Abhiyog Vapsi Hetu

प्रेषक:

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१,

वर्तमान पता: मंगल आश्रम, मुनि की रेती, ऋषिकेश,

टिहरी गढ़वाल, २४९१३७ उत्तराखंड

सेवा में,

महामहिम श्री नजीब जंग, उपराज्यपाल,

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली ११००५४

 

विषय: आत्मरक्षा में लिखे गए लेखों व प्रदर्शनों के विरुद्ध अभियोगों को वापस लेने की मांग|

 

संदर्भ: प्राथमिकी संख्या ४०६/२००३ और १६६/२००६ थाना नरेला|

 

महोदय,


हमारे विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन आप की संस्तुति पर थाना नरेला से प्राथमिकी संख्या ४०६/२००३ और १६६/२००६ के पंजीकरण द्वारा दो अभियोग चल रहे हैं| संस्तुति पत्र संलग्नक-१  इस याचिका के साथ संलग्न कर रहा हूँ|

http://www.aryavrt.com/15august

अमेरिका आज भी है, लेकिन वहाँ के मूल निवासी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को ईसाई निगल गए| अब सोनिया के मनोनीत राज्यपाल काले भारतीयों और उनकी वेदिक सनातन संस्कृति को निगलने के लिए विवश हैं| न आप रहेंगे और न आप का इस्लाम| वह भी आप द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन निम्नलिखित शपथ ले कर:-

 “मैं ... पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूँगा|”

जहां हिंदुओं ने सभी देशों ओर मजहबों के पीडितों को शरण दिया, वहीं अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| मन्दिरों के चढ़ावों को लूट रहे हैं|

वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरान, सूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३)].

स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है| जब वैदिक सनातन संस्कृति मिट जाएगी तो अर्मगेद्दन के लिए ईसा इस्लाम को भी मिटा देगा| विवरण के लिए नीचे की लिंक क्लिक करें:

Http://www.countdown.org/armageddon/antichrist.htm

केवल वे ही संस्कृतियां जीवित बचीं, जिन्होंने भारत में शरण लिया| इसीलिए परभक्षी संस्कृतियों ईसाइयत इस्लाम का शोषण कर एलिजाबेथ वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाना चाहती है, ताकि सबको अपना दास बना कर निर्ममता पूर्वक लूटा जा सके|

आप (राज्यपाल) दया के पात्र हैं| राज्यपालों ने अपने जीविका, पद और प्रभुता हेतु अपनी सम्पत्ति व पूँजी रखने का अधिकार स्वेच्छा से त्याग दिया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ व ३९(ग). अपने जीवन का अधिकार खो दिया है| [बाइबल, लूका, १९:२७ और कुरान २:१९१, भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) के साथ पठित|] अपनी नारियां ईसाइयत और इस्लाम को सौँप दी हैं| [(बाइबल, याशयाह १३:१६) और (कुरान २३:६)]. इसके बदले में सोनिया का ईसा राज्यपालों को अपनी बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह का व अल्लाह पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह करने का अधिकार दे चुका है| जहां भारतीय संविधान ईसाइयत और इस्लाम को अपनी संस्कृतियों को बनाये रखने का असीमित मौलिक अधिकार देता है, वहीँ राज्यपालों को वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है| यद्यपि असली अल्पसंख्यक सनातनी हैं|

राज्यपालों के पास कोई विकल्प भी नहीं है| या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा जेल जाएँ| आप के अपराध परिस्थितिजन्य हैं, जिनके लिए भारतीय संविधान उत्तरदायी है| ऐसे भारतीय संविधान को रद्दी की टोकरी में डालना अपरिहार्य है| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग आतताई ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मुहिम में लगे हैं| सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही राज्यपाल ही नहीं, सारी मानव जाति ईसा की भेंड़ हैं|

आप के संस्तुति पर ही हमारे विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन ४९ अभियोग चले हैं| क्यों कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन किसी नागरिक या पुलिस या जज के पास उपरोक्त धाराओं के अधीन अभियोग चलाने का अधिकार ही नहीं है|

ईमाम, जो काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा करते हैं और मस्जिदों से मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देते हैं, के विरुद्ध तो २६ जनवरी, १९५० से आज तक राज्यपाल लोग अभियोग न चला पाए, लेकिन हमें आप भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ के अधीन आत्मरक्षा में विरोध करने के कारण प्रताड़ित कर रहे हैं| आप से बड़ा आतंकी कौन हो सकता है?

अतएव आप से अनुरोध है कि आप अविलम्ब हमारे अभियोग वापस लें|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी फोन +९१ ९१५२५७९०४१/९८६८३२४०२५

 

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AyodhyaP Tripathi,
Jul 17, 2013, 4:38 AM
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AyodhyaP Tripathi,
Jul 17, 2013, 4:39 AM
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