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Bhrsht Sonia

भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग) भ्रष्टाचारी है. देखें:-  
"३९(ग)- आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले कि जिससे धन व उत्पादन के साधनों का सर्वसाधारण के लिए अहितकारी संकेन्द्रण न हो;" भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्व. अनुच्छेद ३९(ग).  
उपरोक्त अनुच्छेद के अनुसार जिसके पास भी सम्पत्ति या पूँजी है, वह अपराधी है. टाटा व अम्बानी के पास सम्पत्ति व पूँजी इसलिए है कि वे जनता को लूट कर सोनिया तक हिस्सा पहुंचाते हैं.   
१९७. न्यायाधीशों और लोकसेवकों का अभियोजन- “(१) जब किसी व्यक्ति पर, जो न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट या ऐसा लोकसेवक है या था जिसे सरकार द्वारा या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकेगा, अन्यथा नहीं, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है जिसके बारे में यह अभिकथित हो कि वह उसके द्वारा तब किया गया था जब वह अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्पर्यित था, तब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान - ... सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं; ...”  
भारतीय संविधान, जिसके अनुच्छेद ३९(ग) के संरक्षण, संवर्धन व पोषण की राज्यपालों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद १५९ के अधीन शपथ ले कर, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ द्वारा जो राज्यपाल भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण देने के लिए विवश हैं और जजों ने भी जिस अनुच्छेद ३९(ग) को बनाये रखने की शपथ ली है, (भारतीय संविधान, तीसरी अनुसूची, प्रारूप ४ व ८), से निकृष्ट भ्रष्टाचारी कौन हो सकता है?  

जनता को लूटना जजों और लोकसेवकों का संवैधानिक कर्तव्य है. जज तारीख पर १० रूपये भेंट लेते हैं, इलाहाबाद उच्च न्यायलय का रजिस्ट्रार तारीख देने के लिए ५०० रूपये वसूलता है, चौराहे पर ट्राफिक पुलिस वसूली करता है, जज व लोकसेवक जनता को लूटने के लिए लोकसेवकों को सहयोग देते हैं, ऐसे कार्यों को, अनुच्छेद ३९(ग) के अधीन तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना  जाता जब तक लोकसेवक लूट में सोनिया व उसके मातहतों को हिस्सा देते हैं, उनको दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन सोनिया अपने द्वारा मनोनीत राज्यपालों से संरक्षण दिलवाती है. हिस्सा न मिले तो सोनिया संरक्षण वापस करवा लेती है. अतएव भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहें तो संविधान के उपरोक्त अनुच्छेद ३९(ग) को संविधान से हटाने, अनुच्छेद ३१ को पुनर्जीवित करने और धारा १९७ को भी हटाने में हमारी मदद करें.

सोनिया जनता को लोकसेवकों के माध्यम से लूटती है. इससे भी सम्पत्ति के संकेन्द्रण का संकट बना रहता है. इस संकट पर नियंत्रण के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ का संकलन किया गया है. प्रेसिडेंट व राज्यपालों के माध्यम से उपरोक्त धारा १९७ का नियंत्रण सोनिया के पास है.मुलायम का मतलब समाजवादी दल है और मायावती का मतलब बहुजन समाजवादी दल. दोनों डाकू हैं. दोनों को ही राज्यपाल बनवारी के माध्यम से सोनिया ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन संरक्षण देकर अपने अधीन किया हुआ है. असली अपराधी तो सोनिया है, लेकिन सोनिया को बंदी बनाने का देश में कोई कानून नहीं है. यह शतरंज के शह और मात का खेल है. बनवारी ने मायावती और मुलायम को धमकाया कि अगर सोनिया सरकार पर आंच आई तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ के अधीन दिया गया संरक्षण वापस ले लूँगा. जेल चले जाओगे. 
अतएव दोनों संकट मोचक दल सोनिया की सेवा में हाजिर हो गए हैं.
व्यक्तियों पर अभियोग चलाने से जनता को कुछ नहीं मिलेगा. भ्रष्टाचार की जड़ भारतीय संविधान का अनुच्छेद ३९(ग), अनुच्छेद ३१ से मिला सम्पत्ति का मौलिक अधिकार, जिसे २०-६-१९७९ को मिटाया गया, और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ है. 

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ap tripathi,
Feb 22, 2011, 8:31 PM
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