Aazaadi

‘आजादी’

आप लोगों से राम राज्य का वादा किया गया था, सोनिया के रोम राज्य में रहते आप लोगों को लज्जा क्यों नहीं आती? ईमाम आप को गाली देता है. स्वयं दास है और आप की आजादी छीनता है. क्या आप को नहीं मालूम कि संविधान ने आप को आजादी का वचन दिया है? ईमामों को दंडित करने के स्थान पर सोनिया ईमामों को वेतन दिलवा रही है. वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! (एआईआर, एस सी १९९३, २०८६). जज शीघ्र ही कुमारी माताओं को इनाम देने का आदेश पारित करेंगे. संयुक्त राष्ट्र संघ इसका कानून पहले ही बना चुका है. [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. अनुच्छेद २५(२)]. जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है. कुरान बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है. ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं. इस्लाम है तो काफ़िर नही. हम आप के लिए लड़ रहें हैं और आप लोग अपने सर्वनाश की जड़ चर्चों, मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं. ईश्वर से डरिये.

जिन मस्जिदों से हमारे ईश्वर को गाली दी जाती है और हमें कत्ल करने की घोषणा की जाती है, उसे हम नहीं रहने देंगे. यद्यपि meereमेरे संज्ञान में हमारे सैनिकों या अधिकारियों ने मस्जिदों में विष्फोट नहीं कराए हैं, तथापि यदि कराए भी हों तो मस्जिद नष्ट करना हमारा कानूनी अधिकार है.

मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का फतवा देने वाले सरकारी संरक्षण में अजान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें? हमसे उपासना की आजादी का वादा किया गया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें?

क्या आप ने सोचा कि मूसा से लेकर पाकपिता गाँधी तक यह कहते हुए क्यों नहीं आये कि उनका लक्ष्य आप को दास बनाना है? आज ही सही! मौलवियों और पादरियों से कहिये कि वे "ला इलाहलिल्लाहू व ‘दया’ के बदले घोषित करें कि वे मानव मात्र को दास बनाना चाहते हैं.

हमारे वैदिक सनातन धर्म में कोई पाप क्षमा नहीं होता. दूसरे की धन-धरती लूटने, कत्ल करने और नारी बलात्कार की सुविधा नहीं है. हमारा ईश्वर आप को उपासना, सम्पत्ति और जीवन का अधिकार देता है. आप को दास नहीं बनाता. पशु-पक्षी तक को अपनी आजादी प्रिय है. हम आप को धूर्त पैगम्बरों द्वारा छीना गया यही ‘आजादी’ का अनमोल रत्न वापस देना चाहते हैं.

मुसलमान इतिहासकार सगर्व लिखते हैं कि मुहम्मद ने कितने शांतिप्रिय नागरिकों को कत्ल किया. कितने मंदिर तोड़े. कितनी अबला नारियों के गहने लूटे, उनके सगे-सम्बन्धियों को कत्ल किया और उसी रात उनका बलात्कार किया. लेकिन जब सर्बो ने मुसलमान नारियों का बलात्कार किया और जब लेबनान के नागरिक ठिकानों पर इजराएल ने बमबारी की तो मुसलमानों को मानवाधिकार याद आ गया. अफगानिस्तान और इराक पर अमेरिकी आधिपत्य से मुसलमान आतंकित हैं. लेकिन मुसलमान भूल गए हैं कि अल्लाह ने मुसलमानों को सृष्टि सौँप रखी है (कुरान २:२५५) और ईसा ने ईसाइयों को हर उस व्यक्ति को कत्ल करने का अधिकार दे रखा है, जो ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करता. (बाइबल, लूका १९:२७). मुसलमान विचार करें कि तब क्या होगा, जब ईसाई मुसलमानों को कत्ल कर विश्व के सभी इस्लामी राज्यों पर आधिपत्य जमा लेंगे? अकेले इजराएल से तो मुसलमान निपट नहीं पाए, सभी ईसाई राज्यों से मुसलमान कैसे निपटेंगे?

मूसा पहला व्यक्ति था जिसने लूट, बलात्कार और हत्या को मन-गढ़न्त जेहोवा द्वारा घोषित हठधर्म बताया. मूसा ने मिस्र के मूल निवासियों और उनकी संस्कृति का विनाश कर दिया. आज उसी मिस्र से यहूदी लुप्त हो गए. नाजी मिटे, समाजवादी मिटे. दैत्य और रक्ष संस्कृतियाँ भी मिट गई. अब ईसाइयत और इस्लाम की बारी है. आर्यावर्त सरकार को सहयोग तो दें.

भारतीय संविधान का संकलन कर आर्यों का देश उनसे चुरा कर संयुक्त रूप से मुसलमान और ईसाई लोगों को सौँप दिया गया है. सूचना के अधिकार के अधीन मुझे बताया गया है कि वैदिक पंथियों को अपने वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है.

अतः भारतीय संविधान ने वैदिक सनातन धर्म के अनुयायियों की धरती, सम्पत्ति व नारियां मुसलमान और ईसाई लोगों को दे दी हैं. हमारे शासकों को यह स्वीकार भी है. अतएव मुसलमान और ईसाई लोगों को लड़ कर यह निर्णय कर लेना चाहिए कि विश्व पर अधिकार मुसलमानों का रहेगा या ईसाइयों का. यहाँ भी एक समस्या है. जीते चाहे कोई, रहेगा वह शासक का दास ही!

गोरक्ष पीठ के पास काफी सम्पत्ति है. सम्पत्ति लूटने के लिए ही भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) संकलित किया गया है. देखें नीचे उद्धृत लिंक पर:-

http://www.aryavrt.com/nl-petition-transfered

लोक सेवक को अपराध के दंड से मुक्त रखने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनी है. वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) संकलित किया गया है.

मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर टूटने की १९९२ से आज तक जांच क्यों नहीं हुई? संतों का स्टिंग आपरेशन करने वाले किसी पत्रकार के पास पूछने का साहस नहीं हुआ. देखें नीचे उद्धृत लिंक पर:-

http://www.aryavrt.com/temple-demolition-by-sonia

http://www.aryavrt.com/no-right-to-life

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी वेब साईट http://www.aryavrt.com/azaan पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं.  लेकिन मंदिर तोड़ना अपराध नहीं माना जाता! बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और कोई जाँच आयोग. ४ मस्जिदों के विष्फोट के लिए हम भगवा आतंकवादी हैं! १०८ मंदिर तोड्वाने वाली सोनिया सरकार कौन है? क्या इस देश का वकील वर्ग पूछेगा?

देखें नीचे उद्धृत लिंक पर:-

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

जजों, राज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों (सोनिया) की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

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