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Muj11W21 Bhartiya Smvidhan

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: PRSEC/E/2011/07999 Dated:  24-05-11y

With President Secretariat, New Delhi-110004

लोकमत के अदालत में:-

संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ सुभाष कश्यप जी से:

न मे स्तेनो जनपदे न कर्दर्यो न मद्यपो नानाहिताग्निर्नाविद्वान्न स्वैरी स्वैरिणी कुतो

छान्दोग्योपनिषद, पंचम प्रपाठक, एकादश खंड, पांचवां श्लोक

अर्थ: कैकेय देश के राजा अश्वपति ने कहा, मेरे राज्य में कोई चोर नहीं है, कंजूस नहीं, शराबी नहीं, ऐसा कोई गृहस्थ नहीं है, जो बिना यज्ञ किये भोजन करता हो, न ही अविद्वान है और न ही कोई व्यभिचारी है, फिर व्यभिचारी स्त्री कैसे होगी?

वैदिक राज्य में चोर, भिखारी और व्यभिचारी नहीं होते थे| स्वयं मैकाले ने २ फरवरी १८३५ को इस बात की पुष्टि की है| लेकिन भारत का संविधान ही चोर है| भारतीय संविधान को चोर कहना सोनिया के रोम राज्य के विरद्ध भारतीय दंड संहिता के धारा १५३ व २९५ के अंतर्गत अपराध है| इनका नियंत्रण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत सोनिया के मनोनीत राज्यपालों के हाथ में है| ऐसा कहना संसद व विधानसभाओं के विशेषाधिकार का हनन भी है| जो भी इस सच्चाई को कहे या लिखेगा, उसे सोनिया दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ में जेल भेजवा देंगी| मुसलमान ईश निंदा में कत्ल करेगा| मै ४२ बार हवालात और जेल गया हूँ और हमारे १२ अधिकारी ईसाइयत और इस्लाम के विरोध के कारण बंद हैं|

भारतीय संविधान आप के जीवन व सम्पत्ति से आप को बेदखल कर चुका है| प्रमाण नीचे है,

भारतीय संविधान का अनुच्छेद(१) जाति हिंसक, बलात्कारी व दासता पोषक है| देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान भाग ३ मौलिक अधिकार|

और अनुच्छेद ३९(ग) भ्रष्टाचारी है. देखें:-

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है| इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८)

केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७) और अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी अधिकार है. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं.

भारत आज भी ब्रिटिश उपनिवेश (dominion) है. स्व(अपना)तन्त्र नहीं. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||) और भारत राष्ट्रकुल का सदस्य भी है. भारत के नागरिकों के स्व (अपने) तन्त्र की सीमायें हैं. भारत के नागरिक इन सीमाओं से बाहर नहीं जा सकते. जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं,

नागरिक के पास सम्पत्ति नहीं रहने दी जायेगी. [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और लुप्त अनुच्छेद ३१]. सम्पत्ति समाज की ही रहेगी. लूट का माल अल्लाह (कुरान ८:१; ४१ व ६९) और ईसाई (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१४) का बना रहेगा. इसे भ्रष्टाचार भी नहीं माना जायेगा. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन जनता के सम्पत्ति के लुटेरे लोकसेवकों का नियंत्रण राज्यपालों के हाथ में बना रहेगा. जब तक सोनिया को हिस्सा मिलेगा; लोक सेवकों की नौकरी पक्की. लूट शिष्टाचार बना रहेगा. जब सोनिया को हिस्सा नहीं मिलेगा, लूट भ्रष्टाचार बन जायेगा. बेटी (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और पुत्रवधू (कुरान, ३३:३७-३८) से विवाह कीजिए. गांड मारिये मराइए और जजों के गुण गाइए.

भारतीय संविधान कूटरचित परभक्षी अभिलेख है. क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ. संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम भारत के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने सोनियाके लूट राज्य को चुनौती दी है.

ईसाइयत और इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, उन्होंने वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए हुआ है. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों उनकी माया संस्कृति को निगल गया. ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है. जिन्हें देश, वैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए - हमारी सहायता करें.

सुभाष कश्यप जी ने १९५० से आज तक इस कुटरचित-परभक्षी भारतीय संविधान का विरोध नहीं किया.

आप सहयोग दें तो हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोग मस्जिदें नहीं रहने देंगे. हमने बाबरी ढांचा गिराया है. हम ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी हैं. क्यों कि मस्जिदों से हमारे वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर कादंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार द्वारा दिए गए संरक्षण मेंईमामों द्वारा अपमान किया जाता हैमात्र मुहम्मद के कार्टून बना देने सेईशनिंदा के अपराध में कत्ल करने वाले मुसलमानों द्वाराईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं. ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें

सोनिया को ईसा का राज्य स्थापित करना है. हमसे पाकपिता गाँधी ने स्व(अपना)तन्त्रता और रामराज्य का वादा किया है. हमें ईसा के रोम राज्य में रहने के लिए विवश नहीं किया जा सकता. आस्था की रक्षा गैर-मुसलमान का कानूनी अधिकार है. जो भी ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है- मानव जाति का शत्रु है. यह मीडिया की ही महिमा है कि ४ मस्जिदों में विष्फोट के आरोप में हम भगवा आतंकवादी हैं और मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड्ने वालों की संरक्षक सोनिया आतंकवादी नहीं.  बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं. तथाकथित स्वतंत्र न्यायपालिका के संज्ञान में साध्वी के रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई है. जगतगुरु को बिजली के झटके दिए गए. उनके मुंह में एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे द्वारा गोमांस ठूसा गया. योगगुरू रामदेव ने करकरे को शहीद घोषित कर  ९० लाख रुपया इनाम दिया. कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का पैर तोड़ दिया गया. संयुक्त राष्ट्र संघ का मानवाधिकार संगठन चुप है. दुनिया के सभी सरकारी व गैर सरकारी मानवाधिकार संगठनों को सांप सूंघ गया है. मै विश्व के समस्त राष्ट्राध्यक्षों को राजनैतिक शरण के लिए लिख चुका हूँ. किसी ने मुझे शरण देने का साहस नहीं किया. यहाँ तक कि इस्राएल और अमेरिका ने भी नहीं.

प्रेसिडेंटप्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है.

भारतीय संविधान ने राज्यपाल हंसराज भरद्वाज की प्रभुता, पद और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. राज्यपाल हंसराज भरद्वाज ने स्वेच्छा से अपने जीवन, सम्पत्ति, नारी और वैदिक सनातन धर्म से अपना अधिकार त्याग दिया है.

कर्नाटक में जो भी हो रहा है, उसके पीछे सोनिया है. राज्यपाल हंसराज भरद्वाज वह करने के लिए विवश हैं, जो सोनिया चाहे. अन्यथा पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी की भांति नप जायेंगे.

पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी पर यौनाचार का आरोप है. उन्होंने त्यागपत्र दे दिया है. सोनिया के ईसा ने अपनी बेटियों से विवाह का अधिकार दिया है. (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और अल्लाह ने पुत्रवधू से निकाह का अधिकार. (कुरान, ३३:३७-३८) आर्यावर्त सरकार संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ सुभाष कश्यप जी से यह जानना चाहती है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा या भारत के मुख्य न्यायाधीश कपाडिया को ईसा अथवा अल्लाह के विरुद्ध क्या कार्यवाही करनी चाहिए? ज्ञातव्य है कि ईसा और अल्लाह के अपराध पूर्व राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी के अपराध से अधिक गंभीर हैं.

मानव बताए क्या भारतीय संविधान रहना चाहिए?

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

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ap tripathi,
May 27, 2011, 3:53 AM
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ap tripathi,
May 27, 2011, 3:51 AM
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PRSEC-E-2011-07999.htm
(16k)
AyodhyaP Tripathi,
Nov 23, 2013, 4:18 AM
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