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GNoida bhoomi adhigrahan

Registration Number is : PRSEC/E/2011/11837

Dated: Sunday, July 24, 2011y

Web site: http://helpline.rb.nic.in/

This is a public document. Any one can view the status from the web site by typing the above Registration Number. There is no pass-word.


मुजहना-MUJAHANA weekly

77, Khera Khurd, Delhi-110082 (BHARAT)

R.N.I. REGISTRATION No.68496/97

Price this issue: Rs. 2/- Yearly Rs. 100/-. Life member Rs. 1000/-.

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Mujahana• Bilingual-Weekly• Volume 16 Year 16 ISSUE 30, July 22~ July 28, 2011. Published every Thursday for Manav Raksha Sangh, Registered Trust No 35091 by Ayodhya Prasad Tripathi, at 77, Khera Khurd, Delhi – 110082. ``Phone +91-9868324025.; +(91) 9838577815 . Printed by Ayodhya Prasad Tripathi at 77 Khera Khurd, Delhi-110082. Editor: Ayodhya Prasad Tripathi. Processed on Desk Top Publishing & CYCLOSTYLED by Ayodhya Prasad Tripathi.  Email: aryavrt39@gmail.com; Web site: http://aaryavrt.blogspot.com and http://www.aryavrt.com Muj11W30 DJ 11724y

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जागरण में प्रकाशित समाचार ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण रद्द Jul 19, 04:04 pm पढ़ा.

क्या यह वही इलाहाबाद उच्च न्यायालय है?

भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों व लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है.

जज न्याय करने का अधिकार उसी क्षण खो देते हैं, जिस क्षण वे भारतीय संविधान व विधियों की मर्यादा बनाये रखने की शपथ लेते हैं. {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) व भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८}. क्यों कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१) हर मुसलमान और ईसाई को जजों सहित जनसेवकों व मानव मात्र के नारियों के बलात्कार, लूट, हत्या और वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश का ईसाइयत और इस्लाम को असीमित मौलिक अधिकार देता है. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के अधीन जज, जनसेवक और जनता राज्यपालों के आज्ञाकारी नौकर हैं. जजों को वैसे ही नाचना है, जैसे सोनिया की पुलिस नचाये| जजों को नाबदान के चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए.

राज्यपाल भूमाफिया, भ्रष्ट और आतंकवादी हैं. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने गोरखपुर स्थित हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल के स्मारक की ३.३ एकड़ भूमि ३३ करोड़ रुपयों में व्यापारियों के हाथ बेच दी. जिसके बलिदान के कारण राज्यपाल बना, जब उसे ही नहीं छोड़ा, तो किसे छोडेगा? अब राज्यपाल बनवारी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अंतर्गत मुख्यमंत्री मायावती को संरक्षण दे रहा है. मायावती इंजीनियरों को कत्ल करवा रही है और जन्मदिन पर नोटों की माला पहन रही है. प्रदेश को लूट रही है, हिस्सा राज्यपाल बनवारी और सोनिया को दे रही है.  जज न्याय के नाम पर अन्याय करते हैं. ‘सत्यमेव जयते’ को पीछे धकेल कर, काला लबादा पहन कर, जिस पर कोई दाग नहीं लग सकता, विजय को जजों ने गले में उल्टा लटका रखा है. यानी जज तो न्याय कर ही नहीं सकते!

जजों ने अपने जहरीले दांत तो उसी दिन दिखा दिए थे, जिस दिन जजों ने नागरिकों को प्राप्त संपत्ति के मौलिक अधिकार को लूटा जाना न्याय माना था. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३१ प्रदत्त सम्पत्ति के जिस अधिकार को अँगरेज़ और संविधान सभा के लोग न छीन पाए, उसे भ्रष्ट सांसदों और जजों ने मिल कर लूट लिया और अब तो इस अनुच्छेद को भारतीय संविधान से ही मिटा दिया गया है. इसे कोई भ्रष्टाचार नहीं मानता! (ए आई आर १९५१ एस सी ४५८).

न्यायपालिका भ्रष्टाचार, ठगी, शोषण, उत्पीड़न, कानूनी छल, जालसाजी, बेईमानी आदि का संगठित तंत्र है. जजों को न्याय के लिए नहीं, अपितु जनसेवकों द्वारा एन केन प्रकारेण जनता से लूटी गई सम्पत्तियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३००(अ) के अधीन बचाने के लिए नियुक्त किया जाता है. बदले में जजों को वादकारियों को लूटने की पूरी छूट मिली हुई है.

ग्रेटर नोएडा के किसानों की भूमि मायावती ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३९(ग) से प्राप्त अधिकार से ली है और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन जजों को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. हस्तक्षेप का अधिकार बनवारी के जरिये मात्र सोनिया को है. सोनिया के कहने से ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अंतर्गत मायावाती को संरक्षण राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने दिया और अब बनवारी दे रहा है. सोनिया का मनोनीत राज्यपाल बनवारी मायावती का संरक्षण वापस ले तो मायावती मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की भांति जेल चली जायेगी. जजों की औकात हो तो मेरे नीचे की लिंक में दिए गए अपने ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों का आज भी उत्तर प्रदेश सरकार से पालन करवा के दिखाएँ| मुसलमानों को अल्पसंख्यक का दर्जा समाप्त करने के और भगवद्गीता के आदेशों के मामलों में हमने जजों की औकात देख ली है.

http://www.aryavrt.com/muj11w15c-jan-lokpal

http://www.aryavrt.com/bhrshtachar-kab

सारा ड्रामा सोनिया द्वारा प्रायोजित है, मायावाती ने सोनिया को लूट में पूरा हिस्सा नहीं दिया है. सोनिया जब दस्यु सुन्दरी मायावती और बिल्डरों का खून निचोड़ कर पी लेगी, जिसका सोनिया को {भारतीय संविधान का अनुच्छेद २९(१)} और ईसा से (बाइबल, यूहन्ना ६:५३) आदेश प्राप्त है, तो सब कुछ ठीक हो जायेगा. लूटने के लिए नागरिक, हुतात्मा रामप्रसाद बिस्मिल और हमारे मंदिर हैं ही. ऐसी खूनी और आतंकवादी विदेशी डायन की चाकरी करने में इस देश के नागरिकों को लज्जा क्यों नहीं आती?

भारत में कोई लोकतंत्र नहीं है. भारत में सोनिया के लिए, सोनिया द्वारा चुना गया सोनिया तंत्र है. सर्व विदित है कि प्रेसिडेंट प्रतिभा का मनोनयन सोनिया ने किया. प्रधानमंत्री का मनोनयन सोनिया ने ही किया है. सभी राज्यपालों का मनोनयन सोनिया ही करती है और सभी कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्य मंत्री सोनिया द्वारा मनोनीत हैं. सभी जज दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ व १९७ के द्वारा शासित हैं व सोनिया के कठपुतली हैं. यदि सोनिया को ही देश का सुपर प्रधानमंत्री बनना था तो विक्टोरिया में क्या बुराई थी? एलिजाबेथ में क्या बुराई है? क्यों बहाए हमारे पूर्वजों ने रक्त?

भारतीय दंड संहिता की धारा १०२ ने हमे प्राण रक्षा का अधिकार दिया है. हम इसलिए लड़ रहे हैं कि आप धूर्त पुरोहितों और शासकों के दास न बनें. मुसलमान और ईसाई आप की आँखों के सामने आप की नारियों का बलात्कार न करने पायें. आप के घर न लूट लिए जाएँ और आप कत्ल न कर दिए जाएँ. हम आतताई अल्लाह व जेहोवा को भगवान मानने के लिए तैयार नहीं हैं और न कुरान व बाइबल को धर्म पुस्तक स्वीकार करते हैं. हम भारतीय संविधान, कुरान व बाइबल को मानवता का शत्रु मानते हैं. जो नहीं मानता, वह दया का पात्र है.

जब हमने बाबरी ढांचा गिराया था तो मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड़े गए, जिनमे से ३८ की विधिवत प्राथमिकियां पंजीकृत हैं. जिसका विवरण हमारी पुस्तक 'अजान' के १० वें संलग्नक में उपलब्ध है. इन्हें आप हमारी वेब साईट http://www.aryavrt.com/azaan पर निः शुल्क पढ़ सकते हैं. लेकिन सोनिया के रोम राज्य में मंदिर तोड़ना अपराध नहीं माना जाता! बाबरी विध्वंस के ४९ अभियुक्त बने और १७ वर्षों तक लिब्रहान आयोग जाँच की नौटंकी करता रहा. हमने १५ जनवरी २००१ को शपथपत्र दिया कि ढांचा हमने गिराया है, उसे चुरा लिया. जनता का करोड़ रुपया डकार गया. लेकिन हमारे मंदिरों को तोड़ने वाला कोई अभियुक्त नहीं और कोई जाँच आयोग. ४ मस्जिदों के विष्फोट के लिए हम भगवा आतंकवादी हैं! मात्र कश्मीर में १०८ मंदिर तोड्वाने वाली सोनिया सरकार कौन है? क्या सोनिया बताएगी?

हमने कुरान के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका स० १५|१९९३ प्रस्तुत की थी, जो निरस्त कर दी गई. मैंने पत्रक मुसलमानों भारत छोड़ोऔर ईश्वर अल्लाह कैसे बना?’ प्रकाशित किया और बांटा था. जिनके आधार पर मेरे विरुद्ध थाना रूपनगर, दिल्ली से दो अभियोग क्रमशः ७८/१९९३ व १३७/१९९३ चले थे, जिनमे मुझे ३ जुलाई, १९९७ को दोषमुक्त कर दिया गया. बाइबल, कुरान और भारतीय संविधान का विरोध करने के कारण प्रेस परिषद में अभियोग चला, जिसमें मै दिनांक २५-०२-२००२ को दोषमुक्त हुआ. अभी मेरे विरुद्ध रूपनगर थाने से अभियोग ४४०/१९९६ व ४८४/१९९६ चल रहे हैं. मैंने कानपूर में पाकपिता गाँधी की प्रतिमा तोड़वा कर हुतात्मा श्री नथूराम गोडसे की प्रतिमा लगवाई थी. वह अभियोग १२७/१९९७ थाना रूपनगर, दिल्ली से चल रहा है. इसके अतिरिक्त थाना नरेला दिल्ली से प्राथमिकी स० ४०६/२००३ व १६६/२००६ ईसाइयत और इस्लाम का विरोध करने के कारण अभियोग चल रहा है. मैं अजान के विरोध के कारण चले अभियोग प्राथमिकी स० ११०/२००१ से दिनांक २६ फरवरी, २००५ को और आई एस आई एजेंट बुखारी को बंदी बनाये जाने की मांग के कारण चले अभियोग १०/२००१ से दिनांक ०४-०२-२०१० को आरोप मुक्त हो चुका हूँ.

मानवता को मिटाने की व्यवस्था तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) का संकलन करके २६ नवम्बर, १९४९ को ही पूरी कर ली गई है. आप लोगों की समझ में आये तो ईसाइयत और इस्लाम मिटाने में हमारा सहयोग कीजिए| देश में जिसके अंदर लेशमात्र स्वाभिमान बचा हो, हमसे जुड़े़| आप सहयोग दें तो हम ईसाइयत और इस्लाम को मिटायेंगे.

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी. सूचना सचिव. आर्यावर्त सरकार| भारत

http://in.jagran.yahoo.com/news/national/politics/5_2_8035670.html

ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण रद्द

Jul 19, 04:04 pm

इलाहाबाद। मायावती सरकार को और एक झटका देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा में दो गांवों में करीब 600 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण मंगलवार को रद्द कर दिया।

किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनील अंबावानी और न्यायमूर्ति एस.एस. तिवारी की एक खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर जिले की दादरी तहसील के अंतर्गत पटवारी और देवला गांवों में 589.13 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण को दरकिनार कर दिया। इस भूमि का अधिग्रहण राज्य सरकार द्वारा मार्च, 2008 और मई, 2008 में अधिसूचना के जरिए किया गया था जिसका उद्देश्य दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में रिहायशी इमारतों का निर्माण करना था। हाई कोर्ट के इस आदेश से एक पखवाड़े पहले सुप्रीम कोर्ट ने इलाके में शाहबेरी गांव में राज्य सरकार द्वारा किए गए 156 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि प्राधिकरण लोक हित के नाम पर निजी बिल्डरों को आगे बढ़ा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 6 जुलाई को इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था जिसमें कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा किए गए भूमि अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। प्राधिकरण ने भूमि अधिग्रहण कानून के आपात उपबंध के तहत यह अधिग्रहण किया था। कोर्ट ने साथ ही भूमि किसानों को लौटाने का भी निर्देश दिया था।

प्राधिकरण एवं बिल्डरों ने हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

 



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AyodhyaP Tripathi,
Jul 24, 2011, 6:04 AM
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