15August

स्वतंत्रता दिवस?

आप को स्वतंत्रता कभी नहीं मिली! भारतीय संविधान का संकलन एक धोखा है| इंडिया आज भी ब्रिटिश उपनिवेश है| {भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, १९४७, भारतीय संविधान का अनुच्छेद ६(ब)(||)} और राष्ट्रकुल का एक सदस्य भी|

१५ अगस्त का सिलसिला १९४७ से ही चल रहा है| १५ अगस्त, २०१३ को आप एक बार फिर मूर्ख बनाये जायेंगे| १५ अगस्त की पूर्व संध्या पर महामहिम बेचारे प्रणब दा आप को बतायेंगे कि आप को पाकपिता गाँधी ने कैसे स्वतंत्रता, जो न आज तक मिली और न आगे मिलेगी, दिलवाई? अपनी पैत्रिक भूमि, घर, धन, धरती और नारियां इस्लाम के हाथों लुटवा कर और जान बचा कर भागे हुए मनमोहन आप को बतायेंगे कि देश ने कितनी तरक्की की है| वे पहले भी देश को बता चुके हैं कि इंडिया के संसाधनों पर पहला अधिकार खूंखार आतताई इस्लाम के अनुयायियों का है| अलबत्ता, मनमोहन ने यहूदियों की भांति, पाकिस्तान से अपनी लूटी गई सम्पत्ति और धरती की मांग कभी नहीं की, जो अपने पद का उपयोग करते हुए मनमोहन आसानी से कर सकते थे| क्यों नहीं की? आप को स्वतंत्रता कहाँ मिली? यदि आप ने यह पूछने का साहस किया तो भारतीय दंड संहिता की धारा १५३ के अधीन राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अधीन अभियोग चलाने की संस्तुति देकर अपने आज्ञाकारी दास किसी भी जज से आप को तबाह करा देंगे|

क्या आप बतायेंगे?

'मात्र अल्लाह पूज्य है' उपासना की आजादी कैसे है? पुलिस के संरक्षण में अज़ान व नमाज़ द्वारा मुसलमान आप का अपमान और ईशनिंदा क्यों करते हैं?

"परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूं, यहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबल, लूका १९:२७) प्रजातंत्र और आजादी कैसे है?

एक ओर अब्रह्मी संस्कृति के अनुयायी अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणापत्र के लेखक जेफरसन का सिद्धांत है,

"हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है।

और दूसरी ओर वैदिक सनातन संस्कृति का जिसका सिद्धांत है,

“वेदों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य ब्रह्म है| उसको जन्म के साथ ही प्राप्त, वीर्य का सूक्ष्म अंश ब्रह्म सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्व-व्याप्त, वह शक्ति है जिससे सब कुछ, यहाँ तक कि ईश्वर भी उत्पन्न होते हैं। इसका जितना अधिक संचय होगा – मनुष्य उतना ही अधिक शक्तिशाली होगा|”

वीर्य अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का दाता, स्वतंत्रता, परमानंद, आरोग्य, ओज, तेज और स्मृति का जनक है| जो कोई वीर्यक्षरण करता या कराता है, स्वयं का ही नहीं - मानवजाति का भयानक शत्रु है| विशेष विवरण के लिये नीचे की लिंक पर क्लिक करें:-

http://www.aryavrt.com/veerya-1

आप किसको वरीयता देंगे?

एक ओर पैगम्बरों के आदेश और अब्रह्मी संस्कृतियों के विश्वास के अनुसार दास विश्वासियों द्वारा अविश्वासियों को कत्ल कर देना ही अविश्वासियों पर दया करना और स्वर्ग, जहाँ विलासिता की सभी वस्तुएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, प्राप्ति का पक्का उपाय है|

दूसरी ओर वैदिक सनातन धर्म जो किसी भी अन्य धर्म के लिए कोई निहित शत्रुता के बिना एक ऐसी संस्कृति है. जो केवल वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में बात करती है. इसके आचार, मूल्य और नैतिकता सांप्रदायिक नहीं - सार्वभौमिक हैं| वे पूरी मानव जाति के लिए हर समय लागू हैं| इसका दर्शन मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, चीन, अफगानिस्तान और कोरिया में फैल गया था| एक बार अमेरिका में चीन के राजदूत ने कहा, “भारत एक भी सैनिक बाहर भेजे बिना तमाम देशों पर विजय प्राप्त करने वाला दुनिया में एकमात्र देश है"

एकेश्वरवाद - दास बनाने की अनूठी विधि

हमारे पूर्वज स्वतंत्रता के लिए मर मिटे| इसकेविपरीत सबकोदास बनाना व स्वयं दासबनना ईसाइयत (बाइबलउत्पत्ति २:१७) और इस्लाम (कुरान २:३५) के मूर्ख अनुयायियों की फितरत है| एकेश्वरवाद के अनुसंधान का यही कारण है| मूसा एकेश्वरवाद का जनक है| मसीह ईसा और मुहम्मद तो नकलची थे| जेहोवा और अल्लाह से क्रमशः मूसा और मुहम्मद ही मिल सकते हैं| इस प्रकार धूर्त पैगम्बरों ने मानव मात्र को दास बनाने की अनूठी विधि ढूंढ रखी है| यहूदी मूसा का दास है और मुसलमान मुहम्मद का| 

दास के अधिकार नहीं होते| खतने पर अपने शोध के पश्चात १८९१ में प्रकाशित अपने ऐतिहासिक पुस्तक में चिकित्सक पीटर चार्ल्स रेमोंदिनो लिखते हैं कि पराजित शत्रु को पुन्शत्वहीन कर दास के रूप में उपयोग करने के लिए शिश्न के अन्गोच्छेदन या अंडकोष निकाल कर बधिया करने (जैसा कि किसान सांड़ के साथ करता है) से खतना करना कम घातक है| सैतानों मूसा और मुहम्मद ने, किसान के सांड की भांति, यहूदियों व मुसलमानों को दास बनाने के लिए खतना को मजहब से जोड़ दिया है| आप स्वयं विचार करें कि मुहम्मद का अल्लाह ईश्वर है या मनुष्य के अंदर स्थित ईश्वर को निकाल कर सैतान को बसाने का हथियार?

जो दास नहीं बनता उसे पैगम्बर लूट और नारी बलात्कार का लोभ देकर कत्ल कराते हैं| इस प्रकार ईसाइयत और इस्लाम मानव मात्र को दास बनाने का अमोघ अस्त्र है, पैगम्बर तो रहे नहीं-उत्तराधिकार शासकों (सोनिया को) और पुरोहितों को सौँप गए हैं| अल्पसंख्यक शब्द ही धोखा है| ईसाई व मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं, क्रमशः विश्व की पहली व दूसरी आबादी हैं| ईसा १० करोड़ से अधिक अमेरिकी लाल भारतीयों और उनकी माया संस्कृति को निगल गया| अब ईसा की भेंड़ सोनिया काले भारतीयों और उनकी वैदिक संस्कृति को निगल रही है| आप लोग कुछ नहीं कर पा रहे हैं| यद्यपि आप लोगों के पास प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधीन सोनिया को मार डालने का कानूनी अधिकार है| (भारतीय दंड संहिता की धाराएँ ९७, १०२ व १०५). भारतीय संविधान, कुरान और बाइबल से मानव जाति के, डायनासोर की भांति, लुप्त हो जाने का भय है| ईसाइयत/इस्लाम की जालसाज़ी मानव मात्र को दास बनाने अन्यथा कत्ल करने के लिए की गई है! लेकिन हिंसा का एकाधिकार राज्य के पास होता है| आप को अपने व मानव जाति के प्राण रक्षा का अधिकार है| इसीलिए आर्यावर्त सरकार की स्थापना की गई है| आप लोग विकल्प हीन हैं| मानव जाति की रक्षा के लिए आर्यावर्त सरकार की सहायता करें, अथवा मिट जाएँ|

अंग्रेजों की कांग्रेस ने भारतीय संविधान का संकलन कर जिन विश्व की सर्वाधिक आबादी ईसाइयत और दूसरी सर्वाधिक आबादी इस्लाम को वैदिक सनातन धर्म को मिटाने के लिए इंडिया में रोका है, उन्होंने जहां भी आक्रमण या घुसपैठ की, वहाँ की मूल संस्कृति को नष्ट कर दिया| लक्ष्य प्राप्ति में भले ही शताब्दियाँ लग जाएँ, ईसाइयत और इस्लाम आज तक विफल नहीं हुए| भारतीय संविधान के अनुच्छेद २९(१) से अधिकार प्राप्त कर, (यह अनुच्छेद दोनों को पूजा स्थल तोड़ने, हत्या, लूट, धर्मान्तरण और नारी बलात्कार का असीमित मौलिक अधिकार देता है) ईसाइयत व इस्लाम मिशन व जिहाद की हठधर्मिता के बल पर वैदिक संस्कृति को मिटा रहे हैं| मंदिर तोड़ रहे हैं| चढ़ावों को लूट रहे हैं| वे हठधर्मी सिद्धांत हैं, "परन्तु मेरे उन शत्रुओं को जो नहीं चाहते कि मै उन पर राज्य करूंयहाँ लाओ और मेरे सामने घात करो|" (बाइबललूका १९:२७) और "और तुम उनसे (काफिरों से) लड़ो यहाँ तक कि फितना (अल्लाह के अतिरिक्त अन्य देवता की उपासना)  बाकी न रहे और दीन (मजहब) पूरा का पूरा (यानी सारी दुनियां में) अल्लाह के लिए हो जाये|" (कुरानसूरह  अल अनफाल ८:३९). (कुरान, बनी इस्राएल १७:८१ व कुरानसूरह अल-अम्बिया २१:५८). (बाइबलव्यवस्था विवरण १२:१-३). स्पष्टतः वैदिक सनातन धर्म मिटाना दोनों का घोषित कार्यक्रम है|

आप अकेले यह युद्ध नहीं लड़ सकते| धरती पर एक से बढ़ कर एक त्रिकालदर्शी, योद्धा, चिन्तक, समाज सुधारक और बुद्धिमान पैदा हुए, लेकिन, मालेगांव व अन्य मस्जिदों पर विष्फोट के अभियुक्त और जेल में निरुद्ध, जगतगुरु श्री अमृतानंद के अतिरिक्त किसी ने भी ईसाइयत और इस्लाम का विरोध नहीं किया| उनके आशीर्वाद से आर्यावर्त सरकार आप के लिए लड़ रही है| क्या आप आर्यावर्त सरकार की सहायता करेंगे, ताकि सोनिया आप की आँखों के सामने आप की सम्पत्ति और घर न लूट ले, आप लोगों का मांस न खाये और रक्त न पिए| (बाइबल, यूहन्ना ६:५३), आप के दुधमुंहे आप की आँखों के सामने पटक कर न मार डाले जाएँ, नारियों का सोनिया बलात्कार न करा पाए और आप कत्ल न हों? (बाइबल, याशयाह १३:१६).

२६ नवम्बर १९४९ को हमारे साथ छल हुआ था| संविधान सभा के लोग अंग्रेजों के सत्ता हस्तांतरण के बाद जनता के चुने प्रतिनिधि नहीं थे| क्यों कि पहला चुनाव ही १९५२ में हुआ| संविधान का संकलन कर उसे जनता के सामने नहीं रखा गया और न जनमत संग्रह हुआ| फिर हम इंडिया के लोगों ने संविधान को आत्मार्पित कैसे किया? हम अभिनव भारत और आर्यावर्त के लोगों ने यही पूछने का दुस्साहस किया है| इससे बड़ा दुस्साहस यह किया है कि हमने आर्यावर्त सरकार का गठन कर लिया है| इस प्रकार हमने सोनिया के रोम राज्य को चुनौती दी है| बंदा बैरागी, सिक्खों के दसो गुरुओं, गुरु गोविन्द सिंह के पुत्रों, भाई सती और मती दास की भांति हम सोनिया द्वारा सताए जा रहे हैं| (बाइबल, लूका १९:२७). इससे भी भयानक बात यह है कि आज हमें तब की भांति मुसलमान नहीं सता रहे, बल्कि वे सता रहे हैं, जिनकी जान, संस्कृति, सम्पत्ति और नारियों की रक्षा के लिए हम लड़ रहे हैं| जो लोग हमें तबाह कर रहे हैं, वे यह याद रखें कि वे न स्वयं जीवित बचेंगे और न मानव जाति|

हमारे पूर्वजों ने ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं किया| उलटे १८५७ से ही ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया| हम अभिनव भारत और आर्यावर्त सरकार के लोग भी ईसा को अपना राजा स्वीकार नहीं करते| भारतीय संविधान, कुरान, बाइबल, ईसाइयत, चर्च, इस्लाम, अजान और मस्जिद विरोधी हमारे अधिकारी इस समय विभिन्न जेलों में निरुद्ध हैं| हमने बाबरी ढांचा गिराया है| काबा हमारी है| अजान गाली है| कुरान सारी दुनियां में फुंक रही है| हम अजान नहीं होने देंगे| इंडिया में एक भी मस्जिद नहीं रहने देंगे| हमें आत्म रक्षा के अधिकार के प्रयोग के लिए दंडित किया जा रहा है| भारतीय संविधान का संकलन षड्यंत्र है| अनुच्छेद २९() का संकलन आर्य यानी तथाकथित हिन्दू जाति का नरसंहार करने के लिए किया गया है| भारतीय संविधान ने राज्यपालों, जजों लोकसेवकों की पद, प्रभुता और पेट को वैदिक सनातन धर्म के समूल नाश से जोड़ दिया है|

संविधान के अनुच्छेद २९() का संकलन कर ईसाइयत और इस्लाम को अपने लूट, हत्या, बलात्कार और धर्मान्तरण की संस्कृति को बनाये रखने का मौलिक अधिकार दिया गया है| इसके अतिरिक्त राज्यपालों और प्रेसिडेंट को भारतीय संविधान के संरक्षणसंवर्धन पोषण का अनुच्छेदों १५९ ६० के अंतर्गत भार सौंपा गया है| लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९७ बनाई गई है| जो भी लूट अजान का विरोध करे उसे उत्पीड़ित करने की भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १९६ के अंतर्गत व्यवस्था की गई है| इसलिए धरती पर अजान होना और मस्जिद रहना गैर-मुसलमान के गले पर रखी हुई तलवार है|

अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी (सूचना सचिव)

 

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