Home‎ > ‎

Sonia tntr

Registration Number is : PRSEC/E/2011/11377

Dated: Saturday, July 16, 2011y

Web site: http://helpline.rb.nic.in/

This is a public document. Any one can view the status from the web site by typing the above Registration Number. There is no pass-word.

जनता की अदालत में...

विषय: भूमि खेसरा सं० ८८६ रकबा १.६८ एकड़ व ९२७/४, ०.२० एकड़, मौजा तुर्कमानपुर, तप्पा क़स्बा, परगना हवेली, तहसील सदर, जिला गोरखपुर. उ० प्र०

सूचना के अधिकार के अंतर्गत मैने राष्ट्रपति को पत्र लिखा. केन्द्रीय गृह मंत्रालय से मेरे पास उत्तर आया, गृह मंत्रालय द्वारा किसी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है. जांच बंद हो गई. मांगी गई सूचना निम्नलिखित (एक पैरा में) है:-

अपने पत्र दिनांक द्वारा मैंने जानना चाहा था कि मेरी याचिकाएं अन्य विभागों में क्यों भेजी जा रही हैं, जब कि मेरे भूमि की चोरनी सोनिया ही मेरी भूमि अपने मातहतों से कह कर वापस करा सकती है. जिसका उत्तर आया है कि मैंने कोई सूचना ही नहीं मांगी है.

पाठक अपना भ्रम दूर करें. भारत न स्वतंत्र है और न भारत में कोई लोकतंत्र है. भारत में चोरनी सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनिया तन्त्र है. क्यों कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री का मनोनयन सोनिया ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन सोनिया ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. भारत आज भी ब्रिटिश उपनिवेश (dominion) है. स्व(अपना)तन्त्र नहीं. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||) और भारत राष्ट्रकुल का सदस्य भी है.

मै मानव मात्र का ध्यान भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ. इनकी तर्कपूर्ण विवेचना कीजिए. ए नीचे की लिंक में उद्धृत है:-

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

डेनिअल वेबस्टर ने कहा है, हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को लूट से जोड़ दिया है.

भारतीय दंड संहिता

प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के विषय में

धारा ९६. प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें कोई बात अपराध नहीं है, जो प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग में की जाती है.

धारा १०. सम्पत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारम्भ और बना रहना - सम्पत्ति के प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार उसी क्षण प्रारम्भ हो जाता है, जब अपराध करने के प्रयत्न या धमकी से सम्पत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका पैदा होती है, चाहे वह अपराध न किया गया हो और वह तब तक बना रहता है जब तक सम्पत्ति के संकट की ऐसी आशंका बनी रहती है.

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे. स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है. लेकिन भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) ही चोर है. भारतीय संविधान को चोर कहना सोनिया के रोम राज्य के विरद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है और संसद व विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन भी. जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे सोनिया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी. मुसलमान ईश निंदा में कत्ल करेगा. मै ४२ बार हवालात और जेल गया हूँ| और हमारे १२ अधिकारी जेलों में बंद हैं. श्री खेर पहली बार जायेंगे.

मुझे इस बात से मतलब नहीं कि आप हिंदू हैं या मुसलमान अथवा ईसाई. आप के सामने मै उपनिषद के अंश रखता हूँ. निर्णय करें किसे चाहेंगे?

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

मातृवत पर दारेषु पर द्रव्येषु लोष्ट्वत| आत्मवत सर्व भूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः||

जो दूसरे की नारी में माँ देखता है| दूसरे के धन में मिट्टी देखता है| अपनी आत्मा चराचर में देखता है, वह पंडित है.

सृष्टि धर्म पर टिकी है, धर्म वेदों पर. धर्म न बचा तो कुछ न बचेगा. क्यों कि,

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत.

(मनु स्मृति ८:१५)

संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे. क्योंकि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ. संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम भारत के लोगोंने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत / आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं. इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के संकलन का फलितार्थ समझिए. सम्पत्ति का संकेन्द्रण तो हो लेकिन सोनिया के पास. इसके गणित को समझिए. इस अनुच्छेद के अधीन नागरिक की सारी सम्पत्ति सोनिया की है. इन आये दिन के घोटालों का शोर इसलिए है कि सोनिया की धन की प्यास नहीं बुझ रही है और लोकसेवक लूट में सोनिया को हिस्सा नहीं दे रहे हैं..

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है? भारतीय संविधान लूट को लोकसेवक का कर्तव्य बनाता है|

लोक सेवक को नागरिक की सम्पत्ति को छीनने के लिए ही नियुक्त किया जाता है. नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोक सेवक को नागरिक को लूटना पड़ेगा. भ्रष्टाचार की शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पुलिस के पास है और न जज के पास. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति देने का अधिकार प्रेसिडेंट, राज्यपाल या जिलाधीश के पास है. इन सबका नियंत्रण सोनिया के पास है. अतएव भ्रष्टाचारी वह है, जिसे सोनिया भ्रष्टाचारी माने| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ लुटेरों को तब तक संरक्षण देती है, जब तक सोनिया को लूट में हिस्सा मिलता रहे. वह भी ससम्मान. लोक सेवक जब तक सोनिया या उसके मातहत को हिस्सा देगा, उसके विरुद्ध कोई अभियोग ही नहीं चल सकता. अभियोग तब चलता है, जब लोक सेवक या तो सोनिया को हिस्सा देता ही नहीं या कम देता है.

व्यक्तियों पर अभियोग चलाने से जनता को कुछ नहीं मिलेगा. भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) और अनुच्छेद ३१ से मिला सम्पत्ति का मौलिक अधिकार, जिसे २०-६-१९७९ को मिटाया गया, है. सरकार जनता के सम्पत्ति के रक्षा के लिए है, लूटने के लिए नहीं.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

चौराहों पर ट्राफिक पुलिस की लूट, न्यायपालिका में जजों की लूट, रेल में टी टी की लूट, राजस्व कर्मियों की अभिलेखों में जालसाजी द्वारा लूट आदि को तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता, जब तक सोनिया को हिस्सा मिलता रहे. भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार तब होता है, जब सोनिया को हिस्सा न मिले. घोटालों की सम्पत्ति यदि सरकार को वापस भी मिल जाये तो उससे आम नागरिक को कुछ नहीं मिलने वाला. क्यों कि बोफोर चोर राजीव गाँधी सन १९८५ में ही हमे बता गया था कि खजाने का ८५% धन बिचौलिए खा जा रहे थे. अब राहुल ने बताया है कि ९५% बिचौलिए खा रहे हैं.कर व्यापारी या उद्योगपति नहीं देते. अंततः उसे गरीब नागरिक ही देता है. १६.६७% से अधिक कर लूट है और किसानों व मजदूरों की आत्महत्या का कारण भी. चूंकि सोनिया को ईसा की आज्ञा वैदिक सनातन धर्म को मिटाने की है. अतः इस लूट में सोनिया सरकार को दोहरा लाभ है, वैदिक सनातन धर्म भी मिट रहा है और सोनिया को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है.

मै पूरे विश्व को चुनौती देता हूँ कि मेरे १.९४ और हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल के स्मारक की ३.३ एकड़ भूमि के भ्रष्टाचार को रोक कर दिखाए. लीबिया के तानाशाह गद्दाफी के विरुद्ध तो अमेरिका ने कार्यवाही कर दी, भ्रष्टाचार की मुखिया सोनिया के विरुद्ध कौन कार्यवाही करेगा?

एक ओर लुटेरे, हत्यारे, बलात्कारी अल्लाह और जेहोवा का सबको दास बनाने वाला प्रजातंत्र है, जो मानव जाति को निगल जाना चाहता है. दूसरी ओर वैदिक सनातन धर्म का राजतंत्र है, जो मानव मात्र को उपासना की स्वतंत्रता, सम्पत्ति का अधिकार, ब्रह्मचर्य आधारित गुरुकुल की शिक्षा ओर नारी को सम्मान देगा. अतएव यदि मानव जाति को बचाना हो तो जगतगुरु अमृतानंद देवतीर्थ द्वारा चयनित महाराज दिनेश का राज्याभिषेक कराइए. अन्यथा आप मिट जायेंगे.   अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी.

 

ĉ
ap tripathi,
Jul 15, 2011, 6:28 PM
Comments