Agnivrti Brahm Muj14W18A



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 18A, Apr 25- May 01,  2014. This issue is Agnivrti Brahm Muj14W18A


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Agnivrti Brahm Muj14W18A

१.      रूद्र जी! मैं आप को यह पत्र इस क्षमायाचना याचना के साथ लिख रहा हूँ कि यद्यपि मैं विकास की मुंहताज, लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से दूषित अंग्रेजी, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ| क्योंकि मानवमात्र की लिपि, भाषा व ज्ञान-विज्ञान उसके चक्रों व ब्रह्मकमल (सहस्रार) में परब्रह्म जन्म के साथ ही दे देता है| वेद परब्रह्म का संविधान है| बिना ब्रह्मज्ञान के इसे समझा नहीं जा सकता| बिना ब्रह्मचर्य (वीर्य रक्षा) के ब्रह्मज्ञान नहीं मिल सकता और बिना गाय के दूध सेवन और गुरुकुल में योग्य आचार्य से शिक्षा ग्रहण के कोई ब्रह्मचारी नहीं बन सकता|

२.      विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| यह निर्विवाद रूप से स्थापित है कि संसार के अब तक के पुस्तकालयों में एकमात्र ज्ञान-विज्ञान के कोष ऋग्वेद से प्राचीन कोई साहित्य नहीं है, जो संस्कृत भाषा और देवनागरी लिपि में लिखी गई है| पाणिनी के अष्टाध्यायी में आज तक एक अक्षर भी बदला जा सका| ठीक इसके विपरीत अंग्रेजी और उर्दू भाषाओँ में लिपि और उच्चारण की त्रुटियाँ हैं| संगणक (कम्प्यूटर) विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि संगणन के लिये संस्कृत सर्वोत्तम भाषा है|

३.      मानवमात्र को दास बनाने व आतताई मजहब ईसाइयत के प्रसार हेतु मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर, किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| आप हिंदू नहीं आर्य हैं| जब तक मैकाले के महंगे यौनशिक्षा के केंद्र (स्कूल) नहीं बंद होंगे और हमारे निःशुल्क शेर बनाने वाले ब्रह्मचर्य के शिक्षा केन्द्र स्थापित नहीं होंगे, हम मिटते रहेंगे| फिरोज-उल-लुगात में हिंदू का अर्थ हिंदुस्तान का रहने वाला, चोर, लुटेरा, गुलाम, कालाहै| यदि स्वीकार नहीं, तो आप हिंदूकैसे? फिर भी आप हिंदुओं की एकता का रोना रोते रहेंगे| आप को तो यह भी नहीं मालूम कि शेर दूसरे शेर को रहने ही नहीं देता| फिर भी जंगल का कोई जानवर शेर का मुकाबला नहीं कर सकता| शेर से कई गुने भारी हाथी सदैव झुण्ड में चलते हैं| फिर भी अकेले शेर से परास्त होते हैं| क्योंकि हाथी वीर्यहीन व कामी होता है और शेर वीर्यवान|

४.      अग्निव्रत जी को पता होना चाहिए कि वेदों के ज्ञान विज्ञान को जानने के लिये आप को वीर्य रक्षक यानी ब्रह्मचारी बनना पड़ेगा| तत्पश्चात कुण्डलिनी भेदन (जागरण) या योग द्वारा ब्रह्मकमल तक पहुंचना पड़ेगा| सारा ब्रह्मांड चारो वेद और उपनिषद आप को उसी ब्रह्मकमल में मिल जायेंगे| इसकी शिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी| वह भी निःशुल्क| गुरुकुलों को मैकाले निगल गया| क्यों कि मैकाले को सबको दास बनाना था| ब्रह्म परा ज्ञान है, हमारी भौतिक इन्द्रियां इसे जान लेतीं तो संसार नपुंसक ही नहीं होता और पूरी दुनियां आप के चरणों में होती| ब्रह्मज्ञान, दैवी शक्तियाँ, परमानन्द और निरोग जीवन चाहिए तो गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में हमें सहयोग दें|

५.      लेकिन भावी पीढ़ी को सम्प्रभु बनाने वाले ब्रह्मचर्य के निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में किसी की भी रूचि नहीं है| आप सभी लोग अपनी भावी पीढ़ी को यौनशिक्षा दिलाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा रहे हैं|

६.      पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है| बाइबल के अनुसार केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने| (बाइबल, लूका १९:२७). कुरान के अनुसार अल्लाह व उसके साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी खूनी इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है| धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है| (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब धरती को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है| एलिजाबेथ के साम्प्रदायिक साम्राज्य विस्तारवादी ईसा को अर्मगेद्दन द्वारा धरती पर केवल अपनी पूजा करानी है| हिरण्यकश्यप की दैत्य संस्कृति न बची और केवल उसी की पूजा तो हो न सकी, अब ईसा और ईसाइयत की बारी है| चुनाव द्वारा भी इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं| इनके विरुद्ध कोई जज सुनवाई नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने १९५० से अब्रह्मी संस्कृतियों को अपनी नरसंहार, लूट और नारी बलात्कार की संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक मजहबी अधिकार दे रखा है| लेकिन कोई उपनिवेश, भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल, अज़ान व मस्जिद का विरोधी नहीं|

७.      आतताई अब्रह्मी संस्कृतियों और लुटेरे लोकसेवकों के परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण के लिए राष्ट्रपति और राज्यपाल, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों क्रमशः ६० व १५९ के अधीन, शपथ लेने के लिए विवश कर दिए गए हैं - वह भी दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन| ईमाम मुसलमानों को आप के हत्या और नारियों के बलात्कार की शिक्षा देता है| बदले में भारतीय न्याय व्यवस्था का मुकुट सर्वोच्च न्यायालय ईमामों को ईशनिंदा करने के लिए सरकारी खजाने से वेतन (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) और जाति हिंसा के लिए मुसलमानों को हज अनुदान दिलवाता है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/). हिम्मत हो तो अज़ान, जजों, ईमामों का विरोध करिये| मुझसे उलझ कर आप कुछ न पाएंगे!

८.      एक ओर ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति है और दूसरी ओर (अ)ब्रह्मिक संस्कृति| ब्रह्मिक वैदिक सनातन संस्कृति वीर्यरक्षा यानी मानव के आरोग्य, ओज, तेज, स्मृति और परमानंद की प्राप्ति के लिये निःशुल्क गुरुकुल चलाती थी और (अ)ब्रह्मिक संस्कृति महँगी शिक्षा व्यवस्था लाद कर खतना और यौनशिक्षा द्वारा वीर्यहीन कर (किसान की भांति सांड़ से बैल बना कर) मानवमात्र को दास बना रही हैं| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”] इनसे विरोध करें|

९.      ये कलियुग है इसलिए वैदिक सनातन संस्कृति विरोधी आतंकवादियों व उनके समर्थकों के प्रति किसी भी सात्विक प्रतिक्रिया के लिए कोई जगह नहीं है। वैदिक सनातन धर्म में ब्रह्मचर्य अनिवार्य  है| मानवजाति के मुक्ति का ब्रह्मचर्य ही एकमात्र मार्ग है| जिसपर हमें आज के हालात में अमल करना चाहिए। ये हमारे लिए सच्चाई का सामना करने का समय है। एक सभ्यता के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए या तो हमें गुरुकुलों को पुनर्जीवित कर के हिंसक व अत्याचारी अब्रह्मी संस्कृतियों के आतंकवादी आक्रमण का मुकाबला करना पड़ेगा अन्यथा परसियन, वेवीलोनियन और मिश्र की सभ्यता की तरह नष्ट होने के लिए तैयार होना होगा। नपुंसक होने के कारण ये सभ्यतायें अत्याचारी अब्रह्मी संस्कृतियों का मुकावला करने में असमर्थ रहीं और इसलिए इनका सर्वनाश हो गया। हमें साम, दाम, दण्ड, भेद नियम का पालन करते हुए हर हाल में अत्याचारी अब्रह्मी संस्कृतियों का सर्वनाश सुनिश्चित करना चाहिए वरना ये राक्षस हमें समाप्त कर देंगे। पहले हमें उपनिवेश से मुक्ति लेनी पड़ेगी| क्या आप तैयार हैं?

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१.

जब तक अब्रह्मी संस्कृतियां हैं, मानवजाति का अस्तित्व खतरे में है| आइये इनको मिलकर मिटायें|

अप्रैल २६, २०१४य

Registration Number is : DARPG/E/2014/02248

http://pgportal.gov.in

यह सार्वजनिक अभिलेख है| कोई भी व्यक्ति इस पर हुई कार्यवाही का उपरोक्त न० द्वारा ज्ञान प्राप्त कर सकता है|

 

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AyodhyaP Tripathi,
Apr 26, 2014, 1:04 AM
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