Abrahmi Majhab Muj14W16



मुजहना MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

 


Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 19 Year 19 ISSUE 06A, Jan. 31- Feb. 06, 2014. This issue is Abrahmi Majhab Muj14W16


Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9152579041 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com



Abrahmi Majhab Muj14W16

जी को प्रणाम!

सलाह तो चाणक्य को मिलनी चाहिए थी! तभी यूनानी सभ्यता में हम खप मर गए होते| हमारी कठिनाई ही यही है कि अब्रह्मी संस्कृतियों ने किसान के बैल की भांति मानवमात्र को नपुंसक बना कर अधीन कर रखा है|

मैं पूर्वी उत्तर प्रदेश के सरयूपारीण ब्राह्मण परिवार का भगवा आतंकवादी हूँ| मेरे यहाँ लोकोक्ति है, “रांड़ का पाँव सुहागिन लागे, हो जा बहना मोसी. आप स्वयं ईसा की भेंड़ हैं - हमें भी भेंड़ बने रहने के लिए विवश कर रहे हैं|

विचित्र किन्तु सत्य|

जेफरसन के घोषणापत्र, "हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है। का हम सम्मान करते हैं, जबकि वेदों के सिद्धांत और गुरुकुलों, “जो मानवमात्र को ब्रह्म बनाते हैं| मानवमात्र को जन्म के साथ ही प्राप्त, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। मल ही बल है और वीर्य ही जीवन| वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है|” का हम तिरष्कार करते हैं|

स्वयं मैकाले के अनुसार २ फरवरी, १८३५ तक भारत में एक भी चोर या भिखारी नहीं था| लेकिन कोई भी गरीब अंग्रेजी शासन को गरीबी के लिए उत्तरदायी नहीं मानता| ब्राह्मण और संतों को मानता है|

एक ओर वैदिक राजतंत्र है जिस व्यवस्था में महाराज अश्वपतिने कहा था

न  मे  स्तेनो  जनपदे   न   कदर्यो  न  मद्यपः ।

नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतः ॥

(छान्दोग्योपनिषद ५/११/५)

मेरे राज्यमें न तो कोई चोर है, न कोई कृपण है, न कोई मदिरा पीनेवाला है, न कोई अनाहिताग्नि (अग्निहोत्र न करनेवाला) है, न कोई अविद्वान् है और न कोई परस्त्रीगामी ही है, फिर कुलटा स्त्री (वेश्या) तो होगी ही कैसे?’

और दूसरी ओर ब्रिटिश इंडियन उपनिवेश, जिसमे सभी नपुंसक (बाइबल, उत्पत्ति १७:११), चोर और भिखारी हैं|

जिसे बचाने के लिए हम मतदान कर रहे हैं!

ईसाइयों व मुसलमानों सहित आप को कोई स्व(अपना)राज नहीं मिला| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| देखें, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(ii) और राष्ट्रकुल की सदस्यता. आप ने अपनी धरती, [(कुरान २:२५५) व (बाइबल, लूका १९:२७)], सम्पत्ति [(बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९), नारियां [(बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६)], जीने का अधिकार [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९)] और अपने पूजा स्थल [(कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)] गवां दिए हैं| भारतीय संविधान, अनुच्छेद ३९(ग)] और अपनी उपासना की स्वतंत्रता (अज़ान, कुरान ३:१९) गवां दी है|

चरित्र के नये मानदंड|

भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१), (अब २०.६.१९७९ से लुप्त) व ३९ग)]. अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिए| दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| ८:३९. आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है| धरती की सभी नारी आप की हैं| किसी भी नारी का बलात्कार कीजिए| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कीजिए| अल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता है| किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)]. किसी का जीवन सुरक्षित नहीं है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). अज़ान द्वारा ईशनिंदा कीजिये और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दीजिए| बदले में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी खजाने से वेतन देने का आदेश दे रखा है| (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६). इतना ही नहीं हज अनुदान के लिए भी कानून बना रखा है| (प्रफुल्ल गोरोडिया बनाम संघ सरकार, http://indiankanoon.org/doc/709044/). इन मूर्खों और दासों के लिए वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)} वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण में| इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीड़ित कराया जा रहा है| मैंने बाबरी ढांचा गिरवाया है| अब्रह्मी संस्कृतियों का विरोधी हूँ| मालेगांव मस्जिद बम कांड सहित ५० अभियोगों में अभियुक्त हूँ| ४२ बार जेल गया हूँ| साध्वी प्रज्ञा सहित मेरे ९ सहयोगी बिना आरोप सन २००८ से जेलों में बंद हैं| लेकिन कोई भी मनुष्य कत्ल करने और सम्पत्ति के अधिकार छीनने वाली अब्रह्मी संस्कृतियों और संविधान पर ऊँगली उठाने का साहस नहीं करता है| हमने साहस किया है और हम उन्हीं लोगों द्वारा दंडित हो रहे हैं जिनके लिए हम लड़ रहे हैं|

क्या कोई व्यक्ति नीचे की लिंकों पर क्लिक करके साध्वी प्रज्ञा को जेल से छुड़ाने में हमारी सहायता कर सकता है?

http://chn.ge/1hQCDy1

https://www.change.org/en-IN/petitions/free-sadhvi-pragya-i-want-the-indian-supreme-court-and-the-government-to-release-sadhvi-pragya

 … भवदीय:-

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सू० स०) फोन: (+९१) ९८६८३२४०२५/९१५२५७९०४१

  

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