNORANT PEOPLE on earth. Most think of the Independence when the British left with farewell parties, marching bands and the natives saying “Good bye” with wet eyes, wishing them well!” 

 

Nothing could be farther from truth. Independence was a HOAX, a confidence TRICK, an outright FRAUD & DECEPTION. In reality, it was SURRENDER & FRAGMENTATION of India in pools of blood.

 

In the entire history of mankind the invaders, who came by force & violence, had to be pushed out by ARMED STRUGGLE. None left peacefully.

 

How did Napoleon and Hitler leave Russia? How did the British leave Kenya and Yemen? And this is how the French left Vietnam:

 

The battle of Dien Bien Phu marked the end of the French involvement in Southeast Asia. France had lost more than 35,000 men and 48,000 had been wounded in a war that was considered financially and militarily humiliating. The shock of the defeat at Dien Bien Phu led the French government, already plagued by public opposition to the war, to agree to the independence of Vietnam at the Geneva Conference in 1954.

 

(http://www.history.com/this-day-in-history/french-fall-to-viet-minh-at-dien-bien-phu)

 

Where the natives could not oust the invaders by FORCE they resigned to their fate, remained perpetual slaves like the natives of America, Australia and New Zealand. That is also true of ALL the Islamic countries where the earlier inhabitants- the Christians, the Jews, the Zoroasrians (Iran) , the Buddhists (Afghanistan) and the Hindus (Pakistan and Bangladesh), could not throw out the brutal invaders but were themselves crushed or wiped out. 

 

Seeing the signs of a general uprising across India, starting with the popularity of “Azad Hind Fauj” (Indian National Army) raised by Netaji Subhash Chandra Bose, and the mutiny in the Indian Navy, the British feared the worst. 

 

Expecting their departure from India to be a violent affair, they devised an ingenious plan. It was so clever that one wonders as to how & why the top brains and barristers in India at the time, and since, could not “smell rat” but “went along” with it like the idiots!

 

“Ladies and gentlemen,” said one MP at Parliament in London, “In our Indian colony we are 300,000 British personnel, ruling 300 MILLION restive natives who expected us to leave, lock, stock and barrel, after the end of World War 2.

 

We do not have the resources, or forces, to prevent the repeat of the Siege of Lucknow in 1857 and are bound to lose many lives, trying to put down the rebels.”

 

“That seems true, unfortunately,” spoke a fellow MP. “Is there a way out?,” he asked.

 

“Yes, if the blood that we must shed in holding on to our colony could be the blood of the natives while we depart safely!”

 

“Ingenious & preposterous! Pray, tell us what you mean.”

 

“Honourable members, India is not simply a Hindu country but a “hotch potch” of many faiths, religions, loyalties and confused definitions.”

 

There was total silence. Everybody was curious. The speaker continued, “The Hindus are native to the soil, the original people. Only they have a stake in the land. They call it “dharti mata”, that is the “mother”. So they are expected to rise in arms against us.

 

The Muslims, on the other hand, can prove to be our best allies. They have NO love lost for either LAND or HINDUS. Their ancestors came as invaders like us and they regard themselves vastly superior to the natives and enemies of the Hindus whom they contemptuously call “Kafir”!” 

 

“O yes? Very interesting. Please carry on.” He carried on-

 

“Muslims hate the Hindus because they had defeated and enslaved them and treated them like “dirt” for centuries. They do not respect any holy god or goddess but pray to Allah, facing Mecca. They kill the cows and eat their flesh while the Hindus regard the animal sacred. And above all, they resent our rule because we exiled the last Muslim emperor in Delhi in 1857, thus putting an end to the Islamic rule for ever! 

 

“So, the Muslims are our best allies. We can use them to ensure our safe exit from the colony”!

 

“Will the Muslims play the Imperial game devised by you?”

 

“A good question! Their leader, Mr Jinnah, is a very crafty scheming “devil”. I had long conversations with him to gauge his views. He was not sure but when I promised him territory, the size of France, Germany and Spain put together, he relented and promised full cooperation.”

 

There was applause and we heard someone say, “Yes, when they go for Pakistan we shall go for our boats!”

 

REST IS HISTORY.

 

Friends, we all know how senile Gandhi was bypassed and how treacherous Nehru served two parties at the same time- the British masters and the Muslim “brothers”. 

 

The British could leave without losing a single life and the Muslims were rewarded with one third of India with Nehru’s approval while the Hindus were left in tears, coping with 15 million fefugees. Gandhi’s wishes kept the Muslims back, to deliver the “coup de grace” to Hindusthan when the time comes.

 

Akhand Bharat became Bharat overnight that took in 15 MILLION refugees. The devotees of Guru Nanak Dev (Hindus and Sikhs) were asked to apply for visa to visit his Janmasthan at Nankana Sahib!

 

The HINDUS celebrating “fake” Independence have NO idea as to what actually happened in 1947, and what the “second nation” will be up to in due course of time, and that the borders that crudely and arbitrarily tear through the middle of Bengal, Kashmir and Punjab, will not last long. 

 

What happens then is the NIGHTMARE, better not be discussed like the past!

 

 

 

Rajput

 

1 Jul 17

 

 -----------------------------

+++

एलिजाबेथ १९४७ से ही गरीबी मिटा रही है. लेकिन उपलब्धि क्या हुई है?

राजा अपने राज्य और प्रिवीपर्स नहीं बचा सके. उपनिवेशवासी अपना सोना न बचा सके. मेरे पितामह अपनी जमींदारी नहीं बचा सके. उपनिवेशवासी बैंकर अपने बैंक नहीं बचा सके. खानों के मालिक अपनी खानें नहीं बचा सके. मैं अपनी २ अरब की सम्पत्ति व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल का ४ अरब का स्मारक न बचा सका और न लोकसेवक होते हुए पेंशन ही प्राप्त कर सका. और तो और सहारा श्री सुब्रत राय लम्बे अरसे से जेल में हैं. अब रतन टाटा और मुकेश अम्बानी आदि की बारी है. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त संरक्षण, पोषण व संवर्धन में! आप अपना पूजास्थल, नारियाँ, जीवन, सम्पत्ति और पूँजी कैसे बचायेंगे? क्या आप को लज्जा नहीं आती? क्या विरोध कर सकते हैं?

मैकाले को इंडिया में सन १८३५ तक एक भी चोर या भिखारी न मिला. १९४७ तक देश के खजाने में १५५ करोड़ रु० था. कोई विदेशी कर्ज न था. आज प्रति व्यक्ति ८२५६०/- रु० कर्जदार (मार्च २०१६ तक; ७० रु० प्रति डालर की दर से) है| और यह कर्ज तब है, जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधिकार से लोक लूट तंत्र ने नागरिकों की जमीनें और जमींदारी लूटी|सोना लूटा| बैंक लूटे| पूँजी और उत्पादन के साधन लूटे|

स्वर्ण नियन्त्रण कानून १९६८ में भी लागू हुआ था, जिसे ६ जून, १९९० को निरस्त कर दिया गया. अब २०१७ में एलिजाबेथ यह कानून पुनः ला रही है.

जिस गरीब के हित की आड़ में उपनिवेशवासी लूटे गए, वह गरीब और अधिक कर्जदार हो गया और एलिजाबेथ की ओर कोई उंगली भी नहीं उठा सकता.

राज्य के स्थापना का उद्देश्य प्रजा के जान-माल की रक्षा करना है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८) और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०/०६/१९७९ से मिटा दिया गया है|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन एलिजाबेथ का उपनिवेश प्रजा को स्वयं लूटता है|

यह देश सोने की चिड़िया था. एलिजाबेथ ने इसे इतना दरिद्र बना दिया कि आज FDI की आड़ में देश बिक रहा है.

लक्ष्मी के हैं चार सुत, धर्म, अग्नि, नृप, चोर|

जेठे का निरादर करो, शेष करें भंड़ फोड़|

लक्ष्मी के चार बेटे धर्म, अग्नि, राजा और चोर हैं| या यूं कह लीजिए कि धन की चार गति है| चंचला है| कहीं टिकती नहीं है| लक्ष्मी को धर्म पर व्यय करेंगे तो आप का यश बढ़ेगा| आप की हर तरह ईश्वर, संत समाज और दुखी दीन जन सहायता करेंगे और आप की कीर्ति बढायेंगे| अन्यथा आप की सम्पत्ति या तो अग्नि में स्वाहा होगी, या एलिजाबेथ ले लेगी अथवा चोर चुरा लेंगे| आप एफआईआर भी न कर पाएंगे| हो सकता है कि आप की स्थिति पोंटि चड्ढा की भांति न हो जाये|

ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| (कुरान ८:३९). चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]. बेटी से विवाह कीजिए. (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). पुत्र वधू से निकाह कीजिए. (कुरान ३३:३७-३८). बिना विवाह बच्चे पैदा कीजिए. [UDHR अनु०२५(२)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)] और जिसे भी चाहें अपनी तरह दास बनाइए. न बने तो कत्ल कर दीजिए. वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त असीमित मौलिक मजहबी अधिकार से.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी संस्कृति बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| ईसा बेटी से विवाह कराता है| (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). अल्लाह पुत्र वधू से निकाह कराता है (कुरान ३३:३७-३८) और संवैधानिक अधिकार से {भारतीय संविधान अनुच्छेद २९(१)} नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा (बाइबल, याशयाह १३:१६) या मुसलमान| (कुरान, २३:६}| अतएव आर्यावर्त सरकार को ईसाइयत और इस्लाम को नष्ट करने का भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन कानूनी अधिकार है|

ईसाईयों व मुसलमानों के लिए मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है. {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}. वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

ईसाइयत {(बाइबल, मत्ती १०:३४) व (बाइबल, लूका १२:४९)} और इस्लाम (कुरान २:२१६) निरंतर युद्धरत सम्प्रदाय हैं| दोनों ही लोकतंत्र की आड़ में विश्व में अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिये मानवजाति के स्वतंत्रता व चरित्र को मिटा रहे हैं| इस बर्बरता और सभ्यता और एक विश्व आपदा के बीच टकराव को टालने के लिए एक ही रास्ता है कि ईसाई और इस्लाम मजहब के भ्रम को बेनकाब किया जाय और उन्हें रहस्यमय नहीं रहने दिया जाय. गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को मुसलमानों और ईसाइयों के साथ शांति से जीने के लिए यह आवश्यक है कि अब्रह्मी संस्कृतियों से प्रत्येक ईसाई व मुसलमान को विलग कर दिया जाये|

मुसलमानों और ईसाइयों को अपने अब्रह्मी संस्कृतियों को त्यागना होगा, अपने नफरत की संस्कृति (मात्र अल्लाह पूज्य है की अज़ान द्वारा घोषणा और अकेले यीशु मोक्ष प्रदान कर सकते हैं की चर्चों से घोषणा का परित्याग करना पडेगा) गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों में साथी के रूप में शामिल होना होगा| अन्यथा गैर मुसलमानों और गैर ईसाइयों को नैतिक अधिकार है कि वे मुसलमानों और ईसाइयों से स्वयं को अलग कर लें| अब्रह्मी संस्कृतियों को प्रतिबंधित करें| मुसलमानों और ईसाइयों के आव्रजन को प्रतिबंधित कर दें और उन्हें कत्ल कर दें, जो मानवजाति को दास बनाने अन्यथा कत्ल करने का षड्यंत्र कर रहे हैं - सर्वधर्म समभाव के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं| अब्रह्मी संस्कृतियों के आचरण मानवता और नैतिकता के विरुद्ध हैं|

मनुष्य के पतन की नीवं वीर्य क्षरण है.

आज देश में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं, जो उपनिवेश, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान, खुत्बों और भारतीय संविधान का विरोध कर सके. क्योंकि मनुष्य ब्रह्मचर्य के शिक्षा केन्द्रों (गुरुकुलों) को आदिम और असभ्य मानते हैं.

वीर्यरक्षा द्वारा ही मनुष्य प्रकृति, अपनी इन्द्रियों और संसार पर नियन्त्रण कर सकता है. बिना युद्ध मनुष्य को अधीन करने का सबसे सरल उपाय है, उसे वीर्यहीन करना.

मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| बाइबल और कुरान मूसा व मुहम्मद के तथाकथित ईश्वरीय आदेश हैं, जिनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

वाशिंगटन पोस्ट को भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत हमारा प्राइवेट प्रतिरक्षा का प्रयत्न जातिवाद दिखाई दे रहा है!

मैं उपनिवेश से मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा हूँ. उपरोक्त लेखन का परिणाम भलीभांति जानता हूँ. अपराधी, आदिम एवं असभ्य इंडियन हूँ.

 “क्या वाशिंगटन पोस्ट को मालूम है कि "नेटिव" (आदिम) शब्द का प्रयोग "नियम रहित निम्नस्तर जाति" जिनका भाग्य ही श्वेतों द्वारा शासित होता था, के अपमानजनक अर्थ में होने लगा है और आज भी जारी है। शासित देश (उपनिवेश) में लोकसेवकों के माध्यम से शासन होता रहा है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८) और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०/०६/१९७९ से मिटा दिया गया है|

कमाल सांसदों और जजों का!

इस अनुच्छेद के अधीन राज्य प्रजा को स्वयं लूटता है| जब सम्पत्ति और पूँजी पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी का अधिकार ही नहीं, तो कोई लूटे उपनिवेशवासी को तो ५% ही मिलेगा| शेष ९५% तो राहुल के अनुसार एलिजाबेथ के बिचौलिए खायेंगे| जिसके आप आज भी दास हैं| एलिजाबेथ के संविधान में आस्था और निष्ठा की नमो ने शपथ ली है और २६ मई, २०१४ को भी लेंगे|

इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मान सकता! (एआईआर, १९५१, एससी ४५८). जब १९९१ से ही बाजारी व्यवस्था लागू हो गई, तो अनुच्छेद ३९(ग) को हटाने में और ३१ को पुनर्जीवित करने में क्या कठिनाई है? आर्यावर्त सरकार यह जानना चाहती है|

यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे कहते हैं, वह देने का प्रतिज्ञा पत्र है. धारक का रिजर्वबैंक के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(२) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, १५ अक्टूबर, १९९० के बाद से की कोई कीमत नहीं.

सन १९४८ के पूर्व बिक्रीकर नहीं था और १९९१ के पूर्व जीएसटी नहीं था.

सन १९८७ में मैंने तीसहजारी कोर्ट में गवर्नर से नोट के बदले सोना देने की मांग करते हुए एक वाद प्रस्तुत किया था.

५.यह कि मेरी मांग दिल्ली उच्च न्यायालय तक निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज भी पीड़ित हैं!

आर्थिक शोषण में सारे लाभ शासक (एलिजाबेथ) प्राप्त करते रहे हैं। आर्थिक नीति मूलत: कच्चे माल के निर्यात की और पक्के माल के आयात की रही है।

इसी से मुक्त व्यापार आदि का सैद्धांतिक विश्लेषण हुआ है। शासकों के द्वारा उद्योगीकरण होने से उपनिवेश सदा शासक राष्ट्र के पूरक बने रहते हैं, उनका स्वयं आर्थिक व्यक्तित्व ही नहीं रहता। शासक शासित में भावी शत्रुता एवं हिंसा की राजनीति का बीजारोपण इसी व्यवस्था का फल है। फलत: उग्रता, ध्वंस, संघर्ष का मनोभाव बना है। उपनिवेश दरिद्रता, अशिक्षा, रोग, मानसिक हीनता आदि के प्रतीक बन गए हैं।

रुडयार्ड किपलिंग जैसे लोगों ने वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायी आदिमों पर शासन करने हेतु "श्वेतों का उत्तरदायित्व" के रूप में एक पुराणरूढ़ दर्शन (मिथ्) ही प्रस्तुत कर लिया है. इंडियन उपनिवेश के तो राष्ट्रगान के अनुसार ही एलिजाबेथ आज भी हम उपनिवेशवासियों की अधिनायक और भाग्य विधाता है.

इसी आधार पर "श्वेत पुरुषों के दायित्व" का सिद्धांत विकसित हुआ है। शासितों में आत्मविश्वास का लोप सामान्य बात है। फलत: सर्वमान्य विश्वास की बात ही नहीं उठ सकती। सारा शासन अप्रत्यक्ष रूप से होता रहा है। शासन की भाषा बाहर से आने पर राष्ट्रीय भाषा संस्कृतका विकास अवरुद्ध हो गया है। सरकारी पदों पर अल्पसंख्यकों की नियुक्ति का अनुपात असंतुलित किया गया है। शासन की क्रमबद्धता नष्ट होने से जनस्वीकृति, जनमत, हितरक्षा आदि असंभव हैं। विकासहीनता में शासन यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और रूढ़िवादिता एवं अनुदार परंपराओं का वह अभिभावक बन गया है।

हम सहजीवन से घृणा करते हैं|

क्या वाशिंगटन पोस्ट ने शिया और सुन्नी के बीच दंगों के बारे में सुना है? क्या वाशिंगटन पोस्ट ने ईशनिंदा के अपराध में मुसलमान द्वारा मुसलमान के हत्या की खबर सुनी है?

वाशिंगटन पोस्ट को (कुरान ५:१०१ और १०२) और (बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:६-११) पढ़ना चाहिए|

दास बनाने का क्रमिक इतिहास|

मानव जाति को वीर्यहीन कर पराजित व दास बनाने का षड्यंत्र तो मूसा ने खतना द्वारा लगभग ३२०० वर्षों पूर्व ही प्रारम्भ कर दिया था| मैकाले ने गुरुकुलों को मिटा कर उसे आगे बढ़ाया| यह संस्कृतियों का युद्ध है और इसे अब्रह्मी संस्कृतियों को संरक्षण देकर नहीं लड़ा जा सकता| या तो अब्रह्मी संस्कृतियों रहेगा अथवा वैदिक सनातन संस्कृति|

क्या मोदी हमें भारत दिला देंगे?

मूसा पहला व्यक्ति था जिसने लूट, बलात्कार और हत्या को मन-गढ़न्त जेहोवा द्वारा घोषित हठधर्म बताया| मूसा ने मिस्र के मूल निवासियों और उनकी संस्कृति का विनाश कर दिया| आज उसी मिस्र से यहूदी लुप्त हो गए| नाजी मिटे, समाजवादी मिटे| दैत्य और रक्ष संस्कृतियाँ भी मिट गई| अब अब्रह्मी संस्कृतियों की बारी है| आर्यावर्त सरकार को सहयोग तो दें|

क्या मोदी खतना बंद करा देंगे?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन कर वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों की आर्थिक व धार्मिक स्वतंत्रता, धरती, देश, सम्पत्ति व नारियां उनसे चुरा कर संयुक्त रूप से ईसाइयों व मुसलमानों को सौँप दिया गया है|

क्या कोई किसी ईसाई या मुसलमान के विरुद्ध ईशनिंदा और कत्ल करने के लिए शिक्षा देने के अपराध में भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन अभियोग चलाने की मांग कर सकता है?

हमने ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों का प्रसन्नतापूर्वक बहिष्कार कर रखा है| मैकाले के महंगे स्कूल में यौनशिक्षा दिलाने के लिए हम सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं|

+++

हम वैदिक पंथियों के अंदर बहुत सारी कमियां हैं. हमारे शासक माउंटबेटन की भांति अपने नारियों के वेश्यालय नहीं चलाते.

हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह नहीं करते और न पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करते हैं| हमारा ईश्वर धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग नहीं देता| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०). सभ्य मूसा और मुहम्मद की छलरचनाओं जेहोवा और अल्लाह ने अपने सभ्य अनुयायियों को ऐसे ही अधिकार दिये हैं|

हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसा व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह और धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग देने वाले (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मामने के लिए तैयार नहीं हैं|

क्यों कि हम असभ्य भगवा आतंकवादी समलैंगिक विवाह नहीं करते|

वाशिंगटन पोस्ट यह नहीं देख पा रहा है कि मस्जिदों से ईमाम अज़ान द्वारा काफ़िर उपनिवेशवासियों के इष्ट देवताओं की निंदा करता है| ईमाम मस्जिदों से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देता है| ईसा ने दस करोड से अधिक अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया और अब विश्व के सभी धर्मों को नष्ट कर मात्र अपनी पूजा कराएगा!

वाशिंगटन पोस्ट यह देख पाने में असमर्थ है कि दास जेसुइट और जिहादियों ने उसको ईसा और अल्लाह की आड़ में अपना मातहत और उपकरण बना रखा है और जिहाद और मिशन के बल पर अपना साम्राज्य थोप रखा है| स्वयं वाशिंगटन पोस्ट के पूर्वज दास जेसुइट और जिहादियों द्वारा कत्ल किये गये, धर्मान्तरित किये गये और नारियों का बलात्कार किया गया|

वाशिंगटन पोस्ट को ज्ञात होना चाहिए कि हमारे पूर्वज इंजीलवादी ईसाई व लुटेरे मुसलमान द्वारा कत्ल किये गए और नारियों का बलात्कार किया गया| अब वाशिंगटन पोस्ट अपने अपमान कर्ता उन्हीं असभ्य विश्वासी मजहबों के बचाव का अपराध कर रहा है| हम वैदिक पंथी अथवा वाशिंगटन पोस्ट अपने पूर्वजों के हत्यारे मजहबों के प्रति निष्ठावान या आभारी नहीं हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) की शर्त और संरक्षण में वे हमारी हत्या व धर्मांतरण की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं|

 

+++

भारतीय संविधान

जो लोग इंडिया को स्वतंत्र बता रहे हैं, कृपया अभिलेख दिखाएँ.

मैं नीचे अभिलेख दे रहा हूँ, जो सिद्ध करता है कि इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और यह उपनिवेश ब्रिटिश कानूनों द्वारा शासित है.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

संकलनकर्ता भीमराव अम्बेडकर ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे!

अम्बेडकर ने यह दावा कभी नहीं किया कि उन्होंने यह संविधान बनाया। इसके विपरीत अम्बेडकर ने २ सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा कि इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता| अम्बेडकर का उपरोक्त वक्तव्य राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है; जिसे कोई भी पढ़ सकता है| एक बात और समझने की है कि भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमैटी के चेयरमैन थे| जब संकलनकर्ता ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे, तो आप भारतीय संविधान पर क्यों विश्वास करते हैं?

क्यों बना भारतीय संविधान?

उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने और वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए|

एलिजाबेथ को भी ईसा का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७).

अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| बाइबल के अनुसार ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा और मात्र अपनी पूजा कराएगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा की बारी है| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी व संवैधानिक अधिकार है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| बाइबल और कुरान मूसा व मुहम्मद के तथाकथित ईश्वरीय आदेश हैं, जिनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

वीर्यहीन और चरित्रहीन बनाने वाली अब्रह्मी संस्कृतियाँ

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये| [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}| वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

भारतीय संविधान से पोषित अब्रह्मी संस्कृतियां, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देती हैं। इन्होंने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है।

सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा। जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०/०६/१९७९ से लुप्त) व अनुच्छेद ३९ग].

वैदिक सनातन धर्म मिटाना एलिजाबेथ का एकसूत्रीय लक्ष्य है| पोप ने एलिजाबेथ को इंडिया की धरती पर आकर आदेश दिया है कि २१ सदी में पूरे एशिया को ईसा की भेंड़ बनाना है| बाइबल में भी एलिजाबेथ को यही आदेश है और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भी एलिजाबेथ का समर्थन करता है| १९५० से आज तक किसी ने भारतीय संविधान का विरोध भी नहीं किया है|

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत|

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे न मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए| (मनु स्मृति ८:१५).

जो भी पन्थनिरपेक्ष है-आत्मघाती और अपराधी है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए उसकी हत्या या तो ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) करेगा अथवा मुसलमान (कुरान २:१९१).

 “न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, “मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?”

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है| देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार|

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) की शर्त है,

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

उपनिवेशवासी बलात्कारियों, लुटेरों और हत्यारों के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकते| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/dhara-196-crpc

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

भारतीय संविधान

जो लोग इंडिया को स्वतंत्र बता रहे हैं, कृपया अभिलेख दिखाएँ.

मैं नीचे अभिलेख दे रहा हूँ, जो सिद्ध करता है कि इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और यह उपनिवेश ब्रिटिश कानूनों द्वारा शासित है.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

संकलनकर्ता भीमराव अम्बेडकर ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे!

अम्बेडकर ने यह दावा कभी नहीं किया कि उन्होंने यह संविधान बनाया। इसके विपरीत अम्बेडकर ने २ सितम्बर, १९५३ को राज्य सभा में कहा कि इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता| अम्बेडकर का उपरोक्त वक्तव्य राज्य सभा की कार्यवाही का हिस्सा है; जिसे कोई भी पढ़ सकता है| एक बात और समझने की है कि भीमराव अम्बेडकर संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमैटी के चेयरमैन थे| जब संकलनकर्ता ही भारतीय संविधान को जलाना चाहते थे, तो आप भारतीय संविधान पर क्यों विश्वास करते हैं?

क्यों बना भारतीय संविधान?

उत्तर है, मानव मात्र को दास बनाने और वैदिक सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए|

एलिजाबेथ को भी ईसा का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७).

अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी व संवैधानिक अधिकार है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं|

मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| बाइबल और कुरान मूसा व मुहम्मद के तथाकथित ईश्वरीय आदेश हैं, जिनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)

अर्मगेद्दन के पश्चात ईसा जेरूसलम को अपनी अंतर्राष्ट्रीय राजधानी बनाएगा| बाइबल के अनुसार ईसा यहूदियों के मंदिर में ईश्वर बन कर बैठेगा और मात्र अपनी पूजा कराएगा| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा की बारी है| विशेष विवरण नीचे की लिंक पर पढ़ें,

वीर्यहीन और चरित्रहीन बनाने वाली अब्रह्मी संस्कृतियाँ

भारतीय संविधान से पोषित अब्रह्मी संस्कृतियां, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देती हैं। इन्होंने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है।

सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा। जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०/०६/१९७९ से लुप्त) व अनुच्छेद ३९ग].

वैदिक सनातन धर्म मिटाना एलिजाबेथ का एकसूत्रीय लक्ष्य है| पोप ने एलिजाबेथ को इंडिया की धरती पर आकर आदेश दिया है कि २१ सदी में पूरे एशिया को ईसा की भेंड़ बनाना है| बाइबल में भी एलिजाबेथ को यही आदेश है और भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भी एलिजाबेथ का समर्थन करता है| १९५० से आज तक किसी ने भारतीय संविधान का विरोध भी नहीं किया है|

http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

 

अल्लाह की संस्कृति

 

 

वैदिक सनातन संस्कृति

 

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

 

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत|

 

अर्थ: रक्षा किया हुआ धर्म ही रक्षा करता है, और अरक्षित धर्म मार डालता है, अतएव अरक्षित धर्म कहीं हमे न मार डाले, इसलिए बल पूर्वक धर्म की रक्षा करनी चाहिए| (मनु स्मृति ८:१५).

 

जो भी पन्थनिरपेक्ष है-आत्मघाती और अपराधी है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से अपने मजहब का पालन करते हुए उसकी हत्या या तो ईसाई (बाइबल, लूका १९:२७) करेगा अथवा मुसलमान (कुरान २:१९१).

 

मातृवत पर दारेषु, पर द्रव्येषु लोष्ट्वत|

 

आत्मवत सर्व भूतेषु, यः पश्यति सः पंडितः||

 

यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रध्यार्चितुमिच्छति|

 

तस्य तस्याचलां श्रधां तामेव विदधाम्यहम|| (गीता ७:२१)

 

जो जो भक्त जिस जिस देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करना चाहता है, उस-उस देवता के प्रति मै उसकी श्रद्धा को दृढ़ कर देता हूँ| (गीता ७:२१).

 

आप उपासना की स्वतंत्रता चाहेंगे या दासता?

 

‘‘अरक्षितारं राजानं बलिषडभागहारिणम्।

 

तमाहुः सर्वलोकस्य समग्रमलहारकम्।।3.308।।

 

यानी बिना रक्षा किए हुए राजा उपज का छठा भाग कर लेता है तो वह समग्र पापों का भागी है।

 

आप सम्पत्ति का स्वामित्व चाहेंगे, या बैल की भांति एलिजाबेथ का भूसा खायेंगे?

 

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

 

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

 

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, “मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?”

 

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे| स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है| लोकतंत्र में कोई सम्पत्ति और पूँजी नहीं रख सकता| सभी चोर व भिखारी हैं| निर्णय करें! आप को राजतन्त्र चाहिए या लोकतंत्र?

 

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है| देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- इंडिया के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा|" भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) भाग ३ मौलिक अधिकार|

भ्रष्टाचारी भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) की शर्त है,

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग).

उपनिवेशवासी बलात्कारियों, लुटेरों और हत्यारों के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकते| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

CrPC196kii Vivashta 13o15

मस्जिदों और चर्चों से ईशनिंदा का प्रसारण और जाति हिंसक शिक्षायें, जो भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन राज्य के विरुद्ध गैर जमानती संज्ञेय अपराध है यदि मुसलमान व ईसाई करे तो अपराध नहीं मानी जातीं| लेकिन आत्मरक्षा में भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १०२ व १०५ के अधीन अपराधी संस्कृतियों ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने वाले व्यक्ति पर अभियोग चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन संस्तुति देने के लिए राष्ट्रपति (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६०) और राज्यपाल (भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९) दोनों ही शपथ लेने के कारण विवश हैं| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की बाध्यता के कारण राष्ट्रपति, राज्यपाल और जिलाधीश के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति-यहाँ तक कि जज व पुलिस भी नहीं-अज़ान का प्रसारण करने वाले और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने वाले किसी इमाम के विरुद्ध अभियोग नहीं चला या चलवा सकता| लोकसेवक मुझे भूल जाएँ - अपनी, भावी पीढ़ी और अपनी संस्कृति की रक्षा करें|

http://www.aryavrt.com/dhara-196-crpc

 

दंड प्रक्रिया संहिता

धारा १९६. राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र के लिए अभियोजन – (१) कोई न्यायालय, -

 

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) के अध्याय ६ के अधीन या धारा १५३(क), धारा २९५(क) या धारा ५०५ की उपधारा (१) के अधीन दंडनीय किसी अपराध का; अथवा

 

ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षडयंत्र का; अथवा        

 

भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा १०८(क) में यथावर्णित किसी दुष्प्रेरण का, संज्ञान केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से ही किया जायेगा, अन्यथा नहीं| ...."

 

राज्यपाल अजान देने वाले ईमाम के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन १८६० से आज तक कार्यवाही नहीं कर सके, लेकिन अजान का जो भी विरोध करता है, उसे, भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अंतर्गत पुलिस द्वारा जेल भेज दिया जाता है| अजान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ से राज्यपाल या राष्ट्रपति द्वारा संरक्षित है|

 

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- “(१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...”

 

जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को अल्पसंख्यक स्वीकार कर वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| चढ़ावों को लूट रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना) बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| ऊपर उद्धृत दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण के कारण हिन्दू बलात्कारियों, लुटेरों और हत्यारों के विरुद्ध शिकायत भी नहीं कर सकते|

 

इस्लाम के अल्लाह ने मुसलमानों पर युद्ध अनिवार्य कर दिया है| (कुरान २:२१६) और ईसा तलवार चलवाने (बाइबल, मत्ती १०:३४) और आग लगवाने आया है| (बाइबल, लूका १२:४९). अल्लाह और ईसा का विरोध ईशनिंदा है, जिसके लिए मृत्यु दंड है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हामिद के अल्लाह और एलिजाबेथ के ईसा को अपनी लूट, कत्ल और नारी बलात्कार की संस्कृति को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है| भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) एलिजाबेथ और हामिद को आप की सम्पत्ति और पूँजी को लूटने का अधिकार देता है| न्यायपालिका ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने के लिए विवश है| (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८). न्यायपालिका ने ऐसा किया भी है| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० के अधीन राष्ट्रपति और अनुच्छेद १५९ के अधीन राज्यपाल शपथ/प्रतिज्ञान लेने के लिए विवश है, “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|” वैदिक सनातन धर्म कैसे बचेगा?

 

दया के पात्र मीडिया कर्मियों, विधायकों, सांसदों, जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास भारतीय संविधान ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा है| वर्तमान परिस्थितियों में एलिजाबेथ द्वारा सबका भयादोहन हो रहा है| लोक सेवक लूटें तो जेल जाएँ और न लूटें तो जेल जाएँ| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें| इनके अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है. भारतीय संविधान ने इनकी पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| एलिजाबेथ के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही प्रत्येक नागरिक ईसा की भेंड़ है. अगर हम जीवित रहना चाहते हैं, तो हमारे पास लोकतंत्र, इस्लाम और ईसाई मजहब को समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

 

भारतीय संविधान कुटरचित, परभक्षी और आतंताई अभिलेख है| {भारतीय संविधान के  अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग)}. भारतीय संविधान हत्यारे, आतताई, स्वार्थी, कामी, धनलोलुप मुस्लिम व ईसाई आतंकवादियों को, संवैधानिक व कानूनी कवच दे कर, वैदिक संस्कृति व आर्य जाति को समाप्त करने के लिए संकलित किया गया है| सांसद इसी संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ लेते हैं|

 

पाठक का सामना किसी ऐसे दास समूह से हो जाए, जिसके देवता का पेशा चोरी का कार्य (कुरआन ८:१, ४१ व ६९) है. जिसने अपने अनुयायी मुसलमानों पर युद्ध अनिवार्य कर दिया है| (कुरआन  २:२१६) आतंक (कुरआन ८:१२) और नारियों के बलात्कार (कुरआन  ४:२४ व २३:६) की छूट दे रखी है | जिस समूह का पूज्य देवता सगर्व कहता है कि वह हत्यारा है| (कुरआन ८:१७). लूट के माल का स्वामी है, (कुरआन ८:१). लूट के माल को पवित्र बताता है, (कुरआन ८:६९), मुसलमान समाज में लूट का बंटवारा करता है, (कुरआन ८:४१) प्रतिज्ञाएँ तोड़ता है, (कुरआन  ६६:२). जिसने मुहम्मद का निकाह मुहम्मद की ही पुत्रवधू से कराया था | (कुरआन,३३:३७-३८). जो मुसलमानों द्वारा गैर-मुसलमान नारियों का बलात्कार निंदनीय नहीं मानता है (कुरआन २३:६) अपितु इन कुकर्मो को करने वाले मुसलमानों को स्वर्ग भेजता है, जहाँ ऐसे अपराधी मुसलमानों को हूरे व गिलमे मिलेंगे, (यानी अल्लाह और उसके अनुयायी असामाजिक तत्व हैं. जिन्हें धरती पर रहने का अधिकार नहीं है) तो क्या आप चुप बैठे रहेंगे? मुझे दुःख है कि आप चुप ही नहीं बैठे हैं, बल्कि लूट व यौन सुख के लोभ में और मुजाहिदों के हाथों मौत के भय से सच्चाई को सामने नहीं आने दे रहे हैं| आप मानवदोही क्यों नहीं हैं? भारतीय संविधान मुसलमान और ईसाई को समर्थन व संरक्षण दे रहा हैं| अतएव आतंकवादी मुसलमान, कसाब या अफजल नहीं, अल्लाह व मस्जिद का पौषक भारतीय संविधान हैं| अपराध करने वाले से अपराध सहन करने वाला अधिक अपराधी होता है. अतः अपराधी भारतीय संविधान को रद्द करने में हमारा सहयोग करें|

 

इंडिया में कोई लोकतंत्र नहीं है. इंडिया में एलिजाबेथ के लिए, एलिजाबेथ द्वारा चुना गया एलिजाबेथतंत्र है. सर्व विदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन एलिजाबेथ ने किया. प्रधानमंत्री का मनोनयन एलिजाबेथ ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन एलिजाबेथ ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री एलिजाबेथ द्वारा मनोनीत हैं.

 

आजादी

 

इंडिया आजाद कभी नहीं हुआ. आजतक इंडिया ब्रिटिश डोमिनियन (उपनिवेश) व राष्ट्रकुल का सदस्य है| देखें भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||). आप एलिजाबेथ के दास हैं. चुनाव द्वारा भी आप भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) को नहीं बदल सकते. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

 

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

 

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?

 

छल जिसे कोई नहीं बताता|

 

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया| हम आज भी ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| हमें इसी अपराध के लिए ई० सन १८५७ से ही दंडित किया जा रहा है| २६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथ छल हुआ था| संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे| क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ| संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ| फिर हम इंडिया के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने  एलिजाबेथके रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम एलिजाबेथ द्वारा सताए जा रहे हैं. (बाइबल, लूका १९:२७). इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि जीविका, पद व प्रभुता के लिए वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

 

आप अकेले यह युद्ध नहीं लड़ सकते. धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया. उनके आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. क्या आप हम लोगों की सहायता करेंगे, ताकि एलिजाबेथ आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर न लूट ले, आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर न मार डाले जाएँ, नारियों का एलिजाबेथ बलात्कार न करा पाए और आप कत्ल न हों? (बाइबल, याशयाह १३:१६).

 

 

 

हर मुसलमान व ईसाई खूनी है| एलिजाबेथ कैथोलिक ईसाई है| धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है. (व्यवस्था विवरण, १३:६-११). व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है. (कुरान ४:८९). २०११ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे. न १४३१ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे. अतएव धर्मत्यागी एलिजाबेथ व हामिद को उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार है. क्यों कि बाइबल, लूका १९:२७ के ईसा के आदेश से एलिजाबेथ हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८ के आदेश से हामिद अंसारी कत्ल करेगा.

 

हम ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी हैं. हमारे ९ अधिकारी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने के कारण मक्का, मालेगांव आदि के विष्फोट में बंद हैं. आप सहयोग दें, तो हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम व उनके चर्च व मस्जिदें नहीं रहने देंगे. हमने बाबरी ढांचा गिराया है. क्यों कि यदि  आतताई ईसाइयत और इस्लाम धरती पर रहेंगे तो कोई मंदिर नहीं बच सकता. किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती.

 

चूंकि ईसाइयत और इस्लाम दोनों को ही वैदिक सनातन धर्म को मिटाना है, अतएव हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५/१९९३ प्रस्तुत की थी, जो निरस्त कर दी गई. मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था. जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया. बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ. अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं. मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी. वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, दिल्ली से चल रहा है. इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है. मैं अजान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ.

 

मैं मानव जाति को बचाना व मानव मात्र को सम्पत्ति और पूँजी रखने का अधिकार देना चाहता हूँ| एलिजाबेथ राज्यपालों के माध्यम से आप को लूट रही व मानवता को मिटा रही है. किसके साथ हैं आप?

 

भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है| अनुच्छेद २९(१)  भारतीय संविधान का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का संहार करने और वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए किया गया है| यह अनुच्छेद हर ईसाई व मुसलमान को आप की हत्या करने का असीमित मौलिक अधिकार देता है|

 

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये| [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]  जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)] और जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)}| वहभी भारतीयसंविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं कीधाराओं १९६ व १९७ केसंरक्षण में|

 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से अधिकार प्राप्त कर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के संरक्षण में एलिजाबेथ ने मेरी व हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल की गोरखपुर, उत्तर प्रदेश स्थित भूमि, राजस्व अभिलेखों में जालसाजी करा कर लूटी हुई है| १९८९ से आज तक अपराध सिद्ध होते हुए भी किसी राजस्व कर्मी के विरुद्ध कोई जज कार्यवाही न कर सका| बदले में भूमि देने का आदेश आज तक प्रभावी होते हुए भी न्यायपालिका मुझे भूमि न दिलवा सकी| आप तभी तक पद पर रहेंगे, जब तक एलिजाबेथ चाहेगी| विवरण के लिए नीचे की लिंक को क्लिक करें,

 

 http://www.aryavrt.com/nl-petition-transfered

 

कानून के अभाव में भी पटेल ने देश के राजाओं के राज्य लूट लिए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ के लुप्त होने के बाद और अनुच्छेद ३९(ग) के प्रभावी रहते हुए स्वयं राज्यपाल, अम्बानी, टाटा आदि पूंजीपति और मुख्यमंत्री अखिलेश एलिजाबेथ के हाथों लुटने से अपनी सम्पत्तियां, सम्मान और जीवन कैसे बचायेंगे?

 

मैं अरबपति व्यक्ति हूँ, लेकिन पांडवों और राणाप्रताप की भांति भिक्षावृत्ति के लिए विवश हूँ| आप का क्या होगा? एक बार फिर अम्बेडकर को दुहराता हूँ, “इस संविधान को आग लगाने की जिस दिन जरूरत पड़ेगी, मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इसे आग लगाउॅंगा। भारतीय संविधान किसी का भला नहीं करता|” अम्बेडकर तो रहे नहीं, क्या उनके दलित वारिस भारतीय संविधान को जलाने में मेरी सहायता करेंगे? अन्यथा मानवजाति मिट जाएगी|

 

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

 

 

 

 

+++

http://www.aryavrt.com/muj17w22-babri-revived

http://www.aryavrt.com/muj17w24-pension-iduk

 

फवाशिंगटन पोस्ट समाचार पत्र ने कहा कि इंडियन सबसे बड़े जातिवादी हैं!

 

वैदिक सनातन संस्कृति पर वाशिंगटन पोस्ट में एक अमेरिकी ने अपमानजनक टिप्पणी की थी और वैदिक धर्म के अनुयायियों को सबसे बड़ा जातिवादी घोषित किया था. तब मैंने वाशिंगटन पोस्ट से पूछा था कि जब हम इतने ही बुरे हैं, तो अब्रह्मी संस्कृतियों के अनुयायी यहाँ इंडिया में किसलिए आये और क्यों रहते हैं?

मुझे वाशिंगटन पोस्ट ने तत्काल उत्तर दिया था कि ईसाई हमें सभ्यता सिखाने के लिए इंडिया में आये और रहते हैं|

सचमुच? क्या वाशिंगटन पोस्ट का यही दृढ़ विश्वास है कि हम सबसे बड़े असभ्य और जातिवादी हैं? क्या हम या हमारे पुजारी मन्दिरों से प्रसारण करते हैं कि मात्र ईश्वर की पूजा हो सकती है? क्या हमारे उत्साही भगवा आतंकी ईसाई व मुसलमान के विरुद्ध जिहाद करने के लिए कहते हैं? क्या हमारे उत्साही भगवा आतंकी कहते हैं कि अब्रह्मी संस्कृतियों को छोड़ दो, जजिया दो अन्यथा हम तुम्हें कत्ल कर देंगे? क्या हमारा ईश्वर कहता है कि जो मुझे राजा स्वीकार न करे उसे उत्साही भगवा आतंकी कत्ल कर दें? (बाइबल, लूका १९:२७). वाशिंगटन पोस्ट बताए कि कौन बिगाड़ रहा है सांप्रदायिक सद्भाव? जातिहिंसा तो अब्रह्मी संस्कृतियों के प्रसार का आधार है!

मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं| बाइबल और कुरान मूसा व मुहम्मद के तथाकथित ईश्वरीय आदेश हैं, जिनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४).

लेकिन वाशिंगटन पोस्ट को भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अंतर्गत हिंदुओं का प्राइवेट प्रतिरक्षा का प्रयत्न जातिवाद दिखाई दे रहा है!

क्या वाशिंगटन पोस्ट ने शिया और सुन्नी के बीच दंगों के बारे में सुना है? क्या वाशिंगटन पोस्ट ने ईशनिंदा के अपराध में मुसलमान द्वारा मुसलमान के हत्या की खबर सुनी है?

क्या वाशिंगटन पोस्ट को मालूम है कि "नेटिव" (आदिम) शब्द का प्रयोग "नियम रहित निम्नस्तर जाति" जिनका भाग्य ही श्वेतों द्वारा शासित होता है, के अपमानजनक अर्थ में होने लगा है और आज भी जारी है। शासित देश (उपनिवेश) में लोकसेवकों के माध्यम से शासन होता रहा है।

 “वाशिंगटन पोस्ट को (कुरान ५:१०१ और १०२) और (बाइबल, व्यवस्था विवरण १३:६-११) पढ़ना चाहिए|

हम वैदिक पंथियों के अंदर बहुत सारी कमियां हैं. हमारे शासक माउंटबेटन की भांति अपने नारियों के वेश्यालय नहीं चलाते.

हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह नहीं करते और न पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करते हैं| हमारा ईश्वर धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग नहीं देता| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०). सभ्य मूसा और मुहम्मद की छलरचनाओं जेहोवा और अल्लाह ने अपने सभ्य अनुयायियों को ऐसे ही अधिकार दिये हैं|

हम बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह कराने वाले ईसा व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कराने वाले अल्लाह और धरती के किसी नारी के बलात्कार के बदले स्वर्ग देने वाले (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६ व ७०:३०) जेहोवा और अल्लाह को ईश्वर मामने के लिए तैयार नहीं हैं|

क्यों कि हम असभ्य भगवा आतंकवादी समलैंगिक विवाह नहीं करते| हम सहजीवन से घृणा करते हैं|

वाशिंगटन पोस्ट यह नहीं देख पा रहा है कि मस्जिदों से ईमाम अज़ान द्वारा काफ़िर उपनिवेशवासियों के इष्ट देवताओं की निंदा करता है| ईमाम मस्जिदों से काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देता है| ईसा ने दस करोड से अधिक अमेरिका के लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल लिया और अब विश्व के सभी धर्मों को नष्ट कर मात्र अपनी पूजा कराएगा!

वाशिंगटन पोस्ट यह देख पाने में असमर्थ है कि दास जेसुइट और जिहादियों ने उसको ईसा और अल्लाह की आड़ में अपना मातहत और उपकरण बना रखा है और जिहाद और मिशन के बल पर अपना साम्राज्य थोप रखा है| स्वयं वाशिंगटन पोस्ट के पूर्वज दास जेसुइट और जिहादियों द्वारा कत्ल किये गये, धर्मान्तरित किये गये और नारियों का बलात्कार किया गया|

वाशिंगटन पोस्ट को ज्ञात होना चाहिए कि हमारे पूर्वज इंजीलवादी ईसाई व लुटेरे मुसलमान द्वारा कत्ल किये गए और नारियों का बलात्कार किया गया| अब वाशिंगटन पोस्ट अपने अपमान कर्ता उन्हीं असभ्य विश्वासी मजहबों के बचाव का अपराध कर रहा है| हम वैदिक पंथी अथवा वाशिंगटन पोस्ट अपने पूर्वजों के हत्यारे मजहबों के प्रति निष्ठावान या आभारी नहीं हैं| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) की शर्त और संरक्षण में वे हमारी हत्या व धर्मांतरण की खुल्लमखुल्ला घोषणा करते हैं|

१.     हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| जबकि ब्रिटेन और अमेरिका में कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में यौन शिक्षा नहीं दी जाती और न ही गर्भनिरोधक गोलियाँ ही बांटी जाती हैं| इससे वीर्यहीनता के प्रसार और भेंड़ बनाने में एलिजाबेथ को कठिनाई हो रही है|

२.     हमारे गुरुकुलों में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है. गुरुकुलों से वीर्यहीनता के प्रसार और भेंड़ बनाने में एलिजाबेथ को कठिनाई हो रही है|

३.     हमने ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क गुरुकुलों का प्रसन्नतापूर्वक बहिष्कार कर रखा है| मैकाले के महंगे स्कूल में यौनशिक्षा दिलाने के लिए हम सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं|

४.     सती और भ्रूणहत्या अब्रह्मी संस्कृतियों की देन है|

५.     हम असभ्य भगवा आतंकवादी कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) और प्रेत नहीं है|

६.     १.     गांधी के कांग्रेस ने निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा प्रणाली का अपमान किया है, जिसकी शिक्षा अहम् ब्रह्मास्मि है| जिस का तात्पर्य यह निर्देशित करता है कि मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई अथवा कोई भी, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्तियों को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही है अहम् ब्रह्मास्मि का अन्यतम तात्पर्य।

७.     क्या उपनिवेशवासी दास बनाने वाले मैकाले के महंगे यौन व इस्लामी बलात्कार के शिक्षाकेंद्र मकतब व मस्जिद को समाप्त कर अपनी भावी पीढ़ी को ब्रह्मज्ञान और वीर्यरक्षा की निःशुल्क शिक्षा दिलाकर, वीर्यवान, ओजस्वी, तेजस्वी और सम्प्रभु ब्रह्मचारी बनाने वाले निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को, पुनर्स्थापित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग देंगे?

८.     निर्णय ईसाई व मुसलमान सहित उपनिवेशवासियों के हाथों में| उपनिवेशवासी स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु गुरुकुल शिक्षित वीर्यवान, ओजस्वी, तेजस्वी और सम्प्रभु होना चाहते हैं अथवा दास बनकर मैकाले के स्कूलों में यौनशिक्षा लेना चाहते हैं. अपनी कन्याओं को गर्भनिरोधक गोलियां खिलाना चाहते हैं और खतना व वेश्यावृत्ति द्वारा नपुंसक बनना चाहते हैं?

९.     राज्यपालों का मनोनयन एलिजाबेथ करती है| पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी के त्यागपत्र ने सिद्ध कर दिया है कि यदि राज्यपाल हंसराज एलिजाबेथ का आदेश नहीं मानेंगे तो राज्यपाल पद से हटा दिए जायेंगे|

१०.    वेश्याओं के महिमामंडन हेतु २९ मई, २०१२ को पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी ने डीएनए के लिए अपना खून दे दिया है|, ताकि

११.    पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी से वैश्या को अधिकार दिलाया जा रहा है| आप का क्या होगा?

१२.    ईसाइयों के यहाँ कुमारी माएं प्रायः घर घर मिलती हैं| बेटी व पुत्रवधू से विवाह, सहजीवन व समलैंगिक मैथुन और सगोत्रीय विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है| बारमें दारू पीने वाली बालाओं का सम्मान हो रहा है! विवाह सम्बन्ध अब बेमानी हो चुके हैं| जजों ने लव जेहाद, सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| एलिजाबेथ के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौनशिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडिया के विद्यालयों में गर्भनिरोधक गोलियां बांटी जाएँगी| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| उज्ज्वला - नारायण दत्त तिवारी और आरुषि - हेमराज में जजों के फैसलों ने आने वाले समाज की दिशा निर्धारित कर दी है| हालात इतने गम्भीर हैं कि आप अपनी पत्नी, बहन या बेटी को व्यभिचार करने से रोक नहीं सकते| आप अपनी संतानों को ब्रह्मचारी बनाने की बात सोच नहीं सकते|

१३.    भारतीय संविधान में आस्था व निष्ठा की शपथ लेने वाले नमो की रूचि भावी पीढ़ी को सम्प्रभु बनाने वाले ब्रह्मचर्य के निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में नहीं है| गुजरात और गोवा में यौनशिक्षा लागू हो गई है और देश के प्रधानमन्त्री बनने पर नमो इसे पूरे देश में लागू करेंगे| स्कूलों में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलिया बाँटेंगे|

१४.    गुजरात और गोवा में यौनशिक्षा लागू हो गई है और देश के प्रधानमन्त्री बनने पर नमो यौनशिक्षा पूरे देश में लागू करेंगे| स्कूलों में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियां निःशुल्क बाँटेंगे| नसबंदी से वैदिक सनातन धर्म समाप्त नहीं हो पा रहा है|

१५.    सोनिया के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौनशिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडिया के विद्यालयों में गर्भनिरोधक गोलियां बांटी जाएँगी|

१६.    जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| उज्ज्वला - नारायण दत्त तिवारी और आरुषि - हेमराज में जजों के फैसलों ने आने वाले समाज की दिशा निर्धारित कर दी है| हालात इतने गम्भीर हैं कि आप अपनी पत्नी, बहन या बेटी को व्यभिचार करने से रोक नहीं सकते| आप अपनी संतानों को ब्रह्मचारी बनाने की बात सोच नहीं सकते|

१७.    अपनी भावी पीढ़ी को यौनशिक्षा दिलाने के लिए सभी लोग अपना सबकुछ दांव पर लगा रहे हैं|

१८.    क्या नमो सरकार महंगे यौनशिक्षा प्रणाली को बदल कर भावी पीढ़ी को सम्प्रभु बनाने वाले ब्रह्मचर्य के निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में रूचि लेगी? निर्णय आप स्वयं करें| आप अपने देश की स्वतंत्रता का युद्ध लड़ेंगे या एलिज़ाबेथ के उपनिवेश में अपने को सम्पत्ति और जीवन के अधिकार से वंचित रखेंगे? यदि स्वयं सहित मानवमात्रकी रक्षा चाहें तो उपनिवेशसे मुक्ति के इस युद्ध में हमें सहयोग दें|

१९.    जहाँ भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) सम्प्रभु मनुष्य को वीर्यहीन कर अधीन करने वाले इन संस्कृतियों को बनाये रखने का संवैधानिक असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, वहीं राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा अब्रह्मी संस्कृतियों का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ} और प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व अविश्वासियों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदान} करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

२०.    लव जेहाद, बेटी व पुत्रवधू से विवाह, सहजीवन व समलैंगिक मैथुन और सगोत्रीय विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है| बारमें दारू पीने वाली बालाओं का सम्मान हो रहा है! विवाह सम्बन्ध अब बेमानी हो चुके हैं| जजों ने सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है|

२१.    धरती के किसी नारी का बलात्कार या तो ईसाई करेगा अथवा मुसलमान| (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:६ व ७०:३०). ईसा आप को बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह का व अल्लाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दे चुका है| इतना ही नहीं!

 

+++

Seअभिनेता अनुपम खेर के तीखे सवाल सुनकर सुप्रीम कोर्ट के जजों का माथा ठनका ---------

.

11 मई से तीन तलाक के मुद्दे की सुनवाई के लिए 5 जज़ों की टीम बैठ चुकी है। सुनवाई के पहले ही दिन कोर्ट नें कहा था कि अगर तीन तलाक का मामला इस्लाम धर्म का हुआ तो उसमें हम दखल नही देंगे।

इसपर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर नें तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि, ठीक है माई लॉर्ड, अगर आप धर्म के मामले में दखल नही देना चाहते तो जलीकट्टू, दही हांड़ी, गो हत्या, राम मंदिर जैसे कई हिंदुओ के मामले हैं जिसमें आप बेझिझक दखल देते हैं। क्या हिंदू धर्म आपको धर्म नही लगता? या फिर आप मुसलमानों की धमकियों से डरते हैं? अगर आप कुरान में लिखे होनें से तीन तलाक को मानते हैं तो पुराण में लिखे राम के अयोध्या में पैदा होनें को क्यों नही मानते?

हमें भी बताइए, यह सिर्फ मैं नही पूरा देश जानना चाहता है।nt from my iPhone

न्यायालयके समक्ष अधिकसे अधिक ये प्रश्न है या होने चाहिये कि,

 

कुरानके अनुसार तीन तल्लाककी प्रक्रिया है या नही?

इसके संदर्भमें कुरानके अनुसार स्त्रीको अन्याय होता है या नहीं?

कुरान स्त्री और पुरुषके मानवीय अधिकारोंमें भेदभावपूर्ण है?

 

यह एक संशोधनका विषय है कि सर्वोच्च न्यायालयके न्यायाधीश क्यूं "तीन तल्लाक"का विकल्प भी पूछते है".

 

या तो सर्वोच्च न्यायालयके ये न्यायाधीशको मंकी सीब्बल स्वयंके वरीष्ठ नामके कारण पथभ्रष्ट कर रहा है, या ....

मूर्ख होना कोई एक समूहका एकाधिकार नहीं है.  

 

Re: यदि भाजपा के समर्थक हैं तो ख़ुद से नीचे लिखे सवाल पूछिए और जवाब ना हो तो अपनी सरकार से ये सवाल ज़रूर पूछिए..!!!

x

यदि भाजपा के समर्थक हैं तो ख़ुद से नीचे लिखे सवाल पूछिए और जवाब ना हो तो अपनी सरकार से ये सवाल ज़रूर पूछिए..!!!

 

तीन साल में :-

 

1- कितने करोड युवाओं को रोजगार दिया ?

2- गंगा मैया कितनी साफ हुई ?

3- बुलेट ट्रेन के कितने कोच तैयार हुए ?

4- मेक इन इंडिया का क्या परिणाम रहा ?

5- कितने दागी नेता जेल गए ?

6- धारा 370 पर क्या हुआ ?

7- कितने कश्मीरी पंडितों को उनके घर मिले ?

8- डीजल पैट्रोल कितने सस्ते हुए ?

9- मंहगाई कितनी कम हुई ?

10- आम जनता के लिए क्या किया गया ?

11- लाहौर और करांची पर कंहा तक कब्जा किया ?

12- सेना को कितनी छूट दी गई ?

13- चीन थर थर कांपा क्या ?

14- देश ईमानदार देशों की श्रेणी में आया क्या ?

15- किसानों की फांसी बंद हुई क्या ?

16- जवानों का खाना सुधरा क्या ?

17- बिहार को 125 लाख करोड़ का पैकेज दिया क्या ?

18- अलगाववादी नेताओं की सुविधाएं बंद की क्या?

19- ओवैसी और वाड्रा जेल गए क्या ?

20- मोदी के विदेशी दौरों से कुछ फायदा हुआ क्या ?

21- राम मन्दिर बना क्या ?

22- गुलाबी क्रांति गौ हत्या रुकी क्या ?

23- डॉलर का मूल्य रूपये के मुकाबले कम हुआ क्या ?

24- कितने स्मार्ट सिटी तैयार हो गये ?

25- कितने गाँवों की काया पलट हुई संसादों के गोद लेने से ?

26- महिलाओं पर अत्याचार रुक गया क्या ?

27- बीफ एक्सपोर्ट में भारत को एक नम्बर किसने बनाया ?

28- 100 दिनों के अंदर विदेशों से काला धन आया क्या ?

29- कितने लोगों को 15 लाख मिले ?

30- नोटबन्दी से आतंकवाद और नक्सलवाद का कमर टूटा क्या ?

31- देश के अंदर से घूसखोरी बंद हो गई क्या ?

32- भारत में कितनी खुशहाली आई ?

33- स्वच्छता अभियान का क्या परिणाम रहा ?

 

विचार करें और उचित कदम उठांए

 

जवाब मिलें तो मुझे भी बताइएगा..!!!

+++

"कुछ प्रश्न जो आपके

दिमाग में भी होंगे"

 

1. यदि पाकिस्तान और भारत

का बँटवारा धर्म के आधार

पर हुआ जिसमे पाकिस्तान

मुस्लिम राष्ट्र बना तो भारत

हिन्दू राष्ट्र क्यूँ घोषित नहीं

किया गया? जबकि दुनिया मे

एक भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है !

 

2. तथाकथित राष्ट्र का पिता

मोहनदास गांधी ने ऐसा

क्यूँ कहा पाकिस्तान से

हिन्दू सिखो की लाशे आए

तो आए लेकिन यहाँ एक

भी मुस्लिम का खून नहीं

बहना चाहिए ?

 

3. मोहनदास करमचंद

गांधी चाहते तो भगत सिंह

जी को बचा सकते थे पर क्यूँ

नहीं बचाया ?

 

4. भारत मे मुस्लिम के लिए

अलग अलग धाराए क्यूँ है ?

 

5. ऐसा क्यूँ है की भारत से

अलग होकर जीतने भी देश

बने है सब इस्लामिक देश

ही बने । क्यूँ ?

 

6. केरल मे कोई रिक्शा वाला

वाहन चालक हिन्दू श्री कृष्ण

जय हनुमान क्यूँ नहीं लिख

सकता ?

 

7. भारत मे मुस्लिम 18%

के आस पास है फिर भी

अल्पसंख्यक कैसे है ?

जबकि नियम कहता है की

10% के अंदर की संख्या

ही अल्पसंख्यक है

 

8.कश्मीर से हिन्दुओ को क्यूँ

खदेड़ दिया जबकि कश्मीर

हिन्दुओ का राज्य था ?

 

9. ऐसा क्यूँ है की मुस्लिम

जहा 30-40% हो जाते है

तब अपने लिए अलग

इस्लामिक राष्ट्र बनाने की

मांग उठाते है विरोध करते है

अन्य समुदाय के गले

रेतते है क्यूँ ?

 

10. हिन्दुत्व को सांप्रदायिक

क्यूँ ठहराया जाता है

जबकि इस्लामिक

आतंकवाद को धर्म

से नहीं जोड़ने की

अपील की जाती है ?

 

11. हमारा देश ही दुनिया मे

एक मात्र देश है जो मुस्लिम

को हज सब्सिडी देता है

60 वर्षो मे सरकार ने

इसके लिए 10000

करोड़ रुपये खर्च कर

डाले क्यूँ ?

 

12. भारत मे मुस्लिमो के

मदरसो के अनुदान हिन्दू

मंदिरो से क्यूँ ?

 

13. कश्मीर मे गीता उपदेश

देने पर संवेधानिक

अडचने क्यूँ है ?

 

14. जामा मस्जिद के इमाम

सैयद बुखारी ने एक बार

कहा था की वह ओसामा

बिन लादेन का समर्थन

करता है और आईएसआई

का अजेंट है फिर भी भारत

सरकार उसे गिरफ्तार

क्यूँ नहीं करती ?

 

15. पाकिस्तान मे 1947

मे 22.45% हिन्दू थे आज

मात्र 1.12% शेष है सब

कहा गए ?

 

16. मुगलों द्वारा ध्वस्त किया

गया मंदिर सोमनाथ के

जीर्णोद्धार की बात आई

तो गांधी ने ऐसा क्यूँ कहा

की यह सरकारी पैसे का

दुरपयोग है जबकि जामा

मस्जिद के पुनर्निर्माण के

लिए सरकार पर दबाव

डाला, अनशन पर बैठे

 

17. भारत मे 1947 मे

7.88% मुस्लिम थे

आज 18.80% है इतनी

आबादी कैसे बढ़ी ?

 

18. भारत मे मीडिया

हिन्दुओ के, संघ के

खिलाफ क्यूँ बोलती है ?

 

19. अकबर के हरम मे

4878 हिन्दू औरते थी,

जोधा अकबर फिल्म मे

और स्कूली इतिहास मे

इसे क्यूँ नहीं छापा गया

 

20. बाबर ने लाखो हिन्दुओ

की हत्या की फिर भी हम

उसकी मस्जिद क्यूँ

देखना चाहते है ?

 

21. भारत मे 80% हिन्दू है

फिर भी श्री राम मंदिर

क्यूँ नहीं बन सकता ?

 

22. कांग्रेस के शासन मे

645 दंगे हुए है जिसमे

32,427 लोग मारे गए है

मीडिया को वो दिखाई नहीं

देता है जबकि गुजरात मे

प्रतिकृया मे हुए दंगो मे

2000 लोग मारे गए उस

पर मीडिया हो इतना

हल्ला करती है क्यूँ ?

 

23. 67 कारसेवकों को

गोधरा मे जिंदा जलाया

मीडिया उनकी बाते क्यूँ

नहीं करती ?

 

24. जवाहर लाल नेहरू के

दादा एक मुस्लिम

(गयासुद्दीन गाजी) थे,

हमें इतिहास मे गलत

क्यूँ बताया गया ?

 

इसको इतना फैला दो कि हर हिन्दुस्तानी सोचने को मजबूर हो जाय

कि आने वाली पीढ़ी को हम क्या दे कर जायेंगे .. और हिंदू देश के हर नागरिक का क्या दायित्व है...

जय हिन्दू , जय भारत

 

Suresh Vyas

https://skanda987.wordpress.com/2017/05/25/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%9b-24-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%a8/

 for your easy distribution.

 

jai sri krishna!

-sv

+++

मंगल पांडे को फाँसी

तात्या टोपे को फाँसी

रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेना ने घेर कर मारा

भगत सिंह को फाँसी

सुखदेव को फाँसी

राजगुरु को फाँसी

चंद्रशेखर आजाद का एनकाउंटर अंग्रेज पुलिस द्वारा

सुभाषचन्द्र बोस को गायब करा दिया गया

भगवती चरण वोहरा बम विस्फोट में मृत्यु

रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी

अशफाकउल्लाह खान को फाँसी

रोशन सिंह को फाँसी

लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु

वीर सावरकर को कालापानी की सजा

चाफेकर बंधू (३ भाई) को फाँसी

मास्टर सूर्यसेन को फाँसी

ये तो कुछ ही नाम है जिन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम और इस देश की आजादी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया

कई वीर ऐसे है हम और आप जिनका नाम तक नहीं जानते

 

एक बात समझ में आज तक नही आई कि भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे

जिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर, कभी एक लाठी तक नही मारी...

उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश के उपर अपना पेंटेंट समझती है

 

Subject: उपनिवेश: आइये देखें उपनिवेश किसे कहते हैं??

 

||श्री गणेशायनमः||

शेरजी को नमस्ते!

केवल मैं और आप ही नहीं, स्वयं थोमस जी भी उपनिवेश के बलिपशु हैं.

थोमस जी को ज्ञात होना चाहिए कि यदि मुझे पागलखाने भेजने से मानवजाति बच जाये, तो मुझे वहाँ भी कोई कष्ट नहीं होगा.

इंडिया स्वतंत्र नहीं, ब्रिटेन का स्वतंत्र? उपनिवेश है. आइये देखें उपनिवेश किसे कहते हैं?

उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के बाहर की उस दूरस्थ बस्ती को कहते हैं, जहाँ उस राज्य की प्रजा निवास करती है।

 

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

 

कोई उपनिवेशवासी उपनिवेश का विरोध क्यों नहीं करता? उल्टे मेरे पास तमाम पत्र आ रहे हैं कि इंडिया, दैट इज भारत, स्वतंत्र है. मैं लोगों को दिग्भ्रमित करता हूँ. मेरा सुझाव है कि सत्ता हस्तान्तरण के मात्र २७ दिन पूर्व १८ जुलाई, १९४७ को ब्रिटिश संसद में पारित निम्नलिखित अधिनियम का पहला पैरा पढ़ें,

 

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

“An Act to make provision for the setting up in India of two independent Dominions, to substitute other provisions for certain provisions of the Government of India Act 1935, which apply outside those Dominions, and to provide for other matters consequential on or connected with the setting up of those Dominions…”

क्या राज्यपाल या जज उपनिवेश का विरोध कर सकते हैं? दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है,वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है| इस प्रकार एलिजाबेथ राष्ट्रपति और राज्यपाल के कंधे पर रायफल रख कर अपने शत्रुओं को मार रही है और कोई एलिजाबेथ के विरुद्ध ऊँगली भी नहीं उठा सकता!

 

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

http://www.aryavrt.com/fatwa

http://www.aryavrt.com/muj16w43by-nivedan

 

सत्ता हस्तान्तरण के अभिलेख के बारे में पहले ही लिख चुका हूँ, नीचे देखें.

विश्व के उपनिवेशवासियों से निवेदन:

सपनों की दुनियां से बाहर आईये. मेरे प्रश्नों का उत्तर ढूंढिए...

थोमस मुनरो (Thomas Munro) ने मद्रास रेजीडेंसी में साक्षरता जानने के लिए सन १८२३ में सर्वे किया था, उसने लिखा कि मद्रास रेजीडेंसी में १००% साक्षरता है.

प्रश्न है कि अछूत, दलित और पिछड़े समाज को भी शिक्षित करना उस समय के ब्राह्मणों का ही दायित्व था. फिर अछूत, दलित और पिछड़े समाज के भावी संतानों को ब्राह्मणों ने कैसे साक्षर बनाया?

जो अछूत, दलित और पिछड़ा समाज शिक्षक ब्राह्मणों का भिक्षा देकर भरण पोषण करता था और बदले में जो ब्राह्मण तथाकथित दलित समाज की भावी पीढ़ी को सम्प्रभु ब्रह्मचारी बनाता था, आज वही दलित और पिछड़ा समाज ब्राह्मणों का शत्रु बन गया है. आज अछूत, दलित और पिछड़ा समाज स्वेच्छा से निःशुल्क गुरुकुलों का बहिष्कार कर अपनी भावी पीढ़ी को मैकाले के महंगे यौनशिक्षा स्कूलों में भेजकर दास बना रहा है. गो को कत्लखाने भेज रहा है. विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj16w01-khtna-16101

http://www.aryavrt.com/indian-educationact-1858hd

 

इंडियन उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का गांधी ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया. उपनिवेशवासी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने का साहस भी गवां बैठे हैं. क्योंकि उपनिवेश का विरोध भारतीय दंड संहिता की धारा १२१ के अधीन मृत्युदंड का अपराध है.

इंडिया को बाँटने और अपने कानूनों को उपनिवेश वासियों पर लागू करने का ब्रिटेन को अधिकार कैसे है? दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६, जिसका नियंत्रण राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास सुरक्षित है, वैदिक सनातन संस्कृति के रक्षार्थ किये गये किसी भी विरोध को बड़ी चतुराई से निष्क्रिय कर देती है|इस प्रकार एलिजाबेथ राष्ट्रपति और राज्यपाल के कंधे पर रायफल रख कर अपने शत्रुओं को मार रही है और कोई एलिजाबेथ के विरुद्ध ऊँगली भी नहीं उठा सकता!

उपनिवेशवासियों को कत्ल करने से जिनको जन्नत मिलेगी और नारियों का बलात्कार करने से हूरें. उनको उपनिवेशवासी इंडिया में क्यों रहने दें?

राज्यपाल और जज इस बात से अत्यधिक आतंकित हैं कि मैंने बाबरी ढांचा गिरवा दिया. हम मस्जिद, अज़ान और खुत्बे का विरोध कर रहे हैं. हम इस्लाम ब्रांड साम्प्रदायिक सद्भाव, “मात्र अल्लाह पूज्य है!को बिगाड़ रहे हैं. हम एलिजाबेथ के उपनिवेश में रहने के लिए तैयार नहीं हैं. हमने स्वतंत्र आर्यावर्त सरकार बना ली.

उपरोक्त तथ्य तब उभड़ कर सामने आये, जब जज ने राज्यपाल की संस्तुति पर निम्नलिखित आदेश दिया:-

साध्वी की ज़मानत ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने प्राथमिक यानी एटीएस की जांच पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा सिंह इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि धमाकों के लिए इस्तेमाल बाइक से उनका संबन्ध है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान के मुताबिक भोपाल में हुई मीटिंग में साध्वी मौजूद थीं। उस मीटिंग में औरंगाबाद और मालेगांव में बढ़ रही जिहादी गतिविधियों और उन्हें रोकने पर चर्चा हुई। यंहाँ तक कि मीटिंग में मौजूद सभी लोगों ने देश में तत्कालीन सरकार को गिराकर अपनी स्वतन्त्र सरकार बनाने की बात भी की थी।

अज़ान द्वारा मुसलमान स्वयं राज्यपालों के इष्टदेवों की निंदा करते हैं और कत्ल करने के खुत्बे देते हैं.

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ सन १८६० में संकलित की गई. क्या कोई राज्यपाल मस्जिद और अज़ान बंद कर सका?

अतः उपनिवेश. भारतीय संविधान, राष्ट्रपति, राज्यपाल, चर्च, मस्जिद, बाइबल और कुरान के रहते मानवजाति सुरक्षित नहीं है.

इनसे मुक्ति हेतु मानवजाति आर्यावर्त सरकार का सहयोग करे.   अप्रति.

 +++

तार्किक विचार हैं ,

विवेक से विवेचन अवश्य करें ,

पढ़ें और शेयर करें ।

★★★★★★★★★★★★

हमें विश्व के 57 मुस्लिम_देशों से कोई खतरा नहीं है लेकिन उनको विश्व में सिर्फ एक हिंदू राष्ट्र देश बनने से खतरा है

.

हमें 57 देशों के मुस्लिम कट्टरवाद से कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें सिर्फ हिंदूवाद की कट्टरता से खतरा है

.

हमें विश्व में बनने वाली लाखों करोड़ों मस्जिदों से कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें अयोध्या में बनने वाले श्रीराम के एक मंदिर से खतरा है

.

अगर भारत का उपराष्ट्रपति मुस्लिम बनता है तो हमें उससे कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें किसी राज्य का मुख्यमंत्री साधू बन जाए तो भी खतरा है

.

वो घर-घर से अफजल निकालते है, हमें फिर भी उनसे कोई खतरा नहीं है लेकिन हमारे घर से एक योगी निकलता है, तो भी उनको खतरा है

.

हमें माशाल्लाह, अल्लाह-हू-अकबर, नमाज, काबा, रमजान आदि से कोई खतरा नहीं है लेकिन उनको जय श्री राम के जयकारे से खतरा है

.

हमें हरे कपडे, बुर्के, जालीदार टोपी से कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हे गेरुए रंग के तिलक से खतरा है

.

चार शादी करके 60 बच्चे पैदा करने वालों से हमें कोई खतरा नहीं है लेकिन उनको RSS के अविवाहित सदस्यों से खतरा है

.

उनको हज यात्रा में मिलने वाली सब्सिडी से हमें कोई खतरा नहीं है लेकिन अगर हम टैक्स देकर भी तीर्थयात्रा करें तो भी उनको खतरा है

.

हमें सुन्नी, शिया, अहमदिया किसी से खतरा नहीं है लेकिन उनको हिन्दू नाम से ही खतरा है ॥

.

अजीब मानसिकता है ।।।

 

Sent from my Samsung Galaxy smartphone.

The great escape.

 

Bhalchandra Thattey

May 24 (5 days ago)

 

+++

जानिए कांग्रेस की 10 हिन्दू विरोधी बयान/हरकतें---

 ये हैं वो 10 बयान और घटना जो इस बात का सबूत हैं कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से हिंदू विरोध की नीति पर चली है और आज भी वो इसी नीति पर

 मजबूती के साथ कायम है।

 

1. वंदेमातरम से थी दिक्कत:

आजादी के बाद यह तय था कि वंदे मातरम राष्ट्रगान होगा। लेकिन जवाहरलाल नेहरू ने इसका विरोध किया और कहा कि वंदे मातरम से मुसलमानों के दिल को ठेस पहुंचेगी। जबकि इससे पहले तक तमाम मुस्लिम नेता वंदे मातरम गाते थे। नेहरू ने ये रुख लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों को शह दे दी। जिसका नतीजा देश आज भी भुगत रहा है। आज तो स्थिति यह है कि वंदेमातरम को जगह-जगह अपमानित करने की कोशिश होती है। जहां भी इसका गायन होता है कट्टरपंथी मुसलमान बड़ी शान से बायकॉट करते हैं।

2. सोमनाथ मंदिर का विरोध:

गांधी और नेहरू ने हिंदुओं के सबसे अहम मंदिरों में से एक सोमनाथ मंदिर को दोबारा बनाने का विरोध किया था। गांधी ने तो बाकायदा एतराज जताते हुए कहा था कि सरकारी खजाने का पैसा मंदिर निर्माण में नहीं लगना चाहिए, जबकि इस समय तक हिंदू मंदिरों में दान की बड़ी रकम सरकारी खजाने में जमा होनी शुरू हो चुकी थी। जबकि सोमनाथ मंदिर के वक्त ही अगर बाबरी, काशी विश्वनाथ और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के विवादों को भी हल किया जा सकता था। लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं होने दिया।

3. बीएचयू में हिंदू शब्द से एतराज:

नेहरू और गांधी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदू शब्द पर आपत्ति थी। दोनों चाहते थे कि इसे हटा दिया जाए। इसके लिए उन्होंने महामना मदनमोहन मालवीय पर दबाव भी बनाया था। जबकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से दोनों को ही कोई एतराज नहीं था।

4. हज के लिए सब्सिडी शुरू की:

ये कांग्रेस सरकार ही थी जिसने हज पर जाने वाले मुसलमानों को सब्सिडी देने की शुरुआत की। दुनिया के किसी दूसरे देश में ऐसी सब्सिडी नहीं दी जाती। जबकि कांग्रेस सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर खास तौर पर टैक्स लगाया। इसके अलावा हिंदुओं की दूसरी धार्मिक यात्राओं के लिए भी बुनियादी ढांचा कभी विकसित नहीं होने दिया गया। अब मोदी सरकार के आने के बाद उत्तराखंड के चारों धाम को जोड़ने का काम शुरू हुआ है।

5. 26/11 के पीछे हिंदुओं का हाथ:

मुंबई हमले के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने इसके पीछे हिंदू संगठनों की साजिश का दावा किया था। दिग्विजय के इस बयान का पाकिस्तान ने खूब इस्तेमाल किया और आज भी जब इस हमले का जिक्र होता है तो पाकिस्तानी सरकार दिग्विजय के हवाले से यही साबित करती है कि हमले के पीछे आरएएस का हाथ है। दिग्विजय के इस बयान पर उनके खिलाफ कांग्रेस ने कभी कोई कार्रवाई या खंडन तक नहीं किया।

6. मंदिर जाने वाले छेड़खानी करते हैं:

राहुल गांधी ने कहा था कि जो लोग मंदिर जाते हैं वो लड़कियां छेड़ते हैं। यह बयान भी कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व की हिंदू विरोधी सोच की निशानी थी। यह अलग बात कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद खुद राहुल गांधी कई मंदिरों के चक्कर काट चुके हैं। हालांकि उनकी मां सोनिया अब भी ऐसा कुछ नहीं करती हैं जिससे यह मैसेज जाए कि उनका हिंदू धर्म से कोई नाता है।

7. राम सेतु पर हलफनामा:

2007 में कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि चूंकि राम, सीता, हनुमान और वाल्मिकी वगैरह काल्पनिक किरदार हैं इसलिए रामसेतु का कोई धार्मिक महत्व नहीं माना जा सकता है। जब बीजेपी ने इस मामले को जोरशोर से उठाया तब जाकर मनमोहन सरकार को पैर वापस खींचने पड़े। हालांकि बाद के दौर में भी कांग्रेस रामसेतु को तोड़ने के पक्ष में दिखती रही है।

8. हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़ा:

इससे पहले हिंदू के साथ आतंकवाद शब्द कभी इस्तेमाल नहीं होता था। मालेगांव और समझौता ट्रेन धमाकों के बाद कांग्रेस सरकारों ने बहुत गहरी साजिश के तहत हिंदू संगठनों को इस धमाके में लपेटा और यह जताया कि देश में हिंदू आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा है। जबकि ऐसा कुछ था ही नहीं। इस केस में जिन बेगुनाहों को गिरफ्तार किया गया वो इतने सालों तक जेल में रहने के बाद बेकसूर साबित हो रहे हैं।

9. राम की तुलना इस्लामी कुरीति से:

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने इसकी तुलना भगवान राम से की। यह तय है कि कपिल सिब्बल ने यह बात अनजाने में नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझकर कही है। उनकी नीयत भगवान राम का मज़ाक उड़ाने की है। कोर्ट में ये दलील देकर कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने की कोशिश की है।

10. सेना में फूट डालने की कोशिश:

सोनिया गांधी के वक्त में भारतीय सेना को जाति और धर्म में बांटने की बड़ी कोशिश हुई थी। तब सच्चर कमेटी की सिफारिश के आधार पर सेना में मुसलमानों पर सर्वे की बात कही गई थी। बीजेपी के विरोध के बाद मामला दब गया, लेकिन इसे देश की सेनाओं को तोड़ने की गंभीर कोशिश के तौर पर आज भी देखा जाता है।

यह बात भी ऐतिहासिक तथ्य है कि राजनीति में सोनिया गांधी के बढ़ते असर के साथ देश में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। पहले राजीव गांधी और बाद में मनमोहन सिंह के काल में ईसाई मिशनरियों को उन इलाकों में भी गतिविधियां चलाने की इजाज़त दी गई जो आदिवासी होने के कारण संरक्षित माने जाते हैं।

नतीजा ये निकला कि बीते करीब 3 दशक में देश के तमाम आदिवासी इलाके ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंस चुके हैं। जबकि इसी दौरान हिंदू संगठनों के लिए इन इलाकों में काम करना लगभग नामुमकिन बना दिया गया।

+++

Thanks, Sir

I am not so religious.

You have sent it twice.

Speaker has not developed this for Hindus/ Indians basically.

 

I understand that as a Hindu you must be aware of the facts:

 

There is no such thing as Mahabharata, Krishna, Arjuna, Bhima, Rama, etc.

 

They were and still are Mahabharat, Krishan or Krishn (English has no words)

Or Arjun, Ram.

 

If these English have their language incomplete then they can adopt words from other language instead of spoiling names of our so respectful names.

 

They never dared to call Singh as Singha due to sharpness of Sword of Maharaja Ranjit Singh.

 

Similarly they can not dare to speak Mohammad as Mohammada, William  as Williamma, Elizabeth as Elizabetha, Bush as Busha or Bhusa.

 

 

We must start calling them with these names and they may take corrective action.

 

But whatever we say we have COWARD SLAVE's mentality.

 

We can talk, talk, talk......and talk only action will always be zero.

 

 

Due to so called TOLERANCE & SICKULAR & SLAVE MENTALITY.

 

+++

एक बहुत बड़े काण्ड की तैयारी चल रही है पूरे भारत में!

 

नीचे दिए लक्षणों में से कोई भी अगर आपने देखे है तो इस लेख को शेयर करना न भूले!

 

1. मुस्लमान आपके इलाके में पहले एक दूकान किराए पर लेता है!

2. फिर वह अपने दुसरे जानपहचान के मुसलमानों को वहीँ पर किराये पर दूकान दिलवाता है!

३. देखते ही देखते वह पूरा इलाके में सिर्फ मुस्लमान दुकानदार दिखाई देते है!!

4. फिर वहां के मुस्लमान युवक वही उसी इलाके में हिन्दू लडकियों को प्यार के झांसे में फंसाता है वो भी हिन्दू नाम रखकर ! शादी के बाद हिन्दू लड़की मुस्लमान बन जाती है !

5. जब मुसलमानों को दिखाई देता है की अब उनका उस इलाके में नियंत्रण हो चूका है अर्थात उनकी आबादी अब 30 से 40% हो चुकी है!! वह सभी मुसलमानों को हिन्दुओ से दिक्कत होने लगती है!

6. आखिर में दंगो जैसी स्तिथि पैदा हो जाती है और सभी मुस्लमान जो किराए पर दूकान चला रहे थे वह सभी किराया देना बंद कर देते है!

7. जिन हिन्दू लोगो ने पैसो के लालच में अपनी दुकाने इन मुसलमानों को किराये पर दी थी .. उन हिन्दुओ को अपनी दूकान से हमेशा के लिए हाथ धोना पड़ जाता है!!

8. सभी हिन्दुओ को इलाका खाली करना पड़ता है क्यूंकि मुसलमानों को अब हिन्दू से दिक्कत होने लगती है!

9. मंदिर के बाजू में मांस मच्छी की दुकाने खोल दी जाती है, मस्जिदे बना दी जाती है!

10. अंत में मंदिर गिरा दिया जाता है!

 

यह काण्ड दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरयाणा , राजस्थान, उत्तरप्रदेश में जोरो पर है..

 

इससे बचने का बस एक तरीका है.. मुसलमानों को जमीन किराये पर देना बंद करे!! वह मुस्लमान आपको किराया देगा 4 5 वर्षो तक उसके बाद उसपर कब्ज़ा ही करेगा!

 

Sent from my Samsung Galaxy smartphone.

Take a look around.

+++

जो लोग इंडिया को स्वतंत्र बता रहे हैं, कृपया अभिलेख दिखाएँ.

मैं नीचे अभिलेख दे रहा हूँ, जो सिद्ध करता है कि इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है और यह उपनिवेश ब्रिटिश कानूनों द्वारा शासित है.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

 

+++

http://www.aryavrt.com/muj17w19y-rupya

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

http://www.aryavrt.com/ghatak-bhartiya-smvidhan

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

सिद्धार्थ जी को नमस्ते!

सन २००१ से मैं लगातार बीमार चल रहा हूँ. पूर्ण रूप से भिक्षा पर जीवन यापन कर रहा हूँ. आप कानून की गहराइयों पर पकड़ रखते हैं. अगर मैं जेल चला जाता हूँ, तो मुझे या तो जहर दे दिया जायेगा या पागलखाने भेज दिया जायेगा. क्यों कि कोर्ट में किसी हाल में अभियोग नहीं चलने दिया जायेगा..

मुझे विश्वास है कि आप अभियोग चलवा कर उपनिवेश की धोखाधड़ी से मुक्ति दिलाने में मेरी सहायता करेंगे.

 

 

+++

शाखा प्रबंधक उनियाल जी बहुत ही सहयोगी अधिकारी हैं. बैंक ने उनके लक्षमण झूला ऋषिकेश, को विवरण भेजा है, जो सम्भवतः, जो मुझे विवरण मिला है, उसके अतिरिक्त कुछ नहीं है.

इस १५०००की ठगी में नमो के नेतृत्व में एलिजाबेथ के लुटेरों की सेना की ५ ईकाइयां स्वयं बैंक, पुलिस, जिसने, FIR नहीं लिखी, पे टीएम, खरीददार और विक्रेता सम्मलित हैं. यह ठगी लोगों को कैशलेस करने का आधुनिक तरीका है.

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि बैंक से पैसा निकलते ही सभी संचार बंद हो गये. अपने बैंक से पंजीकृत फोन ९८६८३२४०२५ से आज भी १८००४२५ से बात नहीं कर सकता. मेरा डेबिट कार्ड बंद न हो सका. मेरे ३ शिकायत न० मुझ तक ३ दिन स्वयं बैंक SMS न कर सका.

इस कैशलेस अभियान में मेरे FDR भी निकल जायेंगे.

मैं तो लुट ही चुका हूँ. अब उपनिवेशवासी अपने बैंक में जमा धन की खैर मनाएं.

 

`१०/०५/१७

+++

http://www.aryavrt.com/yog-therapy

 

++++++

संत आशाराम बापू एक लड़की के आरोप पर pocso में निरुद्ध हैं. क्या आप इसी अपराध के अधीन उपनिवेश का विरोध कर सकते हैं?

+++++

जो दलित और पिछड़ा समाज शिक्षक ब्राह्मणों का भिक्षा देकर भरण पोषण करता था और बदले में जो ब्राह्मण तथाकथित दलित समाज की संतति को सम्प्रभु बनाता था, आज वही दलित और पिछड़ा समाज ब्राह्मणों का शत्रु बन गया है. लेकिन जिन लोगों ने उनके सम्प्रभु बनाने वाले गुरुकुलों को नष्ट कर, उनकी सकल सम्पदा लूट कर और प्रताड़ित कर उन्हें दास बना लिया है, उनके विरुद्ध वे कुछ नहीं बोल सकते!

 

 

http://www.aryavrt.com/muj17w10y-pension

+++

http://www.aryavrt.com/muj16w47ay-smprabhu

+++

Chapter VI. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php

+++

२०वीं सदी का मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, पाकिस्तान जिसकी लाश पर बन सकता था, ने इंडिया को ईसाइयत और इस्लाम को सौंप दिया और हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का अपहरण कर गया. निम्नलिखित अभिलेख के अधीन उपनिवेशवासी आज भी ब्रिटिश उपनिवेश की प्रजा हैं. १९४७ से आज तक उपनिवेशवासी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने का साहस भी गवां बैठे हैं. क्योंकि उपनिवेश का विरोध राज्य के विरुद्ध, Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन, मृत्युदंड का अपराध है.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

 

+++

February 5, 2017

On Thursday, February 2, 2017 4:43 PM, "chelvapila@aol.com" <chelvapila@aol.com> wrote:

Sri Rama Jayam

Dear Friends,

                                 Goebels said, a lie told repeatedly will appear like truth, Hitler said, if you have to lie, tell a big lie, so people will think that there must be truth in it.

India had the experience of suffering from both sort of lies, nothing good in Hinduism, all things good came from West, there was no India until British came, and then in order to support secularism and vote banks, some more were manufactured, India was a Junglee until Mohammedans arrived who taught Advaitha to Sankaracharya, introduced music and cooking via Kawali, and Biriyani. So Junglee Indians were told to shut up, instead of protesting breaking up their country to pieces, they were to admire composite culture that these do gooders brought.

Such propaganda is not limited to India but to an extent starting affecting US too especially since 9/11 attack which helped apologists for radical Islamic terrorism multiply, though compared to India, to much less  extent.

One instance you may note below. Leftist media in US went drum beating against restriction of immigrants from so far seven terror prone Moslem majority countries, using a tear jerking story, only problem being that news is a lie, exposed by another Muslim that too an Imam who voted for Trump !

Best wishes,

                                                                                                G V Chelvapilla

 

+++

(1) अगर आपका नाम असद ओवैसी है

अगर आपका नाम असद ओवैसी है तो आपको भगवान राम की माता कौशल्या को वेश्या कहने का अधिकार है, हिंदुओं को पंद्रह मिनट में ख़त्म करने की चुनौती देना आपकी मर्दानगी है...अगर आपका नाम एम एफ हुसैन है तो आप को माँ सरस्वती के नंगे चित्र बनाने का अधिकार ही नहीं है, आपको आपकी ऐसी कलात्मकता के लिए भारत का उच्च नागरिक सम्मान भी मिलेगा...अगर आपका नाम जायरा वसीम है तो देश की हिन्दू जनता आपकी फिल्म देख कर आपको स्टार बना देगी...और अगर आपको इस्लामिक कट्टरपंथियों ने बुरा भला कहा तो सिर्फ इतना कहा जायेगा कि बेचारी 16 साल की बच्ची को मत छेड़ो...बाकी किसी को उसमे कट्टरवाद नज़र नहीं आएगा...

 

 

पर अगर आपका नाम कमलेश तिवारी है तो आपके पैंगबर के बारे में कुछ भी कहने पर आपका सर कलम करने की मांग एक वाजिब मांग है...आपका नाम आशु परिहार है तो आपको जान बचा कर छुपना पड़ेगा...

भारत में आपको अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता है, बस आपका नाम जायरा या सलमा या हुसैन होना चाहिए या आप राम या सीता या दुर्गा को गालियाँ दे रहे हों...आपको कुछ भी बोलने की आज़ादी है...जब तक आप मेरी मनपसंद बात कर रहे हों...

 

(2)  मस्जिदों मे भरा है कालाधन !

!

मंदिरो की दक्षिणा सरकार में जमा करने की मांग रखनेवाले सेक्युलर और उसकी न्यूज बार बार दिखानेवाली मिडीया चॅनेल्स देश में q 3 लाख मदरसे और मस्जिद है ।

हमारे कुछ प्रश्न मिडीया के लिए

1) कितने मदरसे मस्जिदों का बँक अकौऊंट है ?

2) क्या सभी ट्रस्ट रजिस्टर किये है ?

3)क्या ट्रस्ट के पैनकार्ड बनवाये है ??

4) क्या वक्फ बोर्ड को सभी मस्जिदों का सालाना हिसाब देकर उसे पब्लिक में दिखाया जाता है ?

5) क्या मदरसे और मस्जिदों का ऑडिट रिपोर्ट

पब्लिश होता है ??

6) कितने मस्जिदों के अंदर जाकर हिसाब किताब

मिडीयाने माँगा ?

7) इन मस्जिदों और मदरसोने जमा हुए धन से आजतक कितने कॉलेज अपस्ताल पार्क सड़क एम्बुलन्स या देश के सभी नागरिकों का फायदा हो ऐसे काम किए ?

हर मस्जिद महीनें में 1,00,000 ₹ का काला धन जमा हुआ तो

₹ 1,00,000 × 3,00,000 =

30,00,00,00,000 तीन हजार करोड़ हर महीने का तो 12 महीनो का 32 हजार करोड़

8 नवंम्बर की रात से अजमेर दर्गा जामा मस्जिद हाजी अली और देश के सभी मस्जिद और मदरसो का काल धन ट्रक टेम्पो में भर भर के बाहर आया है कितने मिडीया न्यूज चॅनेल्स ये सच्चाई दिखने की हिम्मत करते है ??

इस मेसेज को शेअर करे काला धन पकड़वाए ।

 

(3) संस्कृत का विरोध करने वाले

 

 संस्कृत का विरोध करने वाले एक एक कर पढे कि संस्कृत किस तरह भारत की नीव है ...

इसे हटाने का मतलब पूरा भारत एक झटके मे समाप्त ------

 

विभिन्न संस्थाओं के संस्कृत ध्येय वाक्य---

 

भारत सरकार- - सत्यमेव जयते

लोक सभा- - धर्मचक्र प्रवर्तनाय

उच्चतम न्यायालय- - यतो धर्मस्ततो जयः

आल इंडिया रेडियो -सर्वजन हिताय सर्वजनसुखाय

 

दूरदर्शन - सत्यं शिवम् सुन्दरम

गोवा राज्य सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।

भारतीय जीवन बीमा निगम- - योगक्षेमं वहाम्यहम्

डाक तार विभाग - अहर्निशं सेवामहे

श्रम मंत्रालय- - श्रम एव जयते

भारतीय सांख्यिकी संस्थान- - भिन्नेष्वेकस्य दर्शनम्

थल सेना- - सेवा अस्माकं धर्मः

वायु सेना- - नभःस्पृशं दीप्तम्

जल सेना- - शं नो वरुणः

मुंबई पुलिस- - सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय

हिंदी अकादमी - अहम् राष्ट्री संगमनी वसूनाम

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञानं अकादमी -हव्याभिर्भगः सवितुर्वरेण्यं

भारतीय प्रशासनिक सेवा अकादमी- - योगः कर्मसु कौशलं

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग- - ज्ञान-विज्ञानं विमुक्तये

-नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन - गुरुः गुरुतामो धामः

-गुरुकुल काङ्गडी विश्वविद्यालय-ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत

इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय - ज्योतिर्व्रणीततमसो विजानन

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय- : विद्ययाऽमृतमश्नुते

आन्ध्र विश्वविद्यालय- - तेजस्विनावधीतमस्तु

बंगाल अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय,

शिवपुर- - उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत

गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय -आ

-नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः

संपूणानंद संस्कृत विश्वविद्यालय- - श्रुतं मे गोपय

श्री वैंकटेश्वर विश्वविद्यालय- - ज्ञानं सम्यग् वेक्षणम्

कालीकट विश्वविद्यालय- - निर्मय कर्मणा श्री

दिल्ली विश्वविद्यालय- - निष्ठा धृति: सत्यम्

केरल विश्वविद्यालय- - कर्मणि व्यज्यते प्रज्ञा

राजस्थान विश्वविद्यालय- - धर्मो विश्वस्यजगतः प्रतिष्ठा

पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय- - युक्तिहीने विचारे तु धर्महानि: प्रजायते

वनस्थली विद्यापीठ- सा विद्या या विमुक्तये।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्-विद्याsमृतमश्नुते।

केन्द्रीय विद्यालय- - तत् त्वं पूषन् अपावृणु

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड - असतो मा सद् गमय

-प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम - कर्मज्यायो हि अकर्मण:

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर -धियो यो नः प्रचोदयात्

गोविंद बल्लभ पंत अभियांत्रिकी महाविद्यालय, पौड़ी -तमसो मा ज्योतिर्गमय

मदन मोहन मालवीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय,गोरखपुर- - योगः कर्मसु कौशलम्

भारतीय प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय, हैदराबाद- संगच्छध्वं संवदध्वम्

इंडिया विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय विधि विद्यालय- धर्मो रक्षति रक्षितः

संत स्टीफन महाविद्यालय, दिल्ली - सत्यमेव विजयते नानृतम्

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान- - शरीरमाद्यं खलुधर्मसाधनम्

विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर -योग: कर्मसु कौशलम्

मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,इलाहाबाद- - सिद्धिर्भवति कर्मजा

बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी -ज्ञानं परमं बलम्

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर - योगः कर्मसुकौशलम्

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई - ज्ञानं परमं ध्येयम्

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर -तमसो मा ज्योतिर्गमय

-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई -सिद्धिर्भवति कर्मजा

-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की - श्रमं विना नकिमपि साध्यम्

भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद -विद्या विनियोगाद्विकास:

भारतीय प्रबंधन संस्थान बंगलौर- - तेजस्वि नावधीतमस्तु

भारतीय प्रबंधन संस्थान कोझीकोड - योगः कर्मसु कौशलम्

सेना ई एम ई कोर - कर्मह हि धर्मह

सेना राजपूताना राजफल- -- वीर भोग्या वसुन्धरा

सेना मेडिकल कोर- --सर्वे संतु निरामया ..

सेना शिक्षा कोर- -- विदैव बलम

सेना एयर डिफेन्स- -- आकाशेय शत्रुन जहि

सेना ग्रेनेडियर रेजिमेन्ट- -- सर्वदा शक्तिशालिं

सेना राजपूत बटालियन- -- सर्वत्र विजये

सेना डोगरा रेजिमेन्ट -- कर्तव्यम अन्वात्मा

सेना गढवाल रायफल- -- युद्धया कृत निश्चया

सेना कुमायू रेजिमेन्ट- -- पराक्रमो विजयते

सेना महार रेजिमेन्ट- -- यश सिद्धि

सेना जम्मू काश्मीर रायफल- - प्रस्थ रणवीरता

सेना कश्मीर लाइट इंफैन्ट्री- -- बलिदानं वीर लक्षयं

सेना इंजीनियर रेजिमेन्ट- - सर्वत्र

भारतीय तट रक्षक-वयम् रक्षामः

सैन्य विद्यालय -- युद्धं प्र्गायय

सैन्य अनुसंधान केंद्र- -- बालस्य मूलं विज्ञानम

- - - - - - - - - -

सिलसिला यहिं खतम नही होता,

विदेशी भी हमारे कायल हैं देखो जरा

नेपाल सरकार- - जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी

इंडोनेशिया-जलसेना - जलेष्वेव जयामहेअसेह राज्य (इंडोनेशिया) -

पञ्चचित

कोलंबो विश्वविद्यालय- (श्रीलंका) - बुद्धि: सर्वत्र भ्राजते

मोराटुवा विश्वविद्यालय (श्रीलंका) - विद्यैव सर्वधनम्

पेरादेनिया विश्वविद्यालय - सर्वस्य लोचनशास्त्रम्

- - - -

संस्कृत और संस्कृति ही भारतीयता का मूल है .. भारत का विकास इसी से संभव

है- तो कीजिये अपने गौरव को याद और सिर उठाकर कहिये "हम भारतीय हैं और संस्कृत हमारी पहचान है ,हमें अपने गौरव का अभिमान है।"

भारत माता की जय..

जयहिंद..

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

 

(4)  संस्कृत बारे कुछ रोचक तथ्य

 

 

संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर

आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।

 

आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ

ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय

का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे;;

 

.1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी

माना जाता है।

 

2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक

भाषा है।

 

3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले

संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी।

 

4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती

पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है।

 

5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से

ज्यादा शब्द है।

वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102

अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है।

 

6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक

अद्भुत खजाना है।

जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से

ज्यादा शब्द है।

 

7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो

पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन

पर नासा रिसर्च कर रहा है।

 

8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में

संस्कृत को Computer Software

के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था।

 

9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत

में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो

जाता है।

 

10. संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी

भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी

मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है।

 

11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार

संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी,

मधुमेह,कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो

जाएगा।

संस्कृत में बात करने से मानव शरीरका

तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे

कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश

(PositiveCharges) के साथ सक्रिय

हो जाता है।

 

12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार

है यह एकाग्रता को बढ़ाती है।

 

13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल

संस्कृत में ही बात करते है।

 

14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था,

जो 1970 में शुरू हुआ था।

 

आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण

उपलब्ध है।

 

15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो

की मांग है।

जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई

जाती है।

 

16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब

वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे

तोउनके वाक्य उलट हो जाते थे।

इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल

जाता था।

उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया

लेकिन हर बार यही समस्या आई।

 

आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज

भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे

हो जाने पर भी अपना अर्थ नही

बदलते हैं।

जैसे

अहम् विद्यालयं गच्छामि।

विद्यालयं गच्छामि अहम्।

गच्छामिअहम् विद्यालयं ।

उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

 

17. आपको जानकर हैरानी होगी कि

Computer द्वारा गणित के सवालो को

हल करने वाली विधि यानि Algorithms

संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में।

 

18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए

जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super

Computers संस्कृतभाषा पर आधारित

होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

 

19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता

है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है।

इसलिए London और Ireland के कई

स्कूलो में संस्कृत को Compulsory

Subject बना दिया है।

 

20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा

देशो की कम से कम एक University

में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत

पढ़ाई जाती है।

संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर

आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।

 

 

(5) सबसे बड़ी ख़बर :

 सबसे बड़ी ख़बर : मुस्लिम देश कुवैत ने ट्रंप की तरह 5 मुस्लिम देशों पर वीजा का बैन लगाया !!

 

आपको बजट के बाद आज की सबसे बड़ी ख़बर बताते हैं , पूरा का पूरा मुस्लिम देश कुवैत भी अब ट्रम्प की राह पर चलने लगा है  । ग़ौरतलब है कि कुवैत ने पाँच मुस्लिम देशों के वीज़ा पर बैन लगा दिया है , इससे पहले ट्रम्प द्वारा सात मुस्लिम देशों के वीज़ा पर बैन लगाने के बाद दुनिया भर के मुस्लिमों और तथाकथित बुधिजीवियों ने ट्रम्प की आलोचना की थी । लेकिन  कुवैत के इस फ़ैसले में  अब उनकी हालत ख़राब कर दी है

 

Chandar Kohli

Feb 3 (1 day ago)

 

to

 

 

Bhalchandra Thattey

Feb 3 (1 day ago)

 

to Pramod, wickedhimanshu, Ram, Rachna, Rakesh, Singh, Col, Abridged, Vasunder, Acharya, Ravi, Thomas, me, Shrikant, Tuli, Shrikant, Tapan, Trishool, Tribhuwan, Yahoo, Panun, Yahoogroups, Yahoogroups, Salem, Shobhan

+++

एलिजाबेथ ने भारतीय संविधान के अनु३९(ग) का आदर करते हुए अनु३१ मिटाया. जमीदारी, सोना, ₹, सहारा लूटा. टाटा व रिलायंस आदि लुटेंगे. थोमस मुनरो (Thomas Munro) ने मद्रास रेजीडेंसी में साक्षरता जानने के लिए १८२३ में सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ १००% साक्षरता है.

+++

http://www.aryavrt.com/muj16w43ay-aazaadika-shankhnad

 

+++

नमस्ते चोमल जी!

 

+++

२३/०१/१७

 

 

+++

 

युपी वालो वोट देते समय याद रहे...

 

 

सेना के शहीद सैनिकों को 5 लाख और अकेले अखलाक को 1 करोड़ याद रखना...

यूपी का रेप में नंबर 1 होना याद रखना...

यूपी का हत्याओं में नंबर 1 होना याद रखना...

यूपी में पत्रकारों की हत्या याद रखना...

रामपुर तिराहा मे 40 महिलाओ से रेप याद रखना...

कैराना और अलीगढ में मुस्लिम अत्याचार से हिन्दुओ का पलायन याद रखना...

गौ हत्यारे को करोड़ो की सौगात और फ्लैट याद रखना...

रवि सिसोदिया को जेल में ही मरवाना याद रखना...

किसानों की बदहाली याद रखना...

मथुरा का जवाहरबाग़ याद रखना...

बदायूं, मोहनलालगंज और बुलंदशहर का हाईवे याद रखना...

भू-माफिये याद रखना....

सरकारी भर्ती में धांधली याद रखना...

नक़ल करने की आज़ादी से घटिया हुई शिक्षा व्यवस्था याद रखना...

यूपी की बेरोजगारी याद रखना...

शामली आदि जगह हुए हिन्दुओं पर अत्याचार याद रखना...

4 वर्षों में 500 से अधिक दंगे याद रखना...

बिजली का मुद्दा याद रखना...

दलितों के दिल में हिन्दू धर्म के प्रति घृणा फैलाने वाले भी याद रखना...

सैफई की आलीशान पार्टी और बॉलीवुड के ठुमके याद रखना...

नेताजी का करोड़ी जन्मदिन याद रखना...

अधूरी मेट्रो, अधूरा स्टेडियम याद रखना...

यादव सिंह की धांधलेबाजी याद रखना...

आज़म खान के बेतुके और हिन्दू विरोधी व भारत विरोधी बयान याद रखना...

 

बाकि तुमसे मुझे उम्मीद तो कम ही है...

 

+++

मुस्लिम प्रत्याशी द्वारा खुद को धर्म निरपेक्ष व सेकुलरवादी कहना क्या इस्लाम के साथ बेईमानी नही है ??

 

कुरान में वर्णित एक ही धर्म है इस्लाम, तो फिर धर्म निरपेक्ष क्या है?

 

विभिन्न राजनैतिक दलों ने अपने पार्टी में जिन जिन मुसलमानों को टिकट दिया है क्या वह मुस्लिम नेतागीरी में भारत वासियों को और अपने ही इस्लाम को धोखा नहीं दे रहे हैं ?

 

उन मुस्लिम नेताओं से कोई पूछे क्या इस्लाम की किसी भी किताब में धर्म निरपेक्ष शब्द आया है ?

 

यह सरासर झूठ बोल रहे हैं, इस्लामिक मान्यता में बिना संदेह किये कुरआन को खुदाई कलाम मानना प्रथम शर्त है।

अल्लाह का कहना है दींन यानि धर्म सिर्फ इस्लाम ही है दूसरा कोई धर्म ही नहीं ।

 

जो मायावती अपने को बोधिष्ट मानती हैं वह इन इस्लाम वालों से पूछे की क्या तुम इस्लाम वाले हमारे धर्म को भी धर्म मानते हो ? अगर वे हाँ कहे तो कुरान के खिलाफ है।

 

फिर जब इस्लाम धर्म को निरपेक्ष नहीं मानता । तो इस्लाम के मानने वाले अपने को धर्म निरपेक्ष क्यों और कैसे कह सकते हैं भला ?

 

यूपी वालों सावधान रहना इन मुसलमानों से अपने को धर्म निरपेक्ष बताकर आप से वोट लेकर विधान सभा में बैठ जायेंगे, उसके बाद अपना इस्लामी और कुरानी कानून आप पर लागु करेंगे 5 साल तक आप कुछ भी नही बिगाड़ सकते उनका।

इसलिए पहले से सावधान रहो अपने पावँ में अपने आप ही कुल्हाड़ी ना मार लेना।

+++

एक सिलेंडर की कीमत 551 रुपये, इंडियन आयल से बैंक में वापस जमा - 129 रूपये,

 

यानी, 551 - 129= 422 रूपये।

 

इसके पहले हमें सिलेंडर मिलता था 418 रूपये में,

 

मतलब कुल 4 रूपये का   नुकसान।

 

 

अब पता ये लगाना है की मेरे द्वारा जमा पैसा ही मुझे वापस मिला। तो फिर सब्सिडी का पैसा कहाँ गया, बल्कि पहले से ज्यादा पैसे मुझे देने पड़े।

 

 

ये कौन सा गणित है...? पूरा देश सोच रहा है की उसे सब्सिडी का पैसा मिल रहा है, पर जनाब ये तो हमारा पैसा ही हमें मिल रहा है।

 

 

मुद्दा नम्बर :-02

 

देश में पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है, उसका पूरा प्रोसेस इस प्रकार है :-

 

 

कच्चे तेल की वर्तमान कीमत = 50 डॉलर प्रति बेरेल।

 

(जहाँ,  $1 = 63/-

 

और 1 बेरेल = 159 लीटर )

 

 

यानी, $50 = Rs.3150/-

 

 

1 लीटर कच्चा तेल भारत खरीदता है (3150/159) =19.80 रुपयों में।

 

 

1 लीटर पेट्रोल बनाने के लिए लगने वाला कच्चा तेल - 

 

0.96 लीटर @19.80/- = 19.00/-

 

 

अब कच्चे तेल में से एक लीटर पेट्रोल बनाने की फिक्स्ड कीमत होती है 6 रूपये (ट्रांसपोर्टेशन मिलाकर)।

 

 

यानी, 19.00 रूपये + फिक्स्ड कीमत, 6 रूपये = 25.00 रूपये में एक लिटर पेट्रोल बनता है।

 

 

अब उसमे केंद्र सरकार का टेक्स लगता है, 25% यानी 6 रूपये।

 

यानी 25 + 6 = 31 रूपये।

 

 

और उपर से फिर राज्य सरकार के टेक्स जैसे VAT,

 

जिसे हम एवरेज 15% गिने तो होते है 5 रूपये यानी कुल मिलाकर होते है 36 रूपये।

 

 

और आखिर में पेट्रोल पंप डीलरों को पर लीटर 90 पैसे कमिशन दिया जाता है तो होते है कुल 37 रूपये।

 

 

लेकिन फिर भी आज हमे 71.60 rs/- प्रति लीटर में पेट्रोल मिल रहा है॥

 

 

कृपया कड़ी मेहनत से प्राप्त हुई ये जानकारी देश के हर एक नागरिक तक पहुँचाने की कोशिश करे ।

 

 

शान है या छलावा...।

 

 

पूरे  भारत  में एक ही  जगह ऐसी  है  जहाँ खाने  की चीजें  सबसे सस्ती है ।

 

 

चाय = 1.00

 

 

सुप = 5.50

 

 

दाल= 1.50

 

 

खाना =2.00

 

 

चपाती  =1.00

 

 

चिकन= 24.50

 

 

डोसा = 4.00

 

 

बिरयानी=8.00

 

 

मच्छी= 13.00

 

 

ये  सब चीजें  सिर्फ  गरीबों के  लिए  है  और ये सब Available है  Indian Parliament Canteen में।

 

 

और  उन  गरीबों की  पगार है  80,000 रूपये  महीना वो  भी  बिना income tax के ।

 

 

आपके Mobile में जितने  भी  नम्बर save है  सबको forward करें ताकि  सबको  पता  चले

 

कि यही कारण  है  कि  इन्हें लगता है

  कि जो  आदमी  30 या 32 रूपये  रोज  कमाता है  वो गरीब  नहीं हैं।

 

 

Jokes तो हर रोज Forward करते  हैंआज  इसे  भी Forward करें।⁠⁠⁠⁠

 

+++

e: ⁠⁠⁠बाईबिल और ईसाईयत एक कूटरचित तथ्य,जो क्रूरतम सत्य है----

ईसाईयत और बाईबिल वेटिकन का वो चेहरा है जिसे बस यूँ कहा जा सकता है कि एक कूटरचित तथ्य जो मानवता हेतु सिर्फ क्रूरतम सत्य है।

 

सत्ताईस विभिन्न पुस्तकों से संग्रहित, अनेक लेखकों द्वारा लिखी गई, हजारों विरोधाभासों से पूर्ण और मात्र ५ वोट की अधिकता से चुनी गई, ऑर्थिक कौंसिल में ३९७ ईस्वी में स्वीकृत- बाईबिल न्यू टेस्टामेंटअर्थात बाईबिल नव विधान, भला किस तरह प्रेरणादायक व सत्य ज्ञान से ओत-प्रोत और उत्तम हो सकती है?

 

बाईबिल न्यू टेस्टामेंटके वर्तमान स्वरूप को तो १५४६ ईस्वी में वेटिकन ने वैधता प्रदान की है।

(एल.गार्डनर, ‘ब्लड ऑफ दी होली ग्रेल’ , पृष्ठ ५०)

 

यहाँ ये जान लेना जरूरी रहेगा कि बाईबिल का न्यू टेस्टामेंट यानि नव विधान नामक हिस्सा ईसा मसीह के बाद का लिखितहै, जिसे ईसा के तथाकथित शिष्यों ने लिखा था, इसमें ईसा (यीशु) की जीवनी, उपदेश और शिष्यों के भी कार्य लिखे गये हैं।

 

बाईबिल की मूलभाषा अरामी’ { Aramaic language एक सेमिटिक भाषा है जो मध्यपूर्व और उसके उत्तरी-केन्द्रीय भाग में पिछले ३००० सालों से बोली जा रही है। यह कई प्राचीन यहूदी तथा इसाई ग्रंथों की भाषा है और माना जाता है कि ईसा मसीह की मातृभाषा आरामाईक ही थी और अधिकतर बोलचाल की प्राचीन ग्रीक थी, इसमें ख़ास तौर पर चार शुभसंदेश (सुसमाचार) हैं जो ईसा की जीवनी का उनके चार शिष्यों द्वारा वर्णन है : मैथ्यू, लूक, यूहन्ना और मार्कोस .!!

 

दुनिया में अभी तक ज्ञात ग्रीक / यूनानी बाईबिल की प्राचीनतम हस्तलिपियों का विवरण इस प्रकार है

(१) वाटिकानुस (चौथी सदी से रोम मे सुरक्षित)

 

(२) सिनाइटिकुस (चौथी सदी की ब्रिटिश म्यूजियम में)

 

(३) एलेक्सैंड्रिकुस’ (पाँचवीं सदी की, ब्रिटिश म्यूजियम)

 

(४) एफ्राएम’ (पाँचवीं सदी की पेरिस का लूग्र म्यूजियम)

 

(यहाँ यह भी स्पष्ट कर दूं कि एफ्राएमवो गुमा हुआ यहूदी कबीला है जिसे अब जेनेटिक्स और एंथ्रोपोलॉजी के अकाट्य सबूतों द्वारा पठानों पश्तूनों का आफरीदी या अफरीदी कबीला माना जाता है!)

 

इनके अतिरिक्त १५ संपूर्ण तथा ४००० से अधिक आंशिक न्यू टेस्टामेंट की यूनानी हस्तलिपियाँ प्राप्त हैं जिनका लिपिकाल सन् २०० ई. तथा ७०० ई. के बीच है।

 

नव विधान / न्यू टेस्टामेंट की प्राचीनतम हस्तलिपि सन २१४ ई. की पैपीरस चेस्टर बीरीहै और बाईबिल के अंग्रेजी भाषा के निम्नलिखित अनुवाद सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं

ऑयॉराइज़द वर्शन अथवा किंग जेम्स बाइबिल (१८११ई.)

हुए वर्शन (१६०९ ई.)

काफ्राटर्निटी वर्शन (१९४१ ई.)

आर.ए. नीक्स बाइब्रिल (१९४४ ई.)

न्यू इंग्लिश बाइबिल (१९६१ ई.)

 

उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में प्रोटेस्टैंट मिशनरी कैरे ने बाइबिल का हिंदी अनुवाद तैयार किया था; “धर्मशास्त्रके नाम से इसके बहुत से संस्करण छप चुके हैं और उसमें संशोधन भी होता रहा है।

 

मुख्यतया वेटिकनी ईसाई भी कसाई की तरह लफ्फाज़ी और मान्यताओं का खेल रच कर बाईबिल को स्थापित किये थे , वो भी यही कहते हैं कि बाइबिल ईश्वर प्रेरित (इंस्पायर्ड) है किंतु उसे मानवीय रचना मात्र नहीं कहा जा सकता, ‘ईश्वर/योहोवाने बाइबिल के विभिन्न लेखकों को इस प्रकार प्रेरित किया है कि वे ईश्वर कृत होते हुए भी उनकी अपनी रचनाएँ भी कही जा सकती हैं, योहोवा/ईश्वर ने बोलकर लेखकों से बाइबिल नहीं लिखवाई,हाँ वे लेखक अवश्य ही योहोवा/ईश्वर की प्रेरणा से लिखने में प्रवृत्त हुए किंतु उन्होंने अपनी संस्कृति, शैली तथा विचारधारा की विशेषताओं के अनुसार ही उसे लिखा है अत: बाइबिल ईश्वरीय प्रेरणा तथा मानवीय परिश्रम दोनों का सम्मिलित मानवीय परिणाम है, मानव मात्र के लिये

यही बातें इस्लाम वाले कसाई भी कहते हैं कि कुरान और इस्लाम मानव मात्र के ही लिये है।

 

इस पहले भाग में बाईबिल रचना को संक्षिप्त में बतलाने के बाद दूसरे भाग में ईसाई - ईसाईयत और वेटिकन समेत चर्चों के अमानवीय - नरसंहारी कारनामों पर चर्चा होगी , तब तक सब जय जय है।

                        वन्दे

+++

बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान

+++

परमात्मा ने मानव बनने को मनुर्भव: का उपदेश दिया. वेद में. अब यह मानव बनने की जगह हिन्दू, मुस्लिम, व सिख, ईसाई, बनने लगे जो झगड़े का कारण बन गया। काश, यह अगर अपने को मानव कहलाते, तो सभी प्रकार के ईर्षा द्वेष वैमनस्यता, झगड़ा फसाद, रंजिश,राग आपसी मतभेद जितने भी अमानवीय कार्य है सब समाप्त हो जाता।

ऋषि दयानंद जी की मान्यता यही है की मानव वही है जो दूसरों के सुख दुःख हानी लाभ का समझने वाला हो ।

सही अर्थों में एक मानव बनने पर सभी समस्यायो का समाधान हो जाता है । पर हम अक्लमंद कहलाकर भी समस्यायों में घिरे रहते हैं, अपने को छोड़ दूसरों को जीने देना नही चाहते। मानव तो वही हैं जो प्राणी मात्र का भला चाहे, प्राणी मात्र के कल्याण के लिए काम करें। जब यही मानव किसी मजहबी दुकानदारों के चंगुल में फंस जाता है तो मानवता को ताक पर रख अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए प्राणों की बाजी तक लगा देता है।

आज अनेकों आँखों देखा हाल हमारे सामने मौजूद हैं लोग मजहबी बन जाने पर दूसरों को अपना समझने के लिए तैयार ही नहीं, और उन्हें दुनिया से मिटाने पर तुले रहते हैं। आज धरती पर अनेक प्रमाण हमारे और आपके सामने मौजूद हैं। इसे देख कर भी लोग कुछ शिक्षा लेने को तैयार नही। कारण मजहबी शिक्षा भी उन्हें यही सिखाया है, देखें न बगदादी के गुररें किस प्रकार कुरानी आयतों को बोल बोल कर लोगों का सर कलम कर रहे हैं, और उसे ही वह धर्म और धार्मिक शिक्षा मान रहे हैं।

अभी पिछले दिनों देखा है दुनिया के लोगों ने बांग्लादेश में जो लोग कुरान सुना पाया उसके प्राण बचे, और जो लोग कुरान नही सुना सके उन्हें मौत के घाट उतरा गया। यही है मजहबी शिक्षा, जिस आतंकवादी को पकड़ा गया उसने बताया मैं डॉ0 ज़ाकिरनाईक से प्रेरणा लिया हूँ।

जो ज़ाकिरनाईक खुले आम मानव कहलाने वालों को ही मुस्लमान बना रहा था।

ज़रूर आप लोगों ने देख लिया होगा की धर्म और मजहब में क्या भेद है, मानवों में और हिन्दू मुस्लिम ईसाइयों में क्या भेद है? अगर हम अब भी नहीं समझें तो, मानवता की रक्षा नही हो सकती, तो आएं हम इन हिन्दू मुस्लिम और ईसाइयों के दुकान से निकलें और मानवता की रक्षा करें। धन्यवाद के साथ महेंद्रपालआर्य ,

 3 जनवरी 017

यह कहना सरासर गलत है कि परमेश्वर ने अपना ज्ञान कुछ ऋषियों को दिया. परमेश्वर पक्षपाती नहीं है. सच तो यह है कि “Shruti –directly revealed by God” सम्प्रभु मनुष्य का अपमान है. परमेश्वर जन्म के साथ सबको चक्रों के साथ वीर्यवान बना कर भेजता है.

मनुष्य निर्मित किसी भी वस्तु के प्रयोग की विधि जानने के लिए विक्रेता साथ में एक पुस्तिका देता है. गणक (Computer) में तो सारी विधि उसी गणक में ही होती है.

सच जानने के लिए मनुष्य को वीर्यवान ब्रह्मचारी बनना पड़ेगा. वेदों के ज्ञान विज्ञान को जानने के लिये मनुष्य को वीर्य रक्षक यानी ब्रह्मचारी बनना पड़ेगा| तत्पश्चात कुण्डलिनी भेदन (जागरण) या योग द्वारा ब्रह्मकमल तक पहुंचना पड़ेगा|

वीर्य किसी दुकान पर उपलब्ध नहीं है. एक बार नष्ट हो गया तो पुनः नहीं मिल सकता.

परमात्मा ने सहस्रसार यानी ब्रह्मकमल में प्रकृति पर नियंत्रण और मानव शरीर के प्रयोग की सारी विधि दी है. इसी का नाम वेद है. विधि को पढ़ने हेतु शरीर के ऊर्जा चक्रों में देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा दी है. मानव शरीर में देवनागरी लिपि संस्कृत भाषा के अतिरिक्त धरती की कोई लिपि या भाषा नहीं है.

देवनागरी लिपि के सभी अक्षर साधक को चक्रों के पंखुडियों में लिखे दिखाई देते हैं और उन अक्षरों का उच्चारण भी सुनाई पड़ता है. अतएव यदि मानव अपना कल्याण चाहे तो भावी पीढ़ी को निःशुल्क गुरुकुलों में पढ़ाये

लिपि और उच्चारण जान लेने के बाद साधक ब्रह्मकमल में वेदों के रूप में लिखित, मात्र अपने शरीर की ही नहीं अपितु प्रकृति और ब्रह्माण्ड के प्रयोग की सारी विधि सीख लेता है.

सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने उपनिवेशवासियों से वैदिक धर्म की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा व गायत्री को मिटा दिया है, जो हमारे संतों और कथा वाचकों को दिखाई नहीं देता. फिर भी वे बलि के बकरे की भांति उपदेश देते हैं कि वैदिक सनातन धर्म मिट ही नहीं सकता!

 

+++

https://www.youtube.com/watch?v=8ZWG5zqWeG8

Robert Spencer

+++

https://www.youtube.com/watch?v=uNXELQK8_64

Anwar Shekh

+++

@narendramodi

मार्क्स का समाजवाद गया, एलिजाबेथ के दास नमो का काला धन आया है.

 

+++

डाक्टर साहब को नमस्ते!

देवनागरी में विचार रखने के लिए मुझे क्षमा करें;

सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही आक्रांता अंग्रेजों ने भारतीय स्वतंत्रता (उपनिवेश) अधिनियम, १९४७ को ब्रिटिश संसद में १८ जुलाई १९४७ को पास किया था, जिसके अनुसार इंडिया को स्वतंत्रता नहीं दी गई, अपितु इंडिया का दो स्वतंत्र? उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया।

ध्यान दें! यह अधिनियम ब्रिटिश संसद में बना है और इसमें परिवर्तन का अधिकार भी ब्रिटिश संसद को ही है. यानी कि इंडिया व पाकिस्तान के उपनिवेशवासी आज भी ब्रिटेन के स्थायी दास (बलिपशु) हैं.

आर्यावर्त सरकार जानना चाहती है कि ब्रिटेन के पास इंडिया को २ भागों इंडिया व पाकिस्तान में बाँटने का अधिकार कैसे था? इंडिया में आज भी सारे ब्रिटिश कानून जस के तस क्यों लागू हैं? इंडिया एलिजाबेथ के राष्ट्रकुल (dominion) में क्यों है?

आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों, ईसाइयत और इस्लाम, को इंडिया में रहने का अधिकार कैसे है? अज़ान, देने और कत्ल करने के उपदेश देने का अधिकार कैसे है?

उपनिवेश विरोध यानी आज़ादी की मांग तो मृत्युदंड का अपराध है. (Chapter VI. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php)

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) ईसाईयों व मुसलमानों को उपनिवेशवासियों को कत्ल करने का, नारियों के बलात्कार का और इंडिया को दार उल इस्लाम बनाने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) किसी उपनिवेशवासी को सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार नहीं देता|

लेकिन उपनिवेशवासी आज भी इनके इंडिया में रखे जाने पर, चर्च, बपतिस्मा, मस्जिद, अज़ान, खुत्बों, हज अनुदान, ईशनिंदा के बदले में ईमामों के वेतन आदि पर आपत्ति नहीं कर सकते.

बपतिस्मा व अज़ान ईशनिंदा है. चर्च/मस्जिद से ईसाई/मुसलमान अविश्वासियों को कत्ल करने का उपदेश देता है|

बाइबल, बपतिस्मा और चर्च के विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४)

ईसाई बपतिस्मा को अस्तित्व के लिए आवश्यक बताता है और मुसलमान काफ़िर को कत्ल करने से जन्नत पाता है.

लेकिन भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से प्राप्त अधिकार से, मजहब का पालन करते हुए न्यायिक जांच (Inquisition) और बपतिस्मा में लिप्त ईसाई और अज़ान और खुत्बों में लिप्त मुसलमान असहिष्णु नहीं हैं! लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन ईशनिंदा और हत्या का विरोध करने वाले उपनिवेशवासी असहिष्णु हैं!

 ‘जो बपतिस्मा नहीं लेते, उन्हें स्वर्ग नहीं मिलेगा, वे नर्क में जायेंगे और सदा नर्क की आग में जलते रहेंगे|’ कहने वाले सेकुलर यानी पंथनिरपेक्ष कैसे है?

इस्लाम ने ईश्वर को अपूज्य घोषित कर दिया है| (अज़ान). मात्र अल्लाह पूज्य है’, (अज़ान, कुरान ३:१९), कहने वाले पंथनिरपेक्ष कैसे हैं? क्योंकि कुरान के अनुसार दीन तो अल्लाह की दृष्टि में मात्र इस्लाम ही है| (कुरान ३:१९)और जो इस्लाम के अतिरिक्त कोई और दीन (धर्म) तलब करेगा वह स्वीकार नहीं किया जायेगा| ...” (कुरान ३:८५).

क्या मानवजाति बचेगी?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

+++

आप को मैं यह पत्र इस क्षमायाचना याचना के साथ लिख रहा हूँ कि

यद्यपि मैं विकास की मुंहताज, लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से दूषित, अंग्रेजी जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ| क्योंकि मानवमात्र की लिपि, भाषा व ज्ञान-विज्ञान उसके चक्रों व ब्रह्मकमल (सहस्रार) में परब्रह्म जन्म के साथ ही दे देता है| वेद परब्रह्म का संविधान है| बिना ब्रह्मज्ञान के इसे समझा नहीं जा सकता| बिना ब्रह्मचर्य (वीर्य रक्षा) के ब्रह्मज्ञान नहीं मिल सकता और बिना गाय के दूध सेवन और गुरुकुल में योग्य आचार्य से शिक्षा ग्रहण के कोई ब्रह्मचारी नहीं बन सकता| इसके अतिरिक्त जिन लोगों के अधिकारों के लिए मैं लड़ रहा हूँ, उनमें से ०.२% भी अंग्रेजी नहीं जानते.

लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से भ्रष्ट आंग्ल भाषा में इतने लम्बे बहस की आवश्यकता ही क्या है? मैं देवनागरी के प्रयोग की मांग करता हूँ,

वेद पराज्ञान है, ब्रह्मकमल में सब कुछ लिखा हुआ है. लेकिन, चूंकि मैंने वीर्य रक्षा नहीं की - इसीलिए वेद न मेरे समझ में आये और न अब आ ही सकते हैं. क्यों की वीर्य किसी दुकान पर नहीं मिल सकता. एक बार नष्ट हो गया तो सदा के लिए नष्ट हो गया. मैकाले के यौन शिक्षा केन्द्रों में पढ़ कर मैंने वीर्य को नष्ट कर दिया.

यदि सनातन धर्म को समझना है, तो पहले ब्रह्मचारी बनिये. बिना गौ का दूध पिए आप वीर्य की रक्षा नहीं कर सकते. बिना वीर्य की रक्षा के आप ब्रह्मचारी नहीं बन सकते. अपने गुरुकुलों, गायों और आचार्यों को पुनर्जीवित और सम्मानित कीजिए.

प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है. लौकिक इन्द्रियों से ब्रह्म को और वेदों को नहीं जाना जा सकता. आप की जड़ें काट दी गई हैं और आप लोग धूल में लट्ठ मार रहे हैं.

ध्यान की दुकानें लगा कर योगिराज लोग ६ सीढ़ियाँ लाँघ कर लोगों को सीधे ध्यान पर पहुंचा रहे हैं. अरबों रुपयों का कारोबार है. लेकिन समाधि किसी को नहीं मिलती है.

जब आप लोग ही देवनागरी में लिखने से परहेज कर रहे हैं, तो क्या यह आश्चर्य नहीं कि यह लिपि और संस्कृत भाषा फिर भी जीवित है?

वीर्यरक्षा की शिक्षा मात्र गुरुकुलों में सम्भव है| वह भी निःशुल्क| गुरुकुल शिक्षा में विद्यार्थी को पुस्तकों का बोझ नहीं ढोना है. फीस नहीं देनी है.

ब्रह्मज्ञान की शिक्षा के केन्द्र को पुनर्जीवित करने की तो आप की शक्ति नहीं| मनुष्य के चक्रों में लिखी पाई जाने वाली विश्व की एकमात्र देवनागरी लिपि हम लिख नहीं सकते|

यह कहना सरासर गलत है कि मात्र किसी या कुछ ऋषियों को परमात्मा ने वेद का ज्ञान दिया. परमात्मा पक्षपाती नहीं है. उसने सबको चक्रों के साथ वीर्यवान बना कर भेजा है.

मनुष्य निर्मित किसी भी वस्तु के प्रयोग की विधि जानने के लिए विक्रेता साथ में एक पुस्तिका देता है. गणक (Computer) में तो सारी विधि उसी गणक में ही होती है.

सच जानने के लिए मुझे वीर्यवान ब्रह्मचारी बनना पड़ेगा. वीर्य किसी दुकान पर उपलब्ध नहीं है. एक बार नष्ट हो गया तो पुनः नहीं मिल सकता.

ऋग्वेद के ज्ञान विज्ञान को जानने के लिये आप को वीर्य रक्षक यानी ब्रह्मचारी बनना पड़ेगा| तत्पश्चात कुण्डलिनी भेदन (जागरण) या योग द्वारा ब्रह्मकमल तक पहुंचना पड़ेगा|

सच तो यह है कि “Shruti –directly revealed by God” सम्प्रभु मनुष्य का अपमान है.

परमात्मा ने भी सहस्रसार यानी ब्रह्मकमल में प्रकृति पर नियंत्रण और मानव शरीर के प्रयोग की सारी विधि दी है. इसी का नाम वेद है. विधि को पढ़ने हेतु शरीर के ऊर्जा चक्रों में देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा दी है. मानव शरीर में देवनागरी लिपि संस्कृत भाषा के अतिरिक्त धरती की कोई लिपि या भाषा नहीं है.

देवनागरी लिपि के सभी अक्षर साधक को चक्रों के पंखुडियों में लिखे दिखाई देते हैं और उन अक्षरों का उच्चारण भी सुनाई पड़ता है. अतएव यदि मानव अपना कल्याण चाहे तो भावी पीढ़ी को निःशुल्क गुरुकुलों में पढ़ाये

लिपि और उच्चारण जान लेने के बाद साधक ब्रह्मकमल में वेदों के रूप में लिखित, मात्र अपने शरीर की ही नहीं अपितु प्रकृति और ब्रह्माण्ड के प्रयोग की सारी विधि सीख लेता है.

सत्ताके हस्तान्तरणका लोभदेकर माउंटबेटन ने उपनिवेशवासियों से वैदिक धर्म की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा व गायत्री को मिटा दिया है, जो हमारे संतों और कथा वाचकों को दिखाई नहीं देता. फिरभी वे बलि के बकरे की भांति चिल्लाते हैं कि वैदिक सनातन धर्म मिट ही नहीं सकता!

ईश्वर ने सारा ज्ञान ब्रह्मकमल में दे रखा है| मुझे ५४ ब्रह्मचारी और ११ गुरुकुल चाहिए|

जड़ (निर्जीव) और चेतन परमाणु उर्जा

जिसे आज के वैज्ञानिक परमाणु कहते हैं| उसे हमारे ही नहीं ईसाइयों व मुसलमानों के पूर्वज भी ब्रह्म कहते थे| आज का परमाणु ऊर्जा विज्ञान जड़ (निर्जीव) परमाणुओं के भेदन पर आश्रित परमाणु ऊर्जा विज्ञान है| सर्व विदित है कि ऊर्जा निर्जीव पदार्थ के आधे भार को प्रकाश की गति के वर्ग से गुणा करने के बराबर है| चेतन परमाणु में उससे भी अधिक ऊर्जा है| हमारे पूर्वजों का विज्ञान जैविक परमाणुओं के भेदन पर आधारित है| इसी परमाणु भेदन को कुण्डलिनी जागरण कहा जाता है| हमारा ज्ञान और विज्ञान आज के जड़ परमाणु उर्जा के ज्ञान से अत्यधिक विकसित है| महाभारत काल में अश्वस्थामा के ब्रह्मास्त्र के संधान और लक्ष्य भेदन के प्रकरण से स्पष्ट होता है कि ब्रह्मास्त्र स्वचालित नहीं थे| एक बार छोड़ देने के बाद भी उनकी दिशा और लक्ष्य भेदन को नियंत्रित किया जा सकता था| इतना ही नहीं लक्ष्य पर वार कर ब्रह्मास्त्र छोड़ने वाले के पास वापस भी आ जाते थे| उनके मलबों को ठिकाने लगाने की समस्या नहीं थी| विकिरण से जीवन को होने वाली हानि की समस्या नहीं थी| ब्रह्म ज्ञान और वीर्यरक्षा की निःशुल्क शिक्षा गुरुकुलों, जिसे मैकाले ने, मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए, मिटा दिया, में दी जाती है| इन आसुरी संस्कृतियों को मानवता के हित में मिटाने में और गुरुकुलों और गौ संवर्धन को पुनर्स्थापित करने में क्या आप हमारी सहायता करेंगे?

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया|

सारा ब्रह्मांड चारो वेद और उपनिषद आप को उसी ब्रह्मकमल में मिल जायेंगे| इसकी शिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी| वह भी निःशुल्क| गुरुकुलों को मैकाले निगल गया| क्यों कि मैकाले को सबको दास बनाना था|

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया|

ब्रह्म ज्ञान और वीर्यरक्षा की निःशुल्क शिक्षा गुरुकुलों, जिसे मैकाले ने मिटा दिया, में दी जाती है|

गुरुकुलों में वीर्यरक्षा की शिक्षा निःशुल्क दी जाती थी, जिसे मानवमात्र को भेंड़ बनाने के लिए मैकाले ने मिटा दिया|

दास बनाने वाले मैकाले के महंगे यौनशिक्षा के स्कूल और बलात्कार के शिक्षा केंद्र मकतब को समाप्त कर ब्रह्मज्ञान और वीर्यरक्षा की निःशुल्क शिक्षा देनेवाले गुरुकुलों को, जिसे मैकाले ने मिटा दिया, आप की सरकार कब पुनर्स्थापित करेगी?

 

मैंने अपनी शिक्षा मैकाले के यौन स्कूलों ने ली है. हमारे ऋषियों की शिक्षा गौ का दूध सेवन कर निःशुल्क गुरुकुलों में हुई थी. मैं जो कुछ भी नीचे लिख रहा हूँ, अपने गुरु के कथन के अनुसार लिख रहा हूँ. यह सच भी हो सकता है और गलत भी.

 

दास बनाने वाले मैकाले के महंगे यौनशिक्षा के स्कूल और बलात्कार के शिक्षा केंद्र मकतब को समाप्त कर ब्रह्मज्ञान और वीर्यरक्षा की निःशुल्क शिक्षा देनेवाले गुरुकुलों को, जिसे मैकाले ने मिटा दिया, आप की सरकार कब पुनर्स्थापित करेगी?

इस्लाम को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है|

वेद पराज्ञान है, यह शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता| ब्रह्मचर्य के पालन और योग के मार्ग से ब्रह्मकमल तक पहुंच कर ही पराज्ञान प्राप्त किया जा सकता है. जिसने वीर्य की रक्षा हेतु देशी गौ का दूध सेवन कर गुरुकुल मे शिक्षा नहीं ली, उसे तो नर्क ही मिलेगा.

यह मैं नहीं कहता - यह कथन पतंजलि ऋषि के योग दर्शन का है. उसे पढ़ें. 

जिसने वीर्य रक्षा नही की, वह समाधिस्थ नहीं हो सकता. जब तक समाधिस्थ न हो, वह ब्रह्मकमल तक नहीं पहुँच सकता.

दूसरा कारण हैं कि यद्यपि मैं अंग्रेजी, जिस भाषा में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ ही त्रुटियाँ हैं और जो आज भी विकास के लिये तरस रही है, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ,

लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से भ्रष्ट आंग्ल भाषा में इतने लम्बे बहस की आवश्यकता ही क्या है? मैं देवनागरी में मांग करता हूँ,

किसी भी ज्ञानी या सिद्ध साधक से पूछिए वह आप को बताएगा कि देवनागरी लिपि सनातन है. विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है और संस्कृत उसी लिपि में लिखी जाती है.

ईश्वर ने सारा ज्ञान ब्रह्मकमल में दे रखा है| मुझे ५४ ब्रह्मचारी और ११ गुरुकुल चाहिए|

जड़ (निर्जीव) और चेतन परमाणु उर्जा

जिसे आज के वैज्ञानिक परमाणु कहते हैं| उसे हमारे ही नहीं ईसाइयों व मुसलमानों के पूर्वज भी ब्रह्म कहते थे| आज का परमाणु ऊर्जा विज्ञान जड़ (निर्जीव) परमाणुओं के भेदन पर आश्रित परमाणु ऊर्जा विज्ञान है| सर्व विदित है कि ऊर्जा निर्जीव पदार्थ के आधे भार को प्रकाश की गति के वर्ग से गुणा करने के बराबर है| चेतन परमाणु में उससे भी अधिक ऊर्जा है| हमारे पूर्वजों का विज्ञान जैविक परमाणुओं के भेदन पर आधारित है| इसी परमाणु भेदन को कुण्डलिनी जागरण कहा जाता है| हमारा ज्ञान और विज्ञान आज के जड़ परमाणु उर्जा के ज्ञान से अत्यधिक विकसित है| महाभारत काल में अश्वस्थामा के ब्रह्मास्त्र के संधान और लक्ष्य भेदन के प्रकरण से स्पष्ट होता है कि ब्रह्मास्त्र स्वचालित नहीं थे| एक बार छोड़ देने के बाद भी उनकी दिशा और लक्ष्य भेदन को नियंत्रित किया जा सकता था| इतना ही नहीं लक्ष्य पर वार कर ब्रह्मास्त्र छोड़ने वाले के पास वापस भी आ जाते थे| उनके मलबों को ठिकाने लगाने की समस्या नहीं थी| विकिरण से जीवन को होने वाली हानि की समस्या नहीं थी|

इन आसुरी संस्कृतियों को मानवता के हित में मिटाने में और गुरुकुलों और गौ संवर्धन को पुनर्स्थापित करने में क्या आप हमारी सहायता करेंगे?

इस्लाम को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है|

वीर्य रक्षा के लौकिक और आध्यात्मिक दोनों लाभ हैं. वीर्य हीन और दास बन कर जो उपनिवेशवासी डायन एलिजाबेथ के उपनिवेश में लुट रहे हैं, उनके मुक्ति का मार्ग गुरुकुल, गौ, गायत्री और गंगा ही हैं. गुरुकुल ही उपनिवेशवासी को चरित्रवान, शक्तिशाली, निरोग और ईश्वर बना सकते हैं.

वेद पराज्ञान है, यह शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता| ब्रह्मचर्य के पालन और योग के मार्ग से ब्रह्मकमल तक पहुंच कर ही पराज्ञान प्राप्त किया जा सकता है. जिसने वीर्य की रक्षा हेतु देशी गौ का दूध सेवन कर गुरुकुल मे शिक्षा नहीं ली, उसे तो नर्क ही मिलेगा.

जिसने वीर्य रक्षा नही की, वह समाधिस्थ नहीं हो सकता. जब तक समाधिस्थ न हो, वह ब्रह्मकमल तक नहीं पहुँच सकता.

यह मैं नहीं कहता - यह कथन पतंजलि ऋषि के योग दर्शन का है. उसे पढ़ें. 

दूसरा कारण हैं कि यद्यपि मैं अंग्रेजी, जिस भाषा में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ ही त्रुटियाँ हैं और जो आज भी विकास के लिये तरस रही है, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ,

लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से भ्रष्ट आंग्ल भाषा में इतने लम्बे बहस की आवश्यकता ही क्या है? मैं देवनागरी में मांग करता हूँ,

प्रत्येक मनुष्य, चाहे वह ईसाई, मुसलमान या जो भी हो, उसकी लिपि, भाषा और उसका संविधान उसके मष्तिस्क (ब्रह्मकमल) में परब्रह्म उसके जन्म के साथ ही दे देता है|

ठीक इसके विपरीत विश्व की शेष सभी भाषाओँ में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ ही त्रुटियाँ हैं और वे आज भी विकास के लिये तरस रही हैं. इनका व्याकरण रोज बदलता है. संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सबसे उपयुक्त भाषा है|

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/sanskrit

किसी भी ज्ञानी या सिद्ध साधक से पूछिए वह आप को बताएगा कि देवनागरी लिपि सनातन है. विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है और संस्कृत उसी लिपि में लिखी जाती है.

ठीक इसके विपरीत विश्व की शेष सभी भाषाओँ में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ ही त्रुटियाँ हैं और वे आज भी विकास के लिये तरस रही हैं. इनका व्याकरण रोज बदलता है. संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ यह भी स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सबसे उपयुक्त भाषा है|

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/sanskrit

+++

सर्वविदित है कि विश्व का पहला और एकमात्र ज्ञान-विज्ञान का कोष देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा का ऋग्वेद है| यह निर्विवाद रूप से स्थापित है कि संसार के अब तक के पुस्तकालयों में ऋग्वेद से प्राचीन कोई साहित्य नहीं है. पाणिनी के अष्टाध्यायी में आज तक एक अक्षर भी बदला न जा सका|

+++

डाक्टर साहब को नमस्ते!

 

+++

This is what known to our leaders in India, is not discussed for one & only reason, the muslims will not caste their vote to  them. This is what Hindus have been dealing since countless years in India. This is what must change the mind of each & every Hindu who must take equal responsibility. This could be just one reason to remove each & every muslims from India.

 

However, this is not going to happen unless we must reject all past & current MLAs & MPs to elect only Hindu Patriots.

 

 

Dr. Kumar Arun

 

+++

http://www.aryavrt.com/muj16w52b-das-prtinidhi

वह राष्ट्रपति, राज्यपाल, जज अथवा लोकसेवक मूर्ख ही होगा, जो उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान के विरुद्ध कार्यवाही कर, शमित मुखर्जी, गांगुली, स्वतंत्रकुमार, राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी आदि की भांति नौकरी गवांना चाहेगा... मीडिया सहित लोकसेवक का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ कहना; समाज को दूषित करना और गालियां देना मीडिया, जज, राष्ट्रपति, राज्यपाल व लोकसेवकों की विवशता है. राज्यपाल पर्दे के पीछे शासकों (एलिजाबेथ) के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... बौद्धिक वेश्याएं हैं.

प्रेस की आज़ादी पर जान स्विंटन ने कहा था.,,

कुछ शताब्दियों पूर्व, प्रेस को राज्य का चौथा स्तंभ माना जाता था अन्य तीन स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका थे.

प्रेस की ईमानदारी और पवित्रता लगातार घटती रही. अंततः, न्यूयॉर्क टाइम्स के पूर्व स्टाफ प्रमुख ने सन १९५३ में, अपने कहेगये भाषण में निम्नलिखित वाक्यों में स्वीकार किया,

आज स्वतंत्र प्रेस नाम की कोई चीज नहीं. यह आप और मैं दोनों जानते हैं. आप लोगों में से ऐसा कोई नहीं, जो ईमानदारी से अपने विचार लिख सके. मुझे ईमानदारी के साथ अपने प्रेस में अपने विचार न व्यक्त करने के लिए साप्ताहिक धन मिलता है.

आप में कोई भी मूर्ख ही होगा, जो ईमानदारी से अपने विचार लिख कर नौकरी गवां कर दूसरी नौकरी ढूँढना चाहेगा... स्तंभकार का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ लिखना; दूषित करना; गालियां देना;... हम पर्दे के पीछे शासकों के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... हम लोग बौद्धिक वेश्याएं हैं.

अतएव हमे प्रेस की बेईमानी पर घड़ियाली आंसू नहीं बहाना चाहिए. इंडिया में तो प्रेस की बौद्धिक वेश्यावृत्ति विदेशों से बहुत ही सस्ती है.

 “आप में कोई भी मूर्ख ही होगा, जो ईमानदारी से अपने विचार लिख कर नौकरी गवां कर दूसरी नौकरी ढूँढना चाहेगा... स्तंभकार का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ लिखना; दूषित करना; गालियां देना;... हम पर्दे के पीछे शासकों के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... हम लोग बौद्धिक वेश्याएं हैं.

अतएव हमे प्रेस की बेईमानी पर घड़ियाली आंसू नहीं बहाना चाहिए. इंडिया में तो प्रेस की बौद्धिक वेश्यावृत्ति विदेशों से बहुत ही सस्ती है.

आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी ब्रिटेन का दास है. सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

यह देश आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश है, मानवजाति को ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान से खतरा है. जरा उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान. खुत्बों, ईसाइयत, इस्लाम और भारतीय संविधान का विरोध करके दिखाएँ पुरष्कार लौटाने वाले.

वह राष्ट्रपति, राज्यपाल अथवा लोकसेवक मूर्ख ही होगा, जो उपनिवेश, बपतिस्मा, अज़ान के विरुद्ध कार्यवाही कर नौकरी गवांना चाहेगा... मीडिया सहित लोकसेवक का पेशा सत्य को नष्ट करना है. बिल्कुल झूठ कहना; समाज को दूषित करना और गालियां देना मीडिया, जज, राष्ट्रपति, राज्यपाल व लोकसेवकों की विवशता है. राज्यपाल पर्दे के पीछे शासकों (एलिजाबेथ) के लिए कार्य करने वाले मातहत और उपकरण हैं. ... बौद्धिक वेश्याएं हैं.

 

२९/१२/१६

+++

उपनिवेश माने आजादी है. किया विरोध तो फांसी है.

+++

नमो एलिजाबेथ के प्रतिनिधि व दास हैं. फैसले एलिजाबेथ के हैं. एलिजाबेथ नमो वही हश्र करेगी जो इंदिरा का किया.

+++

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ को हटाना व ३९(ग) क्या है?

+++

नमो सत्ता के हस्तान्तरण के रजिस्टर पर किये गए हस्ताक्षर से कब इंकार कर रहे हैं?

इंडिया राष्ट्रकुल की सदस्यता से कब त्यागपत्र दे रहा है?

इंडिया ब्रिटिश कानूनों से कब मुक्त होगा?

+++

मुझे लगता है यूपी ऐसा राज्य है,जिसके ज़्यादातर जिलों के SSP ट्विटर पर हैं.शिकायतों के लिए पहुंच में हैं @Uppolice @UPGovt @CMOfficeUP

+++

@AshramBlr @BJP4India

+++

नारी के बलात्कारी मजहबों पर कार्यवाही क्यों नहीं? (बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:६ व ७०:३०)

+++

बताएं! जिहादी गतिविधियों व उपनिवेश का विरोध अपराध कैसे है?

http://www.aryavrt.com/muj16w51y-suniyojit-snhar

+++

देवनागरी में

http://www.aryavrt.com/ghatak-bhartiya-smvidhan

http://www.aryavrt.com/azaan-aur-snvidhan

 

+++

की विश्वसनीयता तो १५ अक्टूबर, १९९० को ही समाप्त हो गई. अब क्यों छाती पीटते हो?

http://www.aryavrt.com/rupya

http://www.aryavrt.com/muj16w47cy-kaladhn

 

+++

लूट और बलात्कार हटा दीजिए, ईसाइयत व इस्लाम वैसे ही मर जायेंगे, जैसे बिना पानी के मछली.

+++

नमो एलिजाबेथ के इंडियन उपनिवेश के बलिपशु हैं. वही करेंगे, जो एलिजाबेथ चाहेगी.

एलिजाबेथ कौन है?

http://www.aryavrt.com/elizabeth-kaun-hai

बड़बोले नमो गो हत्या के ३६०० से अधिक कारखाने न बंद कर सके.

क्या नमो बताएंगे कि जिहादी गतिविधियों और उपनिवेश का विरोध अपराध कैसे है?

किस अपराध में आर्यावर्त सरकार के १४ अधिकारी जेलों में बंद कर रखा है, नमो ने?

 

+++

उपनिवेशवासी का नहीं है. सम्पत्ति के जिस मौलिक अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर ईसाई व मुसलमान सहित सभी उपनिवेशवासियों से प्रथम संविधान संशोधन द्वारा लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही २०/०६/१९७९ से मिटा दिया गया है| (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८). भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के अनुसार उपनिवेशवासी के पास तो सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का अधिकार ही नहीं है.

१.यह कि भारत सोने की चिड़िया था. यहाँ सोना गिना नहीं, तौला जाता था. स्वर्ण नियंत्रण कानून, १९६८ का क्या हुआ? फिर अब स्वर्ण नियन्त्रण कानून क्यों बनाया जा रहा है? सन १९१७ तक एक ₹ =१३$ था. १९४७ में घट कर १$ हुआ. ८ नवम्बर २०१६ तक एक $ का मूल्य ६७ हुआ. अब नमो ने शून्य कर दिया!

२.यह कि इंडियन उपनिवेशवासी जिसे कहते हैं, वह देने का प्रतिज्ञा पत्र है. धारक का रिजर्वबैंक के पास रहता है, जिसे धारक को देने के लिए गवर्नर प्रतिज्ञा बद्ध है. इतना ही नहीं, केन्द्रीय सरकार द्वारा का प्रतिज्ञापत्र प्रत्याभूत भी है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की धारा ३३(२) के अनुसार १५ अक्टूबर, १९९० तक १ का मूल्य ०.११८४८९ ग्राम शुद्ध सोना था, १५ अक्टूबर, १९९० के बाद से की कोई कीमत नहीं.

सन १९४८ के पूर्व बिक्रीकर नहीं था और १९९१ के पूर्व जीएसटी नहीं था.

४.सन १९८७ में मैंने तीसहजारी कोर्ट में गवर्नर से नोट के बदले सोना देने की मांग करते हुए एक वाद प्रस्तुत किया था.

५.यह कि मेरी मांग दिल्ली उच्च न्यायालय तक निरस्त होती रही. अंत में कानून में १९९० के प्रभाव से संशोधन हो गया. सर्वोच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार नहीं की. एलिजाबेथ अपने ही वचन से मुकर गई. जब कि इस धोखाधड़ी से जज भी पीड़ित हैं!

६.यह कि सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं|

The Gold Control Act of 1968 was repealed on June 6, 1990 by the Gold Control Repeal Act of 1990, which eliminated restrictions on internal trade in gold. However, gold mines continue to sell gold to industrial users through the distribution ..

 

बीती को बिसारिये! क्या न्यायमूर्ति श्री ठाकुर जी रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार से पूछेंगे कि नये नोट (वचन पत्र) के बदले कितना सोना देगी?

+++

 

चीन और रूस के समाजवाद का क्या हुआ?

+++

Within a week itself fake notes have entered the market. The fake notes are color photocopy of 2000 curency. Since Rs 2000 note is new, many  dont know the features of it. Here are 3 steps to easily identify.

 

 1. Security thread -The line which passes vertically through the currency. appears green. On tilting the note it turns blue.

 

 2. Front side of note, left bottom, you can see a rectangle. On tilting the note and concentrating you can see 2000 in it.

 

 3. The white portion of the currency will have watermark of Gandhi which is visible on showing to light.

 

 On color photocopy these 3 features will not be seen.

+++

Registration Number is : PMOPG/E/2016/0547235

+++

उपनिवेशवासी

 

http://www.aryavrt.com/rupya

http://www.aryavrt.com/muj16w47cy-kaladhn

 

+++

file:///E:/Apt/Documents/RBI%20ACT%201934/RUPYE%20KII%20KAHAANI.html

उपनिवेश का विरोध

उपनिवेशवासी का कोई देश नहीं होता.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/muj16w46ay-sval-16n12y

http://www.aryavrt.com/muj16w45y-dyakepatr-16n06y

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

http://www.aryavrt.com/muj16w46by-krkiisima-16n12y

 

यही बात उपनिवेश के खालिस्तानियों के बारे में भी सच है.

२०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्रका जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

यदि खालिस्तान बन भी जाता है तो वह रहेगा एलिजाबेथ का उपनिवेश ही.

सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं|

 

+++

भ्रष्टाचार भारतीय संविधान से प्रायोजित है| विकल्पहीन लोकसेवकों की नियुक्ति ही लूटने के लिए की जाती है| या तो लोकसेवक स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (एलिजाबेथ) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| जहां भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ से प्राप्त सम्पत्ति के मौलिक अधिकार को सांसदों और जजों ने मिलकर उपनिवेशवासियों से लूट लिया और अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार ही नहीं देता, वहीं दंप्रसं की धारा १९७ ने सत्ता का केन्द्रीयकरण एलिजाबेथ के हाथों में कर दिया है| एलिजाबेथ के मनोनीत लुटेरों के विरुद्ध कहीं सुनवाई नहीं हो सकती| यह कहना गलत है कि कानून सबके लिए एक समान है अथवा कानून अपना कार्य करता है| एलिजाबेथ द्वारा दंप्रसं की धारा १९७ भयादोहन के लिए उपयोग में लाई जा रही है| लोकसेवक, पुलिस, उपनिवेशवासी व जज सभी दंप्रसं की धारा १९७ से पीड़ित हैं| आज अपराधी वह है जिसे एलिजाबेथ अपराधी माने| यही कारण है कि जहां येदियुरप्पा और मधु कोड़ा जेल गए, वहीं किसानों, लोकसेवकों और यहाँ तक कि रामप्रसाद बिस्मिल जैसे उन हुतात्माओं तक की जमीनें लूटने, जिसके बलिदान के कारण वे मुख्य मंत्री व राज्यपाल बने, वाले मुख्य मंत्री मुलायम व मायावती जेल नहीं भेजे जा रहे हैं| चुनाव द्वारा भी उपनिवेशवासी एलिजाबेथ की लूट से मुक्ति नहीं पा सकते|

लेकिन अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन दंडनीय अपराध है| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन इन धाराओं का नियंत्रण एलिजाबेथ के मनोनीत राज्यपालों के पास है|

 

+++

+++

http://www.aryavrt.com/azaan-uoi

 

+++

 

 

संजीव चतुर्वेदी IFS UK

 

http://www.aryavrt.com/azaan-uoi

 

+++

यदि फिरभी आप को संतुष्टि न हो, मुझे बतायें,

यह कि नमो कब घोषणा कर रहे हैं कि वे सत्ता के हस्तान्तरण के रजिस्टर पर किये गए हस्ताक्षर से इंकार कर रहे हैं?

इंडिया राष्ट्रकुल की सदस्यता से कब त्यागपत्र दे रहा है?

इंडिया ब्रिटिश कानूनों से कब मुक्त होगा?

विद्वान दवे जी! दारासिंह

+++

नमो जी!

मुझे अफसानों की आवश्यकता नहीं है.

मुझे तो इतना बता दीजिए कि इस्लाम धरती पर क्यों है?

 

इंडिया में ईसाइयों की संख्या नगण्य ही रही| इसी कारण वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को ईसाई स्वयं नहीं मिटा सकते| इसलिए ईसाई अपने ही शत्रु मुसलमानों व उनके इस्लाम का शोषण करके वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को मिटा रहे हैं| हिंदू मरे या मुसलमान - अंततः ईसा का शत्रु मारा जा रहा है|

एलिजाबेथ को भी ईसा का आदेश है, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७).

नमो भी ज्यादा चूं चूं करेंगे तो इंदिरा गांधी की तरह कत्ल हो जायेंगे.

यह लोग उपनिवेश और संविधान का विरोध नहीं कर सकते. जिसे अपना अस्तित्व चाहिए, आर्यावर्त सरकार की सहायता करे.

+++

+++

इंडिया एलिजाबेथ का उपनिवेश है. सेना एलिजाबेथ की है.

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

 

+++

@Narendramodi

 

+++

@narendramodi @unosg @PutinRF_Eng @realDonaldTrump @RashtrapatiBhvn

मस्जिदों के अज़ान और खुत्बे कब बंद होंगे?

http://www.aryavrt.com/judgment-on-azaan-eng

 

 

+++

शेरजी को नमस्ते!

थोमस देवनागरी नहीं जानते. अतः मेरे पत्र को पढ़ नहीं सकते. वैसे भी मेरी गणना सदाबहार अपराधियों में है. अगर उपनिवेश और जिहाद कोई समस्या नहीं है, तो आर्यावर्त सरकार के ९ लोगों को मालेगांव मामले में क्यों बंद कर रखा है?

भोपाल मीटिंग में स्वतंत्र सरकार की चर्चा से सरकार आतंकित क्यों है?

अब मैंने आर्यावर्त सरकार के मान्यता के लिए और उपनिवेश से मुक्ति के लिए विश्व को लिखना प्रारम्भ कर दिया है.

आप का सहयोग चाहिए.

अप्रति.

 

+++

 

सत्ता के हस्तांतरण के संधि के पूर्व ही हमारे पूर्वजों के ९० वर्ष के बलिदानों के बदले मे १८ जुलाई, १९४७ को आक्रांता जारज षष्टम् ने शब्द उपनिवेश’ (Dominion) के पूर्व शब्द स्वतंत्र’ (independent) जोड़ कर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७ बना दिया, और तब से आज तक लागू है. जिसके अनुसार इंडिया को स्वतंत्रता नहीं दी गई, अपितु इंडिया का दो स्वतंत्र? उपनिवेशों (इंडिया तथा पाकिस्तान) में विभाजन किया गया और १५ अगस्त १९४७ को इंडिया बंट गया। इतना ही नहीं उपनिवेश का विरोध Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php.

के अधीन, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा, राष्ट्रपति और राज्यपाल के स्वेच्छा से, मृत्युदंड का अपराध है.

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, पाकिस्तान जिसकी लाश पर बन सकता था, ने इंडिया को ईसाइयत और इस्लाम को सौंप दिया और आप के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का अपहरण कर गया. १९४७ से आज तक उपनिवेशवासी स्वतंत्रता का युद्ध लड़ने का साहस भी गवां बैठे हैं. क्योंकि उपनिवेश का विरोध Chapter VI. Chapter VI. भारतीय दंड संहिता की धारा १२१. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php. http://devgan.in/indian_penal_code/chapter_06.php के अधीन मृत्युदंड का अपराध है. उपनिवेशवासी इस चक्रव्यूह से निकल नही पा रहे हैं.

विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/muj16w33y-swatantrta-divas

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

पैगम्बरों ने वीर्यहीन कर मनुष्य के शत्रु और मित्र को पहचानने का विवेक नष्ट कर दिया है. उपनिवेशवासियों के पूर्वजों के ९० वर्षों के स्वातन्त्रय युद्ध का २०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी, पाकिस्तान जिसकी लाश पर बन सकता था, ने देश के बैरिस्टरों से मिल कर अपहरण कर लिया.

२०वीं सदी के मीरजाफर पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने उपनिवेशवासियों का देश उपनिवेशवासियों को ९० वर्षों के लिए अंग्रेजों द्वारा किरायेदारी पर दिलवा गया. मानवमात्र की हत्या करना, जिनकी संस्कृति है, उनको पंथनिरपेक्ष घोषित कर गांधी ने रोक लिया. उनको गोमांस खाने की पूरी छूट दी. उपनिवेशवासी आज भी इसी गांधी का महिमामंडन कर रहे हैं और उपनिवेश विरोधियों को नष्ट करने की मूर्खता कर रहे हैं.

उपनिवेशवासी गांधी के व्यभिचार को ब्रह्मचर्य का प्रयोगस्वीकार करने वाले पापी हैं.

२०वीं सदी के मीरजाफर सदाबहार झूठे, पाकपिता - राष्ट्रहंता बैरिस्टर मोहनदास करमचन्द गांधी ने उपनिवेशवासियों को कोई आजादी नहीं दिलाई. हमारे पूर्वजों के ९० वर्षों के बलिदानों की परिणति है, उपनिवेश के पूर्व शब्द स्वतंत्रका जोड़ा जाना. चुनाव द्वारा स्थितियों में कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| आज़ादी धोखा है. इंडिया आज भी एलिजाबेथ का उपनिवेश और ब्रिटेन का दास है. आज भी सभी ब्रिटिश कानून ही देश पर लागू हैं.

http://www.legislation.gov.uk/ukpga/Geo6/10-11/30

http://www.aryavrt.com/bhartiya-swatantrta-adhiniyam-1947

फिरभी सन १९४७ के सत्ता हस्तान्तरण के बाद से ही उपनिवेशवासी १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने के लिए विवश हैं. उपनिवेशवासियों के स्वतंत्रता के युद्ध का ही एलिजाबेथ ने अपहरण कर लिया है. एलिजाबेथ धोखा देना छोड़े. १५ अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस की नौटंकी के स्थान पर स्पष्ट घोषित करे कि उपनिवेशवासी उसके स्थायी बलिपशु हैं. उपनिवेशवासियों को कत्ल करना, उनका मांस खाना और लहू पीना उस का संवैधानिक असीमित मौलिक मजहबी अधिकार है.

 

+++

http://www.aryavrt.com/maikale-vs-gurukul

+++

२०/१०/१६

[29/08 8:07 pm] +91 98291 09282: #सावधान#

ब्राह्मण कौन?

यस्क मुनि के अनुसार-

जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात्‌ भवेत द्विजः।

वेद पाठात्‌ भवेत्‌ विप्रःब्रह्म जानातीति ब्राह्मणः।।

अर्थात - व्यक्ति जन्मतः शूद्र है। संस्कार से वह द्विज बन सकता है। वेदों के पठन-पाठन से विप्र हो सकता है। किंतु जो ब्रह्म को जान ले, वही ब्राह्मण है।

ब्राह्मण न पीड़ित हो सकता है, न पराजित और न ही दास बनाया जा सकता है.

गर्ग और गौतम ऋषि की संतानें आजभी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हैं.

+++

आपको याद है कैसे मीडिया ने बिहार विधानसभा चुनाव पूर्व समाज को तोड़ने वाली झूटी खबरें रचाई थी, और हर मामले में नमो सरकार को आड़े लिया था?

"हरियाणा में सवर्णों ने दलित का घर जलाया, दो बच्चों की मौत"

"मंत्री वी के सिंह ने दलितों की तुलना कुत्तों से की

(बाद में सच सामने आया की मामला आपसी रंजिश का था और मंत्री के बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया )

दादरी कांड के जरिये बीजेपी को मुस्लिम विरोधी बताया गया, मोहन भागवत को आरक्षण विरोधी बताया गया, नमो जी को बिहार विरोधी प्रोजेक्ट किया गया ....कुल मिलाके मीडिया ने पूरी कोशिश की जनता को भ्रमित करने की और सफल भी हुयी !!

अभी 2-3 दिनों की ख़बरों को गौर से देखिये ....

1. न्यूज़ - ओडिसा में आदमी को अपनी पत्नी की लाश को ढोना पड़ा 10 km

 (क्या यह आदमी सुबह तक का इंतजार नहीं कर सकता था, रात को 3 बजे बिना किसी को बताए लाश ले जाने की इतनी जल्दी क्यों? क्या वीडियो बनाने के वजाय पत्रकार इसकी मदद नहीं कर सकता था?)

2.न्यूज़ - जबलपुर में दबंगों ने नहीं निकलने दी दलित की शवयात्रा, तालाब से ले जानी पड़ी अर्थी !

(जबकि दबंग और पीड़ित एक ही जाति के हैं और मामला आपसी रंजिश का )

3. न्यूज़ - UPSC में सामान्य वर्ग के लिए आयु सीमा घटाकर 26 की गयी.

(झूटी खबर, एक अधिकारी के वयान पर पूरी सरकार को घेरने की कोशिश, मंशा बीजेपी के सवर्ण वोट को काटने की )

4 न्यूज़ - मध्यप्रदेश में प्रसूता को 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा!

(फोटो में साफ़ जाहिर है कि ऑटो को खेत में छुपाया गया था)

मित्रो कुल मिलाके यूपी के चुनाव का विगुल बज चुका है, प्रशांत किशोर जैसे महारथी एक्टिव हो चुके हैं, मीडिया अपना खेल शुरू कर चुकी है .....आगे ऐसी कई और ख़बरों के लिए तैयार रहें ....रवीश की स्क्रीन फिर से काली होने वाली है .....बहकाबे में न आएं .....अपने विवेक का उपयोग करें !!

दिखावे पे न जाए अपनी अक्ल लगाए🚩

[29/08 8:21 pm] अ रस्तौगी: प्राचीन काल में हर जाति, समाज आदि का व्यक्ति ब्राह्मण बनने के लिए उत्सुक रहता था। ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को आज भी है। चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो वह गायत्री दीक्षा लेकर ब्रह्माण बन सकता है, लेकिन ब्राह्मण होने के लिए कुछ नियमों का पालन करना होता है। हम उस ब्राह्मण समाज की बात नहीं कर रहे हैं जिनमें से अधिकतर ने अपना ब्राह्मण कर्म छोड़कर अन्य कर्मों को अपना लिया है। हालांकि अब वे ब्राह्मण नहीं रहे लेकिन कहलाते अभी भी ब्राह्मण ही है।

 

 

स्मृति-पुराणों में ब्राह्मण के 8 भेदों का वर्णन मिलता है:- मात्र, ब्राह्मण, श्रोत्रिय, अनुचान, भ्रूण, ऋषिकल्प, ऋषि और मुनि। 8 प्रकार के ब्राह्मण श्रुति में पहले बताए गए हैं। इसके अलावा वंश, विद्या और सदाचार से ऊंचे उठे हुए ब्राह्मण त्रिशुक्लकहलाते हैं। ब्राह्मण को धर्मज्ञ विप्र और द्विज भी कहा जाता है।

उपनाम में छुपा है पूरा इतिहास

1. मात्र : ऐसे ब्राह्मण जो जाति से ब्राह्मण हैं लेकिन वे कर्म से ब्राह्मण नहीं हैं उन्हें मात्र कहा गया है। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने से कोई ब्राह्मण नहीं कहलाता। बहुत से ब्राह्मण ब्राह्मणोचित उपनयन संस्कार और वैदिक कर्मों से दूर हैं, तो वैसे मात्र हैं। उनमें से कुछ तो यह भी नहीं हैं। वे बस शूद्र हैं। वे तरह तरह के देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और रा‍त्रि के क्रियाकांड में लिप्त रहते हैं। वे सभी राक्षस धर्मी भी हो सकते हैं।

2. ब्राह्मण : ईश्वरवादी, वेदपाठी, ब्रह्मगामी, सरल, एकांतप्रिय, सत्यवादी और बुद्धि से जो दृढ़ हैं, वे ब्राह्मण कहे गए हैं। तरह-तरह की पूजा-पाठ आदि पुराणिकों के कर्म को छोड़कर जो वेदसम्मत आचरण करता है वह ब्राह्मण कहा गया है।

3. श्रोत्रिय : स्मृति अनुसार जो कोई भी मनुष्य वेद की किसी एक शाखा को कल्प और छहों अंगों सहित पढ़कर ब्राह्मणोचित 6 कर्मों में सलंग्न रहता है, वह श्रोत्रियकहलाता है।

4. अनुचान : कोई भी व्यक्ति वेदों और वेदांगों का तत्वज्ञ, पापरहित, शुद्ध चित्त, श्रेष्ठ, श्रोत्रिय विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला और विद्वान है, वह अनुचानमाना गया है।

5. भ्रूण : अनुचान के समस्त गुणों से युक्त होकर केवल यज्ञ और स्वाध्याय में ही संलग्न रहता है, ऐसे इंद्रिय संयम व्यक्ति को भ्रूण कहा गया है।

6. ऋषिकल्प : जो कोई भी व्यक्ति सभी वेदों, स्मृतियों और लौकिक विषयों का ज्ञान प्राप्त कर मन और इंद्रियों को वश में करके आश्रम में सदा ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए निवास करता है उसे ऋषिकल्प कहा जाता है।

7. ऋषि : ऐसे व्यक्ति तो सम्यक आहार, विहार आदि करते हुए ब्रह्मचारी रहकर संशय और संदेह से परे हैं और जिसके श्राप और अनुग्रह फलित होने लगे हैं उस सत्यप्रतिज्ञ और समर्थ व्यक्ति को ऋषि कहा गया है।

8. मुनि : जो व्यक्ति निवृत्ति मार्ग में स्थित, संपूर्ण तत्वों का ज्ञाता, ध्याननिष्ठ, जितेन्द्रिय तथा सिद्ध है ऐसे ब्राह्मण को मुनिकहते हैं।

उपरोक्त में से अधिकतर 'मात्र ब्राह्मण कुल मे जन्म लेने वाले, लेकिन कर्म से शूद्र' नामक ब्राह्मणों की संख्याऐ ही अधिक है।

सबसे पहले ब्राह्मण शब्द का प्रयोग अथर्वेद के उच्चारण कर्ता ऋषियों के लिए किया गया था। फिर प्रत्येक वेद को समझने के लिए ग्रन्थ लिखे गए उन्हें भी ब्रह्मण साहित्य कहा गया। ब्राह्मण का मतलब तब किसी जाति या समाज से नहीं था।

समाज बनने के बाद अब देखा जाए तो भारत में सबसे ज्यादा विभाजन या वर्गीकरण ब्राह्मणों में ही है जैसे:- सरयूपारीण, कान्यकुब्ज, जिझौतिया, मैथिल, मराठी, बंगाली, भार्गव, कश्मीरी, सनाढ्य, गौड़, महा-बामन और भी बहुत कुछ। इसी प्रकार ब्राह्मणों में सबसे ज्यादा उपनाम (सरनेम या टाईटल ) भी प्रचलित है। कैसे हुई इन उपनामों की उत्पत्ति जानते हैं उनमें से कुछ के बारे में।

*एक वेद को पढ़ने  वाले ब्रह्मण को पाठक कहा गया।

*दो वेद पढ़ने वाले को द्विवेदी कहा गया, जो कालांतर में दुबे हो गया।

*तीन वेद को पढ़ने वाले को त्रिवेदी कहा गया जिसे त्रिपाठी भी कहने लगे, जो कालांतर में तिवारी हो गया।

*चार वेदों को पढ़ने वाले चतुर्वेदी कहलाए, जो कालांतर में चौबे हो गए।

*शुक्ल यजुर्वेद को पढ़ने वाले शुक्ल या शुक्ला कहलाए। 

*चारो वेदों, पुराणों और उपनिषदों के ज्ञाता को पंडित कहा गया, जो आगे चलकर पाण्डेय, पांडे, पंडिया, पाध्याय हो गए। ये पाध्याय कालांतर में उपाध्याय हुआ।

*शास्त्र धारण करने वाले या शास्त्रार्थ करने वाले शास्त्री की उपाधि से विभूषित हुए।

*इनके अलावा प्रसिद्ध ऋषियों के वंशजो ने अपने  ऋषिकुल या गोत्र के नाम को ही उपनाम की तरह अपना लिया, जैसे :- भगवन परसुराम भी भृगु कुल के थे। भृगु कुल के वंशज भार्गव कहलाए, इसी तरह गौतम, अग्निहोत्री, गर्ग, भरद्वाज आदि।

*बहुत से ब्राह्मणों को अनेक शासकों ने भी कई  तरह की उपाधियां दी, जिसे बाद में उनके वंशजों ने उपनाम की तरह उपयोग किया। इस तरह से ब्राह्मणों के उपनाम प्रचलन में आए। जैसे, राव, रावल, महारावल, कानूनगो, मांडलिक, जमींदार, चौधरी, पटवारी, देशमुख, चीटनीस, प्रधान,

*बनर्जी, मुखर्जी, जोशीजी, शर्माजी, भट्टजी, विश्वकर्माजी, मैथलीजी, झा, धर, श्रीनिवास, मिश्रा, मेंदोला, आपटे आदि हजारों सरनेम है जिनका अपना अलग इतिहास है।

[29/08 8:21 pm] अ रस्तौगी: [8/26, 15:48] +91 99284 06637: .

जिस तरह, भाई, पति, बेटा, बेटी, बहन, माँ, आदि रिश्तों के पुरुषों-महिलाओं से हमारे सम्बन्ध मात्र एक पुरुष, या मात्र एक स्त्री होने के आधार पर न चल कर भावना और आस्था के आधार पर संचालित होते हैं,

उसी प्रकार गाय, बकरे, या अन्य पशु भी हमारी भावना के आधार पर व्यवहृत होते हैं।

ईसाइयत और इस्लाम में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) करिये, चाहे जिस नारी का बलात्कार कीजिये. [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)]. बेटी से विवाह कीजिए. (बाइबल, १ कोरिंथियन ७:३६). पुत्र वधू से निकाह कीजिए. (कुरान ३३:३७-३८).

शोभा डे ईसाई हैं. पद, प्रभुता और पेट के लोभ में वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए विवश हैं. सत्ता के हस्तान्तरण का लोभ देकर माउंटबेटन ने हमीं से वैदिक सनातन संस्कृति की आधार शिलाओं गुरुकुल, गौ, गंगा और गायत्री को नष्ट करा दिया है| शोभा को जो भी सनातन है, उसे नष्ट करना है अन्यथा सड़क पर आ जाएँगी.

              जवाब - 3.

एक अंग्रेज ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा - सब से अच्छा दूध किस जानवर का होता है?

स्वामी विवेकानंद - भैँस का।

अंग्रेज - परन्तु आप भारतीय तो गाय को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं न.....?

स्वामी विवेकानन्द कहा -

आप ने दूध" के बारे मे पुछा है जनाब, "अमृत" के बारे में नहीं,

 और दूसरी बात,

आप ने जानवर के बारे मेँ पूछा था।

गाय तो हमारी माता है,

 कोई जानवर नहीं.

इसी विषय में एक सवाल :-

"Save tiger"

कहने वाले समाज सेवी होते हैं

और

"Save Dogs"

कहने वाले पशु प्रेमी होते हैं ।

तब,

"Save Cow" कहने वाले कट्टरपन्थी कैसे हो गये.....?

इसका जवाब, अगर किसी के पास हो, तो बताने की ज़रूर कृपा करे।

+++

.प्लीज आगे शेयर करे अगर आप भी मेरे मत से सहमत है  अगर आप शोभा डे के मत से प्रभावित है तो शेयर मत कीजिये।।।

🙏वंदे गौ मातरम्🙏

[8/26, 17:02] +91 99351 11725: ये हिंदुत्व का जादू नहीं है तो और क्या है जो आज सारी दुनिया में सर चढ़ कर बोल रहा है.

_________________

 

1995 की घटना है, लंदन में स्वामीनारायण संप्रदाय वालों ने अक्षरधाम की तरह ही एक भव्य मंदिर बनाया था. स्वामीनारायण वालों की विशेषता है कि वो अपने मंदिरों के साथ जुड़े संग्रहालय में हिन्दू संस्कृति और इतिहास का परिचय कराने वाली मूर्तियाँ, कलाकृतियाँ आदि भी लगाते हैं. लंदन के मंदिर में स्वामीनारायण पंथ के सन्यासियों ने एक दिन वहां के मेयर को आमंत्रित किया. मदिर में दर्शन करने के पश्चात् वो मेयर मंदिर के साथ लगे संग्रहालय भी देखने गये. वहां पर रामायण को चित्रित करती तस्वीरें लगी थी. इन तस्वीरों का अवलोकन करते-करते वो मेयर श्रवण कुमार की उस तस्वीर के सामने रूक गये जिसमें श्रवण अपने बूढ़े अंधे माता-पिता को बहंगी में उठाये हुए हैं. मेयर साहब ने साथ चल रहे संन्यासी से पूछा कि तस्वीर में दिख रहा ये युवक कौन है और क्या कर रहा है? संन्यासी ने उन्हें बताया कि ये हमारे रामायण काल का एक युवक श्रवण है जिसके माता-पिता वृद्ध और अंधे थे. उसके माता-पिता की तीर्थाटन की इच्छा हुई तो श्रवण ने उन्हें बहंगी में बिठाकर सारे भारतवर्ष का तीर्थाटन कराया. सुनकर मेयर हतप्रभ रह गया, उनके मुंह से निकला, क्या ये संभव है कि एक नवयुवक जिसकी अभी मौज-मस्ती करने की उम्र है वो इस तरह से अपने वृद्ध और अंधे माता-पिता को तीर्थयात्रा करवा रहा है? शायद मेयर साहब की आँखों के सामने इंग्लैंड में खुले हुए ढ़ेरों वृद्धाश्रम के दृश्य घूम गये. संभवतः उन्हें ये भी पता था कि उनके इंग्लैंड में जब माँ-बाप बूढ़े हो जाते हैं तो बच्चों को लगता है कि ये डिस्टर्ब करते हैं इसलिये वो उन्हें ओल्ड-एज-होम में छोड़ आते हैं और इसलिये उस मंदिर से वापस आने के बाद उस मेयर ने फ़ौरन वहां के स्कूलों के लिए एक सर्कुलर निकाला कि रविवार को अपने बच्चों को स्वामीनारायण मंदिर में लेकर जाओ ताकि वो सीख सकें कि हिन्दू धर्म क्या है, हिन्दू जीवन-मूल्य क्या है.

यही वो कारण है जिसके चलते हिन्दू धर्म और भारत भूमि युगों-युगों से सबकी अंतिम आश्रयस्थली रही है. विष्णु पुराण कहता है,

      गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ये भारतभूमि भागे,

      स्वार्गापवर्गास्पदहेतुभूते    भवन्ति   भूयः पुरुषा सुरत्वात।

अर्थात्, “हम देवताओं में भी वो लोग धन्य हैं जो स्वर्ग और अपवर्ग के लिए साधनभूत भारत भूमि में उत्पन्न हुए हैं.

पर हरेक को इस भारत-भूमि और इस पवित्र धर्म में जन्म लेने का सौभाग्य नहीं मिलता इसलिये जिसने भी प्रकृति या परमशक्ति के साथ खुद को जोड़ा वह सहज रूप से इस ओर खिंचा चला आता है. स्वामी विवेकानंद ने कहा था, “यदि पृथिवी पर कोई ऐसी भूमि है, जिसे मंगलदायनी पुण्यभूमि कहा जा सकता है, जहाँ ईश्वर की ओर अग्रसर होने वाली प्रत्येक आत्मा को अपना अंतिम आश्रयस्थल प्राप्त करने के लिए जाना ही पड़ता है, तो वो भारत है.

स्वामी जी के इस कथन का साक्ष्य समय-समय पर मिलता रहा है. कहतें हैं एक बार एक जर्मन इस भारत भूमि पर अपनी आध्यात्मिक पिपासाओं को शांत करने आया था. उसने इस देश के ऋषि-मुनियों के चरणों में बैठ कर लम्बे समय तक साधनाएं की पर ईश्वर का साक्षात्कार नहीं कर पाया. उसे यही लगा कि उसका शरीर और मन जो बर्षों-बरस तक पश्चिम के तमोगुणी संस्कारों में रहा और पला है इस कारण वह ईश्वर का साक्षात्कार और अपने अंतःस्थ में उसकी अनुभूति नहीं कर पा रहा है. वह हरिद्वार गया पवित्र गंगा में जल समाधि ले ली. अपने पीछे वो एक पत्र छोड़ कर गया, जिसमें उसने लिखा, -“मैं स्वयं अपने शरीर का त्याग कर रहा हूँ. गंगा के पावन जल में अपने शरीर को अर्पित करने से उस मंगलमय की कृपा से मुझे भारत में पुनर्जन्म का सौभाग्य प्राप्त हो और उस नवीन निर्मल शरीर से मैं ईश्वर का साक्षात्कार करने योग्य हो जाऊं.

उस जर्मन ईसाई की ही तरह दुनिया के अलग-अलग मत-मजहबों में जन्मी आत्माएँ पवित्र हिन्दू धर्म और भारत भूमि की ओर इसी तरह खींची चली आती है पर हम हिन्दू मत-विस्तार को किसी को अपने भीतर लाने को विजय-घोषणा के रूप में प्रचारित नहीं करते इसलिये ऐसी विभूतियों का साक्षात्कार हमें नहीं हो पाता. आज कृष्ण-जन्माष्टमी के पावन पर्व पर बनारस से मित्र Santosh Singh ने ऐसे ही एक अध्यात्म-पिपासु भारत भक्त और प्रकृति के सहज धर्म हिंदुत्व के उपासक श्री फ्रेड रोनाल्ड के बारे में बताया और उनकी तस्वीर भेजी (संलग्न) . श्री रोनाल्ड मूल रूप से एरिज़ोना, अमेरिका से हैं, इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट के रूप में अच्छे तरीके से जीवन-यापन कर रहे थे साथ ही ईसाई मत का अनुपालन भी  करते थे पर चर्च की शिक्षाएं उनके आध्यात्मिक मन को ईसाईयत के साथ बांध कर नहीं रख सकी. ईसाईयत के साथ उन्होंने सेमेटिक के बाकी शाखों का भी अध्ययन किया पर वहां भी उन्हें अतिवाद, संकुचन और संकीर्णता ही मिली. 2008 में किसी हिन्दू संन्यासी को माध्यम बनाकर विधाता ने उन्हें प्रकृति के सहज धर्म हिंदुत्व और उपासना-स्थली भारत की ओर मोड़ दिया. जब भारत और हिंदुत्व से मिले तो लगा, यार यही तो वो था जिसकी तलाश में मैं बरसों से था. यही तो है जहाँ अंध-आस्था और उन्माद नहीं बल्कि अनुभूति की प्रधानता है. जिस चीज़ की चाह थी वो मिली तो उसे पाने के बाद फिर हिंदुत्व और भारत के ही होकर रह गये. उन्हें समझ में आ गया था कि क्यों प्रभु ईसा ने अपनी अंतिम राह भारत की ओर लिया था.

आज ब्रज के उस ग्वाल-बाल के कंठ से निकली अमर गीता वाणी पश्चिम के विश्वविद्यालयों में गूँज रही है, राम का चरित्र वहां के परिवार को जोड़ रहा है और श्रवण की कथाएं माता-पिता का सम्मान  सिखा रही है, हिन्दू जीवन-दर्शन, हिन्दू-चिंतन श्री फ्रेड जैसी न जाने कितनी पुण्यात्माओं के लिये अपना जन्म सफल करने का कारण बन रही हैं . ये हिंदुत्व का जादू नहीं है तो और क्या है जो आज सारी दुनिया में सर चढ़ कर बोल रहा है.

चलते-चलते ये भी बता रहा हूँ कि श्री फ्रेड रोनाल्ड ने अपने पुत्र का नाम "कृष्ण" रखा है.

~ अभिजीत

[8/26, 17:03] +91 99351 11725: ● अमेरिका कश्मीर पर कब्जा करना चाहता

था नहीं है???

.

कुछ साल पहले (जुलाई 2009) अमेरिका की

विदेश मंत्री हेलेरी कलिंटन भारत आई ! और

हमारे यहाँ एक tv चैनल जिसका नाम आजतक है !

आजतक के प्रभु चावला ने उसका interview

लिया ! और interview मे एक ऐसा सवाल पूछा !

जिसका जवाब गलती से हेलेरी कलिंटन ने सच बता

दिया !! (कई बार ऐसा हो जाता है कि मुह से कोई

छुपाने वाली बात सच निकाल जाती है!!) प्रभु

चावला ने पूछा कि अमेरिका ने पिछले 50 साल

मे united nation मे कश्मीर मुद्दे पर भारत का

हमेशा विरोध किया है ! पाकिस्तान का

साथ दिया है क्यूँ??? ।। (आप जानते है 1952 -53

से जम्मू कश्मीर का मुद्दा नेहरू कि मूर्खता के

कारण united nation मे है ! वरना युद्ध मे तो

भारतीय सेनिकों ने बुरी तरह रोंद दिया था

पाकिस्तान को ! और दो दिन अगर और मिलते

तो लाहोर भी भारत मे आ जाता ! तब नेहरू को

internationalism याद आ गया ! और बिना मतलब

के मुद्दा united nation मे ले गया ! और तब से

अमेरिका उसको दबा कर बैठा है! और हमेशा

भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देता

गया!)). तो प्रभु चावला ने पूछा ! एक तरफ आप

कहते है भारत से रिश्ते अच्छे बनाने है और ! आपने

हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है ! आखिर

आप चाहते क्या है?? तो हेलेरी कलिंटन ने गलती

से बोल दिया कि हमारी अमेरिका की संसद मे

प्रस्ताव पारित हुआ है ! कि जम्मू कश्मीर पर हमे

सेनिक अड्डा बनाना है ! तो उससे पूछा प्रस्ताव

कब पारित हुआ था?? तो उसने कहा 1989 मे !!!

तो उससे पूछा प्रस्ताव नमबर??! तब एक दम हलेरी

कलिंटन को लगा कुछ गलत बोल दिया है ! तो

उसने बात को घूमा दिया ! और कहा मुझे

ज्यादा नहीं मालूम ! बस ऐसा है वैसा है !!

. _

श्री राजीव दीक्षित जी वो interview सुन

रहे थे ! तो उन्होने बिना देरी किए हुये

अमेरिका मे अपने कुछ दोस्तो को फोन लगाया

और कहा ! पता करो 1989 मे अमेरिका कि संसद

मे ऐसा कौन सा प्रस्ताव पारित हुआ?? जिसमें

कहा गया कि अमेरिका को जम्मू कश्मीर चाहिये

वहाँ सेनिक अड्डा बनाने के लिए?? तो पता

चला प्रस्ताव का नंबर है 657 और 1989 को

अमरीकी संसद मे पास हुआ!! और उसमे कहा गया

है कि एक न दिन तो अमेरिका को जम्मू कश्मीर

पर कब्जा कर सैनिक अड्डा बनाना ही है! क्यूँ??

कारण एक ही है ! जम्मू कश्मीर ही एक ऐसा area

है ! जहां अमेरिका सैनिक अड्डा बनाकर चीन

,भारत और पाकिस्तान तीनों पर नजर रख

सकता है ! और भविष्य मे कभी चीन या भारत पर

हमला करना पड़े! तो उससे बढ़िया कोई स्थान

नहीं ! तो जम्मू कश्मीर की लड़ाई पाकिस्तान

नहीं लड़ रहा है बल्कि अमेरिका लड़ रहा है, और

जम्मू कश्मीर को भारत से अलग कर दोये बोलने

वाले कश्मीरी नेताओं को अमेरिका का धन और

सुरक्षा दोनों मिल रहा है । यासीन मलिक

को जुकाम हो जाए तो ये वाशिंगटन पोस्ट की

हेडलाइन बनती है, जिस यासीन मलिक को

हमारे देश में कोई पत्रकार पूछता नहीं उस

यासीन मलिक का आधे-आधे पन्ने का इंटरव्यू

अमेरिका के अख़बारों में आता है । चूंकि यासीन मलिक को अमेरिका की शह है इसलिए

यासीन मलिक पर कभी आतंकवादी हमला नहीं होता। और मुझे दुःख है ये कहते हुए कि जो कश्मीरी नेता जम्मू कश्मीर को अलग करने की बात करता है उसको भी सबसे ज्यादा सुरक्षा भारत सरकार उपलब्ध कराती है

[8/27, 11:54] +91 97607 93343: RSS ने बहुत बुद्धिमानी से यह सिद्ध किया की नाथूराम गोडसे से rss का कोई सम्बन्ध नही और इसीलिए राहुल गांधी को अपने कहे कथन से पलटना पड़ा ।

आप सभी पाठको से प्रश्न है

क्या गांधी कोई महापुरुष था??

यह गांधी संसार का सबसे बड़ा कमीना, मुसलमानो का एजेंट था जिसने सिर्फ और सिर्फ हिन्दू समाज का विनाश ही किया है ।

मुस्लिमो द्वारा हिन्दू-सिख महिलाओं के बलात्कार पर गांधी के राय को जान आपका खून खौल उठेगा

👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽👇🏽

विभाजन से ठीक पहले, पश्चिमी पंजाब में जब हिंदू और सिख महिलायें बड़ी संख्या में मुसलमानों द्वारा बलात्कार की जा रही थी, तब गांधी ने महिलाओं को सलाह दि कि अगर कोई मुसलमान हिंदू और सिख महिलाओं का बलात्कार करने की इच्छा प्रकट करते हैं तो वह उन्हें न तो इंकार करें ना ही विरोध करें। इसके बजाय वह उनके साथ सहयोग करें। वह एक मृत के समान लेट कर अपनी जीभ को अपने दांतों के बीच रख लें

6 जुलाई, के नवजीवन के प्रकाशन में गांधी का यह कथन गांधीवाद का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण था|

गांधी ने अनेक बार अहिंसा की दुहाई देते हुये कहा था कि राणा प्रताप, गुरू गोविंद सिंह, राजा रंजीत सिंह और राजा शिवाजी सबके सब भटके हुए राष्ट्रभक्त थे,” क्योंकि उन्होंने मुसलमानों के साथ युद्ध किया था।

उनका यह विचार था कि हिंदुओं से यह उम्मीद की जाती है कि केवल हिंदुओं को ही बलिदान करना चाहिये। हिंदुओं को मुसलमानों के हर तरह के अपराध को बिना किसी शिकायत या विरोध के क्षमा करना चाहिये।

http://www.dainikbharat.org/2016/08/blog-post_281.html?m=1

ऐसे गांधी को मारने में क्या गर्व की अनुभूति नही होती??

ऐसे गांधी को मारने में झूठा श्रेय भी मिले तो भी गर्व होता है ।

यहाँ तो सत्य यह है की हुतात्मा गोडसे कुछ समय Rss से जुड़े भी रहे, बाद में छोड़ दिया ।

गोडसे के लेखो और वक्तव्य से यह स्पस्ट है की इनके ऊपर हिन्दू महासभा व् आर्यसमाज के सिद्धांतो का बहुत प्रभाव था और इन्ही से प्रेरणा लेकर क्रन्ति का मार्ग चुना और हैदराबाद निजाम के विरुद्ध आंदोलन में अग्रणी रहे ।

 

ऋषि दयानंद के सम्बन्ध में गोडसे कहते है की ऋषि दयानंद का कोई भी शिष्य कभी गांधीवादी नहीं बन सका और आर्यसमाज के क्रांतिकारी सिद्धांतो से प्रेरणा लेकर उन्होने क्रांति  का मार्ग चुना।

१९२६ में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द की अब्दुल रशीद नामक मुस्लिम युवक ने हत्या कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल व् राष्ट्र-विरोधी कहा।

मित्रो में यह नही कहता कि गौडसे, रामप्रसाद विस्मिल और लाला लाजपत राय की तरह कट्टर व् दृढ़ आर्यसमाजी थे पर जो भी थोड़ा बहुत प्रभाव था उन पर आर्य विचारो का, उसके लिए में उनके गांधी वध कृत्य का अभिनंदन करता हूँ ।

और एक आर्य होने के नाते घोषणा करता हूँ की आर्यसमाज ने ही गांधी जैसे अधार्मिक दुष्ट की ह्त्या की है और इस पर समस्त आर्यो को गर्व है ।

हमारे लिए यह मुहँ छिपाने की बात नहीं बल्कि समस्त संसार को गर्व से बताने की बात है।

संसार को सबसे पहले मुसलमानो और ईसाइयो के आतंक पाखण्ड और कुकृत्यों को सामने लाने वाला आर्यसमाज ही है।

गौडसे के गुरु सावरकर जी कहते है, आर्यसमाज हिन्दुओ के ठन्डे खून को गर्म करने का काम करता है.

हिन्दू महासभा के नेता मालवीय जी कहते है की आर्यसमाज सो गया हिन्दू समाज नष्ट हो जाएगा.

Rss ने कभी कोई क्रांति नही की, कोई क्रांतिकारी rss से पैदा नही हुया ।

मुस्लिम लीग बनने के बाद, मुसलमानो से हिन्दुओ की रक्षा के उद्देश्य हेतु व् हिन्दू संस्कृति के उत्थान हेतु rss का गठन हुया ।

परंतु आज सच्चाई बिलकुल विरुद्ध है

1: आज rss मुसलमानो को राष्ट्रवादी मानती है, इफ्तार दावते देती है, अपने संघठन में सदस्य बनाती है ।

2: आज rss में गौमांस खाने वाले लोग भी सदस्य है, बीड़ी सिगरेट दारु मांस खाने वाले भी rss के प्रमुख है ।

जो लोग खुद संस्कृति के विरुद्ध कार्य करे, क्या वो संस्कृति की रक्षा कर सकते है?

आज आर्यसमाज की शक्ति क्षीण है परंतु आज भी आर्य लोग संस्कृति के विरुद्ध बीड़ी सिगरेट मांस नहीं खाते,

कभी मुसलमानो को अपना भाई नहीं कहते बल्कि इस राष्ट्र को इस्लाम मुक्त करना चाहते है

कोई आर्य अगर इन मूल सिद्धान्तों के विरुद्ध कार्य करता हुया पाया जाता है तो उसे आर्य लोग समाज से बहिस्कृत कर देते है, जैसे एक दुष्ट है अग्निवेश जो अपने को आर्यसमाजी कहता है और वास्तव में एक कम्युनिष्ठ है और उसे सभी आर्यो की सभाओं ने बहिस्कृत कर दिया है।

मुझे गर्व है नाथूराम गौडसे पर और खुद के आर्य होने पर⁠⁠⁠⁠

+++

 

वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने का षड्यंत्र

10/18/2016

http://www.aryavrt.com/muj16w42b-pension-rajyapal-16o17

 

१४/१०/१६

http://www.aryavrt.com/muj16w42ay-3tlaq-16o15

 

मैंने माना कि दशहरा के लिए लखनऊ को चुनना सेवक जी की राजनीति का हिस्सा था।

मैंने माना कि प्रभु श्रीराम,लक्ष्मण,एवं हनुमान जी का किरदार निभा रहे कलाकारों के तिलक लगाना सेवक जी की राजनीति का हिस्सा था।

मैंने माना की मंच पर खड़े होकर जय श्रीराम कहना सेवक जी की राजनीति का हिस्सा था।

तो एक प्रश्न अन्य पार्टियों के नेताओ से...

आपने ऐसी राजनीति क्यों नही की??

आप क्यों न आये लखनऊ रामलीला मैदान में??

आपने क्यों नही तिलक लगाया किरदारों के??

आपने क्यों नही जय श्रीराम कहा??

किसने रोका था आपको??

सेवक जी हिन्दू हैं और हिन्दू अपने त्यौहार को मनाये तो भी राजनीति!!!

अपने त्यौहार में अपने आराध्य के नाम का जैकारा लगाए तो भी राजनीति!!!

अन्य पार्टी के नेता ईद में या अन्य त्योहारों में जालीदार टोपी लगाए तो वाह वाही!!!

सेवक जी टोपी न लगाए तो राजनीति!!!

अन्य पार्टी के नेता इफ्तार पार्टी में जाए और दसहरा में जय श्रीराम का जयकारा न लगाए तो वाह वाही!!!

और सेवक जी इफ्तार पार्टी में न जाकर जय श्रीराम का जयकारा लगाये तो राजनीति!!

वाह रे राजनेताओ वाह....

भैया हमने तो नही देखा कल किसी कंगी,सपाई,बसपाई नेता को किसी दशहरे के मेले में किसी मंच पर खड़े होकर जय श्रीराम कहते हुए!!!

क्यों??

क्या जय श्रीराम कहने से इनकी गद्दी डोल जायेगी??

जो सेवक जी ने किया वो हर हिन्दू का कर्तव्य है और सेवक जी ने कुछ नया नही किया।

उन्होंने वही किया जो एक हिन्दू को करना चाहिए।

इसलिए छाती पीटने वालो को छाती पीटने दो और आओ सब मिल बोलो---

जय श्रीराम

जय जय श्रीराम

🙏🏻🚩🇮🇳भारत माता की जय🇮🇳🚩🙏🏻

🙏🏻💐 भाजपा लक्ष्मण चौधरी " जिला महामंत्री " जिला - करौली ( राजस्थान )

+++

तर्कशील हिंदू बनें ॥

मुल्ला जी से संवाद :--

मुल्ला जी :- ये तुम्हारे गणेश का मूँह हाथी का कैसे

हो सकता है ?

पंडित जी :- जैसे मुहम्मद साहब की गधी ( अल

बुराक ) का मूँह औरत का हो सकता है ।

मुल्ला जी :- ये तुम्हारा हनुमान पहाड़ कैसे उठा

सकता है ?

पंडित जी :- जैसे मुहम्मद चाँद के दो टुकड़े कर

सकता है ।

मुल्ला जी :- ये तुम्हारे शिव लिंग पूजना

अश्लीलता है ।

पंडित जी :- जैसे तुम्हारे शिवलिंग ( काबा खाना )

चूमना अशलीलता है ।

मुल्ला जी :- ये तुम्हारे स्वर्ग में इन्द्र की इतनी

अपसराएँ कैसे हो सकती हैं ?

पंडित जी :- जैसे तुम्हारे अल्लाह की बीबीयाँ

जन्नत में हो सकती हैं ।

मुल्ला जी :- तुम्हारे यहाँ मूर्तीपूजा करना पाखंड

है ।

पंडित जी :- जैसे तुम्हारे यहाँ कब्र पूजना और

ज़ियारत करना पाखंड है ।

मुल्ला जी :- तुम्हारे यहाँ व्रत रखना पाखंड है ।

पंडित जी :- तुम्हारे यहाँ रोज़ा रखना पाखंड है ।

मुल्ला जी :- हमने तुमपर 1000 साल तक राज

किया

पंडित जी :- आपके डरपोक हिंदू पूर्वजों पर

अरबीयों ने राज किया जिससे कि आप मुसलमान

बने हम नहीं ।

मुल्ला जी :- आपके यहाँ सती प्रथा और देवदासी

प्रथा प्रचलित है ।

पंडित जी :- आपके यहाँ हलाला और हुज्ल की

प्रथा प्रचलित है

मुल्ला जी :- आप गाँय को माता क्यों कहते हो बैल

को बाप क्यों नहीं ?

पंडित जी :- आप आयशा को उनमूलमोमीन ( माँ )

क्यों कहते हो ? मुहम्मद को बाप क्यों नहीं ?

( नोट :- हिंदू तर्क करना सीखे )

जय श्रीराम⁠⁠⁠⁠

गालिबपुरा मे रहनेवाले चचा अजमेरी बहुत ही इंसाफ परस्त है , कल नसीम पंचर वाले ने दारू पी कर अपनी साली (खाला की छोटी लौडिंया) को बुरी नज़र से दबोच लिया ,लौडिया ईमानवाली थी तो जोर से चिल्लाई ।

 

 चीख पुकार सुनकर नसीम की बीबी फरजाना दौड़ी दौड़ी वहाँ पहुँची और नसीम की गिरफ्त से अपनी बहन को छुड़ाया l

नशे और साली की जवानी से कबड्डी खेलने के मद मे चूर नसीम ने पहले तो फरजाना को लतियाअा और वहाँ से चले जाने को कहा, लेकिन तब तक अड़ोसियों पड़ोसियों के आ जाने से मामला बिगड़ गया ।

 

 नसीम का थोबड़ा मुहल्ले की औरतो ने मार मार कर लाल और नीला कर दिया तो गुस्से से और अपने मकसद मे नाकाम नसीम ने फरजाना को बोला --

#तलाक_तलाक_तलाक !!

 

मुहल्ला गालिबपुरा की मस्जिद तक बात पहुँची सबने नसीम को लानत मलानत दी, लेकिन फरजाना के तलाक वाला मसला अटक गया।

 

 बक़ौल चाचा अजमेरी #शरीयत के हिसाब से फरजाना का तलाक हो गया है भले ही नसीम की लाख गलती सही।

 

 वहाँ खड़े एक लड़के ने कहा कि अगर नसीम का दिया तलाक सही है तो फिर #नसीम_के_दोनो_हाथ_और_लिंग_भी_काटा जाए क्योंकि इसने एक नाबालिग लड़की को #गलत_नीयत से पकड़ा है ।

 

पूरी भीड़ मे सन्नाटा खिच गया...!!!

 

 सब चुप तभी चचा अजमेरी ने उस लड़के को घुड़कते हुए कहा मियाँ ये #हिन्दुस्तान_है_यहाँ_तालिबान की हुकूूमत नही चलती, यहाँ कानून का शासन है , #संविधान नाम की भी कोई चीज होती है मियाँ, फिर चाहे वो इण्डिया का हो या ब्रिटिश इण्डिया का, काले कारनामो के बाद अपने ही खोदे खड्डे (शरीयत) में गिरने से बचने के काम तो आता है।

 

बड़े आये शरीयत शरीयत करने  साले !!⁠⁠⁠⁠

 

+++

 

+++

जी हाँ! ३ तलाक भारतीय संविधान के विरुद्ध है.

मुस्लिम निजी कानून सरिया कानून को मान्यता देता है. यदि ३ तलाक संविधान विरुद्ध है तो मस्जिद, अज़ान, खुत्बे, का विरोध, काफ़िर को जीवित छोड़ना और दार उल हर्ब इंडिया का अस्तित्व में रहना भी सरिया कानून के विरुद्ध है.

 

+++

#महत्वपूर्ण_जानकारी

#पढ़ें_जाने_और_Shareकरें...

आतंकवादी मारने की सज़ा दी थी कांग्रेस ने,

आज भी उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे हैं वो जवान।

 

*वो 30 अप्रैल 2010 का समय था!*

*स्थान था कश्मीर का मच्छिल सेक्टर!*

 

*हमारी सेना का कर्नल डी के पठानिया कश्मीर में अपने जवानों की एक एक कर के अपनी आँखों के आगे वीरगति देख रहा था!*

*उसकी बटालियन के हाथ और पैर दिल्ली में बैठी दुर्दांत आतंकी संगठन कांग्रेस की सरकार ने बाँध रखे थे!*

*वो बेचैन भारत माँ का लाल हर दिन अपने हाथों से अपने किसी शूरवीर जवान का अंतिम संस्कार कर रहा था, पर दिल्ली में बैठी आतंकी संगठन की सरकार बस एक आदेश देती थी:*

*जो हो रहा है उसे होने दो! ज्यादा देश भक्ति सवार है क्या? वर्दी से नहीं तो कम से कम अपने परिवार से प्रेम करो और चुप रहो!*

*एक दिन उस से ना रहा गया!*

*30 अप्रैल 2010 को वो महावीर कर्नल पठानिया ने स्वयं को आतंकी संगठन कांग्रेस के हर आदेश, हर बाध्यता, हर नियम से मुक्त कर डाला!*

*उसके साथ इस पावन अभियान में उसका अधीनस्थ मेजर उपेन्द्र आया! उसके साथ हवलदार देवेंद्र कुमार, लांस नायक लखमी व सिपाही अरुण कुमार भी आये और आतंकी संगठन कांग्रेस के हर आदेश की धज्जी उड़ाते हुए इन महावीरों ने सेना वो काफिरों को तंग कर चुके शहज़ाद अहमद , रियाज़ अहमद व् मोहम्मद शफ़ी को अपने खुद के नियम और खुद के क़ानून से मार गिराया!*

*कर्नल पठानिया और मेज़र उपेन्द्र का खौफ़ हिमालय की घाटी में बन्दूक और तोपों की आवाज से भी ज्यादा गूँज गया! वहां खुद को आतंकी कहने वाला अपना हुलिया बदल कर बंदूक की जगह बुरका पहन कर घूमने लगा!*

*