Aazadi Kya hai


WHAT IS FREEDOM?

Aazadi Kya hai?

Dr. Babu Suseelan

आज़ादी क्या है?

यद्यपि मैं विकास की मुंहताज, लिपि और उच्चारण की त्रुटियों से दूषित अंग्रेजी, जानता हूँ, तथापि मैं इसको लिखने और बोलने से परहेज़ करता हूँ| क्योंकि मानवमात्र की लिपि, भाषा व ज्ञान-विज्ञान उसके चक्रों व ब्रह्मकमल में परब्रह्म जन्म के साथ ही दे देता है| विश्व की तमाम लिपियों में मात्र देवनागरी लिपि ही मनुष्य के ऊर्जा चक्रों में लिखी पाई जाती है| संस्कृत उसी लिपि में लिखी जाती है और विश्व का प्राचीनतम और एकमात्र ज्ञान-विज्ञान का कोष देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा का ऋग्वेद है| इसके अतिरिक्त इस भाषा को आमलोग जानते हैं|

अब आइये देंखे स्वतंत्रता है क्या? यह मन को अपने अधीन करने का महायज्ञ है| जो मन और इन्द्रियों का दास है, वह शासक का दास ही रहेगा|

प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको जन्म के साथ ही प्राप्त वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं।

वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

आतताई अब्रह्मी संस्कृतियां खतना, कामुक सुख, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कौटुम्बिक व्यभिचार आदि द्वारा व्यक्ति के इसी वीर्य को नष्ट कर उसे दास बना चुकी हैं| ईसाइयों ने कुमारी माओं को महिमामंडित कर और वैश्यावृति को सम्मानित कर मानवमात्र को वीर्यहीन कर दिया है| इन मजहबों ने संप्रभु मनुष्य को दास व रुग्ण बना दिया है|

अहम् ब्रह्मास्मि का सरल हिन्दी अनुवाद है कि मैं ब्रह्म हूँ । साधारण व्यक्ति दिग्भ्रमित हैं। इसका कारण यह है लोग - जड़ बुद्धि व्याख्याकारों के कहे को अपनाते है। किसी भी अभिकथन के अभिप्राय को जानने के लिए आवश्यक है कि उसके पूर्वपक्ष को समझा जाय। हम वैदिक पंथी उपनिषदों के एक मात्र प्रमाणिक भाष्यकार आदिशंकराचार्य के कथन को प्रमाण मानते हैं, जो किसी व्यक्ति-मन में किसीभी तरह का अंध-विश्वास अथवा विभ्रम नहीं उत्पन्न करना चाहते थे।

इस अभिकथन के दो स्पष्ट पूर्व-पक्ष हैं-

१) वह धारणा जो व्यक्ति को अधीन करने के लिए धर्म का आश्रित बनाती है। जैसे, एक मनुष्य क्या कर सकता है, करने वाला तो कोई और ही है। मीमांसा दर्शन का कर्मकांड-वादी समझ, जिसके अनुसार फल देवता देते हैं, कर्मकांड की प्राविधि ही सब कुछ है । वह दर्शन व्यक्ति सत्ता को तुच्छ और गौण करता है- देवता, मन्त्र और धर्म को श्रेष्ठ बताता है। एक व्यक्ति के पास पराश्रित और हताश होने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचता। धर्म में पैगंबर/पौरोहित्य के वर्चस्व तथा कर्मकांड की 'अर्थ-हीन' दुरुहता को (अहम् ब्रह्मास्मि) का अभिकथन चुनौती देता है।

२) सांख्य-दर्शन की धारणा है कि व्यक्ति (जीव) स्वयं कुछ भी नहीं करता, जो कुछ भी करती है - प्रकृति करती है। बंधन में भी पुरूष को प्रकृति डालती है तो मुक्त भी पुरूष को प्रकृति करती है। यानि पुरूष सिर्फ़ प्रकृति के इशारे पर नाचता है। इस विचारधारा के अनुसार तो व्यक्ति में कोई व्यक्तित्व है ही नहीं।

इन दो मानव-सत्ता विरोधी धारणाओं का खंडन और निषेध करते हुए शंकराचार्य मानव-व्यक्तित्व की गरिमा की स्थापना करते हैं। आइये, समझे कि अहम् ब्रह्मास्मि का वास्तविक तात्पर्य क्या है?

अहम् यानी मैं स्वयं ब्रह्म अस्मि यानी हूँ और यही सच है और यह उतना ही सच है जितना कि दो और दो का चार होना|

अहम् ब्रह्मास्मि का तात्पर्य यह निर्देशित करता है कि मानव यानी प्रत्येक व्यक्ति स्वयं संप्रभु है। उसका व्यक्तित्व अत्यन्त महिमावान है - इसलिए हे मानवों! आप चाहे मुसलमान हो या ईसाई, अपने व्यक्तित्व को महत्त्व दो। आत्मनिर्भरता पर विश्वास करो। कोई ईश्वर, पंडित, मौलवी, पादरी और इस तरह के किसी व्यक्तियों को अनावश्यक महत्त्व न दो। तुम स्वयं शक्तिशाली हो - उठो, जागो और जो भी श्रेष्ठ प्रतीत हो रहा हो, उसे प्राप्त करने हेतु उद्यत हो जाओ। जो व्यक्ति अपने पर ही विश्वास नही करेगा - उससे दरिद्र और गरीब मनुष्य दूसरा कोई न होगा। यही है अहम् ब्रह्मास्मि का अन्यतम तात्पर्य।

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 IN October 2013, we, Indian American intellectuals Forum began a serious of discussion with our friends, colleagues and faculty members about the current state and future prospect of Hindu civilization.

After SERIES if conversation AND DISCUSSION with colleagues, Politician leaders and highly educated faculty members, WE HAVE Concluded THAT our SACRED, ECO-SYSTEMIC, SPIRITUAL AND ALL INCLUSIVE THOUGHT SYSTEM AND Hindu Dharma, our Vedic civilization has been through a long period of decay.  And it must be renewed, if progress, peace, and freedom are to continue in the world.

Furthermore, we concluded that Indian scholars have been not able to renew to sustain and promote such concept as freedom, MORALITY and Liberty. Now it is time for Indians to wake up from the deep sleep and actively assert themselves as champions of freedom, ethics and liberty not for selfish reasons but for the benefit of the entire humanity.

चरित्र के नये मानदंड|

इसके विपरीत भारतीय संविधान से पोषित इन यानी ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद व लोक लूट तंत्र ने मानव मूल्यों व चरित्र की परिभाषाएं बदल दी हैं। ईसाइयत, इस्लाम, समाजवाद और प्रजातंत्र अपने अनुयायियों में अपराध बोध को मिटा देते हैं। ज्यों ही कोई व्यक्ति इन मजहबों या कार्लमार्क्स के समाजवाद अथवा प्रजातंत्र में परिवर्तित हो जाता है, उसके लिए लूट, हत्या, बलात्कार, दूसरों को दास बनाना, गाय खाना, आदमी खाना आदि अपराध नहीँ रह जाता, अपितु वह जीविका, मुक्ति, स्वर्ग व गाजी की उपाधि का सरल उपाय बन जाता है। सम्पति पर व्यक्ति का अधिकार नहीं रहा।  [(बाइबल ब्यवस्था विवरण २०:१३-१४), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ (अब २०.६.१९७९ से लुप्त व ३९ग)]. अब्रह्मी संस्कृतियों में आस्था व्यक्त (दासता स्वीकार) कीजिए| दार-उल-हर्ब इंडिया को दार-उल-इस्लाम बनाइए| ८:३९. आज विश्व की कोई नारी सुरक्षित नहीं है| धरती की सभी नारी आप की हैं| किसी भी नारी का बलात्कार कीजिए| (बाइबल, याशयाह १३:१६) व (कुरान २३:६). इतना ही नहीं - बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह व पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से निकाह कीजिए| अल्लाह तो ५२ वर्ष के मुसलमान का ६ वर्ष की कन्या से निकाह कर देता है| किसी का भी उपासना स्थल तोड़िये| [(बाइबल, व्यवस्था विवरण १२:१-३) व (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरान, सूरह अल-अम्बिया २१:५८)]. जिसकी भी चाहें सम्पत्ति लूटिये [(बाइबल, व्यवस्थाविवरण २०:१४) व (कुरान ८:१, ४१ व ६९)]. किसी का जीवन सुरक्षित है। जिसे भी चाहिए अपनी तरह दास बनाइए| न बने तो कत्ल कर दीजिए| (बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरआन ८:१७) जिसके विरुद्ध कोई जज सुनवाई ही नहीं कर सकता| (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). मूर्खों और दासों के वैश्यालय व मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए खुला है| {(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)} वह भी भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) और दंप्रसं की धाराओं १९६ व १९७ के संरक्षण में| इतना ही नहीं! विरोध करने वालों को भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ के अधीन-राष्ट्रपति या राज्यपाल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ की संस्तुति द्वारा, जजों से, उत्पीड़ित कराया जा रहा है

Fir the last hundreds of years, in the name of freedom and liberty we have invited, or allowed desert dogmatists and fundamentalists who are not interested in promoting freedom and liberty to rule us, subjugate and discriminate us. As a result, brutal desert warriors have invaded India, looted our wealth and forcefully converted Hindus. The Christian from Europe also invaded India, colonized Hindus, tinkered with our education and made us into zombies, and indoctrinated us to believe that our religion, samskaras, (Culture) and systemic- all inclusive thought system are not good for freedom and morality.

Hindus are not free yet, even though we have obtained physical freedom from   British Christian colonialists in 1947. We know that our culture, spiritual traditions, independence,  and our civilization have been through a long period of decay deliberately done by Islamists, Christian  colonists and closed, materialistic, linear and mechanical thinking. Our pseudo secularists, converted Hindus into Islam, Communism and Christianity under coercion or deception have been ruling us dictating their terms and want us to deconstruct India, destabilize our social fabric and moral values.

इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश व नागरिक अधिकारहीन दास है| साध्वी प्रज्ञा ने स्वतंत्रता के उस युद्धको प्रारम्भ कर दिया है, जिसे १५ अगस्त, १९४७ से छल से रोका गया है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, अनुच्छेद ६ (ब)(।।) भारतीय संविधान व राष्ट्कुल की सदस्यता

FREEDOM, MUSLIMS CHRISTIANS and MARXISTS claim is rooted in the right to dissent our ethical and moral values.  Muslims and Christians claim that they have every rights in India to forcefully and deceptively convert every Hindis into their rigid, closed, blind, illogical and unreasonable blind faith.  Muslims and Christians want to impose their civilizational practices and undesirable political, economic, and social activities in the name of freedom in India... Their civilization is the equivalent to trickles down tyranny.

DEFINITION OF FREEDOM

The word freedom is so broad and one cannot define the word. Few Philosophers were walking together on a Beach. One professor asked the other what is flying.  We all know what is flying. But to define the word to a learned Philosopher is very difficult and may restrict the meaning of the word FLYING, .It is like the word SUGAR. We have to taste it and experience it, but it is very hard to explain it to some strangers. Any attempt to define FREEDOM will limit its connotation.

During independence days the cry for FREEDOM punctured every political meeting and was heard in the streets of, or markets, and coffee houses. But what does FREEDOM mean? So that it would be more than a parrot cry to those willing to think about it.

To discuss the use of freedom without answering the question “What is Freedom?  Is like driving without driving lessons. Students, Lecturers, Professors and Principals talk about university autonomy and freedom of expression.

In India Muslims and Christians enjoy more freedom than Hindus to open new institutions for learning largely in terms of preserving and promoting, and converting Hindus. Christians and Muslims use their worldwide systems and supporters to perfect their religious freedom to exploit their numbers in India. Indian Hindus are not using their freedom and are in danger today of ignoring the threats from Jihadis and the conversion gang.

FREEDOM IS Restriction, COERCION

To me, FREEDOM is restriction, coercion and limitation. One has the freedom to shouted “FIRE” when there is no FIRE. But his freedom ends when he or she shouts in the midst of a crowd and if there is no fire. He or she is free to shout Fire in front of a theater. Imagine if he shouts fire in a theater full of people and if there is no fire? Imagine the panic he c= or she can create shouting FIRE if there is no Fire in the theatre. U-It is a blatant violation of freedom of expression.

 

Such Freedom Violation is going on in India for centuries.  I would agree that in organized, civilized societies there can be no such as complete freedom of action for its members. Hindus are also faced with the question of relative values. In India, Converted Christians and Muslims claim that they have the freedom for conversion and justify deception, allurement and coercion for conversion. In this context, Hindus have to ponder the quoting Does CHRISTIANITY and Islam m religion promote or improve the cause of freedom?  We know from History, that Islam and Christianity used their destructive power to   keep us in slavery and kept us and our country as colon. .I believes that Hindus need to emphasize shortcomings and dangerous delusions and deviant practices of Muslims and Christians under the guise of religious freedom. Religious freedom is used to oppress others, rule us, and mislead us and they thrived on dangerous delusion. Our Vedic values are strong, open ended and strong over many parts of the world. Muslims and Christians are promoting their dogma in the cause of enlightenment or democracy. Ilsmaists are promoting Islam as a spiritual tonic as a cure for the moral and spiritual ills of today. Hindus are still denying the reality of these ills. I am reminded of story told by the existential philosopher Kierkegaard.  Kierkegaard told an audience in Paris of an abstracted man. He was so abstracted that one fine morning that He was found himself dead. Hindus seem to be worse because of all the actual and potential  good that may come out of Islam and Christianity They have inspired any agitators, dictators, uti=open dreamers and bombers and assassins. It also produced some revolutionary thinkers of a different sort. Most notably like Hitler, Mussolini, and kerlmarx, who were unlike Jesus in spirit?

POLITICAL AND ECONOMIC FREEDOM

एलिजाबेथ (शासक) को भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) ने हमे कत्ल कराने का और भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने हमारी सम्पत्ति और पूँजी लूटने का अधिकार दिया है| नमो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व ३९(ग), कुरान और बाइबल के हठधर्म कैसे बदलेंगे?

Hinduism is a free religion.  We have considerable degree 0f freedom in the way we do things. The obvious limitations to our freedom of thought and actions are few. You know that India has fertile land, resources and manpower. Then it is natural to ask why we are not rich or great like in olden days. This introduces arguments which involve hairsplitting metaphysical semantics and which for our purpose it would be pointless to pursue. I think, no other country in the world was involved in foreign occupation, colanialization, looting, and coercive religious conversion like India. India got independence in 1947; unfortunately, India continues its Christian colonial rule. India failed to promote its rich spiritual heritage, improve our prosperity, undermined our freedom, and democratic liberty.

 

India will face an election within 100 days. I am sure, MODI can balance India role in the world with the imperatives of protecting and promoting freedom, protecting liberty and economic prosperity at home and around the world.

यदि आप उपनिवेश से मुक्ति नहीं लेंगे तो नष्ट हो जायेंगे| लेकिन नमो के पास मानवजाति को उपनिवेश से मुक्ति दिलाने की कोई योजना नहीं है|

मनुष्य को दास बनाने का सर्वोत्तम मार्ग है, उसको वीर्यहीन करना| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो ने लिखा है कि पराजित शत्रु को जीवन भर पुंसत्वहीन कर (वीर्यहीन कर) दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| पीटर जी यह बताना भूल गए कि दास बनाने के लिए खतने से भी कम घातक, यौनशिक्षा, वेश्यावृत्ति और समलैंगिक सम्बन्ध को संरक्षण देना है| वीर्यहीन कर मूसा से लेकर एलिजाबेथ तक मानवमात्र को वीर्यहीन कर रहे हैं|

http://en.wikipedia.org/wiki/Peter_Charles_Remondino

और तुम अपने चमड़ी का मांस खतना करेगा, और यह वाचा मेरे और तुम्हारे betwixt की निशानी होगी.बाइबल, उत्पत्ति १७:११

http://2nobib.com/index.php?title=Genesis_17/hi

इस्लाम में खतना वीर्यहीन करने की विधि है| इस्लाम में, खतना एक सुन्नाह रिवाज है, जिसका कुरान में ज़िक्र नहीं किया गया है. मुख्य विचार यह है कि इसका पालन करना अनिवार्य नहीं है और यह इस्लाम में प्रवेश करने की शर्त नहीं है. अतः खतना पर प्रतिबन्ध लगाया जाये| अतएव मुसलमानों को नेक सलाह है कि वे खतना का विरोध करें| खतना करा कर अपने अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति के जनक वीर्य को नष्ट न करें| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है|

यहाँ विश्वामित्र और मेनका का प्रसंग प्रासंगिक है| इंद्र ने वीर्यवान विश्वामित्र को पराजित करने के लिए मेनका का उपयोग किया| मूसा (बाइबल, याशयाह १३:१६) व मुहम्मद (कुरान २३:६) ने तो इंद्र की भांति धरती की सभी नारियां मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप रखी हैं|. इतना ही नहीं ईसा ने बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) से विवाह की छूट दी है| अल्लाह ने मुहम्मद का निकाह उसकी पुत्रवधू जैनब (कुरान, ३३:३७-३८) से किया और ५२ वर्ष के आयु में ६ वर्ष की आयशा से उसका निकाह किया| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५(२)]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. लव जेहाद, बेटी व पुत्रवधू से विवाह, सहजीवन व समलैंगिक मैथुन और सगोत्रीय विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है| बारमें दारू पीने वाली बालाओं का सम्मान हो रहा है! विवाह सम्बन्ध अब बेमानी हो चुके हैं| जजों ने सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| एलिजाबेथ के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौन शिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडिया के विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियां बांटी जाएँगी| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| उज्ज्वला - नारायण दत्त तिवारी और आरुषि - हेमराज में जजों के फैसलों ने आने वाले समाज की दिशा निर्धारित कर दी है| आप वैश्यावृत्ति से अपनी नारियों को बचा न पाएंगे|

भावी पीढ़ी को सम्प्रभु बनाने वाले ब्रह्मचर्य के निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में नमो की रूचि नहीं है| गुजरात और गोवा में यौनशिक्षा लागू हो गई है और देश के प्रधानमन्त्री बनने पर नमो इसे पूरे देश में लागू करेंगे| स्कूलों में कंडोम और गर्भ निरोधक गोलिया बाँटेंगे| क्या आप भावी पीढ़ी को सम्प्रभु बनाने वाले ब्रह्मचर्य के निःशुल्क शिक्षाकेंद्र गुरुकुलों को पुनर्जीवित करने में आर्यावर्त सरकार को सहयोग देंगे?

 

In any case, freedom to choose and carry out purposes forces us to question freedom for what... I say that Spiritual Freedom is the essence of freedom. It can be enjoyed by Black, Whites and Browns, Hinduism provide Freedom; Peace of Mind”, freedom with wisdom, freedom with creative virtues happiness, and other spiritual goods.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, फोन ९१५२५७९०४१

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AyodhyaP Tripathi,
Feb 20, 2014, 8:40 AM
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