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jj aur nyay

जज और न्याय

जिसने भी भारतीय संविधान में निष्ठा की शपथ ली है, अथवा बनाये रखने या रक्षा करने की शपथ ली है, वह वैदिक पंथियों के मानवाधिकारों की अवहेलना का दंडनीय अपराध कर रहा है और मानवता का शत्रु है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) ने नागरिकों से सम्पत्ति रखने का अधिकार २६ जनवरी, १९५० से ही छीन लिया है. वोट द्वारा भी नागरिक इस अधिकार को नहीं बदल सकते. स्वयं लोकसभा व सर्वोच्च न्यायलय भी कुछ नहीं कर सकती.

मुसलमान और ईसाई अल्पसंख्यक नहीं, बल्कि क्रमशः विश्व की द्वितीय व प्रथम आबादी हैं. अल्पसंख्यक तो हम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी हैं. जिन मुसलमानों व ईसाइयों को पाकपिता गाँधी ने रोका है वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से मिले असीमित मौलिक अधिकार और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार से प्रायोजित संरक्षण मे भारत को दार उल इस्लाम व ईसा का राज्य बनाना चाहते हैं. भारतीय संविधान के अधिकार से सोनिया मानवता को मिटा रही है. रोकना चाहते हों तो आर्यावर्त सरकार को छिप कर सहयोग दें. क्योंकि हमें खुलकर मदद नहीं कर सकते|

ईसा अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाता. धरती पर केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७) और अल्लाह व उसके इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी व संवैधानिक {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} अधिकार है.

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ईसाइयत और इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, उन्होंने वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए हुआ है. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है.

अखिल भारत हिंदू महा सभा के लोग इनको भारत में रखने वाले भारतीय संविधान को रद्द करने की मांग क्यों नहीं करते? यदि नहीं कर सकते तो कम से कम हमें सहयोग दीजिए. जज वैदिक सनातन धर्म और मानवता के निकृष्टतम शत्रु हैं, वैदिक सनातन धर्म का समूल नाश इनकी पद, प्रभुता और पेट से जुड़ा हुआ है और इन्होने मानवता का सदा गला घोटा है. आप लोग इन मानवता के शत्रुओं से न्याय की आशा नहीं कर सकते.

हम आर्यावर्त सरकार और अभिनव भारत के लोग आमने सामने की लड़ाई लड़ रहे हैं. हमारे १२ अधिकारी मक्का, मालेगांव आदि के विष्फोट में विभिन्न जेलों में बंद हैं. हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है.

२६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथ छल हुआ था. संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे. क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ. संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम भारत के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं. इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं|

भारत में कोई लोकतंत्र नहीं है. भारत में सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनिया तंत्र है. सर्व विदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री का मनोनयन सोनिया ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन सोनिया ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. 

भारत आज भी ब्रिटिश उपनिवेश (dominion) है. स्व(अपना)तन्त्र नहीं. भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||) और भारत राष्ट्रकुल का सदस्य भी है.

भारत के नागरिकों के स्व (अपने) तन्त्र की सीमायें हैं. भारत के नागरिक इन सीमाओं से बाहर नहीं जा सकते. जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं,

नागरिक के पास सम्पत्ति नहीं रहने दी जायेगी. [भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) और लुप्त अनुच्छेद ३१]. सम्पत्ति समाज की ही रहेगी. लूट का माल सोनिया, अल्लाह (कुरान ८:१; ४१ व ६९) और ईसाई (बाइबल, व्यवस्था विवरण २०:१४) का बना रहेगा. इसे भ्रष्टाचार भी नहीं माना जायेगा. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन जनता के सम्पत्ति के लुटेरे लोकसेवकों का नियंत्रण राज्यपालों के हाथ में बना रहेगा. जब तक सोनिया को हिस्सा मिलेगा, लोक सेवकों की नौकरी पक्की. लूट शिष्टाचार बना रहेगा. जब सोनिया को हिस्सा नहीं मिलेगा, लूट भ्रष्टाचार बन जायेगा. लूटेगी सोनिया और जेल जायेंगे राजा और कलमाडी आदि.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८)

सोनिया के देश पर आधिपत्य को स्वीकार करते ही आप ईसा की भेंड़ हैं. ईसा १० करोड़ लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और वेदिक संस्कृति पर भिड़ी है. संविधान के अनुच्छेद ३१ के संशोधन को मान्यता, समलैंगिक सम्बन्ध, सहजीवन, कन्याओं को पब में शराब पीने और नंगे नाचने का अधिकार, सगोत्रीय विवाह के कानून तो जजों ने ही पास किये हैं. जज ज्यादा उछल कूद करेंगे तो शमित मुख़र्जी व मेरी भांति तिहाड़ जेल चले जायेंगे. बचना हो तो सोनिया को जेल भेजने में हमें सहयोग दीजिए.

सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता मिल गई है. आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं. आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही दे चुका है. [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. अनुच्छेद २५(२)]. सोनिया के निर्देश में जज शीघ्र ही भारत में आप की कन्याओं को यह अधिकार देंगे.

नागरिक को ज्ञान रखने का अधिकार नहीं. [(बाइबल, उत्पत्ति २:१७) व (कुरान २:३५)]. जीने का अधिकार नहीं. [(बाइबल, लूका १९:२७) व (कुरान ३:१९)]. नारी का बलात्कार या तो मुसलमान करेगा या ईसाई. [(कुरान २३:६) (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. सम्पत्ति रखने का अधिकार नहीं. [(भारतीय संविधान ३९(ग), (कुरान ८:१, ४१ व ६९) व (बाइबल, याशयाह १३:१६)]. इसे आप स्वतंत्रतामानते हैं.

सोनिया के ईसा ने बेटियों को बाप से विवाह की छूट दी है (बाइबल, , कोरिन्थिंस ७:३६) और अल्लाह ने पुत्रवधू से निकाह की छूट (कुरान, ३३:३७-३८). सोनिया यह सुविधा देश के सभी नागरिकों को देना चाहती है. अब आप को अपने कन्याओं के लिए वर ढूढने की कोई आवश्यकता नहीं. बेटी से स्वयं विवाह कीजिए और न करिये तब भी विवाह की क्या जरूरत?

आप ईसा को राजा स्वीकार नहीं करते. (बाइबल, लूका १९:२७) अतएव सोनिया के पास आप को कत्ल करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा. आप अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा करते हैं. अतएव उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के पास सोनिया सहित आप की हत्या का अधिकार सुरक्षित रहेगा. (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४) चुनाव द्वारा इनमें कोई परिवर्तन सम्भव नहीं. आरती उतारिये लोकतंत्र और धूर्त चुनाव आयोग की.

आप लोगों से राम राज्य का वादा किया गया था, सोनिया के रोम राज्य में रहते आप लोगों को लज्जा क्यों नहीं आती? ईमाम आप को गाली देता है. आप की स्वतंत्रता छीनता है. क्या आप को नहीं मालूम कि संविधान ने आप को स्वतंत्रता का वचन दिया है

ईमामों को दंडित करने के स्थान पर सोनिया ईमामों को वेतन दिलवा रही है. वह भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से! एआईआर, एस सी १९९३, २०८६. जज शीघ्र ही कुमारी माताओं को इनाम देने का आदेश पारित करेंगे. संयुक्त राष्ट्र संघ इसका कानून पहले ही बना चुका है. [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा. अनुच्छेद २५(२)]. जजों ने मानवता के हत्यारों जेहोवा व अल्लाह को ईश्वर घोषित कर रखा है. कुरान व बाइबल को धर्मपुस्तक घोषित कर रखा है. ईमाम के लिए आप काफ़िर हैं. इस्लाम है तो काफ़िर नही. हम आप के लिए लड़ रहें हैं और आप लोग अपने सर्वनाश की जड़ मस्जिदों और ईमामों को बचाने के लिए हमें प्रताडित कर रहे हैं. ईश्वर से डरिये.

न्यायपालिका की साख

मनुष्य निर्मित मजहबों को अपराधों के साथ घालमेल कर और स्वयं को शैतानों जेहोवा और अल्लाह का मध्यस्थ बताने वाले धूर्त पैगम्बरों को जजों ने पूज्य बना रखा है. सदाबहार झूठे, देश हत्यारे पाकपिता गाँधी को बाप बना रखा है. हजारों निरपराध नागरिकों की प्रतिदिन हत्याएं, लूट व नारियों का बलात्कार ईमाम, पुरोहित व शासक से धन येंठ कर मीडिया के इस उद्घोषणा के साथ जारी है कि ईसाइयत और इस्लाम शांति और प्रेम के मजहब हैं. कुरान गैर-मुसलमान को अपराधी मानता है और बाइबल गैर-ईसाई को. किसी को इस बात की लज्जा नहीं है कि उसका शासक व पैगम्बर खूनी, शांति का शत्रु, लुटेरा व नारियों के बलात्कार का समर्थक है. आर्थिक ठगिनी प्रतिभा और जेसुइट सोनिया उर्फ एंटोनिया माइनो सत्ता के शिखर पर बैठी हैं. हद तो यहाँ तक आ पहुंची है कि किसी को भी कुरान व बाइबल के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का अधिकार न इस्लाम (कुरान ५:१०१-१०२) व ईसाइयत देते हैं, न लोकतंत्र (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६) और न न्यायपालिका (एआईआर, कलकत्ता, १९८५, प१०४). जो सबके गरिमा का हनन करते हैं, उन ईमामों के गरिमा की रक्षा के लिए, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २७ का उल्लंघन कर वेतन देने का आदेश न्यायपालिका ने ही पारित किया है. (एआईआर, एससी, १९९३, प० २०८६) यानी अजान प्रायोजित व संरक्षित है. मै आप लोगों की आत्मघाती विवशता में मानव जाति का विनाश देख रहा हूँ.

जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान व विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}. क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर मुसलमान और ईसाई को जजों सहित जनसेवकों व मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का ईसाइयत और इस्लाम को असीमित मौलिक अधिकार देता है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन जज, जनसेवक और जनता राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं. जजों को नाबदान के चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए.

राज्यपाल भूमाफिया, भ्रष्ट और आतंकवादी हैं. जज दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अंतर्गत राज्यपालों द्वारा निर्देशित होते हैं. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने गोरखपुर स्थित हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल के स्मारक की ३.३ एकड़ भूमि ३३ करोड़ रुपयों में व्यापारियों के हाथ बेच दी. जिसके बलिदान के कारण राज्यपाल बना, जब उसे ही नहीं छोड़ा, तो किसे छोडेगा? अब राज्यपाल बनवारी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अंतर्गत मुख्यमंत्री मायावती को संरक्षण दे रहा है. मायावती इंजीनियरों को कत्ल करवा रही है और जन्मदिन पर नोटों की माला पहन रही है. प्रदेश को लूट रही है, हिस्सा राज्यपाल बनवारी और सोनिया को दे रही है.  जज न्याय के नाम पर अन्याय करते हैं. ‘सत्यमेव जयते’ को पीछे धकेल कर, काला लबादा पहन कर, जिस पर कोई दाग नहीं लग सकता, विजय को जजों ने गले में उल्टा लटका रखा है. यानी जज तो न्याय कर ही नहीं सकते! जजों ने अपने जहरीले दांत तो उसी दिन दिखा दिए थे, जिस दिन जजों ने नागरिकों को प्राप्त संपत्ति के मौलिक अधिकार को लूटा जाना न्याय माना था. (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८)

न्यायपालिका भ्रष्टाचार, ठगी, शोषण, उत्पीड़न, कानूनी छल, जालसाजी, बेईमानी आदि का संगठित तंत्र है. जजों को न्याय के लिए नहीं, अपितु जनसेवकों द्वारा एन केन प्रकारेण जनता से लूटी गई सम्पत्तियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३००(अ) के अधीन बचाने के लिए नियुक्त किया जाता है.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

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