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Sonia Prayojit BomVishfot

सोनिया प्रायोजित दिल्ली हाईकोर्ट बम्ब विष्फोट

जिहाद मिटाने का देश में कानून नहीं है. भ्रष्टाचार से प्राप्त विदेशों में जमा धन ठिकाने पर लगाने के बाद सोनिया ने देश में आते ही बम्ब विष्फोट अपने एजेंटों से स्वयं करवाए हैं. ताकि २ जी पर स्वामी द्वारा सर्वोच्च न्यायलय में प्रस्तुत वाद से लोगों का ध्यान हटा दिया जाये.

देश में कोई आतंक नहीं हो रहा है. सारी घटनाएँ ईसाइयत और इस्लाम के मिसन और जेहाद हैं. जो सोनिया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) द्वारा प्रायोजित हैं. नागरिक पहले उपरोक्त सच्चाइयों को कहने का साहस जुटाएं. मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट है. जो सरकार अफजल को फांसी नहीं दे सकती, वह भारतीय संविधान प्रायोजित जिहाद कैसे मिटा सकती है. संविधान के संशोधन के लिए तीन चौथाई सांसदों का बहुमत चाहिए. नेताओं, सुधारकों, संतों, मीडिया, इस्लामी मौलवियों, मिशनरी और लोकसेवकों द्वारा जानबूझ कर मानवता को धोखा दिया जा रहा हैं. सच छुपा नहीं है, न ही इसे जानना मुश्किल है. मानव उन्मूलन की कीमत पर आतंकित और असहाय मीडिया जानबूझकर अनभिज्ञ  बनी हुई है. मुसलमानों और ईसाइयों द्वारा तब तक जिहाद और मिशन जारी रहेगा, जब तक हम उनके साधन और प्रेरणा स्रोत को नष्ट न कर दें. उनके साधन पेट्रो डालर और मिशनरी फंड और प्रेरणा स्रोत कुरान (कुरान ८:३९) और बाइबल (बाइबल, लूका १९:२७) है| क्या अपने बचाव हेतु नवयुवक आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे?

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन ईसाइयत और इस्लाम को इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए किया है. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों व उनकी मायासंस्कृतिको निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है. वैदिक सनातन धर्म की रक्षा के लिए ईसाइयत और इस्लाम का धरती से सफाया आवश्यक है.

प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है. परभक्षी संविधान का अनुच्छेद २९(१) किसी नागरिक को जीने का अधिकार नहीं देता और ३९(ग) नागरिक को सम्पत्ति या पूँजी का अधिकार ही नहीं देता. भारतीय संविधान को कोई भ्रष्टाचारी व आतंकवादी नहीं मानता. जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन, सोनिया के मनोनीत, राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (कुरान, सूरह अल अनफाल ८:३९). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है.

काबा हमारा शिवमंदिर है, अजान ईश्वरनिन्दा है, मस्जिद सेनावास हैं और कुरान सारी दुनिया में फुंक रही है. क्यों रहे इस्लाम?

http://www.aryavrt.com/Home/minority-voting-right

 

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