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Hindi Manifesto

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यदि आप के पास आत्म रक्षा के लिए समय हो, तो हमारी निम्नलिखित वेबसाइट पढ़ें. अन्यथा मिटने के लिए तैयार रहें,

हमारी घोषणा

http://www.aryavrt.com/Home/hindi-manifesto

धर्मएव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतः

तस्माद्धर्मो न हन्तब्यो मानो धर्मो ह्तोऽवधीत. (मनु स्मृति ८:१५)

लक्ष्मी के हैं चार सुत, धर्म, अग्नि, नृप, चोर.

जेठे का निरादर करो, शेष करें भंड़ फोड़.

सृष्टि धर्म पर टिकी है और धर्म वेदों पर. वेदों को  चरवाहों के गीत बताने वाली सोनिया आप को कत्ल करने (बाइबल, लूका १९:२७), आप का मांस खाने और लहू पीने के लिए (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से असीमित मौलिक अधिकार प्राप्त कर, सत्ता के शिखर पर बैठी, अपने द्वारा मनोनीत राष्ट्रपति प्रतिभा, प्रधान मंत्री मनमोहन, सभी राज्यपालों और जजों के माध्यम से आप के वैदिक सनातन धर्म को मिटा रही है. 

संघ परिवार हमारे राम राज्य को अतिवादी और आतंकवादी मानता है और मुस्लिम परस्त है. अतएव मानव जाति का शत्रु है. सोनिया को ईसा का राज्य स्थापित करना है. हमसे पाकपिता गाँधी ने स्व(अपना)तन्त्रता और रामराज्य का वादा किया है. अमेरिकीभारतीय और संयुक्त राष्ट्र संघ का सार्वभौमिक मानवाधिकार का घोषणापत्र हमे उपासना की आजादी का वचन देते है. हमें अल्लाह के उपासना की दासता और ईसा का रोम राज्य स्वीकार करने के लिए विवश किया जा रहा है. लेकिन हमें ईसा के रोम राज्य में रहने के लिए विवश नहीं किया जा सकता. मस्जिद गिराना गैर-मुसलमान का कानूनी अधिकार है. जो भी ईसाइयत और इस्लाम का संरक्षक है, मानव जाति का शत्रु है.

गीदड़ कौन है? क्या मै? या भारत के नागरिक? निर्णय करके बताइयेगा. आप की मुझ पर कृपा होगी.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) जाति हिंसक, बलात्कारी व दासता पोषक है. देखें:-

अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण- "२९(१)- भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाये रखने का अधिकार होगा." भारतीय संविधान भाग ३ मौलिक अधिकार.

हर मुसलमान व ईसाई खूनी है. सोनिया कैथोलिक ईसाई है. धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाने वाले को कत्ल करने की बाइबल की आज्ञा है. (व्यवस्था विवरण, १३:६-११). व धर्मपरिवर्तन करने वाले को कत्ल करने की कुरान की आज्ञा है. (कुरान ४:८९). २०११ वर्ष पूर्व ईसाई नहीं थे. न १४३१ वर्ष पूर्व मुसलमान ही थे. अतएव धर्मत्यागी सोनिया व हामिद को उनके ही मजहब के अनुसार कत्ल करने का हमे भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त अधिकार है. क्यों कि बाइबल, लूका १९:२७ के ईसा के आदेश से सोनिया हमे कत्ल करेगी और कुरान २१:९८ के आदेश से हामिद अंसारी कत्ल करेगा. इनसे अपनी रक्षा का हमारे पास और कोई मार्ग नहीं है.

हमारे पूर्वजों से भूल हुई है. हमारे पूर्वजों ने ईसाइयत और इस्लाम की हठधर्मी को ईसाइयों व मुसलमानों पर लागू कर उनको कत्ल नहीं किया. हम अपने पूर्वजों की गलती को सुधारना चाहते हैं. हमें आप के सहयोग की नितांत आवश्यकता है. आप से अनुरोध है कि बहुत हो चुका, असीमानंद के पीछे पड़ने के स्थान पर सोनिया से पूछिए, कि मात्र कश्मीर में १९९२ में तोड़े गए १०८ मंदिरों की जांच कौन करेगा?

सूचना के अधिकार के अधीन भारत सरकार ने मुझे बताया है कि हमें वैदिक सनातन धर्म को बनाये रखने का कोई अधिकार नहीं है.

http://www.aryavrt.com/no-right-to-life

 

भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने और बनाये रखने की, जजों ने शपथ ली है, से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता हैदेखें:-

 

"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न 

हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग). जिन्हें देशवैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए-हमारी सहायता करें.

और ध्यान से पढ़ लीजिए. सरकार जान माल की रक्षा के लिए है, जान लेने और लूटने के लिए नहीं. गद्दाफी के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय 

पुलिस वारंट जारी कर चुकी है. थोमस त्यागपत्र दे चुके हैं. सहयोग दीजिए और हम सोनिया को बंदी बना लेंगे. आमेर का खजाना 

देश में वापस आ जायेगा. अर्जी मेरी मर्जी आप की.

ईसाइयत और इस्लाम ने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, उन्होंने वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया. लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए. भारतीय संविधान का संकलन वैदिक सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को मिटाने के लिए हुआ है. ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया. अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है. जिन्हें देश, वैदिक सनातन धर्म और सम्मान चाहिए - हमारी सहायता करें.

जी हाँ! हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोग मस्जिदें नहीं रहने देंगे. हमने बाबरी ढांचा गिराया है. हम ईसाइयत और इस्लाम के विरोधी हैं. क्यों कि मस्जिदों से हमारे वैदिक सनातन धर्म का और ईश्वर कादंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन सरकार द्वारा दिए गए संरक्षण मेंईमामों द्वारा अपमान किया जाता हैमात्र मुहम्मद के कार्टून बना देने सेईशनिंदा के अपराध में कत्ल करने वाले मुसलमानों द्वाराईश्वर का अपमान कराने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं. ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करेंहमसे उपासना की आजादी का वादा किया गया हैईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें?

चीन के युद्ध विशेषज्ञ ­­सन चू ने कहा है शत्रु की रणनीति जानो, तुम पराजित नहीं हो सकते और बिना युद्ध लड़े ही शत्रु को शक्तिहीन और पराजित कर वश में कर लेना सर्वोत्तम है|  ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया का हर लोकसेवक बिना लड़े ही वीर्यहीन, पराजित दास हो कर अपने ही सर्वनाश का उपकरण बन गया है| लोकसेवक अपनी ही सन्ततियों और वैदिक सनातन संस्कृति को मिटाने के लिए नियुक्त किये गए हैं| पराधीन लोकसेवक बेबस हैं| एक बार बाला सोनिया ने, निर्विरोध, पूरे मानव जाति को वीर्यहीन कर, सबके प्राणों को संकट में डाल कर, अपने अधीन कर रखा है|

मैकाले ने निःशुल्क ब्रह्मचर्य के शिक्षा केंद्र गुरुकुलों को मिटाकर, किसान द्वारा सांड़ को बैल बनाकर दास के रूप में उपयोग करने की भांति, महँगी वीर्यहीन करने वाली यौनशिक्षा थोपकर मानवमात्र को अशक्त तो सन १८३५ के बाद ही कर दिया| २६ जनवरी, १९५० से, माउन्टबेटन ने, इंद्र के मेनका की भांति, अपनी पत्नी एडविना को नेहरू व जिन्ना को सौंप कर, ब्रिटिश उपनिवेश इंडिया पर मृत्यु के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान को लादकर आप को अशक्त और पराजित कर रखा है| आप से आप की अपनी ही धरती छीन कर ब्रिटिश उपनिवेश बना लिया और आप जानते तक नहीं! मजहब के आधार पर पुनः दो भाग कर इंडिया और पाकिस्तान बना दिया| (भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७). (पहले आजादी तो लीजिये|) माउन्टबेटन को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई| उसने मौत के फंदे व परभक्षी भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करा कर सदा सदा के लिए आप की धरती को छीन कर संयुक्त रूप से हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी दास मुसलमानों और ईसाइयों को सौंप दिया| राष्ट्रपति और राज्यपाल वैदिक सनातन संस्कृति को समूल नष्ट करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ द्वारा ईसाइयत और इस्लाम का परिरक्षण {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६}, संरक्षण {अल्पसंख्यक आयोग, मुस्लिम निजी कानून व वक्फ} और प्रतिरक्षण {अज़ान और मस्जिद की प्रतिरक्षा, मदरसों, उर्दू शिक्षकों, मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईशनिंदा व काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा देने के बदले वेतन और हज अनुदान} करने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६० व १५९ के अधीन विवश कर दिए गये हैं|

जो उपलब्धि इस्लाम ई० स० ७१२ से ई० स० १८३५ तक अर्जित कर सका, गुरुकुल मिटा कर उससे अधिक ईसाइयत ने मात्र ई० स० १८३५ से ई० स० १९०५ के बीच अर्जित कर लिया| सोनिया को परेशानी यह है कि हम वैदिक सनातन धर्म के अनुयायी बेटी (बाइबल १, कोरिन्थिंस :३६) से विवाह नहीं करते| कुमारी माताओं को संरक्षण और सम्मान नहीं देते| हमारा ईश्वर जारज(जार्ज) और प्रेत नहीं है| ईसाइयों का ईसा स्वयं जारज(जार्ज) है और उस ने प्रत्येक ईसाई परिवार को वैश्यालय बना दिया है| कुमारी माताएं प्रायः प्रत्येक ईसाई घरों में मिलती हैं| जारज(जार्ज) हमारे लिए अपमानजनक सम्बोधन हो सकता है, लेकिन अंग्रेजों का शासक परिवार सम्मानित जारज(जार्ज) है| इतना ही नहीं ईसाइयों का मुक्तिदाता ईसा ही जारज(जार्ज) व पवित्र? प्रेत है| हमारे इंडिया में ईसाई घरों में भी कुमारी माताएं नहीं मिलतीं| हमारी कन्याएं १३ वर्ष से भी कम आयु में बिना विवाह गर्भवती नहीं होतीं| हमारे यहाँ विद्यालयों में गर्भ निरोधक गोलियाँ नहीं बांटी जाती| आप की कन्या को बिना विवाह बच्चे पैदा करने के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र संघ कानून पहले ही बना चुका है| [मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा| अनुच्छेद २५()]. विवाह या बिना विवाह सभी जच्चे-बच्चे को समान सामाजिक सुरक्षा प्रदान होगी|”]. जजों ने सहजीवन (बिना विवाह यौन सम्बन्ध) और सगोत्रीय विवाह (भाई-बहन यौन सम्बन्ध) को कानूनी मान्यता दे दी है| जजों की कृपा से आप की कन्याएं मदिरालयों में दारू पीने और नाच घरों में नाचने के लिए स्वतन्त्र हैं| उज्ज्वला - नारायण दत्त तिवारी और आरुषि - हेमराज में जजों के फैसलों ने आने वाले समाज की दिशा निर्धारित कर दी है| आप वैश्यावृत्ति से अपनी नारियों को बचा न पाएंगे| शीघ्र ही आप के घरों में कुमारी माएं उपलब्ध होंगी| सोनिया के सत्ता में आने के बाद सन २००५ से तीन प्रदेशों केरल, गुजरात और राजस्थान में स्कूलों में यौन शिक्षा लागू हो गई है| शीघ्र ही अमेरिका की भांति इंडिया के स्कूलों में गर्भ निरोधक गोलियां बांटी जाएँगी|

सोनिया अम्बानी आदि को लूटने के लिए एफडीआई लागू कर चुकी है|

मस्जिदों से अज़ान द्वारा ईमाम ५ समय, नियमित रूप से, पूरे विश्व में, प्रतिदिन निर्विरोध अन्धाधुन्ध काफिरों पर इस्लामी आक्रमण करते हैं। ईमाम क्या प्रचारित करते हैं, को जानने के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

अधीन रखने के लिए अधिनियम

इस्लाम द्वारा अपमानित होकर भी कोई विरोध न कर सके और मुसलमानों को काफिरों को कत्ल करने की और विश्व में सरियत लागू करने यानी वैदिक सनातन संस्कृति को निर्मूल करने की शिक्षा मिलती रहे – यह सुनिश्चित करने के लिए इंडिया में ई०स० १८६० में भारतीय  दंड संहिता की धाराओं १५३ व २९५ को लागू किया गया था| गहन अध्ययन से पता चलता है कि इन धाराओं का संकलन बलबा रोकने के लिए या किसी की धार्मिक भावना को आहत होने से रोकने के लिए नहीं, जैसा कि बनावटी तौर पर धाराओं में बताया गया है, बल्कि वैदिक सनातन संस्कृति के अनुयायियों को लगातार अपमानित कराने के लिए किया गया है| नागरिक की भावनाओं से इन धाराओं का कोई सरोकार नहीं है| क्यों कि इन धाराओं के अंतर्गत किये अपराध राज्य के विरुद्ध अपराध हैं| क्यों कि इन धाराओं के अपराध में अभियोग चलाने का अधिकार दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश में से किसी एक को दिया गया है| नागरिक क्या पुलिस और जज भी असहाय हैं| मस्जिदों से अज़ान और खुत्बों द्वारा काफिरों के विरुद्ध जो भी कहा जाता है, वह सब कुछ उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत अपराध ही है, जो मस्जिदों या ईमामों पर कभी भी लागू नहीं किया गया| उपरोक्त धाराओं का संकलन इसलिए किया गया है कि ज्यों ही किसी नागरिक का स्वाभिमान जग जाए और वह विरोध कर बैठे, जैसा कि मैं १९९१ से करता आ रहा हूँ, तो उसको कुचल दिया जाये - ताकि लोग भयवश आतताई इस्लाम का विरोध न कर सकें और वैदिक सनातन संस्कृति को समाप्त कर दिया जाये| यही कारण है कि किसी वाइसराय, राष्ट्रपति, राज्यपाल ने, ई०स० १८६० से आज तक कभी भी किसी ईमाम पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलवाने का साहस नहीं किया – जब कि यह अपमान स्वयं तब के वाइसराय जो अब राष्ट्रपति कहे जाते हैं, राज्यपाल और जिलाधीश का भी होता रहा है|

हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के मस्जिद विध्वंसक लोग हैं| हम लोग अलग मिटटी के बने हैं| वस्तुतः हम ने ज्ञान के वृक्ष का फल खा लिया है| (कुरान :३५). हमारे लिए मूर्खों के वैश्यालय मदिरालय नामक स्वर्ग का दरवाजा सदा के लिए बंद हो चुका है| हमें ज्ञात हो गया है कि भारतीय संविधान वैदिक सनातन धर्म को मिटाने और मानव जाति को दास बनाने के लिए संकलित किया गया है| हम अल्लाह को ईश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं| अज़ान नमाज को पूजा मानने के लिए तैयार नहीं हैं| हम अज़ान का विरोध कर रहेमस्जिद, जहां से हमारे ईश्वर की निंदा की जाती है और काफिरों को कत्ल करने की शिक्षा दी जाती है, को नष्ट कर रहे हैं| आइये इस धर्म युद्ध में हमारा साथ दीजिए| अपने पर नहीं तो अपने दुधमुहों और अपनी नारियों पर तरस खाइए| (कुरान २३:६). हम जो भी कर रहे हैं, भारतीय  दंड संहिता की धारा १०२ से प्राप्त प्राइवेट प्रतिरक्षा में कर रहे हैं| जो भी हमारे विरोधी हैं, मानवता के शत्रु हैं|

जी हाँ हम मस्जिद नहीं रहने देना चाहते क्यों कि यहाँ काफिरों के इष्टदेवों की ईशनिंदा की जाती है और मानव मात्र को ईश्वर से अलग कर दास बना दिया जाता है| काफ़िर को कत्ल करने अथवा वीर्यहीन हो कर दास बनने के लिए विवश करने के लिए शिक्षित किया जाता है|

लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ इंडिया के प्रत्येक नागरिक को प्राइवेट प्रतिरक्षा का कानूनी अधिकार देती है और प्राइवेट प्रतिरक्षा में किया गया कोई कार्य भारतीय दंड संहिता की धारा ९६ के अनुसार अपराध नहीं है| फिर भी दंड का अधिकार राज्य के पास होता है| आर्यावर्त सरकार की स्थापना नागरिक के जान-माल के रक्षा के लिए की गई है| सोनिया का रोम राज्य न तो नागरिक को जीने का अधिकार देता है {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और न सम्पत्ति और उत्पादन के साधन रखने का| {भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग)}. यदि नागरिक दासता की बेड़ियों से मुक्ति चाहें तो भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७ व भारतीय संविधान के अनुच्छेद ६ (ब)(।।) को निरस्त करने में आर्यावर्त सरकार की सहायता करें| नमो यह कार्य नहीं कर सकते|

आतताई ईसाइयत और इस्लाम को संरक्षण देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) की भारतीय संविधान के अनुच्छेदों ६० व १५९ के अधीन शपथ लेकर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन सोनिया के लिए लूट, हत्या और बलात्कार के संरक्षण हेतु चाकरी करने वाली प्रतिभा, प्रदेशों के राज्यपाल और भारतीय संविधान को बनाये रखने की शपथ लेने वाले भ्रष्ट जज वैदिक सनातन धर्म और मानव जाति के शत्रु हैं.

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है. सोनिया के मनोनीत राज्यपालों ने अपनी नारियां, सम्पत्ति और जीवन ईसाइयों और मुसलमानों को सौँप दिया है. 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से लोकसेवकों की नियुक्ति जनता को लूटने के लिए की जाती है. लोकसेवक लोक यानी जनता को लूटता तो है, लेकिन कुत्ते की हड्डी की भांति उस लूट का उपभोग नहीं कर पाता. क्यों कि लूट को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ से नियंत्रित किया गया है. जो लोकसेवक सोनिया को हिस्सा नहीं देता, उसे सोनिया द्वारा जेल भेजवा दिया जाता है.

क्यों कि यदि  ईसाइयत और इस्लाम धरती पर रहेंगे तो कोई मंदिर नहीं बच सकता. किसी नारी की मर्यादा नहीं बच सकती. ईसा अपने लक्ष्य को कभी नहीं छिपाता. केवल उन्हें ही जीवित रहने का अधिकार है, जो ईसा का दास बने. (बाइबल, लूका १९:२७). इस्लाम ने मानव जाति को दो हिस्सों मोमिन और काफ़िर में बाँट रखा है. धरती को भी दो हिस्सों दार उल हर्ब और दार उल इस्लाम में बाँट रखा है. (कुरान ८:३९) काफ़िर को कत्ल करना व दार उल हर्ब भारत को दार उल इस्लाम में बदलना मुसलमानों का मजहबी और संवैधानिक अधिकार है. हम से पाकपिता गाँधी ने राम राज्य का वादा किया था, हम मनुष्य के पुत्र का मांस खाने और लहू पीने (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) वाली सोनिया को सत्ता में नहीं रहने देंगे.

हमारे १२ अधिकारी मक्कामालेगांव मस्जिदों आदि के विष्फोट में बंद हैं. हमने विस्फोट कराए हैं और तब तक कराते रहेंगे, जब तक इस्लाम मिट नहीं जाता.

यह आश्चर्य की बात है कि २६ जनवरी ई० सन १९५० से आज तक इस मानवता के शत्रु भारतीय संविधान का किसी ने विरोध नहीं किया.

किसी गैर मुसलमान को जीने का अधिकार न मुसलमान देता है और न किसी उस व्यक्ति को जीने का अधिकार ईसा देता हैजो ईसा को अपना राजा नहीं मानता. फिर आजादी कैसे मिली यह पूछते ही या तो आप ईश निंदा में कत्ल हो जायेंगे या भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ अथवा २९५ के अधीन जेल में होंगे. जज तो राज्यपाल का बंधुआ मजदूर है. अपराधी वह है, जिसे सोनिया का मातहत राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन अपराधी माने.

प्रेसिडेंट, प्रधानमंत्री और राज्यपाल सोनिया द्वारा मनोनीत मातहत व उपकरण है.

जब संविधान ही लुटेरा हो तो प्रधानमंत्री क्या कर लेगा? संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) व्यक्ति को सम्पत्ति का अधिकार ही नहीं देता. इस अनुच्छेद को कोई भ्रष्टाचारी नहीं मानता. जज व नागरिक दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं १९६ व १९७ के अधीन राज्यपालों द्वारा शासित हैं. अहिंसा, सांप्रदायिक एकता और शांति प्रक्रिया की आड़ में ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं. वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो." (बाइबल, लूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये." (सूरह  अल अनफाल ८:३९). वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है. संघ परिवार आप का शत्रु है, यदि आप को जीवित रहना हो तो हमसे जुड़ें,

जजोंराज्यपालों और लोक सेवकों के पास कोई विकल्प नहीं है. या तो वे स्वयं अपनी मौत स्वीकार करें, अपनी नारियों का अपनी आखों के सामने बलात्कार कराएँ, शासकों की दासता स्वीकार करें व अपनी संस्कृति मिटायें अथवा नौकरी न करें.

http://www.aryavrt.com/Home/aryavrt-in-news

जगतगुरु श्री अमृतानंद के आशीर्वाद से हम आप के लिए लड़ रहे हैं. आप लोग यह युद्ध नहीं लड़ सकते. सरकार ने वर्तमान जामा मस्जिद ईमाम अहमद बुखारी का अभियोग वापस लिया है. अफजल को फांसी नहीं दे पा रही है. हमारे उपरोक्त अभियोग तुरंत वापस लीजिए, अन्यथा ईश्वर आप को कभी क्षमा नहीं करेंगे. अल्लाह ने अमेरिका को भी नहीं छोड़ा आप किस खेत की मूली हैं? या तो हमारे तोड़े गए कश्मीर के १०८ मंदिरों की जांच कीजिये. महरौली के क़ुतुब परिसर के तोड़े गए २७ मंदिरों का निर्माण करिए अथवा हमारे १२ अधिकारियों के अभियोग वापस लीजिए.

आज भी हम एक हारा हुआ युद्ध लड़ रहे हैं. कल्पना कीजिए कि विदेशो में जमा धन और भ्रष्टाचार का सारा धन राजकोष में जमा 

हो जाता है, तो भी आम आदमी को तो राहुल गाँधी के अनुसार सारे राजकोष का बीसवां हिस्सा मिलेगा. बाकी धन तो सोनिया 

और उसके उपकरणों और मातहतों के हिस्से में जायेगा. भ्रष्टाचार तो नहीं मिटेगा!

भ्रष्टाचार मिटाने का अंतिम और एकमात्र उपाय है, भारतीय संविधान के अनुच्छेदों २९(१) व ३९(ग) तथा दंड प्रक्रिया संहिता की 

धारा १९७ को हटाना और अनुच्छेद ३१ का पुनर्जीवन. क्या इसकी मांग मीडिया कर सकती है? जब मांग ही नहीं कर सकती तो 

भ्रष्टाचार के विरोध की बात करना ही बेमानी है.

मै नीचे एक वेबसाइट दे रहा हूँ, इससे आप को सोनिया की सरकार का चरित्र पता चलेगा:-

http://www.aryavrt.com/Home/bhrsht-sonia

 डैनिएल वेबस्टर ने लिखा है, हमको मिटाने के लिए किसी भी राष्ट्र के पास शक्ति नहीं है. हमारा विनाश, यदि आएगा तो वह दूसरे प्रकार से आएगा. वह होगा सरकार के षड्यंत्र के प्रति जनता की लापरवाही. ... मुझे भय है कि जनता अपने उन लोकसेवकों पर अत्यधिक विश्वास करेगी, जिन्हें स्वयं अपने ही सर्वनाश के लिए (सोनिया द्वारा) हथियार बना लिया गया है.

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी वेब साईट http://www.aryavrt.com/azaan पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं. बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और कोई जाँच आयोग. ४ मस्जिदों के विष्फोट के लिए हम भगवा आतंकवादी हैं! १०८ मंदिर तोड़वाने वाली सोनिया सरकार कौन है? क्या इस देश का वकील वर्ग पूछेगा? १५ जनवरी, २००१ को दिए गए लिबड़ा आयोग के शपथपत्र की पत्रकार वार्ता को 

हमने 

नीचे उद्धृत 

यू ट्यूब पर पोस्ट किया हुआ है. 

http://www.youtube.com/watch?v=yutaowqMtd8

 जहां हम आर्य ब्रहम की संततियां हैं, वहीं यह लोग अब्रहमिक संततियां हैं. जहां हम अपने ईश्वर से स्वतंत्रता और बुद्धि के प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं. वहीं यह लोग दास बनने और बनाने के लिए गोलबंद हो कर मस्जिदों से चिल्लाते हैं. हमारा ईश्वर हमें उपासना की स्वतंत्रता देता है, (गीता ७:२१). जब कि अल्लाह का हठधर्म यह है कि जो भी अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की पूजा करे, उसे कत्ल करो. स्वयम अल्लाह के दास बनो और औरों को बनाओ!

आप से आजादी और रामराज्य का वादा किया गया था. आप को सोनिया के रोम राज्य की चाकरी करते लज्जा क्यों नहीं आती? भारतीय संविधान ने आप को उपासना की आजादी दी है. ईमाम मात्र अल्लाह की पूजा करने की मस्जिदों से बांग लगाते हैं. स्वयं अल्लाह के दास हैं. आप को दास बनाने के लिए ललकारते हैं. अपने इष्ट देवता व संस्कृति का अपमान सहन करते आप को लज्जा क्यों नहीं आती?

"पाकिस्तान के शहर कराची में कठोर ईशनिंदा कानून को बनाए रखने के लिए इस रविवार को एक विशाल रैली हुईजिसमें करीब ५० हजार से अधिक लोग शामिल हुए। ये सब नारे लगा रहे थे और हाथ में बैनर व तख्तियां लिए हुए थे,जिन पर लिखा था मुमताज कादरी हत्यारा नहीं हीरो है’, ‘हम उसके साहस को सलाम करते हैं’, आदि आदि। इस रैली में पाकिस्तान के सभी प्रमुख धार्मिक पार्टियों व संगठनों ने भाग लिया थाजिनमें उदारपंथी और कट्‌टरपंथी दोनों शामिल थे। दोनों एक स्वर में ईशनिंदा कानून को नरम बनाने के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इस कानून में संशोधन की मांग करने वाले पीपीपी के नेता व पंजाब प्रांत के राज्यपाल सलमान तासीर की हत्या के कुछ दिन बाद ही हुई इस तरह की रैली से पाकिस्तान सरकार घब़डा गयी है। प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने फौरन बयान जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार का ईशनिंदा कानून में संशोधन का कोई इरादा नहीं है।" 

मुहम्मद के कार्टून बनाने पर ईशनिंदा के लिए मौत का फतवा देने वाले सरकारी संरक्षण में अजान द्वारा हमारे ईश्वर का अपमान क्यों करते हैं? ईश निंदा के अपराध में हम मुसलमानों को कत्ल क्यों न करें? हमसे उपासना की आजादी का वादा किया गया है, ईमाम मस्जिदों से, "ला इलाहलिल्लाहू मुहम्मद्दुर रसुल्ल्लाहू" क्यों चिल्लाते हैं? हम अल्लाह के उपासना की दासता क्यों स्वीकार करें? 

हम वैदिक पंथी यह घोषणा करते हैं कि हम अज़ान देने व शहादा द्वारा आरोपित गुलामी को सहन नहीं करेंगे. यह आश्चर्य की बात है कि मुसलमान अज़ान दे कर हमारे ईश्वर का अपमान करते हैं, साम्प्रदायिक शत्रुता फैलाते हैं और उनके अज़ान को तथाकथित हिंदू हितैषी संघ परिवार ईश निंदा ही नहीं मानता.

२६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथ छल हुआ था. संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे. क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ. संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ. फिर हम भारत के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है. इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है. इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है. बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं. इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं.

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया. उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. हमें इसी अपराध के लिए १९४७ से ही दंडित किया जा रहा है. भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है. अनुच्छेद २९(१).का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है.

हर ऊँगली उठाने वाले की चार उँगलियाँ उसकी ओर ही होती हैं. मै गीदड़ न होता तो ४२ बार जेल क्यों जाता? लेकिन मुझे गीदड़ बनाने का उत्तरदायित्व मानव जाति के ऊपर है. मैंने किसी की जेब नहीं काटी. किसी की लड़की नहीं भगाई. किसी को कत्ल नहीं किया. मैं इसलिए लड़ रहा हूँ कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें. मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें. आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ. मैं आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हूँ. और न कुरान व बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करता हूँ. मै भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानता हूँ. जो ऐसा नहीं मानता, वह दया का पात्र है.

यदि मै गलत नहीं हूँ तो आप ने इस्लाम त्याग दिया है. लगता है कि अब आप पछताते हैं.


भवदीय:अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी

 

2011/3/3 Anand Suman Singh <anandsumansingh@rediffmail.com>

SHREE AYODHYA PRASAD JEE TRIPATHI, NAMASTE, AAP MAHAAN HEN, SHER KEE KHAL PEHEN LENE SE GEEDAD SHER NAHIN BAN JAATA, DOOSRON PAR UNGLI UTHANE SE PEHLE YEH BHEE DEKHIYE KI SHESH CHAR UNGLIYAN AAPKI OR HEN, SONIYA JEE GHALAT HEN YA MANMOHAN SINGH JEE YEH NIRNEY KARNE KA ADHIKAR AAPKO KISNE DIYA, ATAL JEE AUR RANJAN BHATTACHARYA KE VISHEY ME AAPKE KYA VICHAR HEN, MARHOOM SHREE PRAMOD MAHAJAN KE VISHEY ME BHEE KUCHCHH LIKHNE KA SAHAS JUTAIYE. AAP TRIPATHI HEN KYA AAPNE TEEN VED ATHVA DARSHAN PADHE HEN KYA. DHANYA HO PRABHOO, AAP DHANYA HO. ANANDSUMAN SINGH

On Thu, 03 Mar 2011 09:42:04 +0530 wrote


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Yours faithfully,

Ayodhya Prasad Tripathi, (Press Secretary)

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