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Samjhauta Noida Scam

जागरण में प्रकाशित समाचार लिखित समझौता करने से बच रहे हैं किसान Aug 04, 01:39 am पढ़ा.

ब०नोएडा भूमि निर्णय

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- (१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है.

जहां भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) सोनिया को जनता को लूटने का असीमित अधिकार देता है, वहीँ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन लोकसेवक के लूट को अपराध तब तक नहीं माना जाता, जब तक लोकसेवक लूट कर सोनिया या उसके मातहत को हिस्सा देता है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) के संकलन का फलितार्थ समझिए. सम्पत्ति का संकेन्द्रण तो हो लेकिन सोनिया के पास. इसके गणित को समझिए. इस अनुच्छेद के अधीन नागरिक की सारी सम्पत्ति सोनिया की है. इन आये दिन के घोटालों का शोर इसलिए है कि सोनिया की धन की प्यास नहीं बुझ रही है और लोकसेवक लूट में हिस्सा नहीं दे रहे हैं..

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है? भारतीय संविधान लूट को लोकसेवक का कर्तव्य बनाता है|

लोक सेवक को नागरिक की सम्पत्ति को छीनने के लिए ही नियुक्त किया जाता है. नौकरी की अघोषित शर्त यह है कि लोक सेवक को नागरिक को लूटना पड़ेगा. भ्रष्टाचार की शिकायत का संज्ञान लेने का अधिकार न तो पुलिस के पास है और न जज के पास. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन अभियोग चलाने की अनुमति देने का अधिकार प्रेसिडेंट या राज्यपाल के पास है. इन सबका नियंत्रण सोनिया के पास है. अतएव भ्रष्टाचारी वह है, जिसे सोनिया भ्रष्टाचारी माने| दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ लुटेरों को तब तक संरक्षण देती है, जब तक सोनिया को लूट में हिस्सा मिलता रहे. वह भी ससम्मान. लोक सेवक जब तक सोनिया या उसके मातहत को हिस्सा देगा, उसके विरुद्ध कोई अभियोग ही नहीं चल सकता. अभियोग तब चलता है, जब लोक सेवक या तो सोनिया को हिस्सा देता ही नहीं या कम देता है.

विवादित मामले में सोनिया के मनोनीत राज्यपाल बनवारी और मायावती ने अपराध किया है, लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के भ्रष्ट आतंकवादी जजों ने न बनवारी और मायावती को दंडित किया और न कर ही सकते हैं. क्यों कि जजों ने जनता को लूटने की शपथ ले रखी है.

व्यक्तियों पर अभियोग चलाने से जनता को कुछ नहीं मिलेगा. भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) और अनुच्छेद ३१ से मिला सम्पत्ति का मौलिक अधिकार, जिसे २०-६-१९७९ को मिटाया गया, है. सरकार जनता के सम्पत्ति के रक्षा के लिए है, लूटने के लिए नहीं.

मै पूरे विश्व को चुनौती देता हूँ कि मेरे १.८८ एकड़ और हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल के स्मारक की ३.३ एकड़ भूमि के भ्रष्टाचार को रोक कर दिखाए. लीबिया के तानाशाह गद्दाफी के विरुद्ध तो अमेरिका ने कार्यवाही कर दी, भ्रष्टाचार की मुखिया सोनिया के विरुद्ध कौन कार्यवाही करेगा?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८). उपरोक्त अनुच्छेद का विवेचन कीजिए. बताइए राजा या कलमाडी ने अपराध कैसे किया? यदि राजा घोटाला न करते तो राजा सोनिया के किस काम के? मंत्री कैसे बनते?

चौराहों पर ट्राफिक पुलिस की लूट, न्यायपालिका में जजों की लूट, रेल में टी टी की लूट, राजस्व कर्मियों की अभिलेखों में जालसाजी आदि को तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाता, जब तक सोनिया को हिस्सा मिलता रहे. भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार तब होता है, जब सोनिया को हिस्सा न मिले. ब०नोएडा के भूमि के भ्रष्टाचार के अपराधी सोनिया के मनोनीत राज्यपाल बनवारी और दस्यु सुंदरी मुख्यमंत्री मायावती हैं. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के भ्रष्ट जजों ने इनको दंडित न करने का अपराध किया है. किसान व बिल्डर राज्यपाल बनवारी, मायावती और जजों को जेल भेजवाने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें, अन्यथा देश के नागरिक लुटते रहेंगे. किसान तेवतिया के बारे में भी सोचें.

घोटालों की सम्पत्ति यदि सरकार को वापस भी मिल जाये तो उससे आम नागरिक को कुछ नहीं मिलने वाला. क्यों कि बोफोर चोर राजीव गाँधी सन १९८५ में ही हमे बता गया था कि खजाने का ८५% धन बिचौलिए खा जा रहे थे. अब राहुल ने बताया है कि ९५% बिचौलिए खा रहे हैं. कर व्यापारी या उद्योगपति नहीं देते. अंततः उसे गरीब नागरिक ही देता है. १६.६७% से अधिक कर लूट है और किसानों व मजदूरों की आत्महत्या का कारण भी. चूंकि सोनिया को ईसा की आज्ञा वैदिक सनातन धर्म को मिटाने की है. अतः इस लूट में सोनिया सरकार को दोहरा लाभ है, वैदिक सनातन धर्म भी मिट रहा है और सोनिया को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/Farmers-reject-Noida-pact_5_1_6234445.html

 

 

 

 

 

ग्रेटर नोएडा। हाईकोर्ट में समझौते का जवाब दाखिले करने के लिए प्राधिकरण के पास सिर्फ नौ दिन का समय रह गया है। अब तक नोएडा एक्सटेंशन के एक भी किसान ने प्राधिकरण से लिखित में समझौता नहीं किया है। प्राधिकरण अधिकारियों से वार्ता करने के बाद भी किसान लिखित में समझौता करने से बच रहे हैं। किसानों की चुप्पी प्राधिकरण की मुश्किलें बढ़ा रही है।

हाईकोर्ट की सलाह पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण समझौते की राह तलाशने के लिए किसानों से बात कर रहा है। सीईओ रमा रमन ने कोर्ट से फैसला आने के दूसरे दिन गांव पतवाड़ी के ग्राम प्रधान को पत्र भेज कर वार्ता के लिए खुला आमंत्रण दिया था। इसके बाद गांव खैरपुर गुर्जर पहुंच कर किसानों की समस्याएं सुनी। किसानों से सभी बिंदुओं पर वार्ता करने के लिए आमंत्रित किया।

गांव के कुछ किसानों ने दूसरे ही दिन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। सीईओ अब तक खैरपुर के अलावा पतवाड़ी, रोजा याकूबपुर व इटैड़ा गांवों में जाकर किसानों से वार्ता कर चुके हैं। वार्ता के दौरान आबादी, छह फीसदी भूखंड व बैकलीज जैसे मुद्दों पर सहमति बनती नजर रही है।

मुआवजा बढ़ोतरी पर सहमति न बन पाने पर किसानों की कमेटी गठित कर सीईओ ने किसानों को आमंत्रित किया है। मुआवजे पर वार्ता करने के लिए किसानों की कोई कमेटी नहीं तैयार हुई। अगर 12 अगस्त तक किसानों ने प्राधिकरण के साथ लिखित में समझौता नहीं किया तो हाईकोर्ट में जवाब दाखिल नहीं हो पाएगा। जवाब दाखिल न होने की सूरत में प्राधिकरण के लिए संकट बढ़ सकता है। हालांकि नोएडा एक्सटेंशन के अलावा सिरसा, मायचा व रिठौरी के कुछ किसानों ने प्राधिकरण के साथ लिखित में समझौता कर लिया है।

किसानों को भेजा जा रहा पत्र

ग्रेटर नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन के अलावा अन्य गांवों के किसानों से वार्ता करने के लिए प्राधिकरण की तरफ से पत्र भेजा जा रहा है। कोर्ट में याचिका दायर करने वाले करीब दो सौ किसानों को वार्ता के लिए प्राधिकरण ने आमंत्रित किया है। मालूम हो कि हाईकोर्ट ने 26 जुलाई को जमीन अधिग्रहण मामले की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण को 12 अगस्त तक किसानों से वार्ता कर समझौते करने का सुझाव दिया था। गांव बिसरख, घोड़ी बछेड़ा, मायचा समेत अन्य गांवों के करीब दो सौ किसानों को प्राधिकरण की तरफ से पत्र भेजा गया है।

समझौते पर किसानों का सकारात्मक रुख

ग्रेटर नोएडा [संवाददाता]। समझौते की राह तलाशने बुधवार को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी [सीईओ] रमा रमन नोएडा एक्सटेंशन के गांव इटैड़ा पहुंचे। दो घंटे तक किसानों के साथ चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनी। आबादी, बैकलीज व छह फीसदी भूखंड पर किसानों के साथ उनकी वार्ता सकारात्मक रही, लेकिन मुआवजे के मुद्दे पर आते ही मामला अटक गया। किसानों ने आपस में विचार विमर्श कर कमेटी गठित करने के बाद मुआवजे पर प्राधिकरण से बातचीत करने का फैसला लिया।

 

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AyodhyaP Tripathi,
Aug 3, 2011, 8:55 PM
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