Al-Taqiyya

क्या आपने अपने आस पास ऐसे निम्नलिखित शब्द सुने या पढे है ?

कभी जानने का प्रयास किया है इनका अर्थ क्या है?

1) उम्मा (Ummah) – एक अरबी शब्द जिसका अर्थ है Community (समुदाय) या राष्ट्र (Nation), परन्तु इसका उपयोग अल्लाह को मानने वालों” (Believers) के लिए ही होता है

2) दारुल इस्लाम (Dar-ul-Islam) – ऐसे तमाम मुस्लिम बहुल इलाके, जहाँ इस्लाम का शासन चलता है, सभी इस्लामिक देश इस परिभाषा के तहत आते हैं।

3) दारुल-हरब (Dar-ul-Harb) – ऐसे देश अथवा ऐसे स्थान, जहाँ शरीयत कानून नहीं चलता, तथा जहाँ अन्य आस्थाओं अथवा अल्लाह को नहीं मानने वाले लोगों का बहुमत होअर्थात गैर-इस्लामिक देश।

4) काफ़िर (Kafir) – ऐसा व्यक्ति जो अल्लाह के अलावा किसी अन्य ईश्वर में आस्था रखता हो या मूर्तिपूजक हो। अंग्रेजी में इसे Unbeliever यानी नहीं मानने वालाकहा जाता है (ध्यान रहे कि इस्लाम के तहत सिर्फ़ मानने वालेया नहीं मानने वालेके बीच ही वर्गीकरण किया जाता है).

5) जेहाद (Jihad) – इस शब्द से अधिकतर पाठक वाकिफ़ होंगे, इसका विस्तृत अर्थ जानने के लिए क्लिक करें… (http://en.wikipedia.org/wiki/Jehad) वैसे संक्षेप में इस शब्द का अर्थ होता है, “अल्लाह के पवित्र (?) शासन हेतु रास्ता बनाना…” वह पवित्र शासन है, धर्मामान्तरण, लूट, बलात्कार और हत्या|

6) अल-तकिय्या (Al-Taqiyya) – चतुराई, चालाकी,चालबाजी,षडयंत्रों के जरिये इस्लाम के विस्तार की योजनाएं बनाना। सुन्नी विद्वान इब्न कथीर की व्याख्या के अनुसार अल्लाह को मानने वाले”, और नहीं मानने वालेके बीच कोई दोस्ती नहीं होनी चाहिए, यदि किसी कारणवश ऐसा करना भी पड़े तो वह दोस्ती मकसद पूरा होने तक सिर्फ़ बाहरी स्वरूपमें होनी चाहिए

बहरहाल, तमिलनाडु के मेल्विशारम और कील्विशारम के उदाहरणों तथा इन परिभाषाओ से आप जान ही चुके होंगे कि समूचे विश्व को दारुल इस्लामबनाने की प्रक्रिया में अर्थात एक उम्माके निर्माण हेतु अल-तकिय्याएवं जिहादका उपयोग करके दारुल-हरबको दारुल-इस्लाममें कैसे परिवर्तित किया जाता है फ़िलहाल आप चादर तानकर सोईये और इंतज़ार कीजिए, कि कब और कैसे पहले आपके मोहल्ले, फ़िर आपके वार्ड, फ़िर आपकी तहसील, फ़िर आपके जिले,फ़िर आपके संभाग, फ़िर आपके प्रदेश और अन्त में भारत को दारुल-इस्लामबनाया जाएगा

ऐसे समाज के पास सदाचार कहां है? जिस समाज के पास सदाचार नहीँ है वह भ्रष्टाचार कैसे मिटाएगा? अल्लाह व जेहोवा महान इसलिए हैं कि उन्होंने लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरे की मातृभूमि पर बलपूर्वक अधिकार और धर्मान्तरण और राष्ट्रन्तरण के बदले अपने अनुयायियों को जीविका, जन्नत और गाजी की उपाधि दे दिया है।

 

जले पर नमक छिड़कने के लिए इन्हीं पुस्तकों को ईसाई व मुसलमान धर्म पुस्तक कहते हैं। यदि ये धर्म पुस्तकें हैं तो फिर अधर्म व अपराध क्या है? यदि सम्पत्ति समाज की है तो समाज लुटेरा क्यों नहीं?

 

तथाकथित लोकसेवक (सर्वहारा तानाशाह) की बुद्धि पर तरस आता है। वे लुटने के लिए लूट रहे है । इतना ही नहीँ, वे स्वेच्छा से अपनी कब्र खोद रहे है । स्वयम् सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा भी सुरक्षित नहीँ है। अपनी जीविका के लिए वे स्वेच्छा से अपनी स्वतंत्रता, अपना जीवन, अपनी नारियां और अपना धन दांव पर लगा रहे है। उन्हेँ चाहिए कि वे ईश्वर की शरण मे  आएं। मात्र ईश्वर ही उनको दासता से मुक्ति, (गीता ७:२१) सम्पत्ति का अधिकार, (मनुस्मृति ८:३०८) और नारियो को सम्मान दे सकता है।

 

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मुसलमानों व ईसाइयों' को आप की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, इसका विकल्प चुन कर हमे भी बताइयेगा|

 

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

 

चालबाज़ अल्लाह : दगाबाज़ मुसलमान !!---

 

 मुसलमानों का छल-कपट, विश्वासघात, मक्कारी और धोखे की नीति दुनिया भर में कुख्यात है. ऐसे कई उदाहरण मिल जायेंगे कि जिसने भी मुसलमानों की कसमों या उनकी बातों पर विश्वास किया, उसे जरूर किसी संकट का सामना करना पडा|

 

अक्सर मुसलमान यह बात कहते हैं, कि हम तो अपने ईमान के पक्के हैं. क्योंकि मुसलमान शब्द का मतलब ही है "मुसल्लम ईमान" यानी पूरा ईमान. लोग गलती से ईमान का तात्पर्य उनकी Honesty सत्यवादिता Truth fullness, या उनकी आस्था Creed समझ लेते हैं .

 

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मुसलमानों के दो गुप्त ईमान policies हैं और भी हैं, जिनका प्रयोग मुसलमान खुद को बचाने और दूसरों को धोखा देने में करते हैं. मुसलमानों कि इन दो नीतियों Policies या ईमान का नाम है, तकिय्या और कितमान.

भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयतइस्लामसमाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है (बाइबलयाशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६) न किसी का जीवन सुरक्षित है। (बाइबललूका १९:२७) व (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त व ३९ग)]. किसी का उपासना गृह सुरक्षित नहीं। [(बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३) (अज़ान व कुरआन १७:८१)]. आजादी नहीं भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम१९४७ व {भारतीय संविधानअनुच्छेद ६ (ब)(।।)आस्था की आजादी नहीं। (व्यवस्था विवरण१३:६-११) व (कुरान ४:८९)]. यहाँ तक कि मानव की आस्थाएं और उनके देवता भी अपमान की सीमा में आ गए हैं। मूसा ने बताया कि जेहोवा ज्वलनशील देवता है (बाइबलनिर्गमन २०:३)। जेहोवा के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा नहीं हो सकती। ईसा ने स्वयं को मानव मात्र का राजा घोषित कर रखा है। (बाइबललूका १९:२७). जो ईसा को राजा स्वीकार न करे उसे कत्ल करने का प्रत्येक ईसाई कोभारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) के अधीनअसीमित मौलिक अधिकार है। तकिय्या व कितमान के अधीन यही गंगा-यमुनी संस्कृति कही जा रही है। इसी प्रकार प्रत्येक ईमाम भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के प्रावधानों का उल्लंधन करते हुएअज़ान व नमाज द्वारा गैर मुसलमानों की आस्था का अपमान करता हैकश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है-फिर भी पुलिस व प्रशासन अज़ान व नमाज को बंद कराने की कोई कार्यवाही नहीं कर सकतीक्यों कि ईसाई व मुसलमान को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन राष्ट्रपतिराज्यपाल व जिलाधीश आत्मघात के मूल्य पर संरक्षण देने को विवश हैं। क्यों कि राष्ट्रपति व उसके राज्यपालों ने भारतीय संविधान व कानूनों को बनाए रखने की शपथ ली है। राज्यपालों की एक विशेषता और है। यह लोग जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं होते हैं। आज कल यह लोग सुपर प्रधानमंत्री एंटोनिया माइनो उर्फ सोनिया गांधी द्वारा मनोनीत किए जा रहे हैंजो जेसूइट है। जिसे ईसा ने भारत को अर्मगेद्दन द्वारा ईसाई राज्य बनाने का आदेश दिया हुआ है।

  ऐसे समाज के पास सदाचार कहां है? जिस समाज के पास सदाचार नहीँ है वह भ्रष्टाचार कैसे मिटाएगा? अल्लाह व जेहोवा महान इसलिए हैं कि उन्होंने लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरे की मातृभूमि पर बलपूर्वक अधिकार और धर्मान्तरण और राष्ट्रन्तरण के बदले अपने अनुयायियों को जीविका, जन्नत और गाजी की उपाधि दे दिया है।

जले पर नमक छिड़कने के लिए इन्हीं पुस्तकों को ईसाई व मुसलमान धर्म पुस्तक कहते हैं। यदि ये धर्म पुस्तकें हैं तो फिर अधर्म व अपराध क्या है? यदि सम्पत्ति समाज की है तो समाज लुटेरा क्यों नहीं?

तथाकथित लोकसेवकोँ (सर्वहारा तानाशाहोँ) की बुद्धि पर तरस आता है। वे लुटने के लिए लूट रहे है । इतना ही नहीँ, वे स्वेच्छा से अपनी कब्र खोद रहे है । स्वयम् सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा भी सुरक्षित नहीँ है। अपनी जीविका के लिए वे स्वेच्छा से अपनी स्वतंत्रता, अपना जीवन, अपनी नारियां और अपना धन दांव पर लगा रहे है। उन्हेँ चाहिए कि वे ईश्वर की शरण मे  आएं। मात्र ईश्वर ही उनको दासता से मुक्ति, (गीता ७:२१) सम्पत्ति का अधिकार, (मनुस्मृति ८:३०८) और नारियो को सम्मान दे सकता है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) मुसलमानों व ईसाइयों' को आप की हत्या का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार देता है, इसका विकल्प चुन कर हमे भी बताइयेगा|

http://en.wikipedia.org/wiki/Armageddon

चालबाज़ अल्लाह : दगाबाज़ मुसलमान !!---

 मुसलमानों की छल-कपट, विश्वासघात, मक्कारी और धोखे की नीति दुनिया भर में कुख्यात है. ऐसे कई उदाहरण मिल जायेंगे कि जिसने भी मुसलमानों की कसमों या उनकी बातों पर विश्वास किया, उसे जरूर किसी संकट का सामना करना पडा|

अक्सर मुसलमान यह बात कहते हैं, कि हम तो अपने ईमान के पक्के हैं. क्योंकि मुसलमान शब्द का मतलब ही है "मुसल्लम ईमान" यानी पूरा ईमान. लोग गलती से ईमान का तात्पर्य उनकी Honesty सत्यवादिता Truth fullness, या उनकी आस्था Creed समझ लेते हैं . 

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मुसलमानों के दो गुप्त ईमान policies और भी हैं, जिनका प्रयोग मुसलमान खुद को बचाने और दूसरों को धोखा देने में करते हैं. मुसलमानों कि इन दो नीतियों Policies या ईमान का नाम है, तकिय्या और कितमान.

इनका विवरण इस प्रकार है ---

1 -तकिय्या تقيه Taqiyya ---

इसका अर्थ है छल Deception, ढोंग, ढकोसला Subterfuge दिखावा, सत्य को नकारना, बहाने बनाना आदि हैं.

उदाहरण - जब किसी इस्लामी किताब में कोई खराब बात बताई जाती है, तो मुसलमान कहते हैकि अनुवाद गलत है, अमुक शब्द का अर्थ कुछ और है. हम इस फतवे या हदीस को नहीं मानते  या यह आयत मंसूख (रद्द) हो चुकी है आदि आदि|

2 -कितमान كِتمان Kitaman ---

इसका अर्थ है आड़ Concealment झूठ Lying मिथ्या आरोप लगाना False blaming और Omission आदि.

उदाहरण - जब मुसलमानों की गलतियाँ पकड़ी जाती हैं, तो वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए दूरारों में वही गलतियां बताने लगते है, और लोगों को गुमराह करने के लिए गाली गालोच करने लगते हैं, दवाब डालने के लिए हंगामा करते हैं, हिंसा करते है आदि आदि|

हमें मुसलमानों की इन चालबाजियों, मक्कारियों और कपट से सावधान रहना चाहिए. क्योंकि स्वयं अल्लाह ही मक्कार है. देखिये ----

3 -अल्लाह की मक्कारी से सावधान रहो ---

"क्या लोग अल्लाह की छुपी हुई चालों (मक्कारी) से बेफिक्र हो गए हैं, अल्ला की चालों (मक्कारी) से जो लोग बेफिक्र हो जाते है, वे जरूर घाटे में पड़ जाते हैं सूरा अल आराफ -7 :99."

4 -अल्लाह सबसे बड़ा मक्कार है ---

"अल्ल्लाह लोगों की बातों को ताड़ता रहता है, और गुप्त चालें (मक्कारी) चलता रहता है, बेशक अल्लाह सबसे बढ़ कर चालें चलने वाला (मक्कार) है "सूरा आले इमरान -3 :54."

5 -मुसलमान कपटी हैं --- 

"जो तुम्हारे दिलों में गुप्त योजनायें हैं, तुम चाहो तो उन्हें छुपा लो, या चाहो तो प्रकट कर दो, क्योंकि ज़मीन और आसमान के बीच जो कुछ है उस पर तुम्हारा ही अधिकार है "सूरा -आले इमरान 3 :28."

6 - अपने वादे तोड़ दो ---

"तुम जो कसमे खाते हो तो अल्लाह तुम्हें खायी गयी कसमों को तोड़ने पर नहीं पकड़ेगा "सूरा -बकरा 2 :225."

"अल्लाह ने तुमको तुम्हारी खायी गयी कसमों से मुक्त करना जरूरी समझा है, अब तुम अपनी कसमे तोड़ सकते हो. क्योंकि करता धरता तो अल्लाह ही है. और अल्लाह बड़ा ज्ञान वाला है "सूरा -अत तहरिम 66 :2."

7 - नमाज भी एक ढोंग है  ----

"और जब वे (मुसलमान) नमाज के लिए खड़े होते हैं, तो बेमन से कसमसाते हुए दिखाने के लिए खड़े होते हैं, वे अल्लाह को थोड़े ही याद करते हैं, वे तो सिर्फ नमाज का दिखावा करते हैं. सूरा -निसा 4 :142."

8 -धोखे से क़त्ल करो ---

"एक ईमान वाले (मुसलमान) ने फिरौन के सामने अपना ईमान छुपाया और फिर खुद को फिरौन का आदमी बताया, फिर फिरौन के एक आदमी को क़त्ल कर दिया "सूरा -अल मोमिनीन 40 :28."

9 -मुसलमान किसी के मित्र नहीं होते ---

"ईमानवालों को चाहिए कि वे किसी भी बे ईमान वाले (गैर मुस्लिम) को दोस्त या अपना संरक्षक नहीं समझें "सूरा -आले इमरान 3 :28." 

मुसलमानों के तकिय्या, "हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं|"(?) के विभिन्नता में अज्ञानी वैदिक पंथी लोग भी सुर से सुर मिला कर कहते सुने जा सकते हैं, “सभी धर्म सृष्टि रचयिता ईश्वर तक पहुँचने के अलग अलग मार्ग हैं|” लेकिन यह सरासर झूठ हैईसाइयत और इस्लाम पंथ हैं और दोनों अपने अनुयायियों को वीर्यहीन कर दास बनाने के घातक तन्त्र हैंमैं इसकी विस्तृत चर्चा अन्यत्र करूँगादेश की सत्ता के शिखर पर कैथोलिक ईसाई सोनिया भी है और मुसलमान हामिद भी! दोनों के भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से रक्षितपोषित और प्रोत्साहित हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम हैजब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा|

काफिरों को इस्लाम के बारे में चार सीधी सच्चाईयाँ जाननी चाहियें|

अज्ञान वश काफ़िरों ने घातक धारणा बना रखी है कि उनके अपने धर्म की भांति इस्लाम भी एक धर्म है| मै अपने प्रतिवाद में चार सच्चाईयाँ उद्धृत कर रहा हूँ:-

| काफिरों को धोखा देने के लिए मुसलमान तकिय्या (कुरान :२८ १६:१०६) का प्रयोग कर यह विश्वास दिलाते हैं कि कुछ दिग्भ्रमित मुसलमानों ने उनके मजहब का अपहरण कर लिया है और इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं| लेकिन इस्लाम का अपहरण नहीं होता है| यद्यपि काफ़िर ऐसा ही मानते हैं क्यों कि उनकी गलत धारणा है कि सभी धर्म समान हैं| काफ़िरों की यह त्रुटिपूर्ण धारणा इसलिए है कि वे समझते हैं कि कोई धर्म शांतिप्रिय नागरिकों की हत्या और लूटमार को बढ़ावा कैसे दे सकता है? अतः सचमुच ही कुछ सिरफिरे मुसलमानों ने इस्लाम का अपहरण कर रखा है| यदि एक बार काफिरों को इस्लाम की असलियत समझ में जाये तो वे इस्लाम से बचने का सही मार्ग ढूँढना प्रारम्भ कर देंगे|

| इस्लाम की उन्नति के लिए अल्लाह मुसलमानों को धोखा देने की अनुमति देता है| इसे अल्लाह तकिय्या कहता है| लेकिन काफिरों को तकिय्या के इस्लामी सिद्धांत का ज्ञान नहीं है| तकिय्या के सिद्धांत का ज्ञान काफिरों को अल्लाह की धोखाधड़ी से बचायेगा| वे मौलवियों ईमामों की हर बात पर विश्वास करना बंद कर देंगे|

| धरती पर शरिया कानून लगाने के लिए प्रयत्नशील रहना हर मुसलमान का मजहबी दायित्व है| इसे जिहाद कहा जाता है| हर व्यक्ति को मुसलमान बनाना और धरती को शरिया आधारित इस्लामी राज्य बना लेना ही जिहाद है| यदि काफ़िर इस सच्चाई को जान लें तो वे इस्लाम को धरती पर टिकने नहीं देंगे|

| चूंकि मूर्ख मुसलमानों ने (कुरान :३५) स्वेच्छा से शासकों की दासता स्वीकार कर ली है| अतः शासक निज हित में इस्लाम को संरक्षा, सुरक्षा और बढ़ावा दे रहे हैं और सच्चाई को छिपाने के हर प्रयास कर रहे हैं|

"किसी गैर मुसलमान को जीने का अधिकार न मुसलमान देता है और न किसी उस व्यक्ति को जीने का अधिकार ईसाई देता है, जो ईसा को अपना राजा नहीं मानता. फिर स्वतंत्रता’ कैसे मिली यह पूछते ही या तो आप ईश निंदा में कत्ल हो जायेंगे या भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ अथवा २९५ में जेल में होंगे. जज तो राज्यपाल का बंधुआ मजदूर है."

आपने स्वयं और अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, देश के लिए भी कुछ करिये,

सवाल: मौहम्मद ही सच मे अरबी अल्लाह का दूत है ,इसका क्या सबूत है ??
मुस्लिम: क्योकि कुरान मे लिखा है !
सवाल: कुरान के लिखे पर कैसे विश्वास किया जाए की ये क्या कहती है ,क्या नही ??
मुस्लिम: क्योकि हमारे अल्लाह ने कुरान को भेजा है !

मेरी टिप्पणियाँ लाल रंग में हैं.

धूर्त मुहम्मद रचित लुटेरों, हत्यारों और बलात्कारियों की संहिता कुरान के महामूर्ख अल्लाह का कथन है कि पृथ्वी चपटी है| (७९:३०) सूर्य कीचड़ युक्त जलस्रोत में डूब रहा था| (कुरान १८:८६). इसके अतिरिक्त ७३:१४ व १८ के कथन भी पढ़ें| अल्लाह महान व सर्वज्ञ कैसे है? मुसलमान बताएं|

सवाल: क्या सबूत है अल्लाह ही सचमुच ईश्वर है और कुरान की बाते अल्लाह का पैगाम है ??
मुस्लिम: क्योकि हमारे रसूल मौहम्मद ने ऐसा कहा है !
अब यहा फिर शुरू से पहला सवाल पूछना पडेगा और आखिरी सवाल पर आना पड़ेगा
ये तो कुछ ऐसे हुआ जैसे कि "मै खुदा हू और इसका सबूत ये है कि मै कह रहा हूँ ...

अल्लाह और कुरान के होने का आधार सिर्फ मोहम्मद है क्योकि मोहम्मद ने ये सब होने का दावा किया था !
अल्लाह के नाम पर चालाकी से मुहम्मद खुद की पूजा करवाना चाहता था,
इसलिये उसने एक मंत्र भी बनाया, जिसमे अल्लाह के साथ उसका भी नाम लिया जाये!

उस मंत्र को कलिमा कहते हैं. मंत्र है"ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू". इस अरबी वाक्य का अक्षरशः अर्थ है, “केवल अल्लाह की पूजा हो सकती है. मुहम्मद अल्लाह का रसूल है|” अगर कोई काफ़िर कलिमा को अपने ईष्टदेव की निंदा कहे और पंथनिरपेक्ष पूजा न माने, तो उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन - दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल जेल भेजवाने के लिए विवश हैं. कोई जज कुरान के विरुद्ध सुनवाई नहीं कर सकता. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). 

क्योकि मुहम्मद अरब का था तो उसने अरबी अल्लाह ,अरबी फरिश्ते ,कुरान अरबी मे , नबी अरब के ,हज अरब मे और अरबी इबादती तरीको को मिलाकर अरबी साम्राज्यवाद को इस्लाम का नाम दे दिया !

इस तरह वो अपनी करतूतो को धर्म का जामा पहिना कर उसे जायज बना देता था, और अपनी बेतुकी बातों को अल्लाह का आदेश बता देता था और लालची, अज्ञानी अरब उसे मान लेते थे !

आज मुस्लिम अपने अरबी मजहब की चमकदार मार्केटिंग करने के लिए और शरियत का माहौल तैयार करने के लिए जी जान से जुटे रहते है !
लेकिन अंदर से इन्हे अपने मजहबी झूठ के पर्दाफाश हो जाने का भय सताता रहता है
और इस झूठ के बोझ को संभालने के लिए मुसलमान कैसे रात दिन एक कर देते है ,एक आनलाइन डिबेट मे इसका नमूना देखिए :-

1)सबसे पहले मुस्लिम बोलते है कि ये सब तथ्यहीन आधारहीन है ,अज्ञानता है ,इस्लाम मे कोई जबरदस्ती नही है! अगर आप रैफरेंस देंगे वो सिरे से नकार देंगे और
आपको पूरी तरह कुरान स्टड़ी करने को बोला जायेगा तभी
रोशनी मिलेगी !

यही तकिय्या है.
2)अगर आप कुरान और हदीसो के हवाले देंगे तो आपको बोलेगे कि तुमने आयते अधूरी समझी है ,आयतो को गलत संदर्भ मे लिया है और उन आयतो मे लडाई का मतलब उस समय के युद्ध से था ।
(यानि इससे मुस्लिम यह दिखाना चाहते है कि अब हम
दुनियाभर मे जेहाद नही कर रहे है)

3)अगर आप संपूर्ण आयतो और हदीसो का हवाला देंगे
तो वो कहेंगे आपका अनुवाद गलत है और
आपको अरबी सीखने के साथ आरिजनल वर्जन पढ़ने
को बोला जायेगा !
4)अगर आप कहेंगे कि आप अरबी भी जानते है साथ ही आपके पास प्रमाणित अनुवाद और सारी जानकारी उन्ही प्रमाणित रिसोर्स से है जिससे सर्वश्रेष्ठ मुस्लिम स्कालर्स हवाला देते है ,तो मुसलमान कहेंगे कि हदीसे पढ़ना भी जरूरी है ...

अगर आप हदीस से सच साबित करेंगे तो वे कहेंगे कुरान
ही एकमात्र सच है !
5)इन सबके बाद अगर आप जारी रखते है तो वे इस मुद्दे से
बात घुमाने के लिये दूसरे टापिक उठायेंगे जैसे
गरीबी ,इंसानियत ,शांति ,फिलिस्तीन ,इजराइल ,अमेरिका वगैरह वगैरह !
6)अगर आप कहेंगे कि कुरान इंसान ने लिखी है तो वे Dr
Bucalie की किताब का हवाला देकर सुनिश्चित करेंगे
कि कुरान मे विज्ञान भी है !

7)जबकि असल मे Dr bucalie सऊदी अरब से पैसे
लिया करता था और Dr bucalie को कई विशेषज्ञो ने
गलत और झूठा साबित कर दिया है !
8)अब फिर मुस्लिम बोलेंगे कि ये सब वैस्टर्न मीड़िया का प्रौपगेंड़ा है इस्लाम को बदनाम करने का !
9)अगर आप फिर भी सच सामने लायेंगे तो वे दूसरे मजहबो मे की किताबो मे कमियां निकालेंगे जैसे बाइबल ,तोराह ,वेद गीता आदि !

10)लेकिन हद तो यहा है कि जिन किताबो को ये नही मानते
उन्ही किताबो मे ये अपने मोहम्मद जी को अवतार भी दिखायेंगे ...
और इस्लाम को जबरदस्ती विज्ञान से जोड़गे!
(मतलब किसी भी तरह से हर हाल मे इस्लाम और मौहम्मद
जी की मार्केटिंग करते रहते है !
इस तरह ये हमेशा काफिरो को थकाकर और उलझा कर रखते है !)
11)अगर आप न रूके तो मुसलमान द्वारा आपको जाहिल
झुठा ,कुत्ता ,जालिम वगैरह के साथ मां बहन की गाली और
निजी हमले किये जायेंगे ..

12)अब ये रट्टा लगायेंगे कि "इस्लाम तेजी से फैल रहा है
"लेकिन जैसे ही सच्चाई सामने लायी जाये तो ये चिल्ला भी पड़ेंगे "इस्लाम खतरे मे है !"
13)अगर फिर भी आप असली मुद्दे पर अड़े रहेंगे तो मुसलमान बोलेंगे तुम जहुन्नम मे जाओगे ...आखिरी दिन तुम्हारा हिसाब होगा ...तुम पर अल्लाह का आजाब होगा ..अल्लाह तुम्हारे साथ ये कर देगा.. वो कर देगा ,वगैरह वगैरह!

14)और आखिर मे जब सब फेल हो जायेगा तो अब मुसलमान धमकाने पर आ जायेंगे जैसे तुम्हे देख लूंगा
,बचके रहना ,अपना नंबर और एड्रेस बताओ !

15)और आखिर मे डरकर बंदा चुप हो जायेगा तो ये ढोल पीटेंगे और कहेंगे कि हमने डिबेट जीत
ली है ,इस्लाम जीत गया है ...इस्लाम जिंदाबाद !!
इसलिए मुसलमान ऊपर से जैसे भी हो पर उनके दिलोदिमाग मे ,नसो मे इस्लाम गूंजता रहता है ....!
आज दुनिया भर के मुसलमान चलते फिरते "Islamic Zombies"बन चुके है ,जो मौका मिलने पर अक्सर नारा लगाते है ...अल्लाह(शैतान)जिंदाबाद !...
इस्लाम(अंधेरा )कायम रहे ..!!

'सवाल: मौहम्मद ही सच मे अरबी अल्लाह का दूत है ,इसका क्या सबूत है ?? मुस्लिम: क्योकि कुरान मे लिखा है ! सवाल: कुरान के लिखे पर कैसे विश्वास किया जाए की ये क्या कहती है ,क्या नही ?? मुस्लिम: क्योकि हमारे अल्लाह ने कुरान को भेजा है ! सवाल: क्या सबूत है अल्लाह ही सचमुच ईश्वर है और कुरान की बाते अल्लाह का पैगाम है ?? मुस्लिम: क्योकि हमारे रसूल मौहम्मद ने ऐसा कहा है ! अब यहा फिर शुरू से पहला सवाल पूछना पडेगा और आखिरी सवाल पर आखिरी सवाल पर आना पड़ेगा ये तो कुछ ऐसे हुआ जैसे कि "मै खुदा हू और इसका सबूत ये है कि मै कह रहा हूँ ...  अल्लाह और कुरान के होने का आधार सिर्फ मोहम्मद है क्योकि मोहम्मद ने ये सब होने का दावा किया था ! अल्लाह के नाम पर चालाकी से मुहम्मद खुद की पूजा करवाना चाहता था, इसलिये उसने एक मंत्र भी बनाया, जिसमे अल्लाह के साथ उसका भी नाम लिया जाये!  क्योकि मुहम्मद अरब का था तो उसने अरबी अल्लाह ,अरबी फरिश्ते ,कुरान अरबी मे , नबी अरब के ,हज अरब मे और अरबी इबादती तरीको को मिलाकर अरबी साम्राज्यवाद को इस्लाम का नाम दे दिया ! इस तरह वो अपनी करतूतो को धर्म का जामा पहिना कर उसे जायज बना देता था, और अपनी बेतुकी बातों को अल्लाह का आदेश बता देता था और लालची, अज्ञानी अरब उसे मान लेते थे !  आज मुस्लिम अपने अरबी मजहब की चमकदार मार्केटिंग करने के लिए और शरियत का माहौल तैयार करने के लिए जी जान से जुटे रहते है ! लेकिन अंदर से इन्हे अपने मजहबी झूठ के पर्दाफाश हो जाने का भय सताता रहता है और इस झूठ के बोझ को संभालने के लिए मुसलमान कैसे रात दिन एक कर देते है ,एक आनलाइन डिबेट मे इसका नमूना देखिए :-  1)सबसे पहले मुस्लिम बोलते है कि ये सब तथ्यहीन आधारहीन है ,अज्ञानता है ,इस्लाम मे कोई जबरदस्ती नही है! अगर आप रैफरेंस देंगे वो सिरे से नकार देंगे और आपको पूरी तरह कुरान स्टड़ी करने को बोला जायेगा तभी रोशनी मिलेगी ! 2)अगर आप कुरान और हदीसो के हवाले देंगे तो आपको बोलेगे कि तुमने आयते अधूरी समझी है ,आयतो को गलत संदर्भ मे लिया है और उन आयतो मे लडाई का मतलब उस समय के युद्ध से था । (यानि इससे मुस्लिम यह दिखाना चाहते है कि अब हम दुनियाभर मे जेहाद नही कर रहे है)  3)अगर आप संपूर्ण आयतो और हदीसो का हवाला देंगे तो वो कहेंगे आपका अनुवाद गलत है और आपको अरबी सीखने के साथ आरिजनल वर्जन पढ़ने को बोला जायेगा ! 4)अगर आप कहेंगे कि आप अरबी भी जानते है साथ ही आपके पास प्रमाणित अनुवाद और सारी जानकारी उन्ही प्रमाणित रिसोर्स से है जिससे सर्वश्रेष्ठ मुस्लिम स्कालर्स हवाला देते है ,तो मुसलमान कहेंगे कि हदीसे पढ़ना भी जरूरी है ...  अगर आप हदीस से सच साबित करेंगे तो वे कहेंगे कुरान ही एकमात्र सच है ! 5)इन सबके बाद अगर आप जारी रखते है तो वे इस मुद्दे से बात घुमाने के लिये दूसरे टापिक उठायेंगे जैसे गरीबी ,इंसानियत ,शांति ,फिलिस्तीन ,इजराइल ,अमेरिका वगैरह वगैरह ! 6)अगर आप कहेंगे कि कुरान इंसान ने लिखी है तो वे Dr Bucalie की किताब का हवाला देकर सुनिश्चित करेंगे कि कुरान मे विज्ञान भी है !  7)जबकि असल मे Dr bucalie सऊदी अरब से पैसे लिया करता था और Dr bucalie को कई विशेषज्ञो ने गलत और झूठा साबित कर दिया है ! 8)अब फिर मुस्लिम बोलेंगे कि ये सब वैस्टर्न मीड़िया का प्रौपगेंड़ा है इस्लाम को बदनाम करने का ! 9)अगर आप फिर भी सच सामने लायेंगे तो वे दूसरे मजहबो मे की किताबो मे कमियां निकालेंगे जैसे बाइबल ,तोराह ,वेद गीता आदि !  10)लेकिन हद तो यहा है कि जिन किताबो को ये नही मानते उन्ही किताबो मे ये अपने मोहम्मद जी को अवतार भी दिखायेंगे ... और इस्लाम को जबरदस्ती विज्ञान से जोड़गे! (मतलब किसी भी तरह से हर हाल मे इस्लाम और मौहम्मद जी की मार्केटिंग करते रहते है ! इस तरह ये हमेशा काफिरो को थकाकर और उलझा कर रखते है !) 11)अगर आप न रूके तो मुसलमान द्वारा आपको जाहिल झुठा ,कुत्ता ,जालिम वगैरह के साथ मां बहन की गाली और निजी हमले किये जायेंगे ..  12)अब ये रट्टा लगायेंगे कि "इस्लाम तेजी से फैल रहा है "लेकिन जैसे ही सच्चाई सामने लायी जाये तो ये चिल्ला भी पड़ेंगे "इस्लाम खतरे मे है !" 13)अगर फिर भी आप असली मुद्दे पर अड़े रहेंगे तो मुसलमान बोलेंगे तुम जहुन्नम मे जाओगे ...आखिरी दिन तुम्हारा हिसाब होगा ...तुम पर अल्लाह का आजाब होगा ..अल्लाह तुम्हारे साथ ये कर देगा.. वो कर देगा ,वगैरह वगैरह!  14)और आखिर मे जब सब फेल हो जायेगा तो अब मुसलमान धमकाने पर आ जायेंगे जैसे तुम्हे देख लूंगा ,बचके रहना ,अपना नंबर और एड्रेस बताओ !  15)और आखिर मे डरकर बंदा चुप हो जायेगा तो ये ढोल पीटेंगे और कहेंगे कि हमने डिबेट जीत ली है ,इस्लाम जीत गया है ...इस्लाम जिंदाबाद !! इसलिए मुसलमान ऊपर से जैसे भी हो पर उनके दिलोदिमाग मे ,नसो मे इस्लाम गूंजता रहता है ....! आज दुनिया भर के मुसलमान चलते फिरते "Islamic Zombies"बन चुके है ,जो मौका मिलने पर अक्सर नारा लगाते है ...अल्लाह(शैतान)जिंदाबाद !... इस्लाम(अंधेरा )कायम रहे ..!!'

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

+++


Comments